सरकार की मजबूत पैरवी से हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा से प्रतिबंध हटाया

उत्तराखंड चारधाम यात्रा पर लंबे समय से लगी रोक पर गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद माननीय उच्च न्यायालय ने चारधाम यात्रा पर लगी रोक को कुछ प्रतिबंधों के साथ हटा दिया है।

मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने केदारनाथ धाम में प्रतिदिन 800, बद्रीनाथ धाम में 1000, गंगोत्री में 600, यमनोत्री धाम में 400 श्रद्धालुओं को दर्शन करने की अनुमति दे दी है।

चारधाम यात्रा करने वाले तीर्थयात्रियों को 72 घंटे पूर्व तक की कोविड जांच की नेगेटिव रिपोर्ट अथवा दोहरी वैक्सीन का प्रमाण पत्र साथ लाना अनिवार्य होगा। साथ ही तीर्थ यात्रियों को देवस्थानम बोर्ड में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। न्यायालय ने चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में होने वाली चारधाम यात्रा के दौरान आवयश्यक्तानुसार पुलिस फोर्स लगाने को कहा है। भक्त किसी भी कुंड में स्नान नहीं कर सकेंगे।

मुख्य सचिव डॉ एसएस संधू ने सचिवालय में चारधाम त्यारियो की बैठक के दौरान सम्बंधित सभी विभागों को निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा के लिए समय काफी कम बचा है वे अपनी सारी तैयारियां पूरी करें। उन्होंने कहा कि चारधाम प्रदेश के लाखों व्यक्तियों के रोजगार और आजीविका का साधन है। चारधाम आने वाले सभी श्रद्धालुओं को मास्क पहनना, शारीरिक दूरी के मानक का अनुपालन कराना और सैनिटाइजेशन कराना सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि माननीय हाईकोर्ट ने स्थानीय लोगों की आजीविका, कोविड नियंत्रण में होने, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, एसओपी का कड़ाई से पालन आदि के आधार पर चारधाम यात्रा पर लगी रोक को हटाया है। यात्रा शुरू होने से हजारों यात्रा व्यवसायियों व तीर्थ पुरोहितों समेत उत्तरकाशी, चमोली व रुद्रप्रयाग जिले के निवासियों की आजीविका पटरी पर लौट सकेगी।

