ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए प्रदेश में 11 नए ग्रोथ सेंटरों को मंजूरी

मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि पिछले दिनों में कोराना संक्रमितों की संख्या में बढ़ोतरी से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उत्तराखण्ड में अभी तक सामुदायिक संक्रमण नहीं हुआ है। जितने भी केस आ रहे हैं, उनकी कोई ट्रेवल हिस्ट्री है या कान्टेक्ट के केस हैं। ये सभी पहले से निगरानी में चल रहे थे। अभी कुछ दिन और कुल मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है परंतु 10-15 दिनों में एक्टीव केस की संख्या में कमी आने लगेगी। हमारी डबलिंग रेट में पिछले तीन दिन में कुछ सुधार हुआ है। प्रदेश में पाॅजिटिवीटी रेट, राष्ट्रीय औसत से कम है। हमारे यहां कोरोना संक्रमण में मृत्यु दर 1 प्रतिशत से कम है जबकि भारत का औसत लगभग 2.8 प्रतिशत है। पेंशेंट केयर मेनेजमेंट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कान्टेक्ट ट्रेसिंग को भी प्रमुखता दी जा रही है। प्रदेश में 31 कंटेन्मेंट जोन बनाए गए हैं, जहां बहुत सख्त व्यवस्था लागू है।

कोरोना टेस्ट बढ़ाने के निर्देश
मुख्य सचिव ने कहा कि कोरोना टेस्ट की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। पहले सप्ताह में प्रति दिन सेम्पल का औसत एक था जबकि 16 वें सप्ताह में यह औसत बढ़कर 834 हो गया है। यह जल्द ही 1000 प्रति दिन हो जाएगा। देहरादून में लगभग 5500 प्रति मिलीयन और नैन्ीताल में 3185 प्रति मिलीयन जनसंख्या टेस्ट किए जा रहे हैं जो कि राष्ट्रीय औसत से अधिक हैं। अन्य जिलों में भी टेस्ट बढ़ाए जा रहे हैं। टेस्टिंग लेब की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।यदि राज्य में कोराना संक्रमित मामलों का विश्लेषण किया जाए तो इनमें 41 प्रतिशत में कोई लक्षण नहीं है, 53 प्रतिशत में बहुत ही मामूली लक्षण हैं, 4.5 प्रतिशत में मध्यम और 1.74 प्रतिशत अधिक लक्षण वाले हैं। स्पष्ट है कि हमारे यहां गम्भीर केस नहीं हैं।

उत्तराखण्ड आने के इच्छुक अधिकांश लोगों को लाया जा चुका
मुख्य सचिव ने बताया कि बाहर से प्रदेश में आने के लिए लगभग 2 लाख 62 हजार प्रवासियों ने आनलाईन रजिस्ट्रेशन कराया है, इनमें से 1 लाख 81 हजार लोगों को ट्रेन, बस या निजी वाहनों के माध्यम से लाया जा चुका है। अब लोग आने के लिए कम इच्छुक हैं। 28 मई को 98 हजार बल्क एसएमएस किए गए जिनमें से लगभग 3 हजार लोगों ने ही आने की इच्छा व्यक्त की।

अनुशासन, धैर्य और साहस बनाए रखने की अपील
मुख्य सचिव ने कहा कि हालांकि स्थिति चुनौतिपूर्ण है, परंतु किसी तरह से घबराने या आशंकित होने की आवश्यकता नहीं है। हमारी पूरी तैयारी है। अनुशासन, धैर्य और साहस से हम जल्द ही प्रदेश में कोरोना को नियंत्रित कर लेंगे। ग्राम स्तर से लेकर राज्य स्तर तक अधिकारी व कर्मचारी अनवरत लगे हैं। मुख्यमंत्री स्तर पर स्टेट टास्क फोर्स के साथ रोज समीक्षा की जाती है और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लिए जाते हैं। केबिनेट भी नियमित रूप से स्थिति की समीक्षा करती है।
मुख्य सचिव ने कहा कि धीरे-धीरे शिथिलता दी जा रही है। बाजार के खुलने के समय को सुबह के 7 बजे से शाम के 7 बजे तक किया गया है। लेकिन कुछ सावधानियां रखनी जरूरी हैं। एक जगह पर भीड़ न करें। फिजीकल डिस्टेंस बनाकर रखें, बाहर जाने पर मास्क का अनिवार्यता से प्रयोग करें और हाथों को बार-बार धोएं।

