इन्वसर्ट समिट का असर, 28686 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद

प्रदेश में आठ माह पूर्व हुए निवेश सम्मेलन का असर धरातल पर दिखने लगा है। सम्मेलन के दौरान किए गए समझौतों के बाद 98 योजनाओं पर काम होना शुरू हो गया है। इनमें तकरीबन 13261.83 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इन योजनाओं के धरातल पर उतरने से लगभग 28686 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश में बीते वर्ष अक्टूबर में दो दिवसीय निवेश सम्मेलन हुआ था। इस सम्मेलन में लगभग एक करोड़ बीस लाख करोड़ रुपये निवेश के प्रस्तावों पर हस्ताक्षर हुए। इससे सरकार खासी उत्साहित भी थी। आठ माह बाद जो तस्वीर सामने आई है उसके मुताबिक प्रदेश में अभी तक 98 प्रस्तावों पर काम शुरू हो गया है। इनमें सबसे अधिक कार्य उद्योग के क्षेत्र में हुआ है। इसमें 32 योजनाओं पर काम चल रहा है, जिसमें 3692 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद जताई गई है। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवार कल्याण के क्षेत्र में 26 योजनाओं पर काम चल रहा है और इसमें 861 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। रोजगार के लिहाज से देखें तो सूचना प्रौद्योगिकी में सबसे अधिक उम्मीदें हैं। इसके तहत यहां पांच योजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें 3217 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है और इससे 11730 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है। निवेश के लिहाज से सबसे ज्यादा उम्मीदें पशुपालन क्षेत्र में हैं। इसके तहत तीन योजनाओं पर काम हो रहा है, जिसके अंतर्गत 3850 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
मुख्य सचिव उद्योग मनीषा पंवार ने मंत्रिपरिषद के सामने ये आंकड़े प्रस्तुत किए। यह भी बताया गया कि निवेश सम्मेलन में हुए करार के अलावा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग के 211, सूचना प्रौद्योगिकी के दो बड़ी योजनाओं पर भी काम हो रहा है, जिनमें 2700 करोड़ का निवेश और 10832 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

बीएड के नए कॉलेजों की एनओसी पर लगी रोक

प्रदेश में बीएड डिग्रीधारक बेरोजगारों की संख्या में दिनोदिन बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के चार वर्षीय नए पाठ्यक्रमों की एनओसी पर सरकार ने रोक लगा दी है। इसके कारण यहां का कोई भी कॉलेज अब इन नए पाठ्यक्रमों की मान्यता नहीं ले पाएगा।

प्रदेश सरकार ने करीब छह साल पहले बीएड के नए कॉलेजों की एनओसी पर रोक लगाई थी। इसकी सूचना एनसीटीई को भी भेज दी थी। इसके बाद डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) के निजी या सरकारी कॉलेजों में संचालन पर भी सरकार ने रोक लगाते हुए केवल डायट में यह पाठ्यक्रम शुरू किए थे।

अब एनसीटीई के नए इंटीग्रेटिड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) के पाठ्यक्रमों की एनओसी पर भी रोक लगा दी है। इस रोक के पीछे प्रदेश में बीएड डिग्रीधारक बेरोजगार युवाओं की भारी संख्या को बताया गया है। सरकार का तर्क है कि प्रदेश में बेरोजगार बीएड डिग्रीधारकों की संख्या बढ़ने के बाद वह आंदोलन करते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था भी खराब होती है।

क्या है आईटीईपी

एनसीटीई ने हाल ही में चार वर्षीय इंटीग्रेटिड आईटीईपी लांच किए हैं। इनमें दाखिले के लिए 12वीं में कम से कम 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता रखी गई है। इनमें एक कोर्स प्राथमिक और दूसरा कोर्स माध्यमिक में शिक्षण के लिए होगा।

