विभागों में रिक्त चल रहे पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

प्रदेश में बेरोजगारों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विभिन्न विभागों में रिक्त चल रहे पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने राज्य लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ चयन सेवा आयोग और विभागों के बीच समन्वय बनाने और समयबद्ध भर्ती कराने के लिए भर्ती कैलेंडर बनाने के निर्देश दिए। कार्मिक विभाग नियमित रूप से इस कैलेंडर का परीक्षण करेगा। बैठक में यह बात सामने आई कि विभागों में डीपीसी न होने का एक बड़ा कारण कर्मचारियों की वार्षिक चरित्र पंजिका (एसीआर) का समय से पूरा न होना है। इस पर मुख्यमंत्री ने समय से कर्मचारियों की एसीआर न लिखने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के भी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिवालय में प्रदेश के सरकारी महकमों में रिक्त चल रहे पदों पर भर्ती प्रक्रिया की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया विवाद रहित और पारदर्शिता के साथ की जाए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कहा कि आयोग को भेजे जाने वाले अधियाचन व सेवा नियमावली स्पष्ट रखी जाएं ताकि मामले न्यायालय में न जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दस प्रतिशत आर्थिक आरक्षण को शामिल करने के लिए विभागों को जो अधियाचन वापस भेजे गए हैं, उन्हें सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कार्यवाही की जाए। लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल (सेनि) आनंद सिंह रावत ने बताया कि आयोग स्तर पर 852 पदों पर भर्ती प्रक्रिया और 3080 पदों पर डीपीसी की प्रक्रिया चल रही है। 883 पदों पर आवश्यक संशोधन के लिए विभागों को वापस भेजा गया है।
उत्तराखंड अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के अध्यक्ष एस राजू ने कहा कि आयोग ने 3177 पद अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के माध्यम से भरने के लिए चिह्नित किए हैं। इनमें 2564 पद तकनीकी अर्हता व 613 पद गैर तकनीकी अर्हता के हैं। अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी ने कहा कि अभी तक कुल 32 विभागों ने रिक्त पदों के संबंध में जानकारी दी है। इन विभागों में लगभग 18 हजार पद रिक्त हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने इन पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू कराने के निर्देश दिए।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, सचिव शैलेश बगोली, नीतेश झा, डॉ. भूपिंदर कौर औलख, हरबंस सिंह चुघ, सुशील कुमार, लोक सेवा आयोग के सचिव राजेंद्र कुमार और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के सचिव संतोष बडोनी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

अलग-अलग कूड़े का उठान और उपयोग पर कोरिया करेगा सहयोग

नगर निगम ऋषिकेश की संकरी गलियों में अब कूड़ा उठान के लिए ई-रिक्शा का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए नगर निगम प्राथमिकता पर काम कर रहा है। शुरुआती चरण में निगम क्षेत्र की गलियां और घर से गलियों के बाहर तक आने की दूरी का आंकलन किया जा रहा है। इसके बाद ही ई-रिक्शा की जरूरत का अंदाजा लग पाएगा। बृहस्पतिवार को मेयर अनिता ममगाईं ने एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) और केईआईटीआई (कोरिया एनवायरमेंट इंडस्ट्री एवं टेक्नालॉजी इंस्टीट्यूट) के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। नगर निगम में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर प्री फिजिबिलिटी रिपोर्ट के लिए केईआईटीआई और एडीबी ज्वाइंट मिशन के लिए बैठक आयोजित हुई। इस दौरान तीनों नगर निकायों के जनप्रतिनिधियों तथा क्षेत्र के व्यापारियों, स्कूल प्राध्यापकों आदि ने ऋषिकेश में ठोस अपशिष्ट पदार्थों को लेकर अपने-अपने सुझाव दिए। बता दें कि एडीबी नगर निगम ऋषिकेश को कूड़ा प्रबंधन के लिए फंड जारी कर रहा है जबकि केईआईटीआई से सही तरह से कूड़ा प्रबंधन के लिए सुझाव लिए जा रहे हैं। बैठक में पालिकाध्यक्ष मुनिकीरेती रोशन रतूड़ी, नगर पंचायत जौंक अध्यक्ष माधव अग्रवाल, शहरी विकास विभाग से सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर रवि पांडे, एडीबी से बागेश कुमार, सैमदास गुप्ता, नगर आयुक्त चतर सिंह चैहान, अधिशासी अधिकारी पालिका मुनिकीरेती बद्री प्रसाद भट्ट, केईआईटीआई से स्यूंगडू किम, येचांम जोंग, टाडातेरु ह्यासी, ली सैंग क्यू आदि उपस्थित रहे।


