“ये दशक उत्तराखंड का दशक”, सीएम धामी ने प्रशासन को तेज़, पारदर्शी और जन-केंद्रित कार्य शैली अपनाने का आह्वान किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की एक अनौपचारिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन सहित सभी वरिष्ठ एवं युवा आईएएस अधिकारी उपस्थित रहे। यह बैठक वर्तमान में चल रहे प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन (एओसी) के संदर्भ में थी।

बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह किसी औपचारिक संबोधन का अवसर नहीं है, बल्कि उनकी प्रशासन के लिए संवेदनशील और आत्मीय भावनाओं को साझा करने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने अपनी 25 वर्ष की यात्रा में अनेक चुनौतियों का सामना किया है और इन उपलब्धियों के पीछे राज्य के प्रशासनिक तंत्र की कड़ी मेहनत, निष्ठा और दूरदर्शिता का महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि, “आप सभी ने कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता और संवेदनशील प्रशासन का परिचय दिया है। इसके लिए मैं आप सभी को हृदय से साधुवाद देता हूँ।”

ये समय रुकने का नहीं, आगे बढ़ने का हैः मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय अधिक गति, अधिक दृढ़ता और अधिक संकल्प के साथ काम करने का है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्द, “ये दशक उत्तराखंड का दशक है” का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संकल्प को साकार करना उत्तराखंड के प्रशासन का दायित्व है।

उन्होंने कहा कि आने वाले पाँच वर्ष उत्तराखंड के लिए निर्णायक होंगे और हमें राज्य को ऐसे मोड़ पर लेकर जाना है, जहाँ हर नागरिक यह महसूस करें कि राज्य निर्णायक और सकारात्मक परिवर्तन से गुजर रहा है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि, प्रशासन को तेजी और पारदर्शिता के साथ काम करना होगा। हर योजना और निर्णय लक्ष्य-आधारित और जन-केंद्रित होना चाहिए। व्यवस्था ऐसी बने कि फाइलों का निस्तारण समयबद्ध हो। योजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर तुरंत दिखाई दे। हर प्रक्रिया में जवाबदेही स्पष्ट हो।

ये केवल नौकरी नहीं, समाज सेवा का दायित्व हैः धामी

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उनकी मूल भावना का स्मरण कराते हुए कहा कि उन्होंने यह सेवा धन, पद या सुरक्षा के लिए नहीं चुनी होगी, बल्कि राष्ट्र एवं समाज के लिए कुछ करने की भावना से चुनी होगी।

उन्होंने कहा कि, “आपके निर्णय सीधे लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं। इसलिए संवेदनशीलता, दूरदृष्टि और तथ्यपरक सोच अत्यंत आवश्यक है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी-कभी जनता की शिकायतें प्रशासन की छवि को आहत करती हैं। लालफीताशाही, शिकायत न सुने जाने और फाइलों में अनावश्यक देरी जैसी बातें व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनता के विश्वास को सर्वाेपरि रखना चाहिए।

प्रेरणा के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री का संबोधन

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक इतिहास में सूर्यप्रताप सिंह, टी. एन. शेषन, नृपेंद्र मिश्र जैसे अनेक अधिकारी ऐसे रहे हैं जिन्होंने अपनी ईमानदारी, संकल्प और जनसेवा के माध्यम से समाज में स्थायी छाप छोड़ी।

मुख्यमंत्री ने कहा, “पद की प्रतिष्ठा आपके कार्यकाल तक है, लेकिन आपके कार्यों का सम्मान आजीवन रहता है।” उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने पद को केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज सेवा का पवित्र अवसर समझें।

उदासीनता की कोई जगह नहीं, मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के ‘नए भारत’ में उदासीन कार्यशैली बर्दाश्त नहीं की जाती। उन्होंने निर्देश दिए कि, कोई भी कार्य अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। निर्णय तेजी और सूझबूझ से लिए जाएं। सभी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पारदर्शिता और समयबद्धता से पहुँचे। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में मासिक समीक्षा, निरंतर मॉनिटरिंग, और साइट निरीक्षण को सुनिश्चित करना चाहिए।

“विकल्प रहित संकल्प” के साथ कार्य करने की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के मंत्र के साथ उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए कार्यरत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आईएएस अधिकारी अपनी निष्ठा, मेहनत और संकल्प के साथ इस लक्ष्य को प्राप्त करने में अग्रणी भूमिका निभाते रहेंगे।

कार्यक्रम में मुख्य सचिव ने वर्तमान में चल रहे प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन के अनुभव साझा किये।

एआई कितना भी उन्नत हो जाए, किताबों का कोई विकल्प नहींः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रतिष्ठित लेखक जय सिंह रावत द्वारा लिखित पुस्तक “उत्तराखंड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास” का विमोचन किया। यह पुस्तक उत्तराखंड राज्य के राजनीतिक, प्रशासनिक एवं क्रमिक विकास की संपूर्ण और प्रामाणिक दस्तावेज़ी यात्रा को प्रस्तुत करती है।

