डाउन टू अर्थ सीएम धामी, लोहियाहेड में पैदल पहुंचकर स्थानीय स्टॉल पर लिया टिकी का स्वाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोहियाहेड में ‘लोकल फॉर वोकल’ की भावना को आत्मसात करते हुए स्थानीय व्यवसाय और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री पैदल चलते हुए आम लोगों के बीच पहुंचे और स्थानीय रूप से लोकप्रिय रवि के स्टॉल पर रुककर टिकी का स्वाद लिया।

मुख्यमंत्री को अपने बीच सहज रूप से पैदल चलते हुए देखकर स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने स्टॉल संचालक रवि से बातचीत कर उनके व्यवसाय के बारे में जानकारी ली और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के माध्यम से आजीविका अर्जित करने के प्रयासों की सराहना की।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों से भी आत्मीय संवाद किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक व्यंजनों और छोटे व्यवसायों को प्रोत्साहन देना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘लोकल फॉर वोकल’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का सशक्त माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम अपने आसपास के स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को प्राथमिकता देते हैं, तो उसका सीधा लाभ स्थानीय कारीगरों, छोटे व्यापारियों, युवाओं और स्वरोजगार से जुड़े लोगों को मिलता है। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, बल्कि आत्मनिर्भर समाज और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को भी गति मिलती है।

मुख्यमंत्री धामी का स्थानीय लोगों के बीच इस सहज और आत्मीय अंदाज में पहुंचना क्षेत्रवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने मुख्यमंत्री की सादगी तथा स्थानीय व्यवसायों के प्रति उनके प्रोत्साहन की सराहना की।

मुख्यमंत्री का यह कदम स्थानीय उद्यमियों के सम्मान, छोटे व्यवसायों के प्रोत्साहन और ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को व्यवहार में उतारने की दिशा में एक प्रेरक पहल के रूप में देखा गया।

देवीधुरा में आठ मिनट तक चले अनूठे ऐतिहासिक युद्ध में फल और फूलों का किया गया प्रयोग

चम्पावत के विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम देवीधुरा में ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर आयोजित इस प्रसिद्ध मेले में आस्था, परंपरा, संस्कृति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। मेले में प्रतिभाग करने के लिए मा. मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी हेलीकॉप्टर से देवीधुरा हेलीपैड पहुंचे। हेलीपैड पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। हेलीपैड पर पारंपरिक लोकनृत्य छोलिया की मनमोहक प्रस्तुति के साथ मा. मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया।

मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ माँ वाराही देवी की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माँ वाराही मइया सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवीधुरा की पावन भूमि और विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बग्वाल मेले को उत्तराखंड की अगाध आस्था, समृद्ध लोक-संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विकास को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रखते हुए ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के अंतर्गत कुमाऊँ क्षेत्र के प्रमुख पौराणिक एवं धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है। देवीधुरा मंदिर परिसर में 4.27 करोड़ रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन तथा 4.57 करोड़ रुपये की लागत से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। इसके अतिरिक्त घटोत्कच मंदिर का सौंदर्यीकरण, घटकु हिडिंबा मंदिर का निर्माण, सप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्नानघाट तथा लधौनधुरा मेला स्थल का सौंदर्यीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि घटोत्कच से झालिमाली मंदिर मार्ग के डामरीकरण पर 1.95 करोड़ रुपये, विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए 4.70 करोड़ रुपये तथा पूर्णागिरि मार्ग पर 5 करोड़ रुपये की स्ट्रीट लाइट परियोजना के कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पाताल रुद्रेश्वर, खेतीखान सूर्य मंदिर, भूमिया देव मंदिर, भिगराड़ा मंदिर एवं डुंगरी-फत्याल शिव मंदिर से संबंधित विकास कार्य भी गतिमान हैं। विगत पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना एवं सौंदर्यीकरण के तहत 68.58 करोड़ रुपये की लागत से 397 कार्य किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि देवीधुरा में 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण कार्य शीघ्र कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि बग्वाल मेले को ‘राजकीय मेला’ घोषित कर इसकी गरिमा बढ़ाने के साथ ही व्यवस्थाओं को भी और अधिक सुदृढ़ किया गया है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन का मूल उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना तथा रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। उन्होंने प्रदेशवासियों और विशेष रूप से युवा पीढ़ी से अपनी समृद्ध लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता का आह्वान करते हुए ‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प को दोहराया।

