राज्य आंदोलन के शहीदों की प्रतिमाएं अब उनके पैतृक गांव अथवा निवास क्षेत्र में स्थापित की जाएंगीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद स्थल रामपुर तिराहा, मुजफ्फरनगर में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी शहीदों की पुण्य स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में प्रतिभाग कर शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर घोषणा की कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन में शहीद हुए जिन आंदोलनकारियों की प्रतिमाएं अब तक स्थापित नहीं हुई हैं, उनकी प्रतिमाएं उनके पैतृक गांव अथवा निवास क्षेत्र में उपयुक्त स्थान पर स्थापित की जाएंगी। उन्होंने रामपुर तिराहा स्थित राज्य अतिथि गृह के उच्चीकरण, स्मारक परिसर में स्थित पुस्तकालय को ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने तथा संग्रहालय के विस्तार की भी घोषणा की। संग्रहालय में उत्तराखण्ड के पारंपरिक वाद्य यंत्रों, वेशभूषा एवं लोक संस्कृति से संबंधित सामग्री को भी शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के पुनः चिन्हीकरण की प्रक्रिया भी शीघ्र पूरी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने देश की रक्षा में सर्वाेच्च बलिदान देने वाले उत्तराखण्ड के वीर सैनिकों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए उनकी प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों में स्थापित करने का निर्णय पहले ही लिया है। इसी भावना के अनुरूप राज्य आंदोलन के अमर बलिदानियों की स्मृतियों को भी भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा कांड के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारियों और बलिदानियों के सपनों के अनुरूप राज्य के निर्माण के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों और बलिदानियों के आशीर्वाद से उन्हें लगातार छठे वर्ष रामपुर तिराहा सहित खटीमा एवं अन्य शहीद स्थलों पर श्रद्धासुमन अर्पित करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 01 एवं 02 अक्टूबर 1994 की रात रामपुर तिराहा में शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जा रहे राज्य आंदोलनकारियों के साथ हुई घटना उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है। पृथक उत्तराखण्ड राज्य के लिए आंदोलनकारियों ने लंबा संघर्ष किया। खटीमा, मसूरी, रामपुर तिराहा और श्रीनगर के श्री यंत्र टापू सहित विभिन्न स्थानों पर आंदोलनकारियों ने अपना बलिदान दिया। उनके संघर्ष और बलिदान के परिणामस्वरूप ही उत्तराखण्ड पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राज्य आंदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों के सम्मान और हितों के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य आंदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों को राजकीय सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है। क्षैतिज आरक्षण से लाभान्वित आश्रितों को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के आश्रित प्रमाण पत्रों के निर्गमन की प्रक्रिया को सरल करते हुए इन्हें तहसील स्तर पर जारी किए जाने के आदेश दिए गए हैं। राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद का गठन किया गया है। राज्य पर्वों तथा जनपदीय एवं प्रदेश स्तरीय कार्यक्रमों में राज्य आंदोलनकारियों को आमंत्रित कर सम्मानित करने तथा परिवहन निगम की बसों में उन्हें निःशुल्क आवागमन की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की सड़कों और विद्यालयों का नाम शहीद राज्य आंदोलनकारियों के नाम पर रखे जाने के संबंध में आदेश जारी किए जा चुके हैं। रामपुर तिराहा, खटीमा, देहरादून एवं मसूरी स्थित शहीद स्थलों के पुनर्निर्माण एवं विस्तारीकरण की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा कांड में शहीद राज्य आंदोलनकारियों की प्रतिमाओं की स्थापना के कार्य का शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामपुर तिराहा में शहीदों की मूर्ति स्थापना के लिए 27 लाख रूपये की धनराशि अवमुक्त की गई है। उन्होंने शहीद स्मारक के लिए भूमि दान करने वाले स्व. पंडित महावीर शर्मा के योगदान को नमन करते हुए कहा कि उनकी प्रतिमा भी स्मारक परिसर में स्थापित की गई है।

मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा कांड के दौरान राज्य आंदोलनकारियों की सहायता करने वाले स्थानीय लोगों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में स्थानीय लोगों ने आगे बढ़कर आंदोलनकारियों को सहयोग और शरण दी। उनका यह योगदान उत्तराखण्ड की जनता सदैव स्मरण रखेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आंदोलन में मातृशक्ति की भूमिका अतुलनीय रही है। माताओं और बहनों ने अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए पृथक राज्य आंदोलन को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राज्य आंदोलनकारियों ने ऐसे उत्तराखण्ड का सपना देखा था, जहां प्रत्येक नागरिक के अधिकारों का सम्मान हो, युवाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें तथा राज्य की संस्कृति और परंपराएं सुरक्षित रहें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों और राज्य आंदोलनकारियों का संघर्ष एवं बलिदान उत्तराखण्ड की भावी पीढ़ियों को देशभक्ति, समाजसेवा और राष्ट्र निर्माण के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा। राज्य आंदोलन के अमर बलिदानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके सपनों और भावनाओं के अनुरूप उत्तराखण्ड को समृद्ध, सशक्त और अग्रणी राज्य बनाया जाए।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल, विधान परिषद सदस्य वंदना वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष मुजफ्फरनगर डॉ. सुधीर सैनी, उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद मधु भट्ट, उपाध्यक्ष उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद सुभाष बड़थ्वाल, सचिव संस्कृति युगल किशोर पंत, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

