वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता 2026 में उत्तराखंड का गौरवपूर्ण प्रदर्शन, झटके दो पदक

चीन के शंघाई में 22 से 27 सितंबर तक आयोजित 48वीं वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता-2026 में भारत ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 6 रजत पदक एवं 20 मेडलियन फॉर एक्सीलेंस प्राप्त किए तथा वैश्विक स्तर पर 10वां स्थान हासिल किया। यह वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ वैश्विक प्रदर्शन है।

भारत की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि में उत्तराखंड के प्रतिभाशाली युवाओं ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उत्तराखंड की सानिया जोशी ने Retail Sales कौशल तथा पार्थ वोहरा ने Industrial Design Technology कौशल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए रजत पदक अर्जित किया।

विश्वस्तरीय मंच पर उत्तराखंड के युवाओं का परचम

वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता विश्व का प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कौशल मंच है, जहां विभिन्न देशों के युवा प्रतिभागी अपने तकनीकी कौशल, दक्षता, नवाचार, सृजनात्मकता एवं व्यावसायिक उत्कृष्टता का प्रदर्शन करते हैं। वर्ष 2026 की प्रतियोगिता में विश्वभर से लगभग 1,400 प्रतिभागियों ने 64 विभिन्न कौशल विधाओं में प्रतिभाग किया। ऐसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंच पर उत्तराखंड के दो युवाओं की उपलब्धि प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।

इंडिया स्किल्स से वर्ल्डस्किल्स के वैश्विक मंच तक

उत्तराखंड के इन प्रतिभागियों की सफलता की महत्वपूर्ण कड़ी इंडिया स्किल्स 2025-26 की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता एवं चयन प्रक्रिया रही। कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग तथा उत्तराखंड कौशल विकास समिति (UKSDS) द्वारा प्रदेश के युवाओं को विभिन्न कौशल विधाओं में प्रतिभाग करने तथा अपनी दक्षता प्रदर्शित करने के अवसर प्रदान किए गए।

इंडिया स्किल्स की राज्य, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के माध्यम से उत्कृष्ट प्रतिभागियों को अगले स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। इसी प्रक्रिया के माध्यम से चयनित प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने तथा अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिताओं के लिए आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त होता है।

इसी क्रम में सानिया जोशी एवं पार्थ वोहरा ने अपनी-अपनी कौशल विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए वर्ल्डस्किल्स के वैश्विक मंच तक पहुंच बनाई और भारत के लिए रजत पदक अर्जित कर उत्तराखंड का गौरव बढ़ाया।

यह उपलब्धि कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग तथा UKSDS द्वारा प्रदेश के युवाओं में कौशल उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अवसरों से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।

सफाई कर्मचारियों के अधिकारों एवं कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आयोग ने की बैठक

राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना ने सफाई कर्मचारियों के अधिकारों, उनके सामाजिक एवं आर्थिक कल्याण तथा केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

बैठक में अध्यक्ष मकवाना ने कहा कि सफाई कर्मचारी एवं पर्यावरण मित्र शहरों और समाज को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके सम्मान, सुरक्षा एवं अधिकारों की रक्षा करना प्रशासन और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुना जाए तथा उनका समयबद्ध एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सफाई कर्मचारियों को केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए तथा आयोग द्वारा समय-समय पर दिए जाने वाले निर्देशों को गंभीरता से लेते हुए उनका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि मैनुअल स्कैवेंजिंग की प्रथा को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी परिस्थिति में किसी पर्यावरण मित्र को सेप्टिक टैंक अथवा सीवर में मैनुअल तरीके से प्रवेश न करना पड़े। इसके लिए संबंधित विभाग आधुनिक तकनीक एवं मशीनों का अधिक से अधिक उपयोग सुनिश्चित करें।

अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक के उपयोग से सफाई व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया जा सकता है। इसके लिए मैनहोल को “मशीन होल” के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाए। सीवर एवं मैनहोल की सफाई के लिए आधुनिक मशीनों, रोबोटिक तकनीक तथा अन्य यांत्रिक संसाधनों का उपयोग बढ़ाया जाए, ताकि पर्यावरण मित्रों के जीवन एवं स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का जोखिम न रहे।

अध्यक्ष ने कहा कि प्रत्येक पर्यावरण मित्र को सफाई कार्य से संबंधित तकनीकी जानकारी, सुरक्षा मानकों एवं आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाना आवश्यक है। साथ ही, सभी पर्यावरण मित्रों को नियमित रूप से पी.पी.ई किट उपलब्ध कराने तथा इसकी गुणवत्ता एवं उपलब्धता की निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण मित्रों की वर्तमान वेतन व्यवस्था की समीक्षा करते हुए वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाए तथा उनके लिए न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों को उनका वेतन एवं अन्य देयक समयबद्ध रूप से उपलब्ध होना चाहिए। साथ ही सफाई कार्य के लिए आवश्यक मशीनों, उपकरणों एवं पी.पी.ई. किट की खरीद के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान सुनिश्चित किया जाए।

अध्यक्ष ने पर्यावरण मित्रों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने पर के दृष्टिगत जीवन बीमा एवं स्वास्थ्य बीमा की सुविधाओं को बेहतर बनाने तथा अधिक से अधिक सफाई कर्मचारियों को इन योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने सफाई कर्मचारियों के परिवारों के बच्चों की शिक्षा के लिए आवश्यक सहायता एवं फंड की व्यवस्था करने की दिशा में प्रस्ताव तैयार करने को कहा। ताकि उन्हें शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकें।

