उत्तराखंड के विकास में डेरी योजनाओं को करना होगा शामिलः मुख्यमंत्री

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत समेकित सहकारी विकास परियोजना व गंगा गाय महिला डेरी योजना में दुधारू पशु क्रय कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है जहां मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना जैसी योजना प्रारम्भ की गई है। इसमें कोविड-19 से प्रभावित होकर वापिस लौटे प्रवासियों के साथ ही युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। उद्योग विभाग के तहत योजना प्रारम्भ करने के साथ ही अन्य विभिन्न विभागों की योजनाओं को भी इसमें समावेशित किया गया है। मुख्यमंत्री ने दूधली में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत समेकित सहकारी विकास परियोजना व गंगा गाय महिला डेरी योजना में दुधारू पशु क्रय कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।

स्वरोजगार से ही आत्मनिर्भर भारत सम्भव
मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए स्वरोजगार की राह पर चलना होगा। हमने प्रदेश में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की है। इसमें ऋण व अनुदान की व्यवस्था की गई है। लगभग 150 प्रकार के काम इसमें लिए गए हैं। लाभार्थी अपनी रूचि और अनुभव के आधार पर इनमें से कोई भी काम शुरू कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने 20 लाख करोड़ रूपए का पैकेज दिया है। इसमें देश के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत का आह्वान किया है। राज्य में भी इसी क्रम में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का न केवल प्रारूप बनाया गया बल्कि इसका धरातल पर क्रियान्वयन भी शुरू किया जा चुका है। जिला योजना में स्वरोजगार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

बद्री गाय के संरक्षण व दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य राज्य में दूध की उपलब्धता को बढ़ाना भी है। इसीलिए निर्णय लिया गया कि योजना के तहत दुधारू पशु राज्य के बाहर से लाए जाएंगे। साथ ही बद्री गाय के संरक्षण पर काम किया जा रहा है। बद्री गाय के घी की बाजार कीमत काफी अधिक है। कोशिश की जा रही है कि इनकी दुग्ध क्षमता को बढ़ाया जा सके। इसमें कुछ सफलता भी मिली है।

घर लौटे प्रवासियों के लिए रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड़-19 की स्थितियों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में प्रवासी भाईयों को उनके घर पहुंचाया गया है। उनके स्वास्थ्य, भोजन आदि की व्यवस्था की गई। इसके साथ ही इनमें से जो लोग अब उत्तराखण्ड में रहकर ही काम करना चाहते हैं, उनके लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में व्यवस्था की गई है। मनरेगा में 36 हजार नए रजिस्ट्रेशन करते हुए काम उपलब्ध कराया गया है।

20 हजार दुधारू पशु का लक्ष्य
सहकारिता एवं दुग्ध विकास मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है, जहां मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की शुरूआत हुई है। कोरोना की महामारी के बाद उत्तराखण्ड वासियों के लिए मुख्यमंत्री जी ने यह बड़ी सौगात दी है। इस योजना के तहत प्रदेश के लाखों लोगों को रोजगार दिया जायेगा। डेरी विकास विभाग में राष्ट्रीय सहकारी विकास परियोजना के अंतर्गत डेरी क्षेत्र के लिए कुल 444.62 करोड़ रूपए स्वीकृत हैं। इसके तहत राज्य के दुग्ध सहकारी संघों के सुदृढ़ीकरण, कोल्ड चैन की स्थापना के साथ ही तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने और प्रोत्साहन के लिए ऋण एवं अनुदान की व्यवस्था की गई है। योजना के अंतर्गत लगभग 5400 लाभार्थियों को 20 हजार दुधारू पशु राज्य के बाहर से क्रय कराए जाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के पहले वर्ष चालू वित वर्ष में लगभग 2800 लाभार्थियों को 10 हजार दुधारू पशु क्रय कराए जाएंगे। योजना के तहत इकाई लागत का 65 प्रतिशत ऋण, 10 प्रतिशत लाभार्थी अंशदान और एनसीडीसी व राज्य अंतर्गत संचालित गंगा गाय महिला डेरी योजना से कुल 25 प्रतिशत अनुदान दिये जाने की व्यवस्था है। दुधारू पशुओं का बीमा पशुधन बीमा योजना में किया जाएगा। पूरे प्रदेश में 500 मिल्क बूध की स्थापना की जा रही है। डेरी के क्षेत्र में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि इस क्षेत्र में प्रदेश के 10 हजार से अधिक लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि अगले दो महिने में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पशु मेले लगाये जायेंगे।