पब्लिक का सहयोग होना जरुरीः प्रो. किम
कोरिया एनविरोनमेंट इंडस्ट्री एवं टेक्नालॉजी इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर व ठोस अपशिष्ट के एक्सपर्ट स्यूंगडू किम ने कहा कि कूड़ा निस्तारण की योजना को पूरा करने के लिए तीन चरण आवश्यक हैं। पहला पब्लिक का साथ, दूसरा टेक्निकल और तीसरा फाइनेंस। उन्होंने कहा कि शुरूआती दौर में छह माह तक इसका रोडमैप तैयार होगा। इसके बाद डीटीआर तैयार होगी। उन्होंने बताया कि कोरिया में नगर का कूड़ा आर्गेनिक, रिसाइकिल तथा डिस्पोजल के रूप में बनता है। वहां घरों से कूड़ा उठान के लिए कूड़ा बैग अलग-अलग साइज में दिए गए हैं। जितना बड़ा बैग होगा, उतना ही ज्यादा चार्ज होगा। उन्होंने बताया कि वहां मंडी से निकलने वाले कूड़े को तुरंत जानवरों को आहार के रूप में दिया जाता है।

सीसीटीवी कैमरों से रखेंगे नजर
पालिकाध्यक्ष ने बताया कि क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों के लिए पुलिस को 17 लाख तथा नगर पालिका को 25 लाख रुपए मिले हैं। इन सीसीटीवी कैमरों के जरिए रात में खुले में कूड़ा डालने वालों पर नकेल कसी जा रही है। इसी क्रम में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर चालान की कार्रवाई की जा रही है। रोशन रतूड़ी ने बताया कि हमारे यहां सफाई कर्मियों को समय से वेतन जारी किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों का मनोबल हमेशा बरकरार रहता है। दूसरी ओर नगर निगम की कार्यप्रणाली पूरी तरह से लचर दिखी। यहां तमाम दावों के बावजूद न तो सड़कों से आवारा पशु हट पाए, आउटसोर्सिंग कर्मियों के बकाया वेतन का मामला भी विवादों में रहा। इसके अलावा तमाम कोशिशों के बावजूद कूड़े का निस्तारण बेहतर ढंग से नहीं हो पा रहा है।


मुनिकीरेती पालिका कूड़ा निस्तारण में अव्वल
नगर पालिका मुनिकीरेती ने स्वच्छता के मामले में नगर निगम ऋषिकेश को आइना दिखाया है। बृहस्पतिवार को निगम में हुई बैठक में पालिकाध्यक्ष रोशन रतूड़ी ने एडीबी और केईआईटीआई की टीम के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि उनकी पालिका क्षेत्र में प्रति परिवार को 20 रुपये में थैला दिया गया है। पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के लिए लोगों में चालान की कार्रवाई के जरिये भय बनाने पर काम किया जा रहा है। क्षेत्र में प्रतिदिन 12 टन कूड़ा एकत्र होता है, इसमें से आठ टन हरिद्वार भेजा जाता है, चार टन को रिसाइकिल कर गड्ढे भरने के उपयोग में लाया जा रहा है। मुनिकीरेती पालिका में प्रत्येक घर में गमला दिया गया है। इसमें गीले कूड़ा का इस्तेमाल खाद के रूप में किया जा रहा है। सूखा कूड़ा पालिकाकर्मी उठाते हैं।

सुझावों पर एक नजर…
– छोटी गलियों से कूड़ा उठान के लिए डिब्बे उपलब्ध कराए जाएं
– कूड़ा डंपिंग की व्यवस्था आबादी क्षेत्र से दूर इलाके में हो
– पॉलिथीन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए
– गंगा नदी में पूजन सामग्री न डाली जाए
– पॉलिथीन की जगह जूट के उत्पाद वितरित कर प्रचलन में लाएं
– गीला कूड़ा और सूखा कूड़ा अलग-अलग उठाया जाए
– वार्डों से कूड़ा उठान से पूर्व गोविंदनगर ट्रंचिंग ग्राउंड से कूड़ा हटाया जाए
– वैकल्पिक तौर पर आईडीपीएल कांवड़ मेला पार्किंग स्थल पर कूड़ा डंप हो
– गीले कूड़े को घर में ही खाद बनाने का हुनर सिखाया जाए
– कूड़े के प्लास्टिक से फर्नीचर बनाने का उपक्रम प्रचलन में लाया जाए

फर्जी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी का शिकार होने से बचें, अपनाइए ये तरीके

देश में फर्जी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो सालों में 53.7 करोड़ रुपये की फर्जी मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी बिकी हैं, वहीं ऐसे मामलों की संख्या 498 से बढ़ कर 1,192 तक पहुंच गई है।

नकली पाॅलिसी की संख्या बढ़ी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद सत्र की शुरुआत में बताया था कि इरडा की फ्रॉड मॉनिटरिंग सेल के आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में 498 नकली पॉलिसी बिकीं, वहीं 2017-18 में ये संख्या बढ़ कर 823 हो गई। जबकि साल 2018-19 में यह संख्या बढ़ कर 1192 को पार गई है।