क्रिकेट को हां, नशे को ना के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों एवं युवाओं को दिलाई नशामुक्ति की शपथ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचकूला के ताऊ देवीलाल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित ‘नमो क्रिकेट लीग’ में प्रतिभाग कर युवा खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वयं खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट खेला और मैदान पर उतरकर युवाओं का उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री को अपने बीच क्रिकेट खेलते देख खिलाड़ियों एवं उपस्थित खेलप्रेमियों में भी खासा उत्साह देखने को मिला।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल के मैदान में उतरने का अपना ही आनंद है। खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट खेलकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि खेल हमें सिखाता है कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए टीम भावना, निरंतर प्रयास, अनुशासन और पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ना जरूरी है।

नमो क्रिकेट लीग में देश के विभिन्न हिस्सों से 30 से अधिक टीमों ने प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से संवाद करते हुए उनकी खेल प्रतिभा और उत्साह की सराहना की तथा उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित खिलाड़ियों एवं युवाओं को नशे के खिलाफ शपथ भी दिलाई। उन्होंने युवाओं से नशे से पूरी तरह दूर रहने और अपने साथियों एवं समाज के अन्य युवाओं को भी नशे की आदत से बचाने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘नमो क्रिकेट लीग’ का संदेश ‘क्रिकेट को हां और नशे को ना’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि युवाओं को स्वस्थ, सकारात्मक और अनुशासित जीवन की ओर ले जाने का संकल्प है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि जीवन में कोई लत लगानी ही है तो खेल और फिटनेस की लत लगाएं। यदि कोई जुनून पालना है तो अपने सपनों और लक्ष्यों को हासिल करने का जुनून पालें। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा नशे में नहीं, बल्कि खेल, रचनात्मकता और राष्ट्र निर्माण में लगनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व, धैर्य और टीम भावना को मजबूत करने का भी सशक्त माध्यम हैं। खेल के मैदान में खिलाड़ी जीत से विनम्रता और हार से सीख लेकर आगे बढ़ना सीखता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को नई पहचान और सम्मान मिला है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ जैसे अभियानों ने युवाओं को खेलों तथा स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। आज देश के गांवों और छोटे शहरों से निकलने वाली खेल प्रतिभाएं राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की धरती खेल प्रतिभाओं के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहां के खिलाड़ियों ने ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियन गेम्स, राष्ट्रमंडल खेलों सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की सफलता के पीछे वर्षों का परिश्रम, अनुशासन, संघर्ष और लक्ष्य के प्रति समर्पण होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय कहा जाता था कि ‘पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो होगे खराब’, लेकिन आज देश में इस सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर और मंच मिल रहे हैं। आज यह कहा जा सकता है कि ‘खेलोगे-कूदोगे तो बनोगे लाजवाब।’

मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि नशा व्यक्ति के साथ-साथ उसके परिवार और समाज को भी प्रभावित करता है, जबकि खेल जीवन को सकारात्मक दिशा, अनुशासन और नई पहचान देता है। उन्होंने कहा कि एक युवा नशे से बचेगा तो एक परिवार बचेगा, एक परिवार बचेगा तो समाज मजबूत होगा और मजबूत समाज से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण होगा।

मुख्यमंत्री ने सभी युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी नशे के खिलाफ जागरूक करें। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित खिलाड़ियों एवं युवाओं ने ‘नशे को ना, खेल को हां’ का सामूहिक संकल्प लिया।

राजस्व न्यायालयों के अभिलेख नियमित रूप से अपडेट रखने और समनों की समयबद्ध तामील के निर्देश

आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद उत्तराखण्ड रंजना राजगुरु ने प्रदेश में भूमि के नामांतरण (दाखिल-खारिज/म्यूटेशन) से संबंधित मामलों और अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में सभी जनपदों में असिस्टेंट कलेक्टर प्रथम श्रेणी/तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों एवं अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा किए जा रहे राजस्व न्यायिक कार्यों की स्थिति की समीक्षा की गई।

आयुक्त एवं सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नामांतरण से जुड़े मामलों का नियमों के अनुसार गुण-दोष के आधार पर निर्धारित समय-सीमा में निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और लोगों को समय पर न्याय उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जाए। सभी पीठासीन अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि राजस्व न्यायालयों का कार्य नियमानुसार और समयबद्ध तरीके से संचालित हो।

उन्होंने राजस्व न्यायालयों से संबंधित अभिलेखों और आवश्यक पंजीकाओं को नियमित रूप से अद्यतन रखने के भी निर्देश दिए। कहा कि न्यायालयों के रिकॉर्ड व्यवस्थित और पूर्ण होने चाहिए, ताकि मामलों की स्थिति स्पष्ट रहे और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

