खटीमा में अपशिष्ट प्रबंधन को सीएम धामी ने दिखाई 15 वाहनों को हरी झंडी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 15 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनमें नेस्ले इंडिया द्वारा सीएसआर के तहत उपलब्ध कराए गए सात इलेक्ट्रिक कचरा कलेक्शन वाहन भी शामिल हैं। नेस्ले इंडिया द्वारा धर्मपुर, छत्तरपुर, बिंदूखेड़ा (फौजी मटकोटा), कीरतपुर, बागवाला, दानपुर और नगला तराई के लिए एक-एक इलेक्ट्रिक कचरा कलेक्शन वाहन उपलब्ध कराया गया है। इस अवसर पर ब्रिटानिया की ओर से स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ठोस एवं तरल अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन में आधुनिक संसाधनों, जनभागीदारी और कॉरपोरेट सेक्टर के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर विकसित किया जा रहा सेल्फ-सस्टेनिंग मॉडल स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में कचरा संग्रहण एवं निस्तारण की व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाया जाए।

मुख्य विकास अधिकारी दिवेश सासनी ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देशन में जनपद ऊधम सिंह नगर की 373 ग्राम पंचायतों में 71 क्लस्टरों के माध्यम से ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की कार्ययोजना तैयार की गई है। नगर निकायों से लगे ग्रामीण क्षेत्रों तथा प्रमुख स्थानीय बाजारों में नियमित कूड़ा संग्रहण एवं निस्तारण के लिए संबंधित नगर निकायों के साथ एमओयू किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि जनपद में अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कुल 231 वाहनों का बेड़ा तैयार किया गया है। इनमें स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 134 ई-रिक्शा एवं 75 ट्रैक्टर-ट्रॉली के साथ ही सीएसआर एवं अन्य योजनाओं से उपलब्ध कराए गए वाहन शामिल हैं। विभिन्न विकासखंडों में जिला पंचायत द्वारा कॉम्पेक्टर का भी संचालन किया जा रहा है।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, मेयर विकास शर्मा, ब्लॉक प्रमुख रीना गौतम, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, एसएसपी अजय गणपति, मुख्य विकास अधिकारी दिवेश सासनी, अपर सचिव मुख्यमंत्री एवं सदस्य सचिव सीएसआर मनमोहन मैनाली तथा नेस्ले इंडिया के कॉरपोरेट अफेयर्स एवं सस्टेनेबिलिटी डायरेक्टर कुंवर हिम्मत सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

खटीमा में सीएम धामी ने किया 108.84 करोड़ की 15 विकास योजनाओं का शिलान्यास

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्दीघेरा, खटीमा में ₹7.23 करोड़ की लागत से नवनिर्मित गौशाला का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने ₹108.84 करोड़ की 15 विकास योजनाओं का शिलान्यास भी किया। इनमें प्रमुख रूप से ₹34.44 करोड़ की लागत से राज्य मार्ग-70 के सत्रहमील से नानकसागर प्रभाग तक 13.60 किमी मार्ग के उच्चीकरण का कार्य शामिल है।

मुख्यमंत्री ने हल्दीघेरा गौशाला के भविष्य में आवश्यकता के अनुसार विस्तार की घोषणा करते हुए कहा कि इससे अधिक से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आश्रय उपलब्ध कराया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गौशाला निराश्रित गोवंश के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। सड़कों पर विचरण करने वाले निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय मिलने से जहां उनकी बेहतर देखभाल सुनिश्चित होगी, वहीं किसानों और स्थानीय लोगों को भी राहत मिलेगी। इससे सड़कों पर गोवंश के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता का विशेष स्थान है। गौ माता का संरक्षण केवल हमारी परंपरा ही नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य, धर्म और जिम्मेदारी भी है। देवभूमि उत्तराखण्ड सदैव गौ संरक्षण और गौ सेवा की परंपरा वाली भूमि रही है। राज्य सरकार निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गौ सदनों के माध्यम से 16 हजार से अधिक निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय दिया जा रहा है। ग्राम्य गौ सेवक योजना को भी प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। शहरी विकास और पंचायती राज विभाग के सहयोग से प्रदेश में 63 स्थानों पर गौशाला निर्माण के लिए भूमि चिन्हित की गई है। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण के साथ-साथ गोवंश को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। बद्री गाय के शुद्ध घी और दुग्ध उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विशेष ग्रोथ सेंटर स्थापित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ ही पशुधन के संवर्धन की दिशा में भी अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास और जनकल्याण के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खटीमा सहित पूरे ऊधम सिंह नगर जनपद में सड़क, पुल, शिक्षा, बाढ़ सुरक्षा और अन्य अवस्थापना सुविधाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

