मुक्तेश्वर ने किया 13 डिस्ट्रिक्ट-13 डेस्टिनेशन की संकल्पना को साकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा मुक्तेश्वर पहुंचकर 13 डिस्ट्रिक्ट-13 डेस्टिनेशन के अन्तर्गत शामिल मुक्तेश्वर का निरीक्षण किया गया। मुख्यमंत्री ने केएमवीएन मुक्तेश्वर पहुंचकर हिमदर्शन व्यू पॉइंट से लगभग 300 किलोमीटर में फैली हिमालयी पर्वत शिखर नन्दा देवी, त्रिशूल, नन्दकोट, नन्दा खाट, हाथीपर्वत, अन्नपूर्णा व पंचाचूली पर्वत को निहारा। कहा कि हिमालय पर्वत श्रृंखला विराट, विशाल, खूबसूरत और आध्यात्मिक है। हिमालय की ऊंचाई मन मे सकारात्मक का भाव लाता है।
मुक्तेश्वर को 13 डिस्ट्रिक्ट-13 डेस्टिनेशन के रूप में बेहतरीन तरीक़े से विकसित किया गया है जिससे यह देशियों के साथ ही विदेशियों की पहली पसंद बन रहा है। मुक्तेश्वर में महादेव मंदिर में सौंदर्यीकरण कार्य, चौली की जाली, मुक्तेश्वर गार्डन, हिमदर्शन, भालू गाड़ वाटरफॉल का विकास के साथ ही सरगाखेत में पुराने पुलिस थाने भवन का हैंडीक्राफ्ट कैफ़े के रूप में जीर्णाेद्धार किया गया है। लगभग 04 करोड 16 लाख की लागत से मुक्तेश्वर को विकसित किया गया है।
नैनीताल में बड़ी संख्या में आए पर्यटकों को वीवीआईपी व्यवस्थाओं से असुविधा न हो इसके दृष्टिगत सीएम पुष्कर सिंह धामी नैनीताल में पूर्व निर्धारित रात्रि विश्राम की जगह आज रात्रि प्रवास पर मुक्तेश्वर में ही करेंगे।
इस अवसर पर जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल, पुलिस कप्तान पंकज भट्ट, एम डी केएमवीएन विनीत तोमर, एम डी एबी बाजपेई, अपर जिलाधिकारी शिवचरण द्विवेदी, विधायक राम सिंह कैडा, जिला अध्यक्ष प्रताप बिष्ट, डॉक्टर अनिल कपूर डब्बू, देवेंद्र ढैला, भावना पांडे,रंजन बरगली, कार्तिक हरबोला, कनिष्ठ ढींगरा, प्रदीप बिष्ट, कुंदन चिलवाल, देवेंद्र बिष्ट, हेम बोरा, उपजिलाधिकारी धारी योगेश मेहरा, तहसीलदार तान्या रजवार, सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

पीएम मोदी ने किया उत्तरकाशी सहित 91 एफएम ट्रांसमीटरों का लोकार्पण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को देश के 18 राज्यों और 2 केन्द्र शासित प्रदेशों में 91 एफएम ट्रांसमीटरों का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअल प्रतिभाग किया। जिन 91 एफएम ट्रांसमीटरों का उद्घाटन किया गया उनमें उत्तरकाशी में स्थापित एफएम ट्रांसमीटर भी शामिल है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम के पश्चात कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आज जिन 91 एफएम ट्रासंमीटरों का उद्घाटन किया गया, इससे करोड़ों लोग जुड़ेंगे। इससे सरकार की विभिन्न योजनाओं से जुड़ने में लोगों को आसानी होगी। कनेक्टिविटी को बढ़ाने का यह एक मजबूत माध्यम है। उन्होंने कहा कि इससे सोशल एवं कल्चरल कनेटिविटी को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी सीमांत जनपद होने के नाते सीमांत क्षेत्र के लोगों को सुविधा होने के साथ ही एफएम ट्रासंमीटर की सुविधा होने से अब एक बड़े क्षेत्र को इसका लाभ मिलेगा।

