मुख्यमंत्री ने की मांग, मिड-डे-मील में परम्परागत अनाज शामिल होने से मिलेगा स्वरोजगार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में प्रतिभाग किया। हिमालयी स्टेट रीजनल काउंसिल, केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना, चारधाम महामार्ग परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना व नमामि गंगे परियोजना के लिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा है कि उत्तराखण्ड को अपनी पर्यावरणीय सेवाओं के लिए प्रोत्साहन के रूप में वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए। मिड-डे मील में मंडुवा, झंगौरा भी शामिल किए जाएं। उत्तराखण्ड के सीमांत क्षेत्रों में रोड़ कनेक्टिविटी के साथ एयर व रेल कनेक्टिविटी भी विकसित की जाएं।

उत्तराखण्ड को मिले ईको-सिस्टम सर्विसेज के बदले प्रोत्साहन राशि
बैठक में मुख्यमंत्री ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड राज्य द्वारा अपने दो-तिहाई भू-भाग पर वनों का संरक्षण सुनिश्चित करके राष्ट्र को महत्वपूर्ण पर्यावरणीय सेवायें (ईको-सिस्टम सर्विसेज) प्रदान की जा रही है। इन पर्यावरणीय सेवाओं के लिए हमें अपने विकास के अवसरों का परित्याग करना पड़ रहा है। अतः भारत सरकार से अनुरोध है कि क्षतिपूर्ति अथवा प्रोत्साहन के तौर पर समुचित वित्तीय सहायता राज्य को उपलब्ध करायी जाये। राज्यों की परम्परागत फसलों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि मिड-डे-मील में चावल एवं गेहूँ के अतिरिक्त राज्यों की परम्परागत फसलें जैसे मंडुवा, झिगौरा इत्यादि को शामिल करना चाहिए।

हिमालयी स्टेट रीजनल काउंसिल, केदारनाथ पुनर्निर्माण, चारधाम परियोजना, नमामि गंगे के लिए प्रधानमंत्री का आभार
हिमालयी राज्यों की विशिष्ट भू-भौगोलिक परिस्थितियों पर विचार करने तथा इनकी कठिनाइयों के सम्यक् समाधान के लिए नीति आयोग के अन्तर्गत हिमालयी स्टेट रीजनल काउंसिल का गठन किए जाने पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री जी आभार व्यक्त किया। केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना, चारधाम महामार्ग परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना के लिए भी उत्तराखण्ड की ओर से प्रधानमंत्री जी को विशेष रूप से धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी परियोजनायें राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए बहुत उपयोगी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नमामि गंगे योजना के माध्यम से गंगा व उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में प्रधानमंत्री ने अभूतपूर्व पहल की है। गंगोत्री से लक्ष्मण झूला-ऋषिकेश तक गंगा के जल की गुणवत्ता को क्लास वन में वर्गीकृत किया गया है, जो हमारे प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।

इन्वेस्टर्स समिट के बाद उत्तराखण्ड में अभी तक 14545 करोड़ का निवेश हो चुका है
उत्तराखण्ड राज्य सरकार द्वारा अक्टूबर 2018 में प्रथम बार निवेशक सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें निवेशकों को आकर्षित करने हेतु कई नीतियों प्रख्यापित की गई हैं। अब तक कुल 600 एम.ओ.यू., जिनकी लागत रूपये एक लाख चैबीस हजार करोड़ है, हस्ताक्षरित किये जा चुके हैं। अब तक कुल 109 एम.ओ.यू. के सापेक्ष रू0 चैदह हजार पांच सौ पैंतालिस करोड़ का निवेश हो चुका है।

