एफपीओ को मजबूती देने के लिए नाबार्ड और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय हो स्थापितः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने नाबार्ड के शाखा कार्यालय, देहरादून में नाबार्ड से वित्तपोषित किसान उत्पादक संगठनों द्वारा आयोजित सेब महोत्सव 3.0 का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) द्वारा उत्पादित सेब की विभिन्न प्रजातियों, कीवी, सब्जियों एवं अन्य कृषि उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। उन्होंने किसानों और किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों से उत्पादों के सम्बन्ध में जानकारी ली एवं आ रही समस्याओं पर चर्चा की।

मुख्य सचिव ने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों को केवल किसानों को एक साथ जोड़ने तक सीमित न रखते हुए उन्हें मजबूत, आत्मनिर्भर और सस्टेनेबल संस्थाओं के रूप में विकसित किया जाना आवश्यक है। इसके लिए उन्हें निरन्तर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और क्षमता विकास के साथ आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

मुख्य सचिव ने कृषि एवं बागवानी उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए खरीद, विपणन और उत्पादों की ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान दिया जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता को बढ़ावा देते हुए उन्हें उचित बाजार और बेहतर मूल्य से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।

मुख्य सचिव ने किसानों के उत्पादों के सुरक्षित भंडारण एवं उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए शीत भंडारण की सुविधाओं को बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने उत्पादों की जानकारी उपलब्ध कराने की ट्रेसेबिलिटी व्यवस्था विकसित करने तथा जैविक उत्पादों के लिए जैविक प्रमाणन की प्रक्रिया को बढ़ावा देने की बात कही।

मुख्य सचिव ने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत बनाने के लिए नाबार्ड और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों को सस्टेनेबल बनाने के लिए इकोसिस्टम विकसित करने की आवश्यकता है। योजनाओं और उपलब्ध संसाधनों का एक-दूसरे से जोड़कर अधिक से अधिक लाभ किसानों और किसान उत्पादक संगठनों तक पहुंचाया जाए। इसके लिए सरकार, नाबार्ड, सम्बन्धित विभागों, किसान उत्पादक संगठनों, किसानों और अन्य स्टेक होल्डर्स को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से उत्तराखण्ड के कृषि एवं बागवानी उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के साथ ही किसानों की आय में वृद्धि की जा सकती है।

पीएम के जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर विकसित भारत के निर्माण में उत्तराखण्ड की सक्रिय भागीदारी का संकल्प

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी स्थित पौराणिक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर एवं शक्ति मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक रामलीला मैदान में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित सेवा ज्योति कलश यात्रा एवं सेवा संकल्प सभा में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम के प्रसारण को भी देखा गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले ढाई दशक में जनसेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को अपने सार्वजनिक जीवन का मूल आधार बनाया है। सेवा ज्योति यात्रा जनसेवा, राष्ट्रभाव और जनकल्याण के इसी संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जनधन योजना, जल जीवन मिशन, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचा है। शासन को सरकारी कार्यालयों और फाइलों तक सीमित न रखकर लोगों के द्वार तक पहुंचाने का कार्य हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने बाबा केदार की धरती से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखण्ड का दशक बताया था। राज्य सरकार उनके इस विजन को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। प्रदेश में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ उद्योग, पर्यटन, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था में डेढ़ गुना से अधिक वृद्धि हुई है और प्रति व्यक्ति आय में 41 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश में 20 हजार से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए हैं। होटल की संख्या में लगभग 25 प्रतिशत तथा होमस्टे में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। प्रदेश की तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। सतत विकास लक्ष्य सूचकांक में उत्तराखण्ड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है तथा राज्य को लगातार चार वर्षों से मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का सम्मान मिला है। उत्तराखण्ड ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने की उपलब्धि भी हासिल की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित बनाने के प्रयासों के परिणामस्वरूप इस वर्ष अब तक 56 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी जनपद में 200 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 50 योजनाओं का शिलान्यास किया गया, जिनमें से 26 योजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा 24 योजनाओं पर कार्य गतिमान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देश में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बना है। राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा रोधी कानून, भू-कानून और नकल विरोधी कानून जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और सख्त नकल विरोधी कानून के परिणामस्वरूप पिछले लगभग पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियां मिली हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को हमें अपने कर्तव्यों और दायित्वों में उतारना होगा। प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उत्तरकाशी में विश्वनाथ-शक्ति मंदिर कॉरिडोर बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ और मां शक्ति का यह पवित्र स्थल श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। कॉरिडोर के निर्माण से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ धार्मिक पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने गाजणा क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धौंतरी के उच्चीकरण की मांग का परीक्षण कराए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि भटवाड़ी में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है और इसकी शीघ्र स्वीकृति के लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे। डोडीताल, अवाना बुग्याल एवं हरि महाराज सौड़ बुग्याल के विकास एवं सौंदर्यीकरण से संबंधित कार्यों को भी आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जिला चिकित्सालय उत्तरकाशी का नाम पूर्व विधायक स्वर्गीय गोपाल सिंह रावत के नाम पर रखे जाने की भी घोषणा की।

