सीएस की अध्यक्षता में आयोजित हुई वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम की राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति की बैठक

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से सम्बन्धित राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति (एसएलएससी) की बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं का चयन एवं प्राथमिकता निर्धारण किया जाए। बैठक में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के फेज-1 एवं फेज-2 के अंतर्गत प्रस्तावित विभिन्न विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर विभिन्न परियोजनाओं को संस्तुति प्रदान की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि वाइब्रेंट विलेज क्षेत्रों में सड़क एवं विद्युत ग्रिड से कनेक्टिविटी, नेटवर्क, टेलीविजन एवं संचार सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से सम्बन्धित परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार करते समय सेना, एसएसबी एवं आईटीबीपी से सम्बन्धित आवश्यक परियोजनाओं को भी समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने सम्बन्धित जनपदों की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले परियोजना प्रस्तावों में कार्यों की प्राथमिकता स्पष्ट रूप से निर्धारित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की सूची प्राथमिकता के अवरोही क्रम में तैयार की जाए, इसके लिए सम्बन्धित जनपदों से परियोजनाओं की प्राथमिकता प्राप्त कर प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन परियोजनाओं की फंडिंग के लिए भारत सरकार अथवा राज्य सरकार की किसी अन्य योजना के अंतर्गत वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं, उन्हें सम्बन्धित योजनाओं के माध्यम से वित्तपोषित कराने का प्रयास किया जाए। ऐसी परियोजनाओं को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की सूची से हटाकर उनके स्थान पर अन्य आवश्यक एवं प्राथमिकता वाली परियोजनाओं को शामिल किया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के फेज-1 एवं फेज-2 के अंतर्गत सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता निर्धारित करने के बाद ही केंद्र सरकार को भेजा जाए। उन्होंने वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के लिए प्रत्येक सम्बन्धित जनपद से पांच-पांच बड़े एवं महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसी परियोजनाएं तैयार की जाएँ, जो वाइब्रेंट विलेज क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। इन परियोजनाओं में क्षेत्र की स्थानीय आवश्यकताओं, कनेक्टिविटी, बुनियादी सुविधाओं, पर्यटन, आजीविका तथा सीमावर्ती क्षेत्रों की रणनीतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाए।

बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, डीजी कारागार अभिनव कुमार, सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, सी. रविशंकर, आईजी डॉ. नीलेश आनन्द भरणे सहित सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने किया ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ किया। योजना के माध्यम से प्रदेश के राजकीय एवं शासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों तथा राज्य विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत पात्र छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के प्रथम चरण में 11 हजार छात्र-छात्राओं को निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए मेहनत के साथ सही दिशा, बेहतर रणनीति, अच्छे शिक्षकों का मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास भी आवश्यक है। विशेष रूप से पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में अनेक प्रतिभाशाली युवा आर्थिक परिस्थितियों, उचित मार्गदर्शन और संसाधनों की कमी के कारण अच्छे कोचिंग संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते। राज्य सरकार ने तय किया है कि संसाधनों की कमी अथवा आर्थिक तंगीं किसी भी प्रतिभाशाली युवा के सपनों की राह में बाधा नहीं बनेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति है। राज्य का युवा मेहनती, प्रतिभाशाली और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। आवश्यकता उसकी प्रतिभा को सही दिशा, बेहतर मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराने की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया है। बीते 5 वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराना नहीं है। सरकार चाहती है कि उत्तराखण्ड का युवा नौकरी मांगने वाला ही नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला भी बने। इसी दिशा में स्वरोजगार, स्टार्टअप, कौशल विकास, उद्यमिता और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रिवर्स पलायन बढ़ा है। आज अनेक युवा गांवों की ओर लौटकर व्यवसाय, कृषि-बागवानी, होमस्टे और स्थानीय उत्पादों से जुड़े उद्यमों के माध्यम से स्वरोजगार के साथ अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को प्रदेश के भविष्य की दिशा तय करने में भी सक्रिय भागीदार बना रही है। इसी सोच के साथ प्रदेश के ढाई लाख से अधिक युवा विद्यार्थियों के साथ वैचारिक मंथन कर उनके विचार और सुझाव लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की आशाओं, आकांक्षाओं और रोजगार से जुड़े विषयों पर विशेष रूप से कार्य करने के लिए राज्य में अलग ‘युवा आयोग’ बनाया जाएगा। सरकार चाहती है कि युवा केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी न बनें, बल्कि प्रदेश की नीति और विकास की दिशा तय करने में भी सक्रिय भागीदार बनें।

मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान किया कि वे बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी मेहनत और लगन से कार्य करें। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को अवसर, संसाधन, मार्गदर्शन और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के युवा अपनी मेहनत, प्रतिभा और संकल्प के बल पर नई ऊंचाइयां प्राप्त करेंगे तथा उत्तराखण्ड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के ‘विकल्प रहित संकल्प’ को पूर्ण करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं के बीच जाकर उनसे संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से उनकी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों, भविष्य के लक्ष्यों और आकांक्षाओं के बारे में जानकारी ली तथा उन्हें पूरी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि राज्य सरकार उनके सपनों को साकार करने के लिए आवश्यक अवसर और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर छात्र-छात्राओं में भी विशेष उत्साह दिखाई दिया।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ प्रदेश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। योजना के माध्यम से विशेष रूप से पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और मार्गदर्शन सुलभ होगा। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों तक योजना की जानकारी पहुंचे और वे इसका लाभ उठा सकें।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा में गुणवत्ता सुधार और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष से छात्रसंघ चुनाव में छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित किए जाएंगे। प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में डिजिटल शिक्षा को भी लगातार विस्तार दिया जा रहा है और ई-ग्रंथालय के माध्यम से विद्यार्थियों को लगभग 20 लाख पुस्तकों तक डिजिटल पहुंच उपलब्ध कराई गई है।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने योजना से जुड़े कोचिंग संस्थानों से विद्यार्थियों की तैयारी पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करते हुए कहा कि वे इसे केवल व्यावसायिक दायित्व न मानकर व्यक्तिगत एवं सामाजिक दायित्व के रूप में भी लें। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन, नियमित संवाद और प्रत्येक विद्यार्थी की आवश्यकता के अनुरूप सहयोग उनकी तैयारी और आत्मविश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्य सचिव ने युवाओं से उपलब्ध अवसर का पूरा लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए अनुशासन, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प आवश्यक है। राज्य सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों और अवसरों का बेहतर उपयोग कर युवा अपने लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ें।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, उच्च शिक्षा उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र भसीन, डॉ. जयपाल चौहान, सचिव उच्च शिक्षा डॉ.बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, अपर सचिव उच्च शिक्षा मनुज गोयल, महानिदेशक शिक्षा आकांक्षा कोण्डे, अपर सचिव मनमोहन मैनाली एवं उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम धामी ने पारंपरिक आभूषणों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ पहचान दिलाने पर दिया जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजपुर रोड देहरादून स्थित होटल में सर्राफ मंडल देहरादून द्वारा आयोजित भव्य एग्जीबिशन का अवलोकन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एग्जीबिशन में प्रदर्शित विभिन्न प्रकार के आभूषणों, पारंपरिक डिजाइनों और स्वर्णकारों की कला एवं हुनर का अवलोकन किया तथा आयोजकों और स्वर्णकार समाज को इस आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन भारतीय कला, संस्कृति, परंपरा और स्थानीय हुनर को नई पहचान देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। स्वर्णकार समाज केवल आभूषणों का निर्माण नहीं करता, बल्कि भारत की गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने एवं उसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य भी करता है। विवाह, त्योहार और धार्मिक अनुष्ठानों सहित हमारे जीवन के प्रत्येक शुभ अवसर पर आभूषण हमारी परंपराओं, भावनाओं और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘मेड इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से देश के कारीगरों, स्थानीय उत्पादों और स्वदेशी हुनर को नई पहचान एवं नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य के अनुरूप भारत को वैश्विक ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइनिंग का प्रमुख हब बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी पारंपरिक कौशल, हस्तशिल्प एवं स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने के साथ ही कौशल विकास और आर्थिक सहायता के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के समृद्ध पारंपरिक आभूषणों—गढ़वाली नथ, पौंजी, चंपकली हार, कुमाऊंनी गुलोबंद, पिचौरा हार, झूमका आदि को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पारंपरिक डिजाइनों को आधुनिक आवश्यकताओं और बदलते समय के अनुरूप विकसित कर ‘लोकल टू ग्लोबल’ के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। इससे उत्तराखंड के स्थानीय कारीगरों और स्वर्णकारों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा युवा पीढ़ी भी अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से और अधिक जुड़ सकेगी।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पारंपरिक आभूषणों के संरक्षण के साथ-साथ स्वर्णकार समाज के कौशल विकास के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। इस दिशा में आवश्यक योजना तैयार कर स्वर्णकारों एवं कारीगरों को आगे बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का ‘सर्वश्रेष्ठ राज्य’ बनाने के ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने इस संकल्प को साकार करने में स्वर्णकार समाज से सक्रिय सहयोग और सहभागिता का आह्वान किया।