सीएस ने की बद्री व केदार धाम मास्टर प्लान के विभिन्न निर्माण व पुनर्निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में बद्रीनाथ धाम-केदारनाथ धाम मास्टर प्लान के तहत चल रहे विभिन्न निर्माण एवं पुनर्निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने मास्टर प्लान के अंतर्गत एसेट हैंडओवर के कार्य की जानकारी ली। उन्होंने केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों के तहत सेंट्रल स्ट्रीट के अंतर्गत 6 बिल्डिंग्स को टॉप मोस्ट प्रायोरिटी पर रखते हुए, यात्रा सीजन के उपरांत कार्य शुरू कराए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने सम्बन्धित स्टेकहोल्डर्स के साथ आवश्यक एग्रीमेंट साइन करने की प्रक्रिया को जल्द पूरा कराए जाने की बात कही, ताकि कार्य प्रारम्भ करने में किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने संस्कृति मंत्रालय द्वारा कराए जा रहे विभिन्न कार्यों की भी जानकारी ली। उन्होंने जिलाधिकारी को इन कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण हो सकें।

मुख्य सचिव ने मास्टर प्लान क्षेत्र से बाहर किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति न दिए जाने के महत्त्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए तत्काल जीओ जारी किए जाने की बात कही। विशेष रूप से फ्रैजाइल एवं एवलॉन्च प्रोन एरिया में किसी भी एजेंसी द्वारा निर्माण कार्य की अनुमति न दिए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों के सम्बन्ध में सुरक्षा एवं पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के फेज-1 एवं फेज-2 के अंतर्गत चल रहे विभिन्न कार्यों की प्रगति की भी जानकारी ली। उन्होंने सम्बन्धित अधिकारियों को कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए। बैठक में बद्रीनाथ में निर्माणाधीन अस्पताल के सम्बन्ध में भी जानकारी ली गई। जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि अस्पताल को लगभग 15 दिनों में प्रारम्भ किए जाने की योजना है। मुख्य सचिव ने अस्पताल को निर्धारित समयसीमा में प्रारंभ करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, एपीसीसीएफ डॉ. विवेक पाण्डेय, सुरेन्द्र मेहरा, सीसीएफ प्रसन्ना कुमार पात्रो, अपर सचिव विनीत कुमार, हिमांशु खुराना एवं अभिषेक रोहिला सहित सम्बन्धित जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