चार खाम-सात थोक के बीच खेली गई ऐतिहासिक बग्वाल
मुख्यमंत्री ने चार खामदृसात थोक के बीच खेले जाने वाले इस अनोखे प्राचीन पाषाण युद्ध का भी अवलोकन किया। रक्षाबंधन के अवसर पर मेले में बच्चियों एवं महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राखी बांधकर रक्षाबंधन पर्व मनाया।

पाटी विकासखंड में स्थित माँ वाराही धाम में प्रधान पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ बग्वाल की शुरुआत हुई। इसके बाद चारों खामकृवालिक (सफेद), चम्याल (गुलाबी), गहड़वाल (भगवा) और लमगड़िया (पीला)कृके बग्वालियों का प्रवेश हुआ। अलग-अलग रंगों के पारंपरिक वस्त्रों एवं पगड़ियों में सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से निर्मित ढालें थीं। शंखनाद और माँ वाराही के जयकारों के बीच बग्वाल का शुभारंभ हुआ।

फलों और फूलों की बरसात के बीच पूरा बग्वाल मैदान मां के जयकारों से गूंज उठा। इस वर्ष बग्वाल दोपहर 1रू48 बजे शुरू होकर 1रू55 बजे समाप्त हुई। 8 मिनट तक चले इस अनूठे ऐतिहासिक युद्ध में फल और फूलों का प्रयोग कर सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत रखा गया। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार, फल-फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है।खामों के आगमन एवं बग्वाल के संचालन की जिम्मेदारी पीठाचार्य श्री कीर्तिबल्लभ जोशी ने निभाई।

मुख्यमंत्री ने कहा, “माँ वाराही मइया सबकी चिंता करती हैं। यह अनोखी विरासत केवल देवीधुरा के बग्वाल मैदान में देखने को मिलती है। यहां की परंपरा अनुशासन और भाईचारे की मिसाल है, जहां बग्वाल के बाद सभी योद्धा गले मिलते हैं।”

मातृशक्ति के सम्मान, स्वावलंबन और बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धः धामी

रक्षाबंधन के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रामलीला मैदान धूरा चंपावत में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव-2026’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत के सर्वांगीण विकास के लिए कुल ₹62.97 करोड़ की 50 महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इनमें ₹11.08 करोड़ की 20 योजनाओं का लोकार्पण तथा ₹51.89 करोड़ की 30 नई विकास योजनाओं का शिलान्यास शामिल है। इन योजनाओं से जनपद में सड़क, पेयजल, सिंचाई, बाढ़ सुरक्षा एवं धार्मिक पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की घोषणा की। इनमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के स्थान धूरा में पेयजल योजना, धूरा से सेतीचौड़ ब्याला तक संपर्क मोटर मार्ग, ग्राम पंचायत ककनई के तोक बूंगा दुर्गापीपल तक सड़क, भागिना भंडारी में मुख्य सड़क से राजकीय इंटर कॉलेज एवं राजकीय प्राथमिक विद्यालय दयारतोली तक सीसी मार्ग व इंटरलॉकिंग टाइल्स, धन एवं बस्तियागूंठ के विभिन्न मंदिरों का सौंदर्यीकरण शामिल है।

इसके साथ ही अमोड़ी, भलुवागाड़ी, डोलाकांडा, फुरकियाझाला, छतकोट, बेलखेत, खिरद्वारी , बुडम, झालाकुड़ी, नौलापानी एवं बस्तियागूंठ के मास्वाड तोक सहित विभिन्न क्षेत्रों में भूकटाव एवं बाढ़ सुरक्षा हेतु वायरक्रेट कार्य, ग्राम पंचायत पोथ के लदिया नदी में झूला पुल, दियूरी से चौड़ा तक सड़क का सुधारीकरण एवं डामरीकरण, डांडा ककनई में सिंचाई हेतु नलकूप, सुखीढांग-डांडा-मीनार मोटर मार्ग में हॉटमिक्स तथा बुडम के कठोल में झूला पुल निर्माण कार्य किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अपनी बहनों, माताओं, बेटियों और भांजियों के बीच अपने घर आए हैं। चम्पावत से मिलने वाला प्रेम और अपनापन उन्हें हमेशा ऊर्जा देता है। मुख्यमंत्री ने कुमाऊंनी भाषा में मातृशक्ति से संवाद भी किया।

मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति से रक्षा सूत्र बंधवाकर सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि राज्य की प्रत्येक मातृशक्ति को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा चम्पावत के विकास के लिए क्षेत्र में निरंतर विकास कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल हिमालयी चोटियों और प्राकृतिक सौंदर्य से नहीं, बल्कि यहां की मेहनती, साहसी और आत्मनिर्भर मातृशक्ति से भी है। महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल सरकारी योजनाओं का लाभ देना नहीं, बल्कि महिलाओं को शिक्षित, स्वस्थ, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाकर परिवार एवं समाज के निर्णयों में भागीदार बनाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वावलंबन के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। चम्पावत में बेटियों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए कॉलेज हॉस्टल, आईटीआई लैब, ₹256.97 करोड़ की लागत से महिला स्पोर्ट्स कॉलेज, इंटीग्रेटेड नर्सिंग संस्थान तथा महिला प्रौद्योगिकी पार्क जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है, ताकि बेटियों को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए गांव या जनपद से बाहर न जाना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि लखपति दीदी बनने के बाद प्रदेश की माताएं-बहनें आगे बढ़कर करोड़पति बनें। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि इन उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए वोकल फॉर लोकल, हाउस ऑफ हिमालयाज, हिलांस आउटलेट, फूड वैन और ई-रिक्शा जैसे माध्यम उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे महिलाओं को रोजगार तलाशने वाली नहीं, बल्कि रोजगार देने वाली बनने के अवसर मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब एक महिला आत्मनिर्भर होती है तो पूरा परिवार आत्मनिर्भर होता है। परिवार से गांव, गांव से समाज और समाज के सशक्त होने से पूरा उत्तराखंड सशक्त एवं समृद्ध बनता है। सरकार का उद्देश्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां किसी बेटी को अवसरों की कमी के कारण पलायन न करना पड़े और चम्पावत की मातृशक्ति विकास की मुख्यधारा में नेतृत्वकर्ता बनकर उभरे।

कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया। बाल विकास विभाग के स्टॉल में उन्होंने छोटी बच्चियों के साथ केक काटकर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश दिया। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री की ओर से उपहार भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य अजय टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, जिलाध्यक्ष भाजपा गोविन्द सामन्त, जिला महामंत्री भाजपा मुकेश कलखुड़िया, दायित्वधारी श्याम नारायण पाण्डेय, मुकेश महराना, सुभाष बगौली, मनोज कालाकोटी, हेमा जोशी जिला अधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने मेरे सपनों का उत्तराखंड पर विद्यार्थियों से किया संवाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नेरुद्रपुर स्थित निजी विद्यालय में मेरे सपनों का उत्तराखंड पर आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान युवा विद्यार्थियों से संवाद कर उनके विचारों, सुझावों और भविष्य के उत्तराखंड को लेकर उनकी परिकल्पनाओं को जाना। मुख्यमंत्री ने उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उनका मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा विद्यार्थियों की ऊर्जा, सोच और विकसित उत्तराखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उत्साहवर्धक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की भावी पीढ़ी, सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक बने, यही हमारी प्राथमिकता है। युवाओं के विचार और सुझाव उत्तराखंड के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। शिक्षा के साथ-साथ युवाओं को रोजगार, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प को साकार करने के लिए शिक्षा, रोजगार, नवाचार, कौशल विकास, पर्यटन, कृषि, खेल और तकनीक सहित प्रत्येक क्षेत्र को सशक्त बनाया जा रहा है। युवा शक्ति उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत है और उनके सपनों, विचारों एवं प्रतिभा को अवसर देकर हम एक आत्मनिर्भर, सक्षम और विकसित उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा केवल आज का नहीं बल्कि कल के भविष्य भी हैं। मेरे सपनों का उत्तराखंड विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य पर्यटन, विकास, नवाचार तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। और इन क्षेत्रों के लिए सरकार ने नई नीतियां लागू की हैं।

