ड्रॉन के क्षेत्र में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाने चाहिएः सीएस

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने मंगलवार को सचिवालय में स्वास्थ्य विभाग और कौशल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ द्वितीय मुख्य सचिव सम्मेलन के बिन्दुओं के अनुपालन की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सम्मेलन के बिन्दुओं का अनुपालन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश देते हुए टाईमलाइन निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पोषण मिशन को सफल बनाने के लिए व्यवहारिक कदम उठाए जाएं। उन्होंने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों में अधिक से अधिक तकनीक का प्रयोग किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न कार्यक्रमों के अन्तर्गत विभिन्न मोबाईल ऐप के बजाय सभी ऐप्स को इंटीग्रेट कर एक ऐप तैयार किया जाए। मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को महिलाओं के प्रसव पूर्व और प्रसव के उपरान्त आवश्यक विभिन्न जानकारियों के सम्बन्ध में जागरूक करने हेतु वीडियो बनाकर सभी अस्पतालों में प्रदर्शित की जाए। इसके साथ ही विभिन्न रोगों और उनसे बचाव के सम्बन्ध में भी छोटी-छोटी वीडियो बनाकर प्रदर्शित करने की व्यवस्था की जाए।

मुख्य सचिव ने कौशल विकास विभाग को निर्देश दिए कि सभी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के छात्रों को उद्योगों के माध्यम से प्रशिक्षण दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि सभी छात्र-छात्राओं को इंडस्ट्री में भेजकर एक माह के प्रशिक्षण हेतु योजना तैयार की जाए। इसके लिए विभिन्न उद्योगों से समझौते किए जाएं। इस दौरान छात्रों के रूकने की व्यवस्था विभाग द्वारा करायी जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि छात्र-छात्राओं का 50-60 प्रतिशत से अधिक प्रशिक्षण उद्योगों के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रॉन के क्षेत्र में काफी सम्भावनाएं हैं। ड्रॉन के क्षेत्र में विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्यक्रमों की पोर्टल बेस्ड मॉनिटरिंग किए जाने के भी निर्देश दिए।

इस अवसर पर सचिव आर. राजेश कुमार एवं विजय कुमार यादव सहित सम्बन्धित विभागों के उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

आयोग ने कहा-अफवाह का हिस्सा ना बनें, नही तो नए अध्यादेश के तहत होगी कार्रवाई

राजस्व उप निरीक्षक परीक्षा 2022 की लिखित परीक्षा दिनांक 12 फरवरी, 2023 (रविवार) को पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न 01 बजे तक राज्य के 13 जनपदों में कुल 498 परीक्षा केन्द्रों पर सकुशल आयोजित की गयी। उक्त परीक्षा में कुल आवेदित अभ्यर्थियों 1,58,210 के सापेक्ष 1,03,730 अभ्यर्थी उपस्थित हुए। उक्त उपस्थिति 65.60 प्रतिशत रही।
कतिपय अभ्यर्थियों द्वारा प्रश्नपत्र की पेपर सील की गोपनीयता के सम्बन्ध में व्यक्त संदेह और भ्रांतियों के सम्बन्ध में अवगत कराना है कि प्रश्नपत्र प्रेस द्वारा बॉक्सों शील्ड किया जाता है। उक्त बॉक्सों के अंतर्गत लिफाफों में (पाली बैग्स) प्रश्न पत्र शील्ड होते हैं। गोपनीय सामग्री के प्रेस से आयोग में उपलब्ध होने व आयोग से जनपदों को उपलब्ध कराये जाने तथा परीक्षा तिथि को कोषागार से सेक्टर मजिस्ट्रेट के माध्यम से परीक्षा केन्द्रों को उपलब्ध कराते समय अर्थात प्रत्येक स्तर पर वीडियोग्राफी की जाती है। उक्त गोपनीय सामग्री वाले बॉक्स प्रधानाचार्य व केन्द्र प्रभारी के कक्ष में कक्ष निरीक्षक की उपस्थिति में खोले जाते हैं, जिसकी वीडियोग्राफी की जाती है। प्रत्येक प्रश्नपत्र पर पेपर शील लगी होती है, जिसकी कभी-कभी यातायात के दौरान टूटने की संभावना हो सकती है। उक्त प्रश्नपुस्तिका की पेपर शील को कक्ष निरीक्षक के निर्देश पर अभ्यर्थियों द्वारा खोला जाता है ताकि सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर व समय मिल सके। अतः प्रश्नपत्र की गोपनीयता संरक्षित है तथा कतिपय अभ्यर्थियों द्वारा व्यक्त संदेह निर्मूल है। कतिपय लोगों द्वारा इस विषय मे भ्रामक खबरें फैलाई जा रही है, जिनके विरुद्ध नए नकल विरोधी अध्यादेश के सुसंगत प्राविधानो के तहत कार्यवाही की जाएगी।

