एक लाख कर्मचारियों को मिली राहत, नए आदेश जारी

हाल ही में शासन ने सीधी भर्ती और पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में अंतर को समाप्त करने के संबंध में जो आदेश किया था, उसका लाभ अब प्रदेश के एक लाख कर्मचारियों को मिलने जा रहा है।
दरअसल, छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सीधी भर्ती और पदोन्नति के पदों पर न्यूनतम वेतन निर्धारण में विसंगति पैदा हो गई थी। इसके संबंध में शिक्षा विभाग ने शासन से स्पष्टीकरण मांगा था, जिस पर शासनादेश जारी किया गया। कर्मचारी संगठनों ने जब खोज खबर की तो खुलासा हुआ कि इसका फायदा प्रदेश के समस्त कर्मचारियों को मिलेगा। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के मुख्य संयोजक ठाकुर प्रहलाद सिंह ने कहा कि इससे कर्मचारियों और शिक्षकों को 1000 रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक का वित्तीय लाभ मिलेगा।
प्रदेश में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सीधी भर्ती और पदोन्नत कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में असमानता की विसंगति पैदा हो गई थी। पदोन्नति के बाद कर्मचारियों को समान पद पर सीधी भर्ती से कम न्यूनतम वेतन निर्धारित हुआ। इसे लेकर पदोन्नति पाने वाले शिक्षक व कर्मचारी सरकार से लगातार विसंगति दूर करने की मांग कर रहे थे।
अब नए शासनादेश से पदोन्नति के बाद कर्मचारी का न्यूनतम वेतन सीधी भर्ती से आए कर्मचारी के बराबर होगा। प्रदेश सरकार के तकरीबन सभी विभागों में इसी तरह की विसंगति है। इनमें प्रमुख विभाग वन, मत्स्य, कृषि, उद्यान, ग्राम्य विकास, गन्ना, आबकारी, परिवहन, सहकारिता, वाणिज्य कर, ग्रामीण अभियंत्रण, राजस्व, खाद्य आपूर्ति, मनोरंजन कर समेत कई अन्य विभागों के कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आशंका जताई कि विभागों के अध्यक्ष शासनादेश को शिक्षा विभाग तक सीमित करके कर्मचारियों को उनके लाभ से वंचित कर देना चाहते हैं। लेकिन परिषद चुप नहीं बैठेगी। शनिवार को परिषद की बैठक में तय हुआ कि कोई विभागाध्यक्ष शासनादेश को लागू करने में हीलाहवाली करेगा तो परिषद उसका घेराव करेगी। बैठक में प्रदीप कोहली, नंद किशोर त्रिपाठी, शक्ति प्रसाद भट्ट, राकेश प्रसाद ममगाईं, गुड्डी मटूड़ा, विजया जोशी, एनएस कुंद्रा, सुभाष शर्मा समेत कई अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

पूर्व सैनिकों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार, सरकार ने की थी महत्वूपर्ण घोषणा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से मुख्यमंत्री आवास में पूर्व सैनिक वेल्फेयर एसोसियेशन के सदस्यों ने भेंट की। उन्होंने शौर्य दिवस के अवसर पर सैनिकों के हित में की गई कल्याणकारी घोषणाओं के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने शौर्य दिवस के अवसर पर सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिये विशेष रूप से अपर सचिव स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी नियुक्त करने, उत्तराखण्ड के शहीद सैनिकों के लिये उनकी याद में विशाल मेमोरियल बनाना और सबसे महत्वपूर्ण घोषणा प्रदेश के सचिवालय में पूर्व सैनिकों को प्रवेश करने के लिये उनका आई कार्ड ही प्रवेश पत्र माने जाने की घोषणा की थी, इन घोषणाओं के प्रति प्रदेश के सैनिक बहुत प्रभावित हुए हैं जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा सैन्य बाहुल्य प्रदेश है। देव भूमि के साथ ही हमारे वीर सैनिकों ने अपने अदम्य साहस एवं शौर्य के बल पर इसे वीर भूमि बनाया है। वीर सैनिकों व उनके आश्रितों के कल्याण के लिये राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चैहान, पूर्व सैनिक वेल्फेयर एसोसिएशन के केन्द्रीय अध्यक्ष पी.टी.आर शमशेर सिंह बिष्ट, महासचिव ओ. कैप्टन आर.डी.शाही, पी.बी.ओ.आर की अध्यक्षा महिला प्रकोष्ठ राजकुमारी थापा, उपाध्यक्षा कमला गुरूंग सहित बड़ी संख्या में संगठन के सदस्य उपस्थित थे।

हिमालयी राज्यों की सुरक्षा और विकास को केन्द्र सरकार से मांगी मदद

हिमालयन कॉन्क्लेव में गहन मंथन के पश्चात प्रतिभागी हिमालयी राज्यों द्वारा ‘‘मसूरी संकल्प’’ पारित किया गया। इसमें पर्वतीय राज्यों द्वारा हिमालय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और देश की समृद्धि में योगदान का संकल्प लिया गया। साथ ही, प्रकृति प्रदत्त जैव विविधता, ग्लेशियर, नदियों, झीलों के संरक्षण का भी प्रण लिया गया। भावी पीढ़ी के लिए लोककला, हस्तकला, संस्कृति आदि का संरक्षण किया जाएगा। पर्वतीय संस्कृति की आध्यात्मिक परम्परा के संरक्षण व मानवता के लिए कार्य करने का संकल्प लिया गया। समानता व न्याय की भावना के साथ पर्वतीय क्षेत्रों के सतत विकास की रणनीति पर काम किया जाएगा। पर्वतीय सभ्यताओं के महान इतिहास व विरासत के संरक्षण का संकल्प लिया गया।

