सीएम धामी ने मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए स्थायी समाधान और जवाबदेही तय करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सर्किट हाउस, हल्द्वानी में जनपद नैनीताल के वरिष्ठ प्रशासनिक, पुलिस, वन एवं विकास विभाग के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष, आगामी पर्यटन सीजन की तैयारियों तथा कानून-व्यवस्था, पेयजल, विद्युत, सिंचाई एवं जमरानी बांध परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में आयुक्त कुमाऊं एवं सचिव मुख्यमंत्री दीपक रावत ने जानकारी दी कि आगामी आदि कैलाश यात्रा के लिए 1 मई से पिथौरागढ़ जिला प्रशासन द्वारा इनर लाइन पास जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि आदि कैलाश मार्ग वर्तमान में सुचारू है। इसके अतिरिक्त कैंचीधाम बाईपास का निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा 30 मई तक इसे चालू करने का लक्ष्य है। मेट्रोपोल पार्किंग का निर्माण कार्य भी आगामी 10 दिनों में प्रारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन घटनाओं की रोकथाम के लिए स्थायी समाधान खोजा जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि लोगों को जागरूक करने के साथ ही ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएं जिससे उन्हें जंगलों में जाने की आवश्यकता कम हो। साथ ही विभाग के प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही तय की जाए और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग लगाने तथा वन विभाग और पुलिस की संयुक्त क्विक रिस्पॉन्स टीम को 24×7 सक्रिय रखने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल जनपद प्रदेश का प्रमुख पर्यटन केंद्र है, जहां पर्यटकों की सुरक्षा के साथ-साथ वन क्षेत्रों से सटे गांवों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने रामनगर, हल्द्वानी, कालाढूंगी और नैनीताल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी के निर्देश दिए |

आगामी पर्यटन सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को समयबद्ध तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़कों को गड्ढा-मुक्त रखने, ट्रैफिक प्रबंधन को सुदृढ़ करने, शटल सेवा एवं वैकल्पिक पार्किंग स्थलों को सक्रिय करने पर जोर दिया।

कानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत पर्यटन स्थलों पर हुड़दंग, नशाखोरी एवं ओवरचार्जिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने 24×7 निगरानी रखने, नियमित चेकिंग अभियान चलाने तथा पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न होने देने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने जमरानी बांध परियोजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इस परियोजना से तराई एवं भावर क्षेत्र में पेयजल समस्या का समाधान होगा, भूजल स्तर में वृद्धि होगी तथा बाढ़ नियंत्रण में सहायता मिलेगी। उन्होंने अधिकारियों को परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक में बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाए जाने के संबंध में भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कुमाऊं आयुक्त एवं जिलाधिकारी नैनीताल को आवश्यक कार्यवाही करते हुए प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजने के निर्देश दिए।

विद्युत व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रीष्मकाल एवं मानसून को ध्यान में रखते हुए सभी विद्युत स्टेशनों में आवश्यक उपकरण एवं व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पेयजल संकट से निपटने के लिए भी समुचित व्यवस्थाएं समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही सिंचाई विभाग एवं अन्य एजेंसियों द्वारा संचालित कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी कार्य समयबद्ध पूर्ण करने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से भी जनपद की विभिन्न समस्याओं की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित समाधान के निर्देश दिए।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दर्मवाल, विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, विभिन्न जनप्रतिनिधि, मंडलायुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद पांडेय सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

सीएम धामी ने भीमताल में उप-तहसील बनाए जाने की घोषणा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जनपद के भीमताल स्थित बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड साइंसेज में तीन दिवसीय तकनीकी एवं सांस्कृतिक वार्षिकोत्सव ‘स्पेक्ट्रम 2026’ का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन भी किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस आयोजन तथा नव-निर्मित भवन से संस्थान के छात्र-छात्राओं को आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के नए अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि देश का भविष्य प्रतिभाशाली और संकल्पवान युवाओं के सुरक्षित हाथों में है।

उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को स्मरण करते हुए कहा कि भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने और उचित दिशा देने की है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान का प्रबंधन इसी भावना के साथ कार्य करते हुए युवाओं की प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संस्थान की स्थापना के समय पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय पंडित नारायण दत्त तिवारी द्वारा व्यक्त अपेक्षाओं के अनुरूप यह संस्थान दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के मेधावी एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का कार्य निरंतर कर रहा है। उन्होंने संस्थान द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता, अनुशासन और संस्कारों की परंपरा को सराहनीय बताया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार किए गए मॉडलों का अवलोकन किया तथा उनकी नवाचारी सोच और रचनात्मकता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिड़ला संस्थान वर्षों से उत्तराखंड के युवाओं को तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। यहां से शिक्षित विद्यार्थी देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं तथा कई युवा प्रशासनिक सेवाओं, भारतीय सेना और स्टार्टअप के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं को सशक्त बनाने हेतु स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, मुद्रा योजना, अटल इनोवेशन मिशन और पीएम युवा योजना जैसी पहलें संचालित की जा रही हैं, जो युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बना रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और युवाओं को नई संभावनाओं से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रही है। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और बिग डेटा जैसे आधुनिक विषयों को शामिल किया गया है। साथ ही 20 मॉडल कॉलेजों की स्थापना, महिला छात्रावास, आधुनिक आईटी लैब एवं परीक्षा भवनों का निर्माण भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि ‘शेवनिंग उत्तराखंड छात्रवृत्ति’ के माध्यम से विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के अवसर मिल रहे हैं तथा ‘इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड’ के सहयोग से आधुनिक कंप्यूटर आधारित पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। ‘देवभूमि उद्यमिता योजना’ और मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना के माध्यम से नवाचार एवं शोध को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके तहत प्राध्यापकों को 18 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है और पिछले चार वर्षों में 32 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान की गई है।

उन्होंने भीमताल विधानसभा क्षेत्र में किए जा रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक कार्य किए गए हैं और कई परियोजनाएं वर्तमान में प्रगति पर हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिड़ला इंस्टीट्यूट में ड्रोन प्रयोगशाला की स्थापना, कंप्यूटर विभाग के उन्नयन तथा ऑडिटोरियम के लिए फर्नीचर उपलब्ध कराने हेतु 50-50 लाख रुपये की धनराशि प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही क्षेत्रीय विकास से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, विभिन्न जनप्रतिनिधि, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी, मुख्य विकास अधिकारी अरविंद पांडेय सहित संस्थान के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पर महिला आयोग की अध्यक्ष ने की प्रेस वार्ता

उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023” के संबंध में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित किया। कुसुम कंडवाल ने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023” भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है, जो करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रतीक बताते हुए कहा कि आज “नारी शक्ति” केवल एक विचार नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व और दृढ़ संकल्प के कारण महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनने का अवसर प्राप्त हो रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत का वास्तविक विकास “महिला नेतृत्व वाले विकास” से ही संभव है और यह अधिनियम उसी विश्वास को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

*महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल*

कंडवाल ने कहा कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक प्रभावी योजनाएं संचालित की गई हैं, जिन्होंने महिलाओं के जीवन के हर पहलू को सशक्त किया है।

उन्होंने बताया कि मुद्रा योजना के अंतर्गत लगभग 68 प्रतिशत ऋण महिलाओं को प्रदान किए गए हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर उद्यमिता की ओर अग्रसर हुई हैं। वहीं, 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के माध्यम से सामाजिक चेतना में सकारात्मक बदलाव आया है और माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का नामांकन बढ़कर 80.2 प्रतिशत तक पहुंचा है। सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जो बेटियों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ गैस कनेक्शन, जल जीवन मिशन के अंतर्गत 14.45 करोड़ घरों में नल से जल की उपलब्धता तथा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण ने महिलाओं के जीवन में गरिमा और सुविधा सुनिश्चित की है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से 4.27 करोड़ से अधिक महिलाओं को पोषण सहायता प्रदान की गई है, जिससे मातृ मृत्यु दर में कमी आई है।

*राजनीतिक भागीदारी में बढ़ोतरी का मार्ग प्रशस्त*

कुसुम कंडवाल ने कहा कि सितंबर 2023 में पारित “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं तथा दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की संख्या 1952 में 22 से बढ़कर 2024 में 75 हो गई है, किंतु अभी भी अपेक्षित प्रतिनिधित्व प्राप्त करना शेष है। यह अधिनियम उस दिशा में एक ठोस कदम है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक अध्ययनों से यह स्पष्ट है कि महिला नेतृत्व से आर्थिक विकास को गति मिलती है और समावेशी विकास सुनिश्चित होता है। पंचायत स्तर पर 46 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व से शिक्षा, जल और पोषण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