श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि के कुलपति डा. उदय सिंह रावत का कहना है कि एनसीटीई के इंटीग्रेटिड पाठ्यक्रमों की मान्यता के लिए शासनस्तर से एनओसी दी जाती है। शासन ने फिलहाल अग्रिम आदेशों तक इसकी एनओसी देने पर रोक लगाई हुई है। इसकी सूचना विवि को भी भेज दी गई है।

वहीं, उच्च शिक्षा सचिव अशोक कुमार ने बताया कि प्रदेश में बीएड डिग्रीधारक बेरोजगारों की बड़ी संख्या है। इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं अब काफी कम हैं। लिहाजा, इस बढ़ती छात्र संख्या पर लगाम लगाने के लिए एनओसी रोकी जानी जरूरी है।

खुशखबरीः रिक्त पदों पर 10 जुलाई तक विज्ञप्ति जारी करने के निर्देश

उत्तराखंड में उच्च शिक्षा निदेशालय समेत प्रदेश के पांच सरकारी विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों व अन्य कार्मिकों के एक हजार पदों की भर्ती की जाएगी। सरकार ने सभी कुलपतियों को 10 जुलाई तक रिक्त पदों की विज्ञप्ति जारी करने के निर्देश दिए हैं।
इन नियुक्तियों में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। दून विश्वविद्यालय, श्रीदेव सुमन विवि, आवासीय विवि में बंपर नौकरियां खुलने वाली है। इन विश्वविद्यालयों में शत प्रतिशत फैकल्टी और स्टाफ नियुक्ति करने के लिए सरकार ने सभी कुलपतियों को रिक्त पदों की विज्ञप्ति 10 जुलाई तक जारी करने के निर्देश दिए हैं।
वहीं उच्च शिक्षा निदेशालय में भी लेखाकार, क्लर्क समेत अन्य कार्मिकों के 186 पदों की भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से की जाएगी। नेट क्वालीफाई और पीएचडी धारकों को असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों पर प्राथमिकता मिलेगी।
वहीं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के पांच विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा निदेशालय में सैकड़ों पर पद खाली हैं। इन पदों को भरने के लिए कुलपतियों को 10 जुलाई तक विज्ञप्ति निकालने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश सरकार इस साल को रोजगार वर्ष के रूप में मना रही है। विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों से उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को नौकरी का अवसर मिलेगा। साथ ही विश्वविद्यालयों में शत प्रतिशत फैकल्टी होगी।

कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर से युवाओं का संवरेगा भविष्य

उत्तराखड में कोस्टगार्ड का भर्ती सेंटर खोला जायेगा। यह भारत का पाँचवा कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर होगा। 28 जून को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत इस भर्ती सेंटर के लिए भूमि का शिलान्यास करेंगे। यह भर्ती सेंटर कुंआवाला (हर्रावाला) देहरादून में बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से रविवार को मुख्यमंत्री आवास में डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने मुलाकात कर इस सम्बन्ध में उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खोलने के लिए भारत सरकार का अनुमति पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर खुलने से उत्तराखण्ड के युवाओं को कोस्टगार्ड में रोजगार के अच्छे अवसर मिलेंगे। उत्तराखण्ड आपदा की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। कोस्टगार्ड एस.डी.आर.एफ को आपदा से राहत व बचाव के तरीकों के लिए प्रशिक्षण भी देगा। युवाओं को भी कोस्टगार्ड द्वारा आपदा से राहत व बचाव कार्य का प्रशिक्षण दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सैन्य प्रदेश है। सेना के विभिन्न अंगों मे उत्तराखण्ड के जवान है। प्रधानमंत्री ने उत्तराखण्ड को पांचवे सैन्य धाम के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। यह उत्तराखण्ड का सौभाग्य है कि देश का पांचवा कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड में बन रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रैबार कार्यक्रम में डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने उत्तराखण्ड में कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र खोलने का प्रस्ताव दिया था। उसी का परिणाम है कि भारत सरकार से इसे स्वीकृति भी मिल चुकी है। उन्होंने डीजी कोस्टगार्ड के इन प्रयासों की सराहना करते हुए उनका आभार जताया।
डीजी कोस्टगार्ड राजेन्द्र सिंह ने कहा कि देहरादून में कोस्टगार्ड भर्ती सेंटर के लिए भारत सरकार से स्वीकृति मिल चुकी है। इसके लिए 17 करोड़ रूपये भूमि के लिए व 25 करोड़ रूपये भवन निर्माण के लिए स्वीकृति मिली है। इस भर्ती केन्द्र का पूरा खर्च भारत सरकार वहन करेगी। नोएडा, मुम्बई, चेन्नई व कोलकत्ता के बाद यह उत्तराखण्ड में 5वां कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने उत्तराखण्ड को सैन्य धाम के रूप में 5वां सैन्य धाम विकसित करने की बात कही है। यह कोस्टगार्ड भर्ती केन्द्र उत्तराखण्ड के जवानों को समर्पित होगा। इस भर्ती केन्द्र का लाभ उत्तराखण्ड के साथ ही उत्तर प्रदेश, हिमांचल प्रदेश व हरियाणा के युवाओं को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ साल में यह भर्ती केन्द्र बनकर तैयार हो जायेगा।