इससे पूर्व हिमालयन कॉन्क्लेव में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग करते हुए केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने हिमालयन राज्यों के सम्मेलन के आयोजन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निश्चित रूप से यह आयोजन हिमालयी राज्यो के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि लम्बे समय से इसकी आवश्यकता महसूस की जा रही थी। हिमालयन राज्य भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन सभी राज्यों का विकास भारत सरकार की प्राथमिकताओं में है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों से पलायन को रोकने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे। इसमें पंचायतीराज संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा कर ही पलायन को रोका जा सकता है। सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोग देश की सुरक्षा में आंख और कान का काम करते हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। हमे विकास के साथ ही पर्यावरणीय सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा। पर्वतीय राज्यों में ऑर्गेनिक कृषि पर फोकस किया जाना चाहिए। इसमें स्थानीय युवाओं को जोड़े जाने की जरूरत है। पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं के लिए स्टार्ट-अप महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इससे पलायन तो रुकेगा ही साथ ही क्षेत्र भी आर्थिक रूप से विकसित होगा। केन्द्रीय वितमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। विकास योजनाओं को फलीभूत करने के लिए स्थानीय समुदायों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सम्मेलन में प्रतिभागी राज्यों द्वारा चर्चा किये गये विषयों पर केन्द्र द्वारा गंभीरता से विचार किया जायेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कॉन्क्लेव में आए प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि हमें गर्व है कि देश की सीमाओं की चैकसी की जिम्मेदारी मिली है। हिमालय राज्यों के सम्मेलन की मेजबानी का अवसर प्राप्त हुआ है यह उत्तराखण्ड के लिए सम्मान की बात है। हिमालय राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियां समान हैं। मुझे आशा है कि देश की समृद्धि में योगदान करने के लिए यह एक अच्छा मंच साबित होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जल की एक-एक बूंद बचाने के संकल्प में हिमालयी राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हम सभी को मिलकर जल संचय एवं जल संरक्षण के लिए काम करना होगा। नदियों के पुनर्जीवीकरण के लिए केन्द्रीय स्तर पर अलग से बजटीय प्रावधान किया जाना चाहिए। इको सिस्टम सर्विसिज के लिए हिमालयी राज्यों को और प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि 2025 तक आर्थिक विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हिमालयी राज्यों में वैलनेस व टूरिज्म पर काम करना होगा। आपदा, पलायन सभी हिमालयी राज्यों की एक समान समस्या है। हम सभी को मिलकर देश की प्रगति के लिए काम करना है।
15वें वित आयोग के अध्यक्ष एन.के. सिंह ने हिमालयन कॉन्क्लेव को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अपनी साझा समस्याओं को रखने व उनके हल के लिए नीति निर्धारण में यह एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म साबित होगा। केन्द्र भी हिमालयी राज्यों के साथ है। वित आयोग, हिमालयी राज्यों की समस्याओं से भलीभांति अवगत है। सम्मेलन में उठायी गयी बातों से वित्त आयोग भी सहमत है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए संवैधानिक दायरे में हर सम्भव प्रयास किया जाएगा। हिमालयी राज्य वैश्विक पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं। यहां जीवन स्तर को सुधारने के लिए क्या सिस्टम बनाया जा सकता है, इस पर विचार किया जाना चाहिए। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में जीवन अत्यंत कठिन होता है। यहां की समस्याएं अन्य राज्यों से अलग हैं। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में रेल व हवाई कनैक्टीविटी विकसित किये जाने की आवष्यकता बतायी। छोटे राज्यों के सीमित संसाधनों को देखते हुए केन्द्र द्वारा वित्तीय सहायता में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि कि हिमालयी राज्यों में विकास की बहुत संभावनाएं हैं। इसके लिए हमें टारगेट सेट करने की आवश्यकता है। पर्यटन की संभावनाओं की दृष्टि से भी सभी हिमालयन राज्य बहुत ही समृद्ध हैं। अभी यहां घरेलू पर्यटकों की अधिकता है। पर्यटन को और अधिक तेजी से विकास करने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जाना बहुत ही जरूरी है। वैल्यू एडेड एग्रीकल्चर को प्रोत्साहित करना जरूरी है। लक्ष्यों को निर्धारित कर समयबद्ध तरीके से योजनाओं का क्रियान्वयन करना जरूरी है। इस सम्मेलन के माध्यम से सभी हिमालयन राज्य आपसी तालमेल से नई योजनाओं को साझा कर नीति आयोग के समक्ष रख सकते हैं। हमे अपनी समस्याओं और संभावनाओं का अध्ययन कर उसके अनुसार योजनाओं को बनाना चाहिए। हमे अपनी कृषि की लागत को कम करने की आवश्यकता है। संसाधनों की समीक्षा करने की आवश्यकता है। भविष्य में पानी की समस्या को देखते हुए सभी राज्यों द्वारा जल संरक्षण के लिए विशेष नीतियां बनाई जानी चाहिए। इसके लिए वॉटरशेड मैनेजमेंट की अत्यधिक आवश्यकता है। हमें नदियों के स्रोतों को बचाने के प्रयास करने होंगे। जल संरक्षण के लिए सभी राज्यों को अंतरराजयीय सहयोग से नीतियां तैयार करनी होंगी। सीमांत राज्यों को पलायन को रोकने और सीमांत क्षेत्रों में विकास करने की आवश्यकता है। विकास के लिए आकांक्षी जनपदों में विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड कोंगकल संगमा ने कहा कि हिमालयी राज्यों में विकास योजनाओं की लागत अधिक होती है। इसलिए केन्द्र द्वारा विभिन्न विकास योजनाओं के मानकों में इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। आर्थिक विकास व पारिस्थितिकीय संतुलन को बनाये रखना, हिमालयी राज्यों की दोहरी जिम्मेदारी होती है। हमें सतत विकास के लिए रिस्पोंसिबल टूरिज्म पर फोकस करना होगा। उन्होंने पर्वतीय राज्यों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान की आवष्यकता पर बल दिया। नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने सम्मेलन को बेहतर शुरूआत बताते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका संवर्द्धन व इको सिस्टम के महत्व पर जोर दिया। अरूणाचल के उप मुख्यमंत्री चोवना मेन ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विषेष ध्यान देना होगा। मिजोरम के मंत्री टी.जे.लालनुनल्लुंगा ने अपने सम्बोधन में प्राकृतिक आपदा, जैव विविधता संरक्षण में स्थानीय लोगो की भागीदारी, डिजीटल कनैक्टीविटी पर जोर दिया। सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता भारत सरकार परमेष्वरमन अय्यर ने जल शक्ति अभियान पर प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने जल संरक्षण में स्प्रिंगषेड मैनेजमेंट को प्रभावी ढंग लागू करने की बात कही। इसमें पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीक का समन्वय उपयोगी सिद्ध होगा। जमींनी स्तर पर पैरा हाइड्रोलॉजिस्ट तैयार किये जाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में ट्रेंचध्खांटी के माध्यम से जल संरक्षण के पारंपरिक तरीकों की प्रधानमंत्री ने सराहना की है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य कमल किशोर ने डिजास्टर रिस्क मैंनेजमेंट पर प्रस्तुतिकरण देते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में वहां की परिस्थितियों के अनुरूप भवन निर्माण पर जोर दिय जाने की बात कही। सिक्किम के मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. महेन्द्र पी.लामा ने केन्द्रीय सहायता में ईको सिस्टम सर्विसेज को विषेष भार दिये जाने की बात कही।
जम्मू कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार के.के.शर्मा, आई.आई.एफ.एम. की डॉ. मधु वर्मा व सुशील रमोला ने भी विचार व्यक्त किये। सम्मेलन के समापन अवसर पर उत्तराखण्ड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने धन्यवाद ज्ञापित किया। बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव वित्त अमित नेगी, अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश, डी.जी.पी. अनिल रतूड़ी, सचिव सौजन्या, अपर सचिव सोनिका, महानिदेशक सूचना डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट सहित अन्य राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने हिमालयन कान्क्लेव को बताया सफल