एनएच के खिलाफ शहर के व्यापारी लामबंद

एनएच के अधिकारी किसी भी तरह की कारवाई से पूर्व अपनी स्थिति स्पष्ट करें। यह मांग राष्ट्रीय राजमार्ग 58 के व्यापारियों ने रेलवे रोड़ स्थित नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष ललित मोहन मिश्र के कार्यालय में आहुत बैठक में एक स्वर में कही।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए व्यापार मंडल के अध्यक्ष ललित मोहन मिश्र ने कहा कि लोनिवि द्वारा अनेकों बार पूर्व के वर्षों में सड़कों की स्थिति विज्ञप्ति के माध्यम से जारी की गई है। जिसके आधार पर ही हरिद्वार रोड़ पर दुकानों एवं भवनों का निर्माण हुआ है। उसी आधार पर एन एच को कारवाई करनी चाहिए। उन्होंने व्यापारियों को कहा कि नियम विपरीत यदि प्रशासन द्वारा कारवाई की गई तो उसका पुरजोर विरोध किया जायेगा।
बैठक में रवि जैन, सुनील गुप्ता, शेखर कुमार, आशु डंग, अश्वनी गुप्ता, विजय सिंघल, ललित इच्पिलानि, दीपक गुप्ता, प्रदीप कुमार, अतुल सरीन, कमल अरोड़ा, विजेंद्र गौड़, सुनील ग्रोवर, कपिल कुमार, विनय गॉड, अंकित गॉड, किशोर मेहता, नरेश अग्रवाल, अनिल कुमार, शैलेंद्र चैहान, अखिल गुप्ता आदि उपस्थित रहे।

सीबीआई जांच हुई तो भर्ती प्रक्रिया पर लग सकता है लंबा ब्रेक, युवाओं को भ्रमित कर रही कांग्रेस

प्रदेश में पुष्कर सिंह धामी सरकार लगातार जनहित के कार्य कर रही है। भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी का मामला सामने आने पर सरकार ने तुरंत कार्रवाई की है। एक ओर जहां दोषियों को गिरफ्तार किया गया वहीं, उनकी संपत्ति तक कुर्क की हैं। इन 22 सालों में सत्ताधीशों के द्वारा एक ठोस कानून ना होने के चलते आरोपितों को जमानत भी मिली लेकिन सरकार ने मामले को ठंडे बस्ते में ना डालकर नकलरोधी सख्त कानून का ड्राफ्ट तैयार किया। एक दिन पहले ही राज्यपाल ने इस अध्यादेश को मंजूरी भी दे दी है। इसके बावजूद कांग्रेस युवाओं को बरगला कर सरकार पर निशाना साधने का प्रयास कर रही है। परीक्षा धांधली की सीबीआई जांच का तर्क औचित्यहीन है और इससे युवाओं को ही नुकसान होने का अंदेशा लगाया जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि कांग्रेस युवाओं के आंदोलन को हाईजैक करना चाहती है। उनका कहना है कि पुलिस ने पटवारी और लेखपाल परीक्षा के पेपर लीक करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की। सीएम धामी ने संदेश दिया है कि गुनाहगार चाहे पार्टी का ही क्यों न हो, उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी। परीक्षा की जांच को लेकर जब हाईकोर्ट ने एक याचिका निस्तारित करते हुए माना है कि जांच सही दिशा में हो रही है। रोज मामले में नया अपडेट आ रहा है और अधिकतम गिरफ्तारियां हो रही है। तो सीबीआई जांच की ही मांग करना कितना सही है। अब सवाल ये भी है कि ऐसे में कांग्रेस बेवजह मामले को तूल क्यो दे रही है। कांग्रेस बेरोजगार युवाओं को बरगला कर उनका आंदोलन हड़पने की कोशिश में जुटी है।

