हरियाणा पर टिकी सबकी नजर, महाराष्ट्र में भाजपा की सरकार

लोकसभा चुनाव में जबर्दस्त जीत के बाद अब हरियाणा और महाराष्ट्र में जनता ने फिर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर मुहर लगा दी है। गुरुवार को आए विधानसभा चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए अनुमानों से कमतर रहे, लेकिन पार्टी दोनों राज्यों में सरकार बनाने जा रही है। हरियाणा में 90 में से 40 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी भाजपा को छह निर्दलीयों का समर्थन मिला है। महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना गठबंधन को 288 में से 161 सीटों पर जीत के साथ स्पष्ट बहुमत मिला है। भाजपा नेतृत्व ने भी दोनों राज्यों में अपने मुख्यमंत्रियों पर भरोसा जताया है। जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर और महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस को फिर कमान सौंपने की पुष्टि की है। मनोहर लाल शुक्रवार को राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।
हरियाणा में नतीजे काफी चैंकाने वाले रहे। यहां सबसे ज्यादा चैंकाया सालभर पहले अस्तित्व में आई जननायक जनता पार्टी (जजपा) ने। सालभर पहले ही पारिवारिक विवाद के बाद इनेलो से अलग होकर दुष्यंत चैटाला ने पार्टी गठित की थी। जजपा ने पहली ही बार में 10 सीटों पर जीत हासिल कर ली। नतीजों के बाद जजपा को किंगमेकर की भूमिका में देखा जा रहा था। हालांकि भाजपा को सात में से छह निर्दलीयों का समर्थन मिलने के बाद जजपा का चमत्कारिक प्रदर्शन भी उसे कुछ खास फायदा दिलाता नहीं दिख रहा है।
हरियाणा के नतीजे कांग्रेस के लिए भी अच्छे रहे। कांग्रेस 15 से 31 सीट पर पहुंच गई। चुनाव के ठीक पहले पार्टी में उभरी कलह और उठापटक के बावजूद ये नतीजे कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने वाले हैं। सीटों के लिहाज से नतीजे भाजपा के लिए थोड़ा निराशाजनक रहे। पिछले साल 47 सीटें जीतने वाली भाजपा 40 सीटों पर आ गई। हरियाणा के नतीजों में भाजपा के लिए सोचने वाली बात यह है कि सात निर्दलीयों में से छह भाजपा से जुड़े रहे हैं। भाजपा के लिए बड़ा झटका यह भी है कि राज्य सरकार में कैबिनेट का हिस्सा रहे आठ मंत्री चुनाव हार गए हैं।
महाराष्ट्र के नतीजे बहुत ज्यादा उलटफेर वाले तो नहीं कहे जा सकते हैं, लेकिन उम्मीदों से दूर जरूर हैं। विश्लेषकों का मानना है कि देश में फैला आर्थिक सुस्ती का साया महाराष्ट्र में भाजपा के नतीजों पर दिखा है। 2014 में अकेले लड़कर 288 में 122 सीटें जीतने वाली भाजपा के खाते में इस बार नतीजों और रुझानों के आधार पर 105 सीटें आती दिख रही हैं। शिवसेना भी 63 से 56 पर आ गई है। सबसे ज्यादा फायदे में शरद पवार की राकांपा रही है। राकांपा का आंकड़ा इस बार 41 से 54 पर पहुंच गया है। सोनिया गांधी के हाथ में दोबारा कमान आने के बाद कांग्रेस भी बढ़त में दिखी। पार्टी को 2014 के 42 के मुकाबले 44 सीट मिली है।
नतीजों से सरकार गठन के गणित पर ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। हालांकि उपमुख्यमंत्री शिवसेना को मिलेगा या नहीं, इस मुद्दे पर न तो देवेंद्र फड़नवीस ने मुंह खोला है, न ही उद्धव ठाकरे ने। फिलहाल उद्धव ठाकरे यह कहकर ताना मारने से नहीं चूके कि जिनके नेत्र बंद थे, उन्हें खोलकर जनता ने अंजन लगा दिया है। उम्मीद है कि अब पीछे की गई गलतियां दोहराई नहीं जाएंगी।