बच्चों को संस्कृत के साथ वेद, उपनिषद, पुराण और अन्य संस्कृत ग्रंथों की भी दी जाए जानकारीः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संस्कृत शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि आदर्श संस्कृत ग्रामों में केवल विशेष अवसरों तक गतिविधियां सीमित न रहें, बल्कि सालभर नियमित रूप से संस्कृत संभाषण एवं संस्कृत आधारित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को संस्कृत भाषा के अध्ययन के साथ ही वेद, उपनिषद, पुराण और अन्य महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथों की अधिक से अधिक जानकारी दी जाए। इसके लिए बच्चों की आयु और रुचि के अनुरूप सरल एवं प्रभावी माध्यम विकसित किए जाएं। उन्होंने कहा कि संस्कृत हमारी समृद्ध ज्ञान परंपरा और संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार है। बच्चों को संस्कारवान बनाने में भी संस्कृत की महत्वपूर्ण भूमिका है। नई पीढ़ी को अच्छी शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार मिलना भी आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की मूल भावना सदैव ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की रही है। हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा ने सदैव विश्व कल्याण, सद्भाव और मानवता का संदेश दिया है। संस्कृत के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा, जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत से और प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम के साथ ही हर की पैड़ी, जागेश्वर धाम, आदि कैलाश, पूर्णागिरि, सुरकंडा देवी, धारी देवी, गर्जिया देवी मंदिर, वीरभद्र ऋषिकेश सहित राज्य के अन्य प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों पर संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए प्रभावी पहल की जाए। इन स्थलों पर संस्कृत में प्रेरक वाक्य, श्लोक एवं उनसे संबंधित सरल अर्थ प्रदर्शित करने तथा संस्कृत को श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच अधिक व्यापक रूप से पहुंचाने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्कृत उत्तराखण्ड की द्वितीय राजभाषा है। राज्य में संस्कृत शिक्षा और इसके प्रचार-प्रसार को तेजी से आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि संस्कृत के संरक्षण और संवर्धन से जुड़े प्रभावी कार्यों के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने आगामी कुंभ के दृष्टिगत हरिद्वार में संस्कृत के क्षेत्र में किए जा सकने वाले ठोस कार्यों की व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुंभ में देश-दुनिया से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए अभिनव पहल की जाए।

सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार ने राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अभिनव प्रयासों एवं विविध क्रियाकलापों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 13 जनपदों में एक-एक आदर्श संस्कृत ग्राम का शुभारंभ किया जा चुका है। इन ग्रामों में संस्कृत को दैनिक बोलचाल और व्यवहार का हिस्सा बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। संस्कृत शिक्षा के विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति, डॉ. भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति तथा संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान जैसी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं।

राज्य में संस्कृत शिक्षा, शोध, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण, भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन तथा आधुनिक तकनीक में संस्कृत के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए संस्कृत आयोग के गठन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है।

गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने के लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करेंः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से सम्बन्धित राज्य स्तरीय समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य में मानकीकरण, गुणवत्ता प्रबंधन एवं उपभोक्ता हितों से सम्बन्धित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि राज्य में प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया के दौरान निर्धारित प्रोक्योरमेंट रूल्स के साथ-साथ सम्बन्धित बीआईएस मानकों एवं गुणवत्ता मानकों का भी प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने भारतीय मानक ब्यूरो को सम्बन्धित विभागों के साथ वर्कशॉप आयोजित किए जाने के साथ ही इस सम्बन्ध में एडवाइजरी भी जारी किए जाने के निर्देश दिए, ताकि सरकारी खरीद में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न हो।