’’सीबीआई जांच का असर’’
जानकारों की मानें तो अगर मुख्यमंत्री पेपर लीक कांड की जांच सीबीआई को दे देते है तो जांच प्रक्रिया में लंबा समय लग सकता है। ऐसे में भर्ती परीक्षा प्रक्रिया भी प्रभावित होगी क्योकि सीबीआई जांच नही तो परीक्षा नही जैसे विचार के साथ बेरोजगारों को भ्रमित किया जा रहा है। ऐसा भी माना जा रहा है भर्ती प्रक्रिया लंबे समय तक बाधित रहे। ऐसे में सिर्फ सीबीआई जांच की मांग पर ही अड़े रहना युवाओं के साथ एक छलावा है। जबकि पुलिस ने तुरंत आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। क्या जनता या युवा चाहते हैं कि राज्य में भर्ती प्रक्रिया बाधित हो। जांच पूरी होने तक प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित ना हो इस षडयंत्र का अब खुलासा होने लगा है।

’’कांग्रेस का दोहरा चरित्र उजागर’’
कांग्रेस अक्सर कहती है कि सीबीआई केंद्र सरकार का तोता है। सीबीआई पर विश्वास नहीं किया जा सकता। तो ऐसे में कांग्रेस किस आधार पर सीबीआई जांच की मांग कर रही है, यह बड़ा सवाल है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपील की है कि वह राजनीतिक दलों के बहकावे में न आए। अब स्पष्ट हो गया है कि यह सिंडिकेट पिछले 10 वर्षों से राज्य में सक्रिय रहा। इन 10 वर्षों में 5 साल कांग्रेस की सरकार भी रही है। लेकिन किसी भी सरकार ने इतनी गहराई तक जाकर कोई कार्यवाही नहीं की। यहां गौर करने वाली बात है कि धामी सरकार के संज्ञान में आने के बाद सरकार इस सिंडिकेट की जड़ तक जा रही है जिससे कि आने वाली कई पीढ़ियों को इसका लाभ मिल सके। आज के युवाओं को समझना होगा जांच भी जारी रहनी चाहिए और प्रतियोगी परीक्षाएं भी गतिमान रहनी चाहिए।

’’आयोग की भी सुनिए’’
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग हरिद्वार स्पष्ट कर चुका है कि उन्होंने नए सिरे से सारे पेपर बना दिए हैं और आगामी परीक्षाओं के लिए सारे नए पेपर बन रहे हैं। व्यवस्थाओं में काफी सुधार भी किया गया है। युवाओं की बात मानते हुए परीक्षा नियंत्रक को भी तत्काल हटा दिया गया है। तो ऐसे में सिर्फ सीबीआई जांच की मांग करना राज्य के युवाओं के साथ धोखा नही है। अभी हाल ही में पटवारी परीक्षा में धांधली की जांच भी सिटिंग जज की निगरानी में करने की मांग भी धामी सरकार ने मान ली है। ऐसे में युवाओं को समझना होगा कि पिछले 10 सालों का सिंडिकेट की कमर टूट चुकी है और यह उत्तराखंड में अपनी अंतिम सांसे गिन रहा है। ऐसे में सीबीआई जांच की ही मांग करना और परीक्षाओं को लंबे समय तक रुकवाये रखना क्या राज्य के युवाओं के हित में होगा?

’’एसटीएफ के खुलासे में कई संगठन भी’’
यह गिरोह कितना मजबूत है इस बात का अंदाजा आप इसी से लगाइए कि जांच में पता चल रहा है कि नकल माफिया, कोचिंग सेंटर और अब कई संगठन के भी नामों का खुलासा हो रहा है। ऐसे में जो साहस युवा मुख्यमंत्री ने युवाओं को लेकर दिखाया है कि इन परीक्षाओं में धांधली की जांच का, उस पर विश्वास करना आज बहतु जरुरी हो गया है।

