खुशखबरीः सरकार ने अशासकीय स्कूलों में भर्ती प्रक्रिया शुरु की

प्रदेश के अशासकीय स्कूलों में लटकी शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भर्ती के प्रस्ताव पर शिक्षा मंत्री के अनुमोदन के बाद भर्ती का रास्ता साफ हो गया। शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को लोक सभा और इसके बाद पंचायत चुनाव की आचार संहिता के चलते पूरा नहीं किया जा सका था।
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के मुताबिक भर्ती की अधूरी प्रक्रिया को अब पूरा किया जाएगा। प्रदेश के अशासकीय स्कूलों में शिक्षकों, प्रिंसिपलों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की इसी वर्ष जनवरी और फरवरी में भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
विभिन्न जनपदों की ओर से इसके लिए नियुक्ति विज्ञप्ति निकालकर अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे गए थे। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक तीन महीने के भीतर भर्ती की प्रक्रिया पूरी होनी थी, लेकिन फरवरी 2019 में लोक सभा चुनाव और इसके बाद पंचायत चुनाव की आचार संहिता के चलते भर्ती प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जा सका। शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों एवं कर्मचारियों के विभिन्न पदों पर लटकी भर्ती को पूरा करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन से अनुमोदन मांगा गया था। शासन की ओर से प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे को भेजा गया था।
शिक्षा मंत्री के मुताबिक शुक्रवार को इस पर अनुमोदन दे दिया गया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि भर्ती केवल उन पदों पर होगी, जिन पदों पर इसकी प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन इसे पूरा नहीं किया जा सका था। वहीं, राज्य युवा कल्याण परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष रविंद्र जुगरान के नेतृत्व में अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री से मिलकर शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भर्ती चयन प्रक्रिया पूरी करने की मांग की।

कई विस अध्यक्षों ने सदस्यों के दल बदल पर जताई चिंता

सदस्यों के दल बदल पर विधानसभा अध्यक्षों के फैसले को न्यायालयों से मिल रही चुनौती से विधायिका चिंतित है। सवाल साख पर खड़ा होने लगा है, लेकिन इसका हल जल्द निकलता नहीं दिख रहा है। देहरादून में चल रहे दो दिवसीय सम्मेलन में कई पीठासीन अधिकारी इसका फैसला राजनीतिक दल पर छोड़ देने के पक्ष में नहीं दिखे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित समिति इस पर अगले वर्ष लखनऊ की बैठक में अपने सुझाव देगी।
संविधान की दसवीं अनुसूची और अध्यक्ष की भूमिका विषयक परिचर्चा में लोकसभा अध्यक्ष ने आग्रह करते हुए कहा कि दल बदल पर अध्यक्ष ऐसा निर्णायक और निष्पक्ष फैसला लें, जिस पर कोई सवाल नहीं उठे। अगर न्यायपालिका निष्पक्षता पर सवाल करने लगे, तो यह हम सब के लिए चिंता की बात है। बिहार विधानसभा के अध्यक्ष विजय चैधरी ने इस पर प्रस्ताव रखा, जिस पर व्यापक चर्चा हुई। विजय चैधरी ने कहा कि संविधान की 10 वीं अनुसूची में एक बार फिर सुधार की जरूरत है। इसमें अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अध्यक्ष को कितने दिनों में इस पर फैसला लेना है।
ऐसे में इसके दुरुपयोग के मामले सामने आते हैं। इसी तरह इसे भी स्पष्ट करने की जरूरत है कि पार्टी के व्हिप के खिलाफ पड़े मत का क्या होगा, जिसे अभी तक मान्य किया जाता है। इसे अमान्य करने से इस समस्या का समाधान हो जाएगा। वैसे, कई विधानसभा अध्यक्ष सदस्यों द्वारा इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी को समर्थन देने के नए तरीके पर चिंतित दिखे। कर्नाटक के हाल के मामले का जिक्र करते हुए राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने दल बदल का निर्णय उसी राजनीतिक दल पर डालने की पैरोकारी की, जिसके टिकट पर वह जीत कर आए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी के चिह्न, विचारधारा और घोषणापत्र पर जनप्रतिनिधियों का चुनाव होता है। मूलतः देश दल आधारित लोकतंत्र है। ऐसे में पार्टी के सुझाव पर चुनाव आयोग को इस पर फैसला लेना चाहिए। अध्यक्ष को विधायिका के सकुशल संचालन तक की ही भूमिका होनी चाहिए। वहीं दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने दल बदल को भी अपराध श्रेणी में डालने की वकालत करते हुए कहा कि ऐसे प्रविधान होने चाहिए, जिसमें पार्टी बदलने वाले को एक निश्चित अवधि तक चुनाव लडने पर पाबंदी लगा दी जाए। इसके साथ उन्होंने सभी विधानसभाओं के रूलबुक को एक समान रखने की जरूरत बताई।