अध्यक्ष ने नमस्ते योजना से अधिक से अधिक पर्यावरण मित्रों को जोड़ने के निर्देश देते हुए कहा कि योजना का उद्देश्य केवल सफाई कार्य को सुरक्षित बनाना ही नहीं, बल्कि सफाई कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यावरण मित्रों के परिजनों को स्वरोजगार एवं कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं का लाभ दिलाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सफाई कर्मचारी की स्पष्ट पहचान एवं विभागीय रिकॉर्ड उपलब्ध होना आवश्यक है। इसके लिए संबंधित निकाय एवं विभाग अपने स्तर पर आवश्यक कार्रवाई करते हुए सभी पात्र सफाई कर्मचारियों को आईडी कार्ड उपलब्ध कराई जाएं।

उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों के हितों से संबंधित सभी योजनाओं एवं व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा की जाए तथा योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाने में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। कहा कि सफाई कर्मचारियों के अधिकारों, सुरक्षा एवं सम्मान से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

इस अवसर पर अपर सचिव/निदेशक, शहरी विनोद गिरि गोस्वामी, एडीएम के.के मिश्रा, अपर पुलिस अधीक्षक स्वतंत्र कुमार सिंह सहित अन्य सम्बन्धित मौजूद रहे।

दिल्ली से लौटते ही सीधे राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचे सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने दिल्ली प्रवास से लौटते ही सीधे राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, आईटी पार्क पहुंचे और प्रदेश के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हाई एल्टीट्यूड ट्रैकिंग के दौरान फंसे ट्रैकर्स एवं माउंटेनियर्स के लिए संचालित राहत एवं बचाव अभियान की स्वयं समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने आपदा की स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों से रेस्क्यू ऑपरेशन की अद्यतन जानकारी ली और फंसे हुए प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षित वापसी को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर विभिन्न जनपदों में फंसे ट्रैकर्स एवं माउंटेनियर्स की संख्या, उनके वर्तमान लोकेशन, अब तक किए गए रेस्क्यू तथा शेष लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए की जा रही व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रेस्क्यू ऑपरेशन में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो और मौसम एवं भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए उपलब्ध सभी संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि राज्य के विभिन्न उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हाई एल्टीट्यूड ट्रैकिंग के दौरान कुल 179 ट्रैकर्स एवं माउंटेनियर्स के फंसे होने की जानकारी प्राप्त हुई थी। इनमें 136 लोग उत्तरकाशी तथा 43 लोग बागेश्वर जनपद के पिंडारी क्षेत्र में फंसे हुए थे।

मुख्यमंत्री ने उत्तरकाशी में संचालित रेस्क्यू ऑपरेशन की विशेष रूप से जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि उत्तरकाशी में फंसे 136 लोगों में से 40 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। वहीं, 40 लोगों ने फिलहाल रेस्क्यू कराने से इनकार किया है और अपनी यात्रा जारी रखने की इच्छा व्यक्त की है। शेष लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान सोमवार सुबह 6 बजे से पुनः प्रारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रेस्क्यू अभियान के दौरान ट्रैकर्स, माउंटेनियर्स एवं पोर्टर्स की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता पर रखी जाए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त संसाधनों की तत्काल व्यवस्था की जाए और सभी संबंधित एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करें।

मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए कुल 8 हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध हवाई संसाधनों का तत्काल उपयोग किया जाए। उन्होंने हेली एंबुलेंस को भी स्टैंडबाय मोड में रखने के निर्देश दिए, ताकि रेस्क्यू के दौरान किसी व्यक्ति को चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होने पर उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी उत्तरकाशी से भी बात कर मौके की स्थिति की जानकारी ली। जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री को बताया कि मौसम एवं परिस्थितियों को देखते हुए शेष ट्रैकर्स एवं माउंटेनियर्स को सुरक्षित निकालने के लिए सोमवार सुबह 6 बजे से रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रेस्क्यू टीमों को सभी आवश्यक सहयोग एवं संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तथा अभियान की लगातार मॉनिटरिंग की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेशवासियों के साथ ही उत्तराखण्ड आने वाले पर्यटकों, श्रद्धालुओं और ट्रैकर्स की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों एवं संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए।

चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं की भी मुख्यमंत्री ने की समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में चारधाम यात्रा की वर्तमान व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने चारधाम एवं यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से चारधाम सहित सभी प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की पुख्ता एवं स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा और धार्मिक पर्यटन के बढ़ते स्वरूप को देखते हुए केवल वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवस्थाएं करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक एवं स्थायी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संबंधित विभाग आपसी समन्वय से ऐसी व्यवस्था तैयार करें, जिससे धामों एवं धार्मिक स्थलों की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुविधा एक साथ सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की धार्मिक और प्राकृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए यात्रा एवं पर्यटन व्यवस्थाओं को और अधिक व्यवस्थित एवं टिकाऊ बनाया जाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की परिस्थितियों में सरकार का प्रत्येक तंत्र पूरी तत्परता से कार्य करे और रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा में कोई कमी न रहे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य संबंधित एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहें।

बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, आयुक्त गढ़वाल आनंद स्वरूप सहित आपदा प्रबंधन विभाग एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रवासियों से प्राप्त सुझावों का समावेश राज्य के विकास हेतु तैयार की जाने वाली नीतियों में करेंगेः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने को नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड निवास में उत्तराखंड के प्रवासी बुद्धिजीवियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की विकास यात्रा में प्रवासी उत्तराखंड वासियों एवं प्रबुद्ध जनों की महत्वपूर्ण भागीदारी है। इस अवसर पर प्रवासी बुद्धिजीवियों द्वारा राज्य के विकास के प्रति अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी रखे गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राप्त सुझावों का समावेश राज्य के विकास हेतु तैयार की जाने वाली नीतियों में किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने प्रवासी बंधुओ से संवाद के दौरान इस आयोजन में अपनी व्यस्तताओं के बावजूद उपस्थित होने के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण राज्य है, जो हमें विरासत में मिला है। राज्य सरकार ने विकास को गति देने के लिए बजट को बढ़ाकर एक लाख 12 हजार करोड़ रुपये तक किया है। उन्होंने कहा कि रिवर्स पलायन की दिशा में अभी विभिन्न क्षेत्रों में और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ को राज्य के विकास में उपयोगी बनाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। पर्यटन, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में रिवर्स माइग्रेशन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री ने राज्य की मजबूत कनेक्टिविटी को निवेश के लिए महत्वपूर्ण ताकत बताते हुए कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के शुरू होने से राष्ट्रीय राजधानी और देहरादून के बीच यात्रा का समय काफी कम हुआ है। देहरादून से देश के प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं। हरिद्वार राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है, जबकि ऊधमसिंह नगर का पंतनगर कृषि के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। पंतनगर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को औद्योगिक और लॉजिस्टिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।

राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग की एसडीजी रैंकिंग में उत्तराखण्ड ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। पर्वतीय और पूर्वाेत्तर राज्यों की श्रेणी में भी राज्य को निवेश के लिए बेहतर नीतिगत वातावरण तैयार करने की दिशा में अग्रणी स्थान प्राप्त हुआ है।

युवाओं और रोजगार के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि 4 जुलाई 2021 को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। पेपर लीक और नकल के मामलों में कठोर कार्रवाई की गई तथा नकल माफिया के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करते हुए करीब 100 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि होमस्टे, छोटे होटल, कृषि, बागवानी और स्थानीय उद्यमों के माध्यम से बड़ी संख्या में युवा और महिलाएं स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। राज्य की पर्यटन क्षमता को अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और आदि कैलाश जैसी यात्राओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं। चारधाम यात्रा में कई गुना वृद्धि हुई है, जबकि कांवड़ यात्रा में करीब पांच करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का उल्लेख किया गया। आदि कैलाश क्षेत्र में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू कर राज्य ने देश के सामने सुशासन और समान अधिकारों की दिशा में एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद समाज में सकारात्मक वातावरण बना है तथा महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के अधिकारों को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड से निकली समान नागरिक संहिता की गंगा देश के अन्य राज्यों को भी समानता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की अस्मिता और डेमोग्राफी की रक्षा के लिए धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानून भी लागू किए गए हैं। देवभूमि की शांति और संस्कृति के खिलाफ काम करने वाली हर मानसिकता पर सख्ती से कार्रवाई की गई है और आगे भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था में समानता और आधुनिकता को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उसके स्थान पर उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था की गई है, जिसमें सभी वर्गों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना के साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। राज्य में निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे 250 से अधिक मदरसों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। देवभूमि उत्तराखण्ड में शिक्षा के मंदिर मजबूत हों और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, यह सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सीमांत क्षेत्रों तक सड़क, रेल, रोपवे और हवाई कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हुआ है। चारधाम यात्रा और धार्मिक पर्यटन को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा गया है। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर ही रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के युवा खेल के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के बाद देवभूमि उत्तराखण्ड खेलभूमि के रूप में भी अपनी नई पहचान बना रहा है। राज्य सरकार खेल सुविधाओं के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने और मेहनती युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए राज्य में कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। सरकार का संकल्प है कि किसी भी युवा की वर्षों की मेहनत, उसके सपनों और उसके अधिकार के साथ अन्याय न हो। कोई भी नियुक्ति केवल एक आंकड़ा नहीं होती, बल्कि उसके पीछे किसी युवा की मेहनत और उसके परिवार की आशाएं जुड़ी होती हैं।

कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के वरिष्ठ प्रबुद्धजन प्रसून जोशी, प्रो. प्रदीप जोशी, अश्विनी लोहानी, प्रो. हर्ष वी. पंत, सुभाष धुलिया, प्रो. धनंजय जोशी, सुष्मिता रावत, डॉ. सरिता पाठक, कुलानंद जोशी, निर्मल पाठक, हरिसुमन बिष्ट, देव रतूड़ी, डॉ. सुषमा रावत, डॉ. निधि गुसाईं, देवेंद्र गुसाईं, डॉ. के.के. पाण्डेय, विनोद बछेती, डी.एस. रावत, डॉ. सरोज पाण्डेय, शंकर पाण्डेय, प्रो. दिनेश सकलानी, प्रो. पवन कुमार जोशी, वीरेंद्र सिंह नेगी, पवन कुमार मैठानी, हरेंद्र असवाल, संजय जोशी, डॉ. भुवन चंद्र पाण्डेय, विजय जोशी, डॉ. मेघा बिष्ट, लक्ष्मी रावत सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. गोविंद सिंह ने किया।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री आवास में सुना प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का 138वां संस्करण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का 138वां संस्करण सुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देशवासियों के सकारात्मक प्रयासों, उपलब्धियों और प्रेरक कार्यों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने के साथ ही लोगों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में उत्तराखण्ड के सीमांत क्षेत्रों का विशेष उल्लेख किया जाना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में जनगणना के प्रथम चरण के तहत उत्तराखण्ड के दुर्गम और बर्फीले क्षेत्रों में भी जनगणना का कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उत्तराखण्ड के चमोली जनपद स्थित देश के प्रथम गांव माणा का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि यहां जनगणना की शुरुआत 83 वर्षीय पूर्णिमा रावत से की गई। उन्होंने उत्तरकाशी जनपद के बगोरी गांव का भी उल्लेख किया, जहां होमस्टे संचालक हरदेव सिंह राणा ने डिजिटल माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर स्व-गणना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा माणा और बगोरी जैसे सीमांत गांवों के उदाहरण देश के सामने रखना उत्तराखण्ड के लिए सम्मान की बात है। यह राज्य के सीमांत क्षेत्रों में हो रहे बदलाव, डिजिटल जागरूकता और राष्ट्र निर्माण में वहां के लोगों की सक्रिय भागीदारी को भी दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने जनगणना को प्रत्येक नागरिक का राष्ट्रीय दायित्व बताते हुए देशवासियों से इसमें सक्रिय सहयोग करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने भी प्रदेशवासियों से जनगणना में अपनी सही जानकारी दर्ज कराने और इस राष्ट्रीय दायित्व में पूर्ण सहयोग देने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में वर्ष 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के दस वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए भारतीय सेना के शौर्य और आतंकवाद के विरुद्ध भारत की दृढ़ नीति का स्मरण किया। उन्होंने स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्त युवा अभियान, खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन, पोषण, स्थानीय उत्पादों और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे विषयों पर भी देशवासियों से जनभागीदारी का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन जैसे विषय उत्तराखण्ड के लिए भी विशेष महत्व रखते हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से प्रधानमंत्री के संदेशों को आत्मसात करते हुए विकसित भारत और विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, अन्य जनप्रतिनिधि एवं मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस बर्द्धन के उत्तरकाशी दौरे का दूसरा दिन, गंगोत्री धाम में व्यवस्थाओं का लिया जायजा

जनपद भ्रमण के दूसरे दिन मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन आनंद बर्द्धन ने गंगोत्री धाम में मां गंगा और विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर भगवान काशी विश्वनाथ एवं शक्ति मंदिर में दर्शन एवं पूजा-अर्चना की। उन्होंने विधिवत पूजा कर मां गंगा से प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

पूजा-अर्चना के बाद मुख्य सचिव ने गंगोत्री मंदिर समिति के पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर गंगोत्री धाम में चल रही व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, पेयजल, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में अधिकारियों से जानकारी लेते हुए व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें। उन्होंने यात्रा मार्ग पर यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को भी दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।

उन्होंने गंगोत्री धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यवस्थाओं पर लगातार नजर बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही घाटों पर स्वच्छता व्यवस्था, नियमित साफ-सफाई, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि घाटों एवं मंदिर परिसर के आसपास साफ-सफाई व्यवस्था बेहतर बनी रहे और श्रद्धालुओं को दर्शन एवं स्नान के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

इस दौरान मंदिर समिति सचिव सुरेश सेमवाल, जिलाधिकारी प्रशांत आर्य, पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय, अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र सहित अन्य अधिकारी और मंदिर समिति के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम ने दिए कार्बन क्रेडिट को नीति में शामिल करने और वाटर हार्वेस्टिंग को जनसुलभ बनाने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय सूद एवं विभिन्न वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ बैठक की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 का विमोचन किया। साथ ही ग्रॉस एनवायरनमेंट प्रोडक्ट (GEP) से संबंधित तकनीकी रिपोर्ट वर्ष 2023-24 एवं वित्तीय वर्ष 2024-25 का भी विमोचन किया गया। बैठक में GEP की तकनीकी रिपोर्ट के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कार्बन क्रेडिट को उत्तराखण्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 में सम्मिलित करने तथा वाटर हार्वेस्टिंग को आम नागरिकों के लिए सरल एवं सहज बनाने के निर्देश दिए।

