चीड़ पिरूल एकत्रीकरण का वन प्रभागवार लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में कुशल वनाग्नि प्रबन्धन हेतु चीड़ पिरूल एकत्रीकरण को मिशन मोड में संचालित किए जाने के निर्देश दिए गए थे। कुशल वनाग्नि प्रबन्धन के दृष्टिगत चीड़ पिरूल एकत्रीकरण को महत्वपूर्ण मानते हुए प्रत्येक चीड़ आच्छादित वन प्रभाग में चीड़ पिरुल एकत्रीकरण हेतु लक्ष्य निर्धारित किये जाने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए थे।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में अपर प्रमुख वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन द्वारा क्षेत्रीय प्रभागीय वनाधिकारी, अल्मोड़ा, चम्पावत, गढ़वाल, बागेश्वर, मसूरी, लैंसडौन, नैनीताल, सिविल अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, टिहरी, टौंस, पिथौरागढ़, अपर यमुना बड़कोट, नरेन्द्रनगर, हल्द्वानी, रुद्रप्रयाग, चकराता, बद्रीनाथ, रामनगर एवं सिविल सोयम कालसी वन प्रभाग को निर्देशित किया गया है कि पिरूल एकत्रीकरण को मिशन मोड में क्रियान्वित करने के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक चीड़ आच्छादित क्षेत्रीय रेंज में एक ब्रिकेट/पैलेट यूनिट की स्थापना सुनिश्चित की जाये ताकि एकत्रित पिरूल का प्लांट में उपयोग होकर ब्रिकेट/पैलेट उत्पादित किये जा सके एवं संबंधित उद्यमियों द्वारा उनका विक्रय किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इससे पिरूल के वन क्षेत्रों से हटने से वनाग्नि की घटनाओं में कमी आयेगी तथा स्थानीय संग्रहणकर्ताओं को आय अर्जित होगी इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। रेंजवार पिरूल एकत्रीकरण लक्ष्य 5000 है० में उपरोक्त लक्ष्यों की पूर्ति हेतु न्यूनतम एक ब्रिकेट/पैलेट यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने सभी वन क्षेत्राधिकारियों से जिला स्तर पर उद्योग एवं ग्रामीण विकास विभाग के संबंधित अधिकारियों से समन्वय स्थापित करते हुये उद्यमियों का चयन कर उन्हें राज्य सरकार/वन विभाग से दी जाने वाली सुविधाओं/सहयोग के विषय में जागरूक करेंगे एवं इन यूनिटों की स्थापना सुनिश्चित करायेगें।
जारी निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रभागीय वनाधिकारी अपने प्रभाग के अंतर्गत ब्रिकेट/पैलेट यूनिटों की स्थापना सम्बन्धी कार्यवाही 3 माह (सितम्बर 2024 तक) में पूर्ण करते हुये अनुपालन आख्या उपलब्ध करायेंगे तथा सम्बन्धित मुख्य वन संरक्षकों/वन संरक्षकों द्वारा वन क्षेत्राधिकारियों द्वारा की जा रही कार्यवाही की प्रत्येक 15 दिन में समीक्षा किया जाना भी सुनिश्चित किया जाए।

खुशखबरीः को-ऑपरेटिव बैंकों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को धामी कैबिनेट की मंजूरी


सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सहकारिता में महिलाओं की भागीदारी को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उनके अनुसार, सहकारी संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने से उनके संचालन में और पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं में एकल परिवारों के वर्चस्व की समस्या खत्म कर दी गई है। डॉ. रावत ने कहा कि सत्ता के इस असंतुलन को दूर करने और अधिक समावेशी और न्यायसंगत शासन संरचना का मार्ग प्रशस्त करने का लक्ष्य बनाने के लिए यह कदम उठाए गए हैं। महिलाएं, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से नेतृत्व के पदों पर कम प्रतिनिधित्व मिला है, सहकारी संस्थाओं के प्रभावी कामकाज की दिशा में एक अनूठा दृष्टिकोण और योगदान दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि , सहकारी समितियों के उच्च स्तरों पर निदेशक मंडल और अध्यक्षों में महिलाओं की महत्वपूर्ण उपस्थिति होनी जरूरी है। इससे महिलाओं के निर्णय लेने की प्रक्रिया में विचारों और अनुभवों की विविधता भी आएगी। महिलाओं की भागीदारी से सहकारिता के प्रति विश्वसनीयता बढ़ेगी और संतुलित निर्णय लिए जा सकेंगे , जो सहकारी समिति के सभी सदस्यों के हितों और जरूरतों को दर्शाएंगे। उन्होंने कहा देश का उत्तराखण्ड पहला राज्य है, जहाँ महिलाओं के लिए सहकारी संस्थाओं में 33ः आरक्षण की मंजूरी दी गई है।