गुजरात में नागरिकता संशोधन कानून लागू, मिलेगी 3500 हिन्दुओं को नगारिकता

गुजरात में आज से नागरिकता संशोधन कानून पर अमल शुरू हो जाएगा। गुजरात के गांधीधाम और कच्छ में पाकिस्तान से आए 3500 हिंदुओं को नागरिकता दी जाएगी। बताया जा रहा है कि इस दौरान केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया भी उपस्थित रहेंगे।
पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से आए ये हिंदू शरणार्थी कच्छ, मोरबी, राजकोट और बनासकांठा में रह रहे हैं। पंजीकरण करने के बाद इनके बारे में सूचना केंद्रीय गृहमंत्रालय को भेजी जाएगी।
इसके साथ ही गुजरात पहला ऐसा राज्य बन जाएगा जिसने नागरिकता संशोधन कानून के अनुसार शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करेगा। अधिकांश शरणार्थी सोढ़ा राजपूत समाज से हैं। ये सभी गुजराती भाषा बोलते हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत से प्रताड़ना के कारण ये शरणार्थी पलायन कर भारत पहुंचे हैं। इनमें से कई ऐसे भी हैं जो पिछले 15-20 सालों से भारत में रह रहे हैं।

देशभर में हाई अलर्ट जारी
देश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली समेत कई राज्यों में हाई अलर्ट जारी है। यूपी के संभल में नागरिकता कानून के विरोध के दौरान 19 दिसंबर को हुई हिंसा के मामले में समाजवादी पार्टी के नेताओं, सांसद शफीकुर्रहमान बर्क और फिरोज खान सहित 17 लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई है। अलीगढ़ में रेड अलर्ट जारी है। नागरिकता कानून का विरोध कर रहे एएमयू छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के बाद शुक्रवार की नमाज के मद्देनजर भारी सुरक्षा तैनात की गई। इसकी जानकारी अलीगढ़ के जिला मजिस्ट्रेट ने दी।

कांग्रेस कमेटी भंग होने से अब नई कमेटी का रास्ता साफ

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस ने अपनी 430 सदस्यीय कमेटी को भंग कर दिया हैं। कमेटी के भंग हो से ढाई साल से ज्यादा समय बीतने के बाद प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के सामने नई कार्यकारिणी बनाने का रास्ता साफ हो गया है। वहीं, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि जब कपड़े ही नहीं पहन पाए, तो फटेंगे कैसे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह को अपनी नई टीम के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा है। वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। इस चुनाव के दो माह बाद ही पार्टी हाईकमान ने प्रदेश नेतृत्व को बदलकर प्रीतम सिंह के हाथों में बागडोर सौंप दी। सबको साधने की कवायद में प्रीतम ने अपनी नई कार्यकारिणी के गठन को लेकर जल्दबाजी से गुरेज किया। नतीजतन पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की टीम अब तक कार्य करती रही। शुरुआती दौर में टीम किशोर का आंकड़ा 165 रहा, लेकिन बाद में यह आंकड़ा दोगुने से भी ज्यादा हो गया था।