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मसूरी में आयोजित हिमालयन कान्क्लेव के संबंध में बताया कि यह आयोजन सफल रहा है। प्रथम बार हिमालयन राज्यों के प्रतिनिधियों द्वारा प्रतिभाग किया गया है। उन्होंने बताया कि असम राज्य को छोड़कर 10 राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिमालयन कान्क्लेव में शामिल हुए। जिसमें हिमांचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय के मुख्यमंत्री, अरूणाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयन कान्क्लेव में मुख्यतः आपदा, जल शक्ति, पर्यावरणीय सेवाओं आदि पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि सभी हिमालय राज्यों द्वारा एक कॉमन एजेंडा तैयार कर केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को दिया गया। हिमालयी राज्यों द्वारा यह भी मांग की गई है कि पर्यावरणीय सेवाओं के लिए ग्रीन बोनस दिया जाना चाहिए। हिमालयी राज्य देश के जल स्तम्भ है, जो माननीय प्रधानमंत्री के जल शक्ति संचय मिशन में प्रभावी योगदान देंगे। नदियों के संरक्षण व पुनर्जीवीकरण के लिए केन्द्र पोशित योजनाओं में हिमालयी राज्यों को वित्तीय सहयोग दिया जाना चाहिए। नये पर्यटक स्थलों को विकसित करने में केन्द्र सरकार द्वारा सहयोग दिया जाना चाहिए। देश की सुरक्षा को देखते हुए पलायन रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हिमालयी राज्यों की इस चिंता पर केन्द्रीय वित्त मंत्री द्वारा भी आश्वासन दिया गया है। हिमालयन कान्क्लेव में इस बात पर सर्वसम्मति बनी कि प्रतिवर्श आयोजित किया जाय। साथ ही हिमालय क्षेत्र के लिए अलग मंत्रालय का गठन किया जाय। इस सम्मेलन में नीति आयोग, पन्द्रवां वित्त आयोग व वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा हिमालयी राज्यों के लिए बजट में अलग से प्लान किये जाने का आश्वासन दिया गया।
प्रेस वार्ता में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार, अरूणाचल के उप मुख्यमंत्री चोवना मेन, जम्मू कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार के.के.शर्मा, उत्तराखण्ड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह सहित अन्य राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