तीन संतुष्टि मंत्रों से व्यापार जगत की होंगी समस्यायें दूर-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को देहरादून में औद्योगिक संस्थानों एवं संगठनों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार सरलीकरण, समाधान व निस्तारण के मंत्र को लेकर काम कर रही है। हम उद्योगों से जुड़े लोगों की समस्याओं का सरलीकरण कर समाधान करेंगे और साथ ही उनकी समस्याओं का निस्तारण भी होगा। उद्योगों की संतुष्टि का हमारा प्रयास है। उत्तराखंड में जितने भी उद्योग स्थापित हुए है, उनकी समस्याओं को दूर कर उन्हें विकास और ग्रोथ के हर अवसर दिए जायेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा राज्य को दिये गये औद्योगिक पैकेज से प्रदेश में बड़ी संख्या में उद्योगों की स्थापना हुई है। भविष्य में राज्य में और अधिक उद्योग स्थापित हों इसके लिये हमारे उद्यमी ही हमारे ब्राण्ड एम्बेसडर रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में देश-विदेश से उद्योगपति आये इसमें हमारे उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। राज्य का वातावरण पूर्णतः उद्योगों के अनुकूल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्पूर्ण देश में भी यह संदेश जाना चाहिए कि उत्तराखंड उद्योगों के लिए एक श्रेष्ठ डेस्टिनेशन है। उन्होंने कहा कि सरकार और उद्योगपतियों के बीच लगातार संवाद कायम रहेगा।
उन्होंने कहा की प्रधानमंत्री हमेशा उत्तराखण्ड के विकास को प्राथमिकता देते हैं। आज उत्तराखंड में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। परिवहन, कनेक्टिविटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में उत्तराखंड में तेजी से काम हो रहा है। कोरोना काल मे हर किसी के लिए समस्या पैदा हुई। लेकिन सरकार ने कोविड प्रभावित अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने के लिए कई निर्णय लिए है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले 10 सालों में उद्योग के क्षेत्र में उत्तराखंड देश का नंबर वन राज्य बने, इसके लिये हम प्रयासरत हैं। इसमें उद्योगों को भी सहयोगी बनना होगा। राज्य सरकार सभी के सहयोग के लिये है। अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिये भी बड़ी संख्या में उद्योगों की स्थापना जरूरी है। इसके लिये जो बेहतर होगा वह किया जायेगा। राज्य के सभी क्षेत्रों के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी के लिये सड़क एवं हवाई सेवाओं की बेहतर सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है।
राज्य में उद्योगों की बेहतरी के लिये ऊर्जा, चिकित्सा, परिवहन, राजस्व, वन आदि विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कोरोना से बचाव के लिये हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती पर ध्यान दिया गया है। आगामी दिसम्बर तक राज्य के सभी लोगों का वैक्सीनेशन कर दिया जायेगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उद्योग विभाग के वार्षिक प्रतिवेदन का भी विमोचन किया।
उद्योग मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि प्रदेश के विकास में उद्योगों की बड़ी भूमिका है। बड़ी संख्या में उद्योग रोजगार के भी माध्यम हैं। राज्य सरकार उद्योगों के हित में निरंतर प्रयासरत है। उद्योगों से आपसी संवाद के माध्यम से उनकी समस्याओं का समाधान किया जायेगा। यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहेगी।
मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु ने कहा कि राज्य सरकार संवेदनशीलता के साथ उद्योगों के हित में कार्य कर रहे है। खनन आदि नीतियों को पब्लिक डोमेन में डाला जा रहा है, ताकि सभी के सुझावों पर ध्यान देते हुए बेहतर नीतियां तैयार हो सके। उन्होंने कहा कि उद्योगों के हित में सेल्फ सर्टिफिकेशन की व्यवस्था 10 साल के लिये की जा रही है। उद्योगों को भी विश्वास एवं ईमानदारी का वातावरण बनाने में सहयोगी बनना होगा। उन्होंने कहा कि औद्योगिक संगठनों द्वारा दिये गये सुझावों पर शीघ्र कार्यवाही कर समस्याओं का समाधान किया जायेगा।
सचिव उद्योग राधिका झा ने औद्योगिक संगठनों से हुई वार्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राप्त सुझावों के निराकरण का प्रयास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि मेगा इंडस्ट्रियल पॉलिसी, एक्सपोर्ट पॉलिसी, टेक्सटाइल पॉलिसी के साथ ही अवस्थापना विकास, पर्यावरण व राजस्व से सम्बन्धित समस्याओं के समाधान के लिये जिला उद्योग मित्र तथा सिंगल विंडो सिस्टम को भी प्रभावी बनाया जायेगा।
इस संवाद कार्यक्रम में पीएचडीसीसीआई, केजीसीसीआई, सीआईआई, आईएयू सिडकुल मैन फोर्स एसोसिएशन, टूरिज्म एसोसिएशन आदि के प्रतिनिधि उपस्थित थे। सभी ने राज्य सरकार के इस प्रकार के प्रयासों की सराहना करते हुए सरकार को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव अमित नेगी, शैलेश बगोली, नितेश झा, सचिन कुर्वे, बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम आदि उपस्थित थे।

उद्योगों में 25 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास में प्रदेश के विभिन्न उद्योगों के मानव संसाधन प्रबन्धकों ने भेंट की। इस अवसर पर प्रदेश में विभिन्न उद्योगों में आगामी छः माह में लगभग 25 हजार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में आपसी संवाद एवं परिचर्चा भी आयोजित हुई। आपसी संवाद के तहत विभिन्न उद्योगों के मानव संसाधन प्रबन्धकों को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि जो उद्योग प्रदेश में स्थापित है वे भली भांति चले तथा अधिक से अधिक और उद्योग राज्य में स्थापित हो इसके लिये उद्योगों के अनुकूल वातावरण बनाया जायेगा तथा कारगर नीति का भी निर्धारण किया जायेगा, ताकि उद्योग की स्थापना अथवा विस्तारीकरण के लिये विभिन्न विभागों के स्तर पर दी जाने वाली स्वीकृतियां समयबद्धता के साथ तुरन्त जारी हो सके। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में यदि नियमों का शिथिलीकरण किया जाना होगा तो वह भी किया जायेगा।

उद्योगों के अनुकूल वातावरण
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके द्वारा प्रदेश में औद्योगिक वातावरण के सृजन में तेजी लाये जाने के लिये सभी से विचार विमर्श भी किया जा रहा है। सीआईआई तथा कुमाऊ गढ़वाल चौम्बर्स ऑफ कामर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज से उनकी वार्ता हुई है, सभी की समस्याओं के समाधान का उनका प्रयास है। इसके लिये मुख्य सचिव एवं अपर मुख्य सचिव को भी उद्योगो की समस्याओं के समाधान के निर्देश दिये गये हैं।

विकास में उद्यमी बने सहयोगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिये देश के अन्य उद्यमियों को प्रोत्साहित करने में हमारे उद्यमी सहयोगी बन सकते हैं, इस सम्बन्ध में आपके द्वारा उन्हें दी गई सकारात्मक सलाह या सुझाव उन्हें प्रेरित करने में मददगार हो सकती है। इसके लिये यहां के उद्यमियों को हमारा सहयोगी बनना होगा। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई द्वारा 2003 में राज्य को दिये गये औद्योगिक पैकेज के कारण राज्य में उद्योगों की स्थापना की राह प्रशस्त हुई थी। उन्होंने उद्योगों के मानव संसाधन प्रबन्धकों से यहां के लोगों को अपना सहयोगी बनाने का भी आह्वान किया तथा युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की अपेक्षा भी की।