इस अवसर पर सर्राफ मंडल देहरादून के पदाधिकारी एवं सदस्य, स्वर्णकार समाज के प्रतिनिधि, आभूषण व्यवसायी, कारीगर एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

उत्तराखण्ड की विकास यात्रा में गोर्खाली समाज का महत्वपूर्ण योगदान: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जसवंत सिंह ग्राउंड, गढ़ी कैंट, देहरादून में आयोजित गोर्खाली महिला हरितालिका तीज उत्सव में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हरितालिका तीज उत्सव को सरकारी स्तर पर और अधिक भव्य रूप से आयोजित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने गोर्खाली समाज की माताओं-बहनों को हरितालिका तीज की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरितालिका तीज माता पार्वती की अटूट तपस्या, विश्वास, समर्पण और शक्ति का प्रतीक है। यह पर्व हमें दृढ़ संकल्प और अटूट विश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि तीज जैसे पारंपरिक पर्व हमारी नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। माताएं और बहनें हमारी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों की सबसे बड़ी संरक्षक हैं। उनके प्रयासों से हमारी भाषा, लोक परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोर्खाली समाज अपनी वीरता, निष्ठा, परिश्रम और राष्ट्रभक्ति के लिए जाना जाता है। देश की सीमाओं की रक्षा में गोर्खा वीरों ने सदैव अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया है। देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की गोर्खा समाज की भावना पर पूरे देश को गर्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की विकास यात्रा में गोर्खाली समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। शिक्षा, खेल, कला-साहित्य और समाज सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लोगों ने अपनी मेहनत और ईमानदारी से प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मसूरी विधानसभा क्षेत्र में अमर शहीद कप्तान दल बहादुर थापा की स्मृति में बनने वाले ‘आजाद हिन्द फौज शहीद द्वार’ का शिलान्यास भी किया गया है। उन्होंने कहा कि यह शहीद द्वार गोर्खा समाज के अदम्य शौर्य, त्याग और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बनने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों को उनके त्याग और बलिदान से परिचित कराएगा।

मुख्यमंत्री ने भारत और नेपाल के आत्मीय संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच केवल पड़ोसी देशों का संबंध नहीं, बल्कि सदियों पुराने सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्ते हैं। सीमांत क्षेत्र से होने के कारण उन्होंने भारत और नेपाल की साझा संस्कृति, आत्मीयता और परस्पर जुड़ाव को निकटता से अनुभव किया है। नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कठिन समय में भारत नेपाल के साथ खड़ा है। उन्होंने आपदा प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए नेपाल के शीघ्र इस संकट से उबरने की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृशक्ति का सशक्तीकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी दिशा में राज्य सरकार ने महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया है। उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू कर महिलाओं के अधिकारों को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में 3 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनकर न केवल आत्मनिर्भर हुई हैं, बल्कि अपने परिवार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मातृशक्ति के सशक्तीकरण और उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, आचार्य बालकृष्ण, गीता पुष्कर धामी, गोर्खाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम सिंह थापा, गोर्खाली महिला हरितालिका तीज उत्सव कमेटी की अध्यक्ष प्रभा शाह, गोरखा कल्याण परिषद की अध्यक्ष ज्योति कोटिया, नेहा जोशी, सिद्धार्थ अग्रवाल, अनुकृति गुसाईं सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

‘देवभूमि उत्तराखण्ड आपका अपना घर है’, पूर्वोत्तर के युवाओं का मुख्यमंत्री धामी ने किया स्वागत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित तालकटोरा स्टेडियम में My Home India द्वारा आयोजित “NeST Fest-2026” कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों से आए छात्र-छात्राओं एवं युवाओं का देवभूमि उत्तराखण्ड की ओर से स्वागत किया और कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए My Home India की टीम को बधाई दी।

मुख्यमंत्री धामी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर देशभर के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं तथा महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में उपस्थित युवा ऊर्जा के बीच उन्हें भारत का उज्ज्वल भविष्य दिखाई दे रहा है। युवा केवल विद्यार्थी नहीं, बल्कि देश की उस युवा शक्ति के प्रतिनिधि हैं, जिनमें बड़े से बड़े सपनों को साकार करने का साहस और सामर्थ्य है।