कार्यक्रम के शुभारंभ में मुख्यमंत्री ने उपस्थित महानुभावों, लेखकों, पत्रकारों तथा जनप्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए लेखक जय सिंह रावत को इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए हार्दिक बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत ने राज्य के गठन के बाद की 25 वर्षों की राजनीतिक यात्रा को जिस सुसंगतता और प्रमाणिकता के साथ संकलित किया है, वह अत्यंत सराहनीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के इतिहास, संस्कृति और लोक परंपराओं पर कई पुस्तकें उपलब्ध हैं, लेकिन राज्य स्थापना के बाद की ढाई दशक की घटनाओं को तथ्यों, दस्तावेजों और विश्लेषण के आधार पर संग्रहित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे लेखक ने उत्कृष्टता के साथ प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि पांच भागों में विभाजित यह पुस्तक शोधार्थियों, विद्यार्थियों और प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि राज्य बनने के बाद उत्तराखंड ने एक लंबा राजनीतिक अस्थिरता का दौर भी देखा, जिसका प्रभाव विकास की गति पर पड़ा। रावत जी ने इस संपूर्ण कालखंड का प्रामाणिक प्रस्तुतिकरण करते हुए दुर्लभ दस्तावेज़ों और प्रेस कतरनों की मदद से एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संकलन तैयार किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “इतिहास लिखना एक गंभीर दायित्व है, जिसमें तथ्य, दृष्टि और ईमानदारी का होना आवश्यक है। रावत ने पत्रकारिता की निष्ठा और निर्भीकता के साथ इस कालखंड को सहेजने का कार्य किया है।”

पुस्तक अध्ययन पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के इंटरनेट युग में जानकारी तत्काल उपलब्ध हो जाती है, लेकिन किताबों का महत्व कभी कम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि पुस्तकें हमारे विचारों को गहराई देती हैं और ज्ञान को स्थायी रूप से संजोती हैं।

मुख्यमंत्री ने सभी से अपील की किकृ
“ किसी भी कार्यक्रम में ‘बुके नहीं, बुक दीजिए’। इससे जहां पुस्तकों के प्रति रुचि बढ़ेगी, वहीं लेखकों को भी प्रेरणा मिलेगी।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस तेज़ी से बदलते दौर में तकनीक का उपयोग आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही अपनी गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों को सुरक्षित रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में भाषा कंटेंट, साहित्य, और लोक परंपरा से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देना चाहिए। सरकार भी इस दिशा में गंभीरता से प्रयास कर रही है तथा नई पीढ़ी के कंटेंट क्रिएटर के लिए इस दिशा में प्रतियोगिताएं आयोजित कर रही है द्य उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर स्थानीय भाषाओं में लेखन, गीत-संग्रह, शोध और डिजिटल कंटेंट तैयार करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहन और सम्मान दिए जाने की दिशा में सरकार सतत प्रयासरत है।

उन्होंने कहा कि “भाषा, संस्कृति और रीतिदृरिवाज़ केवल अभिव्यक्ति के माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान और विरासत की नींव हैं। इसलिए आवश्यक है कि हम अपनी बोली-भाषाओं का संरक्षण करें और आने वाली पीढ़ियों में इनके प्रति गर्व की भावना विकसित करें।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की नई पीढ़ी को यह बताना बहुत ज़रूरी है कि हमारे पूर्वजों ने कितनी कठिनाइयों और संघर्षों के बीच अपनी परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और भाषा को बचाए रखा। उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपनी जड़ों को समझते हैं, तो उनमें आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना मजबूत होती है।

पुस्तक पढ़ने की आदत पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि “एआई कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, पुस्तकों को रिप्लेस करने का कोई अवसर नहीं है। पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि सोचने, समझने और सीखने की एक गहरी प्रक्रिया हैं।”

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने घरों, विद्यालयों और समुदायों में स्थानीय भाषाओं के उपयोग को बढ़ावा दें तथा साहित्य और लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भाषा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अनेक नई पहलें प्रारंभ कर रही है और आगे भी इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्थानीय बोली-भाषाओं, साहित्य और पारंपरिक बोलियों के डिजिटलाइजेशन पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं का सांस्कृतिक खजाना सुरक्षित रहे और नई पीढ़ी आसानी से इन तक पहुँच सके। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर सामग्री उपलब्ध होने से हमारी मातृभाषाएँ न केवल संरक्षित होंगी, बल्कि आधुनिक समय के अनुरूप और अधिक सशक्त रूप में आगे बढ़ेंगी।

कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विधायक बृज भूषण गैरोला, पत्रकार, साहित्यकार एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

सीएम धामी ने प्रदेशवासियों को दी बड़ी राहत, राज्य में अगले एक वर्ष तक नहीं बढ़ेगी वाहन फिटनेस फीस

