मुख्यमंत्री ने सुनी किसानों की समस्याएं, लॉन में बैठकर लिया गन्ने का स्वाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हरिद्वार जनपद से आए गन्ना किसानों ने मुलाकात की। किसानों ने पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना का समर्थन मूल्य घोषित करने सहित अन्य मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर किसानों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को गन्ना भी दिया, मुख्यमंत्री ने किसानों के साथ ही धूप के बीच लॉन में ही बैठकर ही गन्ना का स्वाद लिया, साथ ही किसानों की मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया।

विधायक आदेश चौहान और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद के नेतृत्व में मिले गन्ना किसानों ने रायसी – बालावाली पुल तक तटबंद का निर्माण, इकबालपुर झबरेड़ा भगवानपुर क्षेत्र में शुगर मिल स्थापित किए जाने, इकबालपुर झबरेड़ा क्षेत्र में सिंचाई नहर निर्माण और डोईवाला मिल पर किसानों का बकाया भुगतान कराने की मांग उठाई। किसानों ने पेराई सत्र 2025-26 के लिए राज्य परामर्शित मूल्य घोषित करने की मांग उठाई। मुख्यमंत्री ने लॉन में बैठकर ही किसानों की मांगों को सुनते हुए, गन्ना मूल्य सहित अन्य सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने किसानों के साथ जमीन पर बैठकर गन्ना का स्वाद भी लिया। इस मौके पर विधायक प्रदीप बत्रा जिला पंचायत अध्यक्ष किरन चौधरी के साथ ही पूर्व विधायक संजय गुप्ता भी शामिल हुए।

सीएम ने किया उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निकार कर्मकार कल्याण बोर्ड में मनरेगा कर्मकारों के पंजीकरण का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निकार कर्मकार कल्याण बोर्ड में मनरेगा कर्मकारों के पंजीकरण का विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति के विकास को केंद्र में रखते हुए कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऑनलाइन माध्यम से पंजीकरण का विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस पंजीकरण से मनरेगा श्रमिकों को उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निकार कर्मकार कल्याण बोर्ड की समस्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से राज्य सरकार भी समाज के अंतिम व्यक्ति को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार के अवसर उपलब्ध कराते हुए, उन्हें हर तरह से सक्षम बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मनरेगा के तहत 16.3 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं, जिसमें से 9.5 लाख श्रमिक एक्टिव हैं, इसमें से वर्ष में न्यूनतम 90 दिन काम करने वाले श्रमिक अब उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निकार कर्मकार कल्याण बोर्ड की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बोर्ड में पंजीकृत श्रमिकों की संख्या 5.35 लाख है, मनरेगा श्रमिकों के योजना से जुड़ने पर बोर्ड की सेवाओं का लाभ लाखों अन्य श्रमिकों तक पहुंच सकेगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में जहां श्रमिकों का कल्याण हो वहीं उद्योगों और निवेशकों को भी प्रोत्साहन दिया जाए। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में सकारात्मक वातावरण बनाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अकेले खनन क्षेत्र लाखों लोगों को कई तरह से रोजगार देता है, पहले खनन को लेकर नकारात्मक धारणा रहती थी, लेकिन सरकार ने पारदर्शी नीतियों ने इस धारणा को तोड़ने का काम किया है, यही कारण है कि पहले खनन राजस्व सिर्फ 400 करोड़ रुपए का था जो अब बढ़कर 12 सौ करोड़ रुपए पहुंच गया है। खनन क्षेत्र में किए गए सुधारों को देखते हुए केंद्र सरकार भी राज्य को 200 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान कर चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर विशेष जोर देते हैं, इसी क्रम में सरकार उद्योगों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम जैसी सुविधा दे रही है। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को अनावश्यक औपचारिकताओं में ना उलझाया जाए।