सौंग बांध से देहरादून को 30 वर्ष तक होगी अबाध जलापूर्ति
राज्य सरकार द्वारा वर्षा जल संवर्द्धन के लिए विभिन्न जनपदों में जलाशयों का निर्माण किया जा रहा है। जनपद देहरादून में आगामी 30 वर्षों से भी अधिक समय तक निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित किये जाने के लिए सौंग बाँध पेयजल परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार के द्वारा वर्ष 2022 तक 5000 समस्याग्रस्त प्राकृतिक जल स्त्रोत को पुनर्जीवित एवं सवंर्दि्धत करने का कार्य किया जायेगा। राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा वर्ष 2018-19 में वर्षा जल संचय हेतु कुल 19.22 लाख संरचनायें निर्मित की गयी, जिसमें 11,730 लाख लीटर जल संचय की क्षमता विकसित हुयी है। राज्य सरकार द्वारा बिल्डिंग बाईलॉज में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया गया है। कुपोषण की समस्या दूर करने के लिए महिलाओं के द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से स्थानीय उपज मंडुवा, चैलाई, झिंगौरा इत्यादि से विनिर्मित पोषक आहार ’’ऊर्जा’’ को जनपदों में ही तैयार करके, अतिकुपोषित बच्चों को पूरक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है।

राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना से होगा कृषि में आमूलचूल परिवर्तन
कृषि सैक्टर के आमूलचूल परिवर्तन हेतु संरचनात्मक सुधारों व कृषकों की आमदनी दोगुनी करने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी परियोजना ’राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना’ का शुभारम्भ प्रधानमंत्री के कर कमलों से रूद्रपुर में किया गया। रू0 3340 करोड़ की इस परियोजना से बेमौसमी सब्जी उत्पादन, फल उत्पादन, फल उत्पादन, सगन्ध पौधों की खेती, भैंस पालन, भेंड एवं बकरी पालन तथा शीत जल मात्स्यकी आदि क्षेत्रों को विशेष रूप से बढ़ावा मिलेगा।

रूरल ग्रोथ सेंटर से होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत
राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने हेतु ’’रूरल ग्रोथ सेन्टर्स’’ पर कार्य किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक न्याय पंचायत क्षेत्र में, उस क्षेत्र की मुख्य आर्थिकी के अनुरूप नियोजित आर्थिक विकास किया जायेगा। कृषि के क्षेत्र में कई अभिनव प्रयोग जैसे ट्राउट फार्मिंग, हैम्प कल्टिवेशन एवं प्रोडक्शन, एकीकृत फार्मिंग मॉडल, फार्म मशीनरी बैंक एंव कस्टम हायरिंग सेन्टर्स इत्यादि के माध्यम से कृषि क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है। परम्परागत कृषि विकास योजना के अन्तर्गत प्रथम चरण में 3900 जैविक क्लस्टर स्वीकृत किये गये हैं। समस्त पर्वतीय विकास खण्डों को अगले पाँच वर्षों में आर्गेनिक विकास खण्डों में परिवर्तित किया जायेगा।

मृदा कार्ड व डीबीटी से खाद इन्पुट सब्सिडी में 140 करोड़ की बचत
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में मृदा कार्ड में दी गयी संस्तुतियों एवं डी.बी.टी. योजना संचालन के उपरान्त उर्वरक खपत में अनुमानतः 20 प्रतिशत तक इनपुट लागत में गिरावट आयी है और खाद की इनपुट सब्सिडी में 140 करोड़ रूपए की बचत हुई है। राज्य सरकार द्वारा, कृषि, औद्यानिकी व उनकी सह-गतिविधियों के लिए 30 वर्ष तक लीज पर भूमि दिये जाने की व्यवस्था की गयी है। साथ ही समस्त कृषि ऋण एवं कृषि गतिविधियों के लिए कृषकों को एक लाख रूपए तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध कराया जा रहा है।

एपीएमसी एक्ट व आवश्यक वस्तु अधिनियम में परिवर्तन पर विचार हो
उत्तराखण्ड राज्य में कृषि व बागवानी को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तराखण्ड मण्डी अधिनियम में माडल एक्ट के सापेक्ष निजी मण्डी, संविदा कृषि, कृषक-उपभोक्ता बाजार की व्यवस्था, मण्डी अधिनियम में की गयी है। कृषि उत्पाद विपणन समिति अधिनियम तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के सम्बन्ध में कृषि क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एपीएमसी एक्ट तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम के विभिन्न प्राविधानों में मूलभूत परिवर्तन किए जाने पर बल दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि नीति आयोग द्वारा विचारोपरान्त एक चर्चा पत्र तैयार कर राज्यों के साथ विचार-विमर्श करना श्रेयस्कर रहेगा।