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य सरकार ने उत्तराखंड के वाहन स्वामियों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान करते हुए पुराने (15 वर्ष) कमर्शियल वाहनों की फिटनेस फीस में वृद्धि को आगामी 21 नवम्बर 2026 तक स्थगित कर दिया है। इस संबंध में परिवहन विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना सचिव परिवहन बृजेश कुमार संत द्वारा जारी की गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में 15 वर्ष पुराने कमर्शियल वाहनों की फिटनेस फीस में 10 गुना तक की वृद्धि की गई थी। प्रदेश की जनभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है कि उत्तराखंड के वाहन स्वामियों पर इसका तात्कालिक बोझ नहीं डाला जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार आमजन के हितों को सर्वाेपरि रखते हुए ऐसे निर्णय ले रही है, जिनसे जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हमेशा जनता-जनार्दन की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करती रहेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “हमारी सरकार का संकल्प जनता को राहत देना और जनहित में त्वरित निर्णय लेना है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा कमर्शियल वाहनों की फिटनेस फीस में की गई वृद्धि को देखते हुए हमने इसे उत्तराखंड में एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिया है। इस अवधि में पूर्व निर्धारित फीस ही लागू रहेगी। हम नहीं चाहते कि प्रदेश के वाहन स्वामियों और परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों पर अचानक अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़े। आने वाले समय में केंद्र सरकार द्वारा किये जाने वाले पुनरीक्षण के अनुसार ही राज्य में नई दरें लागू की जाएंगी।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि “हमारी सरकार जनता के लिए संवेदनशील है। गरीब, मध्यम वर्ग, टैक्सी व ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े हजारों लोगों का हित सुरक्षित रखना हमारी प्राथमिकता है। जनहित के निर्णयों में हम किसी भी प्रकार की देरी नहीं होने देंगे।”

उत्तराखंड में संविधान दिवस पर सभी शिक्षण संस्थानों में सामूहिक वंदे मातरम गायन का आयोजन

‘संविधान दिवस’ के अवसर पर प्रदेश के सभी राजकीय एवं निजी शिक्षण संस्थानों में राष्ट्र गीत ‘वन्दे मातरम्’ का सामुहिक गायन किया जायेगा। जिसमें 20 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं प्रतिभाग करेंगे। शिक्षण संस्थानों में आयोजित होने वाले सामुहिक गायन कार्यक्रम में प्रदेश के राज्यपाल व मुख्यमंत्री सहित सभी महानुभाव व जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के सफल संचालन को लेकर सम्बंधित विभागों के विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं।

सूबे विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने आज सचिवालय स्थित एफआरडीसी सभागार में विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, संस्कृत शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों की संयुक्त समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने विभागीय अधिकारियों को प्रदेशभर समस्त राजकीय एवं निजी शिक्षण संस्थानों, तकनीकी संस्थानों, चिकित्सा शिक्षा संस्थानों, व्यावसायिक पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थानों सहित प्रशिक्षण संस्थानों में आगामी 26 नवम्बर को ‘संविधान दिवस’ को वृहद स्तर पर मनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि इस महत्पूर्ण अवसर पर 20 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं, एनएसएस, स्काउट्स एंड गाइड व एनसीसी गाइड प्रातः 9ः30 बजे एक साथ राष्ट्र गीत ‘वन्दे मातरम्’ का सामुहिक गायन करेंगे। डाॅ. रावत ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों से लेकर महाविद्यालयों में आयोजित होने वाले सामुहिक गायन कार्यक्रम में प्रदेश के राज्यपाल व मुख्यमंत्री भी प्रतिभाग करेंगे। इसके अलावा उक्त कार्यक्रम में स्वाधीनता सेनानी पद्मश्री सम्मान से सम्मानित गणमान्य व्यक्तियों सहित जिलों के प्रभारी मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, सरकार में दर्जा राज्य मंत्रियों, नगर निगमों के महापौरों, जिला पंचायत अध्यक्षों, नगर निकायों के अध्यक्षों, ब्लाॅक प्रमुखों, जिला पंचायत व क्षेत्र पंचायत सदस्यों, ग्राम प्रधानों सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिये गये हैं। इसके अतिरिक्त डाॅ. रावत ने विभागीय अधिकारियों को ‘वन्दे मातरम्’ के सामुहिक गायन कार्यक्रम की वीडियो रिकार्डिंग के साथ ही फोटोग्राफी अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिये, जिनको जियोटैग भी किया जायेगा। उन्होंने आयोजन संबंधी उत्कृष्ट वीडियो, फोटो व विशिष्ट उपलब्धि को www.vandemataram150.in वेबसाइट व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अपलोड़ करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिये उन्होंने सम्बंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को ब्लाॅक व जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर आवश्यक समन्वय स्थापित के निर्देश भी बैठक में दिये। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद युवा पीढ़ी में भारतीय संविधान व राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान और राष्ट्रभावना को मजबूत करना है, साथ ही राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय प्रतिबद्धता व राष्ट्रीय एकता की भावना को भी विकसित करना है।