मुख्य सचिव ने बीआईएस को विभागीय अधिकारियों के साथ मिलकर क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स के सम्बन्ध में जागरूकता और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि इंडस्ट्री एवं ट्रेडर्स के साथ कार्यशालाएं आयोजित कर उन्हें बीआईएस मानकों एवं क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने बीआईएस को सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों एवं कार्मिकों के लिए नियमित कार्यशालाएं आयोजित किए जाने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि कार्यशालाओं में बीआईएस के विशेषज्ञ एवं सक्षम रिसोर्स पर्सन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि प्रतिभागियों को मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों तथा उनके अनुपालन की प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि कपैसिटी बिल्डिंग को निरंतर प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ाए जाने कि आवश्यकता है।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिये कि बीआईएस से सम्बन्धित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश एवं सूचनाएं सभी सम्बन्धित विभागों तक सर्कुलेट कराई जाएं तथा संबंधित सचिवों के साथ भी नियमित रूप से इंटरेक्शन किया जाए, ताकि बीआईएस मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन में विभागीय स्तर पर आवश्यक समन्वय सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बीआईएस द्वारा इस सम्बन्ध में जिलाधिकारियों के साथ आयोजित होने वाली बैठक में भी प्रस्तुतिकरण किए जाने कि बात कही, ताकि जनपद स्तर पर भी इन विषयों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के सम्बन्ध में जागरूक किया जाना आवश्यक है। इसके लिए बीआईएस केयर ऐप का व्यापक प्रचार-प्रसार किए जाने के निर्देश दिए, ताकि उपभोक्ता उत्पादों की गुणवत्ता एवं बीआईएस प्रमाणन से सम्बन्धित जानकारी प्राप्त कर सकें तथा आवश्यकतानुसार शिकायत अथवा सत्यापन की सुविधा का उपयोग कर सकें।

बैठक में बताया गया कि भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा विकसित बीआईएस केयर (ठप्ै ब्।त्म्) ऐप उपभोक्ताओं को उत्पादों की गुणवत्ता एवं प्रमाणिकता की जानकारी प्राप्त करने में उपयोगी डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराता है। ऐप के माध्यम से उपभोक्ता उत्पादों पर अंकित आईएसआई मार्क एवं लाइसेंस नंबर की सत्यता, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के आर-नंबर, स्वर्ण आभूषणों पर अंकित एचयूआईडी नंबर का सत्यापन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय मानकों से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, बीआईएस कार्यालयों एवं प्रयोगशालाओं की जानकारी देखने तथा मानकों के उल्लंघन, नकली आईएसआई मार्क अथवा अन्य अनियमितताओं के संबंध में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की सुविधा भी उपलब्ध है। यह ऐप उपभोक्ताओं को जागरूक करने तथा सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की खरीद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर में सीएम धामी ने पीएम के राष्ट्र सेवा कार्यकाल के 25 वर्ष पूर्ण होने पर की विशेष पूजा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र सेवा में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नेउत्तरकाशी स्थित पौराणिक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने बाबा विश्वनाथ से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ, दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन की कामना की।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 25 वर्षों का सार्वजनिक जीवन राष्ट्रसेवा, जनकल्याण और देश के विकास के प्रति समर्पण का काल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में देश को नई दिशा और नई ऊर्जा देने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र के संकल्प की दिशा में निरंतर आगे बढ़ता रहे।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र धरती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दीर्घ एवं सफल सार्वजनिक जीवन के लिए बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लेना उनके लिए सौभाग्य का विषय है।

दूरस्थ क्षेत्रों से आए लोगों से संवाद कर मुख्यमंत्री ने सुनी समस्याएं, समाधान के लिए अधिकारियों को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के साथ अनौपचारिक संवाद किया। टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी, चकराता, कालसी सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने क्षेत्र से जुड़ी विकास संबंधी आवश्यकताओं, समस्याओं और अपेक्षाओं को रखा। मुख्यमंत्री ने सभी लोगों से आत्मीयता से संवाद करते हुए उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा संबंधित अधिकारियों को उनके यथासंभव शीघ्र समाधान के निर्देश दिए।