मानव संसाधन प्रबन्धकों ने रखे अपने सुझाव, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का दिया आश्वासन
मानव संसाधन प्रबन्धकों ने प्रदेश में उद्योगों की स्थापना विस्तारीकरण नये इंडस्ट्रियल पार्काे को विकसित करने, पंजीकरण आदि के लिये नियमों के सरलीकरण किये जाने, आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक में उद्योगों के अनुकूल विषयों को प्राथमिकता दिये जाने इनके प्रमुखों का उद्योगों से आपसी समन्वय पर ध्यान देने, इम्पलायमेंट एक्सचेंज को क्रियाशील बनाये जाने, लाजिस्टिक कास्ट को कम करने के लिये कन्टेनर रेल ट्रांसपोर्ट सुविधा उपलब्ध कराने आदि सुझाव रखे। सभी ने मुख्यमंत्री को आश्वास्त किया कि वे उद्योगों में राज्य के अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने भी मानव संसाधन प्रबन्धकों से वार्ता कर उनकी समस्याओं से अवगत होने के साथ ही उनके सुझाव भी प्राप्त किया।

इस परिचर्चा में जिन मानव संसाधन प्रबन्धकों ने अपने सुझाव दिये उनमें आईटीसी लि0 के अल्ताफ हुसैन, होलोनिक्स टेक्नोलोजिस के जितेन्द्र दास, विप्रो इन्टर प्राइजेज प्रा0 लि0 के अरविन्द चौहान, महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा लि0 के विमल सिंह, हीरो मोटोकोर्प लि0 के राजकुमार सिंह, टपरवैयर इंडिया लि0 के दानिश अली, हनीवैल ईडी एण्ड एस इंडिया लि0 के विवेक शर्मा, टाइटन कम्पनी के संजय सिंघल, जाइडस वेलनैस के मयूरेश कुमार, सनसेरा इंजि0 के डी0सी बिष्ट के साथ ही टाटा मोटर्स आदि के प्रतिनिधि शामिल रहे। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबन्धकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संचालन यूपीईएस के असिस्टेंट डायरेक्टर मुदालियर जितेन्द्र द्वारा किया गया। इस अवसर पर विशेष सचिव मुख्यमंत्री डॉ. पराग मधुकर धकाते भी उपस्थित थे।

रेखा आर्य के विभागों में खुल रही कलई से सरकार पशोपेश में

महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग में नियुक्ति के लिए लखनऊ की ए स्कावर एजेंसी को काम दिया गया है। आरोप है कि यह एजेंसी नियुक्ति आदेश देने से पहले निर्मला सिंह सेवा समिति (ट्रस्ट) के खाते में बेरोजगारों से दान देने को कहती है। दान की रसीद भेजने के बाद ही नियुक्ति पत्र जारी किया जाता है। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या ये प्रकरण दान की आड़ में सरेआम रिश्वतखोरी का नहीं है। खुलासे के बाद भी जांच की बात कोई नहीं कर रहा है।
इस एजेंसी के बारे में यूं तो सवाल पहले भी उठते रहे हैं। लेकिन आप नेता कर्नल अजय कोठियाल ने इसे साबित भी कर दिया है। इस एजेंसी ने ट्रस्ट के खाते में 25 हजार रुपये जमा करवाकर कोठियाल को विभाग में चौकीदार की नौकरी दे दी। इसकी बकायदा विभागीय अपर सचिव से शिकायत भी गई। लेकिन अब जांच की बात कोई नहीं कर रहा है। विभागीय मंत्री रेखा आर्य भी मीडिया में कह रहीं हैं कि कोई शिकायत आएगी तब जांच होगी। अहम बात यह भी है कि इस प्लेसमेंट एजेंसी का पता जानकीपुरम, लखनऊ का है। और जिस स्व, श्रीमति निर्मला सिंह सेवा समिति के खाते में कथित दान की राशि जमा करवाई जा रही है, उसका पता भी जानकीपुरम का ही है। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि इस प्लेसमेंट एजेंसी और ट्रस्ट का आपस में क्या रिश्ता है। सवाल यह भी है कि क्या एजेंसी और ट्रस्ट के संचालक एक ही हैं। अगर ऐसा है तो यह सीधे तौर पर दान की आड़ में सरेआम रिश्वतखोरी का धंधा चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि अगर इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो तो कई सफेदफोश चेहरों से शराफत का नकाब हट जाएगा।

सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर हो रही हैं मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर विभिन्न विभागों के अन्तर्गत सीएम घोषणाओं की समीक्षा अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन द्वारा की जा रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बुधवार को पर्यटन विभाग से सम्बन्धित सीएम घोषणाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्धारित समय सीमा के अन्दर सीएम घोषणाओं को पूर्ण करने के निर्देश दिये हैं। बैठक में बताया गया कि पर्यटन विभाग में मुख्यमंत्री घोषणा के अन्तर्गत 109 घोषणाएं हुई हैं, जिनमें से विभाग द्वारा 65 घोषणाओं में शासनादेश निर्गत किया जा चुका है।
अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि विभाग द्वारा उन घोषणाओं जिनके क्रियान्वयन हेतु शासनादेश निर्गत कर दिया गया है, विभाग द्वारा निरन्तर प्रभावी अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाय। विभाग द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि शासनादेश किये जाने हेतु 34 घोषणाएं अवशेष हैं। उन्होंने निर्देश दिये कि विभाग द्वारा उक्त के संदर्भ में समयबद्ध रूप से 1 माह के भीतर माह में शासनादेश निर्गत करने की कार्यवाही की जाय एवं घोषणाओं की पूर्ति हेतु निरन्तर अनुश्रवण सुनिश्चित किया जाय।
बैठक में सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर, प्रभारी सचिव एस०एन०पाण्डे, उपसचिव हीरा सिंह बसेड़ा, उप सचिव चिरंजी लाल उपस्थित थे।

फल, सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में कृषि एवं उद्यान आदि विभागों की समीक्षा की। कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव शैलेश बगोली, आर. मीनाक्षी सुन्दरम के साथ ही सम्बन्धित विभागों के अधिकारी समीक्षा बैठक में उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि एवं औद्यानिकी के क्षेत्र की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से स्वरोजगार को बढ़ावा देने एवं पलायन रोकने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित करने तथा कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के लिये राज्य एवं केन्द्र सरकार की कृषि एवं औद्यानिक विकास से सम्बन्धित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के परम्परागत उत्पादों के साथ ही फल एवं सब्जी उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जाय। इसके लिये प्रोसेसिंग यूनिटों की स्थापना के साथ ही उत्पादों की मार्केटिंग के लिये मार्केटिंग कम्पनी बनाये जाने की कार्य योजना अविलम्ब तैयार की जाय। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों को सिंचाई की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिये सिंचाई एवं लघु सिंचाई विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में कृषि विभाग की भी सहभागिता सुनिश्चित करायी जाय।
मुख्यमंत्री ने परम्परागत कृषि विकास योजना तथा इसके अधीन लघु कृषक समूह प्रमाणीकरण के कलस्टर तैयार करने में भी तेजी लाये जाने हेतु भारत सरकार से पुनः अनुरोध किये जाने के भी निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में आने वाले करोड़ों पर्यटकों तक राज्य के जैविक एवं परम्परागत उत्पादों की पहुंच बनाने के भी प्रयास होने चाहिए। उन्होंने राज्य के चार जनपदों में मधु ग्राम योजना का प्रस्ताव भी अविलम्ब तैयार करने तथा हार्टिटूरिज्म को बढ़ावा देने पर भी बल दिया।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये हैं कि किसानों एवं कास्तकारों को गुणवत्ता युक्त बीज एवं खाद आसानी से उपलब्ध हो इसकी व्यवस्था की जाय, उन्होंने उद्यान विभाग के उद्यानों के बेहतर उपयोग पर ध्यान देने तथा उनमें मौसमानुकूल नर्सरी विकसित करने पर भी ध्यान देने को कहा। मुख्यमंत्री ने एरोमा पार्क के विकास में तेजी लाने, जड़ी-बूटी एवं हर्बल उत्पादन को भी स्वरोजगार से जोड़ने की कार्य योजना बनाने को कहा।
सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विभागीय प्रगति एवं कार्यकलापों की जानकारी दी।