इस अवसर पर उत्तराखण्ड वन पंचायत सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष करन बोहरा, भाजपा के जिलाध्यक्ष शमशेर सिंह पुण्डीर, मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रवीन्द्र दत्त, सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, निदेशक डेरी विकास जीवन सिंह नगन्याल, दुग्ध संघ से विजय रमोला, हरेन्द्र पाल सिंह आदि उपस्थित थे।

पीएम के मन की बात सुन सीएम त्रिवेन्द्र बोले, सृजनशीलता से होगा आत्मनिर्भर भारत का निर्माण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि तमाम चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरा देश अपने प्रधानमंत्री के साथ है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ’मन की बात’ कार्यक्रम को सुना।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का हर नागरिक राष्ट्र के लिए समर्पित है। कोरोना जैसी महामारी से प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सफलतापूर्वक लङाई लङी जा रही है। प्रधानमंत्री द्वारा सही समय पर लिए गए सही निर्णयों से ही भारत में कोरोना को नियंत्रित रख पाए हैं।

साल 2020 चुनौतियों का वर्ष है। हम इन चुनौतियों पर जीत हासिल करेंगे। कोई भी देश की ओर आंख उठाकर नहीं देख सकता है। हमारे वीर जवानों ने अपनी वीरता से यह साबित किया है। देश रक्षा के लिए उनके बलिदान को पूरा देश नमन करता है। आज समय है अपने जवानों का मनोबल बढ़ाने का उनका साथ देने का।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी सृजनशीलता से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा। लोकल के लिए वोकल हमारा ध्येय होना चाहिए। हर संकट का सामना करते हुए देश आगे बढ़ता रहेगा।

सीएम ने डिजिटल हस्ताक्षर कर डिजिटल अभियान से जुड़े सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वदेशी जागरण मंच द्वारा स्वदेशी स्वावलंबन अभियान के तहत चलाए जा रहे डिजिटल अभियान के तहत जुड़कर डिजिटल हस्ताक्षर किए। इस अभियान का उद्देश्य विदेशी उत्पादों का बहिष्कार करना एवं स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के प्रयासों को सफल बनाने के लिए हमें स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना होगा। लोगों को स्वावलंबी होना जरूरी है। स्वदेशी जागरण मंच द्वारा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने एवं चीन के उत्पादों का बहिष्कार करने के लिए व्यापक स्तर पर जन जागरण अभियान चलाया जा रहा है।

अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाने को एमएसएमई सेक्टर में किये गये बदलाव का लाभ उठाये उद्योग जगतः गडकरी