टिहरी झील को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने को लेकर मुख्य सचिव ने ली बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में पर्यटन विभाग के साथ बैठक के दौरान टिहरी झील को ‘वन स्टेट, वन ग्लोबल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने के लिए समग्र मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि टिहरी लेक क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए पूरे क्षेत्र की दीर्घकालिक और सुनियोजित प्लानिंग की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी झील के आसपास के लगभग 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सम्मिलित करते हुए समग्र मास्टर एवं जोनल प्लान तैयार किया जाए। इसमें सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार की भूमि को शामिल किया जाए। उन्होंने बेतरतीब विकास को रोकने के लिए पूरे क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार करने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के लिए आवश्यकतानुसार जोन निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान तैयार करते समय सभी सम्बन्धित स्टेकहोल्डर्स से विचार-विमर्श किया जाए, ताकि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और पर्यटन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना तैयार की जा सके। मास्टर प्लानिंग के लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), नई दिल्ली एवं एसपीए, भोपाल से तकनीकी सहयोग लेने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी झील क्षेत्र को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने के लिए पूरे लेक एरिया में विभिन्न पर्यटन गतिविधियों को समाहित करते हुए आकर्षण के प्रमुख केंद्र (मैगनेट एरिया) विकसित किए जाएं। इसके लिए फेजवाइज योजना तैयार की जाए, ताकि प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न परियोजनाओं को विकसित किया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि टिहरी लेक में ऐसी पर्यटन गतिविधियों की विस्तृत योजना तैयार की जाए, जिससे पर्यटक क्षेत्र में कम से कम एक-दो दिन या उससे अधिक समय तक क्षेत्र में ठहर सकें। वाटर स्पोर्ट्स के साथ ही एडवेंचर, ट्रैकिंग, नेचर, कल्चर, विलेज टूरिज्म सहित विभिन्न गतिविधियों को एकीकृत रूप से विकसित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि अप्रैल, मई और जून में जलस्तर कम रहने के दौरान भी पर्यटकों के लिए पर्याप्त गतिविधियां उपलब्ध रहें, इसके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। वर्षभर पर्यटन गतिविधियों का संचालन सुनिश्चित करने के लिए मौसम एवं जलस्तर के अनुसार गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया जाए। उन्होंने टिहरी झील क्षेत्र में नए ट्रैकिंग रूट्स एवं ट्रेल्स विकसित करने तथा आसपास के गांवों को पर्यटन से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए विलेज एवं कल्चरल विजिट की व्यवस्था विकसित की जा सकती है, जिससे उन्हें स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और ग्रामीण जीवन से परिचित होने का अवसर मिले और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि टिहरी लेक को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की समग्र कार्ययोजना और प्रस्तावित गतिविधियों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन तैयार की जाए, जिसे प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। मुख्य सचिव ने अगली बैठक में टीएचडीसी के अधिकारियों को भी आमंत्रित करने के निर्देश दिए, ताकि झील क्षेत्र के विकास से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर समन्वित रूप से चर्चा की जा सके।

इस अवसर पर सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, एपीसीसीएफ डॉ. विवेक पाण्डेय, सुरेन्द्र मेहरा, सीसीएफ प्रसन्ना कुमार पात्रो, अपर सचिव विनीत कुमार, हिमांशु खुराना, अभिषेक रोहिला एवं जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल उपस्थित थीं।

उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियां पर्वतारोहण और साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं प्रदान करती हैंः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, उत्तरकाशी द्वारा संचालित चार सफल पर्वतारोहण अभियानों का फ्लैग-इन किया। इनमें जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स, पहलगाम के साथ संयुक्त रूप से संचालित माउंट एकांकागुआ अभियान भी शामिल था।

मुख्यमंत्री ने सभी पर्वतारोहियों को सफल अभियानों के लिए बधाई देते हुए चुनौतीपूर्ण उच्च पर्वतीय परिस्थितियों में उनके साहस, अनुशासन, तकनीकी दक्षता और टीम भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि पर्वतारोहियों की ये उपलब्धियां उत्तराखण्ड के साथ ही देश के युवाओं को साहसिक गतिविधियों के प्रति प्रेरित करेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने पर्वतारोहण, साहसिक खेलों, युवा विकास और उच्च हिमालयी प्रशिक्षण के क्षेत्र में देश और प्रदेश में महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। संस्थान द्वारा युवाओं को पर्वतारोहण एवं साहसिक गतिविधियों के लिए उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ उनमें साहस, नेतृत्व, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता भी विकसित की जा रही है।

माउंट एकांकागुआ (6,961 मीटर), अर्जेंटीना के लिए छप्ड और श्रप्ड-ॅै के संयुक्त अभियान का नेतृत्व कर्नल हेम चंद्र सिंह ने किया। छह सदस्यीय अभियान दल ने 22 फरवरी 2026 को माउंट एकांकागुआ के शिखर पर सफल आरोहण किया। इस संयुक्त अभियान को रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक से फ्लैग ऑफ किया था।

नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के नुन-कुन अभियान-2026 का नेतृत्व संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल एस.एस. राजपुरोहित ने किया। अभियान दल ने 15 अगस्त 2026 को माउंट कुन की 7,077 मीटर ऊंची चोटी पर सफल आरोहण किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हासिल की गई यह उपलब्धि अभियान दल के लिए विशेष रही। इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए दल ने 26 अगस्त 2026 को माउंट डेल्टा-41 की 5,908 मीटर ऊंची चोटी तथा 31 अगस्त 2026 को माउंट नुन की 7,135 मीटर ऊंची चोटी पर भी सफल आरोहण किया। इस प्रकार अभियान दल ने एक ही अभियान के दौरान नुन-कुन पर्वत श्रृंखला की तीन चोटियों पर सफल आरोहण की उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की।

मुख्यमंत्री ने सभी अभियान सदस्यों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियां पर्वतारोहण और साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं प्रदान करती हैं। पर्वतारोहियों की ऐसी उपलब्धियां युवाओं को साहसिक खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित करने के साथ ही उत्तराखण्ड की पहचान को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करती हैं।

इस अवसर पर विशेष प्रमुख सचिव खेल एवं युवा कल्याण अमित कुमार सिन्हा, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के प्रधानाचार्य कर्नल एस.एस. राजपुरोहित, जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स, पहलगाम के प्रधानाचार्य कर्नल हेम चंद्र सिंह, कैप्टन जी. संतोष कुमार सहित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के अधिकारी एवं विभिन्न पर्वतारोहण अभियानों के सदस्य उपस्थित थे।

सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को टैबलेट देने की सीएम पहले ही कर चुके हैं घोषणा, डीबीटी के माध्यम से मिलेगा लाभ

किसी विद्यार्थी के सपने को पंख देने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती, कई बार एक संवेदनशील सोच और किसी की जरूरत को समझने की भावना भी बड़ा बदलाव ला सकती है। ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम के दौरान हरिद्वार की छात्रा लवप्रीत कौर ने जब अपनी जरूरत से पहले जरूरतमंद विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने रखी, तो उसकी यह संवेदनशील सोच मुख्यमंत्री के मन को छू गई।

लवप्रीत ने मुख्यमंत्री के समक्ष यह विषय रखा था कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए आवश्यक डिजिटल संसाधन उपलब्ध होने चाहिए, ताकि संसाधनों के अभाव में उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। अपनी व्यक्तिगत आवश्यकता से पहले दूसरे विद्यार्थियों की चिंता करने वाली लवप्रीत की सोच ने मुख्यमंत्री धामी को प्रभावित किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ के दौरान ही विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को टैबलेट उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। इस योजना के अंतर्गत पात्र विद्यार्थियों को टैबलेट की सुविधा DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल संसाधनों की कमी किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा और प्रतिभा के विकास में बाधा न बने।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने लवप्रीत द्वारा कार्यक्रम के दौरान रखी गई आवश्यकता का भी व्यक्तिगत रूप से संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से शिक्षा विभाग के अधिकारी लवप्रीत के घर पहुंचे और उसे टैब प्रदान किया।

घर पर जब शिक्षा विभाग के अधिकारी टैब लेकर पहुंचे तो लवप्रीत के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। उसे शायद यह उम्मीद नहीं रही होगी कि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई उसकी बात इतनी जल्दी अमल में भी आएगी। टैब मिलने पर उसने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त करते हुए आत्मीयता से ‘थैंक्यू’ कहा।

लवप्रीत के लिए यह टैब केवल एक डिजिटल डिवाइस नहीं, बल्कि अपनी पढ़ाई को नई गति देने का माध्यम है। ऑनलाइन अध्ययन, शैक्षिक सामग्री तक आसान पहुंच और डिजिटल माध्यम से सीखने के अवसरों के साथ यह सुविधा उसकी शिक्षा को और बेहतर बनाने में सहायक होगी। साथ ही, लवप्रीत की कहानी यह भी संदेश देती है कि जब युवा केवल अपनी चिंता न कर समाज और अपने साथ पढ़ने वाले विद्यार्थियों के बारे में सोचते हैं, तो उनकी संवेदनशीलता बदलाव का माध्यम बन सकती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड का प्रत्येक विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा और आवश्यक संसाधनों से जुड़ सके। आर्थिक या अन्य किसी कारण से संसाधनों की कमी विद्यार्थियों की प्रतिभा और उनके सपनों के आड़े न आए, इसके लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल शिक्षा आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है और विद्यार्थियों को तकनीक से जोड़कर उनके लिए सीखने के नए अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लवप्रीत जैसी बेटियों की संवेदनशील सोच उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य की पहचान है। अपनी जरूरत से पहले दूसरे विद्यार्थियों की चिंता करना यह दर्शाता है कि हमारे युवाओं में केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की भावना भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे युवा ही विकसित और समर्थ उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

