मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर. के सिंह से की भेंट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आर के सिंह से भेंट कर उत्तराखण्ड को कोयला आधारित संयंत्रों से 400-450 मे०वा० स्थायी आवंटन किए जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिगत बेस लोड सुरक्षित किये जाने और राज्य को व्यापक विद्युत कटौती से मुक्त रखे जाने के लिए उत्तराखण्ड राज्य को कोयला आधारित संयंत्रों से 400 मेगागावाट स्थायी आवंटन किया जाना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने आपदा के कारण क्षतिग्रस्त हुई विद्युत लाइनों एवं टावरों को पुनर्स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार से सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि क्षतिग्रस्त लाइनों की क्षतिपूर्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी, उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त विद्युत टावरों का सर्वे कराकर इसकी रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी जाय, इसका परीक्षण कराकर प्रतिपूर्ति पर विचार किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने बॉर्डर एरिया में विद्युत लाइनें एवं विद्युत संयंत्र शीघ्र स्थापित करने का अनुरोध किया। जिसके लिए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पहाड़ी राज्यों के लिए मानक अलग से निर्धारित कर शीघ्र बॉर्डर एरिया में विद्युत लाइनें एवं विद्युत संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार को केंद्रीय पूल से अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। केंद्रीय मंत्री ने इस पर सहमति प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सोलर ऊर्जा, हाइड्रो पावर एवं कोयला से विद्युत उत्पादन के लिए दीर्घकालिक योजना पर कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने माह अप्रैल से सितम्बर 2023 तक औसतन 300 मे०वा विद्युत प्रतिमाह अनएलोकेटेड कोटा से उपलब्ध कराए जाने के लिए केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में ऊर्जा की कुल उपलब्धता में 60 प्रतिशत से अधिक जल ऊर्जा संयंत्रों से है जिसमें मौसमी परिवर्तन के साथ उपलब्धता में व्यापक उतार-चढ़ाव होता है एवं शीत ऋतु में उत्पादन लगभग एक तिहाई रह जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की तकनीकी समिति ने अपनी रिपोर्ट में उत्तराखण्ड राज्य में बेस लोड की अनुपलब्धता स्वीकार करते हुए उत्तराखण्ड राज्य को कोयला आधारित संयंत्रों से अतिरिक्त रूप से लगभग 400 मे०वा० विद्युत उपलब्धता सुनिश्चित कराये जाने हेतु अपनी संस्तुति दी है। राज्य की ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिगत बेस लोड सुरक्षित किये जाने और राज्य को व्यापक विद्युत कटौती से मुक्त रखे जाने के लिए उत्तराखण्ड राज्य को कोयला आधारित संयंत्रों से 400 मेगावाट स्थायी आवंटन किया जाना अत्यन्त आवश्यक है। जिस पर केंद्रीय मंत्री ने सहमति व्यक्त की।
केंद्रीय मंत्री आर के सिंह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को हर संभव सहयोग के प्रति आश्वस्त किया। केंद्रीय मंत्री ने किशाऊ बांध के संबंध में कहा कि सभी राज्यों से विचार विमर्श करने के बाद शीघ्र ही आपत्तियों का निस्तारण कर कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
इस अवसर पर सचिव ऊर्जा भारत सरकार पंकज अरोड़ा, सचिव ऊर्जा, उत्तराखंड आर मीनाक्षी सुंदरम एवं एमडी यूपीसीएल अनिल कुमार उपस्थित रहे।

धामी का दिल्ली प्रवास अहम, जानिए कैसे संवरेगा उत्तराखंड और देश को क्या संदेश देने जा रहा हिमालयी राज्य

– अगले कुछ दिनों तक दिल्ली में मौजूद रहेंगे उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री
– भाजपा हाईकमान, केन्द्रीय मंत्रियों और उद्योगपतियों साथ करेंगे मंत्रणा
– ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023’ और ‘यूसीसी’ पर बनेगी खास रणनीति