बैठक में सचिव उच्च एवं तकनीकी शिक्षा डाॅ. रणजीत सिन्हा, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक गैरोला, संयुक्त सचिव उच्च शिक्षा विक्रम यादव, निदेशक उच्च शिक्षा वी.एन. खाली, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डाॅ. अजय आर्य, निदेशक माध्यमिक शिक्षा डाॅ. मुकुल कुमार सती, निदेशक प्राथमिक शिक्षा अजय कुमार नौडियाल, निदेशक संस्कृत शिक्षा कंचन देवराड़ी सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम ने स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी सभागार, श्री सिद्धबली हनुमान द्वार तथा शहीद चौक का लोकार्पण एवं उद्घाटन किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज रुड़की के जीवनदीप आश्रम में आयोजित भव्य पाँच दिवसीय धार्मिक एवं सामाजिक महोत्सव में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने सनातन संस्कृति के संरक्षक परम पूजनीय संत-महात्माओं, धर्माचार्यों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए कहा कि संत समाज जीवन्त तीर्थ के समान होता है, जो समाज को सत्पथ की ओर प्रेरित करता है।

मुख्यमंत्री ने परम पूज्य पद्मभूषण ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए परम पूज्य जगद्गुरु महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानन्द गिरि महाराज सहित सभी संत जनों को साष्टांग प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि संतों की दिव्य उपस्थिति मन और आत्मा में नई ऊर्जा का संचार करती है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जीवन दीप सेवा न्यास के इस पांच दिवसीय महोत्सव में शतचंडी महायज्ञ, श्री भक्तमाल कथा, 1100 बालिकाओं का पूजन, पाठ्य सामग्री वितरण एवं पाँच कन्याओं के सामूहिक विवाह जैसे आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम समाज में सेवा-भावना का अद्भुत संदेश दे रहे हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी सभागार, श्री सिद्धबली हनुमान द्वार तथा शहीद चौक का लोकार्पण एवं उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि शहीद चौक हमारे अमर बलिदानियों के साहस और राष्ट्रभक्ति का स्मारक है, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि मैंन मार्ग से सुनहरा मार्ग चौराहे को शहीद चौक के नाम दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज ने राष्ट्र, धर्म एवं मानवता की सेवा में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर समाज को त्याग, करुणा एवं सेवा का पवित्र मार्ग दिखाया। उन्हीं की प्रेरणा से जीवन दीप सेवा न्यास शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार, महिला सशक्तिकरण, गौ-संरक्षण सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवा कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज विश्वभर में भारत की सनातन संस्कृति का गौरव बढ़ा है। उन्होंने उल्लेख किया कि-भव्य राम मंदिर निर्माण, बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक निर्माण जैसी पहलें हमारी सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। केदारखंड एवं मानसखंड मंदिर क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण के साथ यमुनातीर्थ स्थल का पुनरुद्धार, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर निर्माण, दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं।

राज्य की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संरचना को संरक्षित रखने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सांस्कृतिक मूल्यों एवं सामाजिक संरचना की रक्षा के लिए पूर्णत संकल्पबद्ध है। उन्होंने बताया कि धर्मांतरण विरोधी कानून एवं सख्त दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं।

लैंड जिहाद, लव जिहाद, थूक जिहाद जैसी जिहादी मानसिकताओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की गई है। लैंड जिहाद पर 9 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को मुक्त कराया गया है। प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू कर समान कानून व्यवस्था स्थापित की गई है।

युवाओं के हित में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया, जिससे 26,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली। अवैध गतिविधियों में संलिप्त 250 से अधिक अवैध मदरसों को सील किया गया तथा नया कानून लागू कर मदरसा बोर्ड समाप्त करने का निर्णय लिया गया है, जिसके बाद 1 जुलाई 2026 से गैर-मानक मदरसे स्वतः बंद हो जाएंगे।

‘‘ऑपरेशन कालनेमि’’ के अंतर्गत सनातन धर्म को बदनाम करने वालों पर कठोर कार्रवाई की गई है।

उत्तराखंड को श्रेष्ठ राज्य बनाने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार ‘‘विकल्प रहित संकल्प’’ के साथ राज्य को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने हेतु सतत प्रयासरत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संत-महात्माओं के आशीर्वाद और जनसहयोग से उत्तराखंड निश्चित ही एक आदर्श एवं अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के धर्मपत्नी गीता धामी ने कहा कि सौभाग्य का दिन है कि आज जीवन दीप आश्रम द्वारा पांच दिवसीय महोत्सव आयोजित किया गया है, जिसमें हमें भी आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ उन्होंने कहा कि जीवन दीप आश्रम सनातन धर्म का निर्वहन करते हुए समाज हित में कार्य कर रहे हैं तथा आज इस पंच दिवसीय महोत्सव में 1100 कन्याओं पूजन एवं भोजन कराया जा रहा है तथा 06 कन्याओं का सामूहिक विवाह किया जा रहा है।उन्होंने सभी कन्याओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका जीवन सुखी, समृद्ध एवं मंगलमय हो और सुखमय जीवन व्यतीत करे।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 11 कन्याओं का पूजन किया तथा उन्हें उपहार एवं दक्षिणा भेंट की तथा मुख्यमंत्री ने 06 कन्याओं के सामूहिक विवाह पर उनको शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद दिया तथा उनके सुखद जीवन को कमाना की।