मनरेगा के 18 हजार कार्य संचालित, 2 लाख 44 हजार श्रमिक कार्यरत
मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में सभी जिलों में मनरेगा के काम चल रहे हैं। 18 हजार से अधिक मनरेगा के कार्यों में 2 लाख 44 हजार श्रमिक लगे है। 9760 नए जाॅब कार्ड बनाए गए है। इनमें से 6400 को काम भी उपलब्ध कराया गया है।

11 नए ग्रोथ सेंटर स्वीकृत, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। ऐसे ही एक निर्णय किया गया है कि आराकोट में मंडी परिषद के माध्यम से सेब का सोर्टिंग व ग्रेडिंग सेंटर बनाया जाएगा। इससे हमारे सेब के उत्पादकों को अच्छी कीमत मिलेगी। प्रदेश में पहले से 83 ग्रोथ सेंटर स्थापित हैं। हाल ही में प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर 11 नए ग्रोथ सेंटर को मंजूरी दी गई है। इनमें पिथौरागढ़ के मुन्स्यारी में पक्षी पर्यटन, चमोली के गैरसैंण में मसाला व देवाल में शहद, नैनीताल के कोटाबाग में शहद और आर्गेनिक उत्पाद, रामगढ़ में खाद्य प्रसंस्करण, अल्मोड़ा में नेचुरल फाईबर, ऊधमसिंहनगर के गदरपुर में मसाला, जसपुर में दुग्ध व उच्च गुणवत्ता की रजाई, उत्तरकाशी के रैथल में साहसिक पर्यटन पर आधारित ग्रोथ सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसी प्रकार भीमताल में बेकरी, रामनगर में सोवेनियर, बागजला में ऐंपण के ग्रोथ सेंटर को सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है। इन ग्रोथ सेंटर से युवाओं और स्थानीय लोगों को आजीविका के अवसर मिलेंगे।
सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग।

राज्य कैबिनेट-कोविड की रोकथाम और स्वरोजगार पर रही केन्द्रित, लिए कई निर्णय

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल बैठक आयोजित हुई जिसमें 16 बिंदुओं पर चर्चा हुई। सरकार के प्रवक्ता व काबीना मंत्री मदन कौशिक ने मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार कार्मिकों के विभिन्न भत्तों पर हर महीने 63.11 करोड़ खर्च कर रही है। इसमें सबसे अधिक मकान किराया भत्ते पर 44.09 करोड़, पर्वतीय विकास भत्ता मद में 5.29 करोड़ व सीमांत क्षेत्र भत्ता मद में 1.32 करोड़, सचिवालय भत्ता मद में 50 लाख रुपये, पुलिस कार्मिकों को अनुमन्य प्रोत्साहन भत्ते की मद में 66.55 लाख समेत अन्य भत्तों पर प्रतिमाह 13.04 करोड़ का खर्च बैठ रहा है।