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी यूं ही दिल्ली का दौरा नहीं करते। वह जब भी दिल्ली जाते हैं, राज्य के लिए कुछ न कुछ सौगात लेकर ही लौटते हैं। अगले कुछ दिनों तक वह दिल्ली में रहेंगे, लेकिन इस बार सीएम धामी उत्तराखण्ड के लिए कुछ मांगने नहीं जा रहे बल्कि दो महत्वपूर्ण मसलों पर फील्डिंग सजाने के लिए वह देश की राजधानी में प्रवास करेंगे। मौजूदा समय में उनका फोकस ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023’ और ‘यूसीसी’ पर है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार से 22 अगस्त तक दिल्ली में मौजूद रहेंगे। उनका यह दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान उनकी भाजपा हाईकमान, केन्द्रीय मंत्रियों के साथ ही देश के बड़े उद्यमियों के साथ मुलाकात और बैठकें प्रस्तावित हैं। उनकी सबसे अहम बैठक 21 अगस्त को देश के नामी उद्योगपतियों के साथ होनी है। इस बैठक का एकमात्र एजेंडा ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023’ है। यह मेगा इवेंट दिसंबर में आयोजित होना है जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल हो सकते हैं। दरअसल, धामी सरकार समिट के जरिए देश विदेश के निवेशकों को राज्य में आकर्षित करना चाहती है। धामी जानते हैं कि उत्तराखण्ड में गरीबी दूर करने के लिए रोजगार अवसर बढ़ाने होंगे। उद्योग आएंगे तो निवेश आएगा और रोजगार मिलेगा तो गरीबी दूर होगी। यही वजह है कि दिसंबर में प्रस्तावित ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के लिए प्रदेश सरकार ने 2.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। राज्य में निवेश बढे, आर्थिक संसाधनों में वृद्धि एवं औद्योगिक वातावरण का सृजन हो, इसके लिए लैंड बैंक तैयार कर सिंगल विंडो सिस्टम को प्रभावी बनाया जा रहा है। धामी इस बात पर फोकस कर रहे हैं कि यह निवेश सिर्फ कागजों में न हो बल्कि शत प्रतिशत धरातल पर उतरे। उनकी योजना है कि निवेशकों को राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के मौके बढ़ेंगे और पलायन भी रूकेगा। समिट का प्रोमोशन करने धामी कई राज्यों के साथ ही विदेश में भी कई रोड शो करेंगे और बताएंगे कि उत्तराखण्ड का शांत वातावरण उद्यमियों के लिए सर्वथा अनुकूल है। ये भी बताया जाएगा कि राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों एवं उद्यमियों की लगन, फीडबैक से हमारा राज्य कैसे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग में देश में अचीवर्स की श्रेणी में अन्य कई बड़े राज्यों के समकक्ष खड़ा हुआ है।
दिल्ली में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ चर्चा वार्ता का दूसरा विषय समान नागरिक संहिता (यूसीसी) रहेगा। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की यूसीसी पर की गई जबरदस्त पहल से समूचे देश में हलचल मची हुई है। 2022 के विधानसभा चुनाव के वक्त के प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक ऐसा मुद्दा उछाल दिया था जिसकी राज्य स्तर पर कल्पना तक किसी ने नहीं की थी। खटीमा में बाकायदा प्रेस कॉफ्रेंस कर धामी ने ऐलान किया था कि यदि भाजपा सत्ता में बरकरार रही तो देवभूमि में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी। भाजपा सत्ता में लौटी तो धामी ने पहली कैबिनेट में ही एक्सपर्ट कमेटी का गठन कर अपने इरादे साफ कर दिए। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समिति को समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस संबंध में 27 मई, 2022 को एक अधिसूचना जारी कर समिति को उत्तराखंड के निवासियों के व्यक्तिगत दीवानी मामलों से जुड़े विभिन्न मौजूद कानूनों पर गौर करने और विवाह, तलाक, संपत्ति के अधिकार, उत्तराधिकार, विरासत, गोद लेने और रखरखाव जैसे विषयों पर मसौदा कानून या कानून तैयार करने या मौजूदा कानूनों में बदलाव का सुझाव देने के लिए कहा गया था। अब यह एक्सपर्ट कमेटी उत्तराखण्ड के लिए यूसीसी का मसौदा तैयार कर चुकी है जो प्रकाशन के बाद शीघ्र ही धामी सरकार को सौंप दिया जाएगा। इस मामले में मोदी सरकार की दिलचस्पी के बाद अब दो परिस्थितियां बनती दिख रही हैं या तो प्रयोग के तौर पर पहले उत्तराखण्ड में यूसीसी लागू किया जाएगा या फिर पूरे देश के यह संहिता लागू कर दी जाएगी। इसी विषय पर मुख्यमंत्री धामी का डिस्कशन भाजपा हाईकमान के साथ होना है। आने वाले कुछ दिनों में इसे लेकर स्थिति साफ हो जाएगी। मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए विपक्षी दल भी इसका खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं। इस मसले पर लिया जाने वाला फैसला भाजपा के साथ ही धामी की सियासी पारी के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा।

राज्य में निवेश के लिए सीएम ने की चर्चा, उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने दिए सुझाव