सीमावर्ती क्षेत्रों में रोड़, रेल व एयर कनेक्टिविटी को विकसित करने पर बल
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य की अन्तर्राष्ट्रीय सीमायें चीन तथा नेपाल से लगी है। सीमावर्ती एवं दूरस्थ ग्रामीण अंचलों से पलायन राज्य सरकार के समक्ष गम्भीर चुनौती है एवं इस हेतु अवस्थापना सुविधायें जैसे कि सड़क, पानी, बिजली एवं विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए निवेश करने की आवश्यकता है। इन सीमान्त क्षेत्रों में रोड़ कनेक्टिविटी के साथ रेल व एयर कनेक्टिविटी को भी विकसित करना होगा।

गजेन्द्र शेखावत ने किया सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ऋषिकेश में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि देशभर में 298 अलग-अलग तरह के कार्य किए जा रहे है, ताकि गंगा का शुद्धिकरण हो सके। इसके तहत सीवर ट्रीटमेंट प्लांट भी तैयार किए जा रहे हैं। 298 निर्माण कार्यों में से 98 पूरे हो चुके है।
ऋषिकेश में निर्माणाधीन दोनों सीवर ट्रीटमेंट प्लांट भी तय समय सीमा में पूरा होने की उम्मीद है। कुंभ से पहले गंगा नदी का जल आचमन योग्य हो जाएगा। वह यहां बृहस्पतिवार को परमार्थ निकेतन पहुंचे थे। यहां स्वामी चिदानंद सरस्वती के साथ उन्होंने पीलो पानी प्याउ से पानी पीकर उसका शुभारंभ किया किया। पीलो पानी के संस्थापक जतिन अहलावत ने पीलो शुद्ध जल मशीन के बारे में जानकारी दी।
बताया कि इसकी क्षमता 500 लीटर है। यह हर घंटे 300 लीटर आरओ प्यूरीफाइड जल उपलब्ध कराने में सक्षम है। इस दौरान शेखावत परमार्थ गंगा घाट पर आयोजित श्रीराम कथा में भी पहुंचे। यहां कुछ देर कथा सुनने के बाद वह सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के निरीक्षण के लिए निकल पड़े। इस दौरान नमामि गंगे के डायरेक्टर जनरल राजीव रंजन मिश्रा, ज्वाइंट सेक्रेटरी अशोक कुमार, वित्तीय प्रमुख रोजी अग्रवाल, उत्तराखण्ड राज्य प्रमुख उदयराज, तकनीकी निदेशक प्रवीण कुमार आदि उपस्थित रहे।

30 नवंबर तक हर हाल में पूरा हो प्लांट का काम
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने चंद्रेश्वर नगर में 7.5 एमएलडी के निर्माणाधीन सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप कश्यप से परियोजना के निर्माण की अवधि पूछी। इस पर प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि पहले इसका निर्माण 30 अगस्त तक किया जाना था, लेकिन अब इसे 30 दिसंबर तक पूरा किया जा सकेगा।
इस पर केंद्रीय मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने 30 सितंबर तक इसे पूरा करने को कहा, लेकिन प्रोजेक्ट मैनेजर के कई पहलुओं का हवाला देने के बाद उन्होंने प्लांट को हर हाल में 30 नवंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए।

26 एमएलडी प्लांट के कार्य से संतुष्ट दिखे शेखावत
लक्कडघाट में निर्माणाधीन 26 एमएलडी के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण कार्य पर केंद्रीय जल शक्ति संतुष्ट दिखे। उन्होंने प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद इसे सुंदर बगीचे रूप देने को भी कहा। कार्यदायी संस्था जीडीसीएल के प्रदीप जैन से तकनीकी जानकारी भी ली। उन्होंने आम का पौधा भी रोपा। इस दौरान उनके साथ विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल भी मौजूद रहे।