उन्होंने कहा कि NeST Fest केवल एक सामान्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं और देश की एकता-अखंडता का प्रतीक है। पूर्वोत्तर और उत्तराखण्ड के रहन-सहन, पहाड़ी परिवेश तथा भौगोलिक परिस्थितियों में कई समानताएं हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से दोनों क्षेत्रों के बीच आत्मीयता और मजबूत होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत देश के अन्य हिस्सों के बीच भावनात्मक एकता का सेतु बन गया है। My Home India द्वारा पूर्वोत्तर के युवाओं को देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ने का कार्य राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत कर रहा है। यही भावना प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बन रही है।

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारतीय संस्कृति के उस चमकते हुए मुकुट के समान है, जिसके बिना भारत की विविधता और सुंदरता अधूरी है। यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है और देश की सुरक्षा में सशक्त प्रहरी की भूमिका निभाता है। पूर्वोत्तर ने मैरी कॉम, मीराबाई चानू, लवलीना बोरगोहेन, बाइचुंग भूटिया और भारत रत्न स्व. भूपेन हजारिका जैसी अनेक महान प्रतिभाएं देश को दी हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और परिश्रम से भारत का नाम रोशन किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर को कभी देश से दूर नहीं माना, बल्कि उसे दिल के करीब रखा और देश के विकास का महत्वपूर्ण ग्रोथ इंजन माना। दशकों पुरानी “लुक ईस्ट” नीति को आगे बढ़ाते हुए “एक्ट ईस्ट” और “फास्ट ईस्ट” की दिशा में प्रभावी कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद पूर्वोत्तर में सड़क, पुल, सुरंग, जलमार्ग, गैस ग्रिड, मोबाइल कनेक्टिविटी और ऑप्टिकल फाइबर सहित अनेक क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ है। भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी परियोजनाओं से पूर्वोत्तर में व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के नए द्वार खुले हैं। आज पूर्वोत्तर देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन विकास प्रयासों के केंद्र में पूर्वोत्तर का युवा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को केवल देश का भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान की सबसे बड़ी परिवर्तनकारी शक्ति माना है। इसी सोच के साथ डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया और फिट इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि शिक्षा, कौशल और खेल के क्षेत्र में पूर्वोत्तर में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं धरातल पर उतरी हैं, नए विद्यालय और मेडिकल कॉलेज स्थापित हुए हैं तथा उच्च शिक्षा और कौशल विकास के नए संस्थान विकसित किए गए हैं। इससे पूर्वोत्तर के युवाओं को आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2025 में उत्तराखण्ड में आयोजित राष्ट्रीय खेलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें देशभर के 10 हजार से अधिक खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया। उत्तराखण्ड से राष्ट्रीय खेलों की मशाल पूर्वोत्तर भेजी गई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पूर्वोत्तर में होने वाले राष्ट्रीय खेल भी खिलाड़ियों और युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आएंगे तथा देशभर के खिलाड़ियों को उत्तराखण्ड की तरह ही बेहतर अनुभव प्राप्त होगा।

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के युवा खिलाड़ी आज अपनी प्रतिभा, मेहनत और जज्बे के बल पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और देश का गौरव बढ़ा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने पूर्वोत्तर से उत्तराखण्ड में शिक्षा प्राप्त करने आए छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए कहा कि “देवभूमि उत्तराखण्ड आपका अपना घर है।” उन्होंने कहा कि प्रदेश में रह रहे पूर्वोत्तर के युवाओं की सुरक्षा, सम्मान और प्रगति राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं का आह्वान किया कि वे खूब पढ़ें, खूब खेलें, बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी मेहनत से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि युवा विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।

बिना मान्यता के चल रहे मदरसों पर फिर हुई कार्रवाई, देहरादून और हल्द्वानी में कराया गया बंद

देहरादून। प्रदेश में निर्धारित मान्यता एवं शैक्षणिक मानकों का अनुपालन नहीं करने वाले मदरसों के विरुद्ध राज्य सरकार की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में देहरादून और हल्द्वानी में बिना मान्यता संचालित मदरसों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।

अल्पसंख्यक मामलों के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि देहरादून में तीन मदरसों के संबंध में कार्रवाई की गई। इनमें आजाद कॉलोनी स्थित मदरसा जामिया-तुस-सलाम अल-इस्लामिया को सील किया गया, जबकि मदरसा दार-ए-अरकम, आजाद कॉलोनी, माजरा तथा मदरसा दारूल उलूम रहीमिया के प्रबंधकों द्वारा मदरसों का संचालन बंद किए जाने संबंधी लिखित अंडरटेकिंग दी गई है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 17 मदरसों को सील किया जा चुका है, जबकि तीन मदरसों के प्रबंधकों ने संचालन बंद किए जाने की लिखित सूचना दी है। इस प्रकार अब तक कुल 20 बिना मान्यता संचालित मदरसों का संचालन बंद कराया गया है।