उत्तराखण्ड की प्रतिबद्धता कुसुम कंडवाल ने कहा कि उत्तराखण्ड न केवल देवभूमि है, बल्कि नारी शक्ति की भी भूमि है। राज्य सरकार एवं महिला आयोग इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिलाओं की नेतृत्व में बढ़ती भागीदारी से विकास अधिक संतुलित, समावेशी और टिकाऊ होगा। यह अधिनियम “विकसित भारत 2047” के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अंत में, कंडवाल ने समाज के सभी वर्गों एवं मातृशक्ति से इस ऐतिहासिक पहल का समर्थन करने का आह्वान किया।

डीएवी कॉलेज के छात्रसंघ समारोह में पहुंचे सीएम धामी, दिया संबोधन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून में आयोजित छात्रसंघ समारोह में प्रतिभाग करते हुए छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्य शक्ति बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान भी हैं। उनकी ऊर्जा, संकल्प और नवाचार की सोच ही भारत के विकास की दिशा निर्धारित करती है। उन्होंने छात्र राजनीति को नेतृत्व विकास, संगठन क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जैसे संगठनों से जुड़कर युवाओं में राष्ट्र सेवा, चरित्र निर्माण और सामाजिक चेतना का विकास होता है। उन्होंने कहा कि परिषद के कार्यकर्ता, शिक्षा संस्थानों से लेकर देश की सीमाओं तक राष्ट्रहित में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने महान समाज सुधारक स्वामी दयानंद सरस्वती के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण करना भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में युवाओं को केंद्र में रखकर अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें ‘मेक इन इंडिया’, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी पहलें शामिल हैं, जिन्होंने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, जैसे आधुनिक पाठ्यक्रमों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही, साइंस सिटी और एस्ट्रो पार्क जैसे परियोजनाओं के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत संरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। 9 नए महाविद्यालयों की स्थापना, 20 मॉडल कॉलेजों का निर्माण, महिला छात्रावास, आईटी लैब एवं परीक्षा भवनों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए नई भर्तियां भी की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के हितों की रक्षा के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्राप्त हुई हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने डी०ए०वी० पीजी कॉलेज के अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति शैक्षणिक ब्लॉक की छत पर दो अतिरिक्त तल (प्रथम एवं द्वितीय) के निर्माण की घोषणा भी की।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, रामसिंह कैड़ा, विधायक उमेश कुमार, प्राचार्य डी.ए.वी पीजी कॉलेज प्रो. कौशल कुमार, छात्र संघ अध्यक्ष ऋषभ मल्होत्रा, महामंत्री करन नेगी एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण मौजूद थे।

पलायन रोकने के लिए श्रमिकों को स्थानीय आवश्यकता के अनुसार दिया जाए कौशल प्रशिक्षण: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा विकसित श्रमिक सेवा मोबाइल एप का लोकापर्ण करने के साथ ही 8005 श्रमिकों के खाते में 17 करोड़ से अधिक राशि का डीबीटी के माध्यम से हस्तातंरण किया।

मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बोर्ड को अधिक से अधिक श्रमिकों तक पहुंचने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि, अनुदान वितरण में पारदर्शिता बरते जाने के क्रम में ऑफलाईन अनुदान वितरण बन्द कर ऑनलाईन निस्तारण एवं डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के खातों में धनराशि का हस्तांतरण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के जरिए अब तक 11828 लाभार्थियों को कुल 29.89 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी है। आज 8005 लाभार्थियों को कुल 17.25 करोड़ की धनराशि वितरित की जा रही है। इस प्रकार विगत 06 माह में अब तक कुल 19833 लाभार्थियों को 47.14 करोड़ की धनराशि वितरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रमिकों एवं उनके आश्रितों के कौशल प्रशिक्षण पर ध्यान दिया जाए, खासकर पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए स्थानीय श्रमिकों को पलम्बर, इलैक्ट्रिशियन, मिस्त्री, कारपेन्टर आदि क्षेत्रों में कौशल प्रदान किया जाए। इसी तरह योगा एंव वेलनेस में रोजगार की सम्भावना को देखते हुए आगामी सत्र में श्रमिकों के बच्चों को योग एवं वेलनेस में निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बोर्ड निर्माण श्रमिकों एवं उनके आश्रितों को कौशल प्रशिक्षण उपरान्त विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास करे। इसके लिए विदेश मंत्रालय भारत सरकार में पंजीकृत एजेन्सी के माध्यम कार्यवाही की जाए। साथ ही श्रमिकों को पीएम स्वनिधि योजना से जोड़ने और उनका समय- समय पर स्वास्थ्य परीक्षण पर भी ध्यान दिया जाए। इस हेतू श्रमिकों के कार्य स्थल पर ही चिकित्सा परीक्षण की व्यवस्था की जाए, ताकि उनके रोजगार में व्यवधान उपलब्ध न हो।