केन्द्रीय मंत्री के सामने ही भिड़े विस अध्यक्ष और दर्जाधारी
ऋषिकेश पहुंचे केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के स्वागत की होड़ में विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल और दर्जाधारी राज्यमंत्री भगतराम कोठारी आपस में भिड़ गए। मर्यादा को भूल दोनों राजनेताओं के बीच खूब गाली गलौज हुई। यहां तक कि दोनों महानुभावों ने एक दूसरे को देख लेने तक की धमकी तक दे डाली। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ऋषिकेश दौरे पर पहुंचे थे। पहले उन्होंने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती से मुलाकात की। इसके बाद दोपहर डेढ़ बजे मोटर बोट से नाव घाट पहुंचे।
यहां से वे चंद्रेश्वर नगर स्थित नमामि गंगे योजना के तहत बनाए जा रहे 7.5 एमएलडी के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण करने जा रहे थे। चंद्रेश्वर नगर के मोड़ पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल तथा दर्जाधारी राज्यमंत्री भगतराम कोठारी अपने-अपने समर्थकों के साथ उनके स्वागत के लिए मौजूद थे।
करीब ढाई बजे केंद्रीय मंत्री की फ्लीट पहुंची। वे अपनी कार से उतरे तो विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल और राज्यमंत्री भगतराम कोठारी के बीच पहले मैं-पहले मैं की होड़ शुरू हो गई। कुछ ही पलों में यह होड़ विवाद में बदल गई और सभी मर्यादाएं तार-तार हो गईं। दोनों के बीच जमकर गाली गलौज हुई। हालांकि, बाद में दोनों महानुभावों को स्थिति का एहसास हुआ और बारी-बारी से केंद्रीय मंत्री का स्वागत किया। इस बारे में जब केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से प्रतिक्रिया जाननी चाही तो वे मुस्कुराकर चुप्पी साध गए और आगे बढ़ गए।

किसने क्या कहा-

ये वाकया पहली बार नहीं हुआ है। पूर्व में भगवान बद्री विशाल की गाडू घड़ा यात्रा के दौरान भी विधानसभा अध्यक्ष ने मेरे साथ अभद्रता की थी। वहां मैं अपनी पत्नी के साथ दर्शन के लिए लाइन में खड़ा था। बृहस्पतिवार को ऐसा ही सलूक मेरे साथ किया गया। मैं ऐसी राजनीति से त्रस्त आ चुका हूं। अपनी बात ऊपर तक पहुंचाऊंगा। विधानसभा अध्यक्ष ने गाड़ी में बैठते-बैठते धमकाया कि मैं बताऊंगा तेरे को।
– भगतराम कोठारी, अध्यक्ष, गन्ना एवं चीनी विकास उद्योग बोर्ड

भगतराम कोठारी काफी बड़े आदमी हैं और सरकार ने उनको काफी अहम जिम्मेदारी सौंपी है। मैं जहां हूं, वहां तक पहुंचने के लिए सालों परिश्रम किया है और यह पार्टी के प्रति अगाध निष्ठा का परिणाम है। ताजा घटनाक्रम पर मैं यही कह सकता हूं कि कुछ नहीं हुआ। मेरी तरफ से यही सलाह है कि पार्टी नेताओं को संगठन की रीति नीति को समझना चाहिए।
– प्रेमचंद अग्रवाल, विधानसभा अध्यक्ष व स्थानीय विधायक

श्रद्धांजलि देते समय भावुक हुए साथी, बताया अपना गुरु

दिवंगत प्रकाश पंत का पार्थिव शरीर पहले दिल्ली और फिर विशेष विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट लाया गया। दिवंगत पंत के पार्थिव शरीर को जौलीग्रांट हवाई अड्डे के निकट एसडीआरएफ भवन में श्रद्धांजलि और दर्शनार्थ रखा गया। जहां मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, भाजपा के राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन शिवप्रकाश, प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट सहित कई मंत्रियों, विधायकों के अलावा कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं ने स्वर्गीय पंत को श्रद्धांजलि अर्पित की। एसडीआरएफ भवन के प्रागंण में दिवंगत पंत के पार्थिव शरीर को पुलिस के द्वारा सलामी भी दी गई।

मुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं ने स्वर्गीय पंत के पार्थिव शरीर को कंधा भी लगाया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने अपने प्रिय नेता स्वर्गीय प्रकाश पंत के अंतिम दर्शन कर उन्हें भावनभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भी दिंवगत पंत को जौलाग्रांट स्थित एसडीआरफ भवन में श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि देने वालों में नेता प्रतिपक्ष डाॅ. इंदिरा हृद्येश भी शामिल रहीं। साथ ही राज्य के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी के अलावा वरिष्ठ पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी और विधानसभा के अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित थे।

यह भी पढ़े …
राजकीय सम्मान के साथ “श्रीमन” को अंतिम विदाई

ठीक होकर आने का वादा किया था, लेकिन साथ छोड़ दिया- मुख्यमंत्री

‘मैं निश्चित रूप से वापस आऊंगा, पर अब उनका पार्थिव शरीर वापस आ रहा है’ कैबिनेट सहयोगी प्रकाश पंत से आखिरी मुलाकात को याद कर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भावुक होकर फफक पड़े। उन्होंने प्रकाश पंत से जुड़ी कुछ यादों को साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुआ एक वीडियो बुधवार शाम को जारी किया। मुख्यमंत्री ने पंत की संसदीय प्रणाली की समझ और उनके कार्यशैली को याद किया। मुख्यमंत्री बोले, ‘राज्य गठन के बाद अंतरिम सरकार बनी तो बात आई कि विधानसभा अध्यक्ष किसे बनाया जाए। मैंने डा. मुरली मनोहर जोशी को सुझाया कि प्रकाश पंत को बनाते हैं। उस समय मैं प्रदेश संगठन देख रहा था। जोशी जी का एक संशय था कि इतनी कम उम्र में प्रकाश विधानसभा का कार्य देख पाएगा। मैंने उन्हें समझाया, जिसके बाद वे मान गए। उनकी संसदीय कार्यों की मजबूत समझ से इतिहास में लंबी लकीरें खींची हैं।
वे न केवल मर्यादाओं की चिंता करते थे बल्कि उस पर चलते भी थे’। मुख्यमंत्री ने उनकी कार्यकुशलता और विनम्रता को लेकर कई रोचक बातें बताईं। अपनी बात समाप्त करने से पहले मुख्यमंत्री ने पंत जी से आखिरी मुलाकात को याद किया तो वे भावुक हो गए। उन्होंने अंत में कहा कि ‘मैं बहुत दुखी हूं’। इतना कहने के बाद वे फफक ही पड़े। प्रकाश पंत ने जब सोशल मीडिया पर अपने स्वास्थ्य में आ रहे सुधार के संबंध में एक वीडियो पोस्ट किया तो अपने प्रशंसकों के चेहरे खिल उठे। सभी उनके सेहत को लेकर चिंतित थे और हर जुबान पर एक सवाल तैर रहा था कि प्रकाश पंत जी को आखिर क्या हुआ? पंत ने संदेश में कहा था कि उनके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है और सेवा के भाव लेकर वे पुनः उपस्थित होंगे।

यह भी पढ़े …
अनिल बलूनी के सहारे कौन चला रहा परिर्वतन की अफवाह!