(एनएन सर्विस)
केन्द्रीय एमएसमई मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदयुरप्पा, मेघालय के मुख्यमंत्री के. संगमा, पंजाब के शिक्षा मंत्री विजय इन्द्र सिंगला ने संयुक्तरुप से ग्लोबल एलायन्स फाॅर मास एन्टरप्रिन्योरशिप की नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट का वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से विमोचन किया।
इस अवसर पर केन्द्रीय एमएसमई मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कोविड 19 के दृष्टिगत अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए हमें एमएसमई के क्षेत्र में तेजी से कार्य करने होंगे। एमसएमई ऐसा क्षेत्र है, जिसमें रोजगार सृजन के साथ ही अर्थव्यवस्था में तेजी से प्रगति की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है कि हम किन क्षेत्रों में अपनी स्ट्रेन्थ को और मजबूत कर सकते हैं। राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार उनमें कुछ विशिष्टताएं हैं। एग्रो एमएमई, हेण्डलूम, हेन्डीक्राफ्ट के क्षेत्र में अनेक राज्यों में कार्यों की प्रबल संभावनाएं हैं।
केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में एमएसमई क्षेत्र में अनेक कार्य किये जा सकते हैं, हमें उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ ही राज्यों में औद्योगिक स्थापना के लिए प्रक्रियाओं के सरलीकरण की ओर ध्यान देने की जरूरत है। कोविड 19 के दृष्टिगत पीपीई किट, सेनिटाईजर एवं अन्य उपयोगी उत्पादों को एमएसमई के माध्यम से बढ़ावा दिया जा सकता है। लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम क्षेत्र के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए दूरस्थ क्षेत्रों तक इन गतिविधियों को बढ़ाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था विशेषकर उत्तराखण्ड जैसे राज्यों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने और आर्थिक विकास के लिए के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। कोविड-19 से पूरा विश्व प्रभावित हुआ है। व्यापार करने और काम करने के तरीकों में बदलाव आया है। लाॅकडाउन में प्रभावित उद्योगों को पुनः संचालित करने के लिए आत्मनिर्भर पैकेज में एमएसएमई सेक्टर पर विशेष ध्यान दिया गया है। एमएसएमई ही ऐसा क्षेत्र है जहां रोजगार के अवसर बड़े पैमाने पर सृजित किए जा सकते हैं और अर्थव्यवस्था में तेजी लाई जा सकती है।
आत्मनिर्भर भारत पैकेज के अंतर्गत एमएसएमई के लिए लागू इमरजेंसी क्रेडिट लाईन गारंटी स्कीम का लाभ पात्र इकाईयों को पहुंचाने के लिए राज्य सरकार एसएलबीसी, बैंकों और औद्योगिक संगठनों के साथ मिलकर कार्य कर रही है। इस योजना में उत्तराखण्ड राज्य में 34671 पात्र खातों में 1835 करोड़ रूपए की स्वीकृति और 1067 करोड़ का वितरण यिका जा चुका है। इस योजना के क्रियान्वयन में उत्तराखण्ड राज्य की परफोरमेंस सर्वश्रेष्ठ राज्यों में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए लगातार सुधार कर रहे हैं। ईज आॅफ डूईंग बिजनेस के लिए सतत क्रियाशील हैं। सिंगल विंडो सिस्टम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में उत्तराखण्ड राज्य देश में लगातार अच्छी उपलब्धि अर्जित कर रहा है। कोविड-19 की परिस्थितियों में युवाओं और बाहर से घर लौटे प्रवासियों के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की है। इस योजना में विनिर्माण और सेवा के साथ ही व्यवसाय और एलाईड एग्रो गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। जिला स्तर पर भी जिला स्वरोजगार प्रोत्साहन एवं अनुश्रवण समिति गठित की गई हैं। ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में उद्यमियों को उद्यम स्थापना के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं में सहयोग, तकनीकी ज्ञान आधारित उद्यमों की स्थापना और स्थानीय स्तर पर स्केलेबल बिजनेस माॅडल चिह्नित करने, मूल्य संवर्द्धन, पैकेजिंग और विपणन में सहयोग के लिए 2 रूरल बिजनेस इन्क्यृबेटर स्थापित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने ग्लोबल एलायन्स फाॅर मास एन्टरप्रिन्योरशिप के उत्तराखण्ड में उद्यमिता विकास के लिए ईको सिस्टम विकसित करने के लिए दिए गए प्रस्ताव पर सहमति देते हुए कहा कि राज्य में निवेश के प्रोत्साहन के लिए सुनियोजित तरीके से काम किया जा रहा है। मेडिकल डिवाईसेस पार्क, फार्मा सिटी, अरोमा पार्क आदि के लिए सिडकुल के माध्यम से काम किया जा रहा है।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार, मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार रविन्द्र दत्त, आर्थिक सलाहकार आलोक भट्ट, निदेशक उद्योग सुधीर चन्द्र नौटियाल आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कोविड-19 की समीक्षा की, लोगों को दी कई राहते, आप भी जानें