GEP तकनीकी रिपोर्ट का विमोचन, प्राकृतिक संपदा के आर्थिक मूल्यांकन पर मंथन

बैठक में GEP की तकनीकी रिपोर्ट वर्ष 2023-24 एवं वित्तीय वर्ष 2024-25 के माध्यम से उत्तराखण्ड के प्राकृतिक संसाधनों एवं पर्यावरणीय सेवाओं के आर्थिक मूल्यांकन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। वन, जल, जैव विविधता, मिट्टी संरक्षण, कार्बन अवशोषण तथा अन्य पर्यावरणीय सेवाओं के महत्व और इनके वैज्ञानिक एवं आर्थिक आकलन की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि GEP के माध्यम से राज्य की प्राकृतिक एवं पर्यावरणीय संपदा के योगदान का वैज्ञानिक एवं आर्थिक आकलन किया जा सकता है। इससे पर्यावरणीय संसाधनों के महत्व को समझने तथा राज्य की विकास योजनाओं एवं नीतियों में उनके योगदान को प्रभावी ढंग से शामिल करने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक एवं पर्यावरणीय परिस्थितियां विशिष्ट हैं। इसलिए राज्य के लिए GEP का ऐसा मॉडल विकसित किया जाना चाहिए, जो उत्तराखण्ड की स्थानीय परिस्थितियों, आवश्यकताओं एवं संसाधनों के अनुरूप हो। उन्होंने विशेषज्ञों एवं वैज्ञानिक संस्थानों से इस दिशा में आवश्यक तकनीकी सुझाव एवं सहयोग प्रदान करने की अपेक्षा की।

नीति में कार्बन क्रेडिट को शामिल करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड की विशिष्ट भौगोलिक एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में प्रभावी प्रयास किए जाने आवश्यक हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि उत्तराखण्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 के अंतर्गत कार्बन क्रेडिट को भी सम्मिलित किया जाए।

उन्होंने कहा कि कार्बन अवशोषण, वन संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरणीय सेवाओं से जुड़े प्रयासों को वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधार प्रदान करने की दिशा में इस क्षेत्र की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय, वन, जल स्रोत, नदियां, जैव विविधता एवं अन्य प्राकृतिक संसाधन उत्तराखण्ड की महत्वपूर्ण ताकत हैं। इनका संरक्षण राज्य के पर्यावरणीय संतुलन के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था, आजीविका एवं सतत विकास के लिए भी आवश्यक है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और उनके प्रभावी उपयोग के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधान विकसित किए जाने चाहिए।

वाटर हार्वेस्टिंग को आम नागरिकों के लिए सरल बनाने पर जोर

मुख्यमंत्री धामी ने वाटर हार्वेस्टिंग को आम नागरिकों द्वारा आसानी से अपनाए जाने योग्य बनाने के लिए प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वाटर हार्वेस्टिंग को केवल बड़े प्रोजेक्ट अथवा संस्थागत स्तर तक सीमित न रखते हुए ऐसी योजनाएं एवं तकनीकी मॉडल विकसित किए जाएं, जिन्हें सामान्य नागरिक अपने घरों एवं आसपास के क्षेत्रों में भी आसानी से अपना सकें।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए सरल, कम लागत एवं स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल तकनीकी विकल्पों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ऐसी योजनाएं तैयार की जाएं, जिनका उपयोग आम नागरिक सहज रूप से कर सकें और जल संरक्षण को व्यापक जनभागीदारी से आगे बढ़ाया जा सके।

विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन जरूरी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड की प्राकृतिक संपदा राज्य की महत्वपूर्ण ताकत है। हिमालय, वन, जल स्रोत, नदियां, जैव विविधता एवं अन्य प्राकृतिक संसाधन पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था एवं आजीविका में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ उनसे प्राप्त होने वाले पर्यावरणीय लाभों एवं सेवाओं के वास्तविक मूल्य को समझना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए राज्य की विकास नीति को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। विकास कार्यों की योजना बनाते समय प्राकृतिक संसाधनों की क्षमता, पर्यावरणीय संवेदनशीलता एवं स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि GEP के माध्यम से पर्यावरणीय संसाधनों एवं उनके योगदान का वैज्ञानिक मूल्यांकन राज्य की विकास योजनाओं और नीतियों के लिए उपयोगी आधार प्रदान कर सकता है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी एवं आजीविका के अवसरों को जोड़ने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए।

विशेषज्ञों ने GEP के वैज्ञानिक आधार पर दिए सुझाव

बैठक में प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय सूद सहित विभिन्न वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों ने GEP के वैज्ञानिक आधार, पर्यावरणीय संसाधनों से संबंधित आंकड़ों के संकलन एवं विश्लेषण तथा उत्तराखण्ड जैसे हिमालयी राज्य में इसके उपयोग की संभावनाओं पर अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।

विशेषज्ञों ने प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरणीय सेवाओं एवं सतत विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा की। इस दौरान वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी आंकड़ों एवं अनुसंधान के परिणामों को राज्य की नीति निर्माण प्रक्रिया से जोड़ने तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया।

उत्तराखण्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 का विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 का विमोचन करते हुए कहा कि हिमालयी राज्य की विशिष्ट भौगोलिक एवं सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियां विकास के लिए विशिष्ट समाधानों की मांग करती हैं। विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के माध्यम से इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जाना आवश्यक है।

नीति का उद्देश्य राज्य में क्षेत्र-विशिष्ट वैज्ञानिक अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करना, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नवीन क्षेत्रों की पहचान करना तथा राज्य के समग्र विकास के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी हस्तक्षेपों को बढ़ावा देना है। स्थानीय स्तर पर अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के संचालन तथा उनके परिणामों का प्रभावी प्रसार राज्य की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने एवं जीवन स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