उत्तराखंड के प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि की जरुरतः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। पर्वतीय जिलों में प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि के लिए जिलाधिकारियों को विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये गये हैं। विकासखण्ड स्तर पर यह विचार करना जरूरी है कि कैसे प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों में प्रति व्यक्ति आय में 30 हजार रूपये की वृद्धि हुई है। पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिये सरकार प्रयासरत है। इन्वेस्टर समिट में 40 हजार करोड़ रूपये के एमओयू पर्वतीय क्षेत्रों के लिए हुए है। प्रत्येक न्याय पंचायत पर ग्रोथ सेंटर विकसित किये जा रहे हैं। 58 ग्रोथ सेंटर स्वीकृत किये जा चुके हैं। पिरूल से बिजली बनाने का कार्य किया जा रहा है। सौर ऊर्जा की 600 करोड़ की योजनायें विभिन्न उद्यमियों को पर्वतीय क्षेत्रों के लिए आवंटित की गई हैं। सर्विस सेक्टर में भी काफी इन्वेस्टमेंट पहाड़ों में संभावित है। महिला सशक्तीकरण के लिए एलईडी उपकरण बनाने के लिए ब्लॉक स्तर महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। सरकार ने इन उपकरणों की खरीद की व्यवस्था भी की है।
उत्तराखण्ड की प्रथम मानव विकास रिपोर्ट 2019 इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट नई दिल्ली के सहयोग से तैयार की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार राज्य का ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स 0.718 है। इस रिपोर्ट में ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स, लैंगिक विकास सूचकांक, बहुआयामी गरीबी सूचकांक यथा शिक्षा, स्वास्थ्य व जीवन स्तर एवं राज्य में जन्म पर जीवन प्रत्याशा का आकलन किया गया है। मानव विकास सूचकांक में देहरादून प्रथम, हरिद्वार दूसरे व उधमसिंह नगर तीसरे स्थान पर रहे। लैंगिक विकास सूचकांक में उत्तरकाशी प्रथम, रूद्रप्रयाग द्वितीय तथा बागेश्वर तृतीय स्थान पर रहे। बहुआयामी गरीबी सूचकांक में उत्तरकाशी प्रथम, हरिद्वार द्वितीय व चम्पावत तृतीय स्थान पर रहे। उत्तराखण्ड राज्य की जन्म पर जीवन प्रत्याशा 71.3 वर्ष है। पिथौरागढ़ जनपद में जन्म पर जीवन प्रत्याशा सर्वाधिक 72.1 वर्ष है।

मानव विकास रिपोर्ट रिपोर्ट में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, विद्युतीकरण, प्रति व्यक्ति आय के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों के साथ विकास के मार्ग में मौजूद बाधाओं व चुनौतियों व उनकों दूर करने के लिए मार्गदर्शक उपायों को भी समावेशित किया गया है। जो भविष्य में बेहतर विकास रणनीतियों के निर्माण एवं क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार व विभिन्न विभागों को उत्प्रेरित करती रहेगी। यह रिर्पोट मानव विकास तथा समावेशी विकास को विकास के केन्द्र के रूप में बनाये रखने हेतु राज्य की योजनाओं, नीतियों एवं हस्तक्षेपों के आधार के रूप में कार्य करेगी।
‘ग्रीन एकाउंटिंग ऑफ फॉरेस्ट रिसोर्स, फ्रेमवर्क फॉर अदर नेचुरल रिसोर्स एण्ड इण्डेक्स फॉर सस्टनेबल एनवायरमेंटल परफॉर्मेंस फॉर उत्तराखण्ड स्टेट’ हेतु इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर फॉरेस्ट मैनेजमेंट, भोपाल के सहयोग से तैयार की गई है। इस रिपोर्ट में राज्य के वन संसाधनों के आर्थिक महत्व को मौद्रिक रूप में मापने का प्रयास किया गया है। राज्य 18 वन सेवाओं को फ्लो वैल्यू 95,112.60 करोड़ तथा तीन सेवाओं का स्टॉक वैल्यू 14,13,676.20 करोड़ आंकलित हुआ है। इससे राज्य सरकार की लंबे समय से चली आ रही ग्रीन बोनस की मांग को भारत सरकार के समक्ष अधिक प्रभावी ढ़ग से रखने में मदद मिलेगी।
उत्तराखण्ड आर्थिक सर्वेक्षण भाग-2 में उत्तराखण्ड राज्य की अर्थव्यवस्था को समृद्ध कर राज्य को देश के अग्रणी राज्य में शामिल करने के साथ-साथ समान सामाजिक न्याय, पर्यावरण तथा विकास की प्रक्रिया के बीच ताल-मेल को बढ़ावा देने, पर्यटन के क्षेत्र में पर्यटन स्थलों को वैश्विक स्तर का तैयार कर घरेलू तथा विदेशी पर्यटकों के लिए शीर्ष प्राथमिकता प्रदान करना है। राज्य के दूर-दराज पहाड़ी क्षेत्रों में औद्यानिकी के द्वारा कृषि क्षेत्र को पुनर्जीवित करने तथा पारिस्थितिकी के अनुकूल औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए इसमें मदद मिलेगी। यह रिपोर्ट राज्य द्वारा सतत विकास 2030 के लक्ष्यों की कार्य योजना में भी सहायक होगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के औद्योगिक सलाहकार डॉ. के.एस. पंवार, प्रमुख सचिव मनीषा पंवार, श्रम संविदा सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल, सचिव बी.एस मनराल, अपर सचिव सुरेश जोशी, निदेशक अर्थ एवं संख्या सुशील कुमार, डी.डी.जी. एन.एस.एस.ओ राजेश कुमार, आईआईएमएफ भोपाल की डॉ. मधु वर्मा, आईएचडी नई दिल्ली के डॉ.आई.सी. अवस्थी, ई.एच.आई संस्थान के डॉ. आर.एस. गोयल आदि उपस्थित थे।