विकास कार्यों के लिए धन की कोई कमी नहीः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अल्मोड़ा में 327 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान और शोध संस्थान (मेडिकल कालेज) का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने मेडिकल कालेज के अवशेष निर्माण कार्यों को यथाशीध्र पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि एमसीआई की टीम द्वारा मेडिकल कालेज के निरीक्षण से पूर्व जो अवशेष कार्य एवं उपकरण आदि क्रय किये जाने हैं उन्हें यथाशीघ्र क्रय करना सुनिश्चित किया जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि शीघ्र ही मेडिकल कालेज में फैकल्टी की व्यवस्था सुनिश्चित की जायेगी। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान मेडिकल कालेज के फिजियोलॉजी कक्ष, एनाटोमी कक्ष, सर्वर कक्ष, हिस्ट्री कक्ष सहित अन्य कक्षों का निरीक्षण कर इससे जुड़े अधिकारियां एवं कार्यदायी संस्थओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।
चिकित्सा शिक्षा निदेशक डाॅ. वाईके पंत ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि इस परियोजना की कुल लागत 327 करोड़ रू0 स्वीकृत है जिसमे प्रथम एलओपी के निर्माण हेतु स्वीकृत धनराशि कुल 216.77 करोड़ रू0 है। वर्तमान तक कार्यदायी संस्था को 215 करोड़ रू0 अवमुक्त किये जा चुके हैं तथा निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनपद अल्मोड़ा के लिये कुल 9902.52 लाख रू0 की विकास योजनाओं का शिलान्यास एवं लोकापर्ण भी किया। जिसमें 6181.73 लाख रू0 की विकास योजनाओं का लोकार्पण तथा 3720.79 लाख रू0 की विकास योजनाओं का शिलान्यास शामिल है। इन योजनाओं में प्रमुख रूप से शिक्षा, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, चिकित्सा, रेशम विभाग की योजनायें सम्मलित हैं।
इस अवसर पर प्रभारी मंत्री डाॅ. हरक सिहं रावत, सांसद अजय टम्टा, विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चैहान, कापरैटिव बैंक के अध्यक्ष ललित सिंह लटवाल, आयुक्त कुमाऊ मण्डल राजीव रौतेला, डीआईजी जगत राम जोशी आदि उपस्थित थे।

23 विकास योजनाओं की मुख्यमंत्री ने की घोषणा
वहीं, अल्मोड़ा में सम्पन्न हुई कैबिनेट बैठक के उपरान्त मुख्यमंत्री ने मीडिया को सम्बोधित करते हुए अल्मोड़ा जनपद के विकास से सम्बन्धित 23 विकास योजनाओं की घोषणा की। इन सभी योजनाओं का निर्माण मुख्यमंत्री घोषणा के तहत किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की, कि पवित्र जागेश्वर धाम में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान्ट (एसटीपी) का निर्माण किया जायेगा।
मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं में अल्मोडा पेयजल योजना के भाग-1 का सुदृृढीकरण कार्य, कटारमल पम्पिंग पेयजल योजना का निर्माण किया जायेगा, अल्मोड़ा सीवरेज जोन-3 योजना का निर्माण का निर्माण कार्य किया जायेगा, अल्मोड़ा शहर मंे बाजार का सौन्दर्यीकरण किया जायेगा, होटल मैनेजमैन्ट संस्थान अल्मोड़ा का सुदृृढीकरण एवं आधुनीकीकरण किया जायेगा, सिमतौला ईकों पार्क में ईकों टूरिज्म की गीत विधियों को बढ़ावा दिया जायेगा, जनपद अल्मोड़ा के अन्तर्गत डयोलीडाना में बैडमिन्टन हाॅल का निर्माण किया जायेगा, स्पोर्टस स्टेडियम में अवस्थापना सुविधाओं को सुदृृढ किया जायेगा, जनपद के 100 विद्यालयांे में ई लर्निंग सुविधा हेतु रू0 1.00 लाख प्रति विद्यालय की दर से धनराशि दी जायेगी। मुख्यमंत्री ने ताड़ीखेत में स्थापित गांधी कुटीर के जीर्णोद्वार एवं हाल का निर्माण, नगर पालिका परिषद रानीखेत चिलियानौला के कार्यालय भवन की स्थापना, ताड़ीखेत में मिनी स्टेडियम की स्थापना, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लमगड़ा में भवन का निर्माण, कसारदेवी में स्प्रिीचुअल इकोनाॅमी जोन बनाये जाने, 200 आंगनवाडी केन्द्रों की स्थापना, शीतलाखेत महाविद्यालय एवं लमगड़ा महाविद्यालय के भवनों का निर्माण कार्य किये जाने की घोषणा शामिल है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री द्वारा जनपद चम्पावत के विकास से सम्बन्धित 51, पिथौरागढ़ के लिये 22, बागेश्वर के लिये 7, नैनीताल के लिये 25 जबकि उधम सिंह नगर से सम्बन्धित 9 घोषणाये की गई।