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शनिवार को सचिवालय में कोविड-19 एवं डेंगू के रोकथाम एवं बचाव के लिए सभी जिलाधिकारियों से वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बैठक की। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि डेंगू से बचाव के लिए व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाय। स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाय। जिन जनपदों में पिछले वर्षों में डेंगू का फैलाव कम रहा, उन जनपदों में हम इसे पूरी तरह कैसे नियंत्रित कर सकते हैं, इसके लिए ठोस रणनीति बनायी जाय। यह सुनिश्चित किया जाय कि अस्पतालों में प्लेटलेट्स की पर्याप्त उपलब्धता हो। नगर निकायों द्वारा समय-समय पर फोगिंग की जाए। डेंगू से बचाव में रोकथाम के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार हो इसके लिए डाॅक्टर समय-समय पर मीडिया से समन्वय स्थापित करे। शहरी क्षेत्रों में डेंगू से बचाव के लिए स्वच्छता एवं जल निकासी पर विशेष ध्यान दिया जाय। प्रत्येक जनपद में सप्ताह में एक दिन व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाया जाय।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वर्षाकाल को दृष्टिगत रखते हुए पेयजल व्यवस्था की ओर विशेष ध्यान दिया जाय। पर्वतीय जनपदों में वर्षाकाल में पेयजल लाईनें क्षतिग्रस्त होने से व दूषित जल से बीमारियों की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए जन प्रतिनिधियों से निरन्तर संवाद बनाये रखें। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेंगू की रोकथाम एवं जनजागरूकता के लिए किये जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के प्रभावी नियंत्रण के लिए सर्विलांस सिस्टम को और अधिक मजबूत किया जाय। जो लोग होम क्वारंटीन एवं होम आईसोलेशन है उनकी लगातार निगरानी की जाय। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाय। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि सभी जनपदों में दुकानों को शाम 8 बजे तक खोलने की अनुमति दी जाय। देहरादून में अगले सप्ताह से शनिवार और रविवार को भी मार्केट को खोलने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि लोगों को सुबह 5 बजे से माॅर्निंग वाॅक की अनुमति दी जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कोरोना पाॅजिटव की रिकवरी रेट में तेजी से सुधार हुआ है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों एवं स्वास्थ्य विभाग को सतर्कता एवं सुरक्षात्मक दृष्टि से कार्य करने को कहा। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में अब 1700 से अधिक टेस्ट प्रतिदिन हो रहे हैं। सोमवार से मुक्तेश्वर में भी कोरोना की टेस्टिंग शुरू हो जायेगी। यहां पर प्रतिदिन 100 टेस्ट होंगे।
बैठक में सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, सचिव शैलेष बगोली, सौजन्या, एस.ए. मुरूगेशन, पंकज पाण्डेय, डीजी स्वास्थ्य श्रीमती अमिता उप्रेती आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पर्यटन विभाग ने स्वरोजगार के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरु की