सहकारी संस्थाओं में लैंगिक समानता की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम
उत्तराखंड में महिलाओं के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि धामी कैबिनेट ने सहकारी बैंकों और संस्थाओं में महिलाओं के लिए 33ः आरक्षण के सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सहकारी क्षेत्र में नेतृत्व के पदों पर लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए डॉ. रावत की अटूट लगन और दृढ़ संकल्प ने पिछले दो वर्षों में आयोजित एक दर्जन से अधिक समीक्षा बैठकों के बाद आखिरकार फल दिया है।

उत्तराखंड, कई अन्य राज्यों की तरह, लैंगिक असमानता और निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की कमी के मुद्दों से लंबे समय से जूझ रहा है। राज्य में 10 जिला सहकारी बैंक, शीर्ष सहकारी संस्था, 670 एमपैक्स ( बहुद्देश्यीय सहकारी समिति) संचालित होने के साथ, नेतृत्व के पदों पर महिलाओं की कमी स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी।

डॉ. रावत के प्रयासों ने न केवल सहकारी क्षेत्र में अधिक लैंगिक विविधता और समावेशिता का मार्ग प्रशस्त किया है, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय मिसाल कायम की है। महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए आवाज उठाकर उन्होंने सार्थक बदलाव लाने में राजनीतिक इच्छाशक्ति और वकालत की शक्ति का प्रदर्शन किया है। यह देखकर खुशी होती है कि उत्तराखंड में महिलाओं की आवाज सुनी जा रही है और उनके योगदान को मान्यता दी जा रही है। सहकारी संस्थाओं में लैंगिक समानता की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम राज्य सरकार की प्रगतिशील मानसिकता और इस प्रयास में शामिल सभी लोगों के सामूहिक प्रयासों का प्रमाण है।

’उत्तराखंड सहकारी समिति अधिनियम 2003 नियमावली 2004 के अंतर्गत निबंधित सभी प्रकार की सहकारी समितियों एवं संस्थाओं में, यह संशोधन लागू होंगे’

सहकारिता विभाग की शीर्ष सहकारी संस्था

’उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड’
’उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ
’उत्तराखंड आवास एवं निर्माण सहकारी संघ’
’प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन
’उपभोक्ता सहकारी संघ’
’उत्तराखंड रेशम फेडरेशन’
’उत्तराखंड को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन’
’उत्तराखंड भेड़ -बकरी एवं शशक फेडरेशन’
’उत्तराखंड मत्स्य सहकारी संघ’
’श्रम निर्माण संविदा सहकारी संघ’
’उत्तराखंड सेब उत्पादक एवं विपणन सहकारी संघ’
’उत्तराखंड साइलेज उत्पादन एवं विपणन सहकारी संघ’
’उत्तराखंड मत्स्य सहकारी संघ’

’10 जिला सहकारी बैंक’
’670 एम पैक्स (बहुद्देश्यीय सहकारी समिति)’
संपादक, यूकेसीडीपी, देहरादून।