सभी वर्गों के समेकित विकास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही सरकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का मूल उद्देश्य उत्तराखंड के प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक क्षेत्र और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। सरकार समेकित एवं समावेशी विकास के मिशन के साथ कार्य कर रही है, जिसमें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों के साथ संवाद के अवसर मिलते रहे हैं। इन संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों ने अपनी स्थानीय समस्याएं और आवश्यकताएं सीधे सरकार के समक्ष रखी हैं तथा उनके समाधान की दिशा में निरंतर प्रयास किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक सफलता तभी है, जब सरकार और जनता के बीच सीधा और निरंतर संवाद बना रहे। इसी भावना के साथ राज्य सरकार द्वारा जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम जनता के बीच संवाद को निरंतर मजबूत किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर की समस्याओं को समझकर उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

समान अवसर और सामाजिक सशक्तिकरण सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से समानता, सामाजिक न्याय और प्रत्येक नागरिक को समान अवसर का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और राज्य सरकार इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए समाज के सभी वर्गों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के सभी वर्गों को समान अवसर प्राप्त हों। वंचित एवं कमजोर वर्गों, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति समुदायों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के बजट में भी वंचित एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विकास तथा कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी तक प्रभावी रूप से पहुंचे।

दूरस्थ क्षेत्रों में स्वयं पहुंचकर विकास कार्यों की ली जानकारी

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पिछले लगभग पांच वर्षों में उन्होंने चकराता, कालसी, जौनसार-बावर क्षेत्र सहित उत्तरकाशी और राज्य के अन्य पर्वतीय एवं सीमांत जिलों के सैकड़ों भ्रमण कार्यक्रम किए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उनका प्रयास केवल देहरादून तक सीमित रहना नहीं रहा, बल्कि राज्य के दूरस्थ गांवों, सीमांत क्षेत्रों और पर्वतीय अंचलों में स्वयं पहुंचकर वहां की वास्तविक परिस्थितियों को समझना और स्थानीय लोगों से सीधे संवाद करना रहा है।

उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर वहां के लोगों से मिलना और उनकी समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझना सरकार की प्राथमिकताओं को जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इससे क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।

डॉ. आंबेडकर से जुड़े स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित करने की पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के जीवन और योगदान से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित कर उन्हें देश की सामाजिक चेतना से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को बाबा साहेब के जीवन, संघर्ष, विचारों और संविधान निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराना है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में भी सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। आदि गौरव महोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं, संस्कृति, लोककला, लोकगीत, हस्तशिल्प और जीवनशैली को व्यापक मंच प्रदान किया जा रहा है। देहरादून के साथ-साथ दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में भी ऐसे आयोजनों का विस्तार किया जा रहा है। हाल ही में चंपावत में आयोजित आदि गौरव महोत्सव के माध्यम से भी जनजातीय संस्कृति और विरासत को सम्मान देने का कार्य किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति केवल उनकी पहचान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए सरकार इसके संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक इसके हस्तांतरण के लिए प्रतिबद्ध है।

अनुसूचित जनजाति समुदाय के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित जनजाति समुदाय के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं, जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा एवं आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (च्ड-श्र।छड।छ) तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी पहल जनजातीय समुदाय को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं।

उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास, विद्युत, रोजगार और आजीविका के अवसरों को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उत्तराखंड सरकार द्वारा भी अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

समान अवसरों के विस्तार से मजबूत हो रहा सामाजिक सशक्तिकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सामाजिक समावेश और समान अवसर की भावना को नई मजबूती मिली है। विभिन्न सामाजिक एवं सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों को देश के महत्वपूर्ण संवैधानिक एवं सार्वजनिक पदों पर जिम्मेदारी निभाने के अवसर मिले हैं। यह उस भावना को दर्शाता है जिसमें व्यक्ति की पृष्ठभूमि के बजाय उसकी क्षमता, प्रतिभा और योगदान को महत्व दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्य संस्कृति में भी व्यापक बदलाव पर जोर दिया है। देश में “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना को मजबूत करते हुए वंचित एवं पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