इसी क्रम में नैनीताल जनपद के हल्द्वानी में शनि बाजार रोड, गौजाजाली उत्तर स्थित मदरसा जामिया नूरिया बरकाते आमिना तथा इंदिरा नगर, बनभूलपुरा में संचालित बिना मान्यता प्राप्त मदरसे को भी सील किया गया है।

हल्द्वानी नगर मजिस्ट्रेट ए.बी. वाजपेयी ने बताया कि संबंधित मदरसा प्रबंधकों को मान्यता से जुड़े आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। निर्धारित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर नियमानुसार सीलिंग की कार्रवाई की गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में किसी भी शिक्षण संस्थान का संचालन निर्धारित नियमों एवं मान्यता के बिना नहीं होने दिया जाएगा। राज्य में लागू नई व्यवस्था के अंतर्गत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही निर्धारित शैक्षणिक मानकों का अनुपालन कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन कर संचालित संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पुलिस लाइन देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने किया प्रतिभाग

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पुलिस लाइन, देहरादून में आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर पुलिस लाइन परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने वाले कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं और धार्मिक विरासत समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं उपदेशों से परिचित होने का अवसर मिलता है।

मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन सत्य, धर्म, कर्तव्य, कर्म और लोककल्याण की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया कर्मयोग का संदेश आज भी पूरी मानवता के लिए प्रासंगिक है। उन्होंने प्रदेशवासियों से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने और समाज एवं प्रदेश के विकास में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने भी सभी प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में गीता धामी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, अन्य जनप्रतिनिधि, मुख्य सचिव सहित पुलिस महानिदेशक एवं शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा अन्य प्रशासनिक कार्मिक उपस्थित रहे।

हनुमान अंश देख सीएम धामी हुए बाबा नीम करौली की भक्ति और सेवा भावना से अभिभूत, फिल्म को किया टैक्स फ्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज हाथीबड़कला स्थित सेंट्रियो मॉल के सिनेमा हॉल पहुंचे, जहां उन्होंने परम बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन, उनकी भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक यात्रा से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ देखी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी गीता धामी, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक प्रदीप बत्रा सहित विभिन्न दायित्वधारी एवं अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फिल्म देखने के बाद कहा कि भारत की संत परंपरा सदैव समाज को सत्य, सेवा, करुणा और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाती रही है। बाबा नीब करौरी महाराज जी का जीवन भी इसी महान परंपरा का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने कहा कि बाबा की भक्ति, मानव सेवा और सभी के प्रति प्रेम का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है और समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि होने के साथ-साथ महान संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की भूमि भी है। बाबा नीब करौरी महाराज जी का कैंची धाम आज विश्वभर में श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसी आध्यात्मिक विभूतियों के जीवन और संदेश को जन-जन तक पहुंचाने वाले रचनात्मक प्रयास भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों को नई पीढ़ी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि फिल्म ‘हनुमान अंश’ भारत की समृद्ध संत परंपरा, भक्ति, सेवा, प्रेम और मानव कल्याण की भावना को केंद्र में रखती है। फिल्म के माध्यम से बाबा नीब करौरी महाराज जी की आध्यात्मिक यात्रा और उनके जीवन से जुड़े उन मूल्यों को सामने लाने का प्रयास किया गया है, जिनमें ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा, मानव सेवा, करुणा, प्रेम, विनम्रता और लोककल्याण प्रमुख हैं।

मुख्यमंत्री ने फिल्म के निर्माताओं एवं पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और संत परंपरा पर आधारित सकारात्मक एवं प्रेरणादायी फिल्मों से समाज में सेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ती है।

उल्लेखनीय है कि ‘हनुमान अंश’ का निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है और फिल्म में शोभिनव सतैया सहित अन्य कलाकारों ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म को 7 अगस्त 2026 को हिंदी में देशभर में रिलीज किया गया।

उत्तराखंड में हुआ किसान केंद्रित मोबाइल एप ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में मनोरमा डबराल जन कल्याण समिति द्वारा विकसित किसान-केंद्रित मोबाइल एप ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ एप को किसानों एवं स्वयं सहायता समूहों के लिए उपयोगी बताते हुए इस पहल के लिए संस्था को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के बेहतर उपयोग से किसानों को कृषि संबंधी आवश्यक जानकारियां एवं सेवाएं सुगमता से उपलब्ध कराने में इस प्रकार की पहल उपयोगी साबित हो सकती है।