आपरेशन कावेरी के तहत उत्तराखंड के 11 और लोगों ने की वापसी

सूडान में फंसे भारतीय नागरिकों को “आपरेशन कावेरी” के तहत भारत लाए जा रहे निकासी अभियान में शुक्रवार को भारतीय वायुसेना के विमान में उत्तराखंड के 11 लोग भी वापस नई दिल्ली पालम एयरपोर्ट पहुंचे। नई दिल्ली पहुंचने पर इन 11 लोगों का उत्तराखंड के स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा और सहायक प्रोटोकॉल अधिकारी मनोज जोशी, अमर बिष्ट ने स्वागत किया।
इस ग्रुप में गिरीश गरकोटी, अब्बल सिंह, भोला सिंह पंवार, अरविंद प्रसाद गैरोला, विनोद रावत, कुलदीप सिंह, गणेश सिंह, राजेश सिंह, बॉबी सिंह, नरेश कुमार और बिनोद कुमार सिंह शमिल हैं। इसके अलावा 3 और उत्तराखंडवासियों को कल देर रात्रि मुंबई एयरपोर्ट में उत्तराखंड के प्रतिनिधि चंद्रशेखर लिंगवाल द्वारा उत्तम सिंह रौतेला, प्रशांत कुमार चौधरी और योगेश को रिसीव किया गया। अभी तक “आपरेशन कावेरी” के तहत उत्तराखण्ड राज्य के कुल 24 लोगों को वापस लाया जा चुका है।

राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों को पेंशन देने का रास्ता साफ

राज्य आंदोलन के दौरान सात दिन जेल गए अथवा घायल हुए आंदोलनकारियों से इतर चिह्नित आंदोलनकारियों के आश्रित पति या पत्नी भी अब पेंशन के हकदार हो गए हैं।
यह पेंशन उन्हीं आश्रितों को मिलेगी, जिन आंदोलनकारियों की मृत्यु एक जून, 2016 से पहले हो चुकी है। उन्हें प्रतिमाह 4500 रुपये पेंशन देने का निर्णय लिया गया है। इन आश्रितों को अभी तक पेंशन के दायरे में नहीं लिया गया था।
अलग चिह्नित किए गए आंदोलनकारी, जिनकी मृत्यु एक जून, 2016 को पेंशन स्वीकृत होने का शासनादेश जारी होने से पहले हो चुकी है, उनके आश्रित पति या पत्नी को अब पेंशन मिलेगी। पहले यह आश्रित पेंशन 3100 रुपये प्रतिमाह थी। 17 दिसंबर, 2021 के शासनादेश में पेंशन राशि को बढ़ाकर प्रतिमाह 4500 रुपये किया गया है।