’’कांग्रेस का सत्ता वापसी का सपना और युवा धामी से खतरा’’
उत्तराखंड में सरकार की वापसी कांग्रेस को पच नही पा रही है। देशभर में अपनी राजनीतिक साख खो चुकी कांग्रेस को बेरोजगार युवाओं के आंदोलन को हाईजैक कर रही है। इसके पीछे षड्यंत्र है कि नौकरियों का पिटारा खोलने वाली धामी सरकार युवाओं की लोकप्रिय है। 30 प्रतिशत महिला आरक्षण जैसे मजबूत और ठोस निर्णय लेकर राज्य की भावनाओं के अनुरुप लगातार कार्य किया जा रहा है और अपने प्रदेश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित किया जा रहा है। ऐसे में इस आंदोलन को हाईजैक कर अपने कार्यकर्ताओं के द्वारा माहौल बिगाड़ने का प्रयास हो रहा।

सीएम ने बेरोजगार संघ से मुलाकात कर उचित कार्रवाई का दिया आश्वासन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में बेरोजगार संघ के प्रतिनिधियों ने भेंट की। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि गत दिनों देहरादून में धरना प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों पर विभिन्न धाराओं के तहत करवाई चल रही है, उनको कल होने वाली लेखपाल भर्ती की लिखित परीक्षा की अनुमति दी जाए। मुख्यमंत्री ने डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि इन बच्चों को लेखपाल भर्ती की लिखित परीक्षा देने के लिए निर्धारित परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने और वहां से लाने की व्यवस्था की जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए राज्य में नकल विरोधी अध्यादेश लागू किया जा चुका है। भर्ती परीक्षाओं में तेजी लाई जा रहा है। राज्य के युवाओं को लगातार रोजगार के अवसर मिले, इसके लिए रिक्त पदों पर जल्द और विज्ञप्तियां निकाली जाएंगी। आगामी परीक्षाओं के लिए कैलेंडर जारी किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में जो नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, उसमें गड़बड़ी करने वालों को सख्त सजा का प्राविधान किया गया है। उन्होंने सभी प्रदेश के युवाओं से अपील की है कि पूरी मेहनत से परीक्षा की तैयारी में जुट जाएं।
बेरोजगार संघ के प्रतिनिधियों ने राज्य में सख्त नकल विरोधी अध्यादेश लागू किए जाने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। भर्ती परीक्षाओं के लिए कैलेंडर जारी किए जाने की पहल की भी उन्होंने सराहना की।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, डीजीपी अशोक कुमार, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, बेरोजगार संघ से निधि गोस्वामी, शैलेश सती, खजान राणा, दीपक बेलवाल, बृजमोहन जोशी, सतपाल सिंह एवं आलोक भट्ट मौजूद रहे।

राज्यपाल ने 24 घंटे के अंदर ही धामी सरकार के अध्यादेश को दी मंजूरी

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने उत्तराखण्ड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अध्यादेश 2023 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही ये अध्यादेश प्रदेश में लागू हो गया है।
उत्तराखण्ड प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता एवं शुचिता को सुनिश्चित करने के लिए दिनांक 09 फरवरी, 2023 को उत्तराखण्ड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अध्यादेश 2023 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा अनुमोदन प्रदान करते हुए माननीय राज्यपाल की मंजूरी के लिए अग्रसारित किया था। इस अध्यादेश में दोषियों के विरूद्ध सख्त प्रावधान किए गए हैं।
यदि कोई व्यक्ति, प्रिटिंग प्रेस, सेवा प्रदाता संस्था, प्रबंध तंत्र, कोचिंग संस्थान इत्यादि अनुचित साधनों में लिप्त पाया जाता है तो उसके लिए आजीवन कारावास तक की सजा तथा दस करोड़ रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
यदि कोई व्यक्ति संगठित रूप से परीक्षा कराने वाली संस्था के साथ षडयंत्र करता है तो आजीवन कारावास तक की सजा एवं 10 करोड़ रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
यदि कोई परीक्षार्थी प्रतियोगी परीक्षा में स्वयं नकल करते हुए या अन्य परीक्षार्थी को नकल कराते हुए अनुचित साधनों में लिप्त पाया जाता है तो उसके लिए तीन वर्ष के कारावास व न्यूनतम पांच लाख के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यदि वह परीक्षार्थी दोबारा अन्य प्रतियोगी परीक्षा में पुनः दोषी पाया जाता है तो न्यूनतम दस वर्ष के कारावास तथा न्यूनतम 10 लाख जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
यदि कोई परीक्षार्थी नकल करते हुए पाया जाता है तो आरोप पत्र दाखिल होने की तिथि से दो से पांच वर्ष के लिए डिबार करने तथा दोषसिद्ध ठहराए जाने की दशा में दस वर्ष के लिए समस्त प्रतियोगी परीक्षाओं से डिबार किए जाने का प्रावधान किया गया है। यदि कोई परीक्षार्थी दोबारा नकल करते हुए पाया जाता है तो क्रमशः पांच से दस वर्ष के लिए तथा आजीवन समस्त प्रतियोगी परीक्षाओं से डिबार किए जाने का प्रावधान किया गया है।
अनुचित साधनों के इस्तेमाल से अर्जित सम्पति की कुर्की की जायेगी।
इस अधिनियम के अन्तर्गत अपराध संज्ञेय, गैर जमानती एवं अशमनीय होगा।

