पंतजलि के सहयोग से बदलेगी प्रदेश के किसानों की आर्थिकी

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और बाबा रामदेव की मौजूदगी में राज्य सरकार और पतंजलि के बीच सहयोग कार्यक्रम पर विस्तृत विचार विमर्श किया गया। इस दौरान मुख्य रूप से 5 क्षेत्रों में आपसी सहयोग पर सहमति बनी।
मुख्यमंत्री आवास पर हुए इस कार्यक्रम में उत्तराखण्ड को जैविक कृषि और जड़ीबूटी राज्य बनाना, राज्य के मोटे अनाज की व्यवसायिक खपत को बढ़ाना, राज्य में आयुष ग्रामों की स्थापना करना, एक विशाल गोधाम (गाौ शाला) की स्थापना करना और पर्यटन को बढ़ावा देना सम्मिलित है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि यह सारे सेक्टर राज्य की समृद्धि और खुशहाली की दृष्टि से गेम चेंजर साबित होंगे। इन सारे क्षेत्रों में संभावनाओं पर अभी तक काफी विचार-विमर्श हुआ है, लेकिन अब इस क्षेत्र में कुछ कर दिखाने की जरूरत है। उन्होंने ये भी कहा कि सरकार कड़े और साहसिक फैसले लेने से नहीं हिचकेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वो एक महीन के अन्दर सभी क्षेत्रों में ठोस कार्ययोजना तैयार करें, जिसको लेकर ठीक एक महीने बाद समीक्षा बैठक की जाएगी और ठोस कार्ययोजना के आधार पर राज्य सरकार और पतंजलि के बीच आवश्यक समझौते भी किये जायेंगे। मुख्यमंत्री का कहना है कि जड़ीबूटी, औद्यानिकी, योग, आयुर्वेद और पर्यटन से राज्य के लोगों की आमदनी बढ़ाने पर कार्य किया जायेगा। पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना बहुत आवश्यक है।

किसानों की मदद करेगा पतंजलि
इस दौरान स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि संस्थान उत्तराखण्ड के किसानों को उनके उत्पादों के लिए प्रतिवर्ष एक हजार करोड़ रूपये से अधिक का भुगतान करने में सक्षम है। सिक्किम जिसे हाल ही में ऑर्गेनिक स्टेट का दर्जा दिया गया है, उससे कही अधिक भूभाग पर उत्तराखण्ड में ऑर्गेनिक खेती हो रही है।

नए पर्यटक स्थलों पर स्थापित होंगे पतंजलि आयुष ग्राम
कहा कि पतंजलि राज्य के उत्पादों के लिए बाईबैक सिस्टम बना रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के 13 जिले 13 नये पर्यटन स्थल बनाने के लक्ष्य की सराहना करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि सभी नये पर्यटन स्थलों पर पतंजलि आयुष ग्राम की स्थापना में सहयोग देने को तैयार है।

विशाल गौशाला तैयार करने की योजना
यह भी कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से एक विशाल गोशाला की स्थापना करने की योजना है, जिसमें 40 से 60 लीटर दूध देने वाली गायों की नस्ल तैयार की जायेगी। वहीं कार्यक्रम में मौजूद आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि की रिसर्च लैब और अन्य सुविधाओं को आयुर्वेद के शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए खोला जायेगा। पतंजलि के 300 से अधिक वनस्पति विज्ञानी राज्य की एक-एक जड़ीबूटी और पौधे का सर्वेक्षण कर उनका डॉक्यूमेंटेशन कर सकते हैं।