आयुक्त एवं सचिव ने निस्तारित मामलों की पत्रावलियां नियमानुसार समय से रिकॉर्ड रूम में जमा कराने के निर्देश दिए, ताकि अपील की स्थिति में मूल पत्रावलियां संबंधित अपीलीय न्यायालय को समय पर उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने न्यायालयों द्वारा जारी समनों की समयबद्ध तामील सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर जनपद में नामांतरण मामलों से संबंधित समनों की समय पर तामील सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

राजस्व परिषद द्वारा आगामी माह से प्रदेश में ‘नामांतरण दिवस’ आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए प्रदेश की सभी तहसीलों के पीठासीन अधिकारियों को अभी से आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

समीक्षा बैठक में राजस्व परिषद के संयुक्त संचालक (चकबंदी) नरेश चन्द्र दुर्गापाल, उप राजस्व आयुक्त मीनाक्षी पटवाल, जिला शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) नितिन वशिष्ठ सहित प्रदेश के सभी अपर जिलाधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

वन्य जीव संघर्ष के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले 18 को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एफ.आर.आई कैंपस, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए वन्यजीव सप्ताह-2026 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वन्य जीव संघर्ष के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले, एवं अपनी जान की परवाह किए बगैर दूसरे की जान बचाने वाले कुल 18 लोगों को भी सम्मानित किया। इस सम्मान के साथ ही मुख्यमंत्री ने सभी 18 लोगों को 51 हज़ार की धनराशि देने की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों एवं वन्यजीव फोटोग्राफी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने वन्य जीव पर आधारित निबंध प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से हर जिले में कम से कम एक नए पर्यटन स्थल की पहचान करने और उसकी प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखते हुए वहां पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करने की भी बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा हल्द्वानी में चिड़ियाघर की परिकल्पना को सरकार ने अपने घोषणा पत्र में शामिल किया है। सरकार इस दिशा में तेजी से कार्य करेगी जिससे यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव हमारी आस्था, संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है। सनातन संस्कृति ने हमेशा मानव और जीव-जगत के बीच सह-अस्तित्व का संदेश दिया है। देवी-देवताओं के साथ जुड़े पशु-पक्षी भी इसी भाव को प्रकट करते हैं। प्राचीन समय से प्रकृति और वन्यजीवों का संरक्षण हमारी जीवन पद्धति का हिस्सा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा वन्यजीव सप्ताह के दौरान प्रदेशभर में जन-जागरूकता के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा राज्य सरकार का संकल्प है कि वन्यजीवों के जंगल सुरक्षित और उनके रास्ते खुले रहें। राज्य सरकार, विकास परियोजनाएं के साथ ही वन्यजीवों की सुविधा को भी प्राथमिकता में रख रही है। इस सोच का उदाहरण दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर है।

मुख्यमंत्री ने कहा उत्तराखंड राज्य – हिमालय, घने जंगल, नदियां, झीलें और समृद्ध जैव-विविधता से आच्छादित है। राज्य की सबसे बड़ी पूंजी यहां की प्रकृति है, जिम कॉर्बेट, राजाजी जैसे नेशनल पार्क हमारी पहचान हैं। जहां वर्ष भर लाखों पर्यटक आते हैं। उन्होंने कहा सरकार की प्राथमिकता प्रकृति के साथ संतुलन बनाते हुए वाइल्डलाइफ टूरिज्म को आगे बढ़ाने की है। जहां जंगल भी सुरक्षित रहें और इको-टूरिज्म, होमस्टे जैसी गतिविधियों से स्थानीय लोगों की आय भी बढ़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्स्थापन की परियोजना का दूसरा चरण भी शुरू होने जा रहा है। उन्होंने कहा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्नो लेपर्ड पर्यटन की अच्छी संभावनाएं हैं। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से इस दिशा में तेजी से काम आगे बढ़ाने के निर्देश दिए, जिससे हिम तेंदुए के संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम किया जाए। उन्होंने कहा वन्यजीव भी सुरक्षित रहें और इससे लोगों को भी कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा राज्य में जंगलों की निगरानी प्रणाली को भी मजबूत किया जा रहा है। साथ ही कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन की दिशा में भी निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी है। राज्य सरकार, राज्य में इको-टूरिज्म को बढ़ावा दे रही है, ताकि जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों को वहीं रोजगार मिले और वे प्रकृति के संरक्षण में भी सहयोग करें। मुख्यमंत्री ने कहा एक लाख युवाओं को “सीएम यंग ईको-प्रिन्योर” बनाने की दिशा में भी कार्य आगे बढ़ रहा है। इस योजना के माध्यम से नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, इको-टूरिज्म और वन्यजीव पर्यटन से जुड़े कौशल को रोजगार और उद्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जिले में इको क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए वन्यजीवों से जुड़ी शैक्षिक यात्राएं शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा राज्य सरकार इकोलॉजी और इकोनॉमी में संतुलन बनाकर विकास को आगे बढ़ा रही है। ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी हमारी प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “मिशन LiFE” हमें पर्यावरण की रक्षा हमारी रोजमर्रा की आदतों का हिस्सा बनने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में GEP (ग्रास इन्वायरनमेंट प्रोडक्ट) के माध्यम से जल, जंगल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यांकन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार का संकल्प वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ प्रभावित नागरिकों की मदद करना भी है। सरकार ने वन्यजीव हमले में मृत्यु होने पर दी जाने वाली अनुग्रह राशि को ₹ 6 लाख से बढ़ाकर ₹ 10 लाख किया है। वन्यजीव हमले में घायल होने वाले नागरिकों के इलाज का खर्च भी अब राज्य सरकार द्वारा ही वहन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड आने वाले सभी पर्यटकों से भी आह्वान किया कि जब भी वे जंगल सफारी, राष्ट्रीय उद्यान या धार्मिक स्थल पर जाएं तो वहां गंदगी न फैलाएं, प्लास्टिक न छोड़ें और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। उन्होंने कहा सभी का प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि हमारा राज्य, देवभूमि के साथ वन भूमि भी है। यहां 71 प्रतिशत से ज्यादा वन भूमि का क्षेत्र है।राज्यवासियों की आजीविका में भी वन्य जीव का महत्वपूर्व योगदान है। वन्यजीव , प्रकृति के साथ रोजगार के लिए भी जरूरी। उन्होंने कहा वन्यजीवों की सुरक्षा सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस वर्ष की थीम ” जुड़े आवास – वन्य जीवन का विकास* है। उन्होंने कहा ह्यूमन वाइल्डलाइफ कंफ्लिक्ट को रोकने के लिए कई कॉरिडोर का निर्माण कार्य किया जा रहा है।