23 औद्योगिक प्रस्ताव स्वीकृत, तीन हजार को मिलेगा रोजगार

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.सन्धू की अध्यक्षता में उनके सचिवालय सभागार में उत्तराखण्ड उद्यम एकल खिड़की सुगमता एवं अनुज्ञापन अधिनियम-2012 के अन्तर्गत गठित राज्य प्राधीकृत समिति की बैठक आयोजित की गई। समिति द्वारा 1013.61 करोड़ रूपये (एक हजार तेरह करोड़ इकसठ लाख रूपये) के 23 औद्योगिक निवेश प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया जिनसे 2952 लोगों को रोजगार देना प्रस्तावित है।
अनुमोदित औद्योगिक प्रस्तावों में वाफ्ट एग्रो इण्डस्ट्रिज का उधम सिंह नगर जसपुर में लिक्विड ग्लूकोज/राइस गुलेटिन प्लाण्ट, नेचर फ्रोजेन फूडस का बाजपुर में फ्रूट वैजिटेबल्स प्लाण्ट, ऑलवेज फ्रेश फूट्स सीए स्टोर का कालाढूंगी, नैनीताल में फ्रूट वैजीटेबल प्लाण्ट, जय औटोमोटिव कम्पोनेन्टस का रूद्रपुर में आयरन कास्ट मशिन्ड ब्रेकेटस, केमर वैल्यु लाइफसाइन्स का रामनगर रोड काशीपुर में मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सन्तलादेवी रिसौर्ट नाल्जवाड़ी देहरादून में फाइव स्टार होटल, ट्यूब इन्वेस्टमेंट ऑफ इण्डिया लिमिटेड मेटल फार्मिंग का गंगनॉली लक्सर में साइडवाल-कोल्ड रोल फॉर्मिंग फौर रेलवेज, किरन फूड का किच्छा, रूद्रपुर में फ्रूट वैजिटेबल प्लाण्ट, प्रीतम इण्टरनेशनल का भगवानपुर में हैण्डवाश/शैम्पू प्लाण्ट, गढ़वाल वेन्चर्स का ढालवाला, टिहरी में आयुर्वेदिक मेडिसिन प्लाण्ट, इवोल्ट फार्मासिटिकल्स का भगवानपुर, हरिद्वार में एलोपैथिक फार्मास्टिकल प्लाण्ट, मरूश ओवरसीज का भगवानपुर, हरिद्वार में बल्क ड्रग्स और फार्मास्टिकल रा मेटेरियल प्लाण्ट, टिब्रेवाला इलैक्ट्रिक्लस का रूड़की में इलैक्ट्रिक फैन विद पावर प्लाण्ट, मदीना फ्रीजन एग्रो फूडस का किच्छा में पौल्ट्री एण्ड अदर स्लटरिंग प्रिपेशन प्लाण्ट, गोल्ड प्लस फ्लोर ग्लास का रूड़की में सिल्वर ग्लास प्लान्ट, अकुम्स हैल्थकैयर का कोटद्वार में एलोपैथिक फॉर्मास्टिकल्स प्लाण्ट, ताल्फ एएसआर उर्जा लिमिटेड का कालाढूंगी, नैनीताल में सोलर एनर्जी जनरेटर, फ्यूरिस्टिक अल्टिमेट एनर्जी का मुनस्यारी में सोलर पावर जनरेशन, विवान सोलर लिमिटेड का लक्सर रोड़ हरिद्वार में सोलर एनर्जी इलैक्ट्रिक पावर जनरेशन, सोलर पावरटैक का सिन्धी पट्टी इदवालस्यू पौड़ी में सोलर इलैक्ट्रिक प्लाण्ट, वोल्ट्रोन कौल्सियम का मंगलोर हरिद्वार में कौल्सियम कार्बाेनेट प्लाण्ट तथा आरोग्यम एजुकेशनल ट्रस्ट का भगवानपुर रूड़की में 300 बैड हॉस्पिटल से सम्बन्धित औद्योगिक निवेश प्रस्ताव सम्मिलित है।
मुख्य सचिव ने इस दौरान अन्य सम्बन्धित विभागों को निर्देशित किया कि राज्य में औद्योगिक निवेश हेतु प्राप्त होने वाले प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करें। उन्होंने अनुमोदन प्रक्रिया को संक्षिप्त करने तथा अनुमोदन हेतु मुख्य प्रावधानों को पूरा करने वाले औद्योगिक प्रस्तावों पर शीघ्रता से विचार करते हुए कार्यवाही करने के निर्देश दिये। उन्होंने सभी विभागों को उनके स्तर पर विभिन्न अनापत्तियों का तेजी से निराकरण और निस्तारण के निर्देश दिये।
बैठक में सचिव राधिका झा, शैलेश बगोली, प्रभारी सचिव वी षणमुगम, अपर सचिव यूएन पाण्डेय, अतर सिंह, केएस नगन्याल, डॉ. आनन्द श्रीवास्तव, महानिदेशक उद्योग रोहित मीणा, निदेशक उद्योग सुधीर नौटियाल सहित सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

30 सितम्बर तक सभी 13 जिलों में आयोजित होंगे 240 शिविर, मौके पर होगा आवेदनों का निस्तारण


अगले 30 दिनों में राज्य में स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूरे करने का काम अभियान के रूप में चलेगा। युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उनकी विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए सभी जनपदों में ’स्वरोजगार शिविर’ लगाये जायेंगे। इन शिविरों में जिला स्तरीय अधिकारी एवं बैंक के अधिकारी स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही मौके पर ही आवेदकों की समस्याओं का समाधान करेंगे। इस माह 30 सितम्बर से पहले ये शिविर आयोजित कर लिए जाऐंगे। शिविरों के आयोजन का रोस्टर सभी जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों ने शासन को उपलब्ध करवा दिया है।