उत्तराखण्ड ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 के सफल आयोजन हेतु नीतिगत आधार तथा मार्गदर्शन उपलब्ध कराये जाने के लिए गठित मुख्यमंत्री सलाहकार समूह की पहली बैठक सुभाष रोड स्थित एक होटल में आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाने, रोजगार को बढ़ावा देने एवं राज्य की आर्थिकी में वृद्धि के लिए आगे की कार्ययोजनाओं पर चर्चा की गई। राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए और क्या बेहतर प्रयास किये जा सकते हैं, इसके लिए औद्योगिक जगत से जुड़े लोगों से सुझाव लिये गये। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए निवेशकों द्वारा जो भी सुझाव दिये जा रहे हैं, उन सभी सुझावों को गंभीरता से लेते हुए उनको कार्यरूप में लाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि इन्वेस्टर समिट होने तक राज्य में निवेश की अच्छी ग्राउंडिंग हो जाय। इसके लिए नीतियों का सरलीकरण के साथ उन पर तेजी से क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों को सभी अनुमतियां समय पर मिल जाएं इसके लिए समय सीमा निर्धारित की जायेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में निवेश के लिए अनुकूल माहौल है, राज्य में निवेशकों को हर सम्भव सुविधाएं उपलब्ध कराये जाने के प्रयास राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में शांति व्यवस्था के साथ ही बेहतर मानव संसाधन भी उपलब्ध है। उन्होंने निवेशकों से आग्रह किया कि उन्हें जिन-जिन क्षेत्रों में दक्ष मानव संसाधन की आवश्यकता है, वह बताई जाए। राज्य सरकार द्वारा ऐसे क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षण की पूरी व्यवस्थाएं की जायेंगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य में सड़क, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हुआ है। इन्वेस्टर समिट में 2.5 लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा निवेशकों को राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों के रोजगार के संसाधन बढ़ेगे ओर पलायन भी रूकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को वर्ष 2025 तक देश का अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है। इसमें हमारे उद्योग जगत से जुड़े लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों से लगातार संवाद हो रहे हैं। विभिन्न बैठकों में निवेशकों द्वारा उठाई गई समस्याओं के निस्तारण के लिए हर संभव प्रयास किये गये हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट-2023 से निवेश एवं रोजगार के अवसर बढ़ेगें एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उद्योग जगत में हो रहे नए नवाचारों से हमारे उद्यमियों को भी लाभ प्राप्त होगा। राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयासों एवं उद्यमियों की लगन, फीडबैक से हमारा राज्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में देश में अचीवर्स की श्रेणी में सम्मिलित होकर अन्य कई बड़े राज्यों के समकक्ष खड़ा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारम्भ किये गये मेक इन इण्डिया और पी. एम. गति शक्ति जैसी केन्द्र सरकार की विभिन्न परियोजनाओं में उत्तराखण्ड के उद्यमी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आजादी के इस अमृत काल में उत्तराखण्ड को भी आगे बढ़कर अपना योगदान देना है, इसमें उद्योग जगत की सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका है। औद्योगिक विकास के बैकबोन लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मजबूत करने और राज्य में व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए कई बुनियादी ढांचा परियोजनायें शुरू की गयी है। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए स्टेट ऑफ आर्ट के रूप में आई०सी०डी० की स्थापना की गयी है। शीघ्र ही अमृतसर कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का कार्य आरम्भ होने वाला है। राज्य सरकार द्वारा उत्तराखण्ड लॉजिस्टिक्स नीति-2023 प्रख्यापित की गयी है, जिससे आधारभूत संरचना के विकास में मदद मिलेगी। राज्य सरकार ने विकसित उत्तराखंड को केंद्र में रख कर अपनी नीतियां बनाई हैं और यहीं कारण है कि आज उत्तराखंड तेजी से बिजनेस फ्रेंडली डेस्टिनेशन के तौर पर उभर रहा है।
बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, प्रेमचन्द अग्रवाल, गणेश जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, सुबोध उनियाल एवं सौरभ बहुगुणा ने राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अपने सुझाव दिये।
इस अवसर पर निवेशकों द्वारा राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए अनेक सुझाव दिये गये। बैठक में औषधीय पादपों को बढ़ावा देने, राज्य में संचालित उद्योगों का सर्वे करने, उद्योगों की स्थापना के लिए अनुमतियां प्राप्त करने के लिए समय सीमा निर्धारित करने, उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लैण्ड बैंक बनाने के सुझाव प्राप्त हुए।
इस अवसर पर मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव आर. मीनाक्षी सुदंरम, सचिन कुर्वे, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, विनय शंकर पाण्डेय, महानिदेशक उद्योग रोहित मीणा, सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, औद्योगिक जगत से पतंजलि से आचार्य बालकृष्ण, सुभाष त्यागी, आईआईएम काशीपुर से प्रो. कुलभूषण बलूनी, आईआईटी रूडकी से प्रो. कमल किशोर पंत, चेयरमैन ग्राफीक ऐरा कमल घनशाला, अनिल गोयल, विजय धस्माना, डॉ. एस. फारूक, मुकुन्द प्रसाद, पंकज गुप्ता एवं औद्योगिक जगत से जुडे़ अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