नीति के अंतर्गत उत्तराखण्ड को वैज्ञानिक एवं तकनीकी रूप से सक्षम एवं विकसित राज्य के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधारभूत संरचना विकास, ऊर्जा, जल संसाधन, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं रोजगार जैसे क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी के विकास पर विशेष बल दिया जाएगा।

हिमालयी चुनौतियों के समाधान पर विशेष ध्यान

उत्तराखण्ड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 में राज्य की विशिष्ट चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए हिमनद विज्ञान, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, ऊर्जा, जल संसाधन, कृषि, स्वास्थ्य, पर्वतीय क्षेत्रों की शैक्षिक चुनौतियां, प्रवास, कौशल विकास, उद्यमिता विकास, बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा एवं नवाचार जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है।

नीति के माध्यम से अनुसंधान एवं विकास संस्थानों तथा नवाचार केंद्रों को सुदृढ़ करने, प्राथमिकता वाले अनुसंधान एवं विकास क्षेत्रों की पहचान करने तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रभावी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। विज्ञान संचार एवं जनभागीदारी को मुख्यधारा में लाने के लिए अनुसंधान पहलों, आउटरीच प्लेटफॉर्मों एवं विज्ञान संचार केंद्रों के माध्यम से क्षमता निर्माण को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमताओं को राज्य की स्थानीय आवश्यकताओं से जोड़ते हुए आत्मनिर्भरता, तकनीकी दक्षता, स्वदेशी संसाधनों के प्रभावी उपयोग एवं पर्यावरण संरक्षण को विकास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में किए जाने वाले प्रयासों का उद्देश्य प्रदेश के लोगों के जीवन में वास्तविक एवं सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए।

बैठक में अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. शिव कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. परमिंदर मैन, हिमालयन एनवायरनमेंट स्टडीज एंड कंजर्वेशन ऑर्गनाइजेशन (HESCO) के संस्थापक डा. अनिल प्रकाश जोशी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत, उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, शिक्षाविद् डा. रीमा पंत, यूकॉस्ट के सुरेन्द्र सिंह मनराल तथा डा. विपिन सती उपस्थित रहे।

आर्थिक संसाधनों के अभाव में किसी भी बच्चे का उपचार नहीं होने दिया जाएगा प्रभावितः डीएम

जिले में दुर्लभ (रेयर) बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत चिन्हित बच्चों के उपचार, रेफरल प्रक्रिया, आर्थिक सहायता एवं चिकित्सकीय प्रगति की स्वयं नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।

भारत सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत जनपद में अब तक 32 बच्चों का चिन्हीकरण किया गया है। इनमें से 22 बच्चों का उपचार आरबीएसके के अंतर्गत किया जा रहा है, जबकि 10 ऐसे बच्चे चिन्हित किए गए हैं, जो आरबीएसके के दायरे में नहीं आते हैं। इन 10 बच्चों के उपचार के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर सीएसआर फंड से रू0 9.60 लाख की धनराशि मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उपलब्ध कराई गई है, जिसके माध्यम से बच्चों का उपचार कराया जा रहा है।

जिला प्रशासन के सहयोग से प्रेमनगर निवासी 10 वर्षीय उमेश, बैराज निवासी 13 वर्षीय आयशा, डोईवाला निवासी 9 वर्षीय वंशिका, रायपुर निवासी 2 वर्षीय अक्ष, मेहूवाला निवासी 3 वर्षीय आरिस, मांडूवाला निवासी 15 वर्षीय बाबू एवं प्रदीप, मांडूवाला निवासी 20 वर्षीय रंजीत, डोईवाला निवासी 5 वर्षीय शमशाद तथा जोगीवाला निवासी 5 वर्षीय दिव्यांश का उपचार कराया गया है। इनमें कई बच्चों की सर्जरी के साथ-साथ लंबे समय तक नियमित चिकित्सकीय पर्यवेक्षण की आवश्यकता है।

गंभीर एवं दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित ऐसे बच्चे, जिनके अभिभावक महंगे उपचार का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं हैं तथा जिन्हें सर्जरी अथवा लंबे समय तक उपचार की आवश्यकता है, उनका उपचार देश के विभिन्न विशेषज्ञ एवं उच्च चिकित्सा सुविधाओं से युक्त संस्थानों में कराया जा रहा है। रेयर डिजीज के उपचार में कई बार अत्यधिक व्यय होने के साथ उपचार की अवधि भी लंबी होती है। ऐसे में उपचार को निरंतर बनाए रखने के लिए समयबद्ध आर्थिक एवं प्रशासनिक सहयोग आवश्यक है। डीएम द्वारा आवश्यकता के अनुसार सीएसआर फंड के साथ-साथ राइफल क्लब फंड से भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आर्थिक कारणों से किसी भी बच्चे का उपचार बाधित न हो।

जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र बच्चे के उपचार में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। आवश्यक दस्तावेजों की पूर्ति, चिकित्सकीय रेफरल, अनुमोदन तथा वित्तीय सहायता से संबंधित सभी औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण की जाएं, ताकि बच्चों को समय पर उपचार मिल सके। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि आरबीएसके योजना के अंतर्गत उपलब्ध सहायता के बाद भी किसी बच्चे के उपचार के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता होती है, तो जिला प्रशासन द्वारा राइफल क्लब फंड से आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि “आर्थिक संसाधनों के अभाव में किसी भी बच्चे का उपचार प्रभावित नहीं होना चाहिए।”