परीक्षा निरस्त कराने के लिए कोचिंग सेंटर, छात्र संगठनों को बनाते थे मोहरा

एई व जेई प्रश्न पत्र लीक मामले में एसआईटी टीम ने पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर मुख्य अभियुक्त कोचिंग सेंटर संचालक विवेक ऊर्फ विक्की को गिरफ्तार किया। यूपी बॉर्डर पर भी एक नकल सेंटर का पता चला है।
शुक्रवार को हुई इस गिरफ्तारी के बाद नकल माफिया और संदिग्ध कोचिंग सेंटर के गठजोड़ का भी खुलासा हुआ है। कोचिंग सेंटर प्रश्न लीक कराकर मोटी रकम वसूलते थे।
एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि किसी कारणवश चयन न होने पर कोचिंग इंस्टीटूट पूरी परीक्षा निरस्त कराने के लिए कुछ छात्र संगठनों से जुड़े लोगों से धरना प्रदर्शन भी कराते थे।
प्रारंभिक पूछताछ पर अभियुक्त ने बताया कि वह वर्तमान में रुड़की में जीनियस नाम से कोचिंग सेंटर संचालित करता है जिसमें जेई के परीक्षार्थियों को परीक्षा की तैयारी करता है। अधिक पैसे कमाने के लालच में इसके पेपर लीक करने वाले गिरोह में शामिल होकर कुछ अभ्यर्थी से पेपर देने के एवज में 19 लाख रुपए तय किए जिनसे एडवांस के तौर पर कुछ धनराशि एवम ब्लैंक चेक लिए गए। अवैध धनराशि में से कोचिंग सेन्टरों में 8.5 लाख की एलईडी लगवाई।
अभियुक्त विक्की ने बताया कि अगर मेरी कोचिंग सेंटर से ज्यादा लड़के सलेक्ट होंगे तो मेरे कोचिंग का नाम होगा। तभी ज्यादा लड़के मेरे कोचिंग सेंटर पर आएंगे। अगर मेरे सेंटर से लड़के सेलेक्ट नहीं होते हैं तो हम परीक्षा रद्द कराने के लिए पैसा देकर धरना प्रदर्शन भी करा देते है।
एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि हरिद्वार देहात क्षेत्र तथा देहरादून के कुछ संदिग्ध कोचिंग सेन्टर एसआईटी के रडार पर हैं। उन्होंने बताया कि परीक्षा निरस्त कराने के लिए फंडिंग के लिए कुछ छात्रों के बयानों में भी एसआईटी को ऐसे गठजोड़ की पुख्ता जानकारी मिली है।

