सीएम ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने और संसद में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का किया आह्वान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगामी 16 अप्रैल से संसद में प्रस्तावित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष सत्र से पहले एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य के सभी सांसदों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रदेश अध्यक्षों को पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने और संसद में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।

अपने पत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आगामी 16 अप्रैल से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर एक विशेष विमर्श हेतु एक विशेष सत्र आयोजित होने जा रहा है। यह अवसर हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को और सुदृढ़ करने के साथ-साथ देश की आधी आबादी को निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में अधिक प्रभावी रूप से शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम प्रस्तुत करता है। एक समावेशी समाज का निर्माण तभी संभव है जब उसकी महिलाएँ समान अवसरों के साथ आगे बढ़ें और नेतृत्व की भूमिकाएँ निभाएँ। आज देश की बेटियाँ स्पेस से लेकर स्पोर्ट्स तक, सशस्त्र बलों से लेकर स्टार्ट-अप्स तक हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रही हैं और अपनी मेहनत व संकल्प से नए मानक स्थापित कर रही हैं। सार्वजनिक जीवन में उनकी बढ़ती भागीदारी हमारे समाज में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि वर्ष 2023 में सभी दलों के सांसदों ने एकजुट होकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया था, जो भारतीय लोकतंत्र की एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज है। इसके क्रियान्वयन को लेकर संसद में विचार हुआ था और सभी दलों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की थी कि इसके प्रावधानों को यथाशीघ्र लागू किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों, संवैधानिक विद्वानों और राजनीतिक दलों से प्राप्त सुझावों के आधार पर यह स्पष्ट हो चुका है कि अब इस अधिनियम को उसकी पूर्ण भावना के साथ लागू करने का समय आ गया है। इसी क्रम में यह निर्णय लिया गया है कि 2029 के लोकसभा चुनाव तथा आगामी विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के प्रावधानों को पूर्ण रूप से लागू करने के बाद ही संपन्न हों, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं में नई ऊर्जा का संचार होगा और शासन व्यवस्था में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित होगी।

अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के संदर्भ में यह कदम इसलिए और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारा राज्य सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से सदैव मातृशक्ति को सम्मान देने की परम्परा का पालन करता आया है। पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाएँ परिवार, आजीविका और सामुदायिक जीवन की मुख्य आधारशिला रही हैं, और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच वे निरंतर जिम्मेदारियों का निर्वहन करती रही हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम उत्तराखण्ड की उन बेटियों के लिए नए अवसर खोलेगा जो राजनीति, समाज सेवा, शिक्षा, उद्यमिता और सार्वजनिक जीवन में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

राज्य में पंचायती राज संस्थाओं, नगर निकायों और सहकारी संस्थाओं में महिला आरक्षण के सफल क्रियान्वयन ने सक्षम महिला नेतृत्व की एक सशक्त पंक्ति तैयार की है, जो अब राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर भी अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की बढ़ी हुई भागीदारी न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करेगी, बल्कि समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को और अधिक संवेदनशीलता से समझने और संबोधित करने में भी सहायक होगी।

मुख्यमंत्री ने सभी से इस विषय पर व्यापक सहमति स्थापित करने का प्रयास करने का अनुरोध करते हुए कहा कि यह मुद्दा किसी दल या व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि देश की माताओं-बहनों बेटियों के सम्मान तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और सशक्त भविष्य से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सब मिलकर इस ऐतिहासिक परिवर्तन को साकार करेंगे और देश की नारी शक्ति को वह सम्मान और अवसर प्रदान करेंगे जिसकी वे हकदार हैं।

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने बताई दिल्ली-दून एक्सप्रेस वे पर बने एलिवेटेड कारिडोर की खासियत

दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे पर बना एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कारिडोर वन्य जीवों का सुरक्षा कवच बनेगा। यही नहीं, इसके निर्माण से मानव-वन्य जीव संघर्ष में कमी की प्रबल संभावना है। इस 12 किलोमीटर लंबे एशिया के संबसे लंबे एलिवेटेड कारिडोर को विकास और पारिस्थितिकी के संतुलन का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।
दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे और उससे जुडे़ वन और वन्य जीवों के विषय को लेकर सोमवार को वन मंत्री सुबोध उनियाल ने प्रेस कान्फ्रेंस की। वन मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में उन्होंने इस कॉरिडोर से वन एवं वन्य जीवों को होने वाले लाभों के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का आखिरी 20 किलोमीटर भाग उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग एवं उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व व देहरादून वन प्रभाग के घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है। यह परियोजना विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
वन मंत्री ने जानकारी दी कि उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश में इस परियोजना के अंतर्गत वन भूमि के हस्तांतरण के सापेक्ष व्यापक स्तर पर प्रतिपूरक वृक्षारोपण किया गया है। कुल 165.5 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रतिपूरक वृक्षारोपण कार्य किया गया है, जिसमें 1.95 लाख पेड़ लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी के निर्देशन में 40 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि से वन एवं वन्य जीव सरंक्षण हेतु इको रेस्टोरेशन के विभिन्न कार्य भी संपादित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में एशिया का सबसे लंबा लगभग 12 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर निर्मित किया गया है, जो विशेष रूप से वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन हेतु विकसित किया गया है। इसमें हाथी अंडरपास एवं अन्य वन्यजीवों पास का भी निर्माण किया गया है, जिससे वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि परियोजना के निर्माण के दौरान वन्य जीवों की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक एहतियाती उपाय अपनाए गए हैं। इसके अंतर्गत साउंड बैरियर एवं लाइट बैरियर जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे वन्यजीवों पर शोर एवं प्रकाश प्रदूषण का न्यूनतम प्रभाव ही पडे़।
वन मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि इस एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी तथा वन्यजीवों के सुरक्षित एवं सुगम आवागमन को बढ़ावा मिलेगा। इससे विभिन्न प्रजातियों के बीच बेहतर आनुवंशिक आदान-प्रदान संभव होगा, जो जैव विविधता के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि कॉरिडोर के निर्माण से अगले 20 वर्षों में 240 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो कि लगभग 60-68 लाख पेड़ों के द्वारा किए जाने वाले कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण के समान है। साथ ही 19 प्रतिशत ईंधन की बचत भी होगी।
वन मंत्री ने कहा कि यह परियोजना वन्य जीवों के लिए सुरक्षित प्रवास के साथ समय में कमी लाएगी। साथ ही, पर्यटन, व्यापार एवं स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगी, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी । प्रेस कान्फ्रेंस में वन विभाग के पीसीसीएफ ( हॉफ ) आर के मिश्रा व अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

तकनीक ने बचा लिए 33,840 पेड़
-दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे परियोजना के निर्माण के दौरान पहले 45 हजार पेड़ काटने की आवश्यकता बताई गई थी, लेकिन वैज्ञानिकों की कुशलता और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से 33,840 पेड़ कटने से बच गए। वन मंत्री के अनुसार-इस परियोजना के निर्माण 11,160 पेड़ों को काटना पड़ा, जबकि पूर्व में 45 हजार पेड़ काटे जाने की बात थी।

सीएम ने अधिकारियों को राज्य सरकार के मूल मंत्र “सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि” के आधार पर कार्य करने के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में विधानसभा क्षेत्र डीडीहाट, गंगोलीहाट, कपकोट एवं बागेश्वर से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन घोषणाओं पर अभी तक शासनादेश जारी नहीं हुए हैं, उनके संबंध में त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि लंबित घोषणाओं पर अधिकतम 20 दिनों के भीतर शासनादेश जारी कर दिए जाएं, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की देरी न हो।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य सरकार के मूल मंत्र “सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि” के आधार पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में आने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए। योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली समस्याओं का संबंधित क्षेत्र के विधायकगणों के साथ समन्वय स्थापित कर उनका प्रभावी समाधान निकाला जाए, ताकि विकास कार्यों की गति बनी रहे।

मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वन भूमि स्थानांतरण से जुड़े मामलों की जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि वन भूमि से संबंधित प्रक्रियाओं में तेजी लाकर विकास कार्यों में बाधा को दूर किया जाए। साथ ही, इस विषय में विभागीय समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर भी बल दिया गया।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत निर्मित सड़कों के रख-रखाव के लिए संबंधित विभागों की एक समन्वय समिति गठित की जाए। उन्होंने कहा कि इस समिति द्वारा सड़कों के मेंटिनेंस कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम और सुरक्षित बना रहे।

बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी सड़कों के पैच वर्क का कार्य वर्षाकाल से पूर्व अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने खेल अवसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर खेल मैदानों के लिए भूमि उपलब्ध हो चुकी है, वहां 15 दिनों के भीतर आवश्यक धनराशि जारी की जाए, ताकि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ हो सके और युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कनालीछीना से पिपली बगड़ीगांव तक मोटर मार्ग के चौडीकरण की कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कपकोट के राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय कपकोट के साथ पूर्व माध्यमिक स्कूल संचालित करने की कार्यवाही के साथ मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बागेश्वर जिला अस्पताल में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये।

मुख्यमंत्री ने बैठक में सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जनहित से जुड़े कार्यों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें और समयबद्ध तरीके से सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक में विधायक डीडीहाट बिशन सिंह चुफाल, विधायक कपकोट सुरेश गड़िया, विधायक बागेश्वर पार्वती दास, वर्चुअल माध्यम से विधायक गंगोलीहाट फकीर राम, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव शैलेश बगौली, एस.एन.पाण्डेय, संबंधित विभागीय सचिव, वर्चुअल माध्यम से कुमांऊ कमिश्नर दीपक रावत, जिलाधिकारी पिथौरागढ़ आशीष भटगांई, जिलाधिकारी बागेश्वर आकांक्षा कोण्डे मौजूद थे।

बाबा के जीवन पर बनी फिल्म श्रद्धा भक्ति और मानवता के उच्च आदर्शों को समाज तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयासः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में श्री बाबा नीब करौरी महाराज पर आधारित फिल्म के प्रोमो और पोस्टर का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह फिल्म केवल एक सिनेमाई प्रस्तुति नहीं है, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और मानवता के उच्च आदर्शों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने का एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि बाबा नीब करौरी महाराज जी का दिव्य जीवन आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी शिक्षाएँ सरलता, करुणा, सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश देती हैं, जो वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रकार के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विषयों पर आधारित प्रयास भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण एवं प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह फिल्म समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी और नई पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों, निर्देशक एवं निर्माता दल को इस सराहनीय एवं आध्यात्मिक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर योगगुरु स्वामी रामदेव एवं स्वामी चिदानंद सरस्वती महाराज, फिल्म निर्देशक शरद सिंह ठाकुर एवं अन्य कलाकार मौजूद थे।

तीर्थ पुरोहितों, होटल एवं ट्रैवल संगठनों ने मुख्यमंत्री धामी का जताया आभार

राज्य सरकार द्वारा उत्तराखंड के चारों धामों में यात्रियों की संख्या सीमित न किए जाने के निर्णय पर चारों धामों से जुड़े तीर्थ पुरोहितों, पुजारियों, हितधारकों, चार धाम होटल एसोसिएशन, ट्रैवल एजेंसियों एवं विभिन्न संगठनों ने मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया है। इस अवसर पर चारों धामों से जुड़े तीर्थ पुरोहितों और हितधाकरकों ने मुख्यमंत्री को कपाट खुलने के अवसर पर आमंत्रित भी किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए चार धाम यात्रा को और अधिक सुगम एवं सुलभ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य में दर्शन के लिए आने वाले सभी श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर व्यवस्थाएं सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता हैं। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने हेतु निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसको ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को सभी मतूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने देवभूमि उत्तराखण्ड की चारधाम यात्रा के सफल संचालन के लिए सभी को सहभागी बनने की अपील की।

चार धाम यात्रा से जुड़े संगठनों ने कहा कि सरकार का यह निर्णय प्रदेश की आस्था, अर्थव्यवस्था तथा पर्यटन गतिविधियों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों, परिवहन क्षेत्र तथा अन्य संबंधित सेवाओं को भी व्यापक लाभ प्राप्त होगा। इस अवसर पर उन्होंने चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों और शीतकालीन यात्रा के लिए श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाईन पंजीकरण हमेशा खुला रखने का आग्रह किया।