वन मंत्री ने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा और आजादी भी उतनी महत्वपूर्ण है जितना आम जन की। उन्होंने कहा राज्य सरकार द्वारा वनों को आम आदमी की आजीविका से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने पर भी तेजी से कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा निश्चित ही ऐसे कार्यक्रम विशेष रूप से हमारी युवा पीढ़ी में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत करेंगे।

इस पर विधायक सविता कपूर, राजीव तलवार, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद बिष्ट, प्रमुख सचिव वन आर.के सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक (हाफ) कपिल लाल , प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना गैरवाल, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

वन क्लिक से 9,93,886 पेंशनरों को मिली 147.34 करोड की पेंशन की राशि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला, देहरादून में अंतराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दिव्यांगजन सिविल सर्विस कोचिंग का शुभारंभ एवं विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 23 वरिष्ठ नागरिकों, निबंध एवं पेंटिंग प्रतियोगिता में चयनित 05 छात्र/छात्राओं का पुरस्कार से सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने वन क्लिक के माध्यम से सितंबर माह की पेंशन राशि का भी भुगतान किया। जिसमें 9,93,886 पेंशनरों को ₹ 147 करोड 34 लाख 53 हजार की पेंशन का भुगतान किया गया। साथ ही उन्होंने सभी को वरिष्ठ जनों के कल्याण की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री ने इस दौरान परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” के तहत पौधारोपण भी किया।

मुख्यमंत्री ने सभी वरिष्ठजनों का स्वागत करते हुए अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने प्रदेश के सभी वृद्धजनों के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु की कामना की। उन्होंने कहा वरिष्ठजन के सानिध्य में ही परिवार खुद को सुरक्षित महसूस करता है। वृद्धजनों से बच्चों को संस्कार मिलते हैं। उनके सानिध्य में बच्चों को जीवन के आदर्श, सिखाने को मिलते हैं। उन्होंने कहा वृद्धजन हमारे परिवार के सुरक्षाकवच होते हैं, उनके कारण ही घर में अनुशासन रहता है और ईश्वर का वास होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा वरिष्ठजन, अपने जीवन के अनुभवों से परिवार और समाज को आगे बढ़ाते हैं। परिवार में वरिष्ठजनों की मौजूदगी से घर में अपनापन और आत्मीयता का भाव आता है। वरिष्ठजन हमारे जीवंत अनुभव और विरासत हैं। उन्होंने कहा जीवन की गहरी समझ हमें वरिष्ठजनों के अनुभवों से ही मिलती है। मुख्यमंत्री ने बताया उनके जीवन में भी उनके माता-पिता के संस्कारों की बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा उनके स्वर्गीय पिताजी की सीख, आज भी उनका मार्गदर्शन करती है और माताजी का आशीर्वाद उन्हें शक्ति देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा वो प्रदेश के मुख्य सेवक होने के साथ ही प्रदेश के बेटे भी हैं। उन्होंने कहा उत्तराखंड के प्रत्येक वरिष्ठजन के सम्मान, सुरक्षा और सुविधा उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों को प्रतिमाह ₹ 1500 की पेंशन प्रदान की जा रही है। इसमें पति और पत्नी दोनों को अलग-अलग पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने बताया वर्तमान में प्रदेश के 9 लाख से अधिक वरिष्ठ नागरिकों को ₹ 147 करोड़ से अधिक की पेंशन उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा राज्य के विभिन्न जनपदों में वृद्धाश्रमों की व्यवस्था को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है। वर्तमान में बागेश्वर, चमोली और उत्तरकाशी में राजकीय वृद्धाश्रम संचालित हैं। सरकार द्वारा देहरादून, अल्मोड़ा और चम्पावत में भी नए वृद्धाश्रमों भवनों का निर्माण करवाया जा रहा है एवं हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल सहित विभिन्न क्षेत्रों में गैर-सरकारी संगठनों द्वारा भी वृद्धाश्रम संचालित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा उनका मानना है कि समाज में वृद्धाश्रमों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए थी। हमारे वरिष्ठजन को वृद्धाश्रम में नहीं, बल्कि परिवार के बीच सम्मान से रहने का अधिकार है। उन्होंने कहा केंद्र सरकार के सहयोग से अटल वयो अभ्युदय योजना के माध्यम से भी वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और समग्र विकास के लिए काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम लागू किया है। राज्य सरकार द्वारा दीनदयाल मातृ पितृ तीर्थाटन योजना के माध्यम से वरिष्ठजनों के लिए निःशुल्क यात्रा की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वरिष्ठजनों को आयुष्मान भारत योजना से मुफ्त इलाज की गारंटी मिली है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को विश्वास दिलाते हुए कहा कि आपका ये बेटा कभी आपके सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं में कोई कमी नहीं होने देंगे।

समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों पर वृद्धजनों के सम्मान के लिए यह दूसरा कार्यक्रम किया जा रहा है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बीते 5 सालों में उत्तराखंड की दशा बदली हैं। उन्होंने कहा भारतीय संस्कृति में बड़ों का सम्मान करने की परंपरा है और यह परंपरा हमेशा जीवंत रहनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से वृद्धजनों का सम्मान करने और उनकी सहायता करने का संकल्प लेने की बात कही।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, दायित्वधारी राम चंद्र गौड़, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद बिष्ट, सचिव श्रीधर बाबू अद्वांकी, निदेशक संजय कुमार, निदेशक जनजाति कल्याण संजय सिंह टोलिया, संयुक्त निदेशक जी.आर. नौटियाल, पूजा नेगी, हेमलता पाण्डेय, गोरधन सिंह, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

शारदा रिवरफ्रंट कॉरिडोर के कार्यों में धीमी प्रगति पर सीएस जताई नाराजगी

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में उत्तराखण्ड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) की एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में विभिन्न प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सभी परियोजनाओं को निर्धारित टाइमलाइन के अनुसार पूर्ण करने तथा परियोजनाओं की नियमित और प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने शारदा रिवरफ्रंट कॉरिडोर प्रोजेक्ट के कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कार्यदायी संस्था यूपीडीसीसी द्वारा लगभग दस माह में मात्र 10 प्रतिशत प्रगति किए जाने पर असंतोष व्यक्त करते हुए परियोजना के लिए डेडिकेटेड प्रोजेक्ट मैनेजर तैनात करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट मैनेजर की तैनाती कार्यस्थल पर ही सुनिश्चित की जाए, ताकि कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग हो और मौके पर आने वाली समस्याओं का तत्काल समाधान किया जा सके।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि यूआईआईडीबी के सभी प्रोजेक्ट्स की निर्धारित टाइमलाइन के साथ पर्ट चार्ट तैयार किया जाए और प्रत्येक बैठक में इसके अनुरूप परियोजनावार प्रगति प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं में निर्धारित समय के अनुरूप प्रगति नहीं हो रही है, उनमें कारणों की स्पष्ट पहचान करते हुए सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने प्रमुख सचिव नियोजन को भी परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने रिवर राफ्टिंग डेवलपमेंट से सम्बन्धित कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं के संचालन एवं अनुरक्षण के लिए यूपीडीसीसी को अगले पांच वर्षों के लिए अपनी समर्पित टीम विकसित करते हुए कार्यस्थल पर तैनात करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार एवं ऋषिकेश क्षेत्र के लिए अलग यूनिट की व्यवस्था की जाए, ताकि परियोजनाओं के संचालन एवं अनुरक्षण में किसी प्रकार की समस्या न हो।

मुख्य सचिव ने कहा कि कुंभ मेला 2027 को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता वाले कार्यों को निर्धारित समयसीमा में हर हाल में पूर्ण कराया जाए। उन्होंने सती कुंड से सम्बन्धित कार्यों को 15 दिसंबर तक पूर्ण करने के लिए श्रमिकों एवं शिफ्ट की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यों की गति बढ़ाने के साथ ही गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान रखा जाए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि हरिद्वार में कराए जा रहे कार्यों के लिए कार्यदायी संस्था के महाप्रबंधक हरिद्वार में ही तैनात रहकर कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करेंगे और परियोजनाओं की प्रगति की पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी एवं मंडलायुक्त को उपलब्ध कराएंगे। इस सम्बन्ध में आवश्यक आदेश तत्काल जारी करने के निर्देश भी दिए।

मुख्य सचिव ने सरफेस, अंडरग्राउंड एवं मैकेनिकल पार्किंग से सम्बन्धित नए कार्यों के सम्बन्ध में भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार क्षेत्र में नए पार्किंग प्रोजेक्ट हाथ में लेने से पूर्व जिलाधिकारी एवं मेलाधिकारी से लिखित रूप में अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त किया जाए। साथ ही, अन्य विभागों द्वारा तैयार की जा रही योजनाओं के साथ पार्किंग परियोजनाओं का समुचित इंटीग्रेशन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र में सरफेस, अंडरग्राउंड अथवा मैकेनिकल पार्किंग में से जो विकल्प अधिक व्यवहारिक एवं उपयुक्त हो, उसी के आधार पर पार्किंग का निर्माण किया जाए।