विज्ञान के क्षेत्र में युवाओं को बढ़ावा देने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में देश की 5वीं सबसे बड़ी साइंस सिटी का निर्माण किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के होनहार विद्यार्थियों को साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में देश और दुनिया पर नेतृत्व करने का अवसर प्रदान करना है।

मुख्यमंत्री ने लीडरशिप के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नेतृत्व क्षमता केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। बल्कि खेल, चिकित्सा, विज्ञान, मीडिया और उद्योगकृहर क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में सच्चे लीडर होते हैं। उन्होंने युवाओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प से जुड़कर देश व राज्य के विकास में अपना योगदान देने का भी आह्वान किया। उन्होंने सभी को राखी त्यौहार की बधाईयां व शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ प्रतियोगिता को प्रदेश के विद्यार्थियों का व्यापक समर्थन मिला है। अभियान के तहत प्रदेशभर के 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने निबंध एवं विचार भेजे हैं। विद्यार्थियों द्वारा व्यक्त किए गए विचार उत्तराखंड के विकास, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य के प्रति उनकी सोच और संकल्प को दर्शाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की युवा पीढ़ी राज्य के भविष्य को लेकर सजग और जागरूक है। विद्यार्थियों के सपनों, सुझावों और नवाचारपूर्ण विचारों को विकास की दिशा से जोड़ते हुए एक ऐसे उत्तराखंड के निर्माण किया जाएगा, जो सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित हो।

कार्यक्रम में विभिन्न विधालयों के लगभग 800 छात्र-छात्राएं, शिक्षक सहित महापौर विकास शर्मा, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, रामपाल सिंह, दिनेश मानसेरा, उत्तम दत्ता, फरजाना बेगम, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला, जिलाध्यक्ष कमल जिन्दल, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

नए संभावित स्थलों की पहचान कर वहां आवश्यक सुविधाओं, इवेंट्स एवं पर्यटन उत्पादों के विकास की समग्र योजना की जाए तैयार

उत्तराखण्ड में शीतकालीन पर्यटन को नई गति देने और राज्य के पर्यटन स्थलों को वर्षभर पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिव पर्यटन के साथ बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड को वर्षभर पर्यटन का प्रमुख गंतव्य बनाने के लिए नए डेस्टिनेशन, नए पर्यटन उत्पाद और स्थानीय सहभागिता पर विशेष फोकस किया जाए, ताकि पर्यटन का लाभ राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों और स्थानीय समुदायों तक भी प्रभावी रूप से पहुंच सके। बैठक में राज्य में विंटर टूरिज्म की संभावनाओं, नए पर्यटन स्थलों के विकास तथा पर्यटन गतिविधियों के विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड में पर्यटन को केवल कुछ पारंपरिक एवं अधिक पर्यटक दबाव वाले स्थलों तक सीमित न रखते हुए नए डेस्टिनेशन और पर्यटन सर्किट विकसित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नैनीताल एवं मसूरी जैसे प्रमुख स्थलों पर पर्यटकों के दबाव को कम करने के लिए नए एवं कम ज्ञात पर्यटन स्थलों को विकसित कर उन्हें प्रभावी ढंग से प्रचारित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जीएमवीएन, केएमवीएन एवं पर्यटन से जुड़े स्टैक होल्डर्स सहित संबंधित विभागों से इनपुट लेकर राज्यभर में विंटर टूरिज्म की संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान की जाए। प्रत्येक संभावित डेस्टिनेशन की विशेषता और यूएसपी निर्धारित करते हुए वहां उपयुक्त पर्यटन उत्पाद एवं गतिविधियां विकसित की जाएं। उन्होंने नए ट्रैकिंग रूट्स विकसित करते हुए, हाई-अल्टीट्यूड मैराथन, बर्ड वॉचिंग, नेचर एवं एडवेंचर टूरिज्म जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिए जाने के निर्देश दिए। कहा कि संभावित स्थलों की पहचान कर वहां आवश्यक सुविधाओं, इवेंट्स एवं पर्यटन उत्पादों के विकास की समग्र योजना तैयार की जाए।