प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। कांग्रेस हाईकमान से हरी झंडी मिलने पर मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने पुरानी प्रदेश कार्यकारिणी भंग करने की घोषणा कर दी। नई कार्यकारिणी का आकार भी जंबो रहने के संकेत हैं। सूत्रों की मानें तो 142 सदस्यीय नई कार्यकारिणी इसी हफ्ते अस्तित्व में आ जाएगी।

प्रीतम की अगुआई में नई कार्यकारिणी वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव के दौरान भी कार्य करेगी। कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष की तरह प्रदेश में भी अध्यक्ष का कार्यकाल बढ़कर अब छह वर्ष हो चुका है। प्रीतम सिंह और इंदिरा हृदयेश का आगामी शनिवार को फिर दिल्ली जाने का कार्यक्रम है। नई टीम के गठन का रास्ता साफ होने के साथ ही प्रदेश में संगठन और विधानमंडल दल के नेतृत्व में बदलाव को लेकर कयासों पर भी विराम लगने की चर्चाओं पर विराम लग सकेगा।

सीएए को लेकर राज्य पुलिस भी सतर्क, सीएम ने दिए निर्देश

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शन को देखते हुए राज्य में भी अलर्ट जारी किया गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वयं हालात की जानकारी लेने के लिए पुलिस व गृह विभाग के आला अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में अराजकता फैलाने का प्रयास करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
इस समय देश के विभिन्न शहरों में सीएए को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। कई स्थानों पर हिंसक झड़पें भी हुई हैं। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर अपने यहां कानून-व्यवस्था पर नजर रखने को कहा है। इसी कड़ी में सोमवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पुलिस व गृह विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने पुलिस व खुफिया विभाग को पूरी स्थिति पर नजर रखने के साथ ही गड़बड़ी के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कॉलेजों में शांति व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों से कहा गया है कि शांति व्यवस्था बनी रहनी चाहिए। जो अराजकता फैलाना चाहते हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा गया है। पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि प्रदेश को अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की भी अपील की। बैठक में महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी और सचिव गृह नितेश झा भी मौजूद थे।
वहीं, मानव संसाधन विकास मंत्री व सांसद हरिद्वार डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट कर सभी विद्यार्थियों से ङ्क्षहसा से दूर रहने और अपने परिसर में शांति बनाए रखने के अपील की है। इसके साथ ही अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति व भाईचारे को आगे बढ़ाने को कहा है। उन्होंने लिखा है कि कोई भी ऐसा कार्य न करें जो राष्ट्र हित के विरुद्ध हो।