मनोरमा डबराल जन कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ एप के माध्यम से किसानों को रियल टाइम मौसम संबंधी जानकारी एवं अलर्ट, फसल-विशिष्ट कृषि सलाह, एआई आधारित फसल रोग पहचान, कृषि एवं बाजार संबंधी जानकारी तथा परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स से संबंधित सुविधाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। एप में स्वयं सहायता समूहों एवं ग्रामीण उद्यमों को बाजार से जोड़ने से संबंधित सुविधाओं को भी शामिल किया गया है। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि एप को किसानों की व्यावहारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसानों को कृषि उत्पादन से लेकर बाजार तक आवश्यक डिजिटल सहयोग उपलब्ध कराना है।

इस अवसर पर कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, मनोरमा डबराल जन कल्याण समिति से कमला डबराल, राजेश डबराल, अंशुल, प्रांजल नौडियाल एवं सूरवीर सिंह कठैत उपस्थित रहे।

सीएम ने 147 करोड़ 05 लाख रुपये की पेंशन धनराशि लाभार्थियों के खातों में भेजी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में समाज कल्याण विभाग की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत माह अगस्त 2026 की पेंशन किस्त का वन-क्लिक के माध्यम से भुगतान किया। इसके माध्यम से 9 लाख 91 हजार 914 लाभार्थियों के खातों में 147 करोड़ 05 लाख रुपये की पेंशन धनराशि भेजी गई। अगस्त माह में विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत 5,605 नए लाभार्थियों की पेंशन भी स्वीकृत की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के कमजोर, जरूरतमंद एवं वंचित वर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सरलता एवं समयबद्धता से मिले। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि पेंशन योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को नियमित रूप से पेंशन का भुगतान कर रही है। उन्होंने कहा कि पेंशन व्यवस्था को सरल, पारदर्शी एवं लाभार्थी केंद्रित बनाते हुए प्रत्येक पात्र व्यक्ति को योजनाओं से आच्छादित करने के लिए निरंतर कार्य किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि जिन पात्र लाभार्थियों का किसी कारणवश आधार नहीं बन पा रहा है, उन्हें चिन्हित कर उनके लिए अकाउंट बेस्ड पेमेंट की व्यवस्था की जाए, ताकि आधार संबंधी समस्या के कारण कोई भी पात्र लाभार्थी पेंशन के लाभ से वंचित न रहे।

प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया गया कि अगस्त 2026 में वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग, किसान, परित्यक्ता, भरण-पोषण अनुदान, तीलू रौतेली एवं बौना पेंशन योजनाओं के कुल 9 लाख 91 हजार 914 लाभार्थियों के लिए 147 करोड़ 05 लाख 51 हजार रुपये की धनराशि निर्धारित की गई है। बताया गया कि कुल पेंशन लाभार्थियों में 2 लाख 14 हजार 711 लाभार्थी राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (छै।च्) के अंतर्गत तथा 7 लाख 77 हजार 203 लाभार्थी राज्य स्तर पर आच्छादित हैं। अगस्त माह के पेंशन भुगतान में लगभग 140 करोड़ 11 लाख रुपये राज्यांश तथा 6 करोड़ 94 लाख रुपये केंद्रांश है।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि अगस्त माह में विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कुल 5,605 नई पेंशन स्वीकृत की गई हैं। इनमें वृद्धावस्था पेंशन के 3,945, विधवा पेंशन के 1,000, दिव्यांग पेंशन के 416, किसान पेंशन के 106, परित्यक्ता पेंशन के 23 तथा भरण-पोषण अनुदान के 115 लाभार्थी शामिल हैं।

बैठक में आगामी कार्यक्रमों के संबंध में भी प्रस्तुतीकरण दिया गया। बताया गया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, भारत सरकार द्वारा 18 एवं 19 सितम्बर 2026 को डॉ. अम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, जनपथ, नई दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है। सम्मेलन में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता से संबंधित प्रमुख प्राथमिकताओं पर केंद्र, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के बीच संवाद किया जाएगा।

इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री खजानदास, सचिव समाज कल्याण डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी, अपर सचिव विक्रम यादव। संयुक्त सचिव धीरेंद्र सिंह, संयुक्त निदेशक गीताराम नौटियाल, सहायक निदेशक हेमलता पांडेय एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।