क्लेम की धनराशि में नही मिली
इनमें सबसे ज्यादा फर्जी पॉलिसी ट्रक वालों और दो-पहिया वाहन रखने वालों को दी गईं। वहीं ये पॉलिसी उन लोगों ने खरीदी, जो सड़क पर पुलिस की चेकिंग के दौरान जांच से बचना चाहते थे। एक असली मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी की कीमत जहां 10 हजार रुपये पड़ती है, वहीं नकली पॉलिसी 5 से 6 हजार रुपये में मिल जाती हैं। वहीं ग्राहक ये अच्छे से जानते हैं कि ऐसी पॉलिसी की मदद से आप केवल पुलिस चेकिंग से बच सकते हैं, लेकिन कोई दुर्घटना होने पर उससे कोई क्लेम नहीं ले सकते।

बिना इंश्योरेंस के चल रहे वाहन
वहीं देश में तकरीबन 70 फीसदी वाहन बिना इंश्योरेंस के चल रहे हैं। इरडा का कहना है कि उन्हें 2016 में ।ज्ञब्च्स् जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और 2019 में गोन जनरल और मैरींस टेक्नोलॉजी की फर्जी इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने की शिकायते मिलीं हैं। वहीं इनमें से ज्यादातर पॉलिसी सेकंड हैंड गाड़ियों के लिए खरीदी गई थीं, ताकि ट्रैफिक चालान वगैरहा से बचा जा सके।

अन्तरराष्ट्रीय गिरोह सक्रिय
इसके अलावा वाहन मालिकों को फंसाने के लिये बकायदा गैंग बना कर लोगों को ठगा जा रहा है। फरवरी में मुंबई पुलिस के हत्थे एक ऐसा गैंग चढ़ा था, जो दो सालों में 800 से अधिक नकली मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी टू-व्हीलर मालिकों को बेच चुका था। ये जालसाज कम कीमत वाली श्सस्तीश् पॉलिसी की पेशकश कर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते थे।

छूट का ऑफर देकर फंसाते है
ये लोग टू-व्हीलर मालिकों को फोन करके मोटर इंश्योरेंस एजेंट होने का दावा कर पॉलिसी रिन्यू कराने पर प्रीमियम और एड-ऑन कवर पर भारी छूट का वादा करते थे। प्रीमियम का चेक मिलने के बाद पॉलिसी जारी हो जाती थी, लेकिन जब बीमाधारक क्लेम दाखिल करता था, तो उसे इंश्योरेंस कंपनी से पता चलता है कि पॉलिसी नकली है और एजेंट लापता है।

पॉलिसी रिन्यू कराने वाले होते हैं टारगेट में
आमतौर पर ये फर्जीवाड़ा उन टू-व्हीलर मालिकों के साथ होता है, जिनकी पॉलिसी रिन्यू होने वाली होती है। आरटीओ के डेटाबेस के जरिये लोगों को फंसाते हैं और फेक पॉलिसी इश्यू करने के लिए जाली लेटर हेड और स्टैम्प का इस्तेमाल करते हैं।

ध्यान रखें कि पॉलिसी खरीदने के लिये चेक या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन ही करें। केवल कंपनी के नाम पर ही चेक काटें, किसी निजी व्यक्ति के नाम पर चेक देने से बचें।
वहीं अगर आपने किसी थर्ड पाटी या व्यक्ति से पॉलिसी ली है, तो आपके ईमेल पर उसकी डिटेल आएंगी। यदि नहीं आई हैं, तो इंश्योरेंस कंपनी के कॉल सेंटर पर फोन करके पॉलिसी को वेरिफाई करें।
किसी अंजान कंपनी से पॉलिसी खरीदने से बचें। अगर आपको कोई शक हो रहा है कि इरडा की वेबसाइट पर जाकर लाइसेंस वाली कंपनियों की लिस्ट में उस कंपनी का नाम चेक कर सकते हैं। साथ ही स्वीकृत पॉलिसी की डिटेल भी आपको वहीं मिल जाएगी।
प्त्क्।प् ने कुछ साल पहले बीमा कंपनियों के लिए वाहन बीमा पॉलिसी पर एक फत् कोड प्रिंट करना जरूरी कर दिया है, इससे आप पॉलिसी की डिटेल्स क्यूआर कोड के जरिये मोबाइल पर चेक सकते हैं। भारत में दिसंबर 2015 के बाद बिकने वाली मोटर बीमा पॉलिसियों में आम तौर पर एक क्यूआर कोड होता है।