पीएम-किसान योजना के तहत 17वीं किस्त में राज्य के 771567 किसानों के खाते में आई धनराशि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वाराणसी से पीएम-किसान योजना की 17वीं किस्त जारी की। जिसमें पूरे भारत के 9.26 करोड़ से अधिक किसानों को 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ दिया।
इसी क्रम में मंगलवार को नैनीताल क्लब सभागार से सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीएम किसान कार्यक्रम के अन्तर्गत किसान सम्मेलन और 17 वीं किस्त के हस्तांतरण अवसर पर वीसी के माध्यम से प्रतिभाग किया। 17वीं किस्त में राज्य के 771567 किसानों को 830414 किस्तों में रुपए 166.08 करोड़ की धनराशि उनके खाते में हस्तांतरित की जाएगी। जिसमें जिले अल्मोड़ा के 94122, बागेश्वर के 38132, चमोली के 45566, चंपावत के 34915, देहरादून के 40250, हरिद्वार के 96088, नैनीताल के 49059, पौड़ी गढ़वाल के 59221, पिथौरागढ़ के 55575, रुद्रप्रयाग के 36891, टिहरी गढ़वाल के 102076, यूएस नगर के 72089 और उत्तरकाशी के 47583 के किसानों को इस योजना का लाभ मिलेगा। राज्य में वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2023-24 तक कुल 2579.16 की धनराशि वितरीत की जा चुकी है। वर्तमान में प्रदेश में योजना के अंतर्गत किसानों की संख्या 9.13 लाख है, जिसमें राज्य के 771567 किसानों को रुपए 166.08 करोड़ की धनराशि उनके खाते में हस्तांतरित की।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर पीएम नरेंद्र मोदी का पहला निर्णय किसान के हितों के लिए किया गया। पीएम-किसान योजना से किसानों की आय दोगुनी, बेहतर सिंचाई योजना, नई तकनीक से छोटे-छोटे किसानों को लाभ मिल रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मोटे अनाज का उत्पादन और खेती को बढ़ावा देना हमारी प्राथमिकता है। और क़ृषि में महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण है। कहा कि केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं से किसानों को बेहतर लाभ मिल रहा है। जिससे कृषि के साथ लोगों को रोजगार आदि भी मिल रहा है। जिससे अब पर्वतीय इलाकों के लोगों को रोजगार के लिए शहरों में भटकना नहीं पड़ रहा है। और पलायन भी कम हो रहा है। बता दें केंद्र सरकार पीएम किसान योजना के तहत किसानों को साल में 6,000 रुपए प्रदान करती है, यह राशि साल में तीन किस्तों में 2,000 रुपए में प्रदान की जाती है। साथ ही किसानों को मिलने वाली ये धनराशि सीधे किसानों के बैंक खाते आती है। योजना का मुख्य उद्देश्य कृषकों की आर्थिक स्थिति का सुधार, आत्मनिर्भर और कृषि को बढ़ावा देना है।
इस दौरान क़ृषि एवं कृषक कल्याण विभाग ने माया नेगी पुत्री मोती सिंह नेगी गॉव गिनती विकास खंड कोटाबाग को 2023-24 में राष्ट्रीय क़ृषि विकास योजना के तहत ड्रोन क़ृषि कार्य हेतु प्रदान किया गया। जिसका कुल मूल्य 10 लाख एवं अनुदान 7.50 लाख डी. बी. टी. के माध्यम से कृषक भुगतान किया गया। पूनम दुर्गापाल गांव हिम्मतपुर विकासखंड हल्द्वानी को 2023-24 में इफको योजना के तहत ड्रोन दीदी योजना के तहत प्रदान किया गया। इसका कुल मूल्य दस लाख एवं अनुदान मूल्य 10 लाख डी. बी. टी. के माध्यम से कृषक को भुगतान किया गया। जबकि अर्जुन सिंह रावत पुत्र सुदर्शन सिंह रावत गांव नंदपुर न्याय पंचायत चिल्किया विकासखंड रामनगर की 2023-24 में योजना युवा स्वरोजगार (इफको) के तहत स्वरोजगार के अंतर्गत प्रदान किया गया। जिसका कुल मूल्य 10 लाख एवं अनुदान मूल्य 10 लाख डी. बी. टी. के माध्यम से भुगतान किया गया। इस दौरान कृषकों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न विभागों द्वारा कृषि उत्पादों से संबंधित लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण कर उत्पादों की भी जानकारी ली।

वैध खनन से राजस्व बढ़ाने के लिए एमडीटीएसएस लागू करने पर सहमति

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने राज्य में अवैध खनन पर सख्त निगरानी तथा वैध खनन से राजस्व बढ़ाने के लिए एमडीटीएसएस (माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एण्ड सर्विलेन्स सिस्टम) को देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल व उधमसिंह नगर के 40 चेक गेट पर लगाने के लगभग 93 करोड़ रूपये के प्रस्ताव को सचिवालय में खनन विभाग की आज की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) की बैठक में सहमति दी है।
एमडीटीएसएस को देहरादून के 8 चेक गेट, हरिद्वार के 13 चेक गेट, नैनीताल के 10 चेक गेट तथा उधमसिंह नगर के 9 चेक गेट सहित कुल 40 चेक गेट लोकेशन पर लगाया जाएगा। एमडीटीएसएस के तहत खनन गतिविधियों पर कड़ी निगरानी हेतु एएनपीआर कैमरा, बुलेट कैमरा, आरएफआईडी राडार, एलईडी फलड लाइट जैसी अत्याधुनिक तकनीकी का प्रयोग किया जाएगा। देहरादून में माइनिंग स्टेट कन्ट्रोल सेन्टर (एमएससीसी) स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल तथा उधमसिंह नगर के जिला मुख्यालयों में मिनी कमाण्ड सेन्टर स्थापित किए जाएंगे।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि एमडीटीएसएस के माध्यम से खनिजों के गैर कानूनी तथा अनाधिकृत परिवहन, खनिजों के अत्यधिक खनन या निष्कासन, खनिजों को ले जाने वाले वाहनों की ओवरलोडिंग, ट्रांजिट पास में दी गई डिलीवरी लोकेशन के विपरीत डिलीवरी, अवैध खनन व अन्य कारणों से राजस्व हानि आदि पर निरन्तर निगरानी सुनिश्चित होगी। मुख्य सचिव ने इस सम्बन्ध में खनन से जुड़े सभी हितधारकों से प्रभावी समन्वय कर उनका सहयोग लेने तथा जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही मुख्य सचिव ने खनन क्षेत्रों में कार्य करने वाले श्रमिकों के कल्याण एवं विकास तथा उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने हेतु कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होने राज्य में ईंट के भट्टों में कार्य करने वाले मजदूरों के विकास एवं कल्याण हेतु भी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने खनन क्षेत्रों एवं ईट के भट्टों में कार्य करने वाले मजदूरों के लिए मेडिकल एवं बीमा सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
बैठक में सचिव बृजेश कुमार संत, अपर सचिव डा अहमद इकबाल सहित खनन एवं वित्त विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