श्राइन बोर्ड के गठन से नाराज लेकर तीर्थ पुरोहितों ने आंदोलन शुरु किया

चार धाम सहित 51 मंदिरों को श्राइन बोर्ड के अधीन करने संबंधी सरकार के निर्णय का विरोध अब धीरे-धीरे बड़ा आकार लेने लगा है। गंगोत्री के तीर्थ पुरोहितों ने श्राइन बोर्ड की आड़ में धामों औरं मंदिरों के अधिग्रहण की साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने इस निर्णय का विरोध करते हुए कलक्ट्रेट परिसर में धरना आंदोलन शुरू कर दिया है। साथ ही उन्होंने श्राइन बोर्ड का प्रस्ताव निरस्त नहीं करने पर आगामी यात्रा सीजन में कपाटोद्धाटन के दिन शीतकालीन प्रवास स्थलों से देव डोलियों को धामों तक नहीं ले जाने का भी एलान किया है।
शनिवार को गंगोत्री के तीर्थ पुरोहित जिला मुख्यालय पर एकत्र हुए और उन्होंने कलक्ट्रेट में क्रमिक धरना आंदोलन शुरू कर दिया। धरना स्थल पर हुई सभा को संबोधित करते हुए तीर्थ पुरोहितों ने सरकार पर श्राइन बोर्ड की आड़ में हिंदुओं की आस्था के केंद्रों का अधिग्रहण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार यात्रा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए श्राइन बोर्ड के गठन की बात कह रही है, जबकि यह कार्य चार धाम विकास परिषद के माध्यम से भी किया जा सकता है। लेकिन एक दशक से भी ज्यादा समय पहले गठित परिषद को अभी तक अधिकार संपन्न नहीं बनाया गया।
तीर्थ पुरोहितों ंने कहा कि मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि श्राइन बोर्ड एक्ट से तीर्थ पुरोहितों के हक हकूक प्रभावित नहीं होंगे, जबकि हकीकत यह है कि तीर्थ पुरोहितों को श्राइन बोर्ड के बारे बताया ही नहीं जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर तो सरकार पहाड़ से पलायन रोकने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर श्राइन बोर्ड का गठन कर तीर्थ पुरोहितों एवं पुजारियों को भी पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा है।
तीर्थ पुरोहितों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र श्राइन बोर्ड का प्रस्ताव वापस नहीं लिया, तो अगले यात्रा सीजन में वे शीतकालीन प्रवास स्थलों से देव डोलियों को धामों तक नहीं ले जाएंगे। श्राइन बोर्ड के विरोध में 18 दिसंबर को जिला मुख्यालय पर महारैली का आयोजन किया जाएगा।
गंगोत्री के पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण, पालिकाध्यक्ष रमेश सेमवाल, पूर्व राज्य मंत्री घनानंद नौटियाल, व्यापार मंडल महामंत्री अंकित उप्पल आदि लोगों ने धरना स्थल पर पहुंचकर तीर्थ पुरोहितों की मांग को जायज बताते हुए समर्थन दिया। प्रदर्शनकारियों में मंदिर समिति के सचिव दीपक सेमवाल, अरुण सेमवाल, कृपाराम सेमवाल, राजेश सेमवाल, हरीश सेमवाल, प्रकाश सेमवाल, धर्मानंद सेमवाल, रमेश सेमवाल, गणेश सेमवाल, पवन सेमवाल, कमलनयन, राकेश सेमवाल सहित कई तीर्थ पुरोहित मौजूद थे।

3267 मतों के अंतर से भाजपा की चंद्रा पंत ने कांग्रेस की अंजू लुंठी को किया पराजित

पिथौरागढ़ विधानसभा सीट पर पूर्व वित्त मंत्री स्व. प्रकाश पंत की पत्नी चंद्रा पंत ने विजय हासिल की है। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी अंजू लुंठी को 3267 मतों से पराजित किया है। जीत के बाद भावुक होते हुए चंद्रा पंत ने कहा कि वह अपने पति के सपनों को आगे बढ़ाएंगी। पिथौरागढ़ के लिए स्व. पंत ने जो सपने देखे थे। उसे वह पूरा करने की कोशिश करेंगी।

चंद्रा पंत को 26086 और अंजू लुंठी को 22819 मत मिले। तीसरे प्रत्याशी समाजवादी पार्टी के मनोज कुमार भट्ट को मात्र 835 मत मिले। 11 राउंड में हुई मतगणना में कांग्रेस को 11 राउंड में से केवल एक राउंड में बढ़त मिली। जीत के बाद नव निर्वाचित विधायक चंद्रा पंत ने नगर में जुलूस निकालकर लोगों का आभार जताया।

पूर्व वित्त मंत्री स्व. प्रकाश पंत की असामयिक मौत के बाद इस सीट पर उपचुनाव के तहत गत 25 नवंबर को मतदान हुआ था। बृहस्पतिवार को मतगणना के बाद इस सीट का परिणाम घोषित किया गया। इससे पहले कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच महाविद्यालय स्थित मतगणना केंद्र पर सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई।

पहले राउंड में भाजपा की चंद्रा पंत को को 88 मतों की बढ़त मिली। दूसरे राउंड में दोनों प्रत्याशियों को बराबर 2317-2317 मत मिले। तीसरे राउंड में भाजपा 367, चौथे राउंड में 278, पांचवें में 464 और छठे राउंड 249 मतों से आगे रही।