बसपा सरकार में 18 हजार गुना बढ़ी बसपा सुप्रीमो के भाई की सम्पत्ति

बसपा सुप्रीमो मायावती के भाई आनंद कुमार व पत्नी के खिलाफ आयकर विभाग की कार्रवाई होते ही इनके करीबी भूमिगत हो गए हैं। आनंद और करीबियों के खिलाफ आयकर विभाग पुख्ता सबूत एकत्र कर चुका है और कभी भी बड़ी कार्रवाई की जा सकती है। यादव सिंह प्रकरण के दौरान भी आयकर छापे में मिली डायरियों व अन्य सबूतों के माध्यम से आयकर के रडार पर आनंद और उनके सहयोगी चल रहे हैं।
प्रदेश में 2007 से 2012 तक बसपा की सरकार रही थी। उस वक्त कहा जाता था कि लखनऊ से भले ही सरकार चल रही हो, लेकिन इसका रिमोट नोएडा में ही था। आयकर विभाग के सूत्रों का कहना है कि किस बिल्डर को जमीन देनी है, किसे इंडस्ट्री या आईटी का प्लॉट देना है या फिर किसी तरह का आवंटन किया जाए यह भाई साहब यानी आनंद की इजाजत के बिना नहीं होता था। खास बात यह रही कि किसी भी आवंटन में लिखित तौर से उनका दखल नहीं होता था, लेकिन बिना उनकी अनुमति से पत्ता भी नहीं हिलता था। पूरी आवंटन की प्रक्रिया करने के लिए आनंद के करीबियों की भूमिका रहती थी। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण में जितनी भी जमीन आवंटित की गई थी, सभी में अप्रत्यक्ष रूप से टीम की भूमिका रही थी। प्राधिकरण के अधिकारी उनके आवास पर फाइलें लेकर दौड़ लगाते रहते थे।
सूत्र बताते हैं कि नवंबर 2014 में जब तीनों प्राधिकरण के तत्कालीन चीफ इंजीनियर यादव सिंह के यहां पर आयकर विभाग का छापा पड़ा था, तब भी अफसरों को यह जानकारी मिली थी कि घोटालों में और लोग भी हैं, लेकिन सीधे तौर से कोई साक्ष्य नहीं मिले थे, लेकिन आयकर विभाग ने इसकी गोपनीय जांच जारी रखी। साथ ही, यादव सिंह समेत उनके अन्य करीबियों के यहां जो दस्तावेज मिले थे, उनमें कहीं न कहीं नाम नाम आया था। आयकर विभाग की टीम ने प्राधिकरण से भी उन सभी दस्तावेज को निकलवा लिया था, जिसमें आनंद कुमार और उनके करीबियों के नाम से आवंटन थे। अब आईटी ने उन संपत्तियों को अटैच करना शुरू कर दिया है।

पांच सितारा होटल बनाने की योजना पर फिरा पानी
आयकर विभाग ने बसपा प्रमुख मायावती के भाई और भाभी का नोएडा स्थित 400 करोड़ रुपये कीमत का बेनामी प्लॉट जब्त किया है। आधिकारिक आदेश के मुताबिक, मायावती के भाई आनंद कुमार और उनकी पत्नी विचित्र लता के लाभकारी मालिकाना हक वाले सात एकड़ प्लॉट को जब्त करने का अस्थायी आदेश आयकर विभाग की दिल्ली स्थित बेनामी निषेध इकाई (बीपीयू) ने 16 जुलाई को जारी किया था।
मायावती ने हाल ही में आनंद को बसपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया था। 28,328.07 वर्ग मीटर या सात एकड़ का प्लॉट नोएडा के सेक्टर 94 में 2ए से पंजीकृत है। इस जमीन पर पांच सितारा होटल और अन्य लग्जरी सुविधाओं का निर्माण किए जाने की योजना थी। जब्ती का आदेश बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध अधिनियम 1988 की धारा 24 (3) के तहत जारी किया गया। बेनामी कानून का उल्लंघन करने पर सात साल की कैद या बेनामी संपत्ति की बाजार कीमत के हिसाब से 25 फीसदी जुर्माने का प्रावधान है।

आनंद पर रियल एस्टेट में दूसरों के नाम पर निवेश कर करोड़ों रुपये मुनाफा कमाने का भी आरोप है। इस मामले को लेकर आयकर विभाग जांच कर रहा था। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय भी इसकी जांच कर रहा है। जांच में आयकर विभाग ने कम से कम छह फर्म के मालिकाना हक को संदिग्ध पाया। जिन कंपनियों की बेनामी संपत्ति के तहत पहचान की गई, वे विजन टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड, बीपीटीपी इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर प्राइवेट लिमिटेड, यूरो एशिया मर्चेंटाइल प्राइवेट लिमिटेड, सन्नी कास्ट एंड फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड, करिश्मा इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और एड-फिन कैपिटल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड हैं। आनंद कुमार और उनकी पत्नी विचित्र लता इन कंपनियों के जरिये किए गए लेनदेन की इकलौती लाभार्थी हैं।