सभी प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार यात्रा व्यवस्थाओं को सुचारु, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए निरंतर आवश्यक कदम उठाती रहेगी। उन्होंने प्रशासन द्वारा की जा रही व्यवस्थाओं, सुविधाओं के विस्तार तथा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों की भी सराहना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के गढ़वाल समन्वयक किशोर भट्ट, भाजपा के मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान भी मौजूद थे।

इस दौरान उत्तराखण्ड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के अध्यक्ष पं. सुरेश सेमवाल, महासचिव बृजेश सती, ब्रह्मपाल तीर्थ पुरोहित पंचायत समिति के अध्यक्ष उमेश सती, यमुनोत्री धाम मंदिर समिति के सचिव सुनील उनियाल, उपाध्यक्ष संजीव उनियाल, पुरूषोत्तम उनियाल, चारधाम होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश मेहता, सचिव निखिलेश सेमवाल, यमुना घाटी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सोबन सिह राणा, गौरव उनियाल, सन्दीप राणा, अध्यक्ष उत्तरकाशी होटल एसोसिएशन शैलेन्द्र मटूड़ा, अध्यक्ष श्री केदार घाटी होटल एसोसिएशन धर्मेन्द्र नौटियाल, अध्यक्ष श्री बद्रीनाथ धाम होटल एसोसिएशन शैलेश ध्यानी, प्रशान्त डिमरी, अशोक सेमवाल एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

पीएम मोदी 14 को पहुंचेंगे देहरादून, आयोजन स्थल का सीएम ने किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देहरादून में 14 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित कार्यक्रम के सफल आयोजन के दृष्टिगत गढ़ी कैंट स्थित जसवंत ग्राउंड एवं मां डाट काली मंदिर तक सड़क मार्ग से स्थलीय निरीक्षण कर विभिन्न व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छता एवं अन्य आधारभूत सुविधाओं की तैयारियों की अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध एवं उच्च गुणवत्ता के साथ सुनिश्चित की जाएं, ताकि कार्यक्रम में आने वाले आमजन को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के निर्देश देते हुए कहा कि सभी एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर कार्य किया जाए। उन्होंने यातायात प्रबंधन की सुव्यवस्थित योजना तैयार करने एवं आपातकालीन सेवाओं की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

जसवंत ग्राउंड में मंच, दर्शक दीर्घा एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में अधिकारियों से विस्तृत जानकारी लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम की गरिमा के अनुरूप सभी तैयारियां पूरी की जाएं। उन्होंने साफ-सफाई एवं सौंदर्यीकरण कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मां डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, पार्टी पदाधिकारी, सचिव शैलेश बगौली, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पाण्डेय, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, एसएसपी देहरादून प्रमेन्द्र डोभाल एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