इस अवसर पर जून अखाड़े के महामंडलेश्वर यतिद्रनंद गिरी महाराज ने भवन के लोकार्पण के लिए मुख्यमंत्री सहित सभी जनप्रतिनिधियों एवं क्षेत्र वासियों का कार्यक्रम में शामिल होने पर आभार व्यक्त किया। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष/सचिव निरंजनी अखाड़ा श्रीमहंत रविन्द्र पुरी महाराज, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री (भारत साधु समाज) महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी, राष्ट्रीय मंत्री (भारत साधु समाज) महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, जूना अखाड़ा महामंडलेश्वर स्वामी मैत्रेयी गिरी, कोठारी महंत बड़ा उदासीन अखाड़ा श्रीमहंत राघवेंद्र दास, महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद सरस्वती (नंगली दरबार) महामंडलेश्वर स्वामी शिव प्रेमानंद, प्रदेश प्रवक्ता (भारत साधु समाज) महंत स्वामी अमृतानंद, महेंद्र स्वामी सत्यव्रता नंद सरस्वती,स्वामी विनोद महाराज,स्वामी प्रकाशा नंद महाराज,राज्य मंत्री विनय रोहिल्ला,जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, रुड़की मेयर अनीता अग्रवाल, विधायक रुड़की प्रदीप बत्रा, जिलाध्यक्ष रुड़की मधु सिंह, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश गिरी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राजेंद्र चौधरी, जिला महामंत्री रुड़की अक्षय प्रताप सिंह, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष दिनेश कौशिक, महामंत्री सागर गोयल, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल सहित विभिन्न क्षेत्रों से साधु संत, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने दिया बार एसोसिएशन की विभिन्न समस्याओं के समाधान का आश्वासन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अध्यक्ष संघर्ष समिति बार एसोसिएशन प्रेमचंद शर्मा एवं अध्यक्ष बार एसोसिएशन देहरादून मनमोहन कंडवाल के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारियों ने भेंट की। उन्होंने नए जिला न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं हेतु आवंटित भूमि पर तथा पुराने जिला जजी परिसर की भूमि अधिवक्ताओं के पक्ष में आवंटित करने व दोनों स्थानों पर सरकार द्वारा अधिवक्ताओं के चौंबर के निर्माण कराए जाने संबंधी ज्ञापन सौंपा।

मुख्यमंत्री ने संगठन के पदाधिकारी को आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आपसी वार्तालाप एवं विचार-विमर्श से ही समस्याओं का समाधान हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के विकास में हम सबको सहयोगी बनना होगा राज्य आंदोलन के वे स्वयं साक्षी रहे हैं, इसमें अधिवक्ताओं का भी योगदान रहा है। हम सबको राज्य के वित्तीय संसाधनों पर भी ध्यान देना होगा।

मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं से अपना आंदोलन समाप्त करने की अपेक्षा करते हुए कहा कि इस संबंध में समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रशासन और अधिवक्ताओं की समिति गठित की जाए, इसमें किसी आर्किटेक्ट को भी शामिल कर कोई सर्वमान्य हल निकल जाने के प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संबंध में जिलाधिकारी द्वारा प्रस्तुत आख्या एवं समस्याओं के समाधान से संबंधित बिंदुओं को कैबिनेट में रखते हुए उचित निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि अधिवक्ताओं के चौंबर निर्माण के लिए राज्य सरकार भी आर्थिक सहयोग करेगी उन्होंने अधिवक्ताओं से सांसदों एवं विधायक गणों से भी सहयोग की मांग का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वे स्वयं भी पहल करेंगे। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद सभी पदाधिकारी संतुष्ट नजर आए तथा मुख्यमंत्री का आभार भी जताया।

इस अवसर पर सचिव शैलेश बगौली, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह के साथ बार एसोसिएशन के अधिवक्ता राजबीर सिंह बिष्ट, मनमोहन लाम्बा, चन्द्रशेखर तिवारी, राजीव शर्मा, राजेश कुमार आर्य, अनुज शर्मा, अनिल पंडित, रंजन सोलंकी, व भानू प्रताप सिसोदिया उपस्थित थे।

विभिन्न जनपदों के डीएम ने सर्वोत्तम पहलों पर दिया प्रस्तुतीकरण

एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस- 2025 का आयोजन आज दूसरे दिन भी मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।

कॉन्फ्रेंस में जिलाधिकारी अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल, देहरादून, टिहरी गढवाल, चमोली, नैनीताल और उत्तरकाशी द्वारा अपने जनपदों की Best Practices (सर्वोत्तम पहलों) पर प्रस्तुतिकरण दिया गया। उपस्थित अधिकारियों द्वारा उन पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