राज्य सरकार द्वारा सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को DBT के माध्यम से टैबलेट उपलब्ध कराने की पहल का उद्देश्य शिक्षा में डिजिटल संसाधनों की पहुंच को व्यापक बनाना है। इससे विद्यार्थियों को ऑनलाइन अध्ययन, डिजिटल पाठ्य सामग्री और ज्ञान के विभिन्न माध्यमों से जुड़ने में सुविधा मिलेगी। सरकार का प्रयास है कि गांव से लेकर शहर तक प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीकी संसाधनों का लाभ मिल सके।

‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ में लवप्रीत की कही गई बात और उसके बाद मुख्यमंत्री द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता इस कार्यक्रम की उस भावना को भी सामने लाती है, जिसमें युवाओं को केवल अपनी बात रखने का मंच ही नहीं, बल्कि उनकी सोच और सुझावों को शासन की प्राथमिकताओं से जोड़ने का अवसर दिया जा रहा है।

लवप्रीत के घर पहुंचा यह टैब इसी संवाद और संवेदनशीलता का एक जीवंत उदाहरण है—जहां एक छात्रा ने दूसरों की चिंता रखी, मुख्यमंत्री ने उस भावना को समझा और उसे सहायता के रूप में जमीन पर उतारने की पहल की।

ज्योलिकोट, नैनीताल दूषित पेयजल प्रकरण पर सीएस ने ली अधिकारियों के साथ बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में ज्योलिकोट, नैनीताल में दूषित पेयजल की घटना के सम्बन्ध में सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रकरण की विस्तृत समीक्षा की। मुख्य सचिव ने घटना पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को पेयजल की गुणवत्ता एवं जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है कि प्रदेश में मजबूत फील्ड नेटवर्क होने के बावजूद ज्योलिकोट में दूषित पेयजल की स्थिति की जानकारी समय पर प्राप्त नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि शिक्षक, पटवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, ट्यूबवेल ऑपरेटर सहित बड़ी संख्या में फील्ड स्तर के कार्मिकों का नेटवर्क हमारे पास है। इस नेटवर्क का प्रभावी उपयोग करते हुए इनफॉर्मेशन एवं फीडबैक मैकेनिज्म विकसित किया जाए, ताकि किसी भी क्षेत्र में पेयजल की गुणवत्ता या अन्य स्वास्थ्य आदि से सम्बन्धित समस्या की जानकारी तत्काल प्राप्त हो सके। इसके लिए प्रभावी सूचना एवं फीडबैक मैकेनिज्म तैयार कर नियमित रूप से इसकी समीक्षा की जाए।

