सीएम धामी ने सशक्त बहना उत्सव के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के स्टालों से खरीदे स्थानीय उत्पाद

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में सशक्त बहना उत्सव के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टालों से विभिन्न स्थानीय उत्पादों की खरीदारी की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से आगामी त्योहारों में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को आगे बढ़ाने में सहभागी बनने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति द्वारा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किए जा रहे उत्पाद हमारी स्थानीय संस्कृति, परंपरा और हुनर की पहचान हैं। इन उत्पादों को खरीदकर हम न केवल स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि उनसे जुड़ी महिलाओं की आजीविका को सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारों का समय स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। प्रदेशवासी त्योहारों पर उपहार एवं दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीद में स्थानीय उत्पादों को अधिक से अधिक प्राथमिकता दें। हमारे द्वारा स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए उत्पाद की प्रत्येक खरीद किसी परिवार की आय बढ़ाने, किसी महिला के स्वरोजगार को मजबूती देने और राज्य की स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहायक बनती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान ने देश में स्थानीय उत्पादों के प्रति एक नया विश्वास पैदा किया है। राज्य सरकार भी महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस त्योहारी सीजन में स्थानीय उत्पाद खरीदें, दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें और ‘वोकल फॉर लोकल’ को जन-अभियान बनाने में अपना योगदान दें। स्थानीय उत्पादों को अपनाने से ही आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और अधिक मजबूती मिलेगी।

मानसून के बाद सड़क सुधार के कार्य युद्धस्तर पर शुरू करने के लिए निविदा प्रक्रिया समय से पूर्ण करने पर जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेशभर की सड़कों की स्थिति और उनके सुधार के संबंध में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक में नगर निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत क्षेत्रों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को दुरुस्त करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य करने पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) सहित विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के अधीन आने वाली सड़कों को दुरुस्त करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। बैठक में पीएमजीएसवाई के अंतर्गत निर्मित ऐसी पुरानी सड़कों, जिनकी अनुरक्षण अवधि समाप्त हो चुकी है और जिनका नियमित रखरखाव नहीं हो पा रहा है, को दुरुस्त करने के लिए राज्य सरकार की ओर से आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून समाप्त होते ही प्रदेशभर में सड़क सुधार के कार्य एक साथ युद्धस्तर पर शुरू किए जाने चाहिए। इसके लिए संबंधित विभाग अभी से आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करते हुए निविदा प्रक्रिया समय से पूर्ण कर लें, ताकि बारिश समाप्त होने के बाद निर्माण एवं मरम्मत कार्य शुरू करने में किसी प्रकार का विलंब न हो।

बैठक में शहरी क्षेत्रों की सड़कों की स्थिति में सुधार के लिए स्थानीय निकायों को आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों एवं नगर पंचायतों को सड़क सुधार के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि शहरी क्षेत्रों की सड़कों को भी प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अक्टूबर माह से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का सड़क मार्ग से भ्रमण करेंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से सड़कों के सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर समयबद्ध रूप से कार्य करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को बेहतर और सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित प्रयास करने होंगे।

इसके अलावा धामी कैबिनेट में 17 अहम बिंदुओं पर सहमति मिली। इसके अलावा शहीदों को लेकर भी कैबिनेट में बड़ा अच्छा निर्णय लिया गया है। कैबिनेट द्वारा लिये गये अहम निर्णय यह रहे-
1- राष्ट्रीय सहकारी नीति, 2025 के अनुरूप राज्य में सहकारिता क्षेत्र के विकास हेतु उत्तराखण्ड राज्य सहकारी नीति, 2026 प्रख्यापित किये जाने के सम्बन्ध में।

सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘सहकार से समृद्धि‘ की परिकल्पना को साकार करते हुए सतत् सहकारी विकास तथा देशभर में सहकारी आन्दोलन को नई दिशा प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय सहकारी नीति, 2025 तैयार की गयी है। इसी परिप्रेक्ष्य में राज्य की भौगोलिक, सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप सहकारिता क्षेत्र को सुदृढ़, प्रभावी बनाने जाने तथा राज्य के अन्तर्गत सहकारिता क्षेत्र के सतत् विकास हेतु राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025 के अनुरूप राज्य में एक सहकारिता नीति तैयार की जा रही है, जो सहकारी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी, तकनीक सक्षम एवं व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने हेतु मार्गदर्शक दस्तावेज का कार्य करेगी।

भारत सरकार द्वारा दिनांक 24 जुलाई, 2025 को राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 का अनावरण किया गया, जिसका उद्देश्य ‘सहकार से समृद्धि‘ के दृष्टिकोण को व्यवहारिक रूप देने के साथ-साथ सहकारिता क्षेत्र को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य से जोड़ना है। नीति के माध्यम से जहाँ एक ओर सहकारी संस्थाओं को अधिक सशक्त, पारदर्शी, पेशेवर, प्रतिस्पर्धी एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम बनाना है वहीं दूसरी ओर इसके माध्यम से ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के नए अवसरों को सृजित कर समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त करना है। उक्त प्रस्तावित सहकारिता नीति का मुख्य उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को आर्थिक एवं तकनीकी रूप से सक्षम एवं सुदृढ़ बनाना, पारदर्शी एवं व्यावसायिक रूप से आत्मनिर्भर बनाते हुए कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में मूल्य-श्रृंखला विकास, महिला एवं युवा सशक्तिकरण, रोजगार सृजन, वित्तीय समावेशन तथा पलायन से पुर्नवास की दिशा में ठोस पहल करना है।

उत्तराखण्ड राज्य सहकारिता नीति को राष्ट्रीय सहकारिता नीति, 2025 के अनुरूप राज्य की आवश्यकताओं एवं स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। प्रस्तावित नीति में प्रमुख रूप से सात रणनीतिक मिशन निर्धारित किये गये है, जिसमें नींव का सशक्तीकरण, जीवंतता को प्रोत्साहित करना, सहकारी संस्थाओं को भविष्य के लिए तैयार करना, समावेशिता तक पहुँच का विस्तार करना, नये एवं उभरते क्षेत्रों में सहकारिता का विस्तार करना, युवा पीढ़ी को सहकारी विकास हेतु तैयार करना तथा आर्थिक व्यवहार्यता एवं विविधीकरण शामिल है। अतः इन समस्त उद्देश्यों को पूर्ण किये जाने हेतु राज्य स्तर पर ‘उत्तराखण्ड राज्य सहकारिता नीति, 2026‘ को प्रख्यापित किये जाने का निर्णय लिया गया है।