पंत जी आप अमर रहेंगे, हम सभी के दिलों में! – बंसल।

20 सूत्रीय कार्यक्रम के उपाध्यक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री नरेश बंसल ने प्रदेश के वित्त मंत्री प्रकाश पंत के आकस्मिक निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शान्ति तथा शोक संतप्त परिजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है।
नरेश बंसल ने अपने शोक संदेश में कहा कि प्रकाश पंत केवल एक राजनेता के तौर पर नहीं बल्कि आकर्षक व्यक्तित्व के धनी थे उनकी कमी सदैव खलेगी। सदन में सबको साथ लेकर चलने की उनकी कुशलता, वित्तीय मामलों का ज्ञान और विपक्ष के हर तीखें वार का एक मीठी मुस्कान से जवाब देना, ये सब अब उनकी यादों में रहेगा। शांत, सौम्य और सरल स्वभाव के धनी प्रकाश पंत ने अपने लम्बे राजनैतिक जीवन में प्रदेश के गठन और बाद में प्रदेश को एक नई दिशा देने में बड़ी भूमिका निभायी। उनके निधन से प्रदेश एवं हमारे भाजपा संगठन ने एक बहुत बड़ा व्यक्तित्व को खो दिया।
नरेश बंसल ने बताया कि मुख्यमंत्री ने स्व0 प्रकाश पंत के सम्मान में प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक तथा गुरूवार 6 जून को प्रदेश में एक दिन के राजकीय अवकाश की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को राज्य के प्रगति की जानकारी दी

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री ने मीडिया से वार्ता करते हुए कहा कि भेंट के दौरान प्रधानमंत्री से उत्तराखण्ड के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। 2021 में होने वाले महाकुंभ, उत्तराखण्ड के हाइड्रो प्रोजेक्टों व अन्य विषयों को लेकर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने राज्य को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ जी के अपने अनुभवों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साझा किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि 2013 की आपदा से प्रदेश के अनेक हाइड्रो प्रोजेक्ट अटक गये थे, जिनमें अधिकांश कार्य हो चुके हैं, लेकिन विभिन्न कारणों से वे अभी तक पूर्ण नहीं हो पाये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि एनजीटी व अन्य एजेंसियों से सहयोग मिलता है तो हमारे ये प्रोजेक्ट जल्द पूरे होंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड लगभग एक हजार करोड़ रूपये की बिजली खरीदता है, इसके बावजूद भी उत्तराखण्ड सबसे सस्ती बिजली उपलब्ध कराने वाला राज्य है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का केदारपुरी से विशेष लगाव होने व केदारनाथ जी के पुनर्निर्माण कार्यों के बाद चारधाम यात्रा के लिए श्रद्धालुओं के आगमन में तेजी से वृद्धि हुई है। औसतन 13 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रतिदिन श्री केदारनाथ जी के दर्शन कर रहे हैं।

अनिल बलूनी के सहारे कौन चला रहा परिर्वतन की अफवाह!

सोशल मीडिया में अर्से से चल रही राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा पर राज्यसभा सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने विराम लगा दिया है। उन्होंने ऐसी अफवाहों को पूरी तरह निराधार बताया और कहा कि राज्य में प्रचंड बहुमत की स्थिर सरकार है। डबल इंजन का संकल्प उत्तराखंड के कायाकल्प के लिए कार्यरत है। फेसबुक पर अपनी पोस्ट में बलूनी ने लिखा-’’मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में सरकार राज्य की भावना के अनुरूप विकास के पथ पर आगे बढ़ रही है। मेरी कामना है कि राज्य का नेतृत्व विकास के नए आयाम छुए।’’

उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद से अनिल बलूनी राज्य से जुड़े अहम सवालों को लेकर केंद्र में सक्रिय हैं। फिर चाहे वह कोटद्वार और उत्तरकाशी के अस्पतालों में आइसीयू की बात हो अथवा आइटीबीपी के अस्पतालों में आमजन को भी उपचार की सुविधा, काठगोदाम- देहरादून के बीच रेल सेवा, एनसीटीई एक्ट में संशोधन, मसूरी पेयजल योजना अथवा दूसरे कार्य, उन्होंने राज्य हित में कई अहम कार्य केंद्र के स्तर से अब तक करवाए हैं। इन्हें काफी सराहा भी गया।