मदन कौशिक ने कहा कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि-
1. कोविड सैंपलिंग, टैस्टिंग की प्रक्रिया को गति दी जाएगी। प्राइवेट लैब को टैंडर प्रक्रिया से लेने के लिए 4 दिन का अवधि निर्धारित किया गया।
2. किसी भी कार्मिक के किसी भी रूप में भत्ते में कटौती नहीं की जाएगी, मुख्य सचिव से लेकर नीचे के सभी कार्मिकों का प्रत्येक माह में, एक दिन का वेतन वर्तमान वित्त वर्ष में मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किया जायेगा। पेंशनरों से किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। दायित्वधारियों का प्रत्येक माह में 5 दिन का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किया जाएगा, वर्तमान वित्त वर्ष तक।
3. मुख्यमंत्री एकीकृत बागवानी विकास योजना में राहत प्रदान की गयी है। बागवानी मिशन में सब्जी, बीज, पुष्प पर दिया जाने वाला 50 प्रतिशत का अनुदान शेष सभी कृषकों को दिया जाएगा। बागवानी मिशन से अलग फल, बीज, आलू, अदरक 50 प्रतिशत राज्य सहायता अनुदान के रूप में दिया जायेगा तथा कोल्ड स्टोर और ए.सी. वैन पर भी अनुदान दिया जायेगा। 15 लाख रुपये लागत के कोल्ड स्टोरेज पर 50 प्रतिशत अनुदान तथा 26 लाख रुपये एसी वैन की लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।
4. श्रम विभाग के श्रम अधिनियम के अंतर्गत दुकान, प्रतिष्ठान के नियोजकों को संदिग्ध कोविड कर्मचारियों को 28 दिन के क्वॉरंटीन अवधि का वेतन भुगतान करना होगा। सभी दुकानों, कारखानों जहां 10 से अधिक कर्मचारी हैं, कोविड को रोकथाम के लिए सैनिटाइजर की व्यवस्था की जाएगी।
5. उत्तराखंड उपखनिज 2016 चुगान नीति में परिवर्तन करते हुए निगम के पट्टे की अवधि एक वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है। यदि अन्य क्षेत्र में टेंडर के बाद कोई फर्म नहीं मिलता है तो इसका संचालन निगम करेगा।
6. कोविड स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत उपकरण क्रय का अधिकार 03 माह से बढ़ाकर 28 फरवरी तक कर दिया गया है। अग्रिम धनराशि को 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया। निदेशक के 03 करोड़ के अधिकार को अब प्राचार्य भी उपयोग कर सकेंगे।
7. श्रम सुधार अधिनियम में यूनियन बनाने के लिए कर्मचारियों के 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत की संख्या कर दी गयी।
8. रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्ट्री की डिजिटल नकल दो रुपये प्रति पृष्ठ और न्यूनतम 100 रुपये की गयी।
9. आउटसोर्सिंग के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग में भर्ती के लिए तीन माह की निर्धारित अवधि बढ़ाकर 20 फरवरी 2021 किया गया।
10. मेगा इंडस्ट्री एवं इंवेस्टमेंट पालिसी में संसोधन करते हुए वैधता अवधि 31 मार्च 2020 से 30 जून 2020 किया गया।
11. उत्तरकाशी में 1000 मि.टन क्षमता को बनाने के लिए मंडी परिषद को 10 करोड़ से बढ़ाकर 13 करोड़ 46 लाख में बनाने का अधिकार दिया गया।
12. जिला योजना समिति के चुनाव के संबंध में अध्यादेश लाते हुए जिलाधिकारी प्रभारी मंत्री की स्वीकृति से कार्य करा सकते है।
13. पंचायती राज अध्यादेश लाते हुए जहां पर जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लाक प्रमुख ग्राम प्रधान का चुनाव नहीं हो पाया है एवं अन्य पदों का चुनाव हो गया है वहां जिलाधिकारी के माध्यम से शेष पदों पर मनोनीत किया जा सकता है।
14 प्रदेश के भीतर वाहनों की आवाजाही होगी, लेकिन संबंधित जिले में जिलाधिकारी कार्यालय में करना होगा ऑनलाइन आवेदन, सिर्फ आवेदन ही पर्याप्त, उसके बाद पास लेने की आवश्यकता नहीं।

कल होगा निर्णय, धार्मिक स्थल एक जून से खुलेंगे या पहले की तरह रहेगा पांबदी

लॉकडाउन के कारण उत्तराखंड में पिछले दो महीने से बंद पड़े धर्मस्थलों को लॉकडाउन-चार समाप्त होने के बाद एक जून से श्रद्धालुओं के लिए खोला जा सकता है। राज्य सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक ने इसके संकेत दिए हैं।
लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही सभी धार्मिक स्थलों को भी बंद कर दिया गया था। करीब दो महीने से मंदिरों में धार्मिक गतिविधियां पूरी तरह बंद हैं। इस बार नवरात्र और अन्य पर्वों पर भी मंदिरों में सन्नाटा रहा। केवल सुबह और शाम को पूजा की अनुमति दी गई थी। पिछले दिनों सरकार ने पुजारियों को थोड़ी राहत देते हुए अनुष्ठान की अनुमित जरुर थी। लाॅकडाउन में अन्य क्षेत्रों में राहत देने पर विभिन्न मंदिर समितियों और तीर्थ पुरोहित समाज की ओर से लगातार मांग की जा रही है कि मंदिरों को श्रद्धालुओं के लिए भी खोला जाए। इसी मांग को लेकर पिछले दिनों एक प्रतिनिधिमंडल कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक से मिला था। कल एक समाचार एजेंसी से बातचीत में शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने कहा कि एक जून से कुछ शर्तों के साथ धार्मिक स्थलों को खोले जाने पर विचार किया जा रहा है। 31 मई को इस पर निर्णय लेकर आदेश जारी किए जाएंगे।