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद पर्यटन विभाग स्वरोजगार योजनाओं का लाभ देने के लिए कोई कमसर नही छोड़ना चाहता है। इसके लिए विभाग ने ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू कर दी है। ऑनलाइन सिस्टम से घर बैठे ही आवेदन किया जा सकता है। इससे आवेदकों को बड़ा फायदा होगा। अब उन्हें कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वहीं, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के तहत इलेक्ट्रिक बस खरीदने पर 50 प्रतिशत या 15 लाख तक सब्सिडी मिलेगी।
कोरोना महामारी के चलते प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। स्वरोजगार की योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना और पंडित दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा शुरू कर दी है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में तहत अब बेरोजगार युवा प्रदेश के अंदर विभिन्न मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसें खरीद कर रोजगार शुरू कर सकते हैं। बसों का संचालन परिवहन निगम के निर्धारित रूटों के साथ ही अंतर नगरीय क्षेत्रों में किया जाएगा। 
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में इलेक्ट्रिक बसों के अलावा अन्य वाहनों की खरीद पर पूर्व की भांति 25 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। वहीं, गैर वाहन मद में आवेदकों को पर्वतीय क्षेत्रों में 33 प्रतिशत या 15 लाख और मैदानी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत या 10 लाख तक सब्सिडी दी जा रही है। होम स्टे के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में 33 प्रतिशत  या 10 लाख और मैदानी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत या अधिकतम सात लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी।
पर्यटन विभाग के सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन करने की व्यवस्था लागू होने से योजना में पारदर्शिता आएगी और घर बैठे लोग आवेदन कर सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और योजना की रियल टाइम में मानीटरिंग हो सकेगी। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और होम स्टे योजना के लिए अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। 

यहां करें आवेदन 
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना और होम स्टे योजना के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पर्यटन विभाग की वेबसाइट http://vcsgscheme-uk-gov-in पर किया जाएगा। स्वरोजगार शुरू करने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति घर बैठे आवेदन कर सकता है।

मुख्यमंत्री ने विशेष सैक्टर चिन्हित करके रोजगार उपलब्ध कराने के दिए निर्देश

(एनएन सर्विस)
कोविड-19 के दृष्टिगत प्रदेशवासियों को रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गुरूवार को सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ विशेष सैक्टर चिन्हित किये जाएं, जिसमें लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आवश्यकतानुसार विभिन्न क्षेत्रों में उपनल के माध्यम से भर्ती की जा सकती है। स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं तकनीक के क्षेत्र में कार्मिकों की और तैनाती की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उपनल के माध्यम से जो भी भर्ती की जायेगी, उसमें पूर्व सैनिकों एवं सैनिक आश्रितों को सबसे पहले प्राथमिकता दी जायेगी। यदि किसी क्षेत्र में पूर्व सैनिकों एवं सैनिक आश्रित की उपलब्धता नहीं हो पाती है, तब ही अन्य लोगों को उपनल के माध्यम से भर्ती की जायेगी। नौकरी के लिए विभिन्न क्षेत्र चिन्हित होने के बाद उपनल द्वारा पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की जायेगी। इसके लिए इस वित्तीय वर्ष के अन्त तक अर्थात् 31 मार्च 2021 तक आवेदन किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ ऐसे क्षेत्र चिन्हित किये जाय जिसमें समय की मांग एवं परिस्थितियों के अनुसार प्रदेशवासियों विशेषकर पूर्व सैनिकों एवं सैनिक आश्रितों एवं महिला समूहों को उपनल के माध्यम से स्किल डेवलपमेंट किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के दृष्टिगत प्रदेश के बड़े शहरों देहरादून एवं हल्द्वानी में वरिष्ठ नागरिकों, जो विभिन्न कारणों से अपने घर से बाहर निकलने में असमर्थ हैं। उनके लिए उपनल के माध्यम से मल्टीसर्विस सेंटर स्थापित किये जाय। वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा के लिए उपनल के माध्यम से उचित दरों पर सेवाएं दी जा सकती हैं। उपनल के माध्यम से सेवाएं देने पर सेवाकर्ता का पूरा रिकॉर्ड रहेगा। इससे लोगों में विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, सचिव न्याय प्रेम सिंह खिमाल, सचिव वित्त अमित नेगी, अपर सचिव प्रदीप रावत, उपनल के प्रबंध निदेशक ब्रिगेडियर पी.पी.एस. पहावा (से.नि), निदेशक सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास ब्रिगेडियर के.वी चन्द (से.नि) आदि उपस्थित थे।

भीमताल में बहुद्देशीय पार्किंग निर्माण को लेकर मीडिया सलाहकार ने अधिकारियों संग किया निरीक्षण