उच्च शिक्षा मंत्री ने बैकलॉग खत्म कर लम्बित परीक्षाफल शीघ्र जारी करने के दिए निर्देश

उच्च शिक्षा में शैक्षिक कैलेंडर प्रभावी रूप से लागू करने के लिये सभी राजकीय विश्वविद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दे दिये गये हैं। इससे उच्च शिक्षा की तमाम शैक्षिक गतिविधियां समय पर पूरी हो सकेंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन को समय पर परीक्षाओं का आयोजन कर तत्परता से परीक्षा परिणाम घोषित करने को कहा गया है। इसके अलावा बैकलॉग खत्म कर विभिन्न परीक्षाओं के लंबित परीक्षा परिणाम को भी शीघ्र जारी करने के निर्देश दिये गये हैं। भविष्य में शैक्षणिक सत्र में एकरूपता लाने के लिये विश्वविद्यालयों को एक सप्ताह के भीतर वार्षिक प्लान तैयार कर शासन को अवगत कराने को कहा गया है। साथ ही विश्वविद्यालयों में लम्बे समय से रिक्त चल रहे शैक्षणिक एवं शिक्षणेत्तर पदों को आवश्यकतानुसार प्रतिनियुक्ति अथवा सेवा स्थानांतरण के आधार पर भरने के निर्देश शासन व विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों को दिये गये हैं।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज विधानसभा स्थित सभाकक्ष में राजकीय विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने शैक्षिक कैलेंडर को प्रभावी तरीके से लागू न कर पाने पर अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। विभागीय मंत्री डॉ. रावत ने बताया कि विश्वविद्यालयों में एनईपी एवं यूजीसी की गाइडलाइन के अनुरूप शैक्षिक कैलेंडर सख्ती से लागू करने के लिये विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दे दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि शैक्षिक कैलेंडर प्रभावी रूप से लागू न होने से विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में तमाम शैक्षिक एवं अन्य गतिविधियां प्रभावित हो जाती है जिसका खामियाजा सीधे तौर पर छात्र-छात्राओं को उठाना पड़ता है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परीक्षाओं का आयोजन तथा परीक्षा परिणाम समय पर जारी ने करने पर विभागीय मंत्री ने दो टूक कहा कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। उन्होंने विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव एवं परीक्षा नियंत्रक को परीक्षाओं के आयोजन एवं परीक्षाफल नियत समय पर घोषित करने के लिये केन्द्रीय मूल्यांकन व्यवस्था लागू करने को कहा। साथ ही परीक्षा आयोजन एवं परीक्षा मूल्यांकन की मॉनिटिरिंग करने एवं बैकलाग को खत्म कर लंबित रिजल्ट को शीघ्र जारी करने के निर्देश दिये। डॉ. रावत ने बताया कि विश्वविद्यालयों में लम्बे समय से कई महत्पपूर्ण पद रिक्त चल रहे जिस कारण विश्वविद्यालयों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। उन्होंने शासन एवं विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों को सीधी भर्ती होने तक रिक्त पदों को प्रतिनियुक्ति अथवा सेवा स्थानांतरण के आधार पर भरने के निर्देश दिये। इसके लिये उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को एक माह के भीतर कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालय अपने यहां संचालित पाठ्यक्रमों एवं छात्र संख्या को ध्यान में रखते हुये शैक्षणिक गतिविधियों को समय पर पूरा करने के लिये एक सप्ताह के भीतर वार्षिक प्लान तैयार कर शासन को भी अवगत करायें। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि विश्वविद्यालयों के अंतर्गत शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन व क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लेटलतीफी के लिये संबंधित कुलपति, कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक को जिम्मेदार माना जायेगा।

बैठक में सचिव उच्च शिक्षा शैलेश बगोली, अपर सचिव प्रशांत आर्य, कुलपति मुक्त विवि प्रो. ओ.पी.एस. नेगी, कुलपति श्रीदेव सुमन विवि प्रो. एन.के. जोशी, कुलपति कुमाऊं विवि प्रो. डी.एस. रावत, कुलपति दून विवि प्रो. सुरेखा डंगवाल, कुलपति एस.एस.जे. विवि अल्मोड़ा प्रो. जे.एस. बिष्ट, कुलपति संस्कृत विवि प्रो. दिनेश चन्द्र शास्त्री, रूसा सलाहकार प्रो. एम.एस.एम. रावत, प्रो. के.डी. पुरोहित, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. ए.एस. उनियाल सहित विश्वविद्यालयों के कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