सातवें राउंड में कांग्रेस 152 मतों से आगे चली गई। आठवें राउंड में भाजपा 363, नौवें में 701, दसवें में 765 और 11वें राउंड में पांच मतों से आगे रही। भाजपा को पोस्टल बैलेट से 255, कांग्रेस को 116, सपा को नौ मत मिले। निर्वाचन अधिकारी तुषार सैनी ने भाजपा की विजयी प्रत्याशी चंद्रा पंत को प्रमाणपत्र प्रदान किया।

उम्मीदवार मिले वोट
भाजपा प्रत्याशी चंद्रा पंत 26086
कांग्रेस प्रत्याशी अंजू लुंठी 22819
समाजवादी पार्टी प्रत्याशी मनोज भट्ट 835
नोटा 844

अजित पवार की गुगली से भाजपा चारों खाने चित्त

महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व वाली चार दिन पुरानी भाजपा सरकार का भविष्य मंगलवार को यहां के ट्राइडेंट होटल में हुई एक मुलाकात में तय हो गया। सुबह यह मुलाकात एनसीपी प्रमुख शरद पवार और उनके भतीजे अजीत पवार के बीच हुई। इसी मुलाकात के कुछ ही देर बाद अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। फिर कुछ वक्त बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने भी अपने त्यागपत्र का एलान कर दिया। ट्राइडेंट वही होटल है, जो ग्यारह साल पहले आतंकी हमले का निशाना बना था।
सूत्रों का कहना है कि मंगलवार की सुबह अजित पवार बतौर उपमुख्यमंत्री अपनी कार से 26-11 हमले की एक स्मृति सभा में श्रद्धांजलि देने जा रहे थे, लेकिन बीच रास्ते में अचानक उन्होंने अपनी कार ट्राइडेंट के लिए मोड़ ली। इसी होटल में सीनियर और जूनियर पवार की बैठक में राकांपा सांसद सुप्रिया सुले, राकांपा विधायक दल के नेता जयंत पाटिल और प्रफुल्ल पटेल भी मौजूद थे। राकांपा के सभी वरिष्ठ नेताओं ने अजीत को इस बात का भरोसा दिलाया कि अगर वह भाजपा का साथ छोड़कर पार्टी में वापस आते हैं तो उन्हें पहले की तरह ही प्रतिष्ठा मिलेगी। समझा जाता है कि शरद पवार ने अपने भतीजे अजित से कहा कि वह या तो अपने पद से इस्तीफा दे दें या फिर बुधवार को होने वाले शक्ति परीक्षण से किनारा कर लें।
सूत्रों का यह भी कहना है कि सीनियर पवार ने अपने भतीजे को मनाने के लिए पिछले तीन दिनों में कम से कम पांच दफा अपने दूत भेजे। वह अच्छी तरह से जानते थे कि उनके दबाव के आगे अजीत पवार झुक जाएंगे। शनिवार को जिस दिन फडणवीस और अजीत ने शपथ ली थी, शरद पवार ने सबसे पहले हसन मुशरिफ को भतीजे से मिलने के लिए भेजा था। फिर बैठक के लिए जयंत पाटिल और सुनील तटकरे को भेजा गया।

काम न आया सीएम का ओजस्वी भाषण, रूड़की निगम में मेयर सीट पर निर्दलीय गौरव

रुड़की नगर निगम के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में भाजपा से बगावत कर मेयर पद पर मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशी गौरव गोयल निर्वाचित हुए। गौरव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के प्रत्याशी रिशु राणा को 3451 मत से हराया है। जबकि, भाजपा प्रत्याशी मयंक गुप्ता 19142 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रहे। पूर्व सांसद एवं बसपा प्रत्याशी राजेंद्र बाडी समेत सात प्रत्याशी जमानत नहीं बचा पाए। बाडी को 4575 मतों पर संतोष करना पड़ा। पार्षदी में भी निर्दलीयों का जलवा रहा। 40 सदस्यीय बोर्ड में 19 पार्षद निर्दलीय जीतकर आए हैं। भाजपा की झोली में 18 पार्षद आए हैं। जबकि कांग्रेस दो और बसपा ने एक पार्षद पद जीतकर लाज बचाई।