प्रदेशभर की वाटर सप्लाई स्कीम्स की जियो मैपिंग और भौतिक सत्यापन के दिए निर्देश

मुख्य सचिव ने प्रदेशभर की प्रमुख वाटर सप्लाई स्कीम्स की जियो मैपिंग एवं जीआईएस जियो-रेफरेंसिंग कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वाटर सप्लाई सिस्टम में सोर्स से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने, स्टोरेज, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग प्वाइंट्स आदि तक पूरे नेटवर्क की मैपिंग करायी जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि अगले 15 दिनों में प्रदेशभर की प्रमुख वाटर सप्लाई स्कीम्स का भौतिक सत्यापन कराया जाए। इस दौरान सोर्स, स्टोरेज, पाइपलाइन, सीवर लाइन, क्रॉसिंग प्वाइंट्स तथा कंज्यूमर एंड पर संभावित लीकेज की जांच की जाए। स्टोरेज टैंकों की सफाई की तिथि, क्लोरीनेशन का रिकॉर्ड, क्लोरीन की उपलब्धता एवं उपयोग, पानी में कॉलीफॉर्म सहित अन्य आवश्यक पैरामीटर्स की जांच और उनका नियमित रिकॉर्ड सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने पेयजल एवं सीवरेज लाइनों के क्रॉसिंग प्वाइंट्स को विशेष रूप से चिन्हित कराए जाने एवं जहां पुराने पाइप हैं, वहां उनके रिप्लेसमेंट सहित आवश्यक रेमेडियल मेजर्स लिए जाने के निर्देश दिए।

पेयजल एवं सीवरेज लाइनों की जांच के लिए एसओपी तैयार कर कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए

मुख्य सचिव ने कहा कि पेयजल लाईनों एवं सीवरेज लाइनों की जांच के लिए स्पष्ट एसओपी तैयार कर उसका कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि इंदौर की घटना के बाद विस्तृत एसओपी जारी की गई थी, इसके बावजूद यदि कहीं पेयजल दूषित होने की स्थिति सामने आती है तो यह देखना आवश्यक है कि एसओपी का पालन किस स्तर पर नहीं हुआ और उसके कारण क्या रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में प्रमुख पेयजल परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

पेयजल की नियमित क्वालिटी टेस्टिंग भी करेगा यूकेपीसीबी, मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

मुख्य सचिव ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एसटीपी, सरफेस वाटर के साथ ही प्रमुख शहरों में नियमित पेयजल की क्वालिटी टेस्टिंग की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रदेश में सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का सरप्राइज इंस्पेक्शन भी कराए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि जहां भी दूषित पेयजल अथवा इस प्रकार के मामले सामने आते हैं, वहां तत्काल स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जाए। सीएमओ एवं सीएमएस स्तर की व्यवस्थाओं को रिएक्टिवेट करते हुए डॉक्टरों की टीम को सक्रिय रखा जाए तथा अगले 15 दिनों में प्रदेशभर में आवश्यक स्वास्थ्य सर्विलांस एवं जांच की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सर्विलांस सिस्टम किस प्रकार कार्य कर रहा है, इसकी नियमित समीक्षा की जाए।

नियमित सूचना एवं फीडबैक के लिए परमानेंट सर्विलांस मैकेनिज्म किया जाए तैयार

मुख्य सचिव ने कहा कि जिला स्तर पर गठित समितियां केवल औपचारिक बैठक तक सीमित न रहें। समितियां ग्राउंड लेवल अधिकारियों के साथ ब्रेनस्टॉर्मिंग कर अपने क्षेत्रों से नियमित सूचना एवं फीडबैक प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था वन टाइम एक्सरसाइज नहीं बल्कि परमानेंट सर्विलांस मैकेनिज्म के रूप में विकसित की जानी चाहिए। इसके लिए आवश्यकता के अनुसार स्थायी स्टैंडिंग कमेटी गठित करते हुए नियमित बैठकें आयोजित की जाएं।

मुख्य सचिव ने कहा कि विभाग को अपने सिस्टम को दुरुस्त करने के साथ-साथ इंस्टीट्यूशनल मेमोरी का भी उपयोग करना चाहिए। सेवानिवृत्त लाइनमैन एवं लंबे समय तक फील्ड में कार्य कर चुके अनुभवी कार्मिकों की सेवाएं लेकर पुराने नेटवर्क, पाइपलाइन, क्रॉसिंग एवं संवेदनशील स्थलों की जानकारी प्राप्त करते हुए उनको दुरूस्त किए जाने की आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में इस प्रकार की घटना होने पर प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर विभागाध्यक्षों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

इस अवसर पर सचिव डॉॅ. रणवीर सिंह चौहान, डॉ. वी. षणमुगम, सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड डॉ. पराग मधुकर धकाते, मुख्य महाप्रबन्धक जल संस्थान श्री डी.के. सिंह एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी नैनीताल श्री ललित मोहन रयाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंडः बद्रीनाथ धाम में यात्री संख्या के सभी पुराने रिकॉर्ड टूटे