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री की घोषणा में शामिल बहुद्देशीय पार्किंग के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने जिला विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ भीमताल में जमीन तलाशने के लिए संभावित स्थान का निरीक्षण किया। उनके साथ एमडी कुमाऊं मंडल विकास निगम रोहित मीणा, सचिव जिला विकास प्राधिकरण पंकज उपाध्याय, पर्यटन विकास परिषद सदस्य नितिन राणा ने बुधवार को संयुक्त निरीक्षण कर पार्किंग स्थल की संभावनाएं तलाशीं।
निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्ययोजना पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए त्रिवेन्द्र सरकार का साफ नजरिया है। मुख्यमंत्री घोषणा के बाद यह जरुर देखते है कि धरातल पर उनकी घोषणा के बाद कार्य में क्या प्रगति हुई है। रमेश भटट ने बताया कि भीमताल के विकास को लेकर मुख्यमंत्री से कई बार चर्चाएं हुई है। सरकार भीमताल को पर्यटक हब के रुप में और अधिक विकसित करना चाहती है। जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़े। इस लिए पार्किंग का निर्माण यहां के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
स्थलीय निरीक्षण के बाद सचिव जिला विकास प्राधिकरण पंकज उपाध्याय ने जानकारी दी कि निरीक्षण के दौरान पाया कि मल्लीताल में मत्स्य विभाग कार्यालय के लगभग 1200 वर्ग मीटर भूमि पर पिलर देकर लगभग सौ वाहनों की पार्किंग बनाई जा सकती है। बताया कि वर्ष 2018 में मत्स्य विभाग को हस्तांतरित भूमि जिसका क्षेत्रफल लगभग सवा तीन हजार वर्ग मीटर का है, उसमें नीचे पार्किग और ऊपर भीमताल क्लब की स्थापना की जा सकती है। कहा कि भीमताल क्लब के लिए विभाग लंबे समय से प्रयासरत है।
निरीक्षण के दौरान प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष सौरभ रौतेला, देवभूमि व्यापार मंडल अध्यक्ष संदीप पांडे, भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज भट्ट, पंकज जोशी, प्रदीप पाठक, शरद पांडे आदि मौजूद थे।