सरकार पहल कर सकती है, लेकिन विकास के लिए जनभागीदारी जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विकास के लिए नीतियां बना सकती है, संसाधन उपलब्ध करा सकती है और योजनाओं को धरातल पर उतार सकती है, लेकिन किसी भी राज्य का वास्तविक और स्थायी विकास तभी संभव है, जब समाज के सभी वर्ग और आम जनमानस भी इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएं।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने के लिए सरकार के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। हमें अपनी कमियों को पहचानते हुए उन्हें दूर करना होगा और अपनी ताकत, प्रतिभा तथा स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करना होगा। सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और सामूहिक प्रयास से ही उत्तराखंड को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

महिलाओं और पारंपरिक शिल्पकारों की प्रतिभा को मिल रहा बाजार

मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पादों, हस्तशिल्प और स्थानीय शिल्प का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प की देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मांग बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर सहयोग कर रही है। स्वयं सहायता समूहों को बिना ब्याज ऋण जैसी सुविधाओं से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और स्थानीय अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी को और मजबूत करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के पारंपरिक शिल्पकार हमारी सांस्कृतिक विरासत के वाहक हैं। उनके हुनर को बाजार, आधुनिक डिजाइन, प्रशिक्षण और बेहतर विपणन से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि की जा सकती है। सरकार स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को “लोकल से ग्लोबल” पहचान दिलाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ पात्र लोगों तक पहुंचे

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गों के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, स्वरोजगार एवं कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं के साथ-साथ उत्तराखंड सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि होमस्टे जैसी योजनाओं ने पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। सरकार का प्रयास है कि दूरस्थ क्षेत्रों के लोग अपनी स्थानीय संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों, हस्तशिल्प और पारंपरिक ज्ञान को आजीविका का माध्यम बनाकर आत्मनिर्भर बनें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उनका लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचे। उन्होंने उपस्थित लोगों से भी अपील की कि वे अपने क्षेत्रों में अन्य लोगों को भी सरकारी योजनाओं की जानकारी दें और पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें।

लोगों ने मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं क्षेत्रीय समस्याएं

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों ने मुख्यमंत्री को अपनी विभिन्न क्षेत्रीय एवं व्यक्तिगत समस्याओं से अवगत कराया। लोगों ने सड़क, शिक्षा, रोजगार, पेयजल, आजीविका, आधारभूत सुविधाओं, स्थानीय विकास तथा अन्य विषयों से संबंधित समस्याएं मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं।

मुख्यमंत्री ने सभी लोगों की बात गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुनी तथा संबंधित अधिकारियों को प्राप्त समस्याओं के प्राथमिकता के आधार पर समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का दायित्व है कि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही के साथ कार्य करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सबको मिलकर समाज के सभी वर्गों को आगे बढ़ाना है। सरकार का प्रयास है कि कोई भी व्यक्ति विकास की दौड़ में पीछे न रहे और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी वही अवसर मिलें जो राज्य के अन्य क्षेत्रों के लोगों को उपलब्ध हैं। सामूहिक प्रयास, जनभागीदारी और सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ही उत्तराखंड को एक सशक्त, समावेशी और विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

जिलाधिकारी सम्बन्धित विभागाध्यक्षों से सीधे समन्वय कर समस्याओं का करें समाधानः बर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में जनपदों के शासन स्तर पर लंबित प्रकरणों के निस्तारण को लेकर बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने सभी जनपदों से सम्बन्धित लंबित प्रकरणों की विस्तार से जानकारी लेते हुए उनके निस्तारण की प्रगति की समीक्षा की।

मुख्य सचिव ने सम्बन्धित विभागों के विभागाध्यक्षों को आपसी समन्वय से जनपदों के लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनपद स्तर पर किसी प्रकरण के निस्तारण में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। जिलाधिकारी संबंधित विभागाध्यक्षों से सीधे संवाद कर समस्याओं का समाधान कराएं। आवश्यकता होने पर विभागीय उच्चाधिकारियों से सीधे समन्वय स्थापित कर प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि जनपदों से सम्बन्धित विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने सड़कों, पुलों, भवनों तथा अन्य निर्माण कार्यों से जुड़े लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में विभागीय स्तर पर निर्णय लिया जाना है, उनमें समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जनपदों से सम्बन्धित लंबित प्रकरणों की नियमित रूप से समीक्षा करें तथा जिन मामलों में विभागाध्यक्ष स्तर पर समन्वय की आवश्यकता है, उनमें सीधे संबंधित विभागाध्यक्ष से वार्ता कर समाधान कराएं। उन्होंने कहा कि शासन और जनपदों के मध्य प्रभावी समन्वय से ही लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण संभव है।