जिलाधिकारी ने कहा कि गंभीर एवं दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों को सभी चिन्हित बच्चों के प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा उनके अभिभावकों से निरंतर संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रत्येक बच्चे के उपचार की वर्तमान स्थिति, चिकित्सकीय प्रगति, रेफरल प्रक्रिया, आर्थिक सहायता की उपलब्धता तथा उपचार से संबंधित अन्य व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय, संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ कार्य करते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी बच्चे के उपचार में प्रशासनिक अथवा वित्तीय बाधा उत्पन्न न हो। उन्होंने जिले में रेयर डिजीज से पीड़ित बच्चों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया निरंतर जारी रखने के निर्देश दिए, ताकि कोई भी पात्र बच्चा उपचार एवं आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।

सीएस ने उत्तरकाशी में की जिलास्तरीय समीक्षा बैठक, योजना दीदी ई-पुस्तक का किया विमोचन

मुख्य सचिव ने कलेक्ट्रेट सभागार में जिलास्तरीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने जनपद में संचालित जिला योजना, राज्य वित्त, 25 सूत्रीय कार्यक्रम तथा केंद्र पोषित विभिन्न विकास कार्यक्रमों व जनकल्याणकारी योजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने जिले में क्रियान्वित समस्त योजनाओं की विस्तृत जानकारी को समाहित करने वाली डिजिटल पहल श्योजना दीदीश् ई-पुस्तक का विमोचन किया। बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सभी स्वीकृत निर्माण कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिये।

समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने धामों व धार्मिक स्थलों में स्वच्छता व्यवस्था के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत कूड़ा निस्तारण हेतु कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त सड़कों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बीआरओ, लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई और स्थानीय नगर निकायों को आगामी 15 अक्टूबर तक अनिवार्य रूप से सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने के अभियान चलाने का अल्टीमेटम दिया। विभागीय कार्यप्रणाली में गति लाने हेतु विभागाध्यक्षों को नियमित रूप से धरातलीय निरीक्षण करने तथा अंतर-विभागीय समन्वय के माध्यम से लंबित प्रकरणों का शीघ्र समाधान निकालने करने के निर्देश दिये। मुख्य विकास अधिकारी को उद्यान विभाग के तहत पॉलीहाउस निर्माण एवं श्जायकाश् परियोजना के निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष धीमी प्रगति में सुधार लाने हेतु उद्यान विभाग की योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने के साथ जिला सैनिक कल्याण विभाग के अंतर्गत क्रियान्वित की जा रही सैनिक कल्याण योजनाओं की भी समीक्षा करने के निर्देश दिये।

इस दौरान जल शक्ति मंत्रालय (भारत सरकार) के राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और उत्तराखंड राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के संयुक्त तत्वावधान में ष्प्रारंभ – नदी, जलीय संसाधनों का संरक्षण और जैव विविधता विरासत प्रबंधनष् परियोजना के लिए प्रशासनिक स्वीकृति एवं व्यय की मंजूरी दी गई है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा ष्स्वच्छ गंगा, निर्मल एवं अविरल यमुनाष् के संकल्प के साथ गंगोत्री और यमुनोत्री क्षेत्रों की हिमालयी नदियों के संरक्षण हेतु लगभग 3.26 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस जिला-स्तरीय मॉडल का आधिकारिक उद्घाटन किया गया।

बैठक से पूर्व मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने जिला सभागार में सिविल सोसायटी, भूतपूर्व सैनिक एवं अर्द्धसैनिक बलों के पेंशनर्स, होटल एसोसिएशन तथा विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों के साथ संवाद किया। इस दौरान प्रतिनिधियों ने क्षेत्र के विकास, पर्यटन, पूर्व सैनिकों एवं पेंशनर्स से जुड़े विषयों सहित जनहित की विभिन्न समस्याओं और सुझावों से मुख्य सचिव को अवगत कराया। प्रमुख रूप से वीबी जी रामजी योजना में ऑनलाइन उपस्थिति की समस्या, नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कूड़ा निस्तारण, सड़क एवं नेटवर्क की समस्या, उपनल में पूर्व सैनिकों के लिए समान कार्य-समान वेतन, नेलांग-जादुंग परमिट के लिए एकल खिड़की व्यवस्था तथा स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित मुद्दे रखे गए। मुख्य सचिव ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि विभिन्न वर्गों और संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद के माध्यम से क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं और समस्याओं को समझने में मदद मिलती है तथा जनहित से जुड़े विषयों का नियमानुसार परीक्षण कर समाधान की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने अवगत कराया कि प्राप्त अधिकांश समस्याओं के निस्तारण की कार्यवाही गतिमान है, जबकि शेष समस्याओं एवं मांगों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न संगठनों द्वारा उठाए गए उचित एवं जनहित से जुड़े विषयों के निस्तारण के लिए संबंधित विभागों के माध्यम से नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया गया कि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान और जनहित से जुड़े विषयों पर हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। मुख्य सचिव ने जिला मुख्यालय स्थित स्मार्ट कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर संचालित आधुनिक निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी ली। जिलाधिकारी ने कंट्रोल रूम में स्थापित सीसीटीवी नेटवर्क, रियल टाइम मॉनिटरिंग प्रणाली तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था के संबंध में अवगत कराया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आमजन की सुरक्षा एवं सुविधा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए स्मार्ट निगरानी प्रणाली का और अधिक प्रभावी ढंग से संचालन सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने भटवाड़ी विकासखंड के गणेशपुर में होलिस्टिक टूरिज्म पहल के तहत संचालित वूमेन हिल्स ट्रैक एडवेंचर का अवलोकन किया। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से संवाद कर पर्यटन गतिविधियों से जुड़कर उनके अनुभवों की जानकारी ली। इस पहल के माध्यम से महिलाओं को ट्रेकिंग, गाइडिंग, कुकिंग एवं कैंपिंग का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जा रहा है। मुख्य सचिव ने महिला सशक्तिकरण और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने वाली इस पहल की जानकारी ली।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान, ब्लॉक प्रमुख भटवाड़ी ममता पंवार, ब्लॉक प्रमुख डुंडा राजदीप परमार सहित विभिन्न संगठनों के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी सहित पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय, मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह, अपर जिलाधिकारी मुक्ता मिश्र सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएस ने पीएम श्री रा.ई. कॉलेज मातली पहुंचकर शिक्षा व्यवस्थाओं का लिया जायजा, छात्र-छात्राओं को दिया मार्गदर्शन

मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन आनंद बर्द्धन ने अपने तीन दिवसीय सीमांत जनपद दौरे के पहले दिन जिले के सामरिक और नागरिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्त्वपूर्ण हवाई पट्टी चिन्यालीसौड़ की वर्तमान व्यवस्थाओं तथा विस्तार योजनाओं के दृष्टिगत स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने एप्रन, रनवे, टर्मिनल भवन सहित बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिये। चीन सीमा से निकटता के कारण यह हवाई पट्टी सीमांत क्षेत्र में भारतीय वायु सेना के सामरिक संचालन को गति प्रदान करने के साथदृसाथ आपातकालीन रेस्क्यू, आपदा प्रबंधन एवं वीवीआईपी आवाजाही के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

इसके बाद मुख्य सचिव ने विकासखंड चिन्यालीसौड़ के अंतर्गत ग्राम मल्ली पहुंचकर श्सर्व शक्ति क्लस्टर लेवल फेडरेशन श् तुल्याडा के कलेक्शन सेंटर का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में उन्होंने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं व लखपति दीदीयों से सीधा संवाद कर उनके द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों, उत्पादन कार्यों एवं अनुभवों की जानकारी ली। महिला उद्यमियों द्वारा निर्मित उत्पादों का अवलोकन करते हुए उनके आर्थिक स्वावलंबन तथा सामाजिक सशक्तिकरण के प्रयासों की सराहना की।

क्लस्टर से जुड़ी महिलाओं ने अवगत कराया कि श्सर्वशक्ति सी.एल.एफ. तुल्याड़ा द्वारा यूजीवीएस-रीप, आजीविका परियोजना एवं आईएफएडी के वित्तीय व तकनीकी सहयोग से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने क्लस्टर द्वारा संचालित बेकरी, स्ट्रॉबेरी उत्पादन, सिलाई सेंटर, ब्यूटी पार्लर, कैटरिंग फार्मिंग, डेयरी, मुर्गी पालन तथा स्थानीय उत्पादों व अचार निर्माण जैसी बहुआयामी स्वरोजगार गतिविधियों की जानकारी दी। इस दौरान ब्लॉक प्रमुख चिन्यालीसौड़ रणदेव सिंह महंत उपस्थित रहे।

इसके उपरांत मुख्य सचिव ने विकासखंड डुंडा के पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज मातली का निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्य सचिव ने कक्षाओं में पहुंचकर अध्ययनरत विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्य सचिव ने विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों का निडरता से सामना करने, उच्च लक्ष्य निर्धारित करने और अनुशासित जीवन शैली अपनाकर सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं, प्रयोगशालाओं, कंप्यूटर कक्ष और पेयजल व्यवस्था का भी जायजा लिया।

मुख्य सचिव ने राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों के राजकीय विद्यालयों में आधुनिक तकनीकी संसाधनों और गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन का माहौल सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। इस दौरान मुख्य सचिव ने पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज परिसर में पौधारोपण किया एवं विभिन्न शैक्षणिक, खेलकूद एवं अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर लंबी कूद में राज्य स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर हेतु चयनित तथा कबड्डी में राज्य स्तर के लिए चयनित सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी राजीव (कक्षा 12), शुभम (कक्षा 11) सहित गृह परीक्षा सत्र 2025-26 के उत्कृष्ट छात्र लविश एवं अस्मित को सम्मानित कर बधाई दी। इसके साथ ही परिषदीय हाईस्कूल परीक्षा में विद्यालय का नाम रोशन करने वाली टॉपर निधि भट्ट एवं अनुष्का को उनकी शानदार शैक्षणिक उपलब्धि के लिए सम्मानित करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं तथा अन्य छात्रों को निरंतर प्रेरणा लेकर कठिन परिश्रम व अनुशासन के साथ सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

इस दौरान जिलाधिकारी प्रशांत आर्य, पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय, मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह, एसडीएम देवानंद शर्मा, सीओ चंचल शर्मा, मुख्य शिक्षा अधिकारी अमित कोटियाल, ईई सिंचाई सचिन सिंहल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।