जिलाधिकारी अल्मोड़ा ने Sports, Health and Wellness विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया।
कहा कि प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं प्रदान किये जाने तथा नयी प्रतिभाओं को अवसर प्रदान किये जाने हेतु स्पोर्ट्स और कम्युनिटी फिटनेस जोन तैयार किया गया है।
कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) 100 बच्चों को फ्री कोचिंग और ट्रेनिंग के साथ- साथ अन्य सहायता दी जा रही है।

जिलाधिकारी पौड़ी ने पिरूल और इनवेसिव बायोमास लाइवलीहुड पर प्रस्तुतिकरण देते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की सहायता से पिरूल से बायोमास तैयार किया जा रहा है। जिससे महिलाओं को नियमित रूप से आय प्राप्त हो रही है। वनाग्नि तथा जंगली जानवरों से होने वाली हानियों को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

महिला SHG के सदस्यों के माध्यम से 1800 टन लैंटाना, पिरूल और अन्य हानिकारक प्रजाति की वनस्पतियों को हटाया जा रहा है।
इसमें 280 महिलाएं भी शामिल हैं।

जिलाधिकारी, नैनीताल द्वारा Urban Infrastructure & Mobility विषय पर पर प्रस्तुतिकरण दिया गया। जिसके अन्तर्गत नैनीताल शहर हेतु लक्ष्य आधारित, सतत विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया गया। जिस पर मुख्य सचिव द्वारा सभी नगर निकायों को एक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी, देहरादून द्वारा बाल भिक्षानिवृति निवारण प्रयास पर अपना प्रस्तुतिकरण दिया गया।

कहा कि देहरादून में भिक्षावृति में लिप्त बच्चों के पढ़ने, खेलने तथा स्किल डेवलपमेंट हेतु एक केन्द्र स्थापित किया गया है, जिसमें ऐसे बच्चों को चिन्हित कर उन्हें भिक्षावृति से बाहर निकाल कर सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

नगर आयुक्त, नगर निगम देहरादून द्वारा भी देहरादून नगर की समस्याओं के सुधार हेतु बनाए गये मॉडल का प्रस्तुतीकरण दिया गया।

जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल द्वारा जनपद में Youth के एप्रोच विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया गया।

उन्होंने कहा कि जनपद में युवाओं को स्वरोजगार और सकारात्मक एक्टिविटीज में प्रेरित करने के लिए स्वरोजगार और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

उन्होंने यूथ के लिए कैप्सूल कोर्स, मोबिलिटी सपोर्ट, कैरियर हब और बेस्ड फ्लेक्सिबल स्किलिंग पाथ-वे तैयार किये जाने का प्रस्ताव दिया।

जिलाधिकारी उत्तरकाशी द्वारा धराली में आयी भीषण आपदा में हुई क्षति तथा भविष्य में इसके रोकथाम हेतु किये जा रहे कार्यों का प्रस्तुतिकरण दिया तथा Ecology and Livelihood विषय पर प्रोजेक्ट का प्रस्तुतीकरण दिया, जिसकी सराहना की गयी।

मुख्य सचिव द्वारा स्पोर्ट्स, ग्रीन लाइवलीहुड और यूथ एम्पावरमेंट में इनोवेटिव मॉडल की सराहना की गयी।

उन्होंने सभी अधिकारियों को डिस्ट्रिक्ट की बेस्ट प्रैक्टिसेज को बढ़ाने और भविष्य के प्लान को विकसित उत्तराखंड 2047 के साथ संयुक्त करने के निर्देश दिये।

कॉन्फ्रेंस में प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, एल एल फैनई व आर मीनाक्षी सुंदरम सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन में हुआ विकसित उत्तराखंड 2047 पर मंथन

उत्तराखंड सरकार ने आज अपनी दीर्घकालिक विकास प्राथमिकताओं को पुनः रेखांकित करते हुए नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ प्रशासकों और जिला अधिकारियों को विकसित उत्तराखंड/2047 के रोडमैप को आगे बढ़ाने के लिए एक साथ लाया।

अपने उद्घाटन संबोधन में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने एओसी को क्षेत्रीय अधिकारियों और नीति-निर्माताओं के बीच प्रत्यक्ष संवाद का महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि आमने-सामने की भागीदारी समन्वय को मजबूत करती है और उन क्षेत्रीय मुद्दों पर स्पष्टता लाती है, जिनके समाधान के लिए नीति-स्तरीय हस्तक्षेप आवश्यक है। मुख्य सचिव ने पर्यटन, बागवानी, स्वास्थ्य एवं वेलनेस और शहरी विकास को राज्य की विकास यात्रा के प्रमुख स्तंभों के रूप में चिन्हित करते हुए अनियोजित शहरी विस्तार को रोकने हेतु नियोजित एवं सतत शहरीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि “विकसित उत्तराखंड 2047 तभी साकार होगा जब नीति निर्माण में जमीनी वास्तविकताओं का समुचित प्रतिबिंब हो। आशा है कि यह विचार-विमर्श हमारे साझा दीर्घकालिक लक्ष्य के लिए ठोस और समन्वित समाधान प्रदान करेगा।”