मुख्य सचिव ने यूआईआईडीबी के प्रोजेक्ट्स से सम्बन्धित वित्तीय मामलों की प्रभावी निगरानी के लिए फाइनेंसियल एवं ऑडिट कमेटी गठित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता एवं समयबद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव नितेश कुमार झा, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, सी. रविशंकर, डॉ. रणवीर सिंह चौहान, विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारी एवं यूआईआईडीबी के अधिकारी उपस्थित थे।

योजनाओं की प्रगति के साथ आमजन को मिल रहे लाभ का भी करें आंकलनः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में 25 बिंदु कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं की प्रगति के साथ उनके धरातल पर असर और आमजन को मिल रहे लाभ का भी आंकलन करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पिरूल कलेक्षन से लाभार्भियों को अब तक कितनी मॉनेटाइजेशन हुई है और कितने लोगों को इसका लाभ मिला है, इसका पूरा आंकड़ा तैयार किया जाए। साथ ही इससे लोगों की आय में कितना इजाफा हुआ, इसका भी आकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी योजना की सफलता केवल उसके तहत किए गए कार्यों से नहीं, बल्कि उससे लोगों को मिल रहे वास्तविक लाभ से तय होनी चाहिए। उन्होंने डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन और सेग्रिगेशन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कचरे के संग्रहण से लेकर उसके पृथक्करण और निस्तारण तक पूरी व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों एवं सचिव पेयजल को एसटीपी से सम्बन्धित कार्यों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता के अनुरूप एसटीपी का पूरा उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी एसटीपी की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए प्रभावी एवं केन्द्रीयकृत व्यवस्था तैयार की जाए। इससे एसटीपी के संचालन और निर्धारित मानकों के अनुपालन पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।

मुख्य सचिव ने उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बड़े कमर्शियल संस्थानों और ग्रुप हाउसिंग में उनके स्वयं के एसटीपी की व्यवस्था को गंभीरता से लागू कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सम्बन्धित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और मानकों की नियमित जांच की जाए। उन्होंने अतिक्रमण हटाने के साथ ही अतिक्रमण हटाने के बाद उन क्षेत्रों पर दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए जिलास्तर पर नियमित निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने जनपदों में पार्किंग विकसित करने से संबंधित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान लंबित योजनाओं में तेजी लाने और आ रही बाधाओं का समयबद्ध समाधान करने को कहा।

मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि 25 पॉइंट कार्यक्रम की नियमित और मासिक समीक्षा सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि समीक्षा में केवल आंकड़ों की प्रगति देखने के बजाय योजनाओं की जमीनी स्थिति, लाभार्थियों को मिल रहे लाभ और सामने आ रही समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन बिंदुओं पर प्रगति अपेक्षित स्तर पर नहीं है, वहां कारणों की पहचान कर समयबद्ध तरीके से सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ. आर. राजेश कुमार, विनोद कुमार सुमन, युगल किशोर पंत, धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव रीना जोशी, मनुज गोयल, रोहित मीणा, नवनीत पाण्डेय, सम्बन्धित विभागों के सचिव, अपर सचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सड़क सुरक्षा को लेकर डीएम ने सभी, दुर्घटना संभावित संवेदनशील क्षेत्रों में जागरूकता साइनेज स्थापित करने के दिए निर्देश

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनपद में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था, सड़क सुरक्षा साइनेज, खराब स्ट्रीट एवं ट्रैफिक लाइटों की मरम्मत, मसूरी क्षेत्र में रेस ड्राइविंग पर प्रभावी कार्रवाई तथा मानसून के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों एवं गड्ढों की मरम्मत सहित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में लगेंगे स्पष्ट एवं प्रभावी जागरूकता साइनेज
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित करते हुए वहां पर्याप्त संख्या में स्पष्ट एवं प्रभावी जागरूकता साइनेज लगाए जाएं, ताकि वाहन चालकों को संभावित खतरों के प्रति समय रहते सचेत किया जा सके। उन्होंने विशेष रूप से आशारोड़ी टनल के आसपास के क्षेत्र सहित अन्य दुर्घटना संभावित स्थानों पर सड़क सुरक्षा से संबंधित आवश्यक उपाय प्राथमिकता से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत आशारोड़ी क्षेत्र में आवश्यक सुरक्षा उपाय किए गए हैं। यहां 58 साइन बोर्ड, 485 मीटर रंबल स्ट्रिप्स, 1880 मीटर मीडियन मार्कर तथा 500 मीटर सोलर स्टड्स स्थापित किए जा चुके हैं।

जिलाधिकारी ने नगर क्षेत्र में खराब पड़ी स्ट्रीट लाइट एवं ट्रैफिक लाइटों का संज्ञान लेते हुए स्मार्ट सिटी के माध्यम से तत्काल मेंटिनेंस कराकर उन्हें ऑपरेशनल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में खराब लाइटों की मरम्मत एवं रखरखाव में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

