नए संभावित स्थलों की पहचान कर वहां आवश्यक सुविधाओं, इवेंट्स एवं पर्यटन उत्पादों के विकास की समग्र योजना की जाए तैयार

उत्तराखण्ड में शीतकालीन पर्यटन को नई गति देने और राज्य के पर्यटन स्थलों को वर्षभर पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिव पर्यटन के साथ बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड को वर्षभर पर्यटन का प्रमुख गंतव्य बनाने के लिए नए डेस्टिनेशन, नए पर्यटन उत्पाद और स्थानीय सहभागिता पर विशेष फोकस किया जाए, ताकि पर्यटन का लाभ राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों और स्थानीय समुदायों तक भी प्रभावी रूप से पहुंच सके। बैठक में राज्य में विंटर टूरिज्म की संभावनाओं, नए पर्यटन स्थलों के विकास तथा पर्यटन गतिविधियों के विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन को केवल कुछ पारंपरिक एवं अधिक पर्यटक दबाव वाले स्थलों तक सीमित न रखते हुए नए डेस्टिनेशन और पर्यटन सर्किट विकसित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नैनीताल एवं मसूरी जैसे प्रमुख स्थलों पर पर्यटकों के दबाव को कम करने के लिए नए एवं कम ज्ञात पर्यटन स्थलों को विकसित कर उन्हें प्रभावी ढंग से प्रचारित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जीएमवीएन, केएमवीएन एवं पर्यटन से जुड़े स्टैक होल्डर्स सहित संबंधित विभागों से इनपुट लेकर राज्यभर में विंटर टूरिज्म की संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान की जाए। प्रत्येक संभावित डेस्टिनेशन की विशेषता और यूएसपी निर्धारित करते हुए वहां उपयुक्त पर्यटन उत्पाद एवं गतिविधियां विकसित की जाएं। उन्होंने नए ट्रैकिंग रूट्स विकसित करते हुए, हाई-अल्टीट्यूड मैराथन, बर्ड वॉचिंग, नेचर एवं एडवेंचर टूरिज्म जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने के निर्देश दिए। कहा कि संभावित स्थलों की पहचान कर वहां आवश्यक सुविधाओं, इवेंट्स एवं पर्यटन उत्पादों के विकास की समग्र योजना तैयार की जाए।

मुख्य सचिव ने स्थानीय स्टेकहोल्डर्स, टूर ऑपरेटर्स एवं स्थानीय समुदायों को पर्यटन विकास की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर उनके सुझावों को योजनाओं में शामिल किया जाए, ताकि पर्यटन से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ रिवर्स माइग्रेशन को भी प्रोत्साहन मिल सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि नए पर्यटन स्थलों के विकास के लिए वैश्विक स्तर पर सफल मॉडलों का अध्ययन किया जाए। उत्तराखण्ड की भौगोलिक एवं मौसमी परिस्थितियों से मिलती-जुलती परिस्थितियों वाले विदेशी पर्यटन स्थलों से सीख लेकर राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप नए पर्यटन उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं।

मुख्य सचिव ने पर्यटन सर्किटों को एक पैकेज के रूप में विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि जागेश्वर, कसार देवी एवं सूर्य मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों को जोड़कर समेकित पैकेज टूर विकसित करने तथा इनकी पब्लिसिटी का कार्य समय रहते शुरू किए जाएँ। उन्होंने नए पर्यटन प्रोजेक्ट्स तलाशने एवं संभावनाओं की समीक्षा के लिए 15 दिन के भीतर पुनः बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही, राज्य में विंटर टूरिज्म एवं नए पर्यटन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक पर्यटन कॉन्क्लेव आयोजित किए जाने की बात भी कही।

इस अवसर पर सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पीएम की प्रस्तावित यात्रा को लेकर तैयारियां तेज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी 27 फरवरी को शीतकालीन यात्रा पर उत्तरकाशी जिले के हर्षिल-मुखवा क्षेत्र के भ्रमण पर आ सकते हैं। प्रधानमंत्री की प्रस्तावित यात्रा को लेकर शासन-प्रशासन के स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस सिलसिले में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने अधिकारियों की बैठक लेकर प्रस्तावित कार्यक्रम की रूपरेखा एवं तैयारियों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों के निर्देश दिए कि इस कार्यक्रम को लेकर संबंधित विभाग अपनी तैयारियों का समय रहते पूरा करें और सौंपी गई जिम्मेदारियों को त्रुटिरहित ढंग से संपादित कर सभी व्यवस्थाओं का तय समय के भीतर चाक-चौबंद कर लें।