उत्तराखंड को मिला ‘मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट’ का राष्ट्रीय पुरस्कार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में प्रख्यात फिल्म निर्माता-निर्देशक मधुर भंडारकर ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तराखंड को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में एक अग्रणी गंतव्य के रूप में विकसित करने, निवेश को आकर्षित करने तथा राज्य की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के विषय में विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता, विविध भौगोलिक परिस्थितियों, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं शांत वातावरण के कारण फिल्म निर्माण के लिए अत्यंत उपयुक्त राज्य है। राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि उत्तराखंड को देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बनाया जाए और इसे एक सशक्त फिल्म शूटिंग हब के रूप में स्थापित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई आधुनिक एवं उद्योगोन्मुख फिल्म नीति के अंतर्गत फिल्म निर्माताओं को आकर्षक सब्सिडी, टैक्स छूट तथा विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से शूटिंग से संबंधित सभी अनुमतियों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है, जिससे फिल्म निर्माण प्रक्रिया को अत्यधिक सुगम बनाया जा सका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अब तक व्यापक स्तर पर कार्य किए गए हैं। राज्य में अनेक हिंदी फिल्मों, क्षेत्रीय फिल्मों, टीवी धारावाहिकों एवं वेब सीरीज़ की शूटिंग सफलतापूर्वक संपन्न हुई है, जिससे उत्तराखंड देश के प्रमुख फिल्म निर्माण स्थलों में तेजी से उभरकर सामने आया है। यहां की वादियां, झीलें, धार्मिक स्थल एवं ऐतिहासिक लोकेशन फिल्म निर्माताओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि उत्तराखंड को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए “मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट” का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुका है, जो राज्य सरकार की नीतियों और व्यवस्थाओं की सफलता का प्रमाण है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि राज्य ने फिल्म इंडस्ट्री के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में उल्लेखनीय प्रगति की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में फिल्म शूटिंग के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को निरंतर सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में लोकेशन बैंक तैयार किया गया है, जिसमें पर्वतीय क्षेत्र, झीलें, वन क्षेत्र, ऐतिहासिक स्थल एवं धार्मिक धाम शामिल हैं। इससे फिल्म निर्माताओं को विविध और आकर्षक लोकेशन एक ही मंच पर उपलब्ध हो रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिल्म उद्योग के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों एवं युवाओं को फिल्म निर्माण प्रक्रिया से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही फिल्म एवं मीडिया से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे युवाओं को इस क्षेत्र में करियर बनाने के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड में फिल्म सिटी के विकास की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, जिससे फिल्म निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया को राज्य के भीतर ही संचालित किया जा सके। इसके साथ ही फिल्म महोत्सवों एवं सांस्कृतिक आयोजनों को प्रोत्साहित कर राज्य की पहचान राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त बनाई जा रही है।

इस अवसर पर मधुर भंडारकर ने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता एवं अनुकूल वातावरण की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में फिल्म निर्माण की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा फिल्म उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग करने की इच्छा भी व्यक्त की।

मुख्यमंत्री धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि फिल्म उद्योग के क्षेत्र में किए जा रहे ये प्रयास न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेंगे, बल्कि पर्यटन को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार फिल्म निर्माताओं को हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

उपलब्धि: उत्तराखंड के फिल्मकारों ने NHRC में जीता राष्ट्रीय सम्मान

उत्तराखंड के युवा फिल्मकारों शुभम शर्मा और रवि कर्णवाल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की ‘ह्यूमन राइट्स शॉर्ट फिल्म प्रतियोगिता’ में अपनी डॉक्युमेंट्री ‘सेकंड चांस’ के साथ राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। देशभर से आई 526 प्रविष्टियों और 24 भाषाओं के बीच, कठोर तीन-चरणीय चयन प्रक्रिया के बाद केवल सात फिल्मों को पुरस्कृत किया गया — जिनमें ‘सेकंड चांस’ भी शामिल रही।
शुभम शर्मा रुड़की, जिला हरिद्वार के मूल निवासी हैं और वर्तमान में देहरादून में कार्यरत हैं। उनके सहनिर्माता रवि कर्णवाल भी उत्तराखंड में ही सक्रिय हैं। यह पुरस्कार NHRC अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन, सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी और सदस्य श्रीमती विजया भारती सयानी की उपस्थिति में प्रदान किया गया।
सुद्दोवाला जेल की दीवारों से उठी आवाज़
‘सेकंड चांस’ देहरादून की सुद्दोवाला जेल में बंद कैदियों के जीवन, उनके पुनर्वास और मानवाधिकारों की संवेदनशील पड़ताल है — क्या समाज उन्हें दूसरा मौका देता है? NHRC अध्यक्ष ने कहा कि ऑडियो-विजुअल माध्यम अवचेतन मन को छूने की अद्भुत क्षमता रखता है। NHRC के वरिष्ठ अधिकारियों ने देहरादून जेल प्रशासन और उत्तराखंड सरकार के सहयोग की भी विशेष सराहना की, जिसके चलते यह डॉक्युमेंट्री बन सकी और प्रदेश को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली।
“यह पुरस्कार हमें नहीं, उन हजारों कैदियों को मिला है जिनकी ज़िंदगी को हमने अपनी फिल्म में दिखाने की कोशिश की।”
— शुभम शर्मा और रवि कर्णवाल
फिल्म की टीम
निर्देशक: हर्षित मिश्रा | DOP: निवान प्राचुर्या | निर्माता: दीपा धामी
फिल्मकारों का परिचय
शुभम शर्मा NSD और FTII पुणे से प्रशिक्षित हैं तथा रंगमंच एवं फिल्म निर्देशन में स्नातकोत्तर में स्वर्णपदक विजेता हैं। ‘कश्मीर फाइल्स’, ‘बधाई दो’ जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुके शुभम ने निर्देशन और प्रोडक्शन में भी अपनी पहचान बनाई है।