लॉकडाउन में भी त्रिवेंद्र की टीम कर रही जन समस्याओं का त्वरित समाधान

गर्मियों में पानी की समस्या होना आम बात है लेकिन पानी की कमी से लोगों को परेशानी ना हो इसका समाधान जरूरी है। ऐसा ही एक वाकया आज रानीपोखरी क्षेत्र में देखने को मिला। जहां लो वोल्टेज के कारण लोगों के घरों में पानी नहीं आ रहा था। स्थानीय लोग अपनी समस्या को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर नितिन रावत से मिले। मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर ने तत्काल इस समस्या का संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों से वार्ता की। अधिकारियों ने बताया कि लो वोल्टेज के कारण लोगों के घरों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। वहीं खराब हुई मोटर से उन्हें बहुत परेशानी हो रही है, जिस पर तत्काल नितिन सिंह रावत ने उच्च अधिकारियों से वार्ता कर खराब हुई मोटर के स्थान पर नई मोटर लगाने की व्यवस्था की और लो वोल्टेज की समस्या से निजात दिलाने के लिए एक हेवी वेट जनरेटर की व्यवस्था भी करवाई। जिससे आने वाले समय में पानी की समस्या ना उत्पन्न न हो।

नितिन सिंह रावत ने बताया कि दो-तीन दिन में यह व्यवस्था सुचारू रूप से हो जाएगी, लेकिन दो-तीन दिन में लोगों को पानी की परेशानी का सामना ना करना पड़े इसके लिए पर्याप्त मात्रा में जल संस्थान को टैंकरों से पानी सप्लाई करने के निर्देश दिए गए हैं। जिस पर उच्चाधिकारियों ने स्थानीय जल निगम को पर्याप्त मात्रा में टैंकर उपलब्ध कराने की बात कही है। मौके पर ही समस्या का समाधान होने से स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर का धन्यवाद दिया। जिस पर मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर नितिन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार लॉक डाउन में इस बात का ध्यान रख रही है कि आम जनता की परेशानियों को कैसे कम किया जाए। अमूमन गर्मियों में पानी की समस्या देखने को मिलती है, इसलिए मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में पानी की समस्या उत्पन्न ना हो इसके लिए सभी जिलों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।मुख्यमंत्री की टीम लगातार हर समस्या पर नजर रख रही है और जो समस्या उनके सामने लाई जा रही है उसका त्वरित समाधान किया जा रहा है।

मोदी की मूर्ति लगाकर करूंगा उनकी पूजा…

भाजपा विधायक गणेश जोशी मोदी आरती का जाप करने पर कांग्रेस के निशाने पर आए है। विधायक जोशी ने कांग्रेस के जवाब में कहा कि ईश्वर मुझे ताकत देगा तो मैं अपने घर के भीतर नरेन्द्र मोदी की मूर्ति लगाऊंगा और उसकी पूजा भी करूंगा। विधायक ने यह भी कहा कि उनके घर में वर्ष 1999 से नरेंद्र मोदी की तस्वीर है, जिसकी वह पूजा करते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेसियों के पास अब कुछ बचा नहीं है। मैंने उन्हें कुछ दिनों के लिए काम दे दिया है।

विधायक जोशी मोदी आरती को लेकर विवाद में हैं। उनकी विधानसभा मसूरी में एक कार्यक्रम के दौरान मोदी आरती का विमोचन हुआ। जिसमें उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ.धन सिंह रावत व जोशी ने अन्य मोदी भक्तों के साथ मोदी आरती का पाठ किया। इसे लेकर विपक्ष जोशी और उच्च शिक्षा राज्यमंत्री की आलोचना कर रहा है।

भाजपा और भाजपा नेताओं पर आरोप है कि वे मोदी की तुलना भगवान हनुमान से करके लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इस पर विधायक जोशी का कहना है कि किसी व्यक्ति की पूजा या प्रशस्ति नितांत निजी मामला है। मुझे सोशल मीडिया पर ये पंक्तियां भेजी गई थी। मुझे पसंद आई। कुछ और पंक्तियां मेरे पास आई हैं। मैं उनका भी विमोचन करूंगा।

उन्होंने कहा कि देश में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां राजनेताओं की मूर्ति लगाने और उनका प्रशस्ति गान हुआ। मोदी तो देश के प्रधानमंत्री हैं। यदि कोई कार्यकर्ता उनकी प्रशंसा में कुछ पंक्तियां लिखता है तो इससे कांग्रेस के पेट में दर्द क्यों हो रहा है। उन्होंने कहा कि हनुमान जी से तुलना विरोधी कर रहे हैं। वरना जो रचना पढ़ी गई, उसमें सभी बातें सच हैं। कांग्रेस को मोदी फोबिया हो गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों 15वें राज्य वित्त आयोग से अधिक हिस्सेदारी देने का निर्णय