नोटबंदी के दौरान चर्चा में आए आनंद
आनंद कभी नोएडा प्राधिकरण में मामूली क्लर्क थे। बहन मायावती के सत्ता में आने के बाद उनकी संपत्ति तेजी से बढ़ी। उन पर फर्जी कंपनी बनाकर करोड़ों का कर्ज लेने का भी आरोप लगा था। बसपा शासन के दौरान उन्होंने एक के बाद एक 49 कंपनियां खोलीं। 2014 में उनकी संपत्ति 1316 करोड़ रुपये आंकी गई थी। 2016 में नोटबंदी के दौरान उनके खाते में 1.43 करोड़ रुपये जमा होने पर वह चर्चा में आए थे। जांच एजेंसियां पहले भी उनके घर व कार्यालयों में छापेमारी कर चुकी हैं।

समाज में महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाना समय की जरूरतः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने देहरादून की शहरी बस्ती चीड़ोवाली-कंडोली में उत्तराखण्ड महिला समेकित विकास योजना के अन्तर्गत कामन फेसिलिटी सेन्टर के अधीन संचालित द्विवर्षीय महिला कौशल प्रशिक्षण केन्द्र का शुभारम्भ किया। इस प्रशिक्षण केन्द्र में 120 स्थानीय महिलाओं को जूट व सूती बैग बनाने आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाना समय की जरूरत है। यदि महिलायें मजबूत हुई तो परिवार, समाज व देश मजबूत होगा। उन्होंने महिला व पुरूषों को समाज के विकास की गाड़ी के दो पहिए बताते हुए कहा कि दोनों सशक्त होंगे तो निश्चित रूप में समाज में बदलाव आयेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेती आदि के संसाधनों की सुविधा के साथ ही जीविका के साधनों का विकल्प रहता है, जिसका शहरी क्षेत्रों में अभाव रहता है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में जमीन आदि की कमी के कारण यह सुविधायें नहीं उपलब्ध हो पाती हैं। इसके लिये जरूरी है कि शहरों की गरीबों को दूर करने के लिये यहां की महिलाओं को हुनरमंद बनाया जाय, कौशल विकास के जरिये हम वेस्ट को बेस्ट में बदल सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिये राज्य सरकार द्वारा प्रभावी पहल की जा रही है। उद्यमिता के क्षेत्र में महिलायें 5 हजार तक ओवर ड्राफ्ट ले सकती हैं। महिला समूओं को एग्रोबेस उद्यम के लिये 5 लाख तक शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। हमारा उद्देश्य महिलाओं को दिये गये ऋण के सदुपयोग करने वाला बनाना है। ग्राम लाइट योजना व देव भूमि प्रसाद योजना महिलाओं को आर्थिक स्वावलम्बन की राह दिखा रही है। महिला समूह पहाड़ी भोजन भी तैयार कर रही है। पौड़ी में आयोजित कैबिनेट बैठक में उन्हीं के द्वारा तैयार किया गया भोजन परोसा गया। कम लागत में सबको खाना खिलाने का यह अच्छा प्रयास रहा। इससे एक प्रकार की उद्यमिता भी विकसित हुई है। यह सब हुनरमंद होने का ही परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष केदारनाथ में महिला समूहों ने 2 करोड़ का प्रसाद बिक्री किया। प्रदेश के 625 मन्दिरों में देवभूमि प्रसाद योजना का शुभारम्भ किया जा रहा है। मंशादेवी, बदरीनाथ, जागेश्वर, बागेश्वर से भी इसकी शुरूआत हो गयी है, इसका परिणाम है कि आज चैलाई 55 रू. किलो बिक रहा है। उन्होंने महिलाओं से उत्पादों की बेहतर पैकिंग पर ध्यान देने को कहा। इसमें लोगों का आकर्षण उत्पादों के प्रति बढ़ता है। यदि हम छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देंगे तो अपने उत्पादों की बिक्री में भी मदद मिलेगी। उन्होंने महिलाओं से पुष्प उत्पादन, धूप-अगरबत्ती बनाने की दिशा में भी आगे आने को कहा। पर्यावरण अनुकूल सामग्री के उत्पादन से उसकी मांग देश व दुनिया में बढ़ेगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कामन फेसिलिटी सेन्टर व प्रशिक्षण केन्द्र का भी निरीक्षण किया तथा प्रशिक्षार्थी महिलाओं से भी संवाद किया। मुख्यमंत्री ने परियर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया। क्षेत्रीय विद्यायक गणेश जोशी ने कहा कि इस प्रकार की पहल महिलाओं के आर्थिक उन्नयन में मददगार होती है, उन्होंने कहा कि महिलाओं की मजबूती समाज की मजबूती से जुड़ी है। महिलाओं को स्वालम्बी बनाने के लिये उन्हें प्रशिक्षित करने की भी उन्होंने जरूरत बतायी। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि महिला समेकित विकास योजना के तहत जानकी देवी एजुकेशन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा इस प्रशिक्षण केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। पालीथीन के स्थान पर जूट व सूती व फाइबर से बने विभिन्न उत्पादों व अन्य सामग्री का प्रशिक्षण एवं निर्माण यहां पर महिलाओं द्वारा किया जायेगा। इस अवसर पर निदेशक महिला एवं बाल विकास झरना कमठान, संस्था के चेयरमैन संजय जोशी, सचिव कविता चतुर्वदी और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलायें आदि उपस्थित थे।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में खुलासा, भारत में गरीबी के स्तर में गिरावट