मुख्य सचिव रतूड़ी ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह भ्रमण उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन को प्रोत्साहित करने का अमूल्य अवसर प्रदान करेगा, लिहाजा इस दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में राज्य के शीतकालीन पर्यटन की संभावनाओं व क्षमताओं को उजागर करने पर विशेष ध्यान दिया जाय।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री के हर्षिल-मुखवा में प्रस्तावित कार्यक्रमों के दौरान तय प्रोटोकॉल और सुरक्षा प्रबंधों को ध्यान में रख सभी तैयारियां समय से सुनिश्चित की जाय। मुख्य सचिव ने कहा कि अधिकारियों के साथ वह स्वयं हर्षिल-मुखवा जाकर तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण करेंगी और सभी व्यवस्थाओं को परखेंगी। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री द्वारा मुखवा मंदिर में दर्शन-पूजन सहित हर्षिल में जनसभा के प्रस्तावित कार्यक्रम की उपयुक्त व्यवस्था की जाय और पार्किंग व परिवहन व्यवस्था को लेकर भी कारगर इंतजाम किए जाय। उन्होंने सचिव पर्यटन को हर्षिल में उत्तराखंड के शीतकालीन पर्यटन स्थलों की प्रदर्शनी आयोजित करने के निर्देश देने के साथ ही कहा कि इस अवसर पर राज्य के स्थानीय उत्पादों पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई जाय।

बैठक में सचिव विनोद कुमार सुमन ने प्रस्तावित कार्यक्रमों एवं अपेक्षित व्यवस्थाओं के बारे में प्रस्तुतिकरण देते हुए कहा कि सभी संबंधित विभाग तुरंत सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर लें।

इस अवसर पर जिलाधिकारी उत्तरकाशी डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने बताया कि प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर जिले में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। हर्षिल में उद्यान विभाग के परिसर में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के लिए समतलीकरण का कार्य कराया जा चुका है। मुखवा में मंदिर व गांव के भवनों का सौंदर्यीकरण करने साथ ही मंदिर के लिए सुविधाजनक व सुरक्षित रास्ते का निर्माण किया गया है। हर्षिल-मुखवा क्षेत्र की सड़कों को दुरस्त किया जा रहा है। हर्षिल में बगोरी हेलीपैड तक सड़क का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और निकटवर्ती अन्य हेलीपैड भी चाक-चौबंद किए जा रहे हैं। हर्षिल व मुखवा में पार्किंग निर्माण करने के साथ ही गंगोत्री राजमार्ग पर भी पार्किग के इंतजाम किए जा रहे हैं। शीतकाल में पानी जमने के कारण पेयजल लाईनों के क्षतिग्रस्त होने की समस्या के समाधान के लिए इस क्षेत्र में लगभाग पांच कि.मी. लंबाई के एचडीपीई पाईप बिछाकर पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। इस क्षेत्र में बिजली की लाईनों की मरम्मत व पोल बदलने के साथ ही सोलर हाईमास्ट लाईट्स एवं स्ट्रीट लाई्टस स्थापित की गई हैं। इस क्षेत्र में तीन नये स्मार्ट टॉयलेट्स बनाए जा रहे हैं। जिलाधिकारी ने कार्यक्रम से जुड़ी अन्य तमाम व्यवस्थाओं का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए बताया कि सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

बैठक में पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सचिव शैलेश बगौली सहित शासन एवं पुलिस विभाग, जिला प्रशासन के अधिकारियो ने भी प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब राज्य में हिम तेंदुए की गणना होगी

उत्तरकाशी वन प्रभाग क्षेत्र में हिम तेंदुए का संरक्षण केन्द्र बनाया जायेगा। यह संरक्षण केन्द्र भैरों घाटी के लंका नामक स्थान पर बनाया जायेगा। यह निर्देश मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत एवं वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में हिम तेंदुओं की गणना की जाय। हिम तेंदुओं के सरंक्षण एवं इनकी संख्या में वृद्धि के लिए विशेष प्रयास किये जाय। पिछले कुछ वर्षों में जिन क्षेत्रों में हिम तेंदुए देखे गये हैं। स्थानीय लोगों एवं सैन्य बलों के सहयोग वन विभाग द्वारा ऐसे क्षेत्र चिन्हित किये जाय। ऐसे क्षेत्रों में ग्रिड बनाकर इनकी गणना की जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिम तेंदुए एवं अन्य वन्य जीवों के संरक्षण से राज्य में विन्टर टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में वन्य जीवों की अनेक प्रजातियां हैं, जो पर्यटकों के आर्कषण का केन्द्र बनती हैं। वन्य जीवों की लुप्त हो रही प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में प्रयासों की जरूरत है। आज वन्य जीवों के संरक्षण के लिए लोग भी जागरूक हैं। उत्तराखण्ड के प्राकृतिक एवं नैसर्गिक सौन्दर्य में वन एवं वन्य जीवों का महत्वपूर्ण योगदान है।

बैठक में जानकारी दी गई कि उत्तरकाशी एवं पिथौरागढ़ जनपद में हिम तेंदुए अधिक मात्रा में देखे गये हैं। अभी तक इनकी गणना नहीं की गई है। विभिन्न शोधों के आधार पर उत्तराखण्ड में अभी 86 हिम तेंदुए हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पिछले कुछ सालों में वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि हुई है। इस अवसर पर प्रो. एन. फिन्स्ट्रा ने हिम तेंदुए के संरक्षण केन्द्र पर विस्तार से प्रस्तुतिकरण दिया।