प्रमुख सचिव डा. आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने विकसित उत्तराखंड 2047 की विजनिंग प्रक्रिया प्रस्तुत की और 2025 से 2047 तक सतत विकास प्राप्त करने हेतु प्रस्तावित व्यापक आर्थिक मार्गों का विवरण दिया। बताया गया कि राज्य का जीएसडीपी 3.78 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2047 तक 28.92 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान है। उन्होंने उच्च-मूल्य कृषि की ओर संक्रमण, सेवा क्षेत्र के विस्तार, डिजिटल पहुँच एवं गुणवत्ता के सुदृढ़ीकरण, साथ ही शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के उन्नयन की आवश्यकता पर जोर दिया।

वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने राज्य की वित्तीय स्थिति प्रस्तुत करते हुए उभरती चुनौतियों जैसे अनुदानों की समाप्ति, राजस्व वृद्धि में मंदी और व्यय में बढ़ोतरी का उल्लेख किया। उन्होंने साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण, यथार्थवादी अनुमान, लाइफ-साइकिल लागत आकलन और विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि राज्य की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

इंफ्रास्ट्रक्चर एवं मोबिलिटी रोडमैप प्रस्तुत करते हुए सचिव पंकज पांडे ने पिछले 25 वर्षों में बेहतर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हुई प्रगति को रेखांकित किया और डी-कंजेशन उपायों, मजबूत एवं लचीले बुनियादी ढांचे, तथा सार्वजनिक परिवहन के बेहतर एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया, विशेषकर पर्यटन तथा आर्थिक विकास को गति देने के लिए।

पर्यटन विभाग की अतिरिक्त सचिव ने विंटर टूरिज्म की अवधारणा प्रस्तुत की। इस संबंध में कुछ सर्किट चिन्हित किए गए हैं तथा इसे क्रियाशील बनाने के लिए नीतियों एवं प्रभावी अभिसरण की आवश्यकता पर बल दिया।

इसके अतिरिक्त, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चम्पावत, उधम सिंह नगर और हरिद्वार के जिलाधिकारियों द्वारा क्रमशः हर्बल एवं औषधीय पौधों, वाइब्रेंट विलेजेज, बागवानी की संभावनाएँ, आकांक्षी जिला पहल तथा कचरा प्रबंधन से संबंधित जिला-स्तरीय उत्कृष्ट कार्यों का प्रस्तुतीकरण किया गया। विभिन्न जिला-स्तरीय चुनौतियों को भी जिलाधिकारियों द्वारा साझा किया गया। इस पर मुख्य सचिव ने सुझाव दिया कि चुनौतियों के समाधान एवं राज्य के त्वरित विकास हेतु कुछ संस्थागत ढाँचे विकसित किए जाने आवश्यक हैं।

बैठक में अपर सचिव नवनीत पांडेय ने सम्मेलन का सफल संचालन किया।

इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु व एल एल फैनई सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

पटना में सीएम धामी ने नवनिर्वाचित सीएम नीतिश कुमार व मंत्रीमंडल को दी शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज बिहार के गांधी मैदान, पटना में आयोजित बिहार की नवनिर्वाचित सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में प्रतिभाग करने पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद के सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बिहार और उत्तराखंड के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नई सरकार के नेतृत्व में बिहार राज्य नई ऊर्जा और संकल्प के साथ विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने देशभर से पहुंचे विभिन्न राज्यों के गणमान्य नेताओं से भी शिष्टाचार भेंट की और उनसे राष्ट्रीय विकास, सुशासन तथा समन्वित प्रगतिशील नीतियों पर विचार-विमर्श किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने बिहार के जनता जनार्दन के उज्ज्वल भविष्य, राज्य की निरंतर प्रगति और नवगठित सरकार के सफल कार्यकाल की शुभकामनायें प्रेषित कीं।

उपलब्धिः उत्तराखंड को खनन क्षेत्रों में सुधार कार्यों पर केंद्र से मिले 100 करोड़ रूपये

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में खनन क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन और लगातार सुधारों के चलते उत्तराखंड एक बार फिर केंद्र सरकार से बड़ी प्रोत्साहन राशि हासिल करने में सफल रहा है। केंद्र के खान मंत्रालय ने वर्ष 2025-26 की विशेष सहायता योजना के तहत उत्तराखंड को माइनर मिनरल्स रिफॉर्म्स मैं 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की है। इससे पहले भी माह अक्टूबर 2025 मैं राज्य को एसएमआरआई रैंकिंग मैं दूसरा स्थान प्राप्त होने पर 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिल चुकी है। इस प्रकार खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट सुधारों और बेहतर नीतियों की बदौलत उत्तराखंड को कुल 200 करोड़ रुपये की प्रोहोत्सन राशि प्राप्त हो चुकी है।

राज्य ने हाल के वर्षों में खनन सुधारों पर जोर देते हुए बेहतर नीतियां लागू की हैं, जिसका परिणाम यह है कि उत्तराखंड ने खनन सेक्टर में देश में नंबर-1 स्थान हासिल किया है। केंद्र द्वारा जारी ताज़ा कार्यालय ज्ञाप दिनांक 18.11.2025 में बताया गया है कि राज्य ने खनन क्षेत्र से जुड़ी अधिकांश सुधारात्मक कार्यवाहियों को समय पर और प्रभावी ढंग से लागू किया है। खासतौर पर माइनर मिनरल रिफॉर्म्स से संबंधित 7 में से 6 प्रमुख सुधारों के मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिससे राज्य ने प्रथम स्थान प्राप्त किया गया है!