इस मौके पर सचिव श्रीधर बाबू अदांकी ने बताया कि श्रम विभाग ओर ग्राम्य विकास विभाग के संयुक्त प्रयासों से इस योजना को संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के निर्देश के क्रम में श्रमिकों का पंजीकरण ऑनलाइन पोर्टल पर किया जा रहा है, अब विकास खंड स्तर पर मनरेगा श्रमिकों का पोर्टल पर पंजीकरण किया जाएगा। संचालन करते हुए श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने कहा कि अब मनरेगा श्रमिक, बोर्ड में पंजीकृत अन्य श्रमिकों की तरह स्वास्थ्य सहायता, दो बच्चों की शिक्षा, दो बेटियों की शादी और श्रमिक की मृत्यु पर मिलने वाली सहायता के साथ ही अन्य योजनाओं के लाभ ले सकते हैं। इस मौके पर आयुक्त ग्राम्य विकास अनुराधा पाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित हुए।

पीएमश्री स्कूलों में पुस्तकालयों के लिए शीघ्र बजट आबंटित किया जाएः बर्द्धन

पीएमश्री स्कूलों में कम्प्यूटर लैब एवं पुस्तकालयों के स्थापना में तेजी लायी जाए। कम्प्यूटर लैब अगले एक माह में की जाए स्थापित। यह निर्देश मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में पीएमश्री स्कूलों की समीक्षा के दौरान दिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पुस्तकालयों के लिए शीघ्र बजट आबंटित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि 32 पीएमश्री स्कूलों में एकीकृत विज्ञान प्रयोगशालाओं की स्थापना में भी तेजी लायी जाए। जिनका बजट जारी किया जाना है, एक माह के भीतर बजट जारी कराया जाए। उन्होंने टिंकरिंग लैब शीघ्र उपलब्ध कराए जाने के लिए आईआईटी कानपुर से लगातार संवाद कर निर्धारित समय सीमा के अंदर कार्य को पूर्ण कराए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी पीएमश्री स्कूलों में खेल के मैदान उपलब्ध कराए जाने पर भी शीघ्रातिशीघ्र कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए हैं।

बैठक के दौरान बताया गया कि प्रदेश में कुल 226 विद्यालयों को पीएमश्री विद्यालयों के रूप में चुना गया है। इसमें 34 प्राथमिक एवं 192 माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। इसके साथ ही 15 और अन्य विद्यालयों को स्वीकृति मिली है। बताया गया कि पीएमश्री के 22 कम्पोनेंट्स में से 16 को 100 प्रतिशत लागू कर लिया गया है। बाकि 6 कम्पोनेंट्स का कार्य विभिन्न चरणों में गतिमान है।
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जाइका से वित्त पोषित उत्तराखण्ड एकीकृत उद्यान विकास परियोजना की उच्च स्तरीय समिति की बैठक संपन्न

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में जाइका से वित्त पोषित उत्तराखण्ड एकीकृत उद्यान विकास परियोजना की उच्च स्तरीय/संचालन समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को परियोजना का वित्तीय एवं भौतिक प्लान तैयार किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने वरिष्ठ अधिकारियों को जनपदों में भ्रमण कर समीक्षा कर फीडबैक लेने के लिए लगातार दौरे करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि अन्य विभागों की फल एवं सब्जियों से जुड़े आजीविका की योजनाओं को भी इसमें शामिल किया जाए।

मुख्य सचिव ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक कार्ययोजना जनवरी माह तक पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण हो सकें इसके लिए जनपदों के लिए भी लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। संपूर्ण प्रोजेक्ट का भी वर्षवार लक्ष्य निर्धारित करते हुए प्लान तैयार कर लिया जाए।

इस अवसर पर सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकी, डॉ. एस.एन. पाण्डेय, महानिदेशक कृषि एवं उद्यान वंदना सहित कृषि, उद्यान एवं सगन्ध पौधा केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

लाखमंडल पहुंचे सीएम धामी ने 16 सूत्रीय मांगपत्र पर दिया सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज लाखामंडल स्थित प्राचीन शिव मंदिर पहुंचे, जहाँ स्थानीय जनता एवं कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों की शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