इस मौके पर श्रमायुक्त पीसी दुम्का ने बताया कि UKLCCMS Portal पोर्टल के माध्यम से अब तक 16000 अधिष्ठानों का पंजीकरण हो चुका है, जिसके जरिए शुल्क के रूप में 80,00000.00 (रूपये अस्सी लाख मात्र) धनराशि जमा हो चुकी है, साथ ही बोर्ड के पास अब तक कुल 324 करोड़ की धनराशि सेस के रूप में जमा हो चुकी है। जिसे श्रमिकों के कल्याण में उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि निर्माण श्रमिकों के बीच सामग्री वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की जा रही है। जिससे लाभार्थियों का लाईव फोटो एवं जियो ट्रेकिंग द्वारा सामग्री वितरण सुनिश्चित किया जायेगा। इस मौके पर उपायुक्त विपिन कुमार सहित बोर्ड के अन्य अधिकारी उपस्थित हुए।

उत्तराखंड: मानचित्रक के पद पर चयनित 12 अभ्यर्थियों को मिली नियुक्ति पत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग के अंतर्गत मानचित्रक के पद पर चयनित 12 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी चयनित अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी अभ्यर्थी अपने कार्यक्षेत्र में पूरी ईमानदारी और लगन से कार्य करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के बाद प्रदेश में अब तक 30 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की युवाओं के प्रति प्रतिबद्धता और सुशासन का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, साथ ही मिलेट के उत्पादन और विपणन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार तथा फसल विविधीकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त राज्य में सेब, कीवी, बागवानी एवं औषधीय पौधों की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य कृषि को लाभकारी और युवाओं के लिए आकर्षक बनाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़ सकें।

कार्यक्रम में कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, सचिव कृषि एस.एन. पाण्डेय, अपर सचिव आनंद श्रीवास्तव एवं कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड में इंजीनियर्स की मांगों के परीक्षण हेतु सब-कमेटी गठन

उत्तराखंड में चल रही डिप्लोमा इंजीनियर्स की हड़ताल के बीच आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के पदाधिकारियों ने भेंट कर अपनी विभिन्न मांगों के संबंध में विस्तृत चर्चा की।

महासंघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी 27 सूत्रीय मांगें रखीं, जिनमें पदोन्नति, वेतनमान और पुरानी पेंशन व्यवस्था से जुड़े विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे।

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है और उनकी सभी मांगों का समुचित परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मांगों के समाधान के लिए एक सब-कमेटी का गठन किया जाएगा, जो संबंधित बिंदुओं का गहन अध्ययन कर शीघ्र अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार संवाद और समन्वय के माध्यम से सभी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों को सुचारू बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और राज्य के विकास कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए सभी पक्षों को सकारात्मक पहल करनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने इंजीनियर्स महासंघ से अपील की कि वे जनहित को ध्यान में रखते हुए सहयोगात्मक रुख अपनाएं और वार्ता प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें, ताकि शीघ्र समाधान निकल सके। उन्होंने कहा कि “राज्य सरकार डिप्लोमा इंजीनियर्स की मांगों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उनकी समस्याओं के समाधान हेतु सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा। संवाद और समन्वय के माध्यम से हम सभी मुद्दों का शीघ्र समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

बैठक में सचिव शैलेश बगौली, दिलीप जावलकर, पंकज कुमार पांडे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

डिजिटल जनगणना में उत्तराखंड ने बढ़ाया कदम, मुख्यमंत्री ने की सक्रिय भागीदारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में जनगणना 2027 के अंतर्गत अपनी स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया पूरी करते हुए राज्य में इस महत्वपूर्ण अभियान की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर जनगणना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे और उन्होंने मुख्यमंत्री को डिजिटल प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना की ओर अग्रसर हुआ है, जो पारदर्शिता, सटीकता और जनभागीदारी को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत को डिजिटल युग में एक और मजबूत कदम आगे बढ़ाने वाली है।