राज्य के युवाओं के लिए स्किल कोर्स को बढ़ाने जा रही राज्य सरकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास में स्विस एजुकेशन ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर क्लाडियो रैकनेलो के नेतृत्व में प्रतिनिधिमण्डल ने भेंट की। इस अवसर पर राज्य में युवाओं को पर्यटन एवं होटल व्यवसाय से संबंधित प्रशिक्षण के लिए चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पर्यटन के क्षेत्र में राज्य में अपार संभावनाएं हैं। इस दिशा में यहां के युवाओं में स्किल को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य में युवाओं को पर्यटन एवं होटल व्यवसाय के क्षेत्र में प्रशिक्षित करने के लिए, यदि स्विटजरलैण्ड से कुछ अच्छे प्रशिक्षकों की व्यवस्था हो सकती है, तो इस दिशा में कार्य किया जाए। राज्य में प्रशिक्षण के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था सरकार की ओर से की जायेगी। युवाओं को सर्टिफिकेट कोर्स की अच्छी सुविधा मिलने से उनके हुनर को बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत राज्य में 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए बेहतर व्यावसायिक पाठ्यक्रम के लिए भी स्विस एजुकेशन ग्रुप से मदद ली जाए। विद्यार्थियों को बेहतर व्यावसायिक शिक्षा मिले इसके लिए विस्तृत योजना बनाई जाए। राज्य में पर्यटन के साथ-साथ साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पर्यटन, शिक्षा, साहसिक पर्यटन की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए स्विटजरलैण्ड से यदि कोई प्रतिनिधिमण्डल आना चाहता है, तो उनको देवभूमि उत्तराखण्ड में सरकार की ओर से पूरा सहयोग दिया जायेगा।
स्विस एजुकेशन ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर क्लाडियो रैकनेलो ने कहा कि स्विट्जरलैंड में आध्यात्मिक गतिविधियों के क्षेत्र में कार्य करने की काफी संभावनाएं हैं। यदि वहां पर आध्यात्मिक गतिविधियों पर आधारित केन्द्रों में उत्तराखण्ड से इस क्षेत्र के विशेषज्ञ कार्य करें, तो इसमें कार्य करने के लिए अनेक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की और से जो भी सहयोग मांगा जायेगा, उसे पूरा करने के हर संभव प्रयास किये जाएंगे।
इस अवसर पर स्वामी अभय दास, सूर्य प्रताप सिंह, सचिव शैलेश बगोली, रविनाथ रमन, सचिन कुर्वे, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी उपस्थित रहे।

आईटीबीपी के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से की मुलाकात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आईटीबीपी के आईजी संजय गुंज्याल के नेतृत्व में आईटीबीपी के अधिकारियों ने भेंट की। उन्होंने आईटीबीपी से संबंधित विभिन्न कार्यकलापों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी।
मुख्यमंत्री ने आईटीबीपी द्वारा संचालित कार्यों की सराहना करते हुए आईटीबीपी से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर राज्य सरकार के स्तर पर होने वाली कार्यवाही में शीघ्रता का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने आईटीबीपी के असिस्टेंट कमांडेट शहीद टीकम सिंह नेगी की पत्नी को सेवायोजित किये जाने के संबंध में भी कहा कि इस प्रकरण में भी राज्य सरकार पूरी तरह से शहीद के परिवार के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश सेवा में संलग्न सेना एवं अर्द्धसैनिक बलों से संबंधित कार्यों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जायेगा उन्होंने देश सेवा के लिये सवोच्च बलिदान देने वाले शहीदों के सम्मान में सड़क व स्कूलों आदि के नाम उनके नाम पर रखे जानी की बात कही।
आईजी गुंज्याल ने मुख्यमंत्री से आईटीबीपी के फ्रंटियर हेडक्वार्टर के लिये भू परिवर्तन की स्वीकृति तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ किये जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस बार बदरीनाथ, केदारनाथ में कपाट बंद होने के बाद सुरक्षा की जिम्मेदारी आईटीबीपी को सौंपी गयी थी। उन्होंने बॉर्डर आउटपोस्ट से संबंधित प्रकरणों के निस्तारण का अनुरोध भी मुख्यमंत्री से किया तथा बताया कि उत्तराखण्ड के निवासियों का आईटीबीपी में सक्रिय योगदान रहा है।
इस अवसर पर डी.आई.जी. रंजीत राणा, डी.आई.जी. मनु महाराज, डी.आई.जी. आर.के. वर्मा, डी.आई.जी. आर.के. नरवाल, सेनानी पीयूष पुष्कर, अरुण रौथाण तथा पी.आर.ओ राजीव नेगी भी उपस्थित थे।

वित्त मंत्री अग्रवाल ने 188 करोड़ रूपये का अतिरिक्त अनुदान मिलने पर केन्द्र का आभार जताया