16 सूत्रीय मांग पत्र प्राप्त – मुख्यमंत्री ने दी सकारात्मक कार्रवाई की बात
कार्यक्रम में राज्य मंत्री व कार्यक्रम संयोजक गीता राम गौड़ द्वारा क्षेत्र की विभिन्न स्थानीय समस्याओं से संबंधित 16 सूत्रीय मांग पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी मांगों का गंभीरता से परीक्षण कर सकारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

भारी जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अनेक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम उठा रही है। उन्होंने जोर देते हुए कहा राज्य में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 4.5 वर्षों में 26,000 से अधिक युवाओं को पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ सरकारी नौकरियों में चयनित किया गया है। उन्होंने कहा कि “यह नौकरियाँ पूरी तरह मेरिट और प्रतिभा के आधार पर दी गई हैं।” सरकार ने लैंड जिहाद, थूक जिहाद, लव जिहाद और जबरदस्ती धर्मांतरण जैसी गतिविधियों पर सख्त रोक लगा दी है राज्य सरकार राज्य की डेमोग्राफी और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर 500 वर्षों के बाद स्थापित हुआ, उज्जैन में महाकाल कॉरिडोर का निर्माण पूरा हुआ, उसी प्रकार उत्तराखंड में भी सांस्कृतिक पुनर्जागरण के लिए व्यापक कार्य चल रहे हैं। इस क्षेत्र के प्रसिद्ध हनोल मंदिर का ₹120 करोड़ का विशेष मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत इस आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल का संरक्षण व विकास किया जाएगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि लाखामंडल की जनता द्वारा दिया गया स्नेह और स्वागत उनके लिए अत्यंत भावुक करने वाला है। उन्होंने जनता का हार्दिक आभार व्यक्त किया तथा कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर संकल्पबद्ध है।

इस अवसर पर विधायक दुर्गेश्वर लाल, क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं भारी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

वन्यजीव हमलों में मृतकों के परिजनों को प्रदत्त मुआवजा राशि 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये हुए

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्य सचिव तथा प्रमुख सचिव वन के साथ बैठक कर वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भालुओं तथा अन्य वन्यजीवों के हमलों में घायल व्यक्तियों के उपचार का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक घायल को समय पर तथा समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि उपचार में किसी भी प्रकार की देरी न हो और आवश्यक संसाधन तत्काल उपलब्ध कराए जाएँ।

यह उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा वन्यजीव हमलों में मृतकों के परिजनों को प्रदत्त मुआवजा राशि 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा एवं जागरूकता उपायों को भी सुदृढ़ किया जाए।