बौखलाएं नेता, कहा-जम्मू कश्मीर सियासी मसला, मिलिट्री सोल्यूशन नहीं

जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती के आदेश की सूचना फैलने के बाद राजनीति गरमा गई है। क्षेत्रीय राजनीतिक दल केंद्र को गलत ठहरा रहे हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि क्षेत्रीय दलों के नेता अफवाह फैला कर लोगों में खौफ पैदा कर रहे हैं। अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती को जनता 370 और 35-ए हटाने की प्रक्रिया से जोड़कर असमंजस में है।
पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यह कदम ठीक नहीं है। इससे लोगों के दिलों में शक पैदा हो रहा है। जम्मू कश्मीर सियासी मसला है। इसका सियासी तौर पर हल निकाला जाना चाहिए। इसका मिलिट्री सोल्यूशन नहीं है। जब तक जम्मू-कश्मीर के लोगों और पाकिस्तान को बातचीत में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक इसका हल संभव नहीं है। कुलगाम में दिए इस बयान से पूर्व महबूबा ने अपने ट्विटर पर लिखा कि घाटी में अतिरिक्त 10 हजार सैनिकों को तैनात करने के केंद्र के फैसले ने लोगों में भय पैदा की है। केंद्र सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार और सुधार करना होगा।

इस बीच पीपुल्स कांफ्रेंस के सज्जाद गनी लोन ने कहा कि जब से 100 अतिरिक्त कंपनियों का आदेश वायरल हुआ है, तब से लोगों में खौफ सा पैदा हो गया है। अटकलें लगाई जा रहे हैं कि कहीं जो विशेष दर्जा उन्हें प्राप्त है, कहीं उसके साथ छेड़छाड़ की कोई साजिश तो नहीं है। लेकिन इससे कुछ नहीं होगा। हिंदुस्तान के जो दुश्मन हैं, उनको तो फायदा होगा, लेकिन जिन लोगों ने संविधान के तहत शपथ ली है और जो मुख्यधारा के राजनीतिक दल हैं, उनकी साख को नष्ट करेगा। सज्जाद ने कहा कि ऐसा माहौल बन गया है कि सारे हिंदुस्तान के लोग कश्मीरियों पर हावी होना चाहते हैं। लेकिन जो ग्रेट नेशन होते हैं, वहां ऐसा तरीका नहीं होता है।
अवामी नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष मुजफ्फर अहमद शाह ने कहा कि अतिरिक्त जवानों की तैनाती एक चिंता का विषय जरूर है, लेकिन 1953 से हम तैनाती देखते आए हैं। उनसे कुछ नहीं हुआ। शाह ने कश्मीर घाटी में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती को अनुच्छेद 370 और 35-ए के हटाये जाने की ओर इशारा करते हुए कहा कि ऐसे हटाने का प्रयास गुंडागर्दी होगा। अगर केंद्र इस राज्य की विशेष पहचान को कानूनी तौर पर हटाने की कोशिश करेगी तो वह असफल रहेगी।

वायरल वीडियो के पीछे की कहानी, क्या इसमें सच्चाई है!

सोशल मीडिया में मुख्यमंत्री का एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में मुख्यमंत्री यह कहते दिख रहे हैं कि पीपल का पेड़ प्राणवायु छोड़ता है। ऐसे ही पशुओं में गाय एकमात्र ऐसा पशु है जो ऑक्सीजन छोड़ता है। यह भी कहा जाता है कि यदि किसी को सांस की तकलीफ है तो गाय की मालिश करने से यह तकलीफ दूर हो जाती है। वीडियों में कहा गया कि टीबी जैसी बीमारी भी गाय के संपर्क में आने से दूर हो जाती है। गाय के गोबर और गौमूत्र में काफी ताकत है। शरीर के विभिन्न हिस्सों जैसे स्किन, हार्ट व किडनी आदि के लिए ये काफी फायदेमंद हैं।
सोशल मीडिया में इस वीडियो के वायरल होने के बाद इस पर तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं। वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय का कहना है कि वीडियो को एडिटिंग करके वायरल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय चैनल पर प्रसारित हो रहे एक कार्यक्रम को देखकर और पर्वतीय क्षेत्रों में चलने वाली मान्यताओं के आधार पर कहा था, जिस पर विवाद जैसी कोई बात नही है।