मुख्य सचिव ने स्थानीय स्टेकहोल्डर्स, टूर ऑपरेटर्स एवं स्थानीय समुदायों को पर्यटन विकास की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर उनके सुझावों को योजनाओं में शामिल किया जाए, ताकि पर्यटन से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ रिवर्स माइग्रेशन को भी प्रोत्साहन मिल सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि नए पर्यटन स्थलों के विकास के लिए वैश्विक स्तर पर सफल मॉडलों का अध्ययन किया जाए। उत्तराखण्ड की भौगोलिक एवं मौसमी परिस्थितियों से मिलती-जुलती परिस्थितियों वाले विदेशी पर्यटन स्थलों से सीख लेकर राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप नए पर्यटन उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं।

मुख्य सचिव ने पर्यटन सर्किटों को एक पैकेज के रूप में विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि जागेश्वर, कसार देवी एवं सूर्य मंदिर जैसे प्रमुख स्थलों को जोड़कर समेकित पैकेज टूर विकसित करने तथा इनकी पब्लिसिटी का कार्य समय रहते शुरू किए जाएँ। उन्होंने नए पर्यटन प्रोजेक्ट्स तलाशने एवं संभावनाओं की समीक्षा के लिए 15 दिन के भीतर पुनः बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। साथ ही, राज्य में विंटर टूरिज्म एवं नए पर्यटन उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक पर्यटन कॉन्क्लेव आयोजित किए जाने की बात भी कही।

इस अवसर पर सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएस बर्द्धन से विश्व बैंक के एमडी एवं प्रतिनिधिमंडल की शिष्टाचार भेंट

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन के साथ विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर पास्कल डोनोहोई एवं उनकी टीम ने सचिवालय में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तराखण्ड के समग्र एवं दीर्घकालिक विकास, शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन, जल प्रबंधन, आपदा प्रबंधन तथा राज्य की उत्तराखण्ड/2047 की विकास रणनीति सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड को वर्ष 2047 तक एक सशक्त, समृद्ध, टिकाऊ और आपदा- प्रतिरोधी राज्य के रूप में विकसित करने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ, विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में नदियों के पुनर्जीवन एवं जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र में विश्व बैंक से वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के भविष्य के विकास के लिए जल, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जल वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण चुनौती बनने जा रहा है, इसलिए राज्य में वर्षा जल के संरक्षण एवं अधिक से अधिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने की दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस दिशा में विश्व बैंक के साथ वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आजीविका के पर्याप्त अवसर सृजित कर पलायन को नियंत्रित करने तथा आवश्यकतानुसार रिवर्स माइग्रेशन को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के दृष्टिगत राज्य के दीर्घकालिक विकास पर फोकस किया जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र में भी विश्व बैंक के सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि स्कूली शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा में सुधार तथा आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ ही आजीविका एवं पलायन के क्षेत्र में भी विश्व बैंक से वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग की आवश्यकता है। बैठक में विभागीय अधिकारियों द्वारा राज्य के ऊर्जा, वित्त एवं पेयजल के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों एवं परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