सीएम से मिला सिडकुल इंटरप्रेन्योर वेलफेयर सोसाइटी पंतनगर का प्रतिनिधि मंडल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में सिडकुल इंटरप्रेन्योर वेलफेयर सोसाइटी पंतनगर के प्रतिनिधि मंडल ने भेंट की। उन्होंने मुख्यमंत्री को रजत जयंती उत्सव के साथ ही मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में राज्य में बेहतर औधोगिक वातावरण के सृजन के लिए उनका आभार जताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में उद्योगों को बढावा देने के लिए उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियां बनाई गयी हैं। उन्होंने सोसाईटी के प्रतिनिधियों से प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने में सहयोगी बनने की अपेक्षा करते हुए कहा कि, किच्छा खुरपिया पार्क के विकास के साथ ही अमृतसर कोलकता औद्योगिक गलियारा उधमसिंह नगर जनपद को उद्योग के क्षेत्र में नये आयाम स्थापित करने में मददगार होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के आर्थिक एवं समग्र विकास में सभी को सहयोगी बनना होगा। सभी के समेकित प्रयासों से ही हम उत्तराखण्ड उत्तराखण्ड को अग्रणी राज्य बनाने में सफल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि किच्छा खुरपिया फार्म में औद्योगिक स्मार्ट सिटी व सेटेलाईट एम्स क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योग को बढ़ावा देने एवं उद्यमियों की सुविधा के लिए जिलाधिकारियों एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को उद्यमियों की सुविधाओं एवं सहयोग करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि प्रदेश किसी भी स्तर पर किसी का भी उत्पीड़न न होने दिया जाएगा और न ही इसकी किसी को इजाजत दी जाएगी। राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टोलरेंस की नीति रही है। राज्य में किसी भी स्तर पर कोई गलत कार्य न हो इसके लिए भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे है। राज्य में बेहतर कानून व्यवस्था की निरंतर समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि निवेश के लिए राज्य में बड़े औद्योगिक संस्थानों द्वारा इच्छा जताई जा रही है। अच्छे व बड़े उद्योग राज्य में स्थापित हो इसके लिए हम प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि किच्छा के पास पंतनगर में 700 करोड़ की लागत से अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट बनने से क्षेत्र का स्वर्णिम विकास होगा। इसके लिए लगभग 900 एकड़ भूमि एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए हस्तगत कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उधम सिंह नगर के खुरपिया में एक हजार एकड़ में एक इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी स्थापित की जा रही है जिससे अरबों का निवेश होगा तथा लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने एक बार फिर सभी से अपील की कि वे किसी भी कार्यक्रम में गुलदस्ता नहीं पुस्तक भेंट करने की परंपरा को आगे बढ़ाएं इससे आम जनमानस में पुस्तकों के प्रति लगाव बढ़ेगा।
इस अवसर पर सोसाईटी के अध्यक्ष धर सिन्हा, संरक्षक अजय तिवारी, महामंत्री गौरव हरीश, विनीत शर्मा आदि उपस्थित थे।

देश के कार्यबल में नए युग का शुभारंभ, दूरगामी सार्थक परिणाम निकलेंगेः सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि श्रम सुधारों से देश के कार्यबल में नए युग का शुभारंभ हुआ है। आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के लिहाज से चार श्रम संहिताओं को लागू किया जाना एक महत्वपूर्ण फैसला है। इसके दूरगामी सार्थक परिणाम निकलेंगे। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार श्रम संहिताओं के अनुपालन के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने श्रम सुधारों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार प्रकट किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में नई कार्य संस्कृति ने स्थान पाया है। नई नीतियों का निर्धारण देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि पूर्व के श्रम कानूनों से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का एक बड़ा वर्ग बाहर था। वहीं इनके लिए सामाजिक सुरक्षा का भी अभाव था। न्यूनतम वेतन का प्राविधान भी चुनिंदा क्षेत्रों तक ही सीमित था। इन श्रम कानूनों से व्यापारिक सुगमता भी प्रभावित हो रही थी। विदेशी निवेश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। इंस्पेक्टर राज की व्यवस्था से व्यापार एवं उद्योगों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। इस दृष्टिकोण से भारत सरकार ने श्रम सुधार कर ऐतिहासिक कदम उठाया है।

उन्होंने कहा है कि नए कानून के प्रावधान श्रमिकों के हितों की मजबूती से रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा है कि सभी के लिए न्यूनतम और समय पर वेतन, नियुक्ति पत्र की अनिवार्यता जैसे प्राविधान अभूतपूर्व हैं। श्रम सुधार 40 करोड़ श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। महिला श्रमिकों को समान अवसर और समान वेतन के साथ ही रात्रि पाली में काम करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई है, जो कि नारी शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा फैसला है।

मुख्यमंत्री का कहना है कि निश्चित अवधि के कर्मचारियों को एक वर्ष की सेवा के बाद ग्रेच्युटी, श्रमिकों के लिए निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच की अनिवार्यता, जोखिम भरे कार्य क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सौ प्रतिशत स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे प्राविधान बेहद अहम हैं। उन्होंने कहा है कि श्रम सुधारों से राज्य में जहां श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा, वहीं व्यवसाय एवं उद्योगों में अनुकूल वातावरण मिलने से कार्य सुगमता होगी। उन्होंने कहा है कि इन श्रम कानूनों से राज्य के श्रमिक एवं उद्योग दोनों ही पक्ष लाभान्वित होंगे।