उल्लेखनीय है कि जनपदों के शासन स्तर पर लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को यह बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक के दौरान विभिन्न जिलाधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए बताया कि इसके माध्यम से जनपदों के वर्षों से लंबित अनेक प्रकरणों का समाधान संभव हुआ है। जिलाधिकारियों ने कहा कि नियमित समीक्षा और विभागीय उच्चाधिकारियों के साथ सीधे समन्वय से लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी आई है।

उत्तराखंड का पूर्ण साक्षर राज्य बनना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गौरव की उपलब्धिः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड के पूर्ण साक्षर राज्य बनने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले नव-साक्षरों को सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के देश का छठवां पूर्ण साक्षर राज्य बनने पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि शिक्षकों, विद्यार्थियों, नव-साक्षरों, स्वयंसेवकों और अभियान से जुड़े सभी लोगों की मेहनत एवं सामूहिक सहभागिता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों और दूरस्थ क्षेत्रों वाले उत्तराखंड में पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त करना प्रदेशवासियों की दृढ़ इच्छाशक्ति और सामूहिक शक्ति का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद उत्तराखंड देश का छठवां पूर्ण साक्षर राज्य बना है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य को शिक्षा सहित प्रत्येक क्षेत्र में अग्रणी बनाने के संकल्प को और मजबूती प्रदान करती है।