भारत में स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति से बड़ी संख्या में लोग गरीबी के दलदल से बाहर निकल आए हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2006 से 2016 के बीच रेकॉर्ड 27.10 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। खाना पकाने के ईंधन, साफ-सफाई और पोषण जैसे क्षेत्रों में मजबूत सुधार के साथ बहुआयामी गरीबी सूचकांक वैल्यू में सबसे बड़ी गिरावट आई है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और ऑक्सफर्ड पावर्टी ऐंड ह्यूमन डिवेलपमेंट इनीशएटिव (ओपीएचआई) द्वारा तैयार वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) 2019 जारी किया गया। रिपोर्ट में 101 देशों में 1.3 अरब लोगों का अध्ययन किया गया। इसमें 31 न्यूनतम आय, 68 मध्यम आय और 2 उच्च आय वाले देश थे। विभिन्न पहलुओं के आधार पर ये लोग गरीबी में फंसे थे यानी गरीबी का आकलन सिर्फ आय के आधार पर नहीं बल्कि स्वास्थ्य की खराब स्थिति, कामकाज की खराब गुणवत्ता और हिंसा का खतरा जैसे कई संकेतकों के आधार पर किया गया।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गरीबी में कमी को देखने के लिए संयुक्त रूप से करीब दो अरब आबादी के साथ 10 देशों को चिन्हित किया गया। आंकड़ों के आधार पर इन सभी ने सतत विकास लक्ष्य 1 प्राप्त करने के लिए उल्लेखनीय प्रगति की। सतत विकास लक्ष्य 1 से आशय गरीबी को सभी रूपों में हर जगह समाप्त करना है। ये 10 देश बांग्लादेश, कम्बोडिया, डेमोक्रैटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, इथियोपिया, हैती, भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, पेरू और वियतनाम हैं। इन देशों में गरीबी में उल्लेखनीय कमी आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘सबसे अधिक प्रगति दक्षिण एशिया में देखी गई। भारत में 2006 से 2016 के बीच 27.10 करोड़ लोग, जबकि बांग्लादेश में 2004 से 2014 के बीच 1.90 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले।’ इसमें कहा गया है कि 10 चुने गए देशों में भारत और कम्बोडिया में एमपीआई मूल्य में सबसे तेजी से कमी आई और उन्होंने सर्वाधिक गरीब लागों को बाहर निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
भारत का डच्प् वैल्यू 2005-06 में 0.283 था, जो 2015-16 में 0.123 पर आ गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में गरीबी में कमी के मामले में सर्वाधिक सुधार झारखंड में देखा गया। वहां विभिन्न स्तरों पर गरीबी 2005-06 में 74.9 प्रतिशत से कम होकर 2015-16 में 46.5 प्रतिशत पर आ गई। इसमें कहा गया है कि 10 संकेतकों पोषण, स्वच्छता, बच्चों की स्कूली शिक्षा, बिजली, स्कूल में उपस्थिति, आवास, खाना पकाने का ईंधन और संपत्ति के मामले में भारत के अलावा इथोपिया और पेरू में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किए गए।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2005-06 में भारत के करीब 64 करोड़ लोग (55.1 प्रतिशत) गरीबी में जी रहे थे, जो संख्या घटकर 2015-16 में 36.9 करोड (27.9 प्रतिशत) पर आ गई। इस प्रकार, भारत ने बहुआयामी यानी विभिन्न स्तरों और उक्त 10 मानकों में पिछड़े लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में उल्लेखनीय प्रगति की है।

चीन सरकार के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया

इंटरनेट सर्च इंजन गूगल पर चीन की सरकार के साथ मिलकर काम करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। अमेरिकी सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि उनका प्रशासन इस मामले की जांच करेगा। दरअसल, ट्रंप का बयान टेक अरबपति पीटर थील की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें उन्होंने भारतीय मूल के अमेरिकी सुंदर पिचाई की अगुआई वाली कंपनी गूगल पर देशद्रोह का आरोप लगाया है। ट्रंप ने ट्वीट किया, श्अरबपति टेक इन्वेस्टर पीटर थील का मानना है कि गूगल पर देशद्रोह के आरोप की जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि गूगल कंपनी चीन की सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।श् उन्होंने आगे कहा कि वह (पीटर) एक महान और प्रतिभाशाली शख्स हैं, जो इस विषय को किसी से भी बेहतर तरह से जानते हैं। राष्ट्रपति ने आगे लिखा, ट्रंप प्रशासन इस मामले पर गौर करेगा।
इस बीच, गूगल ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। 2010 में इस टेक कंपनी ने अपने सर्च इंजन को चीन से बाहर कर लिया था। दरअसल, चीन सरकार उसके सर्च रिजल्ट्स को सेंसर करने की कोशिश कर रही थी। इसके विरोध में गूगल को यह कदम उठाना पड़ा। हालांकि हाल में खबरें आईं थीं कि इसने चीन के लिए अपने सर्च इंजन के एक संशोधित वर्जन पर काम करना शुरू किया है।
हालांकि कंपनी का कहना है कि उसका इरादा इसे लागू करने का नहीं है। ट्रंप पहले भी कई बार गूगल पर अपने और समर्थकों के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रसित होने का आरोप लगाते रहे हैं। उधर, पीटर थील के बारे में बताया जा रहा है कि वह गूगल के कई प्रतिस्पर्धियों से जुड़े हुए हैं।