कृषि उत्पादन को बढ़ाने का प्रयास करना जरुरीः त्रिवेन्द्र रावत

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सर्वे चैक स्थित आईआरटीडी आडिटोरियम में राज्य स्तरीय शून्य लागत (जीरो बजट) प्राकृतिक कृषि से संबधित एक दिवसीय कार्यशाला का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में आजीविका का सबसे मुख्य साधन कृषि है। हमारी लगभग 64 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर आधारित है। 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प को पूरा करने के लिए कृषि कार्यों में उत्पादन लागत कम करने व प्रोडक्शन में वृद्धि पर विशेष ध्यान देना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने तथा उसकी लागत कम करने के लिए प्राकृतिक कृषि से संबंधित पालेकर कृषि माॅडल उपयोगी साबित हो सकता है। विशेषकर उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक कृषि काफी कारगर साबित हो सकती है। प्राकृतिक खेती में जैव अवशेषों, कम्पोस्ट व प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग किया जाता है, जो पर्वतीय क्षेत्र में आसानी से उपलब्ध होते हैं। प्राकृतिक खेती से कृषकों पर व्यय भार भी नहीं पड़ेगा व उत्तम गुणवत्ता के उत्पादों में भी इजाफा होगा। प्राकृतिक खेती कृषि, बागवानी व सब्जी उत्पादन के लिए उपयोगी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती में रासायनिक उत्पादों का प्रयोग कम से कम हो इसके लिए राज्य में प्रभावी प्रयास हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती पर कौशल विकास व कृषि विभाग के माध्यम से प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पालेकर कृषि माॅडल हिमांचल प्रदेश में भी सफल हुआ है। उत्तराखण्ड में इस माॅडल पर विस्तृत अध्ययन कराया जायेगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इसके लिए एक कमेटी भी बनाई जायेगी।
पद्मश्री सुभाष पालेकर ने कहा कि परम्परागत खेती व रासायनिक खेती के बजाय प्राकृतिक खेती पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। प्राकृतिक खेती में लागत ना के बराबर है जबकि यह मृदा की उर्वरा शक्ति को बनाये रखने व शुद्ध पौष्टिक आहार का एक उत्तम जरिया है। उन्होंने कहा कि उद्योग व रासायनिक कृषि वैश्विक तापमान वृद्धि के प्रमुख कारक हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को एक मिशन के रूप में लिया जा रहा है। इसके लिए किसी भी प्रकार के अतिरिक्त बजट की आवश्यकता नहीं है। यह कृषि राज्य में उपलब्ध संसाधनों से आगे बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि हिमांचल में प्राकृतिक कृषि पर कार्य किया जा रहा है। जिसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। उत्तराखण्ड व हिमांचल की भौगोलिक व आर्थिक स्थिति में काफी समानता है। देश की कृषि व्यवस्था सुदृढ़ होगी तो आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
इस अवसर पर विधायक खजानदास, रेशम बोर्ड के अध्यक्ष अजीत चैधरी, बीज बचाओ आन्दोलन के प्रणेता विजय जड़धारी, सचिव कृषि डी सेंथिल पांडियन, डाॅ. देवेन्द्र भसीन, वृजेन्द्र पाल सिंह व विभिन्न विश्वविद्यालयों के कृषि विशेषज्ञ उपस्थित थे।