2- वित्त (वे०आ०-सा०नि०) अनुभाग-07 की अधिसूचना संख्या-290/XXVII (7) 50(16) दिनांक 28 दिसम्बर, 2016 के द्वारा राज्य सरकार के अधीन कार्यरत सरकारी सेवकों के वेतन निर्धारण हेतु प्रख्यापित ‘उत्तराखण्ड सरकारी सेवक वेतन नियम, 2016‘ के साथ संलग्न अनुसूची-1 में वेतन मैट्रिक्स की तालिकायें निर्गत की गयी थी। प्रचलित वेतन मैट्रिक्स की तालिकाओं में लेवल-13 क के उपरान्त सीधे लेवल-15 एवं लेवल-16 का प्रावधान है, जबकि भारत सरकार में वेतन लेवल-13 क के पश्चात वेतन लेवल-14 एवं वेतन लेवल-15 अंकित है।

अतः उत्तराखण्ड सरकारी सेवक वेतन नियम, 2016 के अनुसूची-1 में वेतन मैट्रिक्स में उल्लिखित वेतनमान रू0 1,44,200-2,18,200 के लिए वेतन लेवल-15 के स्थान पर वेतन लेवल-14 एवं वेतनमान रू0 1,82,200-2,24,100 के लिए वेतन लेवल-16 के स्थान पर वेतन लेवल-15 संशोधित किया जाना है। साथ ही विभागीय पदीय संरचनाओं / सेवा नियमावलियों में उपरोक्तानुसार जहां-जहां वेतन लेवल-15 एवं 16 अंकित है, के स्थान पर क्रमशः वेतन लेवल-14 एवं 15 समझा / पढ़ा जायेगा।

3-उत्तराखण्ड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम, 2003 की धारा-4 की उपधारा (5) के अधीन मोटर यान पर ग्रीन सेस हेतु निर्गत अधिसूचना में सेस की छूट को समाप्त किये जाने के संबंध में। तथा सी०एन०जी० वाहनों को देय ग्रीन

उत्तराखण्ड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम एवं नियमावली, 2003 के अन्तर्गत वर्तमान में श्प्रवेश उपकरश् तथा ‘ग्रीन सेस‘ की दरों को सम्मिलित करते हुए उत्तराखण्ड राज्य में पंजीकृत एवं राज्य में प्रवेश करने वाले अन्य राज्य के व्यवसायिक एवं निजी वाहनों हेतु ग्रीन सेस की दरें निर्धारित की गयी हैं। हाईब्रिड अथवा सी०एन०जी० चालित परिवहन यानों को प्रोत्साहित किए जाने हेतु तत्समय देय मोटरयान कर से छूट प्रदान की गई है। वर्तमान में अधिकांश हानि, सी०एन०जी० तथा सामान्य वाहन यथा ICE (Internal Combustion Engine) वाहन ही हैं, जिनके द्वारा संचालन के दौरान ईधन खपत के साथ-साथ बैटरी का भी उपयोग किया जाता है, जिससे तथा सी०एन०जी० प्रकार के यानों की लोकप्रियता में बढोत्तरी हुई है। वर्तमान में अधिकांश हाईब्रिड तथा सी०एन०जी० प्रकार के वाहन ही बाजार में प्रचलन में आ रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में तथा सी०एन०जी० प्रकार के वाहनों को मोटरयान कर से छूट प्रदान किए जाने पर राजस्व पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है, जिसके दृष्टिगत उपरोक्त प्रकार के वाहनों को क्रमबद्ध तरीके से कराधान में लाया जाना आवश्यक है।

4- ‘उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सांख्यिकीय संवर्ग समूह क, ख एवं ग सेवा नियमावली 2026‘ के सम्बन्ध में।
उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभागान्तर्गत सांख्यिकीय संवर्ग के अन्तर्गत सेवा में भर्ती और उसमें नियुक्त व्यक्तियों की सेवा शर्तों को विनियमित किये जाने के उद्देश्य से ‘उत्तराखण्ड चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सांख्यिकीय संवर्ग समूह क, ख एवं ग सेवा नियमावली 2026‘ के प्रख्यापन का प्रस्ताव है।

5- प्रदेश में आम जनमानस को शीघ्र स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्रदान करने और विभागीय स्तर पर विशेषज्ञ उपलब्ध न होने को दृष्टिगत रखते हुए औषधियों, सर्जिकल सामग्री, रसायन, उपकरण एवं इंप्लांटस की समयबद्ध एवं पारदर्शी अधिप्राप्ति हेतु उत्तराखण्ड मेडिकल सप्लाईज कॉर्पाेरेशन का गठन का प्रस्ताव मंत्रिमण्डल के विचारार्थ प्रस्तुत किया गया है जिस पर मंत्रिमण्डल ने विभागीय प्रस्ताव पर सहमति की गयी है।

6- उत्तराखण्ड राज्य में एन०सी०डी०सी० (राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र) शाखा की स्थापना से राज्य में रोग निगरानी, प्रकोप महामारी की जांच और प्रकोप से निपटाने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता और दक्षता में और वृद्धि होगी। राज्य स्तर पर निदान सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा और प्रत्येक शाखा में बी०एस०एल०-3 स्तर की सुविधाए उपलब्ध होंगी। राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों में प्रस्तावित शाखाएं मुख्यालय के साथ-साथ अन्य राज्य की शाखाओं और क्षेत्रीय केंद्रों से जुड़ी होंगी। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) नई दिल्ली, भारत सरकार को राजकीय मेडिकल कॉलेज, हरिद्वार में अवस्थित 65 एकड भूमि में से 01 एकड़ भूमि को 99 वर्ष की लीज (रू0 01) पर लीज पर दिये जाने के प्रस्ताव पर मा० मंत्रिमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गयी।

7-‘उत्तराखण्ड कारागार उप कारापाल अधीनस्थ (अराजपत्रित) सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026‘ का प्रख्यापन।

कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, उत्तराखण्ड की संरचना में अधीनस्थ कारागारों हेतु उप कारापाल के पद पर 25 प्रतिशत पदोन्नति कोटे के पदों पर 90 प्रतिशत प्रधान बन्दीरक्षक एवं 10 प्रतिशत महिला बन्दीरक्षक से पदोन्नति कोटा निर्धारित किये जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। प्रस्तावित सेवा नियमावली विभागीय एवं कर्मचारी हित में प्रख्यापित की जानी आवश्यक है। अतः कार्मिको के ष्उत्तराखण्ड कारागार उप कारापाल अधीनस्थ (अराजपत्रित) सेवा (संशोधन) नियमावली, 2026ष् के प्रख्यापन के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की गयी।

8-उत्तराखण्ड लोकायुक्त खोजबीन समिति (Search Committee) के कार्यकलापों का निर्धारण नियमावली, 2026

उत्तराखण्ड लोकायुक्त अधिनियम, 2014 एवं लोकायुक्त अधिनियम (संशोधन) 2014 की धारा 4 की उपधारा (5) के प्रावधानों के अधीन लोकायुक्त संस्था के अध्यक्ष एवं सदस्य पद हेतु उपयुक्त नामों का पैनल तैयार कर चयन समिति को उपलब्ध कराये जाने हेतु उक्त अधिनियम की धारा 4 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट खोजबीन समिति की कार्यवधि, उसके सदस्यों को संदेय भत्ते तथा नामों के पैनल के चयन की रीति निर्धारित करने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड लोकायुक्त खोजबीन समिति (Search Committee) के कार्यकलापों का निर्धारण नियमावली, 2026 तैयार किया जाना है।

9-‘उत्तराखण्ड आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया नियमावली, 2026‘ के प्रख्यापन के सम्बन्ध में।

भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा दिनांकः 25 सितम्बर, 2024 को डिजिटल इंडिया लैण्ड रिकार्ड मार्डनाईजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के अंतर्गत नक्शा (शहरी आबादी क्षेत्रों का राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित भूमि सर्वेक्षण) कार्यक्रम की शुरूआत की है, जिसका उद्देश्य शहरी भू-अभिलेखों के निर्माण और प्रबंधन में कांतिकारी बदलाव लाना है।

नक्शा कार्यक्रम अन्तर्गत स्वामित्व योजना की भांति शहरी भूमि अभिलेखों के लिए एक व्यापक और सटीक भू-स्थानिक डेटाबेस तैयार करना है। हवाई और ग्राउण्ड सर्वेक्षणों को उन्नत जी०आई०एस० तकनीक के साथ एकीकृत करके, यह कार्यक्रम भूमि प्रशासन में दक्षता बढ़ायेगा, संपत्ति स्वामित्व अभिलेखों को सुव्यवस्थित करेगा और शहरी नियोजन को सुगम बनाने में उपयोगी होगा। सटीक भू-स्थानिक डेटा बेहतर निर्णय लेने, कुशल भूमि उपयोग नियोजन और संपत्ति लेनदेन को सुगम और निश्चित बनाने में भी उपयोगी एवं सहायक होगा।

अतएव प्रदेश के अन्य क्षेत्रों / सम्पूर्ण प्रदेश की राजस्व अभिलेखों में अभिलिखित आबादी क्षेत्रों में भूमि का आधुनिक विधि से सर्वेक्षण किये जाने हेतु ‘उत्तराखण्ड आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया नियमावली, 2026‘ को प्रख्यापित किया जाना प्रस्तावित है।

10- उत्तराखण्ड सीड्स एण्ड तराई डेवलपमेन्ट कारपोरेशन लि० में कार्यरत तृतीय एवं चुतर्थ श्रेणी के कार्मिकों को अन्य विभागों में सेवा स्थानान्तरण पर भेजने के सम्बन्ध में।

उत्तराखण्ड सीड्स एण्ड तराई डेवलपमेन्ट कारपोरेशन लि० में अधिकांश तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी के कार्मिकों के कार्य की उपयोगिता सीजनल (माह फरवरी से माह मार्च एवं माह अगस्त से माह दिसम्बर तक) है। तृतीय एवं चुतर्थ श्रेणी के कार्मिकों को अन्य विभागों में सेवा स्थानान्तरण पर भेजने से निगम के बीज उत्पादन के लागत में कमी आयेगी, जिससें उत्तराखण्ड राज्य के कृषि विभाग एवं कृषकों को कम मूल्य पर गुणवत्तायुक्त बीज की आपूर्ति एवं अन्य राज्यों में अन्य बीज संस्थाओं से प्रतिस्पर्द्धा की जा सकेगी तथा बीज आपूर्ति में वृद्धि हो सकेगी। निगम के कार्मिकों के वेतन मद एवं प्रशासनिक व्यय में कमी होने से निगम को हो रहे प्रतिवर्ष घाटे को रोकने में मदद होगी। इसके कारण निगम में कार्यरत तृतीय श्रेणी के 22 एवं चतुर्थ श्रेणी के 63 कार्मिकों को जनपद ऊधमसिंहनगर एवं अन्य निकटस्थ जनपदों के विभिन्न विभागों में अधिकतम 10 वर्ष अथवा कार्मिकों की सेवानिवृत्ति की तिथि से 3 माह पूर्व, जो पहले हो, तक के लिये सेवा स्थानांतरण के आधार पर भेजा जाना प्रस्तावित है। कार्मिकों का सेवानिवृत्तिक लाभ निगम के द्वारा ही प्रदान किया जाएगा। सेवा स्थानांतरण पर अन्य विभागों में भेजे गए कार्मिकों को निगम में देय वेतन के आधार पर ही सम्बन्धित विभाग द्वारा वेतन देय होगा।

11- रिस्पना नदी के किनारे बसी मलिन बस्ती से चयनित लाभार्थियों को काठबंगला में निर्मित आवासों का आबंटन विषयक।
उत्तराखण्ड राज्य के नगर निकायों में नदियों के किनारे अवैध रूप से बसी मलिन बस्तियों का सुव्यवस्थित और सुविचारित रूप से विस्थापन किये जाने के उद्देश्य से काठबंगला में 116 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। काठबंगला के निकट रिस्पना नदी के किनारे बसी मलिन बस्ती में निवासरत् परिवारों में से, नगर निगम, देहरादून द्वारा चयनित लाभार्थियों को उक्त आवास आबंटित किये जाने संबंधी प्रस्ताव पर सहमति प्रदान कर दी गई है।