आंबेडर यूनिवर्सिटी के एडमिशन में भारी गिरावट, कटआफ भी गिरी

दिल्ली की आंबेडर यूनिवर्सिटी में शहर के स्टूडेंट्स को मैथमैटिक्स (ऑनर्स) में ऐडमिशन लेना अब आसान हो गया है क्योंकि यहां का कटऑफ 3.25 फीसदी गिर गया है। शुक्रवार को इसकी सेकंड लिस्ट जारी होने के बाद यह बात सामने आई। सिर्फ शहर के ही नहीं शहर के बाहर रहने वाले स्टूडेंट्स को भी 2.5 फीसदी तक कटऑफ गिरने का फायदा मिला है। दूसरी लिस्ट स्टूडेंट्स को राहत देने वाली है क्योंकि पहली लिस्ट का कटऑफ काफी हाई था। कटऑफ नीचे जाने पर आंबेडर यूनिवर्सिटी दिल्ली ने बताया, हम सिर्फ चैंपियन्स की यूनिवर्सिटी नहीं हैं बल्कि सबको लेकर चलना चाहते हैं। हालांकि सॉइकॉलजी ऑनर्स का कटऑफ अभी भी दिल्ली के स्टूडेंट्स के लिए 96.5 फीसदी है और बाहरी स्टूडेंट्स के लिए 97.75 फीसदी है।
दिल्ली के स्टूडेंट्स के लिए बीए सस्टेनेबल अर्बनिज्म में सबसे ज्यादा 6 फीसदी गिरावट देखी गई, इसका कटऑफ अब 79.5 फीसदी हो गया है। यहां तक कि ग्लोबल स्टडी कोर्स में 5 फीसदी गिरावट देखी गई। इसी तरह लॉ कोर्स का कटऑफ भी 4 फीसदी गिरा है। पहली कटऑफ में मैथ्स को छोड़कर सभी ट्रडिशनल कोर्सेज 95 फीसदी से ज्यादा थे। अब सिर्फ साइकॉलजी 95 फीसदी से ऊपर है। एयूडी डीन ऑफ स्टूडेंट्स सर्विसेज के डीन संतोष सिंह ने बताया, एयूडी में हम चाहते हैं कि अलग-अलग तरह के स्टूडेंट्स आएं। जिनके 88 फीसदी नंबर हैं उनको भी लगना चाहिए कि उनके लिए मौका है। क्योंकि हम स्टेट यूनिवर्सिटी हैं इसलिए सुनिश्चित करना चाहते हैं कि दिल्ली के रहने वाले सभी सेक्शन के लोगों को यहां मौका मिले।
दिल्ली ने दिल्ली में रहने वाले और बाहर रहने वाले लोगों के लिए अलग-अलग कटऑफ जारी किया है। स्टेट यूनिवर्सिटी होने के नाते एयूडी की 85 फीसदी सीटें दिल्ली के स्टूडेंट्स के लिए रिजर्व हैं। जिनकी फैमिली इनकम 6 लाख से कम है उनको ट्यूशन फीस में भी राहत मिलेगी।

नए आइडिया के साथ काम करें सांसदः प्रधानमंत्री

भारतीय जनता पार्टी की संसदीय बैठक मंगलवार को संसद की लाइब्रेरी बिल्डिंग में हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में गृहमंत्री अमित शाह व तमाम वरिष्घ्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में मौजूद नेताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सभी सांसद राजनीति से हटकर काम करें। जनता से मिलें और सामाजिक कार्य करें। प्रधानमंत्री ने सांसदों को नसीहत देते हुए कहा कि सभी अपने क्षेत्र में रहें और काम के नए आइडिया को अपनाएं।