पालेकर के सुझावों से उत्तराखंड में कृषि उत्पादन को मिलेगा बढ़ावाः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने के लिये पद्मश्री सुभाष पालेकर के सुझावों पर अमल किया जायेगा। इसके लिये शीघ्र ही प्रदेश में जनजागरूकता के लिये कार्यशालाओं का आयोजन किया जायेगा, इसके साथ ही उन्होंने इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिये मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति से शीघ्र प्रभावी कार्य योजना तैयार करने के भी निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने इस सम्बन्ध में शिमला व महाराष्ट्र में आयोजित होने वाली कार्यशाला में सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों एवं कृषि विशेषज्ञों के प्रतिभाग के भी निर्देश दिये हैं ताकि इसकी व्यापक जानकारी होने के साथ ही अधिक से अधिक किसान इससे जुड सकेंगे।
मुख्यमंत्री आवास में पद्मश्री सुभाष पालेकर, लोक भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजेन्द्र व गोपाल उपाध्याय के साथ ही शासन के उच्चाधिकारियों व सम्बंधित विभागों के अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने पालेकर के सुझावों को राज्य हित में बताते हुए उनके सुझावों पर अमल करने के निर्देश अधिकारियों को दिये।
पालेकर ने कहा कि उत्तराखण्ड की जैव विविधता ज्यादा है। यहां के वनों को कृषि के साथ जोड़कर प्राकृतिक खेती के माध्यम से हम उत्तराखण्ड को वास्तव में देवभूमि बनाने में मददगार हो सकेंगे। उन्होंने प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसकी विशेषताओं व विशिष्टताओं की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि से हम बीमारियों से दूर रह सकते हैं। इसकी बेहतर मार्केटिंग से आय के साधनों में वृद्धि होगी। पर्यावरण को बचाने, आर्थिक व सामाजिक बदलाव के साथ ही पारम्परिक खेती को बचाये रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस पर सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने इसके लिये हर सम्भव सहायता का आश्वासन भी मुख्यमंत्री को दिया है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश, सचिव भूपिन्दर कौर औलख, अमित नेगी, डी0 सैंथिल पांडियन, जिलाधिकारी देहरादून एस ए. मुरूगेशन सहित जीबीपंत कृषि विश्व विद्यालय व अन्य सम्बन्धित विभागों के अधिकारी व कृषकगण उपस्थित थे।