रवि कर्णवाल पद्मश्री निरंजन गोस्वामी के शिष्य, प्रशिक्षित अभिनेता, लेखक और अभिनय कोच हैं। दोनों की साझा फिल्मों — ‘अलार्मघड़ी’, ‘चप्पल’, ‘सेकंड चांस’, ‘डस्टर’, ‘अल्पविराम’ सहित अनेक लघुफिल्मों — ने देशभर के 50 से अधिक पुरस्कार अर्जित किए हैं।
दीपा धामी (निर्माता) — संक्षिप्त परिचय
दीपा धामी एक संवेदनशील और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी फिल्म निर्माता हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य सिनेमा के माध्यम से समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाना है। वे मानती हैं कि फिल्म केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि जागरूकता और परिवर्तन का सशक्त उपकरण भी है।

उन्होंने एम.जेपी. रुहेलखंड विश्वविद्यालय से विधि (LLB) की शिक्षा प्राप्त की है, जिसने उन्हें सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के विषय में गहरी समझ प्रदान की। इसी दृष्टिकोण के साथ उन्होंने ‘सेकंड चांस’ जैसी डॉक्युमेंट्री के निर्माण में विशेष योगदान दिया, जो जेल में बंद कैदियों के पुनर्वास और उनके अधिकारों पर एक संवेदनशील दृष्टि प्रस्तुत करती है।
दीपा धामी का समर्पण और दृष्टिकोण इस फिल्म की आत्मा को मजबूती प्रदान करता है, और समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में उनके प्रयास सराहनीय हैं।

रुड़की और उत्तराखंड की गलियों से निकलकर नई दिल्ली के NHRC सभागार तक — शुभम और रवि की यह यात्रा प्रदेश के हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखता है। उत्तराखंड सरकार और सुद्दोवाला जेल प्रशासन को भी इस राष्ट्रीय सम्मान में साझीदार होने का गौरव प्राप्त हुआ है। सिनेमा ही हमारी साधना है, कहानी ही हमारी पूजा है।

मुख्यमंत्री धामी ने नॉर्थ जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में किया प्रतिभाग

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली के तत्वाधान में उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल द्वारा देहरादून में आयोजित दो दिवसीय नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आज दिनांक 12 अप्रैल 2026 को भव्य समापन हुआ। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “Enhancing Access to Justice” तथा मुख्य थीम “Justice Beyond Barriers: Rights, Rehabilitation & Reform for the Most Vulnerable” रही।

इस सम्मेलन के समापन के अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि), भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं नालसा के संरक्षक-प्रधान न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केन्द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल सहित उच्चतम न्यायालय एवं उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्तिगण, उत्तर भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों से पधारे न्यायमूर्तिगण और विधि विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता द्वारा स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया गया तथा विभिन्न गणमान्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