“ये दशक उत्तराखंड का दशक”, सीएम धामी ने प्रशासन को तेज़, पारदर्शी और जन-केंद्रित कार्य शैली अपनाने का आह्वान किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की एक अनौपचारिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन सहित सभी वरिष्ठ एवं युवा आईएएस अधिकारी उपस्थित रहे। यह बैठक वर्तमान में चल रहे प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन (एओसी) के संदर्भ में थी।

बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह किसी औपचारिक संबोधन का अवसर नहीं है, बल्कि उनकी प्रशासन के लिए संवेदनशील और आत्मीय भावनाओं को साझा करने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने अपनी 25 वर्ष की यात्रा में अनेक चुनौतियों का सामना किया है और इन उपलब्धियों के पीछे राज्य के प्रशासनिक तंत्र की कड़ी मेहनत, निष्ठा और दूरदर्शिता का महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि, “आप सभी ने कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता और संवेदनशील प्रशासन का परिचय दिया है। इसके लिए मैं आप सभी को हृदय से साधुवाद देता हूँ।”

ये समय रुकने का नहीं, आगे बढ़ने का हैः मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय अधिक गति, अधिक दृढ़ता और अधिक संकल्प के साथ काम करने का है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्द, “ये दशक उत्तराखंड का दशक है” का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संकल्प को साकार करना उत्तराखंड के प्रशासन का दायित्व है।

उन्होंने कहा कि आने वाले पाँच वर्ष उत्तराखंड के लिए निर्णायक होंगे और हमें राज्य को ऐसे मोड़ पर लेकर जाना है, जहाँ हर नागरिक यह महसूस करें कि राज्य निर्णायक और सकारात्मक परिवर्तन से गुजर रहा है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि, प्रशासन को तेजी और पारदर्शिता के साथ काम करना होगा। हर योजना और निर्णय लक्ष्य-आधारित और जन-केंद्रित होना चाहिए। व्यवस्था ऐसी बने कि फाइलों का निस्तारण समयबद्ध हो। योजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर तुरंत दिखाई दे। हर प्रक्रिया में जवाबदेही स्पष्ट हो।

ये केवल नौकरी नहीं, समाज सेवा का दायित्व हैः धामी

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उनकी मूल भावना का स्मरण कराते हुए कहा कि उन्होंने यह सेवा धन, पद या सुरक्षा के लिए नहीं चुनी होगी, बल्कि राष्ट्र एवं समाज के लिए कुछ करने की भावना से चुनी होगी।

उन्होंने कहा कि, “आपके निर्णय सीधे लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं। इसलिए संवेदनशीलता, दूरदृष्टि और तथ्यपरक सोच अत्यंत आवश्यक है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी-कभी जनता की शिकायतें प्रशासन की छवि को आहत करती हैं। लालफीताशाही, शिकायत न सुने जाने और फाइलों में अनावश्यक देरी जैसी बातें व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनता के विश्वास को सर्वाेपरि रखना चाहिए।

प्रेरणा के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री का संबोधन

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक इतिहास में सूर्यप्रताप सिंह, टी. एन. शेषन, नृपेंद्र मिश्र जैसे अनेक अधिकारी ऐसे रहे हैं जिन्होंने अपनी ईमानदारी, संकल्प और जनसेवा के माध्यम से समाज में स्थायी छाप छोड़ी।

मुख्यमंत्री ने कहा, “पद की प्रतिष्ठा आपके कार्यकाल तक है, लेकिन आपके कार्यों का सम्मान आजीवन रहता है।” उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने पद को केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज सेवा का पवित्र अवसर समझें।