चलिए हम मुख्यमंत्री के की बातों की पड़ताल करते है कि क्या ऐसा होता है या नही…

पीपल का पेड़ प्राणवायु छोड़ता है …
पीपल का पेड़ शुष्क वातावरण में पनपता है और इसके लिए उसकी देह में पर्याप्त तैयारियां हैं. पेड़-पौधों की सतह पर स्टोमेटा नामक नन्हे छिद्र होते हैं जिनसे गैसों और जल-वाष्प का लेन-देन होता है. सूखे गर्म माहौल में पेड़ का पानी न निचुड़ जाए, इसलिए पीपल दिन में अपेक्षाकृत अपने स्टोमेटा बन्द करके रखता है। इससे दिन में पानी की कमी से वह लड़ पाता है। बिल्कुल. लेकिन इसका नुकसान यह है कि फिर दिन में प्रकाश-संश्लेषण के लिए कार्बन डाई ऑक्साइड उसकी पत्तियों में कैसे प्रवेश करे? स्टोमेटा तो बन्द हैं. तो फिर प्रकाश-संश्लेषण कैसे हो? ग्लूकोज कैसे बने? तो पीपल व उसके जैसे कई पेड़-पौधे रात को अपने स्टोमेटा खोलते हैं और हवा से कार्बन-डायऑक्साइड बटोरते हैं. उससे मैलेट नामक एक रसायन बनाकर रख लेते हैं. ताकि फिर आगे दिन में जब सूरज चमके और प्रकाश मिले, तो प्रकाश-संश्लेषण में सीधे वायुमण्डलीय कार्बन डाई ऑक्साइड की जगह इस मैलेट का प्रयोग कर सकें। यानी पीपल का पेड़ रात को भी कार्बन डाई ऑक्साइड-शोषक है। इस लिए इसे अधिक आक्सीजन देने वाला पेड़ कहा जाता है।


इस लिंक को पढ़िए …http://dahd.nic.in/related-links/chapter-v-part-2
इस लिंक को पढ़िए …https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4566776/

गाय एकमात्र ऐसा पशु है जो ऑक्सीजन छोड़ता है और गाय से जुड़े अन्य तथ्य…
वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि गाय में जितनी सकारात्मक ऊर्जा होती है उतनी किसी अन्य प्राणी में नहीं। गाय की पीठ पर रीढ़ की हड्डी में स्थित सूर्यकेतु स्नायु हानिकारक विकिरण को रोककर वातावरण को स्वच्छ बनाते हैं। यह पर्यावरण के लिए लाभदायक है। इसी लिए वैज्ञानिक कहते हैं कि गाय एकमात्र ऐसा प्राणी है, जो ऑक्सीजन ग्रहण करता है और ऑक्सीजन ही छोड़ता है, जबकि मनुष्य सहित सभी प्राणी ऑक्सीजन लेते और कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ते हैं। पेड़-पौधे इसका ठीक उल्टा करते हैं।

हमारे देश में धार्मिक मान्यताओं का विशेष महत्व हैं। जिसकी समय-समय पर वैज्ञानिकों और डाॅक्टरों ने भी पड़ताल की है। इस लिए शायद मुख्यमंत्री ने पीपल और गाय के मुद्दें पर सकारात्मक टिप्पणी की। मुख्यमंत्री कार्यालय की मानें तो मुख्यमंत्री की सकारात्मक टिप्पणी का कुछ लोगों ने जानबूझकर मजाक बनाने का कार्य किया है। उनका कहना है कि एक तरफ तो मीडिया उत्तराखंड को देवभूमि कहता है लेकिन जब हिन्दु संस्कृति और सभ्यता की बात की जाती है तो उसका मजाक बनाना शुरु कर दिया जाता है। बरहाल हमारी पड़ताल में मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिक और धार्मिक मान्यताओं की ओर से मिले संकेतों पर ही बात कही है। अब आप लोगों को निर्धारण करना है कि धर्म और वैज्ञानिक सोच में किस तरह तालमेल बिठाया जाएं।

खुशखबरीः संविदा शिक्षकों को मिलेगें 35 हजार रुपये

उत्तराखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के गरीबी रेखा से नीचे और ऊपर सभी 23 लाख 80 हजार राशनकार्ड धारकों को बड़ी राहत मिली है। त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्रिमंडल ने इन सभी उपभोक्ताओं को प्रति कार्ड दो किलो दाल रियायती मूल्य पर देने का निर्णय लिया। राशन की दुकानों से हर परिवार को एक-एक किलो अलग-अलग दाल मिलेगी। वहीं सरकारी डिग्री कॉलेजों में कार्यरत गेस्ट फैकल्टी अथवा संविदा शिक्षकों को अलग-अलग मानदेय की व्यवस्था खत्म कर समान मानदेय देने के फैसले को मंजूरी दी गई। संविदा पर कार्यरत सांध्यकालीन और प्रातःकालीन सभी शिक्षकों को 35 हजार रुपये मानदेय मिलेगा। एक अन्य फैसले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पुत्री के पुत्र या पुत्री को भी सरकारी नौकरी में आरक्षण देने पर सहमति दी गई।
सचिवालय में बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में करीब 12 बिंदुओं पर फैसले लिए गए। अन्य दो बिंदुओं को स्थगित कर दिया गया। सरकार के प्रवक्ता और काबीना मंत्री मदन कौशिक ने मंत्रिमंडल के फैसलों को ब्रीफ किया। उन्होंने बताया कि राज्य में मुख्यमंत्री दालपोषित योजना लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना में सभी राशनकार्ड उपभोक्ताओं को चना, मसूर व तुअर में से एक-एक किलो दो दालें मुहैया कराई जाएगी। इसके लिए केंद्र की ओर से दी जाने वाली 15 रुपये की सब्सिडी राज्य के उपभोक्ताओं को मिलेगी। इससे उपभोक्ताओं को प्रति किलो 40 से 42 रुपये की दर से दाल उपलब्ध होगी।
केंद्र सरकार नेफेड के माध्यम से राज्य को दालें मुहैया कराएगी। राज्य में 9000 से अधिक राशन की दुकानें हैं। इन दुकानों के माध्यम से सस्ती दालें वितरित की जाएंगी। इस योजना के तहत राज्य को 4600 कुंतल दाल की दरकार होगी। इस योजना से राज्य सरकार पर कोई भी वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि सरकारी डिग्री कॉलेजों में कार्यरत 357 गेस्ट फैकल्टी को समान मासिक मानदेय 35 हजार रुपये देने का निर्णय किया गया है। वर्तमान में इन कॉलेजों में 59 सांध्यकालीन गेस्ट फैकल्टी को 15 हजार रुपये मासिक, 263 प्रातःकालीन गेस्ट फैकल्टी को 25 हजार रुपये और गढ़वाल विश्वविद्यालय के केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने के बाद वहां से सरकारी कॉलेजों में भेजी गई 35 गेस्ट फैकल्टी को 35 हजार रुपये मानदेय मिल रहा है। मंत्रिमंडल के फैसले से 322 गेस्ट फैकल्टी के मानदेय में इजाफा भी हो गया है। उक्त फैकल्टी को प्रतिमाह 40 पीरियड अनिवार्य रूप से पढ़ाने होंगे। यह टाइम टेबल बनाने की जिम्मेदारी कॉलेज की होगी।