मुख्यमंत्री ने नव-साक्षरों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने यह सिद्ध किया है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और आगे बढ़ने के लिए कभी देर नहीं होती। शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति को आत्मविश्वास देने के साथ उसके जीवन में नए अवसरों के द्वार खोलती है। उन्होंने कहा कि साक्षरता का अर्थ अब केवल पढ़ने-लिखने अथवा हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं है। बदलते समय में अपने अधिकारों और कर्तव्यों की समझ, डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता तथा जीवनोपयोगी कौशल भी इसके महत्वपूर्ण अंग हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शिक्षा को समावेशी और आधुनिक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री का संकल्प है कि कोई भी व्यक्ति शिक्षा से वंचित न रहे। एक शिक्षित व्यक्ति न केवल अपना जीवन बदलता है, बल्कि अपने परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। नंदा गौरा योजना के माध्यम से पात्र छात्राओं को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। राज्य के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम और सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था की जा रही है, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके। प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना के माध्यम से अनाथ बच्चों की निःशुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जा रही है। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के 100-100 विद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ण साक्षरता की उपलब्धि को मंजिल नहीं, बल्कि नई शुरुआत के रूप में देखना होगा। अब डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और जीवन कौशल को प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ना है। राज्य का प्रत्येक नागरिक बदलती तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चले और उसका उपयोग अपने जीवन को बेहतर बनाने में कर सके, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने की महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने में करीब 25 हजार स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। अब अगले छह माह में राज्य को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का राष्ट्रीय लक्ष्य है और उत्तराखंड इस लक्ष्य को इसी वर्ष हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। जिस गांव में एक भी बच्चा पढ़ने वाला होगा, वहां विद्यालय बंद नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने आयुष एवं ईएसआई के 332 नव नियुक्त कार्मिकों को प्रदान किए नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में आयुष विभाग के 271 तथा कर्मचारी राज्य बीमा योजना के अंतर्गत 61 एलोपैथिक फार्मेसी अधिकारियों सहित कुल 332 नव नियुक्त कार्मिकों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री ने सभी नव नियुक्त कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए उनसे सेवाभाव, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र प्राप्त करना युवाओं के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसके साथ ही उनके जीवन में जनसेवा की नई जिम्मेदारी भी शुरू होती है। उन्होंने कहा कि नव नियुक्त कार्मिक अपने सरकारी दायित्व को केवल नौकरी के रूप में न देखें, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनाएं। आयुष विभाग और कर्मचारी राज्य बीमा योजना से जुड़े कार्मिकों की भूमिका सीधे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों से उपचार के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों तक पहुंचने वाले लोगों के मन में व्यवस्था के प्रति एक भरोसा होता है। कार्मिकों की संवेदनशीलता, तत्परता और कार्यकुशलता इस भरोसे को और मजबूत करती है। उन्होंने नव नियुक्त कार्मिकों से कहा कि वे जहां भी सेवाएं दें, अपनी कार्यशैली से उदाहरण प्रस्तुत करें। अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने वाला प्रत्येक व्यक्ति एक उम्मीद लेकर आता है और कार्मिकों का सही निर्णय तथा ईमानदार प्रयास जरूरतमंद के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश की भर्ती व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। नकल माफिया पर कठोर कार्रवाई के साथ ही सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के युवाओं को उनकी मेहनत और योग्यता के आधार पर सरकारी सेवाओं में अवसर मिल रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। यह राज्य में पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि होने के साथ योग, आयुर्वेद और औषधीय जड़ी-बूटियों की समृद्ध परंपरा वाला राज्य है। राज्य सरकार उत्तराखण्ड को मॉडल ‘आयुष प्रदेश’ और ‘ग्लोबल वेलनेस हब’ के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश के सभी जनपदों में आयुष सेवाओं का विस्तार करने के साथ पंचकर्म सेवाओं को आधुनिक बनाया जा रहा है तथा आयुर्वेद उत्कर्ष केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ई-संजीवनी के माध्यम से लोगों को घर बैठे विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। ‘आयुष सेतु पोर्टल’ भी इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेश के अनेक होमस्टे को निकटवर्ती आयुर्वेद चिकित्सालयों की वेलनेस सेवाओं से जोड़ा गया है। राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखण्ड आने वाले लोगों को योग, आयुर्वेद और पंचकर्म के माध्यम से स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति का बेहतर अनुभव मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारी राज्य बीमा योजना की स्वास्थ्य सेवाओं का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है। पूर्व में ईएसआई योजना प्रदेश के छह जनपदों में संचालित थी, जिसे अब सभी 13 जनपदों तक पहुंचाया गया है। रुद्रपुर में 100 बेड के ईएसआई अस्पताल का संचालन शुरू हो चुका है, जबकि हरिद्वार में 300 बेड के ईएसआई अस्पताल का निर्माण कार्य चल रहा है। काशीपुर में भी ईएसआई अस्पताल के लिए भूमि चिन्हित की गई है। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने के लिए 47 नए चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रत्येक व्यक्ति को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने नव नियुक्त कार्मिकों से पूरी निष्ठा, ईमानदारी और सेवाभाव के साथ कार्य करने की अपेक्षा करते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा और क्षमता विकसित एवं सशक्त उत्तराखण्ड के निर्माण के संकल्प को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री मदन कौशिक ने नव नियुक्त कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में आयुष सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं जनसुलभ बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि नव नियुक्त कार्मिकों के आने से विभाग की कार्यक्षमता बढ़ने के साथ ही प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने नव नियुक्त कार्मिकों से अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और सेवाभाव के साथ निर्वहन करते हुए आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा की।

एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीतने वाले बॉक्सर कपिल पोखरिया ने मुख्यमंत्री धामी से की भेंट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से नगला तराई, खटीमा स्थित उनके निजी आवास पर अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर एवं उत्तराखण्ड के प्रतिभावान खिलाड़ी कपिल पोखरिया ने भेंट की।

कपिल पोखरिया ने जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 की पुरुष 90 किग्रा बॉक्सिंग स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार प्रदर्शन कर कांस्य पदक अपने नाम किया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कपिल पोखरिया को इस उपलब्धि के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी सफलता ने उत्तराखण्ड के साथ पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हासिल की जा रही उपलब्धियां नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

मुख्यमंत्री ने कपिल के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे आगे भी अपनी प्रतिभा और परिश्रम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश एवं उत्तराखण्ड का नाम रोशन करते रहेंगे।

इस अवसर पर कपिल पोखरिया ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।