कौशिक समिति करेगी आरक्षण रोस्टर नीति का परीक्षण

सरकारी सेवा में सीधी भर्ती के पदों के लिए लागू आरक्षण रोस्टर नीति के परीक्षण के लिए अब मंत्रिमंडलीय समिति का गठन कर दिया गया है। शहरी एवं आवास मंत्री मदन कौशिक इस समिति के अध्यक्ष होंगे। समिति में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल और महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्य को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी ने समिति के गठन का शासनादेश जारी किया। समिति जल्द अपनी रिपोर्ट उपलब्ध कराएगी।
शासन ने गत 11 सितंबर को राजकीय सेवाओं, निगमों, सार्वजनिक उद्यमों व शिक्षण संस्थानों में सीधी भर्ती के पदों पर विभिन्न श्रेणियों को प्राप्त आरक्षण व्यवस्था क्रियान्वयन को नई रोस्टर नीति जारी की थी। पुराने रोस्टर में पहला पद अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारी के लिए आरक्षित था, जिसे नए रोस्टर में हटाकर छठे स्थान पर कर दिया है। इस पर कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य को भी एतराज था और उन्होंने मुख्यमंत्री से रोस्टर का परीक्षण कराने का अनुरोध किया था। आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों ने भी मुख्यमंत्री और राज्यपाल से रोस्टर का परीक्षण कराने और पुराना रोस्टर लागू करने की मांग उठाई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने शासन को रोस्टर का परीक्षण कराने के लिए समिति के गठन के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के क्रम में कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने समिति का गठन कर दिया है।
प्रदेश में सीधी भर्ती के पदों पर निर्धारित आरक्षण रोस्टर नीति के परीक्षण को लेकर गठित मंत्रिमंडलीय समिति पर उत्तराखंड एससी एसटी इम्पलाइज फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष करम राम ने सवाल उठाए है। उनके मुताबिक, फेडरेशन का मानना है कि समिति के तीनों सदस्य नए होने चाहिए। यह सवाल भी उन्होंने उठाया कि जब नए रोस्टर पर प्रदेश सरकार को संदेह है और उसका परीक्षण किया जाना है तो पुराना रोस्टर क्यों नहीं लागू किया गया? उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से पुराना रोस्टर लागू करने की मांग की।
वहीं, उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्पलाइज एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी ने कमेटी के गठन का स्वागत किया है। साथ ही आगाह भी किया है कि नए रोस्टर में किसी भी तरह की छेड़छाड़ को सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुराने रोस्टर में 19 प्रतिशत एससी आबादी के सापेक्ष 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा था। नए रोस्टर लागू होने के बाद अब एससी का आरक्षण 19 प्रतिशत है, जो सही है।