राज्यसभा से नई राजनीति पारी की शुरुआत करेंगे अमित शाह

गुजरात में 8 अगस्त को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को उतारने का फैसला किया है। वरिष्ठ बीजेपी नेता जेपी नड्डा ने संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद यह घोषणा की है। इसके साथ ही पार्टी ने संपतिया उइके को मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव में उतारने का फैसला किया है।
बता दें कि राज्य से कुल 11 राज्यसभा सदस्यों में से तीन, स्मृति ईरानी और दिलीप भाई पंड्या दोनों बीजेपी के और कांग्रेस के अहमद पटेल का कार्यकाल आगामी 18 अगस्त को खत्म हो रहा है। दरअसल राज्य में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में बीजेपी संसदीय बोर्ड का यह कदम राज्य में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार बताए जा रहे अमित शाह को राज्य की राजनीति से दूर करने के स्पष्ट संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार एवं राज्यसभा सदस्य अहमद पटेल ने भी राज्यसभा चुनावों के लिए बुधवार को नामांकन दाखिल किया। उनकी कोशिश लगातार पांचवी बार गुजरात से राज्यसभा पहुंचने की है और इसके लिए उन्होंने कांग्रेस से हाल ही बगावत कर चुके शंकर सिंह वाघेला से भी समर्थन मांगा है. हालांकि यहां कयास लगाए जा रहे हैं कि वाघेला गुट के 11 कांग्रेसी विधायक शायद ही कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दें।
गौर करने वाली बात यह भी है कि गुजरात की 182 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 57 विधायक हैं, जबकि बीजेपी के पास 121 विधायक हैं। ऐसे में बीजेपी के दोनों उम्मीदवारों की जीत पक्की मानी जा रही है। वहीं कांग्रेस को जीत के लिए 47 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। उसे एनसीपी के दो और जेडीयू के एक विधायक से भी समर्थन का भरोसा है। हालांकि यहां देखना होगा कि अगर 11 बागी विधायक का बगावती तेवर बरकरार रहा तो कांग्रेस के लिए मामला कांटे का बन जाएगा।

ट्रेन के खाने में निकली छिपकली, यात्री की तबीयत हुई खराब

ट्रेनों में यात्रियों को परोसे जाने वाले भोजन की क्वॉलिटी की तस्वीर उस वक्त सामने आई, जब एक यात्री को परोसी गई वेज बिरयानी में छिपकली पाई गई। इसके बाद यात्री की तबीयत भी खराब हुई, जिसकी वजह से उसे दवा लेनी पड़ी। इसके बाद बैकफुट पर आए रेलवे बोर्ड ने ट्रेन में भोजन सप्लाई करने वाले ठेकेदार का ठेका रद्द करने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही अब रेलवे ने चुनींदा राजधानी, शताब्दी और दुरंतो ट्रेनों में यात्रियों को विकल्प देने का फैसला लिया है कि अगर यात्री चाहें तो रेलवे का भोजन लेने से इनकार कर दें। ऐसी स्थिति में टिकट जारी करते वक्त पैसेंजर से भोजन का पैसा नहीं लिया जाएगा।
ट्रेन में खाने में छिपकली मिलने का यह मामला सीएजी की रिपोर्ट के एक सप्ताह के भीतर सामने आया है। पिछले ही सप्ताह सीएजी की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया था कि रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में परोसे जाने वाले खाने की क्वॉलिटी कितनी खराब है। हालांकि, इसके बाद रेलवे ने दावा किया कि वह सुधार के लिए कदम उठा रहा है लेकिन मंगलवार को बिरयानी में छिपकली निकलने का मामला सामने आ गया।
इंडियन रेलवे के सूत्रों के मुताबिक बिरयानी में छिपकली मिलने का मामला पूर्वा एक्सप्रेस में सामने आया। ट्रेन नंबर 12303 के फर्स्ट क्लास में यात्रा कर रहे वकील संतोष कुमार सिंह ने अपने लिए वेज बिरयानी का ऑर्डर किया। उन्हें बिरयानी में छिपकली दिखी। इसके बाद उन्होंने कैटरिंग स्टाफ को इसकी जानकारी दी और बिरयानी की फोटो भी ट्वीट करते हुए रेलमंत्री सुरेश प्रभु को टैग कर दी। बाद में इस यात्री की तबीयत खराब होने पर उसे दवा भी दी गई।
इस मामले के सामने आने के बाद रेलवे ने इस ट्रेन में खाना परोसने वाले कांट्रैक्टर आर.के. असोसिएटस का ठेका रद्द करने का फैसला किया है। महत्वपूर्ण है कि इसी ठेकेदार के खिलाफ पिछले साल भी खराब खाने की शिकायतें आई थीं। उस वक्त रेलवे ने इस पर क्रमश 10 लाख और साढ़े सात लाख रुपये का जुर्माना ठोंका था। अब रेलवे अपने बचाव में दावा कर रही है कि उसने भोजन की क्वॉलिटी को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रखी है। इसी वजह से उसने इस साल जनवरी से अब तक ट्रेनों में खाना परोसने वाले 12 ठेकेदारों के ठेके रद्द किए हैं।