कैबिनेट के प्रमुख फैसले
-मुख्यमंत्री दाल पोषित योजना को मंजूरी, 23 लाख 80 हजार राशन कार्डधारकों को सस्ती दरों पर मिलेगी दो किलो दाल
-सरकारी डिग्री कॉलेजों में कार्यरत सांध्यकालीन, प्रातःकालीन गेस्ट फैकल्टी को अब एक समान 35 हजार रुपये मानदेय
-स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की पुत्रियों के पुत्र-पुत्री को भी मिलेगा सरकारी नौकरी में आरक्षण
-आरक्षण व्यवस्था रोस्टर के पुनर्निर्धारण को काबीना मंत्री यशपाल आर्य की अध्यक्षता में कैबिनेट सब कमेटी गठित

नेगी दा ने कहा, हिलटाॅप से किसानों को मिलेगा रोजगार

सरकार के लिए राहत की खबर है। हिलटाॅप शराब पर राज्य सरकार को अब लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी का साथ मिल गया है। नरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा है कि जब राज्य में शराब की बिक्री और खपत बहुत ज्यादा है तो शराब की फैक्ट्री पर बैन क्यों लगना चाहिए? इस बयान के बाद राजनीतिक अर्थ निकाले जाने लगे है। सरकार के समर्थन में बयान देने के बाद सरकार के फैसले और बुलंद होने का अनुमान लगाए जाने लगे है।
दरअसल, आज मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी के आवास पर पहंुचे। उन्होंने श्री नेगी को साहित्य अकादमी के द्वारा सर्वोच्च सम्मान दिये जाने के लिए नामित होने पर बधाई दी। इसके बाद कुछ पत्रकारों ने श्री नेगी से सवाल किए। जिसमें उन्होंने हिलटाॅप शराब की फैक्ट्री पर उनकी राय जानी। जिस पर लोक गायक नरेन्द्र सिंह नेगी ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि क्या आपको पता है कि हमारे यहां शराब की खपत और बिक्री कितनी बढ़ गई है। ऐसे में हम बाहरी राज्यों से शराब मगांकर पी रहे है। या तो सरकार शराब पर पूर्ण पांबदी लगा दे। नही तो शराब फैक्ट्री लगाने का विरोध नही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में शराब बनेगी तो किसानों और काश्तकारों को भी फायदा पहुंचेगा। माल्टा और अन्य पहाड़ी उत्पादों को अच्छा दाम मिलेगा। सरकार राजस्व भी कमायेगी और राज्य की शराब राज्य में ही बिकेगी। उन्होंने अप्रत्यक्ष कहा कि ऐसे में शराब का गुण कम से कम रोजगार देने के काम तो आयेगा। वरना सभी जानते है कि शराब स्वास्थ के लिए हानिकारक है।
इस बयान के बाद नेगी दा के लिए आम लोगों की सोच कितनी बदलती है। यह तो समय ही बतायेगा। लेकिन अपनी स्पष्ट बात रखकर श्री नेगी ने सरकार को अप्रत्यक्ष रुप से बड़ी राहत दे दी है। कुछ लोग श्री नेगी के बयान को सही भी ठहरा रहे है। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड केवल शराब का कंज्यूमर ही बन गया है। ऐसे में शराब से रोजगार और राजस्व बढ़ता है तो दिक्कत कहां है। या तो सरकार शराब राज्य में शराब पर प्रतिबंध लगा दे। नही तो शराब पर राजनीति नही होनी चाहिए।