25 जुलाई 2019 से पहले तीन बच्चे वाले प्रत्याशी भी लड़ पाएंगे पंचायत चुनाव

देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को बड़ा झटका देते हुए ग्राम पंचायत चुनाव में तीन बच्चों वाले मामले में प्रत्याशियों के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह का समय जवाब देने का दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद ग्राम प्रधान, उप प्रधान व ग्राम पंचायत सदस्य के पद पर 25 जुलाई 2019 से पहले तीन बच्चे वाले प्रत्याशियों का चुनाव लडने का रास्ता साफ हो गया है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में 25 जुलाई 2019 को कट ऑफ डेट माना था। इस तिथि के बाद दो से अधिक बच्चे वाले प्रत्याशी अयोग्य माने जाएंगे।

पंचायत जनाधिकार मंच के प्रदेश संयोजक व पूर्व ब्लॉक प्रमुख जोत सिंह बिष्टड्ढ, कोटाबाग के मनोहर लाल, पिंकी देवी समेत 21 लोगों ने हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिका दायर कर सरकार के पंचायत राज एक्ट में किए संशोधन को चुनौती दी थी। जिसमें दो से अधिक बच्चे वाले प्रत्याशियों को पंचायत चुनाव लडने के लिए अयोग्य करार दिया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस संशोधित एक्ट को लागू करने के लिए ग्रेस पीरियड नहीं दिया गया। संशोधन को बैक डेट से लागू करना विधि सम्मत नहीं है। पिछले दिनों मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए इस संशोधन को लागू करने की कट ऑफ डेट 25 जुलाई 2019 नियत कर दी। इस आदेश के बाद कट ऑफ डेट के पहले दो से अधिक बच्चों वाले ग्राम पंचायत प्रधान, उप प्रधान व वार्ड मेंबर के प्रत्याशी चुनाव लडने के योग्य हो गए। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई। सोमवार को जस्टिस एनवी रमन्ना की अध्यक्षता वाली संयुक्त पीठ ने राज्य सरकार के हाई कोर्ट के आदेश में स्थगनादेश की अपील को नहीं माना। साथ ही याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी किया। राज्य सरकार के एसएलपी दाखिल करने की भनक लगने के बाद पंचायत जनाधिकार मंच द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की गई थी।

आरोपी चाहे धरती पर हो या आकाश में, हर हाल में गिरफ्तार करें पुलिसः टीएसआर

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गृह, आबकारी व पुलिस विभाग के अधिकारियों को रविवार को तलब किया। उन्होंने अधिकारियों से पथरिया पीर, देहरादून की घटना व इसके बाद की गई कार्यवाही की विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरे मामले में जिस व्यक्ति का मुख्य आदमी का नाम सामने आ रहा है, उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए। वह आदमी चाहे धरती पे हो, आसमान में हो या पाताल में हो, हर हाल में पकङा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी के संरक्षण की बात पाई जाती है, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे घटनाक्रम की गहराई से जांच की जाए। उन्होंने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि शहर के बीचों बीच कुछ चल रहा हो और हमारी एजेंसियों को पता न चले, कैसे हो सकता है। घटना के हर पहलू की बारीकी से जांच की जाए। इसमें जो भी दोषी या जिम्मेदार पाया जाएगा उस पर सख्त कार्यवाही की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में पुलिस व आबकारी विभाग अवैध शराब की छापेमारी के अभियान चलाए। इसमें जिन लोगों की भी मिलीभगत हो, उन्हें पकड़ा जाए और सख्त से सख्त एक्शन लिया जाए। मुख्यमंत्री ने महकमें के अधिकारियों से कहा कि अगर अवैध शराब का व्यापार करने वालों के खिलाफ कार्यवाही को और सख्त करने के लिए आबकारी एक्ट में किसी प्रकार के संशोधन की जरूरत हो तो उसका प्रस्ताव तैयार करें। अवैध शराब या नशे के व्यापार को रोकने में आम जनता का भी सहयोग लिया जाए। कहीं से भी इस प्रकार की कोई शिकायत आती है तो उसे पूरी गम्भीरता से लिया जाए।
बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजी लाॅ एंड आर्डर अशोक कुमार, प्रमुख सचिव आनंदबर्द्धन, सचिव नितेश झा, आईजी गढ़वाल रेंज अजय रौतेला, आयुक्त आबकारी सुशील कुमार, जिलाधिकारी देहरादून सी.रविशंकर, एसएसपी अरूण मोहन जोशी मौजूद थे।