पलायन आयोग की रिपोर्ट में खुलासा, अल्मोड़ा की रिपोर्ट से पलायन का सच आया सामने

उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव से लोग पलायन कर रहे हैं। अल्मोड़ा जनपद में वर्ष 2001 से 2011 तक दस सालों में करीब 70 हजार लोग पैतृक गांव से पलायन कर गए। 646 पंचायतों से 16207 लोगों ने स्थायी रूप से गांव छोड़ दिया है। इसका खुलासा पलायन आयोग की रिपोर्ट में हुआ है।
सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सीएम आवास पर पलायन आयोग की दूसरी बैठक आयोजित की गई। इसमें मुख्यमंत्री ने अल्मोड़ा जनपद की पलायन रिपोर्ट का विमोचन किया। रिपोर्ट के अनुसार पिछले दस सालों में सल्ट, भिकियासैंण, चैखुटिया, स्याल्दे विकासखंड से सबसे ज्यादा लोगों ने पलायन किया है। इन ब्लाकों के कई गांवों में सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और आजीविका के साधन नहीं है, जिससे लोग जनपद मुख्यालय और प्रदेश के अन्य शहरी क्षेत्रों में जाकर बस गए हैं।
वर्ष 2001 से 2011 तक जनपद के 1022 ग्राम पंचायतों में 53611 लोगों ने पूर्ण रूप से पलायन नहीं किया है। ये लोग समय-समय पर अपने पैतृक गांव आते हैं। जबकि 646 पंचायतों में 16207 लोगों ने स्थायी रूप से पलायन किया है। अब इन लोगों के दोबारा वापस गांव लौटने की संभावनाएं नहीं हैं। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि जनपद की 11 विकासखंडों से 7.13 प्रतिशत लोगों ने गांव के नजदीकी शहरी क्षेत्रों में पलायन किया है।
जबकि 13 प्रतिशत ने जनपद मुख्यालय, 32.37 प्रतिशत ने प्रदेश के अन्य जनपदों में, 47.08 प्रतिशत लोग राज्य से बाहर पलायन कर चुके हैं। देश से बाहर पलायन करने वाले की संख्या 0.43 प्रतिशत है। 2011 के बाद जनपद के 80 गांवों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में 50 प्रतिशत आबादी कम हुई है। वहीं, 63 गांवों में सड़क, 11 गांवों में बिजली, 34 गांवों में एक किलोमीटर के दायरे में पेयजल और 71 गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा न होने से 50 प्रतिशत आबादी घटी है।

रिपोर्ट पर एक नजर ….

– 2011 की जनगणना के अनुसार अल्मोड़ा की 6 लाख 22 हजार 506 आबादी
– 89 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है।
– 3189 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है अल्मोड़ा जनपद
– जनपद में रहने वाले परिवारों की संख्या एक लाख 40 हजार 577
– दस वर्षों में शहरी क्षेत्रों की आबादी में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी

स्वरोजगार की दिशा में सार्थक प्रयास है ‘‘पहाड़ी रसोई‘‘

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने महिला सशक्तिकरण के साथ ही प्रदेश के परम्परागत व्यंजनों को बढ़ावा देने तथा देश व दुनिया में पर्यटकों के माध्यम से इसकी पहचान बनाने के लिए पहाड़ी रसोई योजना को कारगर प्रयास बताया है। राजपुर रोड स्थित अनिकेत पैलेस में सरस्वती जागृति महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित ‘‘पहाड़ी रसोई‘‘ का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला समूह द्वारा किया गया यह प्रयास महिला सशक्तिकरण की भी मजबूत पहल है। उन्होंने इसे अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणादायी भी बताया है।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि समाज में महिला व पुरुष दोनों पक्ष यदि सशक्त होंगे तो हमारा समाज भी आगे बढ़ेगा तथा समाज का कल्याण भी होगा। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि हमारा प्रदेश पर्यटन प्रदेश है। यहां आने वाले पर्यटकों को पर्वतीय व्यंजनों की चाहत रहती है। इससे हमारे उत्पादों को देश व दुनिया में पहचान मिलने के साथ ही पारम्परिक खेती के उत्पादन के प्रति हमारे लोग प्रेरित होंगे। इससे पारम्परिक उत्पादों व खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारे उत्पाद पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने, इसके भी प्रयास किए जाने चाहिए। इस अवसर पर विधायक खजान दास, मेयर सुनील उनियाल गामा, मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार के.एस.पवार, सरस्वती जागृति महिला स्वयं सहायता समूह की सुश्री पूजा तोमर, सुषमा शालिनी आदि उपस्थित थे।