राज्य में फिल्मांकन के लिए राज्य सरकार ने गाइडलाइन जारी की

(एनएन सर्विस)
राज्य सरकार ने प्रदेश में फिल्मों की शूटिंग के लिए गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत कोविड-19 के चलते प्रदेश में पहले से लागू नियम शूटिंग दल पर प्रभावी रहेंगे। फिल्म निर्माता को शूटिंग यूनिट का वेबसाइट पर पंजीकरण करवाना होगा। महानिदेशक सूचना कार्यालय देहरादून में शूटिंग दल, अवधि और लोकेशन को लेकर पूरा विवरण देना होगा।
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने गाइडलाइन जारी करते हुए बताया कि कोई भी फिल्म निर्माता इसका पालने करते हुए राज्य में फिल्मांकन कर पाएगा। फिल्म प्रोडक्शन कंपनी को कोविड-19 की रोकथाम के लिए उठाए गए समस्त कदमों का विवरण राज्य सूचना विभाग को देना जरुरी होगा। महानिदेशक सूचना की तरफ से समस्त सूचनाएं और अनुमतियां संबंधित जिलाधिकारियों को भेजी जाएंगी। शूटिंग में आने वाले दल के प्रत्येक व्यक्ति की कोविड को लेकर ट्रेनिंग अनिवार्य रहेगी। सोशल डिस्टेसिंग, फेस्क मास्क, दस्ताने और अन्य सुरक्षा उपकरणों को दल साथ में लाएगा। अगर दल के किसी सदस्य में कोरोना के लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत निकटवर्ती सरकारी अस्पताल और जिला प्रशासन को इसकी जानकारी देगा।
वहीं, शूटिंग के दौरान प्रोडक्शन कंपनी को एक नोडल अधिकारी की तैनाती भी करनी होगी। जो जिला प्रशासन को प्रत्येक सदस्य का डाटा बेस तैयार करके देगा। थर्मल स्कैनिंग से लेकर पीपीई किट व अन्य उपकरणों की जानकारी रखनी होगी। इस्तेमाल के बाद उन्हें कैसे नष्ट किया जा रहा है इसकी भी सूचना प्रशासन को देनी होगी।  
प्रोडक्शन कंपनी कोे फिल्म सेट का दिन में दो बार सैनिटाइजेशन करना अनिवार्य होगा। फोर्क लिफ्ट का कम से कम इस्तेमाल करने, सेट के बाहर, वेटिंग रूम, रेस्ट रूम में हैंड सैनिटाइजर रखना अनिवार्य होगा। स्टाफ में 65 साल से अधिक के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं लाने की अनुमति नहीं दी गई है। गाइडलाइन में कहा गया है कि अगर लाना बेहद जरूरी है तो इसकी अनुमति जिलाधिकारी से प्राप्त करनी होगी।
वहीं, शूटिंग स्थल पर व्यक्तियों की संख्या भी कम से कम रखने पर जोर दिया गया है। इंडोर में होने वाली शूटिंग में अनिवार्य स्टाफ की संख्या 15 और आउटडोर में 30 लोग ही रहेंगे। मेकअप और हेयर ड्रेंसिंग के स्थान पर बार बार सैनिटाइजेशन करना होगा। शूटिंग स्थल पर सभी को मास्क, दस्ताने व फेस शील्ड पहननी होगी। 
एक अन्य निर्देश में शूटिंग दल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए ट्रैवलिंग प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। जिला प्रशासन इसकी निगरानी करेगा। वाहनों में यात्रियों की संख्या गाइडलाइन के अनुसार ही रहेगी। प्राइवेट प्रापर्टी पर शूटिंग के लिए अनिवार्य अनुमति के साथ लोकेशन के सैनिटाइजेशन का खास ख्याल रखना होगा।

कैबिनेट का फैसला, 80 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए होंगे आरक्षित, जानिए

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक हुई। जिसमें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में रेहड़ी, ठेली, चलती-फिरती दुकान लगाने वालों के लिए रोजगार से अवसर मुहैया करवाने का निर्णय लिया गया। महत्वपूर्ण निर्णय में केंद्र सरकार की बिना गांरटी के ऋण योजना के तहत अब त्रिवेन्द्र सरकार ऋण पर दो प्रतिशत ब्याज की सब्सिडी देगी।
इसका लाभ शहरी क्षेत्रों में 70 हजार लोगों को रोजगार देने में मिलेगा। शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि योजना के लिए सहकारी बैंक ही ऋण देंगे। वहीं, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत अब मोटर साइकिल टैक्सी भी चलेंगी। प्रथम चरण में 20 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। योजना में 60 हजार रुपये का ऋण मिलेगा।

80 प्रतिशत पद महिलाओं से भरे जाएंगे
प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड अधीनस्थ नर्सिंग (अराजपत्रित) सेवा नियमावली 2020 को मंजूरी दे दी है। अब नर्सों की सीधी भर्ती में पदों पर 80 प्रतिशत महिलाएं और 20 प्रतिशत पुरुषों की नियुक्ति की जाएगी। नियमावली बनने से सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में नर्सों की नियमित भर्ती की जा सकेगी। सेवा नियमावली में नर्सों के खाली पदों की सीधी भर्ती में कुल पदों में 70 प्रतिशत पदों में नर्सिंग में डिप्लोमा धारक और 30 प्रतिशत पर डिग्री धारक उम्मीदवारों से भरे जाएंगे। नर्सों की भर्ती के लिए भारतीय नर्सिंग परिषद से मान्यता प्राप्त संस्थान से बीएससी नर्सिंग या मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से जनरल नर्सिंग एवं मिड वाइफरी, मनोरोग विज्ञान का डिप्लोमा होना अनिवार्य होगा। राजकीय चिकित्सालय या मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थान से एक साल का अनुभव होना चाहिए। बता दें कि नियमावली में संशोधन से सरकारी अस्पतालों में नियमित नर्सों की भर्ती की जा सकेगी। स्वास्थ्य विभाग को इस समय लगभग चार हजार से अधिक नर्सों की जरूरत है।