विश्व बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ नॉलेज ऑफिसर पास्कल डोनोहोई ने राज्य की विकास प्राथमिकताओं को समझते हुए भविष्य में रणनीतिक एवं फ्लैगशिप परियोजनाओं के माध्यम से सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया। विश्व बैंक की ओर से उत्तराखंड के विकास के लिए दीर्घकालिक सहयोग एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। बैठक में ‘विजन उत्तराखंड/2047’ के तहत राज्य की रणनीतिक विकास प्राथमिकताओं पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया। राज्य में तेजी से हो रहे शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए भविष्य की शहरी आवश्यकताओं, आधारभूत सुविधाओं तथा सतत एवं सुनियोजित शहरी विकास पर भी चर्चा हुई। विश्व बैंक के सहयोग से राज्य की प्राथमिकताओं के अनुरूप भविष्य की विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुंदरम, विश्व बैंक से जोहांस जट्ट, सचिव डॉ. रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव नरेंद्र सिंह भंडारी, रोहित मीणा एवं नवनीत पाण्डे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बाला गौरिया फिल्म उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और लोक देवताओं की परंपरा को आगे पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगीः सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड की लोक संस्कृति एवं लोक आख्यानों पर आधारित बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बाला गौरिया’ के टीजर एवं पोस्टर का लोकार्पण किया। ‘हिमाद्रि प्रोडक्शंस’ के बैनर तले निर्मित की जा रही यह फिल्म उत्तराखंड के लोक में न्याय देवता के रूप में प्रतिष्ठित गोलज्यू के बाल जीवन पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन नितिन तिवारी तथा निर्माण मनोज चंदोला द्वारा किया जा रहा है। फिल्म अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में रिलीज होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने फिल्म के टीजर एवं पोस्टर के लोकार्पण पर पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक परंपराएं, लोकगाथाएं और लोक देवताओं की समृद्ध विरासत हमारी विशिष्ट पहचान हैं। ‘बाला गौरिया’ जैसी फिल्में हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने के साथ ही देश-दुनिया के सामने उत्तराखंड की लोक संस्कृति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का कार्य करेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार राज्य में फिल्म निर्माण और फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध लोक संस्कृति और विविध भौगोलिक परिस्थितियां फिल्म निर्माण के लिए उत्तराखंड को विशिष्ट बनाती हैं। सरकार का प्रयास है कि देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं को उत्तराखंड में शूटिंग के लिए बेहतर वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और अनुकूल व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएं। उत्तराखंड पर्यटन नीति में भी फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने, फिल्म शूटिंग के लिए प्रोत्साहन एवं तेज अनुमति व्यवस्था विकसित करने तथा विभिन्न स्थानों पर फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में प्रावधान किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को फिल्म शूटिंग के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बनाने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को फिल्म निर्माण से जुड़े रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे प्रदेश की आर्थिकी को गति मिलने के साथ ही उत्तराखंड की कला, संस्कृति, बोली-भाषा, लोक परंपराओं और पर्यटन स्थलों को भी देश-दुनिया में पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के लोक देवताओं और लोक आख्यानों में हमारी सदियों पुरानी सांस्कृतिक चेतना, परंपराएं और जीवन मूल्य समाहित हैं। इनका संरक्षण और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से उत्तराखंड की अन्य लोकगाथाओं, लोक देवताओं और सांस्कृतिक परंपराओं पर भी फिल्म निर्माण के लिए आगे आने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड की लोक संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए फिल्म निर्माताओं को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि ‘बाला गौरिया’ जैसी फिल्मों के माध्यम से उत्तराखंड की लोक थातियों को व्यापक मंच मिलने के साथ ही प्रदेश के पर्यटन को भी नई पहचान मिलेगी।

इस अवसर पर फिल्म के निर्माता मनोज चंदोला सहित फिल्म से जुड़े अन्य कलाकार एवं टीम के सदस्य उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने पांच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित विशेष एल्बम गीत का किया विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंचवटी फिल्म्स प्रोडक्शन एवं आदर्श औद्योगिक स्वायत्त सहकारिता (आदर्श संस्था) द्वारा मुख्यमंत्री के पांच वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों पर आधारित विशेष एल्बम गीत का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने एल्बम से जुड़े निर्माता-निर्देशक, गीतकार, संगीतकार, गायक एवं अन्य कलाकारों के साथ ही आदर्श संस्था के पदाधिकारियों को इस प्रयास के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की विकास यात्रा और राज्य में हो रहे सकारात्मक बदलावों को गीत-संगीत के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का यह प्रयास सराहनीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने, पर्यटन को प्रोत्साहित करने, महिलाओं को सशक्त बनाने और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करने की दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और देवभूमि की विशिष्ट पहचान के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

इस अवसर पर आदर्श संस्था की अध्यक्ष आशा कोठारी ने मुख्यमंत्री को शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न भेंट कर उनका स्वागत किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य में हुए विकास कार्यों तथा जनहित में लिए गए विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णयों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने एल्बम के निर्माता उत्तम सिंह भंडारी, गायक विक्रम भंडारी एवं शिवानी नेगी, संगीतकार विजयपाल कलूड़ा सहित एल्बम से जुड़े कलाकारों को सम्मानित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आशा कोठारी ने की तथा संचालन संस्था के सचिव हरीश कोठारी ने किया। इस अवसर पर युवा मोर्चा पछवादून के जिलाध्यक्ष विनायक नौटियाल, प्रदीप दुग्गल, विजय असवाल, शोभित उनियाल, गिरीश भट्ट, लक्ष्मी नारायण नवानी, आदित्य नौटियाल, सहदेव सिंह बिष्ट, सपना जवाड़ी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