21 वन प्रभागों के डीएफओ को नोटिस जारी, दो दिन में देना होगा जवाब

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े निर्देशों के बावजूद जंगलों में अग्नि नियंत्रण के लिए तैनात लगभग चार हजार फायर वाचर का सामूहिक जीवन बीमा कराने में वन प्रभाग हीलाहवाली बरत रहे हैं। राज्य में 41 वन प्रभागों में से केवल 20 ने अपने-अपने क्षेत्र में 2286 फायर वाचर का बीमा कराया।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने शनिवार को वन मुख्यालय में अग्नि नियंत्रण की समीक्षा बैठक में इस स्थिति पर सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन 21 वन प्रभागों में फायर वाचर का बीमा नहीं हुआ है, वहां के डीएफओ को मुख्यालय स्तर से कारण बताओ नोटिस जारी कर सभी से दो दिन के भीतर जवाब मांगा जाए।
वन मंत्री उनियाल ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को दो टूक कहा कि जंगलों की आग और मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए जो भी कार्य किया जा सकता है, वह किया जाए। साथ ही इसमें कार्मिकों व योजित फायर वाचर, दैनिक श्रमिकों की व्यक्तिगत सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इन विषयों में किसी भी प्रकार की लापरवाही सहन नहीं की जाएगी।

अग्नि नियंत्रण के लिए नवंबर में जारी हो बजट
जंगल की आग का उल्लेख करते हुए वन मंत्री ने कहा कि आग की घटनाएं नवंबर से ही शुरू हो जा रही हैं। ऐसे में अग्नि नियंत्रण के लिए अप्रैल का इंतजार करने के बजाए नवंबर में ही बजट जारी किया जाना चाहिए।
उन्होंने राज्य के वन क्षेत्रों में सभी 571 सेक्शन में कार्यरत वन दारोगा को अग्नि नियंत्रण के दृष्टिगत लीफ ब्लोअर, ग्रास कटर समेत अन्य उपकरण हर हाल में अतिशीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए।

स्थानीय निवासियों और वन कर्मियों के नाम मांगे
वन मंत्री ने अग्नि नियंत्रण में सक्रिय सहयोग देने वाले स्थानीय निवासियों की सूची भी सभी जिलों से मांगी है, ताकि उन्हें पुरस्कृत किया जा सके। वन मंत्री ने पूर्व में अग्नि नियंत्रण में योगदान देने वाले ग्रामीणों को जिला स्तर पर पुरस्कृत करने की घोषणा की थी। वन मंत्री ने उन वनकर्मियों की भी सूची मांगी है, जिन्होंने इस अग्निकाल में आग से निबटने में अहम योगदान दिया है। इन्हें भी पुरस्कृत किया जाएगा।

इन प्रभागों ने कराया फायर वाचर का बीमा
वन प्रभाग पिथौरागढ़, नैनीताल, रामनगर, बदरीनाथ, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, मुनिकीरेती, टिहरी, चकराता, मसूरी, पुरोला, बड़कोट, कोटद्वार व देहरादून, भूमि संरक्षण वन प्रभाग नैनीताल, अलकनंदा व पौड़ी, कार्बेट व राजाजी टाइगर रिजर्व और गोविंद वन्यजीव विहार।

वन कर्मियों को तत्काल एयरलिफ्ट कर हल्द्वानी बेस अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश

बिनसर वन्यजीव विहार में वनाग्नि से 4 वनकर्मियों की मृत्यु पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा दुःख प्रकट किया है। उन्होंने इस घटना में झुलसे चार अन्य वनकर्मियों को तत्काल हल्द्वानी बेस अस्पताल में एयरलिफ्ट किये जाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना बेहद हृदय विदारक है और दुःख की इस घड़ी में पूरी उत्तराखंड सरकार वनकर्मियों के परिजनों के साथ खड़ी है। उन्होंने इस हादसे में झुलसकर घायल होने वाले चार वन्य कर्मियों को तत्काल हल्द्वानी बेस अस्पताल में एयरलिफ्ट करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। गंभीर घायलों को आवश्यकतानुसार उपचार हेतु हल्द्वानी से एम्स ऋषिकेश एयरलिफ्ट करने के भी निर्देश मुख्यमंत्री धामी ने दिए। इसके साथ-साथ मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपए की अनुग्रह धनराशि दिए जाने के निर्देश मुख्यमंत्री धामी के द्वारा दिए गए।
मुख्यमंत्री के विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते ने बताया कि घटना पर शासन पूरी नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार घायल कर्मियों को एयरलिफ्ट कर हल्द्वानी अस्पताल लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मृतकों का आज ही पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है ।
विदित हो कि यह दुर्घटना आज दोपहर में 3.30 बजे के करीब बिनसर वन्यजीव विहार, अल्मोड़ा के सिविल सोयम वन प्रभाग में घटित हुई। बताया गया कि बोलेरो वाहन में 8 वनकर्मी सवार थे। वनाग्नि से बोलेरो वाहन में सवार 4 वन कर्मियों की आग में झुलसने से मृत्यु एवं 4 अन्य वन कर्मियों के आग से झुलसने से घायल होने की सूचना प्राप्त हुई।

चारधाम यात्रा प्रबंधन प्राधिकरण के गठन को कार्रवाई तेज करने के निर्देश

मुख्यंमत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को चारधाम प्रबंधन यात्रा प्राधिकरण के गठन हेतु कार्रवाई त्वरित गति से करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने यमुनोत्री धाम में कैरिंग कैपेसिटी (धारण क्षमता) कैसे बढ़ाई जाए, इस पर भी कार्ययोजना शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए।
बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित बैठक में उन्होंने यह निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा प्रबंधन प्राधिकरण का कार्यक्षेत्र सिर्फ चारधामों तक सीमित नहीं होगा अपितु प्रदेश में समस्त प्रकार की यात्राओं के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी उक्त प्राधिकरण के अंतर्गत आएगी। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण गठन के पीछे मुख्य उद्देश्य यही है कि प्रदेश में बढ़ते धार्मिक व सामान्य पर्यटन के मद्देनजर हमारे पास एक ऐसी संस्था हो जो इन सब जिम्मेदारियों व तैयारियों का भलीभांति निर्वहन कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरगामी विजन के चलते आज प्रदेश में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। खासतौर से इस बार के यात्रा सीजन में यह तथ्य प्रमुखता से उभरा है कि गंगोत्री व यमुनोत्री धामों में तीर्थयात्रियों की संख्या में दोगुना तक वृद्धि हुई है। ऐसे में यमुनोत्री धाम की कैरिंग कैपेसिटी यानि वहां ठहरने की सुविधाएं होटल, गेस्ट हाउस आदि को किस प्रकार से बढ़ाया जाना चाहिए, इस दिशा में भी ठोस कार्य किये जायें। विदित हो कि चारधामों के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सतत रूप से प्रयासरत रहे हैं और इसी का प्रतिफल है कि श्री बद्रीनाथ धाम व केदारनाथ धाम में मास्टर प्लान के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य किये जा रहे हैं। साथ ही ऑल वेदर रोड के निर्माण के बाद चार धामों की यात्रा अधिक सुगम व सुरक्षित हुई है।

चारधाम यात्रा को कोटद्वार से संचालित करने की संभावना तलाशें, रोपवे की बाधाओं को करें दूर
मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा अभी मुख्य रूप से ऋषिकेश से संचालित होती है लेकिन यहां पर बड़ी संख्या में यात्रियों के पहुँचने के चलते जाम की समस्या भी बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा का संचालन किस तरह से कोटद्वार से भी किया जा सकता है, इसकी भी संभावना तलाशी जायें। मुख्यमंत्री ने केदारनाथ धाम, हेमकुंड साहिब व यमुनोत्री धाम के लिए रोपवे निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

टिहरी झील व आसपास के क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 1200 करोड़ का प्रोजेक्ट
टिहरी झील और आसपास के क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एडीबी ने 1200 करोड़ रुपये का अवस्थापना संबंधी प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया है। उन्होंने इसकी निविदा प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के आने से टिहरी झील के आसपास के क्षेत्र में पर्यटन तेजी से बढ़ेगा। इससे यह झील और भी अधिक आकर्षण का केंद्र बनेगी। मुख्यमंत्री ने पौड़ी जिला मुख्यालय तक पर्यटन को बढ़ावा देने के भी निर्देश दिए ताकि अधिक से अधिक लोग यहां पहुँच सके और यह क्षेत्र भी सीधे पर्यटन से जुड़ सके।