उदासीनता की कोई जगह नहीं, मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के ‘नए भारत’ में उदासीन कार्यशैली बर्दाश्त नहीं की जाती। उन्होंने निर्देश दिए कि, कोई भी कार्य अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। निर्णय तेजी और सूझबूझ से लिए जाएं। सभी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पारदर्शिता और समयबद्धता से पहुँचे। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में मासिक समीक्षा, निरंतर मॉनिटरिंग, और साइट निरीक्षण को सुनिश्चित करना चाहिए।

“विकल्प रहित संकल्प” के साथ कार्य करने की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के मंत्र के साथ उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए कार्यरत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आईएएस अधिकारी अपनी निष्ठा, मेहनत और संकल्प के साथ इस लक्ष्य को प्राप्त करने में अग्रणी भूमिका निभाते रहेंगे।

कार्यक्रम में मुख्य सचिव ने वर्तमान में चल रहे प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन के अनुभव साझा किये।

एआई कितना भी उन्नत हो जाए, किताबों का कोई विकल्प नहींः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रतिष्ठित लेखक जय सिंह रावत द्वारा लिखित पुस्तक “उत्तराखंड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास” का विमोचन किया। यह पुस्तक उत्तराखंड राज्य के राजनीतिक, प्रशासनिक एवं क्रमिक विकास की संपूर्ण और प्रामाणिक दस्तावेज़ी यात्रा को प्रस्तुत करती है।

कार्यक्रम के शुभारंभ में मुख्यमंत्री ने उपस्थित महानुभावों, लेखकों, पत्रकारों तथा जनप्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए लेखक जय सिंह रावत को इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए हार्दिक बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत ने राज्य के गठन के बाद की 25 वर्षों की राजनीतिक यात्रा को जिस सुसंगतता और प्रमाणिकता के साथ संकलित किया है, वह अत्यंत सराहनीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के इतिहास, संस्कृति और लोक परंपराओं पर कई पुस्तकें उपलब्ध हैं, लेकिन राज्य स्थापना के बाद की ढाई दशक की घटनाओं को तथ्यों, दस्तावेजों और विश्लेषण के आधार पर संग्रहित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे लेखक ने उत्कृष्टता के साथ प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि पांच भागों में विभाजित यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्यार्थियों और प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि राज्य बनने के बाद उत्तराखंड ने एक लंबा राजनीतिक अस्थिरता का दौर भी देखा, जिसका प्रभाव विकास की गति पर पड़ा। रावत जी ने इस संपूर्ण कालखंड का प्रामाणिक प्रस्तुतिकरण करते हुए दुर्लभ दस्तावेज़ों और प्रेस कतरनों की मदद से एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संकलन तैयार किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “इतिहास लिखना एक गंभीर दायित्व है, जिसमें तथ्य, दृष्टि और ईमानदारी का होना आवश्यक है। रावत ने पत्रकारिता की निष्ठा और निर्भीकता के साथ इस कालखंड को सहेजने का कार्य किया है।”

पुस्तक अध्ययन पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इंटरनेट युग में जानकारी तत्काल उपलब्ध हो जाती है, लेकिन किताबों का महत्व कभी कम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि पुस्तकें हमारे विचारों को गहराई देती हैं और ज्ञान को स्थायी रूप से संजोती हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी से अपील की किकृ
“ किसी भी कार्यक्रम में ‘बुके नहीं, बुक दीजिए’। इससे जहां पुस्तकों के प्रति रुचि बढ़ेगी, वहीं लेखकों को भी प्रेरणा मिलेगी।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस तेज़ी से बदलते दौर में तकनीक का उपयोग आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही अपनी गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों को सुरक्षित रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में भाषा कंटेंट, साहित्य, और लोक परंपरा से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देना चाहिए। सरकार भी इस दिशा में गंभीरता से प्रयास कर रही है तथा नई पीढ़ी के कंटेंट क्रिएटर के लिए इस दिशा में प्रतियोगिताएं आयोजित कर रही है द्य उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर स्थानीय भाषाओं में लेखन, गीत-संग्रह, शोध और डिजिटल कंटेंट तैयार करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहन और सम्मान दिए जाने की दिशा में सरकार सतत प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि “भाषा, संस्कृति और रीतिदृरिवाज़ केवल अभिव्यक्ति के माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान और विरासत की नींव हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम अपनी बोली-भाषाओं का संरक्षण करें और आने वाली पीढ़ियों में इनके प्रति गर्व की भावना विकसित करें।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की नई पीढ़ी को यह बताना बहुत ज़रूरी है कि हमारे पूर्वजों ने कितनी कठिनाइयों और संघर्षों के बीच अपनी परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और भाषा को बचाए रखा। उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपनी जड़ों को समझते हैं, तो उनमें आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना मजबूत होती है।