12- यू०यू०एस०डी०ए० के संरचनात्मक ढ़ाचे का पुनर्गठन किये जाने विषयक।

उत्तराखण्ड राज्य के नगर निकायों यथा-कोटद्वार, चम्पावत, टनकपुर, किच्छा, पिथौरागढ़, रूद्रपुर, काशीपुर एवं सितारगंज में ए०डी०बी० एवं ई०आई०बी० के माध्यम से वित्त पोषित परियोजना के अन्तर्गत सीवरेज एवं पेयजल का कार्य किया जाना है तथा ऋषिकेश शहर में के०एफ०डब्लू० (KFW) के माध्यम से वित्त पोषित परियोजना के अन्तर्गत राड़क निर्माण, सिवरेज, स्ट्रीट लाईट, सार्वजनिक परिवहन (ई बस), पेयजल, घाटों का सौन्दर्यकरण, एस०डब्लू०एम०, एल०डी०डी० स्क्रीन संबंधी कार्य किये जाने हैं। उक्त परियोजनाओं में किये जाने वाले कार्यों के सुचारू संचालन के दृष्टिगत यू०यू०एस०डी०ए० के संरचनात्मक ढ़ाचे का पुनर्गठन करते हुए कुल 94 अस्थाई (निःसंवर्गीय) पदों का सृजन किये जाने संबंधी प्रस्ताव पर सहमति प्रदान कर दी गई है।

13-अंत्योदय फाउंडेशन के पक्ष में Gift Deed किये जाने पर स्टाम्प शुल्क में छूट प्रदान किये जाने विषयक।

मनोहर लाल, अध्यक्ष, अंत्योदय फाउण्डेशन, कनाट प्लैस, नई दिल्ली द्वारा कैंसर रोगियों के लिये Hospice Care Center स्थापित किये जाने हेतु देवेंद्र नाथ सक्सेना और माधुरी सक्सेना की मौजा वीरभद्र (पुराना), ऋषिकेश स्थित सम्पत्ति को Antyodaya Foundation, जो कि एक पंजीकृत धर्मार्थ ट्रस्ट है के पक्ष में Gift Deed किए जाने पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है। प्रश्नगत सम्पत्ति की लागत रू0 1,77,41,000/- है, जिस पर निर्धारित 5 प्रतिशत की दर रू0 8,87,050/- (₹ आठ लाख सत्तासी हजार पचास मान्त्र) की स्टाम्प ड्यूटी आकलित है। मनोहर लाल, अध्यक्ष, अंत्योदय फाउण्डेशन, नई दिल्ली के अनुरोध पर विचार किये जाने पर उक्त वर्णित / आकलित की धनराशि₹ 8,87,050/- की राजस्व हानि होगी।

भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा-9 में श्शुल्क को घटाने, माफ करने या प्रशमन करने की शक्तिश् विषयक प्रावधान है। मनोहर लाल, अध्यक्ष, अंत्योदय फाउण्डेशन, नई दिल्ली द्वारा किये गये अनुरोध के कम में धर्मार्थ एवं जनकल्याणकारी कार्याे को प्रोत्साहित किये जाने के दृष्टिगत् उक्त वर्णित / आकलित स्टाम्प शुल्क की धनराशि ₹ 8,87,050/- से छूट प्रदान किये जाने के संबंध में मंत्रिमंडल द्वारा विचार किया जाना है।

14-उत्तराखण्ड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2023 की धारा-36 के प्राविधानानुसार उत्तरांचल विश्वविद्यालय जनपद देहरादून से सम्बन्धित या उससे आनुषांगिक विषयों का उपबन्ध एवं नियमन करने के लिए परिनियम के प्रख्यापन के संबंध में।

राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड राज्य में स्थापित निजी विश्वविद्यालयों के कृत्यों को विनियमित किये जाने और संबंधित या आनुषांगिक विषयों की व्यवस्था करने हेतु उत्तराखण्ड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2023 (अधिनियम 02 वर्ष 2024) अधिनियमित है, जिसकी धारा-36 के प्राविधानानुसार संबंधित विश्वविद्यालय के परिनियमों को राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित किया जाना होता है।
उक्त के कम में उत्तरांचल विश्वविद्यालय परिनियम, 2026 का प्रख्यापन किया जा रहा है।

15- विषय-उपनल कार्मिकों के समान कार्य हेतु समान वेतन प्रदान किये जाने के संबंध में।

मंत्रिमण्डल द्वारा निम्नलिखित बिन्दुओं पर अपनी सहमति प्रदान की गयी है-
(1) उपनल कार्मिकों को समान कार्य हेतु समान वेतन का लाभ तीन चरणों में प्रदान किया जायेगा, जिसके प्रथम चरण में 01.01.2016 से पूर्व के नियोजित कार्मिकों के संबंध में वर्तमान में कार्यवाही की जा रही है। द्वितीय चरण में 01.01. 2016 से 12.11.2018 तक के नियोजित कार्मिकों को समान कार्य समान वेतन हेतु विचार किया जायेगा जिस पर कार्यवाही दिनांक 09.11.2026 से तथा तृतीय चरण में 13.11.20218 से 15.10.2024 तक के नियोजित कार्मिकों को समान कार्य हेतु समान वेतन की कार्यवाही 01 अप्रैल, 2027 से प्रारम्भ की जायेगी।

(2) उपनल के माध्यम से कार्याेजित कार्मिकों की सेवा में दिये गये कृत्रिम ब्रेक (व्यवधान) के दृष्टिगत सैनिक कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड शासन के शासनादेश दिनांक 20.02.2026 में उल्लिखित निरन्तर योजित शर्त / प्रतिबन्ध को विलोपित करते हुये दिनांक 01.01.2016 से पूर्व कार्य कर रहे उपनलकर्मी जो वर्तमान में भी कार्यरत हों, को शासनादेश दिनांक 03.02.2026 (यथासंशोधित) के अधीन न्यूनतम वेतन व महँगाई भते का लाभ प्रदान किया जायेगा।