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की बैठक हुई। जिसमें कई प्रस्तावों पर निर्णय लिया गया। इसकी जानकारी शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने दी।

कोविड-19 से सम्बन्धित बाॅर्डर पर काॅरन्टीन किए जाने सम्बन्धी मा0 उच्च न्यायालय के निर्देशों के क्रम में होने वाले व्यवस्थागत, संस्थागत समस्या की जानकारी न्यायालय को दी जाएगी।
15वें राज्य वित्त आयोग के अनुदान धनराशि का निकायों में वितरण दरों में परिवर्तन किया गया है। ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत में 35ः30ः35 को बदल कर क्रमशः 75ः10ः15 किया जाएगा। कुल 852 करोड़ रूपए की धनराशि में से 575 करोड़ रूपए पंचायती राज एवं 278 करोड़ शहरी निकाय को दिया जाएगा।
उत्तराखण्ड जोत चकबन्दी नियमावली 2020 को मंजूरी दी गयी। इसके अन्तर्गत नाम, परिभाषा, नोटिस भेजना, अधिसूचना जारी करना, इत्यादि को स्पष्ट किया गया है।
पेयजल संस्थान के प्रबन्ध निदेशक पद की चयन प्रक्रिया में वार्षिक प्रविष्टि के लिए समय सीमा 8 वर्ष की जगह 5 वर्ष की गयी।
मदिरा दुकानों के बन्द रहने की अवधि में फुटकर अनुज्ञापी के पिछले वित्त वर्ष मार्च माह में 10 दिन के नुकसान 34 करोड़ एवं 1 अप्रैल से 3 मई के बीच 195 करोड़ रूपए का भार सरकार वहन करेगा।
मुख्यमंत्री राज्य कृषि विकास योजना लागू की गयी। इसके अन्तर्गत केन्द्र सरकार के बीच फण्ड के गैप की भरपाई राज्य सरकार करेगी। बीज क्रय हेतु अन्य निगमों के अतिरिक्त कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर, टिहरी भरसार विश्वविद्यालय एवं आईसीएआर के लिए अनुमति दी गयी।
राज्य वन्यजीव अवैध शिकार अपराध रोकथाम के लिए 14 पदों का सृजन किया गया। यह पद विभागीय पद होगा।
स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों के लिए बिना अवकाश 5 वर्ष की अनुपस्थिति पर सेवा समाप्त की जाएगी।
सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग में लोक सेवा आयोग के माध्यम से सूचना अधिकारी के पद पर हिन्दी विषय की अनिवार्यता समाप्त की गयी।
सार्वजनिक वाहन व्यवसायियों के परमिट नवीनीकरण की फीस के छूट के अन्तर्गत 14 करोड़ 23 लाख की भरपाइ्र सरकार द्वारा की जाएगी। एवं रोड टैक्स में 3 माह की छूट के पश्चात 63 करोड़ 28 लाख रूपए की भरपाई राज्य सरकार करेगी।
सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय शिक्षा अभियान के एकीकरण के बाद समग्र शिक्षा अभियान चलेगा। जहां पहले कुल 2677 पद थे। अब पदों की संख्या 1959 हो जाएगी।
पर्यटन विभाग के अन्तर्गत होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा को संरक्षण देने के लिए पानी पर लिए जाने वाले बिल जल मूल्य कर वृद्धि को 15 प्रतिशत को 9 प्रतिशत लिया जाएगा। इससे 1 करोड़ 87 लाख का व्यय भार राज्य सरकार पर होगा।
श्रम सुधार के अन्तर्गत उद्योगों द्वारा श्रमिकों को दिया जाने वाला मार्च माह का बोनस जो नवम्बर 2020 में देना था, अब इसे 31 मार्च 2021 तक दिया जा सकता है। जो उद्योग फायदे में होंगे उन्हें 8.33 प्रतिशत बोनस देना होगा। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के लिए कैबिनेट मंत्री हरक सिंह एवं मदन कौशिक की समिति बनायी गयी।
पर्यटन औद्योगिक ईकाइयों में कार्यरत् आॅटो रिक्शा चालक इत्यादि को एकमुश्त एक हजार रूपए खाते में दी जाएगी। इससे 25 करोड़ का अधिभार राज्य सरकार पर पड़ेगा।
वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना, दीनदयाल होम-स्टे योजना में अपै्रल से जून तक ऋण ब्याज पर छूट दी गयी।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति की अवधि को एक वर्ष का विस्तार दिया गया जिस पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
आबकारी होटल, रेस्टोरेंट बार शुल्क में 3 माह की छूट दी गयी।
नवीनीकरण, पंजीकरण शुल्क में 1 वर्ष की छूट दी गयी।