पंचायत प्रतिनिधि कह रहे बहुत नाइंसाफी हुई, आखिर जानिए कैसे?

पंचायत राज संशोधन अधिनियम को लेकर हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है जिस पर सोमवार को सुनवाई होनी है। गौरतलब है कि गुरुवार को हाई कोर्ट ने 25 जुलाई 2019 से पहले दो बच्चों से अधिक वाले ग्राम पंचायत प्रत्याशियों को चुनाव लडने के योग्य करार दिया था। इस फैसले को सरकार असहज होना पड़ा और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने का निर्णय किया।
हाई कोर्ट ने दो से अधिक बच्चों वाले प्रत्याशियों के मामले में पारित आदेश पर साफ किया है कि कोर्ट के समक्ष जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत का मामला आया ही नहीं। सिर्फ ग्राम पंचायतों का ही मामला आया। अदालत ने 25 जुलाई 2019 के बाद वाले तीन बच्चों वाले प्रत्याशियों को अयोग्य घोषित किया है जबकि इस तिथि से पहले वालों को योग्य। पंचायती राज संशोधित नियमावली के नियम-8-1(आर) में ग्राम प्रधान, उप प्रधान व वार्ड मेंबर से संबंधित, नियम-53-1(आर) में जिला पंचायत तथा नियम 91-1 में क्षेत्र पंचायत सदस्यों के चुनाव लडने से संबंधित प्रावधान है। कोर्ट ने ग्राम पंचायत से संबंधित संशोधित प्रावधान पर रोक लगाई है, अन्य में हस्तक्षेप नहीं किया है। उधर पूर्व ब्लॉक प्रमुख व कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट की ओर से बीडीसी व जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए भी इस आदेश को लागू करने की मांग को लेकर याचिका दायर करने की तैयारी की जा चुकी है।

ट्रेंचिंग ग्राउंड हटाने की मांग को लेकर गंगा में लगाई छलांग, जल पुलिस ने बचाया

जागृति एक प्रयास संस्था के पांच सदस्यों को पुलिस ने आज त्रिवेणी घाट से गिरफ्तार कर लिया। यह सभी ट्रेंचिंग ग्राउंड हटाने की मांग पूरी नहीं होने पर जल समाधि लेने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान एक सदस्य ने पुलिस से बचकर गंगा में छलांग भ लगाई लेकिन जल पुलिस के जवानों ने उसे सकुशल बाहर निकाल दिया।
हीरालाल मार्ग पर गंगा से सौ मीटर की परिधि में नगर निगम का कूड़ा डंप किया जाता है। करीब चार दशक से पूर्व में पालिका की ओर से इस ग्राउंड में कूड़ा डंप किया जा रहा है। आबादी के बीच से ट्रेंचिंग ग्राउंड को हटाने की मांग को लेकर जागृति एक प्रयास संस्था ने 59 दिन पूर्व से परशुराम चैक पर धरना दे रही है। वहीं, 26 दिन से संस्था के सदस्यों के द्वारा क्रमिक अनशन किया जा रहा है। इस ओर आंदोलनकारियों ने बुधवार को कूड़ा निस्तारित ना होने पर त्रिवेणी घाट में जल समाधि लेने की घोषणा भी की थी। बुधवार की सुबह से ही कोतवाली की ओर से त्रिवेणी घाट में पुलिस तैनात कर दी गई थी। अपने तय कार्यक्रम के अनुसार, सुबह करीब 11ः30 बजे मायाकुंड की ओर से आंदोलनकारी त्रिवेणी घाट पहुंचे और धरना देकर बैठ गए। पुलिस ने इन लोगों के चारों ओर घेरा बना लिया। इस बीच कुछ लोग जब गंगा की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस सतर्क हो गई। गंगा की धारा की ओर तेजी से जा रहे आंदोलनकारियों को पुलिस ने रोक लिया। यहां दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। किसी तरह से पुलिस ने आंदोलनकारियों को काबू में किया। इस बीच एक आंदोलनकारी सुरेंद्र सिंह नेगी ने गंगा में छलांग लगा दी।