इसके साथ ही उन्हें लेकर सोशल मीडिया में चर्चा भी शुरू हुई। इन चर्चाओं पर बलूनी ने फेसबुक पर पोस्ट कर ब्रेक लगाया है। उन्होंने लिखा कि कुछ महीनों से वह निरंतर देख रहे हैं कि सोशल मीडिया उत्तराखंड के राजनैतिक परिदृश्य पर अनेक चर्चाएं हो रही हैं। विशेषकर राज्य के नेतृत्व को लेकर कई पोस्ट हैं, जो कि पूर्णतरू निराधार हैं। बलूनी ने लिखा-मैं राज्यसभा सदस्य के नाते राज्य के विषयों पर निरंतर सक्रिय हूं। साथ ही पार्टी के मीडिया प्रमुख के नाते अपने दायित्व का निर्वह्न कर रहा हूं।

प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा दिए गए दायित्वों का निष्ठा से निर्वह्न मेरी प्राथमिकता है। ऐसे में सोशल मीडिया में राज्य के नेतृत्व के विषय में अस्तित्वहीन और निराधार चर्चा हमारी ऊर्जा को व्यय करती है। नेतृत्व द्वारा दिए दायित्व को सभी कार्यकर्ता सफलतापूर्वक निभा रहे हैं। मेरी कामना है कि उत्तराखंड प्रगति करे, विकास के आयामों को छुए और जन आकांक्षाओं को पूर्ण करे।

ऋषिकेश पार्षद रीता गुप्ता का जाति प्रमाणपत्र निरस्त

नगर निगम ऋषिकेश की महिला पार्षद रीता गुप्ता का जाति प्रमाणपत्र जांच के बाद निरस्त कर दिया गया है। इसके बाद शहरी विकास विभाग ने वार्ड नंबर-3 से विजयी रहीं पार्षद रीता गुप्ता का चयन निरस्त करने की घोषणा कर दी है।

शहरी विकास विभाग के सचिव शैलेश बगौली की ओर से जारी पत्र के अनुसार नगर निगम ऋषिकेश के वार्ड नंबर-3 दुर्गा मंदिर में आरक्षित श्रेणी (पिछड़ी जाति महिला) से विजयी प्रत्याशी रीना गुप्ता पत्नी प्रवीण गुप्ता का पिछड़ी जाति प्रमाणपत्र निरस्त हो गया है। इस आधार पर रीना गुप्ता का पार्षद पद रिक्त घोषित किया जाता है। बता दें, चुनाव के दौरान भी जाति प्रमाणपत्र पर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। मामला विचाराधीन होनेे के कारण पार्षद पद की दावेदारी पर रोक नहीं लगाई गई थी।

सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी देहरादून सुशील जोशी के अनुसार किसी भी स्थिति में पद रिक्त होने के बाद उपचुनाव का प्राविधान है। विशेष परिस्थितियों में कोर्ट के आदेश पर चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी को विजेता घोषित किया जा सकता है। इस मामले में मुख्य नगर आयुक्त चतर सिंह चौहान का कहना है कि आदेश की प्रति अभी प्राप्त नहीं हुई है। आदेश मिलने के बाद नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।

दस साल पुराने मामले में कैबिनेट मंत्री हरक के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी

कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) विवेक श्रीवास्तव की अदालत से गैर जमानती वारंट जारी हुआ है। यह वारंट दस साल पुराने उत्तराखंड विधानसभा का घेराव कर हंगामा करने के मामले में जारी हुआ है। वन मंत्री के अलावा वारंट तीन अन्य के खिलाफ भी जारी किया गया है। यह सभी आरोपित सम्मन जारी होने के बाद भी तारीखों पर लगातार गैर हाजिर चल रहे थे। वहीं, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय सोमवार को कोर्ट में पेश हुए और उन पर आरोप भी तय कर दिए गए।

सहायक लोक अभियोजक अनूप कुमार ने अदालत को बताया कि दिसंबर 2009 में कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत, यशपाल आर्य और सुबोध उनियाल कांग्रेस में रहते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विधानसभा कूच कर रहे थे। तब राज्य में भाजपा की सरकार थी। पुलिस ने इन सभी को रिस्पना पुल पर बेरिकेडिंग कर रोक लिया। इससे आक्रोशित नेताओं ने पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की और उत्तेजक नारे लगाए। इससे शांति व कानून व्यवस्था बिगड़ गई। मामले में उस समय 25 लोगों के खिलाफ नेहरू कॉलोनी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।