प्रदेश में स्वरोजगार की योजनाओं के आवेदनों के निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में कार्यवाही शुरू हो गई है। प्रदेश के सभी 13 जिलों में 30 सितम्बर से पहले स्वरोजगार शिविर आयोजित होंगे। बीते 5 अगस्त को समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वरोजगार योजनाओं के जुड़े आवेदकों के ऋण की प्रक्रिया यथाशीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए थे। उनके निर्देश के बाद सभी जनपदों में विकासखंड स्तर पर स्वरोजगार शिविरों के आोजन का रोस्टर तैयार कर लिया गया है। इसके तहत अलग- अलग स्थानों में अल्मोड़ा जनपद में 45, उत्तरकाशी में 11, चमोली में 9, देहरादून में 16, टिहरी गढ़वाल में 9, पौड़ी गढ़वाल में 15 तथा जनपद रुद्रप्रयाग में 7 स्वरोजगार शिविरों का आयोजन किया जाएगा।

इसके अलावा जनपद उधमसिंहनगर में 11, पिथौरागढ़ में 21, बागेश्वर में 16, हरिद्वार में 13, नैनीताल 28 और चंपावत में 39 स्वरोजगार शिविर लगेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूरे करने के निर्देश आधिकारियों को दिए हैं। उनका कहना है कि सरकारी नौकरियां सीमित होने के कारण स्वरोजगार से आत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त होगा। खासकर पहाड़ी राज्य उत्तराखण्ड स्वरोजगार से ही आर्थिक समृद्धि की ओर आगे बढ़ सकता है।

राज्य के 7 लाख 54 हजार 984 लाभार्थियों को 118 करोड़ 35 लाख रूपए का राहत पैकेज

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों के साथ वर्चुअल संवाद में कोरोना काल में प्रभावित महिला स्वयं सहायता समूहों और राज्य सरकार की स्वरोजगार योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों के लिए 118 करोड़ 35 लाख रूपए के राहत पैकेज की घोषणा की। इससे राज्य में 7 लाख 54 हजार 984 लोग लाभान्वित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहा है। राज्य की अर्थव्यवस्था में इनका काफी योगदान रहा है। कोविड महामारी के दृष्टिगत इनके क्रियाकलापों में प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इन स्वयं सहायता समूहों में मुख्यतः राज्य की महिलाएं कार्य करती हैं, जो कि पहाड़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। कोविड महामारी के कारण इन महिला स्वयं सहायता समूहों और राज्य सरकार की स्वरोजगार योजनाओं के लाभार्थियों के व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इन्हें राहत देने के लिए इस पैकेज का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पैकेज के अंतर्गत उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं आई.एल.एस.पी. के अन्तर्गत गठित 30,365 समूहों को उनके द्वारा लिए ऋण पर 24.82 करोड़ रूपये की ब्याज प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्तर्गत गठित 159 सी.एल.एफ. को प्रति सी.एल.एफ. 5.00 लाख रूपये का एक मुश्त अनुदान दिया जायेगा। जिसकी अनुमानित लागत रू0 7.95 करोड़ होगी।
उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं आई.एल.एस.पी. के अन्तर्गत गठित सक्रिय स्वयं सहायता समूहों को स्वावलंबन हेतु 6 माह के लिये आर्थिक सहायता भी प्रदान की जायेगी। जिसमें कुल 42989 समूहों को 2000 रूपये प्रतिमाह की दर से कुल 51.59 करोड़ रूपये की सहायता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में लाभार्थियों को 5 हजार रूपए प्रतिमाह की दर से 6 माह के लिए लिए गए ऋण पर ब्याज प्रतिपूर्ति दी जाएगी। इस पर कुल लागत 9 करोड़ रूपए आएगी।
मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के ऋण खाता धारकों को 6 माह के लिए ब्याज प्रतिपूर्ति सहायता उपलब्ध कराई जायेगी। इसकी अनुमानित लागत एक करोड़ रूपये है।
युवा कल्याण एवं प्रान्तीय विकास दल के युवक मंगल दल और महिला मंगल दलों को स्वावलम्बन हेतु 6 माह के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें 20 हजार समूहों को 2 हजार रूपए प्रति माह की दर से आर्थिक सहायता दी जाएगी। जिस पर कुल 24 करोड़ रूपए का व्यय होगा।

आत्मनिर्भर भारत में महिला स्वयं सहायता समूहों का महत्वपूर्ण योगदान
मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से प्रदेश के सभी 13 जनपदों एवं 95 ब्लॉक से जुड़े स्वयं सहायता समूहों से वर्चुअल संवाद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने के की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिला स्वयं सहायता समूहों का इसमें महत्पूर्ण योगदान है। राज्य के विकास में मातृ शक्ति जिस मनोयोग से कार्य कर रही है, यह सबके लिए प्रेरणा है। ऊर्जा एवं उत्साह का संचार इसी तरह बना रहे। हमारी मातृ शक्ति पर बड़ी जिम्मेदारी होती है।