मुख्य सचिव ने 31 जुलाई तक डीपीआर भेजने के निर्देश दिए

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने लोक निर्माण, सिंचाई, पशुपालन, स्कूली शिक्षा, कौशल तथा तकनीकी शिक्षा विभाग को 24 घण्टे की डेडलाइन देते हुए अवशेष 383.11 करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट तत्काल नाबार्ड को भेजने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मुख्य सचिव ने 31 जुलाई की समय सीमा निर्धारित करते हुए सभी विभागों को वित्त विभाग को डीपीआर भेजने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने विभागों को भविष्य में नाबार्ड की समयसीमा के अनुसार ही अपने प्रोजेक्ट के बजट बनाकर समयबद्धता से भेजने की सख्त हिदायत दी है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने विभागों को अपने प्रोजेक्ट के प्रस्ताव, आहरण, प्रोजेक्ट कम्पलीशन सर्टिफिकेट (पीसीसी), प्रोजेक्ट कम्पलीशन रिपोर्ट (पीसीआर) को ऑनलाइन जमा करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने विभागों को प्रोजेक्ट पूरे होने पर एक सप्ताह के भीतर प्रोजेक्ट कम्पलीशन सर्टिफिकेट तथा छः माह के भीतर प्रोजेक्ट कम्पलीशन रिपोर्ट (पीसीआर) जमा करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही राधा रतूड़ी ने विभागों को शहरी अवसंरचना विकास निधि (यूआईडीएफ) के तहत पार्किंग, मलिन बस्तियों के पुनर्विकास एवं शहरी वनीकरण के प्रोजेक्ट को शीर्ष प्राथमिकता पर नाबार्ड को भेजने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव रतूड़ी ने विभागों को सख्त हिदायत दी है कि नाबार्ड को सिर्फ उच्च गुणवत्ता वाले तथा योग्य प्रोजेक्ट ही प्रस्तावित किए जाने चाहिए। प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकता भी विभागों द्वारा ही तय की जानी चाहिए तथा विभागों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि फण्डिंग की डुप्लीकेसी ना हो। उन्होंने अपेक्षाकृत छोटे प्रोजेक्ट को नाबार्ड में प्रस्तावित ना करने का सुझाव दिया है। मुख्य सचिव ने विभागों को दिए गए लक्ष्य के 50 प्रतिशत प्रोजेक्ट 30 जून, 60 प्रतिशत प्रोजेक्ट 31 जुलाई तथा 100 प्रतिशत प्रोजेक्ट 15 अगस्त तक वित्त विभाग को भेजने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने वित्त विभाग को भी प्रतिपूर्ति हेतु बिल नाबार्ड में जमा कराने हेतु प्रत्येक चार माह का टारगेट दिया है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सभी विभागों को कड़ाई से स्पष्ट किया है कि प्रतिपूर्ति लेने में असफल होने वाले विभागों को इस सम्बन्ध में भविष्य में कार्यशैली में सुधार करना होगा। मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को जल स्रोतों एवं नदियों के पुनर्जीवीकरण के प्रोजेक्ट नाबार्ड हेतु प्रस्तावित करने के निर्देश दिए।
बुधवार को सचिवालय में नाबार्ड की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक की अध्यक्षता के दौरान मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि राज्य के ग्रामीण विकास में नाबार्ड द्वारा प्राप्त होने वाली वित्तीय सहायता का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
बैठक में जानकारी दी गई कि वित्त विभाग द्वारा कुल 360.47 करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट प्राप्त किए गए हैं जिनमें सिंचाई विभाग से 77.40 करोड़ के 10 प्रोजेक्ट, लोक निर्माण विभाग से 193.11 करोड़ के 89 प्रोजेक्ट, तकनीकी शिक्षा से 66.96 करोड़ के 4 प्रोजेक्ट, पशुपालन से 9.52 करोड़ का 1 प्रोजेक्ट, ग्रामीण निर्माण विभाग से 13.4811 करोड़ के 5 प्रोजेक्ट हैं। वर्ष 2023-24 में राज्य को नाबार्ड द्वारा कुल अनुमोदित 904.4 करोड़ के सापेक्ष भुगतान 954.9 करोड़ रहा है। वर्ष 2024-25 के लिए आरआईडीएफ के तहत 1200 करोड़ का अनुमोदित लक्ष्य तथा 969 करोड़ रूपये का प्रतिपूर्ति लक्ष्य रखा गया है।
राज्य में नाबार्ड के तहत ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) से 2.05 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिचाई सुविधाओं का सृजन एवं पुनर्द्धार किया गया है। लगभग 14,766 किमी ग्रामीण सड़कों के नेटवर्क का निर्माण एवं सुधार किया गया है। 27307 मीटर ब्रिज का निर्माण हो चुका है। 23.77 लाख ग्रामीण आबादी को पेयजल सुविधा मिल चुकी है। 241 स्कूल एवं आईटीआई का निर्माण एवं पुनर्द्धार हो चुका है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव आनंद वर्धन, सचिव दिलीप जावलकर, सीजीएम नाबार्ड सहित वित्त, लोक निर्माण, सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