स्पेशल असिस्टेंट टू स्टेट फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट योजना के अंतर्गत उत्तराखंड को केंद्र सरकार से 188 करोड़ रूपये का अतिरिक्त अनुदान मिला है। इसके लिए शहरी विकास व आवास मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है।
बता दें कि उत्तराखंड ने योजना के अंतर्गत छह घटकों की अनुपालन आख्या का प्रस्तुतीकरण भारत सरकार को प्रस्तुत किया था। जिसमें राज्य को अच्छी प्रगति के चलते 188 करोड़ रूपये की प्रोत्साहन राशि (अतिरिक्त अनुदान) दिया गया है।
मंत्री डा. अग्रवाल ने बताया कि छह घटकों में प्रथम घटक मार्डनाइजेशन आफ बिल्डिंग बाइलॉज है। इसके अन्तर्गत एकल आवासीय भवनों के लिए नेशनल बिल्डिंग कोड (एनबीसी) का विकल्प आवेदक को दिया गया है। जिसके अनुसार 500 वर्ग मीटर तक के भूखण्ड क्षेत्रफल में भू आच्छादन की अधिकतम सीमा को समाप्त किया गया है। उन्होंने बताया कि द्वितीय घटक टीडीआर के सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा अडोप्शन आफ ट्रांसफेरेबल डेवलेपमेंट राइट्स पॉलिसी जो कि भारत सरकार द्वारा मॉडल रूप में प्रेषित की गयी थी, को राज्य सरकार द्वारा लागू किया गया है। इस पॉलिसी के अन्तर्गत डवलपमेन्ट राइट्स को ट्रांसफर किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि तृतीय घटक एनएपी व टीपीएस के सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा लोकल एरिया प्लान (एलएपी) के अन्तर्गत आढ़त बाजार व टाउन प्लानिंग स्कीम (टीपीएस) अन्तर्गत थानो क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा भारत सरकार के सहयोग से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चतुर्थ घटक टीओडी के सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा भारत सरकार की ट्रांजिट ओरियन्टेड डेवलेपमेन्ट (टीओडी) पॉलिसी को प्रभावी कर दिया गया है। इस पॉलिसी के अन्तर्गत शहरों में परागमन उन्मुख विकास जिसमें भूमि का उपयोग और परिवहन की योजना को एकीकृत करना है।
उन्होंने बताया कि पंचम घटक स्पोन्ज सिटी के संदर्भ में राज्य सरकार द्वारा 19 वॉटर बॉडीज को पुनरोत्थान कार्य किया गया है। उन्होंने बताया कि छठा घटक पब्लिक ट्रांसपोर्ट में टैक्स को समाप्त किया जाना के सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा टैक्स को समाप्त कर कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि सभी छह घटकों पर शहरी विकास और आवास विभाग के संयुक्त प्रयासों ने भारत सरकार ने अच्छी प्रगति राज्य में पाई है, जिसके चलते राज्य को 188 करोड़ रूपये का अतिरिक्त अनुदान दिया गया है। उन्होंने अनुदान राशि मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केदं्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार प्रकट किया है।