एई व जेई प्रश्न लीक प्रकरण में एसआईटी हर एंगल से कर रही है जांच, हर आरोपी का जेल जाना तय-एसएसपी अजय सिंह
इंस्टीट्यूट के संपर्क में आए छात्र संगठनों द्वारा परीक्षा लीक प्रकरण में पुनः परीक्षा के लिए गोपनीय सहयोग की बात भी सामने आई है। परीक्षाएं निरस्त होने पर छात्र कथित कोचिंग सेंटरों में साल भर लेते रहते हैं कोचिंग के लिए एडमिशन। किसी कारणवश चयन न होने पर पूरी परीक्षा निरस्त कराने का खेल भी आया सामने आया है। हरिद्वार पुलिस ने बताया कि कोचिंग इंस्टीट्यूट मालिक के संपर्क में कुछ छात्र संगठनों को धनराशि देकर धरना प्रदर्शन भी कराया जाता था।
गौरतलब है कि पूर्व में तीन अभियुक्तों के कब्जे से कुल 07 लाख रुपए की अवैध अर्जित नगदी और विभिन्न बैंकों के ब्लैंक चैक बरामद किए जा चुके है।
प्रश्न लीक के साक्ष्य मिलने पर तीन फरवरी को मुख्यमंत्री के आदेश पर थाना कनखल में मुकदमा दर्ज किया गया था।

गिरफ्तार अभियुक्त-
विवेक कुमार उर्फ विक्की पुत्र जयपाल सिंह निवासी ग्राम चुड़ियाला थाना भगवानपुर हरिद्वार हाल संचालक (जीनियस) कोचिंग इंस्टीट्यूट
बरामदगी-
अभार्थियो से लिए दो लाख रुपए नकद।
चार ब्लैंक चेक (अभ्यर्थियों से लिए गए)
अब तक गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण-
1- संजीव कुमार पुत्र वैध्यनाथ भगत निवासी मौहल्ला शिवपुरी थाना व जिला सहरसा बिहार हाल पता 310 भागीरथ आवासीय कालोनी लोक सेवा आयोग उत्तराखण्ड कनखल हरिद्वार
2- नितिन चैहान पुत्र श्री ब्रह्मपाल निवासी अन्नेकी सिडकुल हरिद्वार
3- सुनील सैनी पुत्र ज्ञानचन्द सैनी निवासी पुर्वावाला थाना कोतवाली लक्सर जनपद हरिद्वार
4- विवेक कुमार उर्फ विक्की पुत्र जयपाल सिंह निवासी ग्राम चुड़ियाला थाना भगवानपुर हरिद्वार उम्र 25 वर्ष। (आज गिरफ्तार)

अपर मुख्य सचिव ने बेरोजगार संघ को सरकार की कार्यवाही से कराया अवगत

अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से शुक्रवार को सचिवालय में उत्तराखण्ड बेरोजगार संघ के सदस्यों ने भेंट की। बेरोजगार संघ के सदस्यों ने अपर मुख्य सचिव रतूड़ी को अपने मुद्दों से अवगत कराया। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि बेराजगार संघ द्वारा रखे गये मुद्दों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवा अपनी बात शांतिपूर्वक तरीके से रखें।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि बिल्कुल निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से भर्ती परीक्षाएं आयोजित की जाए। इसी उद्देश्य से उत्तराखण्ड में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लाया गया है। गत दिवस उत्तराखण्ड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अध्यादेश-2023 के प्रख्यापन हेतु मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया है। इतना सख्त कानून बनाने का उद्देश्य है कि राज्य के युवाओं का भविष्य उज्ज्वल रहे। युवाओं को अपनी मेरिट के आधार पर नौकरी मिलें। देश में इतना सख्त कानून किसी भी अन्य राज्य में नही है।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि गत एक वर्ष से परीक्षाओं में धांधली से सम्बन्धित शिकायतों पर पूरी निष्पक्षता से जांच हुई है। जांच के परिणामस्वरूप कई दोषी जेल की सलाखों के पीछे हैं। सरकार ने अत्यन्त त्वरित कार्यवाही की है। बहुत सख्ती से जांच हुई है। भर्ती परीक्षाओं में अनुचित कार्य करने की मंशा रखने वाले लोगों के लिए एक कड़ा संदेश गया है।