सीमा विवाद से जूझ रहे भारत को श्रीलंका से मिली संजीवनी

सिक्किम में सीमा विवाद को लेकर भारत से उलझे चीन को श्रीलंका से तगड़ा झटका लगा है। श्रीलंका में बंदरगाह बना रहे चीन के सामने नई शर्तें लगा दी गई हैं और गौर करने वाली बात ये है कि श्रीलंका ने भारत के सामरिक हितों को ध्घ्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। इस संबंध में श्रीलंका कैबिनेट ने मंगलवार को हंबनटोटा पोर्ट को विकसित करने के लिए एक संशोधित समझौता पास किया।
श्रीलंका चीन की कंपनी की मदद से हंबनटोटा पोर्ट को विकसित करना चाहता है। इसके तहत किए गए पहले समझौते का खुद श्रीलंका में ही लोगों ने काफी विरोध किया, जिसके बाद इस समझौते में संसोधन करना पड़ा। यह बंदरगाह दुनिया की सबसे व्यस्त शिपिंग लेन के करीब है, यह उस वक्घ्त विवादों में घिर गया जब निजीकरण के प्रयासों के तहत इसके चीनी कंपनी के हाथों में जाने की बात सामने आई।
चीन मर्चेंट्स पोर्ट होल्डिंग्स ने 1.5 बिलियन डॉलर (करीब 9 हजार 7 करोड़ रुपये) में इस बंदरगाह को विकसित करने का समझौता किया। इसके तहत कंपनी को इसमें 80 फीसदी हिस्सेदारी देने की बात तय की गई। अब नए समझौते में श्रीलंका सरकार ने बंदरगाह पर वाणिज्यिक परिचालन में चीन की भूमिका को सीमित करने की मांग की है। बंदरगाह पर व्यापक सुरक्षा निगरानी खुद के पास ही रखने को कहा है।
हंबनटोटा पोर्ट एशिया में आधुनिक सिल्क रूट का अहम हिस्सा है। इंडस्ट्रियल जोन विकसित करने के नाम पर चीन यहां 15000 एकड़ जमीन अधिगृहित करने की योजना में है। ऐसे में श्रीलंका के अलावा दूसरे देशों खासकर भारत की तरफ से ऐसी चिंता जाहिर की गई कि चीन इसका इस्तेमाल नेवी बेस के तौर पर कर सकता है। श्रीलंका में भी इसे लेकर काफी विरोध प्रदर्शन हुए। लोगों ने अपनी जमीन खोने का डर जताया था। इसके अलावा श्रीलंका के राजनेताओं ने इतने बड़े जमीन के टुकड़े का नियंत्रण चीन के पास जाने को देश की संप्रभुता के साथ समझौते के रूप में भी देखा था।