मिलेट्स को बढ़ावा मिलने से संवरेगी उत्तराखंड की तकदीर-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को मसूरी के एक होटल में मिलेट्स-2023 के अन्तर्गत आयोजित ‘क्षमता और अवसर’ राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न राज्यों से आये अतिथियों का स्वागत किय। उन्होंने कहा कि इस कान्फ्रेंस में विशेषज्ञों द्वारा जो मंथन किया जायेगा अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष को सफल बनाने में यह कारगर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ओर मिलेट्स किसानों के लिए अपनी कम लागत क्षमता के कारण उपयोगी हैं वहीं ये पोशक तत्वों से भरपूर होने के कारण आज के बदलते परिवेश में हम सबके लिए भी अति-आवश्यक हैं। इस तरह के आयोजनों से न केवल मिलेट्स के प्रचार प्रसार में सहायता मिलेगी बल्कि इनसे उत्तराखंड में मोटे अनाज की खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे लिए बड़े गर्व का विषय है कि भारत के प्रस्ताव और गंभीर प्रयासों के बाद ही संयुक्त राष्ट्र ने 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित किया। भारत के बहुत से राज्यों में मोटे अनाज की खेती प्रचुर मात्रा में होती है, परंतु पहले इसके उचित दाम किसानों को नहीं मिलते थे। अब तस्वीर बदल रही है, इसका कारण लोगों का मोटे अनाजों को लेकर बदलता नजरिया है। आज मिलेट्स को लेकर देश में कई स्टार्टअप भी प्रारंभ हुए हैं, जो न केवल किसानों को फायदा पहुंचा रहे हैं बल्कि लोगों को रोजगार भी दिला रहे हैं। इसलिए प्रधानमंत्री ने इसे श्री अन्न की संज्ञा दी है। जब हम किसी संकल्प को आगे बढ़ाते हैं तो उसे सिद्धि तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम होती है। श्री अन्न केवल खेती या खाने तक सीमित नहीं है, जो लोग भारत की परंपराओं से परिचित हैं वे जानते हैं कि हमारे यहां किसी के आगे ’’श्री’’ ऐसे ही नहीं जुड़ता है। जहां ’’श्री’’ होता है वहां समृद्धि भी होती है,समग्रता भी होती है और विजय भी होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री अन्न भारत में समग्र विकास का माध्यम बन रहा है इसमे गांव और गरीब जुड़े हैं और अब देश का प्रत्येक नागरिक भी जुड़ रहा है। श्री अन्न देश के छोटे किसानों के समृद्धि का द्वार है। देश के करोड़ों लोगों के पोषण का कर्णधार है। देश के आदिवासी समाज का सत्कार है। केमिकल मुक्त खेती का बड़ा आधार है और क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों से निपटने में मददगार है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने श्री अन्न को वैश्विक आंदोलन बनाने के लिए अथक प्रयास किए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ही नेतृत्व में वर्ष 2018 में हमने मोटे अनाज को “पोषक अनाज“ घोषित किया था। इसकी खेती के प्रति लोगों और किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने मिलकर बाजार में रुचि पैदा करने के लिए भी विशेष अभियान चलाने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र में मिलेट की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित करने का कार्य कर रही है। राज्य के पर्वतीय जनपदों के कृषकों से सहकारिता विभाग एवं उत्तराखण्ड कृषि विपणन बोर्ड के माध्यम से मंडुवा, झंगोरा, चौलाई जैसे मोटे अनाजों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रही है। प्रत्येक वर्ष सहकारिता एवं विपणन बोर्ड द्वारा पर्वतीय जिलों में क्रय केन्द्र संचालित करके पर्वतीय जिलों के कृषकों से उनके गांव के निकट ही मंडुवा, झंगोरा आदि की खरीद करके किसानों को उनके खाते में ऑनलाइन भुगतान किया जा रहा है, इससे न सिर्फ किसानों की आय में बढोतरी हो रही है बल्कि मिलेट उत्पादों के उत्पादन हेतु किसान प्रोत्साहित भी हो रहे हैं। उत्तराखण्ड की जलवायु के अनुसार मिलेट की खेती को प्रोत्साहित करना अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है, ताकि हमारा प्रदेश मिलेट उत्पादन में शीर्ष स्थान प्राप्त करे एवं राज्य की आर्थिक उन्नति में भागीदार बने। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि लोक पर्वों और त्योहारों में मिलेट उत्पादों का उपयोग अवश्य करें।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कृषि विपणन बोर्डों का राष्ट्रीय परिषद (कौसाम्ब) द्वारा मिलेट्स पर आधारित यह राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। आज पूरे विश्व में मोटे अनाजों को लेकर एक नई अलख जगी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरगामी सोच को परिलक्षित करते हुए भारत में श्री अन्न को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। प्रदेश में मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में दो बार मिलेट भोज का आयोजन किया जा चुका है। विभिन्न सम्मेलनों और सेमिनारों का आयोजन कर मिलेट्स का प्रचार-प्रसार एवं कृषकों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार ने मिलेट्स के तहत मंडुवे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 35.78 रूपये तय किया है और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से राशन कार्ड धारकों को भी वितरित किया जा रहा है। कृषि मंत्री ने कहा कि मई माह में देहरादून एवं हल्द्वानी में मिलेट्स को बढ़ावा देने के बड़े आयोजन किये जायेंगे। 2025 तक मिलेट उत्पादन को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल, कौसाम्ब के उपाध्यक्ष और गोवा मण्डी परिषद के अध्यक्ष प्रकाश शंकर, असम मण्डी परिषद के अध्यक्ष मनोज बारूह, हरियाणा मण्डी परिषद के अध्यक्ष आदित्य देवीलाल चौटाला, कौसाम्ब के एमडी डॉ. जे. एस. यादव, उत्तराखण्ड मण्डी परिषद के एमडी आशीष भटगाई एवं विभिन्न राज्यों से आये विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