ग्रामीण विज्ञान कांग्रेस से मिलेंगे नये आयाम-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि संपूर्ण विश्व विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अविष्कारों और अनुसंधानों के इस युग में वैज्ञानिक एवं तकनीकि विकास की चेतना ने सभी के जीवन को प्रभावित किया है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेई ने जय जवान, जय किसान के नारे के साथ जय विज्ञान जोड़ा वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसमें जय अनुसंधान को जोड़कर एक नया आयाम दिया।
शुक्रवार को यूकॉस्ट, परिसर, विज्ञान धाम, झाझरा में तीन दिवसीय 17वीं उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कांग्रेस-2023 के अन्तर्गत ‘प्रथम ग्रामीण विज्ञान कांग्रेस’ का शुभारम्भ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देहरादून में ग्रामीण विज्ञान कांग्रेस का यह देश का पहला आयोजन हो रहा है। एक भारत श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को सार्थक करने और राज्य के समेकित विकास को गति प्रदान करने में यह आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर हाइड्रोपोनिक यूनिट, क्यू आर कोड आधारित जैव विविधता पार्क एवं प्राईड ऑफ उत्तराखण्ड एक्सपो प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। ग्रामीण विज्ञान कांग्रेस, उत्तराखण्ड ग्राम्य विकास यात्रा एवं विज्ञान पर चर्चा पुस्तकों का विमोचन भी इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर वैज्ञानिकों को विज्ञान पुरोधा सम्मान एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वालों को सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण राज्य है। प्राकृतिक संसाधनों के उचित प्रयोग से राज्य में जैविक कृषि को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास से ही किसी राज्य और देश के विकास का प्रारूप तैयार होता है। इस विज्ञान कांग्रेस का लक्ष्य हमारे गांवो का समुचित विकास करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सभी के लिये गौरव का विषय है कि नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस में यूकास्ट उत्तराखण्ड को बेस्ट पैवेलियन का अवार्ड मिला। उन्होंने कहा कि 2025 तक उत्तराखण्ड को देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह आयोजन इस संकल्प को मजबूती प्रदान करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विज्ञान कांग्रेस ग्राम्य विकास की दिशा में एक अनूठा प्रयोग है। इस आयोजन के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति, कृषि, ग्रामीण पर्यटन और व्यंजन जैसे विभिन्न विषयों पर संवाद स्थापित किये जायेंगे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ग्रामीण विज्ञान कांग्रेस 2025 तक सशक्त उत्तराखण्ड के निर्माण के लिए रौडमैप बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
ग्राम्य विकास एवं कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार कृषि एवं अनुसंधान के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है। पिछले दो सालों में राज्य में जैविक खेती के क्षेत्र में काफी कार्य हुए है। राज्य में 34 प्रतिशत जैविक उत्पादन हुआ है, जिसे 2025 तक 60 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि के साथ ही हॉर्टीकल्चर के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भी राज्य सरकार द्वारा अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। एप्पल एवं कीवी मिशन को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए भी राज्य सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से मिलेट को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि किसानों की आय दुगुनी करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं।
पद्मभूषण, पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि प्रथम ग्रामीण विज्ञान कांग्रेस में विज्ञान और कृषि से जुड़े लोग एक मंच पर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए जो यह विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया जा रहा है, इसके आने वाले समय में काफी सार्थक परिणाम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि इकोनॉमी के साथ इकोलॉजी का समन्वय बहुत जरूरी है। हमें ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाना होगा। यह पलायन को रोकने में भी काफी कारगर होगा। लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना होगा।
इस अवसर पर विधायक सहदेव सिंह पुण्डीर, सचिव शैलेश बगोली, महानिदेशक यूकास्ट प्रो. दुर्गेश पंत, वैज्ञानिक डॉ. डी.के. असवाल, आयोजक सचिव डॉ. अपर्णा शर्मा, विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं विभिन्न राज्यों से आये वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