रोजगार और स्वरोजगार सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्य सेवक की शपथ लेते ही उन्होंने प्रदेश के युवाओं एवं मातृ शक्ति को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास शुरू कर दिये हैं। राज्य में अनेक सरकारी पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सभी विभागों को स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए निर्देश दिये गये हैं। जिसकी लगातार मॉनिटरिंग भी की जा रही है। राज्य सरकार का प्रयास है कि समाज के अन्तिम पंक्ति के लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। सरकार जनता के साथ साझीदार के रूप में कार्य कर रही है।

प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में पिछले सात वर्षों में राज्य में अभूतपूर्व कार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पिछले सात सालों में केन्द्र सरकार से राज्य को हर क्षेत्र में भरपूर सहयोग मिला है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल एवं केन्द्र सरकार द्वारा चलाई जा रही अनेक जन कल्याणकारी योजनाओं से प्रदेश को मदद मिली है। केन्द्र सरकार की सभी योजनाओं को विभिन्न माध्यमों से जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत योजना वरदान साबित हुई है। केन्द्र सरकार के सहयोग से राज्य में रेल एवं सड़क कनेक्टिविटी में अनेक नये आयाम स्थापित हुए।

ग्राम्य विकास मंत्री स्वामी यतीश्वरानन्द ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा राज्य में सराहनीय कार्य किया जा रहा है। इनके लिए उत्पादों की बिक्री के लिए उचित व्यवस्था हो। अधिकारियों द्वारा समूहों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनी जाय और उनका समाधान किया जाय। अपने घर से कार्य कर आजीवका को बढ़ाने के लिए स्वरोजगार अच्छा माध्यम है।

13 जनपदों के महिला स्वयं सहायता समूहों ने मुख्यमंत्री से साझा किया अनुभव
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सभी जनपदों के महिला स्वयं सहायता समूहों से बातचीत की। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों के कार्यों और उन्हें आ रही परेशानियों के बारे में जानकारी ली। साथ ही राज्य सरकार को और क्या सुधार करने चाहिए, इस पर महिला स्वयं सहायता समूहों के सुझाव भी प्राप्त किए। अधिकांश ने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए और अधिक उन्नत मशीनें उपलब्ध करवाए जाने और उत्पादों की मार्केटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने का आग्रह किया।
अल्मोड़ा की भगवती स्वयं सहायता समूह की माया देवी ने कहा कि उन्होंने बकरीपालन के लिए 21 हजार रूपये का लोन लिया था। अभी तक वह 42 हजार रूपये की बकरी बेच चुकी हैं। अभी उनके पास 38 बकरियां हैं। उनके समूह में 7 सदस्य ये कार्य कर रहे हैं।
बागेश्वर की आशा देवी ने कहा उनके क्लस्टर द्वारा सिलाई-बुनाई का कार्य किया जा रहा है। आर्डर पर सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए ड्रेस बनाई जा रही है। कलस्टर में 266 महिलाएं जुड़ी हैं। एक महिला प्रतिमाह 8 से 10 हजार रूपये कमा रही है।
चमोली जनपद के जोशीमठ की नर्मदा देवी ने कहा कि उनके तपोभूमि क्लस्टर द्वारा पंचबद्री के लिए प्रसाद बनाया जा रहा है। जिसकी ऑनलाईन बिक्री भी की जा रही है।
चम्पावत में प्रगति संगठन द्वारा लोहे की कड़ाई बनाई जा रही है। लोहाघाट में इसके लिए ग्रोथ सेंटर बनाया गया है। इस कार्य से 40 महिलाएं जुड़ी हैं।
देहरादून के डोईवाला विकासखण्ड की रीना रावत ने कहा कि उनके समूह द्वारा मशरूम उत्पादन एवं फूड प्रोसेसिंग का कार्य किया जा रहा है। जिससे अच्छा फायदा हो रहा है।
बहादराबाद, हरिद्वार की पूनम शर्मा ने कहा कि उनके समूह द्वारा हरिद्वार के विभिन्न मंदिरों के लिए प्रसाद बनाया जा रहा है।
नैनीताल की मुमताज ने कहा कि उनके क्लस्टर में अनेक ऑर्गेनिक उत्पाद बनाये जा रहे हैं। इससे 1500 महिलाएं जुड़ी हैं।
पौड़ी की बबीता ने कहा कि उनके उमंग कलस्टर द्वारा मंडवे के बिस्कुट, लड्डू बनाये जा रहे हैं, ये उत्पाद आंगनबाड़ी केन्द्रों को सप्लाई किये जा रहे हैं।
ऊखीमठ, रूद्रप्रयाग की सरिता देवी ने कहा कि उनके दुर्गा स्वयं सहायता समूह द्वारा श्री केदारनाथ मंदिर के लिए प्रसाद एवं दुग्ध आधारित उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं।
टिहरी से कुंजापुरी क्लस्टर से जुड़ी नीलम देवी ने कहा कि स्थानीय दालों, अचार एवं मसालों का कार्य किया जा रहा है। उनके क्लस्टर से 365 महिलाएं जुड़ी हैं।
खटीमा, ऊधमसिंह नगर की शिक्षा देवी ने कहा कि उनके समूह द्वारा मुर्गी पालन, बकरी पालन, मत्स्य पालन एवं सब्जी उत्पादन से संबंधित कार्य किये जा रहे हैं। हिमाद्री एवं सरस मार्केट के माध्यम से उत्पादों की बिक्री की जा रही है।
चिन्यालीसौड़, उत्तरकाशी की रीना रमोला ने कहा कि उनके अपर्णा स्वयं सहायता समूह द्वारा एल.ई.डी पर आधारित अनेक उत्पाद बनाये जा रहे हैं।
पिथौरागढ़ में राखी बृजवाल एवं विमला देवी ने बताया कि नारी शक्ति समूह द्वारा बेकरी से संबंधित उत्पाद बनाये जा रहे हैं।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्सेस स्टोरी पर आधारित ग्राम्य विकास विभाग की पुस्तक का भी विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जनपद के चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों को सम्मानित भी किया। उन्होंने भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत गौरा स्वयं सहायता समूह को एक लाख रूपए राशि का चेक, प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ऊधमसिंह नगर जिले नारी शक्ति क्लस्टर की श्रीमती चन्द्रमणि दास को सम्मानित किया। दिनांक 12 अगस्त को चन्द्रमणि को प्रधानमंत्री ने वर्चुअल संवाद का अवसर प्राप्त हुआ था।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजान दास, कुंवर प्रणव चौंपियन, राजेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार, आनन्द बर्द्धन, सचिव एस. ए. मुरूगेशन एवं प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आयी महिला स्वयं समूहों की महिलाएं उपस्थित थे।