चीन ने पीएम मोदी की प्रशंसा कर विश्व को चौंकाया

चीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भारत की खुली विदेश आर्थिक नीति की बुधवार को प्रशंसा की है। डोकलाम को लेकर जारी तनातनी और उकसावे भरे अपने बयानों के बीच चीन का यह बयान चौकाने वाला है।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ से जारी एक बयान में कहा गया है, भारत लगातार ही विदेशी निवेश आकर्षित कर रहा है, उसने निवेश के लिए सकारात्मक माहौल बनाया है और पिछले दो वर्षों के दौरान दुनिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा गंतव्य रहा है।
इसमें साथ ही कहा गया है, भारत और चीन के बीच व्यापार सहयोग मजबूत करने और उनकी खुली व्यापार नीति की पैरवी से निश्चित रूप से मुक्त वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने और संरक्षणवाद का मुकाबला करने में प्रोत्साहन मिलेगा। इस बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने एक सक्रीय विदेश नीति लागू की, विदेशी निवेश नीति को सुधारा है और घरेलू उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतरने के लिए प्रोत्साहित किया है।
भारत में चीनी राजदूत के हवाले से इस लेख में कहा गया है, भारत का मौजूदा सुधार प्रक्रिया और खुली नीति बेहद आकर्षक है। इसमें साथ ही कहा गया है, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों विकासशील राष्ट्रों का रुख एक समान है। उदाहरण के लिए, भारत ने हरित अर्थव्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबधता दिखाई है और पेरिस जलवायु समझौते को लागू करने अग्रणी रहा है।
डोकलाम को लेकर भारत के खिलाफ उकसावे भरे बयानों के बीच शिन्हुआ में प्रकाशित यह लेख एक अप्रत्याशित अपवाद के रूप में देखा जा रहा है। इससे पता चलता है कि बीजिंग वैश्विक वित्तीय संस्थानों में उभरते राष्ट्रों को अधिक अधिकार दिए जाने, वैश्विकरण विरोधी रुख का विरोध करने सहित उन तमाम मुद्दों पर भारत से साथ चाहता है, जो उसे अपने हित में दिखते हैं।

राष्ट्रपति के भाषण को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के शपथ लेने के बाद पहले भाषण पर बवाल हो गया है। बुधवार को राज्यसभा में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के भाषण का मुद्दा उठाया। आनंद शर्मा ने भाषण में दीनदयाल उपाध्याय की महात्मा गांधी से तुलना करने पर सवाल किया। उन्होंने भाषण में पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी का नाम लेने का भी मुद्दा उठाया।
इसके बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई मेंबर राष्ट्रपति के भाषण पर सवाल खड़ा कर सकता है। अरुण जेटली ने आनंद शर्मा के बयान को हटाने की मांग की है। वहीं जेटली ने कहा कि विपक्ष इस प्रकार के मुद्दे टीवी पर आने के लिए उठाता है। जिसपर विपक्ष ने काफी हंगामा किया।
गौरतलब है कि शपथ के बाद रामनाथ कोविंद ने अपने भाषण में महात्मा गांधी, दीनदयाल उपाध्याय, राजेंद्र प्रसाद, राधाकृष्णन, एपीजे कलाम और प्रणब मुखर्जी का नाम लिया था। शपथ लेने के बाद रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में कहा कि मुझे भारत के राष्ट्रपति का दायित्व सौंपने के लिए सभी का आभार व्यक्त करता हूं। मैं पूरी विनम्रता के साथ इस पद को ग्रहण करता हूं। सेंट्रल हॉल में आकर पुरानी यादें ताजा हुई, सांसद के तौर पर यहां पर कई मुद्दों पर चर्चा की है। मैं मिट्टी के घर में पला बढ़ा हूं, मेरी ये यात्रा काफी लंबी रही है।
रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में कहा कि देश के नागरिक ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। हमें उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरना है। पूरा विश्व भारत की ओर आकर्षित है, अब हमारे देश की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दूसरे देशों की मदद करना भी हमारा दायित्व है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में देश अपनी आजादी के 75 साल पूरा कर रहा है, हमें इसकी तैयारी करनी चाहिए। हमें तेजी से विकसित होने वाली मजबूत अर्थव्यवस्था, शिक्षित समाज का निर्माण करना होगा। इसकी कल्पना महात्मा गांधी और दीनदयाल उपाध्याय ने की थी।