पढ़ाई के साथ कमाई भी करेंगे छात्र-छात्राएंः डा. धन सिंह

उत्तराखंड के उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं अब पढाई के साथ-साथ कमाई भी करेंगे। इसके लिये सरकार ने श्सीएम लीप अर्न वाइल यू लर्नश् योजना को अपनी मंजूरी दे दी है। राज्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शीघ्र ही इस योजना को लागू किया जायेगा। योजना के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर एवं अनुसंधान स्तर पर चयनित मेधावी छात्र-छात्राओं को अधिकतम छह हजार मासिक पारिश्रमिक दिया जायेगा। अकादमिक रूप से उत्कृष्ट छात्रों को उनके शैक्षणिक गतिविधियों के दौरान वित्तीय सहायता मिलने से छात्रों का पढ़ाई के प्रति जहां रूझान बढ़ेगा, वहीं उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र नामांकन में भी इजाफा होगा।

उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के पक्षधर है ताकि प्रदेश के युवाओं को शिक्षण संस्थानों में उच्च स्तरीय शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव और उपार्जन के अवसर उपलब्ध कराये जा सके। डॉ रावत ने बताया कि सरकार की इसी मंशा के तहत प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘सीएम लीप अर्न वाइल यू लर्न’ योजना लागू की जायेगी, जिसकी मंजूरी सरकार ने दे दी है और शीघ्र ही शासन स्तर से इसका शासनादेश जारी कर दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि सीखो और कमाओ आधारित इस महत्वपूर्ण योजना के तहत प्रदेश के समस्त राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों और अन्य उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं अनुसंधान स्तर के पात्र छात्र-छात्राओं को संस्थान में विभिन्न क्षेत्रों में कार्य सौंपे जायेंगे। जिसमें प्रमुख रूप से पुस्तकालय संचालन सहायता कार्य, प्रयोगशालाओं में उपकरण संचालन, रखरखाव और प्रायोगिक सत्रों के लिये प्रयोगशाला सहायता संबंधी कार्य तथा कार्यालयी प्रशासनिक कार्य आदि शामिल हैं। उन्होंने बताया कि योजना हेतु अभ्यर्थियों का चयन उनके समग्र शैक्षणिक स्कोर के आधार किया जायेगा। योजना के अंतर्गत कार्ययोजित छात्र-छात्राओं को सौ रूपये प्रतिघंटे के हिसाब से अधिकतम छह हजार रूपये प्रतिमाह पारिश्रमिक दिया जायेगा। विभागीय मंत्री ने बताया कि योजना के अंतर्गत कार्ययोजित छात्र-छात्राओं पर इसके प्रभाव का समय-समय पर उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मूल्यांकन किया जायेगा। मूल्यांकन के दौरान नामंकित छात्रों व नियोजित करने वाले होस्ट दोनों से फीडबैक लिया जायेगा। उन्होंने बताया कि एक निरंतर अंतराल में सीएम लीप योजना की समीक्षा भी की जायेगी ताकि इस नीति की प्रासंगिकता, प्रभावशीलता और उद्देश्यों को सुनिश्चित किया जा सके और भविष्य में छात्र-छात्राओं को इसका अधिक से अधिक लाभ पहुंचाया जा सके।

योजना के लिये पात्रता
सीएम लीप अर्न वाइल यू लर्न योजना के लिये स्नातक द्वितीय वर्ष (तृतीय/चतुर्थ सेमेस्टर) से लेकर स्नातकोत्तर के छात्र-छात्राएं तथा शोधार्थी पात्र होंगे। योजना के लिये छात्र-छात्राओं का चयन उनके समग्र शैक्षिणिक स्कोर के आधार पर किया जायेगा। इसके लिये इच्छुक छात्रों को संबंधित संस्थान में पूर्णकालिक नियमित संस्थागत छात्र होना अनिवार्य होगा। योजना के तहत स्नातक प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष में प्राप्त अंक, स्नातकोत्तर प्रथम व द्वितीय वर्ष में प्राप्त अंक, यूसेट में प्राप्त अंक तथा नेट में प्राप्त अंकों के आधार पर मेरिट तैयार की जायेगी। तदोपरांत उच्च प्राथमिकता पात्रता मानदंड को पूरा करने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जायेगी। इसके लिये इच्छुक छात्र-छात्राओं को संबंधित संस्थान में आवेदन करना होगा। उक्त संस्थान द्वारा सीएम लीप योजना के अंतर्गत नामांकन/आवेदन समर्थ पोर्टल के माध्यम से प्राप्त किये जायेंगे। जिसकी सूचना संस्थान को अपनी वेबसाइट पर प्रसारित करनी होगी और छात्र समूहों में भी इसका प्रचार-प्रसार करना अनिवार्य होगा।