जनगणना 2027 का पहला चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ (HLO) है, जिसके अंतर्गत आवासीय स्थिति, सुविधाओं और घरेलू विवरणों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र की जा रही है। इस बार ‘स्व-गणना’ की सुविधा के माध्यम से नागरिक स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया अधिक सरल और त्रुटिरहित होगी।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अधिकारियों से जनगणना कार्य को समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संपन्न करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह डेटा राज्य और देश की नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, इसलिए इसकी शुद्धता अत्यंत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जनगणना 2027 देश के विकास की आधारशिला है। डिजिटल माध्यम से की जा रही यह जनगणना पारदर्शिता और सटीकता को सुनिश्चित करेगी। मैं प्रदेशवासियों से आग्रह करता हूं कि वे स्वयं आगे आकर स्व-गणना करें और इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की जनता से अपील करते हुए कहा कि सभी नागरिक स्व-गणना पोर्टल का उपयोग कर अपने परिवार की सही और पूर्ण जानकारी दर्ज करें। उन्होंने कहा कि यह न केवल आपकी भागीदारी को सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य की योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में भी सहायक होगा।

उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि जनगणना के दौरान एकत्रित सभी आंकड़ों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं और इनका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए ही किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल उत्तराखंड में डिजिटल सशक्तिकरण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर गीता धामी, निदेशक (जनगणना संचालन) ईवा श्रीवास्तव तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यों की प्रगति में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी: धामी

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में नैनीताल एवं ऊधमसिंहनगर जनपद की विभिन्न विधानसभाओं से संबंधित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई समस्याओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए उनका त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकगण अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को शासन तक पहुंचाते हैं, इसलिए उन पर गंभीरता से कार्यवाही करना शासन व प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि अल्पकालिक प्रकृति के कार्यों को शीघ्र पूर्ण किया जाए, जबकि दीर्घकालिक योजनाओं को निर्धारित समयसीमा के अंतर्गत चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। कार्यों की प्रगति में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि ऐसी योजनायें, जिनमें एक से अधिक विभागों की सहभागिता है, उनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि इन कार्यों की मुख्य सचिव स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए, ताकि परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो और समय पर उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जन समस्याओं के समाधान हेतु अधिकारी विधायकगणों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखें। इससे न केवल समस्याओं की सही जानकारी प्राप्त होगी, बल्कि उनके समाधान में भी तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल से विकास कार्यों में गुणवत्ता और प्रगति दोनों सुनिश्चित हो सकेंगी। बैठक में मुख्यमंत्री ने आगामी वर्षाकाल को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि बरसात से पूर्व सभी बरसाती नालों की सफाई, सिल्ट हटाने तथा जल निकासी से संबंधित अन्य आवश्यक कार्य समय रहते पूर्ण कर लिए जाएं, ताकि जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। मुख्यमंत्री ने ग्रीष्मकाल में संभावित वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए विभागों के बीच समन्वय के साथ-साथ जनजागरूकता पर भी ध्यान दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने पेयजल एवं विद्युत आपूर्ति को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो इसका ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में निर्बाध जल और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

बैठक के दौरान विधायकगणों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न समस्याएं रखी गईं, जिनमें सड़क निर्माण एवं मरम्मत, स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण, मिनी खेल मैदानों का निर्माण, जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा, बाढ़ सुरक्षा कार्य, जलभराव की समस्या सहित अन्य स्थानीय मुद्दे शामिल थे। मुख्यमंत्री ने इन सभी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक समस्या का समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी विभाग उत्तरदायित्व के साथ कार्य करें।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, राम सिंह कैड़ा, बंशीधर भगत, दीवान सिंह बिष्ट, त्रिलोक सिंह चीमा, शिव अरोड़ा, सरिता आर्य, डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिवगण, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, वर्चुअल माध्यम से कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत एवं संबंधित जिलाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्र से उत्तराखंड को मिली एक करोड़ की धनराशि

प्रदेश में जनजातीय क्षेत्रों के विकास एवं शैक्षिक अवसंरचना में सुधार आदि की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए केंद्र सरकार द्वारा “उत्तराखंड आदि लक्ष्य संस्थान” की स्थापना हेतु ₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में केन्द्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से अनुरोध किया गया था।

केंद्रीय जनजातीय कार्य श्री मंत्री जुएल ओराम द्वारा मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में अवगत कराया गया है कि केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड सरकार के प्रस्ताव पर विचार करते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत “उत्तराखंड आदि लक्ष्य संस्थान” की स्थापना हेतु ₹1 करोड़ की धनराशि स्वीकृत कर दी गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “आदि लक्ष्य संस्थान” की स्थापना से प्रदेश में जनजातीय युवाओं के कौशल विकास, शिक्षा, शोध एवं सशक्तिकरण को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास हेतु प्रतिबद्ध है, इस संस्थान के माध्यम से स्थानीय युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल उत्तराखंड के जनजातीय समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।