वहां पहले से अलर्ट जल पुलिस के जवानों ने भी गंगा में छलांग लगा दी। करीब 40 मीटर की दूरी तक बह गए युवक को जल पुलिस के जवानों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। त्रिवेणी घाट पर ही गुस्साए आंदोलनकारियों ने स्थानीय विधायक और पूर्व पालिकाध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी भी की। उन्होंने शासन और प्रशासन पर इस बड़ी समस्या और आंदोलन की अनदेखी का आरोप लगाया। आंदोलनकारियों का कहना था कि यदि हमारी मांग की सुनवाई हो जाती तो हमें जल समाधि जैसी घोषणा नहीं करनी पड़ती। मौके पर मौजूद वरिष्ठ उप निरीक्षक मनोज नैनवाल के साथ पुलिस की टीम ने मौके से पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक रितेश शाह ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में अरविंद हटवाल पुत्र अनुसूया प्रसाद हटवाल निवासी गंगा नगर ऋषिकेश, रजत प्रताप सिंह पुत्र अशोक कुमार निवासी लक्कड़ घाट रोड टीचर कॉलोनी श्यामपुर बाईपास ऋषिकेश, रामकुमार संगर पुत्र स्व. सुरेश चंद निवासी आवास विकास कॉलोनी ऋषिकेश,विकास अग्रवाल पुत्र अशोक कुमार अग्रवाल निवासी गली नंबर 14 आशुतोष नगर ऋषिकेश, सुरेंद्र नेगी पुत्र पुराण सिंह नेगी निवासी शिवाजी नगर आइडीपीएल ऋषिकेश शामिल है।

आरक्षण प्रकिया को चुनौती देने वाली याचिका हाइकोर्ट ने खारिज की

हाई कोर्ट ने पंचायत चुनाव में आरक्षण निर्धारण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को आज खारिज कर दिया। कोर्ट ने सरकार द्वारा अपनाई गई आरक्षण प्रक्रिया को सही ठहराया है और कहा है कि चुनाव अधिसूचना जारी होने के कारण याचिका निरस्त की जा सकती है। हाइ कोर्ट के आदेश के बाद पंचायतों में आरक्षण बदलाव की संभावनाओं और अटकलों पर पूरी तरह से विराम लग गया है। इससे अब तक पसोपेश में चल रही राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग दोनों को ही बड़ी राहत मिली है।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने किच्छा ऊधमसिंह नगर निवासी लाल बहादुर कुशवाहा की जनहित याचिका पर सुनवाई की। जिसमें सरकार की ओर से पंचायत आरक्षण की 13 अगस्त और 22 अगस्त की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा था कि सरकार द्वारा आरक्षण व्यवस्था को दो भागों में विभाजित किया है। एक जिन ग्राम पंचायतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, उसमें आरक्षण चैथे चक्र में लागू करने की व्यवस्था है, दूसरी वह ग्राम पंचायतें जिनमें नए वार्ड बने हैं या 50 फीसद नए सदस्य जुड़े हैं। या कोई नई ग्राम पंचायत बनी है, उसमें प्रथम चक्र में आरक्षण लागू करने की व्यवस्था की गई है। याचिकाकर्ता का कहना था कि यह आरक्षण व्यवस्था उत्तर प्रदेश पंचायती राज व्यवस्था-1994 के प्रावधानों का उल्लंघन है, लिहाजा सरकार का नोटिफिकेशन निरस्त होने योग्य है। खंडपीठ ने सरकार के द्वारा की गई आरक्षण प्रक्रिया को सही ठहराते हुए आत जनहित याचिका को खारिज कर दिया।

सतपाल और पांडेय ने क्यों की योगी सरकार की तारीफ, मानेंगे यूपी सरकार का फैसला!