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में चारधाम यात्रा लगातार नए आयाम स्थापित कर रही है। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के बाद अब बद्रीनाथ धाम में दर्शनार्थियों की संख्या ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। धाम के यात्रा इतिहास में यहां पहली बार श्रद्धालुओं की संख्या 17 लाख 79 हजार 805 पहुंच चुकी है। जबकि धाम के कपाट बंद होने में अभी डेढ़ से पौने दो महीने का समय शेष है।

23 अप्रैल को शुरू हुई बद्रीनाथ यात्रा 22 सितंबर को 153 दिनों में ही आस्था का नया रिकॉर्ड बना चुकी है।
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड राज्य के स्थापना वर्ष 2000 में बद्रीनाथ धाम में कुल दर्शनार्थियों की संख्या 06 लाख 95 हजार 332 थी। वर्ष 2007 में यह आंकड़ा बढ़कर 07 लाख 68 हजार 107 पहुंच गया। वर्ष 2008 और 2010 में यह संख्या 10 लाख पार हुई लेकिन 2014 में भीषण आपदा भक्तों की राह में रोड़ा बन गई। श्रद्धालुओं की संख्या 01 लाख 59 हजार 575 पर सिमट गई।

वर्ष 2018 और 2019 में क्रमशरू 10,48,051 और 12,44,993 श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे। लेकिन फिर कोरोना संक्रमण के चलते यह आंकड़ा डेढ़ से दो लाख के बीच सिमट गया। वर्ष 2020 में मात्र 1,55,055 और 2021 में 1,99,409 तीर्थयात्री दर्शन को पहुंचे।

धामी सरकार के कुशल यात्रा प्रबंधन और यात्री सुविधाओं का विस्तार होने से 2022 से भगवान बद्रीविशाल जी के भक्तों की संख्या लगातार रिकॉर्ड बनाती गई है। वर्ष 2022 में 17,63,578, 2023 में 17,80,429, 2024 में 17,74, 264 और 2025 में सर्वाधिक 17,78,298 श्रद्धालु भगवान बद्रीविशाल के दर्शन को पहुंचे। अब मौसम सुधरने के साथ ही यहां हर रोज यात्रियों की संख्या बढ़ रही है। मंगलवार को 6,685 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

कोट——-
चारधाम यात्रा के दूसरे चरण में दर्शनार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए धामों और पड़ावों में यात्री सुविधाओं पर खास फोकस किया गया है। स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में श्री बदरीनाथ धाम को उसके धार्मिक एवं पौराणिक महत्व के अनुरूप भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप देने की दिशा में तेजी से कार्य किए जा रहे हैं। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

-पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

सीएम धामी ने हरिद्वार में प्रथम पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पतंजलि वेलनेस योगग्राम, ग्राम औरंगाबाद, हरिद्वार में प्रथम पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् के उद्घाटन समारोह में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने गुरुकुलम् के शुभारंभ पर योगगुरु स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण तथा समस्त पतंजलि परिवार को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार हमारी आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रमुख केंद्र है। देवभूमि में पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् का शुभारंभ भारत की गौरवशाली ज्ञान परंपरा को आधुनिक युग से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि भारत की गुरुकुल परंपरा हजारों वर्षों से ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण का आधार रही है। गुरुकुलों में विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ जीवन जीने की कला और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भी बोध कराया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सा विद्या या विमुक्तये’ का भाव हमारी प्राचीन शिक्षा परंपरा का आधार रहा है। सच्ची शिक्षा वही है, जो मनुष्य को अज्ञान, भय और संकीर्णता से मुक्त कर उसके व्यक्तित्व का समग्र विकास करे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगा। यहां आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों का समन्वय विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में तेजी से बदलती दुनिया में गुरुकुल शिक्षा की प्रासंगिकता और बढ़ी है। आधुनिक ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन और संतुलित जीवन शैली की शिक्षा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने योग, आयुर्वेद, शिक्षा, अनुसंधान और जन-स्वास्थ्य के क्षेत्रों में निरंतर कार्य किया है। स्वामी रामदेव ने योग को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जबकि आचार्य बालकृष्ण द्वारा आयुर्वेद के अध्ययन, शोध और प्रसार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में कौशल, नवाचार, भारतीय ज्ञान परंपरा और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर विशेष बल दिया गया है। उत्तराखण्ड भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और परंपरा एक-दूसरे की विरोधी नहीं बल्कि पूरक हैं। अपनी जड़ों और विरासत से जुड़कर आधुनिक ज्ञान को अपनाने वाली युवा पीढ़ी भविष्य की चुनौतियों का अधिक आत्मविश्वास से सामना कर सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन और संस्कृति के अध्ययन एवं शोध को बढ़ावा देने के लिए दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र स्थापित किया गया है। राज्य सरकार का प्रयास है कि युवा पीढ़ी अपनी समृद्ध विरासत को जाने, समझे और उसे विश्व के समक्ष आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में विज्ञान, शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी विकसित की जा रही है। विभिन्न क्षेत्रों में साइंस एवं इनोवेशन सेंटर सहित वैज्ञानिक गतिविधियों के लिए आवश्यक संसाधन विकसित किए जा रहे हैं। राज्य में स्टार्टअप और इनोवेशन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले लगभग पांच वर्षों में करीब 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में रोजगार के अवसर मिले हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को पर्यटन के साथ-साथ ज्ञान, योग, आयुर्वेद और अध्यात्म के प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् जैसे शिक्षण संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण सहयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् आने वाले समय में उत्तराखण्ड और देश के साथ विश्वभर के विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, विज्ञान, योग और आयुर्वेद के अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी ज्ञान, संस्कार और सेवा की भावना के साथ समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

इस दौरान कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, विधायक ज्वालापुर ई.रवि बहादुर, पूर्व कैबिनेट स्वामी यतिस्वारानंद, गोल्डन बाबा, स्वामी भू देव, जिलाध्यक्ष भाजपा आसुतोष शर्मा, जिला अध्यक्ष भाजपा रुड़की डॉ मधु सिंह, राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, राज्य मंत्री आदेश सैनी, श्यामवीर सैनी, अजीत सिंह, मेयर नगर निगम रुड़की अनीता अग्रवाल, वरिष्ठ कार्यकर्ता भाजपा राजेंद्र चौधरी, लव शर्मा, पूर्व मेयर मनोज गर्ग, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ ललित नारायण मिश्र, एसपी ट्रैफिक निशा यादव, जॉइन मजिस्ट्रेट रुड़की दीपक रामचंद्र सेठ, सिटी मजिस्ट्रेट हरिद्वार हर गिरी, उप जिलाधिकारी हरिद्वार योगेश मेहरा सहित बड़ी संख्या संस्थान के छात्र-छात्राएं एवं जनप्रतिनिधि में मौजूद रहे।

आईआईएम काशीपुर का कैंपस देहरादून में स्थापित होने की प्रक्रिया शुरू, सीएस ने किया भूमिपूजन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने देहरादून में भारतीय प्रबन्धन संस्थान (आईआईएम) काशीपुर के देहरादून कैंपस का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने आईआईएम काशीपुर का कैंपस देहरादून में स्थापित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

मुख्य सचिव ने कहा कि देहरादून में आईआईएम काशीपुर का कैंपस खुलने से प्रदेश के साथ ही इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को मैनेजमेंट के क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा प्राप्त करने के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। इससे विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में मैनेजमेंट से सम्बन्धित विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययन करने की सुविधा मिलेगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। उच्च स्तरीय शैक्षणिक संस्थानों की उपलब्धता से उन्हें अपनी क्षमताओं को विकसित करने तथा नए अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर निदेशक आईआईएम काशीपुर प्रो. नीरज द्विवेदी एवं कार्यदायी संस्था सीपीडब्ल्यूडी देहरादून के मुख्य अभियंता देवेंद्र प्रकाश सहित संबंधित विभागों एवं आईआईएम काशीपुर के अधिकारी उपस्थित रहे।