खनन क्षेत्र में उत्तराखंड सरकार द्वारा अपनाई गई पारदर्शी और व्यवसाय-हितैषी नीतियों ने सरकार की आय में अभूतपूर्व वृद्धि की है। खनन विभाग के सुदृढ़ प्रबंधन तथा नई नीतियों ने न केवल सरकारी खजाने को मजबूती दी है, बल्कि प्रदेश में खनन कारोबार से लाखो लोगो को रोजगार प्राप्त हो रहा है और इससे जुड़े लाखों व्यापारियों और उद्यमियों को भी आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है। स्थानीय लोगो और सरकारी कार्यदायी संस्था को सस्ते दाम पर निर्माण सामग्री मिल रही है खनन गतिविधियों के चलते राज्य में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिली है।

केंद्र सरकार ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि उत्तराखंड खनन क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है और सुधारों को तेजी से लागू कर रहा है। इसी प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र ने वित्त मंत्रालय से राज्य को 100 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का आदेश जारी किया गया है है।

उक्त आदेश में शामिल राज्यों, नागालैंड, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड, में उत्तराखंड का प्रदर्शन सबसे बेहतर दर्ज किया गया है। मंत्रालय के आदेश के अनुसार, सभी राज्यों ने खनन में सुधार प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनाई गई है।

इस उपलब्धि के साथ यह साफ हो गया है कि उत्तराखंड का खनन क्षेत्र राज्य सरकार के लिए राजस्व का एक मुख्य स्रोत साबित हो रहा है। बढ़ती पारदर्शिता, बेहतर नीति निर्माण और समयबद्ध सुधारों की वजह से उत्तराखंड अब देश के खनन परिदृश्य में एक मजबूत और विश्वसनीय पहचान बना रहा है!
उत्तर प्रदेश,हिमाचल ,जम्मू कश्मीर आदि राज्य भी उत्तराखंड की खनन नीतियों का अनुसरण कर रहे है।

प्रदेश में खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ई नीलामी प्रणाली, सैटेलाइट आधारित निगरानी जैसे कई कदम उठाए गए हैं। सरकार पर्यावरण का ध्यान रखते हुए, अवैध खनन पर लगाम कस रही है। जिसके सकारात्मक परिणाम नज़र आने लगे हैं।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड।

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सीएम ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए 170.13 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुम्भ मेला-2027 के 11 नवीन निर्माण कार्यों के लिए राज्य स्तरीय एम्पावर्ड समिति की बैठक में संस्तुत ₹ 37.34 करोड़ स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री द्वारा 15वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अंतर्गत उत्तराखण्ड राज्य में अग्निशमन सेवाओं एवं आधुनिकरण हेतु स्वीकृत ₹ 79 करोड़, राज्य योजना के अन्तर्गत जनपद पौड़ी गढ़वाल के विधानसभा क्षेत्र पौड़ी के विकास खण्ड पाबौ में सीकू तिमली मोटर मार्ग के पुनर्निर्माण एवं सुधारीकरण कार्य हेतु ₹ र्3.2्र6 करोड़ के साथ ही विधानसभा क्षेत्र प्रतापनगर में पीपलडाली से म्यूण्डा ललवाली तक मोटर मार्ग का नवनिर्माण कार्य हेतु ₹ 1.78 करोड़ की योजना स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।

मुख्यमंत्री द्वारा मुख्यमंत्री घोषणा के तहत जनपद चम्पावत के विधानसभा क्षेत्र चम्पावत के टनकपुर में ग्राम पंचायत नायकगोठ के किरोडा नाले में 480.00 मीटर एवं 120.00 मीटर स्पान पुल के निर्माण हेतु ₹ 48.38 करोड तथा जनपद टिहरी के विधानसभा क्षेत्र नई टिहरी हेतु की गयी नई टिहरी में स्थित विद्या मंदिर इण्टर कालेज में सामुदायिक भवन का निर्माण संबंधी घोषणा के क्रियान्वयन हेतु ₹ 91.84 लाख के सापेक्ष पूर्व में स्वीकृत कुल धनराशि ₹ 55.10 लाख के अनुक्रम में अवशेष धनराशि ₹ 36.74 लाख की धनराशि स्वीकृत किये जाने का अनुमोदन प्रदान किया गया है।