मसूरी में रेस ड्राइविंग पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश
जिलाधिकारी ने मसूरी क्षेत्र में रेस ड्राइविंग की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध नियमानुसार प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही संवेदनशील एवं अधिक यातायात वाले मार्गों पर आवश्यक निगरानी एवं प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत किया जाए।

नगर निगम क्षेत्र की 92 सड़कों को गड्ढामुक्त करने हेतु 46 अधिकारियों की तैनाती
निर्माण कार्यों एवं मानसून अवधि में नगर निगम देहरादून क्षेत्रांतर्गत विभिन्न प्रमुख मार्गों के क्षतिग्रस्त होने तथा सड़कों को गड्ढामुक्त किए जाने हेतु जिलाधिकारी ने 46 जिला स्तरीय अधिकारियों की तैनाती की है।

नामित अधिकारी अपने-अपने आवंटित मार्गों का स्थलीय निरीक्षण करते हुए सड़क पर मौजूद गड्ढों, क्षतिग्रस्त हिस्सों तथा आवश्यक मरम्मत एवं सुधारात्मक कार्यों को चिन्हित करेंगे।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों द्वारा संबंधित मार्ग की स्थिति की फोटो सहित विस्तृत सूचना एवं आख्या तैयार की जाएगी। यह रिपोर्ट संबंधित सड़क विभाग एवं कार्यदायी संस्था को आवश्यक मरम्मत एवं सुधारात्मक कार्रवाई हेतु उपलब्ध कराई जाएगी। जिलाधिकारी ने सभी नामित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने आवंटित मार्गों का स्थलीय निरीक्षण निर्धारित अवधि में पूर्ण करते हुए 02 दिवस के भीतर रिपोर्ट जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, देहरादून को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सड़क की स्थिति, चिन्हित गड्ढों एवं क्षतिग्रस्त हिस्सों की जानकारी फोटो सहित स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाए, ताकि संबंधित विभाग द्वारा आवश्यक कार्रवाई समयबद्ध रूप से सुनिश्चित की जा सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल यातायात नियमों के अनुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित सड़क संरचना, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, स्पष्ट साइनेज, प्रभावी निगरानी एवं समयबद्ध मरम्मत भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से सड़क सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्यवाही प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, उप जिलाधिकारी मुख्यालय रविन्द्र ज्वांठा, पुलिस मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 मनोज कुमार शर्मा, क्षेत्राधिकारी यातायात, अधीक्षण अभियंता लोनिवि ओमपाल सिंह, संभागीय परिवहन अधिकारी अनिता चमोला, अधिशासी अभियंता लोनिवि दीपक यादव एवं भृगु द्विवेदी, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार सहित एनएच, एनएचएआई एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्य सचिव ने की मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को मुख्यमंत्री घोषणाओं को प्राथमिकता पर लेते हुए निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लम्बित घोषणाओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन घोषणाओं का विलोपन या मर्ज किया जाना है, उनके सम्बन्ध में समय से विलोपन अथवा मर्ज की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, घोषणाओं के मर्ज अथवा अन्य विभागों को हस्तांतरण से संबंधित मामलों में भी त्वरित कार्रवाई की जाए।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में कुल 4611 मुख्यमंत्री घोषणाओं में से 2852 घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि 1759 घोषणाएं लम्बित हैं और 447 का विलोपन या मर्ज किया गया है। लम्बित 1759 घोषणाओं में से 1397 पर विभिन्न स्तरों पर कार्यवाही गतिमान है, एवं इनमें से 59 आंशिक रूप से पूर्ण हो चुकी हैं। 303 घोषणाएं अभी भी लम्बित हैं। मुख्य सचिव द्वारा 11 अगस्त, 2026 की समीक्षा के समय 627 घोषणाएं लम्बित थी, जिनकी संख्या अब घटकर 303 रह गयी है।