अपर मुख्य सचिव ने बैंकर्स के साथ बैठक कर रोजगार सृजन योजनाओं की समीक्षा की

अपर मुख्य सचिव आनन्दवर्धन ने राज्य में संचालित सभी रोजगार सृजन योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग हेतु एक इंटिग्रेटेड सिस्टम विकसित करने के साथ ही सिंगल पोर्टल बनाने हेतु उद्योग विभाग के नेतृत्व में पर्यटन विभाग तथा शीर्ष बैंको की पांच सदस्यी उप समिति गठित करने के निर्देश दिए है। अपर मुख्य सचिव आनन्दवर्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में अवस्थापना विकास बैंकर्स स्थायी समिति की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना, दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास विकास योजना (होम स्टे), पीएम स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना अति सूक्ष्म (नैनो), मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत लम्बित ऋण आवेदन पत्रों का समय सीमा में निस्तारण करने के निर्देश दिए। बैंक प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत वर्ष 2022-23 में बैंकों द्वारा वार्षिक लक्ष्य 6000 के सापेक्ष माह दिसम्बर तक 6173 ऋण आवेदन पत्र स्वीकृत किए गए हैं, जो कि लक्ष्य का 103 प्रतिशत है। बैंकों को निर्देश दिए गए कि वे 28 फरवरी 2023 तक लम्बित ऋण आवेदन पत्रों का निस्तारण तथा स्वीकृत ऋण आवेदन पत्रों पर ऋण वितरण करें। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत दिसम्बर माह तक वार्षिक लक्ष्य 1783 के सापेक्ष 1867 ऋण आवेदन पत्र स्वीकृत किये गए, जो कि निर्धारित लक्ष्य का 105 प्रतिशत है। होम स्टे योजना (वीसीएसजीएसवाई) के तहत वर्ष 2022-23 के माह दिसम्बर तक बैंकों द्वारा वाहन मद में निर्धारित लक्ष्य 150 के सापेक्ष 156 ऋण आवेदन स्वीकृत किए गए हैं, जो कि लक्ष्य का 104 प्रतिशत है तथा गैर वाहन मद में निर्धारित लक्ष्य 100 के सापेक्ष 59 ऋण आवेदन पत्र स्वीकृत किए गए हैं, जो कि लक्ष्य का 59 प्रतिशत है। इस सम्बन्ध में बैंकों को लम्बित ऋण आवेदन 28 फरवरी 2023 तक निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास (होम स्टे) विकास योजना के तहत वर्ष 2022-23 के दिसम्बर माह तक बैंकों द्वारा निर्धारित लक्ष्य 200 के सापेक्ष 139 आवेदकों को ऋण वितरित किए गए हैं। इस संबंध में बैंकों को ऐसे ऋण आवेदन पत्रों का अविलम्ब निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें सेक्शन 143 अंतर्गत अकृषि प्रमाण पत्र एवं निर्माणधीन इकाई का मानचित्र अधिकृत एजेन्सी से स्वीकृति की आवश्यकता नही हैं। बैंक प्रतिनिधियों ने अवगत कराया कि पी.एम. स्वनिधि योजना अंतर्गत ऋण प्रदान करने की समय सीमा दिसम्बर माह 2024 तक बढ़ा दी गई है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत वर्ष 2022-23 के दिसम्बर माह 2022 तक 217258 लाभार्थियों को निर्धारित लक्ष्य 2500 करोड़ रूपये के सापेक्ष 2173.51 करोड़ के ऋण वितरित किए गए हैं, जोकि लक्ष्य का 87 प्रतिशत है। योजना के तहत अनुमानतः 307174 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हुआ है। ऋण के गारंटी कवर लेने के लिए उद्यम रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
बैठक में वित्तीय समावेशन हेतु राष्ट्रीय रणनीति (एनएसएफआई) 2019-2024 जिसमें नई बैंक शाखाएं खोलने, बैंकिग सेवाओं से अनाच्छादित गांवों, बिजनेस कॉरोस्पोन्डेट तथा कैपेसिटी बिल्डिंग, कॉमन सर्विस सेन्टर को बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट के कार्य प्रदान करने एवं सामाजिक सुरक्षा योजना पर चर्चा की गई। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि बैंकिग सेवा रहित 80 गांवों में डीसीबी द्वारा सेवाएं देने में असमर्थ होने की स्थिति में शीर्षस्थ बैंकों को इस दिशा में पहल करनी होगी। डिजिटल पेमेंट ईको सिस्टम को मजबूत करने तथा विस्तार देने के लिए अल्मोड़ा तथा चमोली जिले में अच्छा काम हुआ है। अब पिथौरागढ़ तथा पौड़ी जनपद में इस दिशा में काम किया जाना चाहिए।
बैठक में अपर सचिव पर्यटन पूजा गबयार्ल, अपर सचिव शहरी विकास नवनीत पांडे, सहायक महाप्रबंधक राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति नरेंद्र सिंह रावत, मीनाक्षी सहायक महाप्रबंधक आरबीआई, विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि व विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।