निशंक ने रोजगार परक शिक्षा से देश की बेरोजगारी को खत्म करने पर दिया जोर

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने नई दिल्ली में केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ समीक्षा बैठक की। केन्द्रीय मंत्री ने विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे कार्यक्रमों एवं प्रगति की समीक्षा की। केन्द्रीय मंत्री ने विभिन्न विश्वविद्यालयों में अवस्थापना एवं रख रखाव से संबंधित आवश्यकताओं की भी समीक्षा की तथा मंत्रालय का सहयोग सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।
डॉ. निशंक ने सभी केंद्रीय विश्विद्यालयों में खाली पड़े पदों पर चिंता जाहिर की और यूजीसी को निर्देश दिया कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में खाली पड़े पदों को शीघ्र भरने का खाका तैयार किया जाए ताकि नई पीढ़ी को गुणवत्तापरक शिक्षा का लाभ मिल सके। डॉ. निशंक ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों को विश्व रैंकिंग में सुधार लाने के लिए रोडमैप तैयार करने को कहा। मंत्री जी ने उम्मीद जताई कि हम कठिन परिश्रम, गुणवत्तापरक शिक्षा और शोध पर बल देकर शीघ्र ही विश्व के शीर्ष संस्थानों में अपना नाम दर्ज करा पाएंगे।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय देश में गुणवत्तापरक शिक्षा को बढ़ावा देने के सबसे सशक्त माध्यम हैं। मंत्री जी ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों को विश्वास दिलाया कि शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मंत्रालय की तरफ से जो भी सहयोग चहिए उसे पूरा किया जाएगा।
डॉ. निशंक ने बैठक के दौरान अपने सम्बोधन में कहा कि विश्वविद्यालयों को रोजगार परक शिक्षा पर बल दिया जाना चाहिए। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि रोजगार परक शिक्षा के माध्यम से देश में व्याप्त बेरोजगारी की समस्या से भी निपटा जा सकता है।

भारतीय सेना के अंग बने 382 युवा अधिकारी

भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होकर 382 जांबाज अधिकारी भारतीय सेना का हिस्सा बन गए, जबकि मित्र राष्ट्रों के 77 कैडेट्स भी पास आउट हुए। पासिंग आउट परेड में मुख्य अतिथि दक्षिण पश्चिम कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल चेरिश मैथसन रहे, जिन्होंने परेड की सलामी ली। सुबह 6 बजकर 40 मिनट पर मार्कर्स कॉल के साथ परेड का आगाज हुआ। इसके बाद ड्रिल स्क्वायर पर कदमताल करते हुए 459 जेंटलमैन कैडेट्स चैटवुड भवन के सामने पहुंचे। इस दौरान इन कैडेट्स पर हेलीकाॅप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई। परेड की सलामी लेने के बाद दक्षिण पश्चिम कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल चेरिश मैथसन ने कैडेट्ों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद देश का सबसे बड़ा दुश्मन है, जिस पर अब काफी हद तक काबू पाया जा चुका है। उन्होंने कैडेट्स को दुश्मन के बोलने पर विश्वास न करने को लेकर सचेत किया तो वही ऐसे प्रोपेगेंडा को अनदेखा कर आगे बढ़ने की सलाह दी।

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इसके साथ ही आज आईएमए के इतिहास में 61 हजार 536 अफसर देने का रिकॉर्ड भी जुड़ गया। इनमें 2 हजार 2 सौ 59 विदेशी जेंटलमैन कैडेट्स भी शामिल हैं।
आज पास आउट हुए 77 युवा सैन्य अधिकारियों में 9 मित्र देशों- अफगानिस्तान, भूटान, मालदीव, फिजी, मॉरीशस, पपुआ न्यू गिनी, टोंगा, लेसोथो और तजाकिस्तान की सेना का अभिन्न अंग बने हैं। इस बार सबसे ज्यादा 72 अधिकारी उत्तर प्रदेश से हैं, जबकि उत्तराखंड से 33 युवा अधिकारी हैं।