आईएएस अधिकारियों के तबादले, पावरफुल हुए हल्के

मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद बड़े पैमाने पर शासन ने तबादले किये है। कई जिलों के जिला अधिकारियों को भी बदला गया है। कुल 16 आईएएस और 5 पीसीएस अधिकारियों के के तबादले किये गए हैं।

आईएएस अरविंद सिंह ह्यांकी को कुमायूं आयुक्त बनाया गया।
आईएएस दीपेंद्र चैधरी को कमिश्नर परिवहन।
आईएएस मंगेश घिल्डियाल को जिलाधिकारी टिहरी बनाया गया।
आईएएस वंदना को जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग का चार्ज।
आर मीनाक्षी सुंदरम से विद्यालयी शिक्षा विभाग का सचिव पद ले लिया गया है।
आर के सुधांशु को पीडब्ल्यूडी दिया गया है।
हरबंस सिंह चुग को वन एवं पर्यावरण विभाग का सचिव बनाया गया है।
नितेश झा को सचिव स्वास्थ्य से हटाकर सिंचाई और लघु सिंचाई तथा पेयजल विभाग के सचिव बनाया गया है।
साथ ही कुछ आईएएस अधिकारियों के दायित्व में फेरबदल भी किया गया है किसी के पर भी काटे गये और किसी का कद बढ़ाया भी गया है।

ज्ञात हो कि उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल में ओमप्रकाश और नितेश झा से बड़े विभाग हटा लिये गये है। माना जा रहा है कि कुछ अधिकारियों पर लगातार आरोप लग रहे थे, मुख्यमंत्री एक्शन को इसी नजर से देखा जा रहा है। उत्तराखंड में हुए अमन मणि त्रिपाठी कांड में पास जारी करने का आदेश देने वाले मुख्यमंत्री के खासमखास अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश से पीडब्लूडी विभाग और इंफ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी हटा दी गई है।
वहीं स्वास्थ्य सचिव नितेश झा को भी विभाग से हटा दिया गया है। उनकी जगह अमित नेगी को नया स्वास्थ्य सचिव बनाया गया है।

5 पीसीएस अधिकारियों के भी तबादले किये गये हैं-
अरविन्द पाण्डे को रुद्रप्रयाग से देहरादून का एडीएम प्रशासन व रामजी शरण को रुद्रप्रयाग भेजा गया है। झरना कमठान को एनएचएम का एडीशनल मिशन डायरेक्टर बनाया गया है। जबकि अभिषेक त्रिपाठी और प्रदीप सिंह रावत के भी कुछ विभाग घटाये बढ़ाये गये हैं।

मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान, ऑड-ईवन की व्यवस्था हुई समाप्त

प्रदेश सरकार ने आठ शहरों में निजी वाहनों के संचालन के लिए बनाई ऑड-ईवन (सम-विषम) की व्यवस्था को आज समाप्त कर दिया है। बतातें चले कि व्यावहारिक दिक्कतों के कारण व्यवस्था शुरू होने से पहले ही सरकार को अपना फैसला पलटना पड़ा। नई व्यवस्था के तहत अब पहले की तरह सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक वाहनों की आवाजाही हो सकती है।
केंद्र सरकार की लॉकडाउन चार को लेकर जारी गाइडलाइन पर राज्य सरकार ने प्रदेश के आठ निगम क्षेत्र जिनमें देहरादून, ऋषिकेश, रुद्रपुर, काशीपुर, हरिद्वार, कोटद्वार, रुड़की और हल्द्वानी शामिल थे, में निजी वाहनों की आवाजाही ऑड-ईवन नंबर प्लेट के आधार पर करने का निर्णय लिया था।
सरकार ने यह निर्णय इन शहरों में वाहनों की भीड़ कम करने के सोशल डिस्टेंसिंग को कड़ाई से लागू करने के लिए किया था। हालांकि माल वाहक वाहनों, आवश्यक सेवाओं में लगे वाहनों एवं अन्य राज्यों से अनुमति प्राप्त अधिकृत वाहनों पर यह नियम लागू नहीं किया था।
निजी चैपहिया वाहनों में चालक के अतिरिक्त तीन अन्य व्यक्तियों के बैठने की अनुमति थी। सूत्रों के अनुसार अधिकांश जिलों से व्यवस्था बनाने में आ रही दिक्कतों को लेकर शासन को अवगत करवाया गया था। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसका त्वरित संज्ञान लेकर अब वाहनों के लिए लागू की गई ऑड-ईवन की व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया। शासन की ओर से बताया गया कि इस व्यवस्था से लोगों को हो रही व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