मुख्य सचिव ने लम्बित घोषणाओं के सम्बन्ध में विभागवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं के कार्यों में अनावश्यक विलम्ब न हो और विभिन्न स्तरों पर लम्बित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अगली समीक्षा बैठक अक्टूबर माह के मध्य में आयोजित किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न विभागों के मध्य आपसी तालमेल की कमी के कारण लंबित घोषणाओं को सम्बन्धित विभाग आपसी समन्वय के साथ पूर्ण करें। योजनाओं को समय से पूर्ण करने के लिए भूमि हस्तांतरण सहित अन्य प्रक्रियाओं के सम्बन्ध में विभागों के बीच निरन्तर संवाद एवं समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि जहां तक संभव हो, विभिन्न कार्यों को समानांतर रूप से प्रारम्भ किया जाए, ताकि समय की बचत हो और योजनाओं को निर्धारित समय में पूरा किया जा सके। उन्होंने विभागों को मुख्यमंत्री घोषणाओं की प्रगति को लगातार पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन विभागों के पास पोर्टल की यूजर आईडी एवं पासवर्ड उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें तत्काल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने सचिव एवं अपर सचिव स्तर के अधिकारियों को घोषणाओं की गंभीरता से मॉनिटरिंग करते हुए कार्यों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सम्पूर्ण यमुनोत्री ट्रैक रूट के सुधारीकरण की कार्ययोजना तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने इस सम्बन्ध में अगले 15 दिनों में विस्तृत प्रस्तुतिकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने ट्रैक रूट के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं की संभावनाओं पर भी कार्य करने को कहा। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर ईको पार्क आदि की घोषणाओं के सम्बन्ध में कहा कि परिसंपत्ति निर्माण के बाद उसके संचालन एवं रखरखाव की व्यवस्था पूर्व में ही निर्धारित की जाए, ताकि परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने पौड़ी शहर में मुख्य बाजार धारा रोड से एजेंसी चौक तक हेरिटेज स्ट्रीट के कार्य को आवास विभाग से पर्यटन विभाग को हस्तांतरित करने तथा मल्टीस्टोरी पार्किंग से सम्बन्धित आवास विभाग को भेजे गए प्रस्तावों पर शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एक ही क्षेत्र में विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे अवस्थापना विकास एवं सौन्दर्यीकरण से सम्बन्धित कार्यों को आपस में समन्वित करते हुए एकीकृत रूप से किया जाए, ताकि सभी कार्यों का बेहतर प्रभाव दिखाई दे।

मुख्य सचिव ने फलों के भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेज निर्माण में भूमि की उपयुक्तता पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि अनुपयुक्त सरकारी भूमि पर कोल्ड स्टोरेज बनाने के बजाय आवश्यकता के अनुरूप उपयुक्त भूमि क्रय कर कोल्ड स्टोरेज का निर्माण किया जाए, ताकि उसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके। उन्होंने प्रदेश के सभी शहरों में ओपन स्पेस, सिटी पार्क अथवा ईको पार्क जैसी सुविधाओं के विकास की दिशा में कार्य किया जाए। सरकारी भूमि की अनुपलब्धता की स्थिति में निजी भूमि क्रय कर ऐसी सुविधाओं के विकास की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, डॉ. आर. राजेश कुमार, विनोद कुमार सुमन, युगल किशोर पंत, धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव रीना जोशी, मनुज गोयल, रोहित मीणा, नवनीत पाण्डेय, सम्बन्धित विभागों के सचिव, अपर सचिव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखण्ड और अन्य राज्यों के युवाओं के बीच संवाद और अनुभवों के आदान प्रदान को दिया जाएगा बढ़ावाः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में हरियाणा भ्रमण पर जा रहे उत्तराखण्ड के युवाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के अंतरराज्यीय भ्रमण युवाओं को देश के विभिन्न राज्यों की संस्कृति, जीवनशैली, विकास कार्यों और नवाचारी पहलों को निकट से समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के युवा विभिन्न राज्यों में जाकर वहां की संस्कृति, स्थानीय विशेषताओं, विकास से जुड़ी पहलों और सरकारों द्वारा अपनाई जा रही अच्छी कार्यप्रणालियों को जानें तथा उपयोगी अनुभवों को उत्तराखण्ड के परिप्रेक्ष्य में भी साझा करें। इसी प्रकार अन्य राज्यों के युवाओं को भी उत्तराखण्ड आने और यहां की संस्कृति, पर्यटन, स्थानीय उत्पादों तथा राज्य में संचालित विभिन्न विकास एवं जनकल्याणकारी पहलों को जानने के अवसर दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस से प्रारंभ हुए सेवा संकल्प अभियान की भावना भी समाज के विभिन्न वर्गों, विशेष रूप से युवाओं को सेवा, जनभागीदारी और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने की है। युवाओं के बीच इस प्रकार का संवाद विभिन्न राज्यों की अच्छी पहलों को समझने और आपसी अनुभव साझा करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

मुख्यमंत्री ने हरियाणा भ्रमण पर जा रहे युवाओं से कहा कि वे वहां की समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली इतिहास, खान-पान, खेल परंपरा, कृषि और स्थानीय जीवनशैली को करीब से देखें। स्थानीय युवाओं, खिलाड़ियों, किसानों और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे लोगों से संवाद कर उनके अनुभवों को जानें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के युवा राज्य के प्रतिनिधि के रूप में अन्य प्रदेशों में जाते हैं। ऐसे में वे देवभूमि की समृद्ध संस्कृति, लोकपर्वों, स्थानीय खान-पान, पर्यटन स्थलों, होम-स्टे, स्थानीय उत्पादों, मिलेट्स और हस्तशिल्प के बारे में भी लोगों को जानकारी दें। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में चारधाम के साथ ही आदि कैलाश, जागेश्वर, कैंची धाम, शीतकालीन पर्यटन, साहसिक पर्यटन तथा अनेक ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जिनकी जानकारी देश के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों की जानकारी भी अन्य राज्यों तक पहुंचाने में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम केवल भ्रमण तक सीमित न रहें, बल्कि विभिन्न राज्यों के युवाओं, संस्कृति, अनुभव और विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम बनें। इससे युवाओं को देश की विविधता को समझने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे अच्छे कार्यों से सीखने का अवसर मिलेगा।