योजना के तहत इन क्षेत्रों में मिलेगा काम’
पढ़ाई के साथ कमाई योजना के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत अर्ह छात्र-छात्राएं शैक्षणिक विभाग, अनुसंधान केन्द्र, स्कूल, पुस्तकालय, विभाग और प्रशासनिक कार्यालय में काम कर सकेंगे। जिसमें पुस्तकालय संचालन के तहत पुस्तक व्यवस्था, प्रदर्शन और संचालन शामिल है। अनुसंधान केन्द्र में उपकरण संचालन, रखरखाव और प्रयोगशाला सहायता संबंधी कार्यों किये जायेंगे। जबकि विभाग व प्रशासनिक कार्यालय में विशेष रूप से छात्र वर्ग से संबंधित कार्य, डाटा प्रबंधन, फाइलिंग, ड्राफ्टिंग इत्यादि कार्य शामिल है।

छात्रों को पढाई के साथ मिलेगा पारिश्रमिक
सीएम लीफ योजना के तहत कार्ययोजित छात्र-छात्राओं को रू0 100 प्रतिघंटे की दर से अधिकतम रूपये 6000प्रतिमाह पारिश्रमिक दिया जायेगा। जिसका भुगतान इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सेवा (ईसीएस) के माध्यम से करते हुये अर्जित धनराशि सीधे उनके व्यक्तिगत बैंक खाते में जमा की जायेगी।

बेसिक शिक्षकों की भर्ती को मंत्री धन सिंह ने दिए निर्देश, जनपदवार शीघ्र जारी करें विज्ञप्ति

प्राथमिक शिक्षा के अंतर्गत सहायक अध्यापक (बेसिक) के लगभग 3600 रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की जायेगी। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को जनपदवार विज्ञप्ति जारी करने के निर्देश दे दिये गये हैं। बेसिक शिक्षकों की नई भर्ती में ऐसे डीएलएड व डीएड योग्यताधारी अभ्यर्थियों को आवेदन करने में छूट प्रदान की गई है जिन्होंने पूर्व में जारी विज्ञप्ति के लिये आवेदन किया किया था। ऐसे अभ्यर्थियों को पूर्व में किये गये आवेदन के आधार पर नई भर्ती के लिये अर्ह माना जायेगा और उन्हें पुनः आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी।

विद्यालयी शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य सरकार प्राथमिक स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी है। प्रदेश के नौनिहालों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिये सरकार ने प्रत्येक प्राथमिक विद्यालयों में सभी संसाधान मुहैया कराने के साथ-साथ प्राथमिक शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में प्राथमिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में लागू आदर्श आचार संहिता के बीच निर्वाचन आयोग से बेसिक शिक्षकों के लम्बे समय से रिक्त चल रहे पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति मांगी थी जिस पर आयोग ने अपनी स्वीकृत प्रदान कर दी है। विभागीय मंत्री ने कहा कि प्रदेश में बेसिक शिक्षकों के लगभग 3600 पद रिक्त पड़े हैं, जिन पर जनपदवार शीघ्र भर्ती विज्ञापन जारी करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू कर प्रत्येक प्राथमिक विद्यालयों में रिक्त पदो ंके सापेक्ष शिक्षकों की तैनाती की जायेगी ताकि प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा सके। डा. रावत ने बताया कि राज्य में बेसिक शिक्षकों की भर्ती उत्तराखंड राजकीय प्रारम्भिक शिक्षा (अध्यापक) (संशोधन) सेवा नियमावली-2024 में निर्धारित प्राविधानों के अनुरूप की जायेगी। नये प्राविधानों के तहत डीएलएड व डीएड योग्यताधारी अभ्यर्थी ही बेसिक शिक्षक पद के लिये अर्ह होंगे।

पुराने अभ्यर्थियों को मिलेगी पुनः आवेदन करने में छूट रू डा. रावत
प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने बताया कि वर्ष 2020 एवं 2021 में सहायक अध्यापक प्राथमिक के अवशेष रह गये रिक्त पदों को नई भर्ती में शामिल किया गया है। ऐसे में जिन डीएलएड व डीएड योग्यताधारी अभ्यर्थियों ने पूर्व की इन विज्ञप्तियों के लिये आवेदन किया था लेकिन उन्हें नियुक्ति प्रदान नहीं की गई। ऐसे अभ्यर्थियों को नई विज्ञप्ति में पुनः आवेदन करने में छूट प्रदान की गई है। ऐसे अभ्यर्थियों को फिर से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने कहा कि ऐसे अभ्यर्थियों को पूर्व में किये गये आवेदन के आधार पर नई भर्ती प्रक्रिया में सम्मिलित करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं।