गाइडलाइन जारीः ऑनलाइन क्लास की अवधि 30 मिनट से ज्यादा नही होगी

एचआरडी मंत्रालय द्वारा ऑनलाइन क्लास के लिए जारी गाइडलाइन के बाद उत्तराखंड में भी शिक्षा महकमें ने गाइड लाइन जारी की है। सचिव शिक्षा मीनाक्षी सुन्दरम ने सभी स्कूलों के गाइडलाइन जारी करते हुए स्कूलों की ऑनलाइन कक्षाओं की नियमितता् को लेकर अभिभावकों द्वारा उठाई गई चिंताओं के बाद मंत्रालय ने दिशा-निर्देश तैयार किए हैं। बता दें कि कोविड-19 महामारी के बाद बच्चे ऑनलाइन कक्षाएं ले रहे हैं। इस दौरान बच्चे स्क्रीन में ज्यादा समय लगा रहे हैं। ऐसे में मांग थी कि क्लास टीचिंग से ऑनलाइन शिक्षण के लिए एक शिफ्ट जरूरी है। लॉकडाउन के बाद से करीब चार महीनों से देशभर के स्कूल बंद होने के बाद से स्कूल ऑनलाइन माध्यम से बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश में केंद्र सरकार की गाइड लाइन “प्रज्ञाता” को बरकरार रखा गया है। जिसके अनुसार प्री-प्राइमरी छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की अवधि 30 मिनट से अधिक नहीं होनी चाहिए। कक्षा 1 से 8 के लिए, 45 मिनट तक के दो ऑनलाइन सेशन जबकि कक्षा 9 से 12 के लिए, 30-45 मिनट के चार सेशन रखे गए हैं। उत्तराखंड में लागू प्रज्ञाता गाइडलाइन के में सचिव मीनाक्षी सुन्दरम ने कहा है की उत्तराखंड की भोगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए अगर कुछ और बदलाव किये जाने हैं तो उसके लिए सुझाव विभगा से मांगे गए हैं। आपको बताते चलें कि केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक, इस गाइड लाइन को पहले ही जारी कर चुके हैं। निशंक ने कहा कि ये दिशा-निर्देश उन छात्रों के लिए ऑनलाइन शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए बनाए गए हैं, जो घर पर हैं। ये दिशा-निर्देश उन बच्चों के लिए हैं, जो घर पर लॉकडाउन के कारण रह रहे हैं। उन्हें ऑनलाइन, मिश्रित, डिजिटल शिक्षा के जरिये सिखाने की कोशिश की जा रही है। डिजिटल शिक्षा पर तैयार ये दिशा-निर्देश ऑनलाइन शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए एक रोडमैप भी हैं। बता दें कि देश भर के विश्वविद्यालयों और स्कूलों को 16 मार्च से बंद कर दिया गया है।

राज्य में जल्द शुरू होगी भूमि बंदोबस्त की प्रक्रियाः त्रिवेन्द्र

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को खैरासैंण, सतपुली में राजकीय महाविद्यालय खैरासैंण का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि राज्य में भूमि बन्दोबस्त लंबे समय से नहीं हुआ है। राज्य में जल्द भूमि बंदोबस्त की प्रक्रिया शुरू की जायेगी। उन्होंने कहा कि भूमि पर अपने पति के साथ महिलाओं का अधिकार भी हो, ताकि उन्हें लोन लेने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। इस पर भी सरकार जल्द निर्णय लेगी। पर्वतीय क्षेत्रों में खेती का अधिकांश कार्य महिलाएं करती हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने 07 करोड़ 27 लाख रूपये की योजनाओं का शिलान्यास किया। इसमें खैरासैंण में डिग्री कॉलेज भवन निर्माण के लिए 03 करोड़ 06 लाख रूपये, कम्यूनिटी टूरिज्म को प्रोत्साहन देने हेतु खैरासैंण (सतपुली) में पर्यटक परिसर के निर्माण हेतु 01 करोड़ 84 लाख रूपये, खैरासैंण-बयाली मोटर मार्ग पर लोडिंग स्टील गर्डर सेतु के निर्माण हेतु 01 करोड़ 74 लाख रूपये एवं खैरासैंण-बयाली मोटर मार्ग के डामरीकरण के लिए 63 लाख रूपये के कार्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने खैरासैंण में डिग्री कॉलेज, इण्टर कॉलेज एवं जवाहर नवोदय विद्यालय के लिए अपनी कीमती भूमि शिक्षा के लिए दान करने पर खैरासैंण की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत छोटे-छोटे सोलर प्रोजक्ट लगाये जायेंगे। इससे 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। 25-25 किलोवाट के छोटे-छोटे प्रोजेक्ट पर कार्य किया जाएगा। इस योजना के तहत 25 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। इन प्रोजक्ट से उत्पादित बिजली सरकार खरीदेगी। पिरूल की पत्तियों से बिजली बनाने का कार्य शुरू किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लवाड़ गांव में 64 लाख रूपये के कार्यों की स्वीकृति दी गई है। जल जीवन मिशन के तहत गांवों में पेयजल योजना का कनेक्शन 2350 रूपये में दिया जाना था। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि गांवों में मात्र एक रूपये में पानी का कनेक्शन देंगे। मानकों के अनुरूप स्वच्छ जल दिया जायेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि कोटद्वार में अर्द्ध सैनिक बलों के लिए कैंटीन के लिए भूमि दी जायेगी। सतपुली में पार्किंग के लिए 3 करोड़ 26 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई। यहां पर भवन एवं पब्लिक यूटिलिटी की व्यवस्थाएं भी की जायेंगी।

मां का सपना था आईएएस बनने का, अब आस्था करेंगी उनका सपना पूरा

मां का सपना पूरा करना ही है लक्ष्यः आस्था
सीबीएसई 10वीं की परीक्षा में 99.4 प्रतिशत अंक लाकर प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल करने वाली आस्था आगे चलकर अपनी मां का सपना पूरा करेंगी। उनकी मां शीला कंडवाल आईएएस बनना चाहती थीं। किसी कारणवश पढ़ाई पूरी न होने के कारण अब उनकी बेटी आस्था इस सपने को साकार करेंगी।

डीएसबी इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत आस्था कंडवाल ने पूर्णांक 500 में से 487 प्राप्तांक प्राप्त किए हैं। इसमें अंग्रेजी में 100, गणित 100, विज्ञान 100, एसएसटी 99, हिंदी 98 अंक आए हैं। गुड्डू फॉर्म श्यामपुर गली वार्ड नंबर नौ निवासी आस्था ने रोजाना पांच घंटे सभी विषयों को दिया। परीक्षा के दिनों इसमें तीन घंटे का विस्तार किया। आस्था के पिता राजकुमार कंडवाल गुडगांव में एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। आस्था को उनकी माता शीला कंडवाल ही घर पर विज्ञान और गणित विषय पढ़ाती हैं। इस कारण उन्हें कभी भी ट्यूशन लेने की जरूरत महसूस नहीं हुई। उनका यह भी कहना है कि जब पढ़ाई भारत से की तो नौकरी भी भारत के लिए ही करूंगी। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बुधवार दोपहर

10वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम घोषित किया। इसमें तीर्थनगरी की आस्था कंडवाल ने 99.4 प्रतिशत अंक लाकर राज्य में दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि तीर्थनगरी के ही सात बच्चों ने प्रदेश में टॉप-10 में जगह बनाई है।

डीएसबी स्कूल के सागर गर्ग ने हासिल किए 99.6 प्रतिशत अंक, बने स्टेट टॉपर

स्टेट टॉपर सागर गर्ग आगे चलकर आईपीएस बनना चाहते हैं। बातचीत में सागर ने बताया कि यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी करेंगे। उन्हें वर्दी से प्यार हैं, वर्दी पहनकर वह पिछड़े वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए कार्य करेंगे। परिवार में उनके दादा अशोक कुमार, दादी शशीबाबा, माता सारिका तथा पिता अजय गर्ग हैं। सागर बताते हैं कि पढ़ाई को लेकर उन्हें हमेशा परिवार का पूरा सपोर्ट मिला। खासतौर पर अपनी सफलता का श्रेय सागर प्रधानाचार्य शिव सहगल, क्लास टीचर ईला गैरोला और माता-पिता को देना चाहते है। सागर गर्ग ने पूर्णांक 500 में से 498 प्राप्तांक प्राप्त किए हैं। इसमें अंग्रेजी में 99, अकाउंट 99, बिजनेस स्टीडीज 100, पेंटिंग 100, इकॉनोमिक्स 100 अंक आए हैं। सागर गर्ग ने रोजाना सात घंटे पढ़ाई की। परीक्षा के दिनों में इसमें दो घंटे का विस्तार किया।

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सोमवार की सायं 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम घोषित किया। इसमें तीर्थनगरी के सागर गर्ग ने 99.6 प्रतिशत अंक लाकर राज्य में पहला स्थान हासिल किया, जबकि तीर्थनगरी की ही सलोनी सिंह ने 97.8 प्रतिशत अंक लाकर प्रदेश के दसवें स्थान में जगह बनाई है। यह दोनों की विद्यार्थी डीएसबी इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल ऋषिकेश के हैं। उधर, तीर्थनगरी के डीएसबी, फुटहिल्स, एनडीएस, एनजीए, श्री सांई बाबा इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, आर्मी पब्लिक स्कूल आदि का शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा।

तीर्थनगरी के टॉप-20 छात्र व छात्राएं

1—सागर गर्ग—99.6—डीएसबी

2—सलोनी सिंह—97.8—डीएसबी

3—अमन अरोड़ा—97.4—डीएसबी

3—वर्णिका गुप्ता—97.4—डीएसबी

4—नितिन द्विवेदी—97.2—एनडीएस

5—आशीष बेदवाल—97—डीएसबी

6—अदिति तड़ियाल—96.8—डीएसबी

7—जयंत बहुगुणा—96.6—डीएसबी

7—स्मृति बोस—96.6—डीएसबी

8—यश आनंद—96.4—एनडीएस

9—अभिनव उनियाल—96.2—डीएसबी

9—प्रतीक्षा पांडेय—96.2—डीएसबी

10—नवीन सिंह—96—डीएसबी

10—विश्रवा तिवारी—96—डीएसबी

10—अदिति बर्थवाल—96—एनडीएस

11—प्रियांशु राणा—95.8—एनडीएस

11—ऋचा सिंह—95.8—एनडीएस

12—राहुल सिंह रावत—95.6—फुटहिल्स एकेडमी

12—यश उप्पल—95.6—एनडीएस

12—ओम शर्मा—95.6—डीएसबी

13—शिखा रावत—95.4—आर्मी पब्लिक स्कूल

13—गार्गी नेगी—95.4—एनडीएस

14—आदि जैन—95.2—डीएसबी

15—अंजली नेगी 95—डीएसबी

16—खुशी यादव—94.8—डीएसबी

17—मृत्युंजय बडोनी 94.6—डीएसबी

17—तन्मय गोयल—94.6—डीएसबी

18—अर्पिता बडोला—94.4—डीएसबी

18—नैना अग्रवाल—94.4—डीएसबी

18—ऋतिक पंवार—94.4—डीएसबी

18—सिया गुसाईं—94.4—डीएसबी

19—मनस्वी जैन—94.2—डीएसबी

19—वंशिका सिंघल—94.2—डीएसबी

19—प्रथम कुमार—94.2—डीएसबी

20—पंकज रमोला—93.8—आर्मी पब्लिक स्कूल

20—ईशा पंत—93.8—आर्मी पब्लिक स्कूल

20—श्रेया अग्रवाल—93.8—एनडीएस

सरकार प्रदेश में खोलने जा रही अंग्रेजी माध्यम के अटल उत्कृष्ट विद्यालय

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने रविवार को श्री भरत मंदिर इंटर कॉलेज में हरेला पर्व अस्कोट से आराकोट कार्यक्रम के तहत पौधारोपण किया। इसके बाद शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के अभाव में पलायन न हो। इसके लिए जल्द ही अंग्रेजी माध्यम के अटल उत्कृष्ट विद्यालय खोले जाएंगे। इन विद्यालयों में एनसीईआरटी का पैटर्न लागू होगा। इस विद्यालय में करोड़पति से लेकर गरीब तबके के आदमी का बच्चा भी शिक्षा लेगा। शिक्षा का बाजारीकरण किसी कीमत में नहीं होगा। यदि प्राइवेट स्कूल इसका उल्लंघन करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान विस अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि भारत फिर से विश्वगुरू बनने जा रहा है। इसके लिए उन्होंने मौजूदा सभी लोगों को शुभकामनाएं दी। शिक्षकों का वास्तविक सम्मान तभी होगा। जब उनका पढ़ाया हुआ विद्यार्थी एक दिन बड़े मंच पर जाकर कहे कि मैं आज जो कुछ भी हूं। अपने शिक्षक की बदौलत हूं। उन्होंने पौधारोपण को आवश्यक बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने बेटे के जन्म पर पौधारोपण करना चाहिए। इससे बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होगा, वैसे ही वह पौधा भी बड़ा होगा और यादगार रहेगा। कहा कि प्रकृति स्वच्छ रहेगी तो मानव भी स्वस्थ रहेगा।

प्रकृति संरक्षण को हरेला एकमात्र त्योहारः स्पीकर
ऋषिकेश। कार्यक्रम के दौरान स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने किया कि लोकपर्व हरेला दुनिया में ऐसा एकमात्र त्योहार होगा जिसमें जीवों के कल्याण के साथ ही प्रकृति संरक्षण की कामना भी की जाती है। पेड़ लगाने और पर्यावरण बचाने की संस्कृति की ऐसी सुंदर झलक देवभूमि उत्तराखंड में ही दिखती है। उन्होंने कहा की उत्तराखंड का लोकपर्व हरेला पूरी दुनिया को ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ लड़ने का संदेश देता है।

यूजीसी की गाइडलाइन के तहत प्रदेश में उच्च शिक्षा में तेजी लाने के निर्देश

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में उच्च शिक्षा विभाग से सम्बन्धित बैठक आयोजित की गई।
बैठक में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशा निर्देशो के तहत विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में परीक्षायें संचालित किये जाने के सम्बन्ध में विचार विमर्श किया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय स्तर पर अन्तिम वर्ष एवं अन्तिम सेमेस्टर के छात्र-छात्रों की परीक्षायें 24 अगस्त से 25 सितम्बर तक आयोजित की जायेंगी तथा 25 अक्टूबर तक परीक्षा फल घोषित कर दिया जायेगा जबकि 1 नवम्बर से नया सत्र शुरू कर दिया जायेगा। इसके अलावा पुराने छात्र छात्राओं की सेमेस्टर परीक्षायें यूजीसी गाइडलाइन के अनुसार अगली कक्षाओं में प्रोमोट करते हुए 5 अगस्त तक परीक्षा फल घोषित कर 16 अगस्त से ऑनलाईन कक्षायें शुरू कर दी जायेंगी। 12वीं के परीक्षाफल घोषित होने के साथ ही समस्त राजकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों बीए, बीएससी, एम, एमएससी आदि कक्षाओं में प्रथम वर्ष हेतु प्रवेश प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी जायेगी तथा 1 नवम्बर से कक्षायें प्रारम्भ होंगी।
बैठक में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों द्वारा बताया गया कि राज्य के कई महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों को कोविड 19 क्वारंटीन सेंटर बनाये गये हैं जिसके चलते परेशानी आ सकती है जिस पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि कोविड-19 के दृष्टिगत जिन विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में क्वारंटीन सेंटर बनाये गये हैं सम्बन्धित संस्थान के मुखिया के ओर से जिलाधिकारी को पत्र भेजकर 25 जुलाई तक क्वारंटीन सेंटर खाली कराते हुए अन्यत्र शिफ्ट करा दिये जाये तथा वहां पर छात्रों के आने से पहले सेनेटाईजेशन की भी पर्याप्त व्यवस्था की जाए ताकि परीक्षा देने वाले छात्रों को कोई कठिनाई न हो।
बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ0 धन सिंह रावत ने बताया कि पूरे प्रदेश में लगभग 3 लाख छात्र-छात्राओं उच्च शिक्षा में अध्यनरत हैं जिनमें से लगभग 80 हजार छात्र-छात्रायें अन्तिम वर्ष/सेमेस्टर के शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 25 हजार छात्र-छात्रायें बाहरी राज्यों से अध्यनरत हैं जिनको परीक्षा से पूर्व 1 अगस्त तक सम्बन्धित विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में अपनी उपस्थिति देनी होगी, लेकिन उनके लिए शर्त रखी गई है वह अपने प्रदेशों से कोविड-19 का टेस्ट कराते हुए प्रमाण पत्र भी साथ लेकर आयेंगे ताकि क्वारंटीन की अनिवार्यता से बचा जा सके।
बैठक में प्रमुख सचिव आनन्द वर्द्धन ने बताया कि यूजीसी के द्वारा पूर्व में शिक्षको, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कार्यालय आने सम्बन्धित जो छूट दी गई थी वह समाप्त कर दी गई है। अब सभी प्राचार्यों, शिक्षकों अधिकारियों व कर्मचारियों को अपने कार्यालय में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। आदेशों का पालन न करने पर सम्बन्धित के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।
बैठक के उपरान्त मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति ओपीएस नेगी द्वारा मुख्यमंत्री को कोविड-19 के दृष्टिगत मुख्यमंत्री राहत कोष हेतु विश्वविद्यालय की ओर से 5 लाख 80 हजार की धनराशि का चेक भेंट किया गया।
बैठक में राज्य मंत्री दिप्ती रावत, मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति ओपी नेगी, दून विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एके कर्नाटक, श्रद्धेय सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति डा. पीपी ध्यानी, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. कुमकुम रौतेला, तकनीकी सलाहकार मुख्यमंत्री डॉ. नरेन्द्र सिंह, रूषा सलाहकार डॉ. एमएसएम रावत, डॉ. के.डी.पुरोहित, पन्तनगर विवि के डीन डॉ. एसके कश्यप, संयुक्त सचिव एमएम सेमवाल, कुलसचिव सुधीर बुडाकोटी, एमएस मन्दरवाल, विपिन चन्द जोशी, डॉ. एएस उनियाल आदि विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

एनआईटी के स्थाई कैंपस के निर्माण से प्रदेश में क्वालिटी एजुकेशन को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सुमाङी में एनआईटी के स्थाई केम्पस के लिए 909.85 करोङ रूपए की स्वीकृति पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपने व्यय पर संस्थान के लिए बिजली व पानी की व्यवस्था करेगी और सङक का निर्माण करेगी। प्रदेशवासियों की लम्बे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है। एनआईटी के स्थाई कैम्पस के निर्माण से प्रदेश में क्वालिटी एजुकेशन को बढावा मिलेगा। साथ ही क्षेत्रवासियों की आर्थिकी भी मजबूत होगी।

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने भी प्रसन्नता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डा.रमेश पोखरियाल निशंक और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का धन्यवाद करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और वे स्वयं भी इसके लिए प्रयासरत थे और केंद्र सरकार से अनुरोध किया था। अब संस्थान के लिये धनराशि की मंजूरी से राज्य की बङी मांग पूरी हुई है। कुल 909.85 करोङ रूपए में से 78.81 करोङ रूपए वर्तमान के अस्थायी कैम्पस के सुदृढ़ीकरण के लिए स्वीकृत किए गए हैं।

प्रदेश के 05 विश्वविद्यालय एवं 104 महाविद्यालय ई-ग्रंथालय से जुडे़

सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राज्य के शासकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के पुस्तकालयों में ‘‘ई-ग्रंथालय’’ का शुभारम्भ किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को सचिवालय से राज्य के शासकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के पुस्तकालयों में ‘‘ई-ग्रंथालय’’ का शुभारम्भ किया। प्रदेश के 05 विश्वविद्यालय एवं 104 महाविद्यालय ई-ग्रंथालय से जुड़ चुके हैं। ई-ग्रन्थालय से लाइब्रेरी का मैनेजमेंट सिस्टम डिजिटल प्रारूप पर होगा। इससे शिक्षकों, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को शिक्षण कार्य में काफी सुगमता होगी।

ई-ग्रन्थालय से 35 लाख पुस्तकें ऑनलाइन उपलब्ध
सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को एक पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। यदि किसी विश्वविद्यालय या महाविद्यालय में कोई पुस्तक उपलब्ध न हो तो, इनके एक ही पोर्टल पर जुड़ने से ई-ग्रन्थालय के माध्यम से विद्यार्थियों सभी पुस्तकों का अध्ययन करने में सरलता रहेगी। ई-ग्रन्थालय के माध्यम से विद्यार्थियों को 35 लाख पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। जिससे ढाई लाख से अधिक छात्र-छात्राएं इससे जुड़ेंगे।

कृषि व बागवानी पर डाक्यूमेंट्री भी उपलब्ध हो
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि इस शिक्षा सत्र में विद्यार्थियों के लिए ई-ग्रंथालय बड़ी सौगात है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि ई-ग्रंथालय के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की पिछले 10 वर्षों का क्वेशन बैंक भी उपलब्ध कराया जाय। जिससे उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अच्छा आधार मिल सके। यह समय विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि, बागवानी और अन्य क्षेत्रों की बच्चों को अच्छी जानकारी प्राप्त हो सके, इसके लिए डाक्यूमेंट्री बनाई जाय। मैदानी जनपदों में लोगों को कृषि एवं बागवानी की अच्छी जानकारी होती है, लेकिन पर्वतीय जनपदों में हमें इस दिशा में विशेष ध्यान देना होगा। प्रदेश में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की गई। इससे लोगों को कैसे अधिक से अधिक फायदा हो सकते है, इस पर भी और प्रयासों की जरूरत है।

तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि इस समय पूरा विश्व कोविड-19 की महामारी के दौर से गुजर रहा है। हमें समय की मांग के अनुसार तकनीक को बढ़ावा देना होगा। आधुनिक तकनीक के माध्यम से हम आपसी दूरियों को कम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा कोविड के दौरान तकनीक के अधिक से अधिक उपयोग करने का सराहनीय प्रयास किया गया है। ई-ग्रंथालय के शुभारम्भ से विद्यार्थियों को समग्र जानकारियां उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि इस दिशा में और क्या प्रयास हो सकते हैं, इस दिशा में विचार करने की जरूरत है।

राज्य का प्रत्येक कॉलेज ई-ग्रन्थालय से जुड़ा
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य है, जहां प्रत्येक कॉलेज को ई-ग्रंथालय से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी की घोषणा एवं मार्गदर्शन में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को ई-ग्रंथालय से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के लिए गौरव की बात है कि यूजीसी की रैंकिंग के अनुसार उत्तराखण्ड के चार संस्थानों ने टॉप 100 में स्थान पाया है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार के लिए सभी महाविद्यालयों में प्राचार्य के पद भरे गये हैं। विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में 92 प्रतिशत फैकल्टी है। प्रदेश में 877 असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती निकाली गई, जिसमें से 527 असिस्टेंट प्रोफेसर ज्वाइन कर चुके हैं, शेष पदों पर भर्ती प्रक्रिया गतिमान है। लॉकडाउन के दौरान विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों द्वारा आनलाईन शिक्षण का कार्य किया गया। इसके काफी सकारात्मक परिणाम रहे।

उत्तराखंड में पलायन रोकने के लिए कृषि ही मददगारः सुबोध उनियाल

(एनएन सर्विस)
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की 26 वीं बैठक में उत्तराखण्ड के उद्यान, कृषि एवं रेशम विकास विभाग मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं, परन्तु अभी भी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि औषधीय खेती एवं जैविक खेती को बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। कृषि उत्पादों का निर्यात भारत सरकार की प्राथमिकताओं में है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने हेतु प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि नई नई फसलों को विकसित किए जाने की आवश्यकता है। इससे उत्पादकता बढ़ेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि किसानों को इंश्योरेंस के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों में छोटे छोटे किसानों की संख्या अधिक है। उनको ध्यान में रखते हुए योजनाओं को तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यों में सिंचाई के दायरे को बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। नए अध्यादेशों एवं फसल बीमा योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों को पहुंचे इसके प्रयास किए जाएं, ताकि हमारे किसान आत्मनिर्भर भारत बनाने में अपना योगदान दें सकें।
उत्तराखण्ड के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य में कृषि महिला आधारित है, इसलिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा वुमन फ्रेंडली खेती की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैविक कृषि के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल है। ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए वनों के वेस्ट मटीरियल से खाद बनाने हेतु योजनाओं पर बल दिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य में जैविक उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु सब्जी और फल फसलों में कीट नियंत्रण के लिए जैविक शोध कार्यक्रम चलाए जाने पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने राज्य के उत्पादों जैसे रेड राईस, राजमा, मंडुवा आदि की उन्नत किस्मों पर भी अनुसंधान किए जाने की आवश्यकता बताई।
कृषि मंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों के साथ ही कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाले बीजों पर भी रिसर्च किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के अन्तर्राष्ट्रीय बॉर्डर क्षेत्रों हेतु उचित जलवायु अनुसार फसलों पर अधिकाधिक शोध कराए जाएं ताकि सीमांत क्षेत्रों के किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़े। इससे पलायन भी रोका जा सकेगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य में नींबू वर्गीय फलों हेतु कल्मी पौध रोपण के लिए आईसीएआर एवं उद्यान विभाग उत्तराखण्ड द्वारा नींबू वर्गीय फलों के नेटवर्क परियोजना को लागू किए जाने की मांग की। उन्होंने राज्य में आलू उत्पादन की अपार सम्भावनाओं के दृष्टिगत केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखण्ड राज्य में भी क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र स्थापित करने की भी मांग की।
इस अवसर पर सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम एवं अन्य विभागीय वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

पीएम के मन की बात सुन सीएम त्रिवेन्द्र बोले, सृजनशीलता से होगा आत्मनिर्भर भारत का निर्माण

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि तमाम चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरा देश अपने प्रधानमंत्री के साथ है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ’मन की बात’ कार्यक्रम को सुना।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश का हर नागरिक राष्ट्र के लिए समर्पित है। कोरोना जैसी महामारी से प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सफलतापूर्वक लङाई लङी जा रही है। प्रधानमंत्री द्वारा सही समय पर लिए गए सही निर्णयों से ही भारत में कोरोना को नियंत्रित रख पाए हैं।

साल 2020 चुनौतियों का वर्ष है। हम इन चुनौतियों पर जीत हासिल करेंगे। कोई भी देश की ओर आंख उठाकर नहीं देख सकता है। हमारे वीर जवानों ने अपनी वीरता से यह साबित किया है। देश रक्षा के लिए उनके बलिदान को पूरा देश नमन करता है। आज समय है अपने जवानों का मनोबल बढ़ाने का उनका साथ देने का।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी सृजनशीलता से आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा। लोकल के लिए वोकल हमारा ध्येय होना चाहिए। हर संकट का सामना करते हुए देश आगे बढ़ता रहेगा।

सीएम ने डिजिटल हस्ताक्षर कर डिजिटल अभियान से जुड़े सीएम

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वदेशी जागरण मंच द्वारा स्वदेशी स्वावलंबन अभियान के तहत चलाए जा रहे डिजिटल अभियान के तहत जुड़कर डिजिटल हस्ताक्षर किए। इस अभियान का उद्देश्य विदेशी उत्पादों का बहिष्कार करना एवं स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के प्रयासों को सफल बनाने के लिए हमें स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना होगा। लोगों को स्वावलंबी होना जरूरी है। स्वदेशी जागरण मंच द्वारा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने एवं चीन के उत्पादों का बहिष्कार करने के लिए व्यापक स्तर पर जन जागरण अभियान चलाया जा रहा है।