हमारा राज्य देश के लिए हर क्षेत्र में एक मॉडल राज्य बन सकता है-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सर्वे ऑफ इण्डिया सभागार, देहरादून में भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित ए हेल्प योजनान्तर्गत पशु सखी के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा 23 ए हेल्प कार्यकत्रियों को ए हेल्प किट वितरित किए गए।
पशु सखी प्रशिक्षण के पश्चात ए हेल्प कार्यकत्री पशुपालन विभाग एवं पशुपालकों के बीच संयोजक कड़ी का काम करेंगी तथा पशुपालकों को सरकार की सभी योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध करायेगी। ए हेल्प योजना द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्यों को विभिन्न योजनाओं में भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। ए हेल्प कार्यकत्री, क्षेत्र के समस्त पशुधन और कुक्कुट संख्या का रिकॉर्ड भी ब्लॉक स्तर के पशु चिकित्सकों के साथ साझा करेंगी। इससे पशुपालन गतिविधियों का क्रियान्वयन आसान तो होगा ही दुग्ध उत्पादन पर भी सीधा असर पड़ेगा। इसके अलावा वे चारा उत्पादन के लिये पशुपालकों को प्रोत्साहित भी करेंगी जिससे वे चारे की पूर्ति के लिए आत्मनिर्भर बनें। प्रत्येक ए-हेल्प कार्यकत्री को फर्स्ट-एड किट भी दी जायेगी जिससे वे पशुपालकों की प्रारंभिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकें।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि उत्तराखण्ड, मध्य प्रदेश और कश्मीर के बाद पशु सखी ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड को हर क्षेत्र में मॉडल स्टेट बनाया जा सकता है। भारत सरकार की विभिन्न क्षेत्रों की योजनाओं का उत्तराखण्ड में शत प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने की अच्छी संभावनाएं हैं। यह देश के लिए हर क्षेत्र में एक मॉडल राज्य बन सकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि एक बेटे व भाई के रूप में वह राज्य की मातृ शक्ति का आत्मविश्वास बनाये रखने व सेवा के लिए सदैव तत्पर है। किसी भी समाज की रीढ़ उसकी सशक्त महिलाएं ही हैं, यदि किसी राज्य की नारी शक्ति प्रगति कर रही है तो उस राज्य का विकास सुनिश्चित है, उसे कोई रोक नहीं सकता। हमारे प्रदेश के निर्माण में महिलाओं ने अपना विशेष योगदान दिया है। एक ओर जहां प्रदेश की मातृशक्ति ने पूरे समाज को विपरीत परिस्थितियों में जीना सिखाया, जूझना सिखाया, वहीं दूसरी ओर हर परिस्थिति में जीतना भी सिखाया है। मुझे प्रसन्नता है कि आज प्रदेश के दुर्गम गांव-गांव में महिलाएं सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाकर कुटीर उद्योगों के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति प्रदान कर रही हैं। महिलाओं के पास कौशल की कभी कोई कमी नहीं रही और अब यही कौशल उनकी और उनके परिवारों की आर्थिकी को शक्ति प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की महिलाएं मल्टीनेशनल कम्पनियों के उत्पादों से भी बेहतर उत्पादों का निर्माण कर रही है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्वकाल में आज देशभर में करीब 23 करोड़ महिलाओं को जन धन खातों के साथ ही सर्वाधिक विभिन्न योजनाओं का लाभ सीधे महिला शक्ति को मिल रहा है। आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढाने का कार्य किया है। आज वित्तीय समावेश से लेकर सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा से लेकर आवास, शिक्षा से लेकर उद्यमिता तक, हमारी नारी शक्ति को भारत की विकास यात्रा में सबसे आगे रखने के लिए कई प्रयास किए गए हैं। यह प्रयास आने वाले समय में और भी अधिक उत्साह के साथ जारी रहेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार ने भी सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण का संपूर्ण लाभ देने के लिए जिस तेज गति से काम किया, उससे आप राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को समझ सकते हैं। आज प्रदेश की समस्त माताओं और बहनों ने अपने अथक परिश्रम से जहां एक ओर आर्थिक रूप से अपने आपको आत्मनिर्भर बनाने का कार्य किया है वहीं देवभूमि की सभ्यता और संस्कृति को भी जीवंत रखा है। पूर्ण विश्वास है कि आज प्रारंभ हो रही यह विशिष्ट योजना हमारी सरकार के “सशक्त मातृशक्ति सशक्त राज्य“ के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगी। जिस प्रकार मातृ शक्ति ने समय-समय पर अपनी क्षमताओं से प्रदेश का गौरव और सम्मान बढ़ाने का कार्य किया है, उसी प्रकार हमारी सरकार के सर्वश्रेष्ठ उत्तराखण्ड निर्माण के “विकल्प रहित संकल्प“ की सिद्धि के लिए भी मातृ शक्ति अपना योगदान सुनिश्चित करेंगी।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि प्रधानमंत्री के किसानों, पशुपालकों की आय दुगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में यह एक बड़ा कदम हैं। केन्द्र सरकार द्वारा उत्तराखण्ड सरकार को हर क्षेत्र की भांति पशुपालन में भी अभूतपूर्व सहयोग मिल रहा है। यह योजना मातृ शक्ति के सशक्तीकरण तथा स्वालम्बन हेतु महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर भारत सरकार से अपर सचिव वर्षा जोशी, सचिव पशुपालन उत्तराखण्ड डा. बी वी आर सी पुरुषोत्तम, उत्तराखण्ड गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेन्द्र अंथवाल व विभिन्न महिला स्वयं सहायता समूहों व महिला मंगल दलों के सदस्य व महिलाएं मौजूद रही।