(3) यदि किसी विभाग में सृजित/स्वीकृत पदों के सापेक्ष अतिरिक्त उपनल कार्मिक कार्य कर रहें हों तो उस स्थिति में समान कार्य समान वेतन के लाभ हेतु उपनल से नियुक्ति की तिथि का संज्ञान लेते हुये नियुक्ति तिथि (डेट ऑफ ज्वॉइनिंग) की वरीयता क्रम में कार्मिकों को सर्वप्रथम सृजित/स्वीकृत पदों के सापेक्ष नियोजित माना जायेगा। शेष उपनल कार्मिकों को स्वीकृत पद के सापेक्ष कार्याेजित होने तक उसी विभाग/कार्यालय में संवर्ग के प्रारम्भिक (सीधी भर्ती के) पद के सापेक्ष वेतनमान के आधार पर कार्याेजित किया जा सकेगा, जिसके लिए वह न्यूनतम अर्हता धारित करते हों। पद उपलब्ध न होने की स्थिति में अधिसंख्य पदों का सृजन/समायोजन करवाया जाएगा। इस प्रकार के समायोजन/अधिसंख्य पद सृजन पर त्वरित निर्णय लिए जाने हेतु शासन स्तर पर एक पृथक व्यवस्था (समिति) गठित की जायेगी।

(4) इस श्रेणी में आने वाले पूर्व उपनलकर्मी जिन्हें उच्च न्यायालय के आदेशों के क्रम में प्रत्यक्ष अनुबन्ध पर कार्याेजित किया जा रहा है, उन्हें वेतनमान का न्यूनतम एवं परिवर्तनीय महंगाई भत्ता का लाभ प्रदान किया जायेगा।

(5) न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में सैनिक कल्याण विभाग द्वारा निर्गत आदेशों में उल्लिखित शर्तों एवं प्रतिबन्धों के अधीन रहते हुए विभिन्न निगमों, परिषदों एवं स्वायतशासी संस्थाओं द्वारा इस संबंध में स्वयं के स्तर पर निर्णय लिया

16- मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा संख्या-778/2025 ‘सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए एक समर्पित सेल की स्थापना की जायेगी‘ के क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार के स्तर पर सेवामुक्त अग्निवीरों से संबंधित विषयों के लिए एक समर्पित प्रकोष्ठ स्थापित किए जाने तथा प्रकोष्ठ के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु संविदा के आधार पर निम्नलिखित कुल-06 पदों के सृजन के प्रस्ताव पर मा० मंत्रिमण्डल द्वारा सहमति प्रदान की गयी है-
उप निदेशक – 01
सहायक निदेशक 02
कनिष्ठ सहायक 02
डाटा इंट्री ऑपरेटर 01

17-उत्तराखण्ड पावर कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (UPCI) द्वारा ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और विश्वसनीय बेस-लोड बिजली की आपूर्ति हेतु राज्य सरकार को प्रस्तुत 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीद के संबंध में न्यूनतम बोलीदाता (L1) अडानी पावर लिमिटेड से ₹5.746 प्रति यूनिट के कुल टैरिफ पर 25 वर्षों के लिए 1320 मेगावाट (1234 मेगावाट अनुबंधित क्षमता) कोयला आधारित बिजली की खरीद को स्वीकृति प्रदान किये जाने एवं उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लि० को अडानी पावर लिमिटेड के साथ बिजली आपूर्ति समझौते (PSA) एवं अन्य सम्बन्धित अभिलेखों पर हस्ताक्षर करने, आवश्यक शर्तों को पूरा करने और नियामक आयोग (UERC) से वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त करने के लिए अधिकृत किये जाने के प्रस्ताव पर मा० मंत्रिमण्डल द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी है।

शहीद सैनिकों की स्मृति में गांवों में स्थापित होंगी मूर्तियां
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड के शहीद सैनिकों के सम्मान में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। राज्य के शहीद सैनिकों की मूर्तियां उनके पैतृक गांवों में स्थापित की जाएंगी। सरकार का उद्देश्य शहीदों की वीरता और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा उनके परिजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करना है। इस पहल से शहीद सैनिकों की स्मृतियां सदैव जीवंत रहेंगी और युवाओं को राष्ट्रसेवा की प्रेरणा मिलेगी।

सीएम निर्देश, आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने तथा आम जनता को उचित दरों पर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कालाबाजारी, जमाखोरी और मुनाफाखोरी के माध्यम से कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग सहित संबंधित विभाग बाजार में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता एवं उनके मूल्यों की नियमित निगरानी करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी स्तर पर आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम कमी पैदा कर आम जनता से अधिक मूल्य न वसूला जाए। उन्होंने कहा कि बाजार में मांग और आपूर्ति की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जाए तथा आवश्यकता के अनुसार समयबद्ध और प्रभावी कदम उठाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी जनपदों में प्रशासन द्वारा नियमित रूप से बाजारों का निरीक्षण किया जाए। आवश्यक वस्तुओं के निर्धारित एवं प्रचलित बाजार मूल्यों की जांच के साथ ही स्टॉक की स्थिति पर भी नजर रखी जाए। कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आम जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में अनावश्यक वृद्धि का सीधा प्रभाव आम नागरिकों के घरेलू बजट पर पड़ता है, इसलिए मूल्य नियंत्रण से संबंधित सभी व्यवस्थाएं प्रभावी और पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने शासन और जिला प्रशासन के अधिकारियों को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए बाजार की स्थिति पर सतत निगरानी रखने तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

धामी सरकार की बागेश्वर को बड़ी सौगात, पहाड़ की पहचान से सजेगा राज्य अतिथि गृह

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों पर राज्य में सरकारी परिसंपत्तियों के विकास और निर्माण कार्यों को गुणवत्ता एवं उपयोगिता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को सचिव राज्य संपत्ति एवं आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने बागेश्वर में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह के निर्माण कार्य की समीक्षा की। सचिव की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में विभागीय व्यय वित्त समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य अतिथि गृह निर्माण कार्य योजना के ₹1930.11 लाख के संस्तुत विस्तृत आगणन पर विस्तार से चर्चा की गई।

स्थानीय पहाड़ी वास्तुशैली में बनेगा भवन
बैठक में कार्यदायी संस्था प्रान्तीय खंड, लोक निर्माण विभाग, बागेश्वर की ओर से प्रस्तावित कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण के बाद सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह का भवन आकर्षक स्थानीय पहाड़ी वास्तुशैली पर आधारित होना चाहिए, ताकि भवन अपनी उपयोगिता के साथ बागेश्वर की स्थानीय पहचान और वास्तुकला को भी प्रदर्शित करे। सचिव ने भवन के प्रवेश द्वार और मुख्य भवन पर राज्य अतिथि गृह का लोगो एवं साइनेज आकर्षक, स्पष्ट और प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि सरकारी भवनों के निर्माण में आधुनिक सुविधाओं के साथ स्थानीय परिवेश और वास्तुशैली का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

डोरमेट्री में 20 लोगों की क्षमता
बैठक में अतिथि गृह में प्रस्तावित डोरमेट्री कक्ष की क्षमता को लेकर भी निर्देश दिए गए। सचिव ने डोरमेट्री कक्ष को 20 व्यक्तियों के अनुरूप विकसित करने को कहा। साथ ही उपलब्ध अतिरिक्त क्षेत्रफल का बेहतर उपयोग करते हुए उसमें एक स्टोर कक्ष प्रस्तावित करने के निर्देश दिए गए। इससे भवन की उपयोगिता और व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जा सकेगा। सचिव ने कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि बैठक में दिए गए सभी सुझावों और आवश्यक संशोधनों को कार्ययोजना में शामिल किया जाए। संशोधित प्रस्ताव तैयार कर शासन के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया, ताकि निर्माण कार्य को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा सके। बैठक में अपर सचिव एवं राज्य संपत्ति अधिकारी अभिषेक रुहेला, संयुक्त सचिव राज्य संपत्ति विभाग सुरेंद्र सिंह रावत, नियोजन विभाग के प्रतिनिधि अयाज अहमद तथा कार्यदायी संस्था की ओर से अधिशासी अभियंता ऋषिराज वर्मा उपस्थित रहे। अधिकारियों ने प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह से संबंधित विभिन्न तकनीकी एवं उपयोगिता पक्षों पर चर्चा की।

डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप राज्य में सरकारी परिसंपत्तियों के निर्माण में गुणवत्ता, उपयोगिता और स्थानीय परिस्थितियों को प्राथमिकता दी जा रही है। बागेश्वर में प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह का भवन केवल एक सरकारी आवासीय सुविधा तक सीमित न रहे, बल्कि क्षेत्र की स्थानीय पहचान और पहाड़ी वास्तुशैली को भी प्रदर्शित करे, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि भवन में आने वाले अतिथियों के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के साथ उपलब्ध भूमि और क्षेत्रफल का बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। डोरमेट्री की क्षमता 20 व्यक्तियों के अनुरूप रखने और अतिरिक्त क्षेत्र में स्टोर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में दिए गए सभी सुझावों को कार्ययोजना में शामिल कर संशोधित रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करने के निर्देश कार्यदायी संस्था को दिए गए हैं।

पिथौरागढ़ के ग्राम जाखनी स्थित बाबा गंगनाथ मंदिर का होगा सौंदर्यीकरणः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास से पिथौरागढ़ में आयोजित ऐतिहासिक हिलजात्रा महोत्सव को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों, विशेषकर पिथौरागढ़ की जनता को हिलजात्रा पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ग्राम जाखनी, पिथौरागढ़ स्थित बाबा गंगनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिलजात्रा उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार घर-घर में मां गौरा और भगवान महेश्वर की पारंपरिक पूजा के साथ सातू-आठू पर्व से हिलजात्रा की भक्ति धारा प्रवाहित होती है, उसी प्रकार सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की धारा निरंतर प्रवाहित होती रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 500 वर्षों से अधिक समय से मनाया जा रहा हिलजात्रा पर्व पिथौरागढ़ की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की विशिष्ट पहचान बन चुका है। सोरघाटी की यह ऐतिहासिक हिलजात्रा हमारी आस्था, विश्वास और समृद्ध परंपराओं का प्रतीक होने के साथ ही पहाड़ी जीवन के संघर्ष, साधना और कृषि-पशुपालन पर आधारित ग्रामीण जीवन की विशिष्टताओं को भी दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि हिलजात्रा केवल धार्मिक अथवा पारंपरिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यह पर्व हमें अपने पूर्वजों की महान परंपराओं, आदर्शों और वीरता का स्मरण कराने के साथ ही अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ता है। भगवान शिव के गण लखिया भूत का आगमन इस पर्व में सुख, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में उत्तराखंड विकास, विरासत और विश्वास के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि केदारखंड की तर्ज पर मानसखंड के पौराणिक मंदिरों के पुनरुत्थान, संरक्षण और सौंदर्यीकरण के कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं। इसके साथ ही हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, हरिपुर यमुना कॉरिडोर, गोल्ज्यू कॉरिडोर, विवेकानंद कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के माध्यम से प्रदेश की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को भव्य स्वरूप प्रदान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन को केवल तीर्थाटन तक सीमित नहीं रखना चाहती। उत्तराखंड को पर्यटन के विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। आज उत्तराखंड वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर टूरिज्म और फिल्म शूटिंग के पसंदीदा केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का एक बड़ा संकल्प गांवों की खुशहाली है। इसी उद्देश्य से होम-स्टे योजना, लखपति दीदी और सौर स्वरोजगार योजना को गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं, ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से पहाड़ के हुनर और स्थानीय उत्पादों को देश-दुनिया में पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि उत्तराखंड के पारंपरिक पर्व, मेले और त्योहार अपनी मूल पहचान एवं सांस्कृतिक स्वरूप के साथ आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और संरक्षित रहें। इसी क्रम में ग्राम जाखनी, पिथौरागढ़ स्थित बाबा गंगनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने युवा पीढ़ी का आह्वान करते हुए कहा कि हिलजात्रा जैसे पर्व युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक विरासत के महत्व को समझने और उसे भव्य स्वरूप प्रदान करने के सरकार के ‘विकल्प रहित संकल्प’ को सिद्धि तक पहुंचाने में योगदान देने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने अंत में सभी को हिलजात्रा पर्व की पुनः शुभकामनाएं देते हुए कामना की कि यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और आनंद लेकर आए।

सीएम को राखी बांधकर मातृशक्तियों ने मनाया रक्षाबंधन पर्व

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित जनता मिलन के अवसर पर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं ने रक्षा सूत्र बांधा तथा उनके दीर्घायु की कामना की। मुख्यमंत्री ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए रक्षा बन्धन की शुभकामनाएं दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा बन्धन के अवसर पर बहनों की सुविधा के लिए 28 और 29 अगस्त, 2026 को दो दिन परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सामाजिक और संवैधानिक अधिकारों के प्रति भी सशक्त किया जा रहा है। राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

सीएम ने जनसमस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए अधिकारियों को दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान लोगों ने मुख्यमंत्री के समक्ष विभिन्न जनसमस्याओं के साथ ही क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषय और सुझाव भी रखे।

मुख्यमंत्री ने जनसमस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित एवं प्रभावी समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं का समयबद्ध निस्तारण राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में है। शासन एवं प्रशासन के सभी स्तरों पर यह सुनिश्चित किया जाए कि आमजन को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। जनहित से जुड़े प्रकरणों पर संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई की जाए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दिव्यांग कुलदीप की समस्या को सुनते हुए उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता एवं ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जरूरतमंद लोगों को समय पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य कर मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन, प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पू.मा.) शिक्षक संघ, सीनियर सिटीजन वेलफेयर सोसाइटी उत्तराखंड, आबकारी उपनिरीक्षक संघ, श्री कल्प केदार मंदिर समिति, देवभूमि पूर्व सैनिक कल्याण समिति, हरिद्वार के शिष्टमंडलों एवं प्रतिनिधिमंडलों से भेंट की। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को अपनी मांगों, समस्याओं एवं सुझावों से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने उनके द्वारा उठाए गए विषयों पर संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनसंवाद के माध्यम से जनता की समस्याओं के समाधान और जनभावनाओं के अनुरूप विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। सरकार का प्रयास है कि शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सरलता और समयबद्धता के साथ पहुंचे।

अगले वर्ष से रक्षाबंधन के 15 दिन पूर्व शुरू होगा ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव’, पखवाड़े के रूप में होगा आयोजित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ के अंतर्गत उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का शुभारंभ एवं अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार राखियों और विभिन्न स्थानीय उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने प्रदेश के सभी जनपदों से वर्चुअल माध्यम से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से संवाद भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले वर्ष से रक्षाबंधन के 15 दिन पूर्व ही ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव’ शुरू किया जाएगा और इसे पखवाड़े के रूप में आयोजित किया जाएगा। इससे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए अधिक समय और बेहतर बाजार उपलब्ध होगा तथा उनकी आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

विभिन्न जनपदों से वर्चुअल माध्यम से जुड़ी महिलाओं ने ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों से उन्हें आजीविका के नए अवसर मिल रहे हैं और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। उनके द्वारा तैयार स्थानीय उत्पादों को भी व्यापक बाजार और नई पहचान मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए सचिवालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से इन स्टॉलों से खरीदारी कर महिला स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यही ‘वोकल फॉर लोकल’ की वास्तविक भावना है। स्थानीय उत्पादों को अपनाकर हम अपनी मातृशक्ति के परिश्रम और हुनर को सम्मान देने के साथ ही राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति राज्य की सामाजिक और आर्थिक प्रगति की मजबूत आधारशिला है। राज्य की महिलाएं परिवार संभालने के साथ खेती, पशुपालन और विभिन्न आजीविका गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आज वे अपने कौशल, परिश्रम और उद्यमशीलता के बल पर सफल उद्यमी के रूप में भी आगे बढ़ रही हैं। हमारी माताएं और बहनें केवल अपने परिवार को ही सशक्त नहीं बना रही हैं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को देश के विकास का प्रमुख आधार बनाया गया है। उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, सुकन्या समृद्धि योजना और लखपति दीदी अभियान जैसी योजनाओं से महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार भी मातृशक्ति को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना’ की शुरुआत इस उद्देश्य से की थी कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा बनाए जा रहे गुणवत्तापूर्ण स्थानीय उत्पाद घर और गांव तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें व्यापक बाजार, उचित मूल्य और नई पहचान मिले। आज प्रदेश में 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह कार्य कर रहे हैं, जिनसे 5 लाख 20 हजार से अधिक ग्रामीण परिवार जुड़े हुए हैं। इन समूहों को मजबूती प्रदान करने के लिए 8 हजार से अधिक ग्राम संगठन और 615 क्लस्टर लेवल फेडरेशन भी कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के तहत प्रत् पिछले तीन वर्षों में प्रदेश के 95 विकासखंडों में 4,480 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से लगभग 12 करोड़ 50 लाख रुपये के उत्पादों की बिक्री हुई है। अवसर और बाजार मिलने पर महिलाएं अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ ही प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के लिए मजबूत विपणन व्यवस्था विकसित की जा रही है। प्रदेश में 49 ग्रोथ सेंटर, 17 सरस सेंटर, 33 नैनो पैकेजिंग यूनिट और 8 बेकरी यूनिट स्थापित की गई हैं। यात्रा मार्गों पर 110 बिक्री केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। सचिवालय सहित विभिन्न स्थानों पर स्थायी बिक्री केंद्रों तथा राज्य स्तरीय सरस मेलों के माध्यम से भी महिला समूहों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। प्रदेश में 3 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी नई पहचान बना चुकी हैं। अब ‘सशक्त बहना उत्सव’ का विस्तार कर इसे ‘सशक्त बहना बाजार’ के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इससे महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को पर्यटन स्थलों, धार्मिक यात्रा मार्गों, रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट तथा होटल-रिसॉर्ट तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किया गया ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ की पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बन रहा है। स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा जा रहा है। महिलाओं को गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लेबलिंग, डिजिटल भुगतान और विपणन का प्रशिक्षण देकर उनके उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया है। महिलाओं की सुरक्षा और समान अधिकारों की दिशा में समान नागरिक संहिता लागू करना भी महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा, स्वाभिमान और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

सीएम के कड़े निर्देश, राज्य स्थापना दिवस तक रोपवे परियोजनाओं के कार्य धरातल पर दिखें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की विभिन्न रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा के दौरान कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं को कार्यों में तेजी लाने के सख्त निर्देश देते हुए कहा कि राज्य स्थापना दिवस 09 नवम्बर तक रोपवे परियोजनाओं के कार्य धरातल पर दिखाई देने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित कार्यदायी संस्थाओं को 15 दिन के भीतर रोपवे परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट मुख्य सचिव को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही इन परियोजनाओं की प्रगति की पुनः समीक्षा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि रोपवे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलम्ब स्वीकार्य नहीं होगा और निर्धारित समयसीमा के अनुसार कार्यों की प्रगति सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने जनपदों में प्रस्तावित एवं निर्माणाधीन रोपवे परियोजनाओं की नियमित निगरानी करें तथा कार्यदायी संस्थाओं के साथ लगातार संपर्क और समन्वय बनाए रखें। परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भूमि, वन भूमि हस्तांतरण, विभागीय स्वीकृतियों अथवा अन्य स्तर पर जो भी समस्याएं आ रही हैं, उनके समाधान के लिए संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्थाएं आपसी समन्वय से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रोपवे कनेक्टिविटी राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक आवागमन सुगम होने के साथ सड़क मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी। रोपवे परियोजनाओं से पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML), उत्तराखण्ड मेट्रो रेल, शहरी अवस्थापना एवं भवन निर्माण निगम (UKMRC) तथा पर्यटन विभाग से संबंधित विभिन्न रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रस्तुतीकरण के अनुसार प्रथम चरण में NHLML की 11 तथा द्वितीय चरण में 06 प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं के साथ UKMRC से संबंधित परियोजनाओं की स्थिति पर भी चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए इनसे संबंधित प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए। प्रस्तुतीकरण के अनुसार केदारनाथ रोपवे परियोजना की लंबाई 12.90 किमी तथा हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना की लंबाई 12.40 किमी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के क्रियान्वयन से श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुगम होगी।

मुख्यमंत्री ने नैनीताल रोपवे परियोजना से संबंधित कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश देते हुए कहा कि नैनीताल राज्य का प्रमुख पर्यटन स्थल है। पर्यटकों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने और यातायात के दबाव को कम करने की दिशा में रोपवे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्यमंत्री ने देहरादून-मसूरी रोपवे परियोजना की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने परियोजना से संबंधित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मसूरी में विशेष रूप से पर्यटन सीजन के दौरान यातायात का अत्यधिक दबाव रहता है। रोपवे से पर्यटकों को वैकल्पिक एवं सुगम परिवहन सुविधा मिलने के साथ सड़क यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने यमुनोत्री, पूर्णागिरि और कुंजापुरी सहित अन्य प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में विभिन्न स्तरों पर लंबित प्रक्रियाओं को प्राथमिकता से पूरा किया जाए। जिन मामलों में भूमि अथवा अन्य विभागीय स्तर पर कार्रवाई अपेक्षित है, संबंधित जिलाधिकारी उनमें प्रभावी समन्वय स्थापित कर तेजी से समाधान सुनिश्चित करें।

बैठक में हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना तथा त्रिवेणी घाट-नीलकंठ रोपवे से संबंधित प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी परियोजनाओं में यात्रियों की सुरक्षा, पर्यावरणीय संतुलन और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कार्य किया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रोपवे परियोजनाओं में प्रगति केवल प्रक्रियाओं तक सीमित न रहे, बल्कि 09 नवम्बर तक कार्य धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दें। उन्होंने संबंधित विभागों, जिलाधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को आपसी समन्वय से सभी लंबित प्रकरणों का त्वरित समाधान करते हुए परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। कार्यदायी संस्थाओं द्वारा 15 दिन में मुख्य सचिव को दी जाने वाली प्रगति रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री जल्द ही रोपवे परियोजनाओं की पुनः समीक्षा करेंगे।

इस अवसर पर अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, धीराज गर्ब्याल, कार्यदाई संस्थाओं के अधिकारी एवं वर्चुअल माध्यम से संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

वर्षाकाल के बाद पीएनजी पाइपलाइन बिछाने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू करें: वर्द्धन

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सचिवालय में प्रदेश में बिछाई जा रही पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) पाइपलाइन और कनेक्शन के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों, गैस कंपनियों तथा जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने गैस कंपनियों और सम्बन्धित एजेंसियों को कार्य की गति बढ़ाए जाने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद सड़क खुदाई की अनुमति मिलते ही पीएनजी पाइपलाइन बिछाने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया जाए। विशेष रूप से हरिद्वार जनपद में कुंभ-2027 से पहले पीएनजी से संबंधित सभी आवश्यक कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जनपदों में सम्बन्धित एजेंसियों को अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए, ताकि जिन क्षेत्रों में नई सड़कें अथवा अन्य निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं, उनमें पीएनजी पाइपलाइन के प्रावधान को पहले से ही शामिल किया जा सके। इससे भविष्य में बार-बार सड़क खोदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और समय एवं संसाधनों की बचत होगी।

मुख्य सचिव ने आपूर्ति विभाग को गैस कंपनियों को पीएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए भूमि आवंटन, किराये और लीज पर दिए जाने से सम्बन्धित एक स्पष्ट नीति शीघ्र तैयार किए जाने के निर्देश दिए। कहा कि इससे विभिन्न जनपदों में पीएनजी प्लांट एवं अन्य आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भूमि हस्तांतरण में आने वाली समस्याओं का समाधान किया जा सकेगा और कार्यों में तेजी आएगी। उन्होंने रोड कटिंग और रोड डिगिंग पालिसी को भी प्रस्तावित नीति में शामिल करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क एवं अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों को पूर्व स्वरूप में लाने का कार्य भी निर्धारित शर्तों के अनुसार शीघ्र पूरा किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए प्रत्येक एजेंसी विस्तृत टाइमलाइन और टाइमफ्रेम तैयार करे। उन्होंने एजेंसियों को टाइमलाइन के अनुसार परियोजना पूर्ण होने तक का प्रत्येक सप्ताह के लिए लक्ष्य निर्धारित किए जाएं और साप्ताहिक प्रगति के आधार पर कार्यों को पूरा कराया जाए।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए की मुख्य सचिव ने भारत सरकार की गोवर्धन योजना के तहत उपलब्ध सब्सिडी का लाभ लेने की दिशा में भी प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने सम्बन्धित अधिकारियों और एजेंसियों से आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण करने को कहा।

इस अवसर पर अपर सचिव रूचि मोहन रयाल, जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग विषाल मिश्रा, आयुक्त खाद्य एवं आपूर्ति बी.एल. राणा एवं अपर आयुक्त पी.एस. पांगती सहित जनपदों से जिलाधिकारी एवं गैस एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।