उच्च शिक्षण संस्थानों में 14 अगस्त तक ही होंगे प्रवेशः शैलेश बगोली
उच्च शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि वर्तमान शैक्षिक सत्र के लिये उच्च शिक्षण संस्थानों में 14 अगस्त तक ही छात्र-छात्राओं से प्रवेश हेतु आवेदन लिये जायेंगे। इसे उपरांत प्रवेश हेतु कोई समय सीमा नही बढ़ाई जायेगी। उच्च शिक्षा सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि सभी एफिलिएटिंग यूनिवर्सिटीज के कुलपतियों को अपने-अपने संबद्ध शिक्षण संस्थानों के प्राचार्यों एवं निदेशकों के साथ ऑनलाइन बैठक कर प्रवेश प्रक्रिया के लिये निर्धारित समय सीमा का सख्ताई से पालन कराने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में पहली बार स्नातक स्तर पर प्रवेश हेतु समर्थ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की गई। जिसके अंतर्गत अभी तक 84 हजार 513 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश हेतु अपना पंजीकरण कराया। इसके साथ ही ऑनलाइन पंजीकरण से छूटे छात्र-छात्राओं को 14 अगस्त तक ऑफलाइन पंजीकरण का मौका दिया गया ताकि प्रवेश से वंचित छात्र-छात्राएं अपने निकटतम महाविद्यालयों में सीधा अपना पंजीकरण करा सकेंगे, इससे उनका साल बर्बाद होने से बचाया जा सके।

राज्य में यू कोट वी पे फार्मूले से होने जा रही स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भर्ती

उत्तराखंड के पहाड़ी जनपदों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए धामी सरकार ने “यू कोट वी पे“ फार्मूले का प्लान बनाया है। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए “यू कोट वी पे“ फार्मूले के तहत स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को तैनात करने की कवायद शुरू कर दी है। अगर ये फार्मूला सफल हुआ तो सिर्फ डॉक्टरों की कमी ही पूरी नहीं होगी बल्कि, दूरस्थ क्षेत्रों में भी मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर. राजेश कुमार ने बताया कि हिमालय राज्य उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए “यू कोट वी पे“ फार्मूले के तहत “स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों“ की भर्ती आयोजित की जा रही है। इसके लिए तीसरे चक्र के साक्षात्कार आगामी 22 अगस्त 2023 मंगलवार को आयोजित किये जा रहे हैं। संविदा के माध्यम से ही “स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों“ की तैनाती की जाएगी। “यू कोट वी पे“ फार्मूले के तहत पहाड़ों पर तैनाती कराए जाने वाले डॉक्टरों के लिए उच्च मानदेय निर्धारित किया गया है। लिहाजा जो डॉक्टर सहमति जतायेंगे, उसके तय रेट के हिसाब से उन्हें पे किया जायेगा। जिससे पहाड़ जाने वाले डॉक्टर्स को प्रोत्साहन मिलेगा।

डॉ आर राजेश कुमार ने बताया कि हमारा प्रयास है कि हर व्यक्ति को स्थानीय स्तर पर बेहत्तर स्वास्थ्य सेवायें मिले। किसी को इलाज के लिए मैदानी जनपदों के अस्पताल का रूख नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा डॉक्टरों की भर्ती के लिए अब तक का सबसे बड़ा पैकेज रखा गया है। जिसके तहत स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को 4 लाख रूपये प्रति माह और हृदय रोगों से जुड़े सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को 6 लाख रूपये प्रति माह का पैकेज दिया जायेगा। हृदय रोग से जुड़े स्पेशलिस्ट डॉक्टर मिलने पर इनकी तैनाती पौड़ी जनपद के श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में स्थापित की गई कैथ लैब में की जायेगी। जिसका लाभ पर्वतीय जनपद के मरीजों को मिलेगा। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द राज्य के सभी जनपदों के जिला अस्पतालों के साथ ही मेडिकल कॉलेजों में “स्पेशलिस्ट और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों“ की तैनाती हो जाये।

स्वास्थ्य सचिव डॉ आर. राजेश कुमार ने बताया कि ये सारी भर्तियां राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संविदा पर होंगी। अधिक जानकारी और आवेदन प्रक्रिया के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की बेवसाइट पर www.nhm.uk.gov.in संपर्क किया जा सकता है। इसके साथ ही मोबाइल नंबर or contact : 9412080703 से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने उच्च शिक्षा विभाग में निकाली भर्ती

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने उच्च शिक्षा विभाग में प्रयोगशाला सहायक के 107 पदों के लिए भर्ती निकाली है। इन पदों पर संबंधित विषय के साथ 12वीं पास युवा आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 25 अगस्त है। आयोग के सचिव गिरधारी सिंह रावत के मुताबिक, आवेदक की आयु 18 से 42 साल होनी चाहिए। प्रयोगशाला सहायक भौतिक विज्ञान के 18, रसायन विज्ञान के 18, जंतु विज्ञान के 21, वनस्पति विज्ञान के 21, भूगोल के 18, गृह विज्ञान के दो, मनोविज्ञान के तीन, मानव विज्ञान के एक, बीएससी गृह विज्ञान के दो और शिक्षा शास्त्र के तीन पदों पर भर्ती होगी।
सरकार के आदेश के तहत भर्ती के लिए आवेदन शुल्क से छूट दी गई है। भर्ती के लिए दो पेपर होंगे। पहला पेपर सामान्य ज्ञान व सामान्य अध्ययन का होगा, जिसमें 100 अंकों के 100 सवाल पूछे जाएंगे। इसके लिए दो घंटे का समय दिया जाएगा। दूसरा पेपर विषयपरक जानकारी का होगा, जिसमें 200 अंकों के 200 सवाल पूछे जाएंगे। यह तीन घंटे का पेपर होगा। चार सवाल गलत करने पर एक अंक काट लिया जाएगा। परीक्षा के लिए सभी जिलों में केंद्र बनाए जाएंगे। भर्ती के लिए 12वीं के अलावा यूजी या पीजी डिग्री, छह माह का कंप्यूटर कोर्स करने वालों को अधिमान मिलेगा। भर्ती के लिए 25 अगस्त तक वेबसाइट https://psc.uk.gov.in/ ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
उत्तराखंड से 10वीं, 12वीं की परीक्षा पास करने वाले युवा आवेदन कर सकते हैं। ऐसे युवा भी आवेदन कर सकते हैं, जो उत्तराखंड के मूल निवासी हैं और दूसरे राज्यों में निवास करते हैं। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि के बाद पांच दिन के लिए अभ्यर्थियों को अपने आवेदन में गलती सुधारने का मौका भी दिया जाएगा। इसकी सूचना अलग से आयोग जारी करेगा।

मसूरी के बाद अब टिहरी में भी विंटर लाइन कार्निवल का आयोजन

उत्तराखंड में मसूरी विंटर लाइन कार्निवल की तर्ज पर अब टिहरी में भी विंटर लाइन कार्निवल का आयोजन किया जाएगा। बताया जा रहा है कि आगराखाल व्यापार मंडल और न्यू विजन फाउंडेशन की पहल पर यहां 3 दिवसीय विंटर लाइन कार्निवाल का आयोजन किया जाएगा। जिसके लिए तैयारियां शुरू हो गई है।
मिली जानकारी के अनुसार स्विट्जरलैंड की तरह टिहरी जिले के आगराखाल में भी साफ-साफ विंटर लाइन दिखाई देती है। ऐसे में आगराखाल व्यापार मंडल और न्यू विजन फाउंडेशन की पहल पर मसूरी की तर्ज पर यहां सितंबर माह के अंतिम सप्ताह में तीन दिन का विंटर लाइन कार्निवल शुरू होगा।
बताया जा रहा है कि आयोजकों ने विंटर लाइन कार्निवल को हर साल आगराखाल थौल महोत्सव के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इस दौरान यहां लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। बताया जा रहा है कि कार्निवाल में पहाड़ी व्यंजन, पहाड़ी रहन-सहन और खान-पान को लेकर भी नई पीढ़ी को जागरुक किया जाएगा. साथ ही उत्तराखंड की संस्कृति और पारंपरिक रीति रिवाजों को भी लोगों के सामने रखा जाएगा। माना जा रहा है कि उत्तराखंड में पर्यटन सबसे बड़ा रोजगार का जरिया बन सकता है। आयोजकों ने विंटर लाइन कार्निवाल टिहरी डीएम मयूर दीक्षित से मिलकर भी सहयोग मांगा है, जिस पर टिहरी डीएम ने उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया है।

हर्रावाला, रुड़की और लालकुआं रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास, पीएम ने रखीं आधारशिला