एक्शन में धामी सरकार-समूह ग के 1500 पदों पर फिर निकलने जा रही भर्तियां

उत्तराखंड में विभिन्न विभागों के 1500 से अधिक समूह ग पदों पर भर्तियां होंगी। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। इसके लिए इसी सप्ताह भर्तियों का विज्ञापन प्रकाशित कर दिया जाएगा।
पिछले दो माह के भीतर अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने अलग-अलग विभागों के करीब ढाई हजार समूह ग के पदों पर भर्तियां निकाली हैं। इनकी आवेदन प्रक्रिया चल रही है। कुछ की आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस बीच विभागों से धड़ाधड़ सिफारिश (अधियाचन) आ रहे हैं।
आयोग ने इनमें से आईटीआई धारकों के लिए कर्मशाला अनुदेशक, ड्राईवर, फॉरेस्ट गार्ड और कृषि विभाग में उद्यान पर्यवेक्षक व सहायक कृषि अधिकारी की भर्तियों का नोटिफिकेशन तैयार कर लिया है। आयोग के सचिव संतोष बडोनी ने बताया कि इन सभी पदों के लिए सप्ताहभर के भीतर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

इन पदों पर होगी भर्तियां
कर्मशाला अनुदेशक-120 पद
ड्राईवर-150 पद
फॉरेस्ट गार्ड-890 पद
कृषि उद्यान पर्यवेक्षक, सहायक कृषि अधिकारी-300 पद

500 से अधिक पदों के लिए अलग से भर्ती
आयोग के पास तमाम अधियाचन ऐसे आए हैं, जिनमें अलग-अलग विभागों में बेहद कम संख्या के पद हैं। पदवार भर्तियां निकालने में मुश्किल है। इसलिए आयोग ने सरकार से अपील की है कि बायलॉज में संशोधन किया जाए ताकि इन सभी पदों के लिए अलग से एक विज्ञापन प्रकाशित कर एक सामान्य अध्ययन की परीक्षा कराकर भर्ती की जा सके। आयोग सचिव संतोष बडोनी के मुताबिक, इन पदों की संख्या करीब 500 है।

प्रश्नों के चैलेंज, आयोग के लिए बन रहे मुसीबत
विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में आंसर की जारी करने के बाद आयोग उम्मीदवारों को प्रश्नों को चैलेंज करने का मौका देता है। चूंकि, इसका कोई शुल्क नहीं है, इसलिए यह चैलेंज बड़ी संख्या में आ रहे हैं। उम्मीदवार जरा सा संदेह होने पर भी सीधे आयोग को अपनी चुनौती भेज रहे हैं। जबकि देश में तमाम ऐसी परीक्षाएं होती हैं, जिनमें सवाल को चैलेंज करने पर शुल्क देना होता है। चैलेंज सही होने पर यह शुल्क लौटा दिया जाता है। इसी तर्ज पर अब भर्ती परीक्षाओं की आंसर की चैलेंज करने पर आयोग भी शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है।