आयोग ने दी जानकारी, शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई वन आरक्षी भर्ती परीक्षा

प्रदेशभर के 625 केंद्रों में वन आरक्षी भर्ती परीक्षा 2022 शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गई। परीक्षा में 1,42,973 अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया, जबकि 63,417 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। यह जानकारी उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) ने परीक्षा संपन्न होने के बाद दी है।
आयोग के मुताबिक, रविवार को वन आरक्षी भर्ती 2022 के लिखित परीक्षा राज्य के 13 जनपदों में स्थित 625 परीक्षा केंद्रों में शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न की गई। बताया कि 2,06,390 अभ्यर्थियों ने फार्म भरे थे, जबकि 1,42,973 अभ्यर्थियों परीक्षा में प्रतिभाग भाग किया। 63417 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।
बता दें, आज रविवार 9 अप्रैल 2023 को वन आरक्षी परीक्षा 2022 की लिखित परीक्षा (वस्तुनिष्ठ प्रकार) का आयोजन पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न 1 बजे तक एकल सत्र में किया गया। परीक्षा राज्य के 13 जनपदों में 625 परीक्षा केन्द्रों में निर्विघ्न शांतिपूर्वक संपन्न हुई। उक्त लिखित परीक्षा (वस्तुनिष्ठ प्रकार) में कुल पंजीकृत 2,06,390 अभ्यर्थियों में से 1,42,973 अभ्यर्थी उपस्थित रहे तथा 63,417 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। परीक्षा में उपस्थित अभ्यर्थियों का कुल प्रतिशत 69.27 रहा है।