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से अमृत भारत रेलवे स्टेशन योजना के अंतर्गत देश भर के 508 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास की आधारशिला रखी। इन रेलवे स्टेशनों की पुनर्विकास की आधारशिला रखे जाने के अवसर पर हर्रावाला रेलवे स्टेशन में राज्यपाल गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे।
अमृत भारत रेलवे स्टेशन योजना के तहत 24470 करोड़ रूपये से अधिक की लागत से पुनर्विकसित किए जाने वाले ये 508 रेलवे स्टेशन 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हैं। इन रेलवे स्टेशनों में उत्तराखण्ड के तीन रेलवे स्टेशन हर्रावाला, रुड़की और लालकुआं शामिल हैं, जिनका पुनर्विकास किया जाएगा।
अमृत भारत रेलवे स्टेशनों में यात्रियों की आधुनिक सुविधाओं के साथ साथ विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जाएगा। स्टेशन बिल्डिंग के डिजाइन में स्थानीय संस्कृति, विरासत और वास्तुकला की झलक दिखाई देगी। इन स्टेशनों में यात्रियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के तीन रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास शिलान्यास के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते नौ वर्षों में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में रेलवे के क्षेत्र में बहुत तेज गति से कार्य हुए हैं। हम भारतीय रेल के स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रहे हैं। भारतीय रेलवे को नए भारत की आकांक्षाओं तथा आत्मनिर्भर भारत की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए तैयार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जहां एक ओर ब्रॉड गेज रेल लाइनों से मानव रहित रेल क्रॉसिंग को ख़त्म करके भारतीय रेलवे को पहले से कही अधिक सुरक्षित बनाया गया है, वहीं दूसरी ओर आज भारतीय रेलवे की रफ्तार भी पहले से कही अधिक बढ़ चुकी है, आत्मनिर्भरता और आधुनिकता के प्रतीक चिन्ह के रूप में वंदे भारत जैसी मेड इन इंडिया ट्रेनें रेल नेटवर्क का हिस्सा बन रही हैं। वर्तमान में देश के अछूते हिस्सों को रेल नेटवर्क से जोड़ने का काम भी तेजी से चल रहा है। रेल लाइनों के विद्युतिकरण का काम भी पहली बार इतनी तेजी के साथ किया जा रहा है। 2014 तक 1350 किलोमीटर रेलवे लाइन का विद्युतिकरण हुआ था पर 2014 से अब तक यह आंकड़ा 6,565 किलोमीटर तक पहुंच गया है। 2014 में देश में 1561 किलोमीटर के रेलवे ट्रेक बिछाए गए थे, जो 2023 में 5243 किलोमीटर हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड में पहाड़ तक ट्रेन पहुंचाने का सपना सच होने जा रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन का कार्य तेजी से हो रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास और नए बदलते भारत का प्रतिबिंब है। आज प्रधानमंत्री द्वारा किये गए 508 रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास शिलान्यास ने एक और नया कीर्तिमान बनाया है। आज जिस प्रकार से ना केवल रेलवे बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी इंफ्रास्ट्रक्चर को सशक्त बनाया जा रहा है, वो अभूतपूर्व है। आज रेल आधुनिक हो रही हैं, सुविधाओं को विश्वस्तरीय किया जा रहा है, रेलवे स्टेशन मॉडर्न विजन के साथ विकसित किए जा रहे हैं। जिन स्टेशनों के पुनर्विकास की नींव आज रखी गई है उन्हें स्थानीय संस्कृति, विरासत और वास्तुकला के आधार पर विकसित किया जाएगा जो अपने आप में एक सुखद अनुभव होगा।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक खजान दास, बृज भूषण गैरोला, सविता कपूर, पद्मश्री प्रीतम भरतवाण एवं भारतीय रेलवे के अधिकारी उपस्थित रहे।