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से मंत्रियों का आयकर सरकार ही भर रही थी। इस पर अब योगी सरकार ने रोक लगाई है। उत्तराखंड चूंकि पहले उत्तर प्रदेश का ही अंग था इस कारण अविभाजित उत्तर प्रदेश से चली आ रही व्यवस्था यहां भी बदस्तूर जारी है। यानी मुख्यमंत्रियों व मंत्रियों का आयकर सरकार ही भर रही है। उत्तराखंड में मंत्रियों को वेतन भत्ते मिलाकर प्रतिमाह 4.40 लाख रुपये दिए जाते हैं। इनमें से 90 हजार रुपये केवल वेतन है। शेष अन्य भत्ते हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के आयकर स्वयं भरने के निर्णय के बाद अब उत्तराखंड में भी इस दिशा में सकारात्मक पहल होती नजर आ रही है। त्रिवेंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और अरविंद पांडेय ने इसकी पैरवी की है।
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि मंत्रियों को सरकारी खजाने से नहीं, बल्कि अपना आयकर स्वयं भरना चाहिए। वह अपना आयकर स्वयं भरते हैं। वह इसका परीक्षण भी करेंगे। वहीं, कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि वह तो विधायक निधि के पक्ष में भी नहीं रहे हैं। इस कारण उनकी भावना को समझा जा सकता है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मंत्रियों को 1.64 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन भत्तों के रूप में दिए जाते हैं और उनका मूल वेतन 40 हजार रुपये हैं। इस लिहाज से उत्तराखंड के मंत्रियों का वेतन कहीं अधिक है। इसे देखते हुए प्रदेश में भी मुख्यमंत्रियों व मंत्रियों द्वारा आयकर भरने की मांग उठने लगी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी इसका परीक्षण करने की बात कर चुके हैं। अब दो मंत्रियों ने मंत्रियों के स्वयं आयकर भरने को लेकर उठ रही मांग के समर्थन में कदम आगे बढ़ाए हैं। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि वह अपना टैक्स स्वयं भरते हैं। मंत्रियों को सरकारी खजाने से नहीं बल्कि स्वयं टैक्स भरना चाहिए। बाकि वह मामले का अध्ययन करेंगे।

संजय की जगह लेंगे नए संगठन मंत्री अजय कुमार

’’मी टू’’ प्रकरण के चलते पद से हटाये गये भाजपा के उत्तराखंड प्रदेश महामंत्री (संगठन) संजय कुमार की जगह शनिवार को अजय कुमार को नियुक्त कर किया गया है। यह पद पिछले साल नवंबर से रिक्त था। अजय कुमार फिलहाल पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मेरठ मंडल) के भाजपा के महामंत्री (संगठन) पद पर कार्यरत थे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह जानकारी सोशल मीडिया के जरिये साझा करते हुए अजय कुमार को प्रदेश महामंत्री (संगठन) नियुक्त किये जाने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनायें दीं। पिछले वर्ष नवंबर में संजय कुमार को एक महिला भाजपा कार्यकर्ता द्वारा लगाये गये कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते पद से हाथ धोना पड़ा था। यह कार्यकर्ता राज्य भाजपा मुख्यालय में काम करती थी और वहीं उसके साथ कथित रूप से यौन उत्पीड़न किया गया। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद राज्य पुलिस ने संजय कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी और उनका वह मोबाइल फोन भी जब्त किया था जिसमें उन्होंने कथित तौर पर उसका वीडियो बनाया था। हांलांकि, बाद में मामला जांच से आगे नहीं बढ़ा।