स्थानीय उत्पादों, संस्कृति, परंपराओं और विशिष्ट मेलों को वैश्विक पहचान बनाने में करें कार्यः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल तथा उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के सम्बन्ध में जिलाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने सभी जनपदों को अपने स्थानीय उत्पादों, संस्कृति, परंपराओं और विशिष्ट मेलों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रत्येक जनपद अपने किसी एक विशिष्ट पर्व अथवा मेले को वन डिस्ट्रिक्ट वन फेस्टिवल के रूप में विकसित करे। इसके लिए प्रत्येक जिले का वार्षिक इवेंट कैलेंडर तैयार किया जाए। उन्होंने स्थानीय स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी सुनिश्चित की जाने पर जोर दिया। कहा कि ऐसे आयोजनों में उत्तराखण्ड के प्रवासी एवं नॉन-रेजिडेंट उत्तराखंडियों को भी जोड़ा जाए, ताकि राज्य के स्थानीय उत्पादों और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि मेलों एवं उत्सवों को इंस्टीट्यूशनलाइज्ड किया जाना जरूरी है, ताकि आने वाले वर्षों में उनकी स्थायी पहचान और ब्रांड वैल्यू विकसित हो सके।

मुख्य सचिव ने चमोली के रम्माण फेस्टिवल को बड़े स्तर पर आयोजित करने एवं उत्तरकाशी के बटर फेस्टिवल जैसे यूनिक आयोजनों को भी व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिए जाने पर जोर दिया। उन्होंने पौड़ी और चमोली में आयोजित होने वाले शरदोत्सव, हरिद्वार महोत्सव, नैनीताल विंटर कार्निवल और मसूरी विंटर कार्निवल को भी और अधिक आकर्षक एवं व्यवस्थित रूप से आयोजित करने पर जोर दिया गया। उन्होंने चम्पावत में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल एंगलिंग मीट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा उत्तरायणी मेले में एडवेंचर गतिविधियों को बढ़ाने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने जनपदवार निर्यात की संभावनाओं की समीक्षा भी की। उन्होंने प्रत्येक जनपद के लिए बेसलाइन डेटा तैयार करने और उसके आधार पर निर्यात संवर्धन की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने निर्यात संवर्धन के लिए प्रमुख सचिव नियोजन की अध्यक्षता में एक स्थायी समिति गठित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा इस समिति में सचिव उद्योग, सचिव वन, सचिव आयुुष सहित अन्य हितधारकों को शामिल किया जाए।

मुख्य सचिव ने स्थानीय उत्पादों की पहचान कर उनकी प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दिए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की संभावनाओं का अधिकतम उपयोग करने तथा प्रत्येक जनपद के उत्पादों की यूएसपी विकसित किए जाने की दिशा में कार्य किया जाए।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों से कहा कि विभिन्न जनपदों के सफल प्रयोगों और अनुभवों को आपस में साझा किया जाए, ताकि एक जनपद की अच्छी पहल को दूसरे जनपद में भी लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक आयोजनों को केवल स्थानीय बाजार तक सीमित न रखते हुए उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में समन्वित प्रयास किए जाएं।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव शैलेश बगौली, श्रीधर बाबू अद्दांकी, युगल किशोर पंत, डॉ. अहमद इकबाल एवं राजेंद्र कुमार सहित अपर सचिव अभिषेक रोहिला एवं जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

मेरे सपनों का उत्तराखंड अभियान में आए पर्यटन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक पर्यावरण सहित आठ प्रमुख विषयों पर सुझाव

‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान को प्रदेश के युवा विद्यार्थियों का उत्साहपूर्ण समर्थन मिला है। राज्य की कक्षा 11वीं और 12वीं के 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने विचार एवं विजन साझा करते हुए निबंध मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को प्रेषित किए हैं। मुख्यमंत्री धामी ने 10 अगस्त को आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों का आह्वान किया था कि वे 24 अगस्त तक अपने विचार साझा कर उन्हें पोर्टल पर अपलोड करें।