बड़ी कार्रवाई, 6.4 करोड़ की जीएसटी चोरी का खुलासा

जीएसटी चोरी करने वाली फार्मा कंपनियों पर राज्य कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। सेंट्रल इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) ने देहरादून, हरिद्वार और रुड़की में नौ फार्मा कंपनियों पर छापा मारा है। इनमें चार कंपनियां फर्जी पाई गईं। प्रारंभिक कार्रवाई में 6.4 करोड़ की जीएसटी चोरी का खुलासा हुआ है। फार्मा कंपनियों ने अपनी गलती स्वीकारते हुए 30 लाख का टैक्स जमा किया है। विभाग ने कंपनियों के 2.43 करोड़ की आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) रोक दी है। साथ ही बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। राज्य कर आयुक्त एवं अपर सचिव अहमद इकबाल ने बताया कि शनिवार को विभाग की सीआईयू टीम ने जीएसटी चोरी करने वाली फार्मा मेन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग कंपनियों पर छापा मारा।
इस कार्रवाई में देहरादून, हरिद्वार व रुड़की की तीन-तीन कंपनियों के टैक्स संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच की गई। जीएसटी में पंजीकृत चार कंपनियां सिर्फ कागजों में चल रही हैं। फर्जी कंपनियों के नाम से बिल बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेकर सरकार को राजस्व की चपत लगाई जा रही थी। कंपनियों ने दवाइयों की पैकेजिंग सामग्री और अन्य सामान की सप्लाई दिल्ली, गुजरात व मध्य प्रदेश की कंपनियों से दर्शाई है। दस्तावेजों में माल परिवहन के कोई प्रमाण नहीं मिले। गुजरात में जिस फर्म के नाम से माल आपूर्ति के बिल बनाए जा रहे थे, उसका कोई कारोबार नहीं मिला। जांच में खुलासा हुआ कि फार्मा कंपनियों की ओर से ई-वे बिलों में दिल्ली से पैकेजिंग सामग्री की सप्लाई दिखाई गई। इसमें दिल्ली से ऑटो में 30 लाख की माल परिवहन दिखाया गया।
इतनी बड़ी राशि का माल ऑटो में परिवहन करना संभव नहीं है। इसके अलावा जिस ई-वे बिल में दिल्ली से माल उत्तराखंड के दर्शाया गया उस पर माल दूसरे राज्यों में भेजा गया। राज्य कर विभाग की जांच में यह भी खुलासा हुआ है फार्मा कंपनियों ने दिल्ली में जिस कंपनी से मेडिकल का सामान की आपूर्ति दर्शाई है वह स्क्रैब का कारोबार करती है। कबाड़ का काम करने वाली कंपनी दवाइयों के पैकेजिंग व अन्य सामान की सप्लाई कैसे कर सकती है। विभाग इन सभी मामलों की जांच कर रही है।

धामी कहीं सख्त तो कहीं दरियादिली के ले रहे फैसले

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार ऐसे फैसले ले रहे रहे जो राज्य के हित में है और लंबे समय से उनकी दरकार रही है। आज भी मुख्यमंत्री ने कई निर्णय लिये है।

अनुपस्थित चिकित्सकों की हुई सेवा समाप्त
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यस्थल से निरंतर अनुपस्थित रहने वाले आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर हरमीत कौर, डॉ प्रीति सारस्वत, डॉ. सर्वान्स मालवीय की सेवाएं समाप्त किये जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई है।

विभिन्न विकास कार्यों हेतु प्रदान की वित्तीय स्वीकृति
मुख्यमंत्री घोषणा के क्रम में मुख्यमंत्री ने विधानसभा क्षेत्र खटीमा में सैनिक मिलन केंद्र की स्थापना हेतु 162.26 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए प्रथम किस्त के रूप में 97.35 लाख रुपये, जनपद चमोली के विधानसभा क्षेत्र बद्रीनाथ में पुलना-1 में पार्किंग के निर्माण किए जाने हेतु 1 करोड़ 12 लाख के सापेक्ष अवशेष धनराशि 66.51 रुपए की स्वीकृति प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा क्षेत्र पिथौरागढ़ के ग्राम पंचायत सूरौण के छुर्मल में मेला स्थान के सौंदर्यीकरण एवं धर्मशाला के निर्माण हेतु 63 लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति के सापेक्ष प्रथम किश्त के रूप में 37.80 लाख, विधानसभा क्षेत्र चंपावत में घटकु-हिडिम्बा मंदिर को कुमाऊनी शैली में निर्माण कराए जाने हेतु 94.40 लाख लाख रुपए की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए प्रथम किस्त के रूप में 56.64 लाख रुपये तथा जनपद चंपावत के विकासखंड बाराकोट के ग्राम पंचायत खोला सुनार में टाइल्स निर्माण कार्य हेतु 23.07 लाख रुपये की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।

नगर पालिका परिषद बनी नगर पंचायत बेरीनाग
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिला पिथौरागढ़ के नगर पंचायत बेरीनाग क्षेत्र को नगर पालिका परिषद बेरीनाग नगरीय क्षेत्र के रूप में गठित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की है। इसके साथ ही शासन द्वारा नगर निगम हल्द्वानी-काठगोदाम जनपद नैनीताल के वार्डों के परिसीमन के सम्बन्ध में भी कतिपय दिशा निर्देश जारी किये गये हैं।

रक्षाबन्धन के अवसर पर महिलाओं को उपलब्ध रहेगी निःशुल्क बस सेवा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर रक्षाबंधन के अवसर पर आगामी 30 अगस्त को प्रदेश की महिलाओं को प्रदेश के अंदर उत्तराखण्ड परिवहन निगम द्वारा संचालित बसों के किराये में शत प्रतिशत छूट दी जायेगी। इस सम्बन्ध में सचिव परिवहन अरविंद सिंह ह्यांकी द्वारा प्रबंध निदेशक उत्तराखण्ड परिवहन निगम को निर्देश जारी कर दिये गये हैं।