मानहानि के मामले में कोर्ट ने लगाया सीएम पर जुर्माना

दिल्ली उच्च न्यायालय ने वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा दायर मानहानि के दूसरे मामले में जवाब दाखिल नहीं करने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। इससे पहले केजरीवाल को बड़ा झटका तब लगा जब इस केस में उनका बचाव कर रहे जाने-माने वकील राम जेठमलानी ने आप संयोजक पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए आगे पैरवी करने से साफ इनकार कर दिया।
यही नहीं आज सुनवाई से पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने केजरीवाल को निर्देश दिया कि वह अपने और आम आदमी पार्टी के पांच अन्य नेताओं के खिलाफ दर्ज मानहानि के मुकदमे में जिरह के दौरान केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली से अपमानजनक सवाल नहीं करे।
न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि मुख्यमंत्री को गरिमापूर्ण तरीके से और कानून के अनुसार भाजपा के वरिष्ठ नेता जेटली से जिरह करनी चाहिए। अदालत ने कहा कि गरिमा बनाए रखनी होगी, क्योंकि जिरह की आड़ में किसी व्यक्ति से अपमानजनक और अभद्र भाषा में बात नहीं होनी चाहिए। बहरहाल, न्यायालय ने केजरीवाल के खिलाफ कोई आदेश पारित नहीं किया।
अदालत ने केजरीवाल की उस दलील पर गौर किया कि उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी को जेटली के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के निर्देश नहीं दिए थे। अदालत जेटली की उस अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मांग की गई है कि मानहानि के मुकदमे में व्यवस्थित और उचित तरीके से बयान दर्ज कराए जाए।
मानहानि के मुकदमे में केजरीवाल के अलावा राघव चड्ढा, कुमार विश्वास, आशुतोष, संजय सिंह और दीपक वाजपेयी आरोपी बनाए गए है। उन्होंने भाजपा नेता जेटली पर आरोप लगाए थे कि वर्ष 2000 से 2013 के बीच डीडीसीए के अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार किया। जेटली ने इन आरोपों से इनकार किया है।

नीतिश के इस्तीफे से बिहार की राजनीति में भूचाल

तेजस्वी यादव पर जेडीयू-आरजेडी में बढ़ती तकरार के बीच बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने बुधवार शाम गवर्नर को इस्तीफा सौंप दिया। नीतीश पार्टी की विधायक दल की मीटिंग के बाद सीधे गवर्नर हाउस गए थे, जहां उन्होंने केसरी नाथ त्रिपाठी को अपना इस्तीफा सौंपा। वे बोले, आगे क्या होगा, ये आगे पर छोड़ दीजिए। आज का चैप्टर यहीं खत्म। नीतीश के इस्तीफे के बाद नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें बधाई दी। इससे पहले लालू यादव ने कहा था कि बिहार सरकार 5 साल पूरे करेगी, लेकिन नीतीश के इस्तीफे के बाद अब सवाल सामने आ रहा है कि महागठबंधन बचेगा या फिर टूटेगा? बता दें कि रेलवे टेंडर स्कैम और बेनामी प्रॉपर्टी मामले में केस दर्ज होने पर बीजेपी लगातार तेजस्वी के इस्तीफे की मांग कर रही है। जेडीयू भी कह चुकी है कि तेजस्वी को जनता के बीच जाकर सफाई देनी चाहिए।

इस्तीफे के बाद नतीश ने क्या कहा?
गवर्नर को इस्तीफा सौंपने के बाद नीतीश ने कहा, मैंने अभी महामहिम को इस्तीफा सौंपा है। महागठबंधन की सरकार 20 महीने से भी ज्यादा समय तक चलाई है। …और मुझसे जितना संभव हुआ, हमने गठबंधन धर्म का पालन करते हुए बिहार की जनता के समक्ष चुनाव के दौरान जिन बातों की चर्चा की थी, उसी के मुताबिक हमने काम करने की कोशिश की थी। हमने शराबबंदी लागू कर सामाजिक परिवर्तन की नींव रखी। बुनियादी ढांचे का विकास हो, सड़क हो, बिजली का मामला हो, सभी के लिए हमने निरंतर काम करने की कोशिश की और निश्चय यात्रा के दौरान हर जिले में जिन योजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है, उन्हें स्पॉट पर देखा। जितना संभव था, हमने काम करने की कोशिश की।

महागठबंधन में काम करना संभव नहीं
20 महीने में एक तिहाई कार्यकाल पूरा किया। जिस तरह की चीजें सामने आईं, उसमें मेरे लिए महागठबंधन का नेतृत्व करना और काम करना संभव नहीं था। हमने किसी का इस्तीफा नहीं मांगा। हमारी लालू जी से भी बात होती रही। तेजस्वी जी से भी मिले। हमने यही कहा कि जो भी आरोप लगे, उसके बारे में एक्सप्लेन कीजिए। आमजन के बीच में जो एक अवधारणा बन रही है, उसको ठीक करने के लिए एक्सप्लेन करना जरूरी है। लेकिन वह भी नहीं हो रहा था।