जांच की मांग करने से आरोप लगाने वाले लोगों की खुलेगी पोलः रमेश भटट

एक समाचार पत्र में एक खबर आने के बाद और फिर कुछ सोशल मीडिया साइडों में उत्तराखंड मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भटट के खिलाफ एक समाचार प्रचारित किया जा रहा है। जो प्रमुख रुप से जमीन से जुड़ा मामला है। इसमें रमेश भटट को जिस प्रकार से खलनायक बनाया जा रहा है। उससे मीडिया जगत के लोग भी हैरान हो गये है।
वहीं, रमेश भटट ने सोशल मीडिया में सार्वजनिक रुप से मामले की जांच करने मांग की है। उन्होंने कहा है कि समाचार भ्रामक और असत्य है। उन्होंने सभी मीडिया जगत को जांच करने और जांच पूरी ना होने तक एक पूर्व मीडियाकर्मी होने के नाते सत्य का साथ देने की वकालत की है।
बरहाल इन सबके बीच उनकी सोशल मीडिया की पोस्ट पर कई मीडियाकर्मियों के पोस्ट पढ़ने को मिले है। अधिकत्तर लोगों ने आरोप लगाने वालों को ही कटघरे में खड़ा किया है। पोस्ट में एक यूजर ने लिखा है कि हल्द्वानी निवासी जानते है कि जमीन पर अवैध कब्जे किस आदमी के है? उन्होंने लिखा है कि अपने स्वार्थ के लिए ऐसे ही किसी पर आरोप नही लगाने चाहिये।
वहीं, दूसरा यूजर लिख रहा है कि आय से अधिक के मामले वाले अब दूसरों पर आरोप लगाने लगे हैं। एक अन्य यूजर लिख रहा है कि बेनामी संपत्ति का खेल खेलने वाले अब दूसरों पर आरोप लगाने लगा रहे है? एक अन्य यूजर ने रमेश भटट को टारगेट करने के पीछे का कारण राजनीतिक बताया है। उसने लिखा है कि लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर एक युवा को जनसेवा की जिम्मेदारी मिली और वह उस पर खरा भी उतर रहा है। इसी की बदौलत लोग उसे भविष्य में भीमताल के विधायक के रुप में देख रहे है। इस लिए उन्हें एक विशेष तबके के द्वारा शिकार बनाया जा रहा है। एक यूजर ने लिखा है कि तो दर्जनों मुकदमें किस पर दर्ज है। वह कैसे दूसरे पर आरोप लगा सकता है?
वही हमने रमेश भटट से बात करने की कोशिश की लेकिन उनका फोन नही उठा। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने सरकार के मुखिया से जाँच के लिए निवेदन किया है। जिसमें जाँच होने के बाद भूमाफिया का सत्य उजागर होने की बात कही जा रही है। साथ ही उनके द्वारा कुछ बिंदुओं पर भी जाँच की माँग की गई है?