अन्य प्रमुख फैसले
– आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत गाइडलाइन सरल की। अब छोटे पुल, पेयजल लाइन, पैदल मार्ग, सड़क मार्ग, चैक डेम, स्कूल भवन, सिंचाई नहर और सुरक्षात्मक कार्य राज्य आपदा मोचन निधि से किए जा सकेंगे।
– बाजपुर चीनी मिल में एक एथनॉल प्लांट पीपीपी मोड में लगेगा, जिसकी क्षमता 100 केएलपीडी होगी। 
– सहकारिता नियमावली में संशोधन के तहत अब समिति को एक निश्चित धनराशि की जगह शुद्ध लाभ के आधार पर धनराशि देनी होगी।
– भीमताल केंद्रीय विद्यालय के लिए 0.25 हेक्टेयर भूमि आवंटन के लिए दो करोड़ रुपये माफ। 
– अल्मोड़ा कुंम्ट्रान लिमिटेड 1999 बंद हो जाने के बाद पांच कर्मचारियों को वीआरएस आवेदन को मंजूरी। वर्ष 2004 तक अवैतनिक मानते हुए सेवाकाल की गणना शामिल करने का निर्णय। 
– कुंभ 2021 में श्रद्वालुओं एवं संतों की व्यवस्था के लिए शौचालय इत्यादि के लिए धन प्रबंधन का निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री को दिया गया।
– उत्तराखंड मोबाइल टावर नियमावली के तहत नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति पोल (खंभा) 500 रुपये किराये की जगह शहरी क्षेत्रों में 100 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 50 रुपये किराया लिया जाएगा। 
– केंद्र के जीएसटी के संशोधन को राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
– खाद्य विभाग में उपविपणन अधिकारी के लिए सेवा नियमावली बनाई गई।
– राज्य कोषीय उत्तरदायित्व बजट प्रबंधन के लिए जीडीपी का तीन प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत करने की छूट दी गई।
– नर्स भर्ती नियमावली को मंजूरी दी गई।
– उत्तराखंड ऑन डिमांड परिवहन सुविधा के लिए नियमावली बनाई गई। मोबाइल एप से टैक्सी बुक की जा सकती है।

ऋषिकेश मंडी 24 जून तक के लिए सील

(एनएन सर्विस)
ऋषिकेश क्षेत्र में अब कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में कोरोना वायरस ने पैर पसार लिए हैं। यहां मंडी समिति अध्यक्ष विनोद कुकरेती सहित छह अन्य लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। प्रशासन इन सभी के प्रथम और द्वितीय संपर्क में आने वाले लोगों की खोजबीन कर रहा है।
देहरादून निरंजनपुर स्थित कृषि उत्पादन मंडी समिति में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ रहे मामलों को देखते हुए कृषि उत्पादन मंडी समिति ऋषिकेश में रैंडम सैंपलिंग ली गई थी। 13 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ऋषिकेश कृषि मंडी समिति में 97 लोगों के सैंपल लिए थे। जिनमें मंडी समिति अध्यक्ष, कर्मचारी, व्यापारी, ट्रांसपोर्टर और पल्लेदार शामिल थे। इन सभी के सैंपल को जांच के लिए चंडीगढ़ लैब भेजा गया था। वहां से जांच रिपोर्ट बुधवार रात 9 बजे पहंुची है। इस रिपोर्ट में मंडी समिति परिसर में सात लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। यह सभी लोग एसिम्टोमेटिक यानी बिना कोरोना लक्षण वाले पाए गए हैं। इन सात लोगों में मंडी समिति अध्यक्ष विनोद कुकरेती सहित छह अन्य व्यापारी शामिल है। मंडी समिति अध्यक्ष ने फोन पर इस बात की पुष्टि की है।