पोर्टल पर प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य में कक्षा 11वीं और 12वीं में कुल 2,96,426 विद्यार्थी सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। इनमें से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने इस अभियान में प्रतिभाग कर उत्तराखंड के भविष्य को लेकर अपने विचार और सुझाव साझा किए हैं।

विद्यार्थियों ने पर्यटन, रोजगार, सामाजिक विकास, वन एवं पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक सहित आठ प्रमुख विषयों पर अपने सुझाव और नए विचार प्रस्तुत किए हैं। खास बात यह है कि ये निबंध केवल लेखन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्तराखंड की नई पीढ़ी की आकांक्षाओं और भविष्य के प्रदेश को लेकर उनकी सोच का दस्तावेज भी हैं।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और चमोली जिलों में कक्षा 11वीं और 12वीं के शत-प्रतिशत विद्यार्थियों ने अपने निबंध पोर्टल पर अपलोड किए हैं। वहीं पौड़ी में 98.82 प्रतिशत, अल्मोड़ा में 97.46 प्रतिशत, हरिद्वार में 91.77 प्रतिशत, टिहरी में 91.57 प्रतिशत, बागेश्वर में 89.26 प्रतिशत, नैनीताल में 85.89 प्रतिशत तथा उत्तरकाशी में 84.93 प्रतिशत विद्यार्थियों ने इस अभियान में भागीदारी की है। देहरादून जिले में कक्षा 11वीं और 12वीं के कुल 63,666 विद्यार्थियों में से 47,358 विद्यार्थियों ने अपने निबंध प्रस्तुत किए हैं।

अब प्राप्त निबंधों एवं विचारों का मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के साथ विशेषज्ञों की टीम द्वारा अवलोकन एवं मूल्यांकन किया जा रहा है। चयनित श्रेष्ठ विचारों के परिणाम 16 सितंबर को घोषित किए जाएंगे।

पहली बार विद्यार्थियों से विकास के विजन पर वैचारिक मंथन
‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के युवा विद्यार्थियों को सीधे राज्य के विकास और नीति निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने की अभिनव पहल की है। राज्य के 2.67 लाख से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी इस अभियान की व्यापकता और विद्यार्थियों के उत्साह को दर्शाती है।

अभियान के अंतर्गत श्रेष्ठ 140 विचारों का चयन किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों को शासन के वरिष्ठ अधिकारियों एवं सचिवों के साथ अपने विचारों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं भी इन विद्यार्थियों से संवाद कर उनके विजन, अनुभवों और सुझावों को सुनेंगे।

इसके साथ ही श्रेष्ठ विचार प्रस्तुत करने वाले विद्यार्थियों को करियर एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग सहित अन्य प्रोत्साहन एवं पुरस्कार प्रदान किए जाने की व्यवस्था की गई है।

प्रत्येक सहभागी को मिला डिजिटल प्रमाण पत्र
पोर्टल पर निबंध जमा करने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को डिजिटल प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है। अभियान के तहत राज्य के प्रत्येक ब्लॉक, विद्यालय और विद्यार्थी से संबंधित विवरण का डेटा संकलित किया गया है, जिससे अभियान की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाया गया है।

अभियान के संयोजक डॉ. राहुल अग्रवाल ने बताया कि नई पीढ़ी को सीधे राज्य की विकास प्रक्रिया और नीति निर्माण की सोच से जोड़ने की यह एक अभिनव पहल है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपने विचार साझा किए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “हमारे विद्यार्थी केवल उत्तराखंड का भविष्य नहीं हैं, बल्कि उनके विचार आज के उत्तराखंड को भी नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ के माध्यम से हम नई पीढ़ी की सोच को सुन रहे हैं। युवाओं के अच्छे और व्यावहारिक सुझावों को प्रदेश के विकास में स्थान दिया जाएगा। हमारा संकल्प है कि युवा जिस उत्तराखंड का सपना देख रहे हैं, उसे साकार करने में उन्हें भी सहभागी बनाया जाए।”