मीडिया सलाहकार रमेश भटट की फेसबुक पोस्ट को पाठकों के लिए अक्षरतः लिखा गया है-
सोशल मीडिया में, कुछ न्यूज पोर्टल में मुझसे जुड़ा एक समाचार तैर रहा है। उसके बारे में बाद में बताऊंगा, पहले स्पष्ट कर दूं कि यह समाचार असत्य है, भ्रामक हैं और इसका सच्चाई से कुछ भी लेना देना नहीं है। किसी पर आरोप लगाकर किसी व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा कुछ समय के लिए प्रभावित की जा सकती है, लेकिन सत्य, सत्य होता है। आरोप लगाना और प्रमाणित करना दोनों में जमीन आसमान का अंतर है।
मैं एक स्वच्छ छवि के राजनेता की टीम का सदस्य हूं और अपनी व्यक्तिगत तथा सामाजिक जिम्मेदारियों को बखघ्बी जानता हूं। खबरों में मुझ पर जमीन पर कब्जे का आरोप लगाया गया है। मेरे जानने वाले मित्रों, शुभचिंतकों के लिए यह हास्यास्पद के अतिरिक्त कुछ नहीं है। मैं सामान्य पृष्ठभूमि से आता हूं, आरोप लगाने वाले सज्जनों की पृष्ठभूमि भी खंगाल ली जानी चाहिए कि कौन इन कृत्यों का पेशेवर और माहिर हैं, किन पर गैरकानूनी कब्जे, सैंकड़ों मुकदमे,आय से अधिक के साथ साथ बेनामी संपत्ति के आरोप हैं।
मेरा अपने सभी मित्रों से विशेषकर मीडिया के मित्रों से एक मूलतः मीडियाकर्मी होने के नाते अनुरोध है। पूरे प्रकरण में सच्चाई का साथ दें। आरोप लगाने वाले सज्जनों का आभार प्रकट करूंगा कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से मुझे परीक्षण हेतु चुना। दूध का दूध और पानी का पानी होने तक प्रतीक्षा करें, मैंने स्वयं जांच का अनुरोध किया है। जाँच जारी है।

सुबह सात से शाम चार बजे तक ही खुलेंगी दुकाने, पढ़े पूरी खबर…

त्रिवेन्द्र सरकार ने ऑरेंज और ग्रीन जोन में आवश्यक वस्तुओं के अलावा अन्य दुकानों को खोलने की अनुमति दे दी है। लेकिन शॉपिंग कॉम्पलेक्स, रेस्टोरेंट, मॉल, सिनेमा घर, बार, होटल आदि पर लगी रोक लाॅकडाउन-4 में भी बरकरार रहेगी। जबकि अन्य दुकानों को सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक खोला जा सकेगा। जिन शहरों में अलग-अलग दिनों में अलग-अलग वस्तुओं की दुकानों को खोलने की जो रोस्टर वाली व्यवस्था बनाई गई थी, उसे समाप्त कर दिया गया है। अब पूरे प्रदेश में सभी दुकानें सभी दिन निर्धारित समय अवधि के लिए खुलेंगी।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में कोई भी जिला रेड जोन में नहीं है, जिससे भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप ऑरेंज और ग्रीन जोन में सभी दुकानों को खोला जा सकता है। अभी तक सुबह सात से शाम चार बजे तक दुकान खोलने का प्रावधान किया गया है।

-केंद्र सरकार की गाइडलाइन-
हवाई सेवाएं वर्जित।
स्कूल और कॉलेज नहीं खुलेंगे।
होटल और रेस्टोरेंट नहीं खुलेंगे, रेस्टोरेंट होम डिलीवरी के लिए किचन चला सकते हैं।
सिनेमा, शॉपिंग सेंटर, इंटरटेनमेंट पार्क, बार, ऑडिटोरियम नहीं खुल सकते।
स्पोटर्स काम्पेक्स और स्टेडियम में दर्शक नहीं जा सकते, प्रशिक्षण और मैच हो सकेंगे।
धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम वर्जित।
धार्मिक स्थानों पर पूजा हो सकती है, लेकिन श्रद्धालु नहीं जा सकते।
कंटेनमेंट जोन में पूर्ण लॉकडाउन, बफर जोन में राहत।
मुख्य सचिव ने बताया कि इसमें बदलाव नहीं किया गया है। सरकारी कार्यालय खोलने और स्टाफ की उपस्थिति को लेकर लॉकडाउन तीन में बनाई व्यवस्था ही जारी रहेगी। सुबह दस से शाम चार बजे तक कार्यालय खुलेंगे। शाम चार से अगली सुबह सात बजे तक लॉकडाउन की स्थिति रहेगी। वहीं, वाहनों को ऑड ईवन के फॉर्मूले पर चलाने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिये गये है।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण को लेकर तय होने वाले कंटेनमेंट जोन में पूरी तरह से लॉकडाउन रहेगा। इसके साथ एक क्षेत्र को बफर जोन चिह्नित करने का प्रावधान भी है। बफर जोन में निगरानी रहेगी, लेकिन कंटेनमेंट जोन की तरह पाबंदी नहीं होगी। प्रदेश में अभी सात कंटेनमेंट जोन हैं। देहरादून जिले में चार, हरिद्वार में दो और ऊधमसिंहनगर जिले में एक है।