प्रधानमंत्री मोदी की नसीहत-
– संसद में मौजूद रहें सांसद व मंत्री
– रोस्टर ड्यूटी में अनुपस्घ्थित सांसदों के बारे में शाम तक मुझे दी जाए जानकारी
– राजनीति से हटकर करें काम
– देश के सामने जल संकट है, इसके लिए करें काम
– क्षेत्र के अधिकारियों से संपर्क कर जनता की समस्याओं पर करें विचार
– सरकारी काम और योजनाओ में लें हिस्घ्सा
– अपने क्षेत्र में जाकर सरकार की योजनाओं के बारे में जनता को बताएं
– अपने संसदीय क्षेत्र के लिए कोई एक इनोवेटिव काम करें
– जानवरों की बीमारियों पर भी करें काम

बैठक में हिस्सा लेने के लिए पहले से पहुंचने वालों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, संसदीय मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन शामिल हैं।
इससे पहले 14 जुलाई को भाजपा ने लोकसभा व राज्यसभा सदस्यों को नोटिस जारी कर आज की इस बैठक के बारे में सूचित कर दिया था ताकि सभी इसमें मौजूद रहें। 9 जुलाई को हुई संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों को नए निर्देश थे। उन्होंने सांसदों को गांधी जयंती से लेकर पटेल जयंती यानि कि 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक अपने संसदीय क्षेत्र में 150 किलोमीटर की पदयात्रा करने को कहा था।

गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी को संगीत अकादमी पुरस्कार

उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी और रंगमच और फिल्म समीक्षक दीवान सिंह बजेली को संगीत अकादमी पुरस्कार देने की घोषणा की गयी है। संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली द्वारा जारी प्रेस बयान में यह जानकारी दी गयी है। 26 जून को गोवाहाटी में हुई संगीत नाटक अकादमी की बैठक में यह निर्णय किया गया। 82 वर्षीय बजेली तीस साल तक राजधानी नई दिल्ली से प्रकाशित सभी प्रमुख अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्रों मे रंगमंच की समीक्षा करते रहे हैं। 1937 में अल्मोडा के मन्नान गांव मे जन्मे बजेली टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस तथा पायनियर एवं इकानामिक टाइम्स मे रंगमंच पर लिखते रहे है और वह द हिन्दू के नियमित स्तंभकार रहे हैं। उन्हांने अब तक सैकड़ों नाटको की समीक्षा की है और भारतीय रंगमंच को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। वह पर्वतीय लोककला के भी विशेषज्ञ माने जाते है।
इनके साथ ही पंडित तरुण भट्टाचार्य विख्यात शास्त्रीय गायक मधुप मुद्गल, रंगकर्मी संजय उपाध्याय, अभिनेता टीकम जोशी, लोकगायिका मालिनी अवस्थी समेत 44 कलाकारों को यह पुरस्कार दिये जायेंगे, जबकि प्रख्यात नृत्यांगना एवं राज्यसभा की मनोनीत सदस्य सोनल मानसिंह, मशहूर तबला वादक जाकिर हुसैन समेत चार को साहित्य अकादमी का नया फेलो बनाया गया है। फेलो बनाये जाने पर हर कलाकार को तीन-तीन लाख रुपये और प्रशस्ति पत्र आदि दिये जायेंगे जबकि अकादमी पुरस्कार के लिए प्रत्येक कलाकार को एक-एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह दिये जायेंगे। राष्ट्रपति नई दिल्ली में एक विशेष समारोह के दौरान कलाकारों को पुरस्कार प्रदान करेंगे।
पंडित भट्टाचार्य ने पुरस्कार दिये जाने पर आभार जताते हुए कहा कि यह संतूर और संतूर के प्रशंसकों का सम्मान है। वह सम्मान की सूचना पाकर बहुत की खुश है तथा अकादमी के प्रति आभार जताते हैं। उल्लेखनीय कि पंडित भट्टाचार्य कोलकाता में संतूर आश्रम का संचालन चलाते हैं तथा युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करते रहे हैं। फेलो बनाये गये दो अन्य कलाकारों में जतिन गोस्वामी और के कल्याण सुन्दरम पिल्लई शामिल हैं। इसके अलावा 18 युवा कलाकारों का बिस्मिल्लाह खान पुरस्कार के लिए चयन किया गया है। बिस्मिल्लाह खान पुरस्कार विजेता कलाकार को 25-25 हजार रुपये प्रशस्ति पत्र आदि दिए जायेंगे। संगीत के क्षेत्र में 11, नृत्य के क्षेत्र में नौ, रंगकर्म के क्षेत्र में नौ, पारंपरिक कला में दस कलाकारों को अकादमी पुरस्कार दिए जायेंग। इसके अलावा दो कलाकारों को सम्पूर्ण योगदान के लिए यह पुरस्कार दिए जाएगा। नृत्य में राधा श्रीधर को भारत नाट्यम, इषिरा और मौलिक शाह को कत्थक में संयुक्त रूप से यह पुरस्कार दिया जायेगा। नाट्य लेखन में राजीव नायक और एल खिलान्गते को यह पुरस्कार मिलेगा। उत्तराखंड के चर्चित लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी और खड़ताल संगीत के लिए गाजी खान को याक पुरस्कार दिया जायेगा।