मेरी अंतरआत्मा की आवाज
कुल मिलाकर माहौल ऐसा बनता जा रहा था कि हमारे लिए काम करना संभव नहीं था। हम कुछ भी काम करें, परिचर्चा में एक ही बात हो रही थी। हमने आज तक रुख अख्तियार किया, उससे अलग रुख नहीं अपना सकते थे। हमने गठबंधन धर्म का पालन किया। लेकिन ये मेरे अंतरआत्मा की आवाज थी। कई दिनों से यह बात मेरे मन में थी कि कोई रास्ता निकल आए। हमने राहुलजी से भी बात की। उनका भी यही रुख रहा है। उन्होंने ही (दोषियों को चुनाव लड़ने से छूट देने का) ऑर्डिनेंस फाड़ा था।

मृतक किसान का परिवार गरीबी में कर रहा जीवन यापन

स्वाड़ी गांव के मृतक किसान राजू कुमार के परिजन बेहद गरीबी में जीवन-यापन कर रहे हैं। परिवार के मुखिया की मौत के बाद पूरा परिवार चिंतित है। चिंता जीवन-यापन की भी है और बैंक का ऋण चुकाने की भी। जो कमाने वाला था वह तो रहा नही, इसलिए आगे क्या होगा परिवार इसी चिंता में डूबा है। परिवार अभी मौत के सदमें से नही उभर पाया है। रहने के लिए मकान के नाम पर उनके पास दो जर्जर कमरे हैं। एक में परिवार के सात सदस्य रहते हैं और दूसरे कमरे में पशु रहते हैं। मकान भी इतना जर्जर है कि कभी भी गिर सकता है बारिश होने पर उससे पानी टपकता है। गौर करने वाली बात यह है कि उक्त परिवार के पास शौचालय भी नही है। परिवार में कोई भी कमाने वाला नही है। मृतक का सबसे बड़ा बेटा चौबीस साल का अजयवीर भी बेरोजगार है। मृतक का बैंक से लोन ले रखा था और लोन न चुका पाने की वजह से वह कई दिनों से तनाव में था और इसी वजह से उसने आत्म हत्या की। खास बात यह है कि शासन-प्रशासन यह कतई मानने को तैयार नही है कि उसने ऋण की वजह से आत्महत्या की। उसकी पत्नी रोशनी देवी ने बताया कि उसके पति राजू की कोई और समस्या नही थी, उसका किसी से कोई विवाद भी नही था और वह बीमार भी नही था, लेकिन दो बैंको से कर्ज लेने कारण वह कई दिनों से तनाव में था। बैंक कर्मचारी कई बार घर में भी आये और उन्होंने कर्ज चुकाने के लिए कई बार फोन भी किया। इसी तनाव की वजह से उसने आत्म हत्या की है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को किसने बताया महानतम नेता!

फिल्म परमाणु पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में किए गए 5 परमाणु बम के पोखरण, राजस्थान में हुए परिक्षण की सच्ची घटना पर आधारित है। इसको लेकर फिल्म के लीड एक्टर जॉन अब्राहम कहते हैं, यह एक मनोरंजक फिल्म है। अटल बिहारी वाजपेयी हमारे देश के महानतम प्रधानमंत्री में से एक हैं। परमाणु यह एक फिल्म है और इसे मनोरंजक होना होगा। हम लोग न तो राजनीतिज्ञ है और न ही इस फिल्म में राजनीति से जुड़ा कुछ दिखा रहे हैं। हमने बस यही प्रयास किया है कि एक मनोरंजक फिल्म बनाएं। इसके अलावा यह सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म है। वह घटनाएं जोकि भारत में घटित हुई थीं। गौरतलब है कि जब देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे उन्होंने पोखरण में 5 परमाणु बम के परीक्षण करवाए थे। यह परीक्षण इस तरह किये गये कि पूरे विश्व को इसकी बिल्कुल भी भनक नहीं लगी और परमाणु परीक्षण सफल होने के बाद विश्व को इसकी जानकारी मिली।