पुस्तक पढ़ने की आदत पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि “एआई कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, पुस्तकों को रिप्लेस करने का कोई अवसर नहीं है। पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि सोचने, समझने और सीखने की एक गहरी प्रक्रिया हैं।”

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने घरों, विद्यालयों और समुदायों में स्थानीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा दें तथा साहित्य और लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भाषा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अनेक नई पहलें प्रारंभ कर रही है और आगे भी इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय बोली-भाषाओं, साहित्य और पारंपरिक बोलियों के डिजिटलाइजेशन पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं का सांस्कृतिक खजाना सुरक्षित रहे और नई पीढ़ी आसानी से इन तक पहुँच सके। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर सामग्री उपलब्ध होने से हमारी मातृभाषाएँ न केवल संरक्षित होंगी, बल्कि आधुनिक समय के अनुरूप और अधिक सशक्त रूप में आगे बढ़ेंगी।

कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक बृज भूषण गैरोला, पत्रकार, साहित्यकार एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

सीएम धामी ने प्रदेशवासियों को दी बड़ी राहत, राज्य में अगले एक वर्ष तक नहीं बढ़ेगी वाहन फिटनेस फीस

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य सरकार ने उत्तराखंड के वाहन स्वामियों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान करते हुए पुराने (15 वर्ष) कमर्शियल वाहनों की फिटनेस फीस में वृद्धि को आगामी 21 नवम्बर 2026 तक स्थगित कर दिया है। इस संबंध में परिवहन विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना सचिव परिवहन बृजेश कुमार संत द्वारा जारी की गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में 15 वर्ष पुराने कमर्शियल वाहनों की फिटनेस फीस में 10 गुना तक की वृद्धि की गई थी। प्रदेश की जनभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि उत्तराखंड के वाहन स्वामियों पर इसका तात्कालिक बोझ नहीं डाला जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार आमजन के हितों को सर्वाेपरि रखते हुए ऐसे निर्णय ले रही है, जिनसे जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हमेशा जनता-जनार्दन की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करती रहेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “हमारी सरकार का संकल्प जनता को राहत देना और जनहित में त्वरित निर्णय लेना है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा कमर्शियल वाहनों की फिटनेस फीस में की गई वृद्धि को देखते हुए हमने इसे उत्तराखंड में एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिया है। इस अवधि में पूर्व निर्धारित फीस ही लागू रहेगी। हम नहीं चाहते कि प्रदेश के वाहन स्वामियों और परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों पर अचानक अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़े। आने वाले समय में केंद्र सरकार द्वारा किये जाने वाले पुनरीक्षण के अनुसार ही राज्य में नई दरें लागू की जाएंगी।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि “हमारी सरकार जनता के लिए संवेदनशील है। गरीब, मध्यम वर्ग, टैक्सी व ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े हजारों लोगों का हित सुरक्षित रखना हमारी प्राथमिकता है। जनहित के निर्णयों में हम किसी भी प्रकार की देरी नहीं होने देंगे।”