रुड़की नगर निगम के चुनाव में मेयर और पार्षद पदों के लिए 22 नवंबर को वोट डाले गए थे। कांग्रेस, भाजपा एवं बसपा समेत 10 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। इनमें से केवल तीन ही जमानत बचा पाए। रविवार को सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई, जो रात सवा नौ बजे तक चली। मतगणना चार चरणों में पूरी हुई। भाजपा से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशी गौरव गोयल ने पहले चक्र में 8342 वोट लेकर बढ़त बना ली थी।

इस चक्र में भाजपा उम्मीदवार मयंक गुप्ता को 6647 और कांग्रेस के रिशु राणा 5110 वोट मिले। इसके बाद के तीनों चक्रों में गौरव गोयल ने अपनी बढ़त बरकरार रखी। उन्होंने कुल 29080 वोट हासिल कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी रिशु राणा को 3451 वोट से हराया। रिशु राणा को 25629 मत मिले। भाजपा के मयंक गुप्ता को 19142 मत लेकर तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा।

एनएच-74 मामले में ईडी की कार्रवाई से हड़कंप

रुद्रपुर-बाजपुर-सितारगंज राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-74) के चैड़ीकरण कार्य में जमीन अधिग्रहण में किए गए खेल से सरकार को 215.11 करोड़ रुपये की चपत लगाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21.96 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर दी है। इस कार्रवाई में ऊधमसिंह नगर के तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलओ) व वर्तमान में रुद्रप्रयाग के उपजिलाधिकारी डीपी सिंह समेत 23 लोगों की संपत्ति अटैच की गई है।
संपत्ति अटैचमेंट की यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत ईडी के उपनिदेशक (उत्तराखंड) रवींद्र जोशी के नेतृत्व में की गई। कुल 21.96 करोड़ रुपये की संपत्ति में 36 अचल संपत्तियां (फ्लैट, कृषि, औद्योगिक, वाणिज्यिक भूखंड) व चल संपत्ति में 11 बैंक खातेध्म्यूचुअल फंड के खाते शामिल हैं। यह संपत्तियां देहरादून, उधमसिंह नगर व उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में हैं। जिनमें उप जिलाधिकारी डीपी सिंह का भूखंड भी शामिल है। अटैच की गई संपत्ति से संबंधित 23 लोगों में से चार दलाल व शेष ऊधमसिंह नगर के कृषक हैं। इन सभी की संपत्ति ऊधमसिंह नगर में है। बताया जा रहा है कि जांच अभी जारी है और ईडी के राडार पर अभी कई और लोग हैं। जल्द इनकी भी चल-अचल संपत्ति अटैच की जाएगी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तत्कालीन एसएलओ व रुद्रप्रयाग के एसडीएम (उपजिलाधिकारी) की जो संपत्ति अटैच की है, उसमें राजपुर रोड पर एक बेहतरीन फ्लैट भी है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के रामपुर में चार अलग-अलग जगह खरीदे गए चार भूखंड को (2.25 हेक्टेयर) को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग में अटैच किया गया। ईडी सूत्रों ने बताया कि जमीन अधिग्रहण में फर्जीवाड़ा कर भू-स्वामियों को जो अतिरिक्त मुआवजा बांटा गया, उससे राजस्व व अन्य अधिकारियों को मोटा कमीशन दिया गया।
इसके अलावा किसानों ने अतिरिक्त राशि का प्रयोग अचल संपत्ति खरीदने में किया। बड़ी राशि बैंकों में जमा कराई गई और कुछ ने म्यूचुअल फंड में भी निवेश किया। ईडी ने घपले के बाद अर्जित की गई संपत्ति का आकलन उनके आयकर रिटर्न व बैंक स्टेटमेंट से किया। स्पष्ट हो गया कि वास्तविक मुआवजे के अतिरिक्त जो रकम जमा की गई है या संपत्ति खरीदी गई है, उसका माध्यम ब्लैक मनी है। ऐसी संपत्ति की पूरी सूची तैयार करने के बाद ईडी ने सभी को अटैच कर दिया। अब आरोपित इन संपत्ति की किसी भी तरह की खरीद-फरोख्त नहीं कर पाएंगे।