आप भी सुनिए श्री नरेन्द्र सिंह नेगी ने क्या कहा…

बसपा सरकार में 18 हजार गुना बढ़ी बसपा सुप्रीमो के भाई की सम्पत्ति

बसपा सुप्रीमो मायावती के भाई आनंद कुमार व पत्नी के खिलाफ आयकर विभाग की कार्रवाई होते ही इनके करीबी भूमिगत हो गए हैं। आनंद और करीबियों के खिलाफ आयकर विभाग पुख्ता सबूत एकत्र कर चुका है और कभी भी बड़ी कार्रवाई की जा सकती है। यादव सिंह प्रकरण के दौरान भी आयकर छापे में मिली डायरियों व अन्य सबूतों के माध्यम से आयकर के रडार पर आनंद और उनके सहयोगी चल रहे हैं।
प्रदेश में 2007 से 2012 तक बसपा की सरकार रही थी। उस वक्त कहा जाता था कि लखनऊ से भले ही सरकार चल रही हो, लेकिन इसका रिमोट नोएडा में ही था। आयकर विभाग के सूत्रों का कहना है कि किस बिल्डर को जमीन देनी है, किसे इंडस्ट्री या आईटी का प्लॉट देना है या फिर किसी तरह का आवंटन किया जाए यह भाई साहब यानी आनंद की इजाजत के बिना नहीं होता था। खास बात यह रही कि किसी भी आवंटन में लिखित तौर से उनका दखल नहीं होता था, लेकिन बिना उनकी अनुमति से पत्ता भी नहीं हिलता था। पूरी आवंटन की प्रक्रिया करने के लिए आनंद के करीबियों की भूमिका रहती थी। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण में जितनी भी जमीन आवंटित की गई थी, सभी में अप्रत्यक्ष रूप से टीम की भूमिका रही थी। प्राधिकरण के अधिकारी उनके आवास पर फाइलें लेकर दौड़ लगाते रहते थे।
सूत्र बताते हैं कि नवंबर 2014 में जब तीनों प्राधिकरण के तत्कालीन चीफ इंजीनियर यादव सिंह के यहां पर आयकर विभाग का छापा पड़ा था, तब भी अफसरों को यह जानकारी मिली थी कि घोटालों में और लोग भी हैं, लेकिन सीधे तौर से कोई साक्ष्य नहीं मिले थे, लेकिन आयकर विभाग ने इसकी गोपनीय जांच जारी रखी। साथ ही, यादव सिंह समेत उनके अन्य करीबियों के यहां जो दस्तावेज मिले थे, उनमें कहीं न कहीं नाम नाम आया था। आयकर विभाग की टीम ने प्राधिकरण से भी उन सभी दस्तावेज को निकलवा लिया था, जिसमें आनंद कुमार और उनके करीबियों के नाम से आवंटन थे। अब आईटी ने उन संपत्तियों को अटैच करना शुरू कर दिया है।

पांच सितारा होटल बनाने की योजना पर फिरा पानी
आयकर विभाग ने बसपा प्रमुख मायावती के भाई और भाभी का नोएडा स्थित 400 करोड़ रुपये कीमत का बेनामी प्लॉट जब्त किया है। आधिकारिक आदेश के मुताबिक, मायावती के भाई आनंद कुमार और उनकी पत्नी विचित्र लता के लाभकारी मालिकाना हक वाले सात एकड़ प्लॉट को जब्त करने का अस्थायी आदेश आयकर विभाग की दिल्ली स्थित बेनामी निषेध इकाई (बीपीयू) ने 16 जुलाई को जारी किया था।
मायावती ने हाल ही में आनंद को बसपा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया था। 28,328.07 वर्ग मीटर या सात एकड़ का प्लॉट नोएडा के सेक्टर 94 में 2ए से पंजीकृत है। इस जमीन पर पांच सितारा होटल और अन्य लग्जरी सुविधाओं का निर्माण किए जाने की योजना थी। जब्ती का आदेश बेनामी संपत्ति लेनदेन निषेध अधिनियम 1988 की धारा 24 (3) के तहत जारी किया गया। बेनामी कानून का उल्लंघन करने पर सात साल की कैद या बेनामी संपत्ति की बाजार कीमत के हिसाब से 25 फीसदी जुर्माने का प्रावधान है।

आनंद पर रियल एस्टेट में दूसरों के नाम पर निवेश कर करोड़ों रुपये मुनाफा कमाने का भी आरोप है। इस मामले को लेकर आयकर विभाग जांच कर रहा था। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय भी इसकी जांच कर रहा है। जांच में आयकर विभाग ने कम से कम छह फर्म के मालिकाना हक को संदिग्ध पाया। जिन कंपनियों की बेनामी संपत्ति के तहत पहचान की गई, वे विजन टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड, बीपीटीपी इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर प्राइवेट लिमिटेड, यूरो एशिया मर्चेंटाइल प्राइवेट लिमिटेड, सन्नी कास्ट एंड फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड, करिश्मा इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और एड-फिन कैपिटल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड हैं। आनंद कुमार और उनकी पत्नी विचित्र लता इन कंपनियों के जरिये किए गए लेनदेन की इकलौती लाभार्थी हैं।

नोटबंदी के दौरान चर्चा में आए आनंद
आनंद कभी नोएडा प्राधिकरण में मामूली क्लर्क थे। बहन मायावती के सत्ता में आने के बाद उनकी संपत्ति तेजी से बढ़ी। उन पर फर्जी कंपनी बनाकर करोड़ों का कर्ज लेने का भी आरोप लगा था। बसपा शासन के दौरान उन्होंने एक के बाद एक 49 कंपनियां खोलीं। 2014 में उनकी संपत्ति 1316 करोड़ रुपये आंकी गई थी। 2016 में नोटबंदी के दौरान उनके खाते में 1.43 करोड़ रुपये जमा होने पर वह चर्चा में आए थे। जांच एजेंसियां पहले भी उनके घर व कार्यालयों में छापेमारी कर चुकी हैं।