साल 2013 से इस मामले में सुनवाई चल रही है। बीते साल सितंबर माह में बीस आरोपितों पर आरोप तय कर दिए गए, जबकि हरक सिंह रावत, किशोर उपाध्याय, सतपाल ब्रह्मचारी, शंकर चंद रमोला और विनोद रावत के लगातार अनुपस्थित रहने के कारण इन सभी की पत्रावली अलग कर दी गई। सोमवार को मामले में सुनवाई थी, लेकिन किशोर उपाध्याय को छोड़ कोई भी अदालत नहीं पहुंचा। इस पर अदालत ने हरक समेत चार के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए।

उत्तराखंड भाजपा के लिए चाणक्य साबित हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत

उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटें भाजपा की झोली में आने के बाद अब यहां मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का कद भी बढ़ गया है। त्रिवेन्द्र सिंह रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए प्रदेश की पांचों सीटें भाजपा के कब्जाई है। वहीं कांग्रेस को खाता खोलने का मौका भी नहीं दिया गया। कांग्रेस के कद्दावर नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को हराकर प्रदेश अध्यक्ष भाजपा अजय भट्ट का भी सीना चौड़ा हुआ है।

अजय भट्ट के चुनाव में चले जाने के बाद पांचों सीटों पर भाजपा के प्रचार की डोर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के हाथों में ही थी। उनके राजकाज और राजनीतिक कौशल को चुनावी कसौटी पर माना जा रहा था। सियासी हलकों में ये चर्चा आम थी कि यदि पांच में से एक भी सीट भाजपा के कब्जे से निकली तो इसका ठीकरा मुख्यमंत्री के सिर पर ही फूटेगा। सियासी जानकारों की मानें तो पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर जहां भाजपा ने अपने वर्चस्व को बरकरार रखा तो वहीं मुख्यमंत्री चुनावों में अजेय बने रहने के रिकार्ड को भी बनाए रखने में कामयाब रहे। 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रदेश में थराली विधानसभा का उपचुनाव हुआ और उसके बाद शहरी निकायों के चुनाव हुए। इन दोनों ही चुनावों में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की प्रतिष्ठा दांव पर मानी गई। दोनों चुनावों में भाजपा ने जीत दर्ज की। लोकसभा चुनाव में भी उनकी प्रतिष्ठा को दांव पर माना जा रहा था।

अजय भट्ट का सियासी कद बढ़ा
नैनीताल लोस से हरीश रावत सरीखे खांटी राजनीतिज्ञ को मात देने वाले अजय भट्ट का भी कद बढ़ा है। प्रदेश अध्यक्ष की सफल भूमिका निभाने के बाद पार्टी ने उन पर दांव लगाया था। चुनाव जीतकर उन्होंने पार्टी के फैसले को सही साबित किया।

हिमाचल में भी दिलाई जीत
जनरल बीसी खंडूड़ी के राजनीतिक शिष्य तीरथ सिंह रावत ने गढ़वाल लोकसभा सीट पर शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने खंडूड़ी के बेटे को हराकर पार्टी के फैसले को सही साबित किया। हिमाचल में चारों सीटों पर भाजपा की जीत का श्रेय भी तीरथ के खाते में दर्ज हुआ है। वे वहां प्रदेश प्रभारी थे, चुनाव के दौरान उन्होंने वहां डेरा जमा रखा था।

डॉ. निशंक ने दूसरी दफा जीता चुनाव
हरिद्वार लोकसभा सीट से चुनाव जीते डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक का भी कद बढ़ा है। वे लगातार दूसरा चुनाव जीते हैं। चुनाव शुरू होने से पहले उनकी सीट पर मुकाबला कड़ा माना जा रहा था। लेकिन हरीश रावत के नैनीताल लोस सीट पर जाने से उनकी चुनावी राह आसान मान ली गई थी।