सम्मेलन में उत्तराखण्ड राज्य के समस्त जनपदों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष, सचिव एवं न्यायिक अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की। विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से न्याय तक पहुँच को सशक्त बनाने, वंचित वर्गों के अधिकारों के संरक्षण तथा न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन के दौरान वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन, जेल सुधार, विचाराधीन बंदियों के अधिकार, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास एवं महिलाओं व बच्चों के विधिक अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा “न्याय मित्र पोर्टल” का शुभारंभ किया गया, जिससे आमजन ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर त्वरित न्याय प्राप्त कर सकेंगे। नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री विक्रम नाथ द्वारा ई-बुकलेट का विमोचन भी किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय व्यवस्था की वास्तविक सफलता तभी सुनिश्चित होती है, जब न्याय समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचे। उन्होंने “जस्टिस बियॉन्ड बैरियर्स” की अवधारणा को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि न्याय प्राप्ति की प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ उससे जुड़ी सभी बाधाओं को दूर करना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने सम्मेलन के विषय को अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए कहा कि आदिवासी समुदायों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा तथा कारागार सुधार जैसे विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श समय की आवश्यकता है। उन्होंने National Legal Services Authority (NALSA) द्वारा संचालित वीर परिवार सहायता योजना, लीगल सर्विस क्लीनिक, स्प्रुहा, जागृति एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि ये पहल समाज के वंचित वर्गों तक न्याय पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा ई-कोर्ट्स, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, फास्ट ट्रैक कोर्ट्स और डिजिटल केस मैनेजमेंट जैसे सुधारों से न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी डिजिटल कोर्ट्स, ई-फाइलिंग, वर्चुअल हियरिंग तथा समान नागरिक संहिता लागू कर न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन से प्राप्त सुझाव प्रदेश एवं देश के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।

सीएम ने नशामुक्त उत्तराखंड अभियान के तहत आयोजित ‘रन फॉर अवेयरनेस’ रैली का शुभारंभ किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में नशामुक्त उत्तराखंड अभियान के तहत आयोजित ‘रन फॉर अवेयरनेस’ रैली का शुभारंभ किया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में युवा, छात्र-छात्राएं, जनप्रतिनिधि व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

एमबी इंटर कॉलेज मैदान से रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने से पहले मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज की यह दौड़ मात्र शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, समृद्ध और नशे से मुक्त उत्तराखंड के संकल्प की दौड़ है। जब आप सभी यहां से कदम आगे बढ़ाएंगे, तो यह संदेश पूरे प्रदेश में जाना चाहिए कि उत्तराखंड का युवा अब नशे को ‘ना’ कह रहा है और जीवन को ‘हाँ’ कह रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा एक “साइलेंट वार” की तरह फैल रहा है और इसका सबसे बड़ा निशाना हमारी युवा शक्ति है। मजाक-मजाक में युवा नशे की चपेट में आ जाते हैं और वहां से लौटना बहुत मुश्किल हो जाता है। यह न सिर्फ व्यक्ति, बल्कि पूरे परिवार की खुशियों को संकट में डाल देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2020 में शुरू किए गए ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार इस दिशा में मिशन मोड पर काम कर रही है। वर्ष 2022 में गठित एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स द्वारा हजारों आरोपियों की गिरफ्तारी और बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की बरामदगी की गई है। साथ ही एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (एटीएफ) केंद्रों का संचालन किया जा रहा है और सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी एटीएफ केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए ‘दगड़िया क्लब’ बनाए गए हैं, जो युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि नशे के विरुद्ध यह लड़ाई केवल कानून बनाने से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए समाज की जागरूकता और युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। हम सभी संकल्प लें कि स्वयं नशे से दूर रहेंगे और अपने मित्रों व समाज को भी जागरूक करेंगे। औपचारिकता से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प से ही हम ‘ड्रग्स फ्री उत्तराखंड’ के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अपनी आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और ऊर्जावान युवा शक्ति के लिए जाना जाता है। यदि युवा शक्ति सही दिशा में बढ़े, तो वह पूरे भारतवर्ष के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नशामुक्ति की शपथ भी दिलाई।

कार्यक्रम में डॉ. स्वामी रामेश्वरम हरि जी, आरएसएस संपर्क प्रमुख उत्तर क्षेत्र डॉ. हरीश रौतेला, श्याम अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, मेयर हल्द्वानी गजराज सिंह बिष्ट, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रताप बिष्ट, भारत भूषण, डॉ. अशोक पाल, किसान आयोग के उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह नामधारी, शंकर कोरंगा, शांति महरा, डॉ. अनिल कपूर डब्बू, रेनू अधिकारी, ध्रुव रौतेला, सुरेश भट्ट, पूर्व मेयर योगेंद्र सिंह रौतेला सहित आयुक्त कुमाऊं व सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत,जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ मंजूनाथ टी सी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।