नगर निगम देहरादून स्वच्छता ही सेवा अभियान के अंतर्गत चला रह व्यापक सफाई अभियान

आवासन एवं शहरी विकास मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा लॉन्च किए गए स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा 2024 के अंतर्गत उत्तराखंड के नगर निगम देहरादून द्वारा कार्य योजना बनाकर धरातलीय कार्य कराया जा रहा है. 34 ब्लैक स्पॉट ( क्लीनलीनेस टारगेट यूनिट) को इस पखवाड़े का टारगेट बनाया गया है और प्रत्येक दिन यहां पर सघन सफाई अभियान करने कराया जा रहा है। इनिशिएटिव यह भी लिया गया है कि इन ब्लैक स्पॉट पर कोई कूड़ा ना डालें और वहां पर फूल, पौधे और गमले लगाए गए हैं । इनकी मॉनिटरिंग करने के लिए एक पर्यावरण मित्र को तैनात किया गया है। इस व्यवस्था को नागरिकों के साथ-साथ मीडिया समूह द्वारा भी बहुत ही अच्छा मानते हुए इसकी खुले मन से प्रशंसा की है।
इसके अलावा नगर निगम देहरादून द्वारा 46 जागरूकता कार्यक्रम करवाए गए जाने हैं, जिसमें से अभी तक 26 कार्यक्रम हो चुके हैं और जिनकी जानकारी भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है।
इसके अलावा नगर के विभिन्न स्थानों पर नुक्कड़ नाटक, छोटी रैली, जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर जनता के साथ संवाद, जागरूकता के जिंगल – बैनर आदि के साथ सघन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।

पर्यावरण मित्रों एवं सुपरवाइजर तथा शिवराज व्यवस्था से जुड़े हुए कर्मियों के लिए निगम में 19 सितंबर को एक व्यापक स्वास्थ्य सेवक भी लगाया गया था , जिसमें कई सफाई कर्मियों ने प्रतिभाग किया।

इसी कड़ी में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तथा निगम के दो गौ सदनों में भी स्वच्छता अभियान चलाया गया है। निगम के मुख्य नगर आयुक्त गौरव कुमार (आईएएस) स्वयं इसकी मॉनीटरिंग कर रहे हैं और फील्ड में 08 उच्च अधिकारी इस कार्य में तैनात हैं। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एसपी जोशी , सहायक नगर आयुक्त ने बताया कि 1 अक्टूबर तक सभी कार्यक्रम गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएंगे और 2 अक्टूबर को इसका समापन कार्यक्रम गांधी जयंती के अवसर पर नगर निगम मुख्यालय में आयोजित होगा।

उच्च शिक्षा मंत्री की स्वीकृति के बाद अनुपस्थित चल रहे 04 प्रोफेसर बर्खास्त

उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत राजकीय महाविद्यालयों में लम्बे समय से अवैध रूप से गैरहाजिर चल रहे 04 असिस्टेंट प्रोफेसरों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की स्वीकृति के बाद इस संबंध में शासन स्तर से आदेश जारी कर दिये गये हैं। आदेश जारी करने से पहले चारों असिस्टेंट प्रोफेसर को विभाग द्वारा समय-समय पर नोटिस जारी किये गये, लेकिन किसी ने भी विभागीय नोटिस का कोई जबाव नहीं दिया और लगातार बिना किसी सूचना के गैरहाजिर रहे।

राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापरक शिक्षा एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण बनाने के लिये राज्य सरकार तमाम कोशिशों में जुटी है। राजकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में ढ़ांचागत सुधार के साथ ही शिक्षकों की कमी को दूर किया जा रहा है। इसके साथ ही सरकार अब लापरवाही बरतने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को भी बख्शने के मूड में नहीं है। इसी क्रम में प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में लम्बे समय से अनुपस्थित चल रहे 04 असिस्टेंट प्रोफसरों की सेवा समाप्त कर दी गई है। विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने वर्षां से गायब इन प्राध्यापकों के तत्काल बर्खास्तगी की स्वीकृति दी, जिसके उपरांत शासन स्तर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिये गये हैं। राजकीय सेवा से बर्खास्त इन असिस्टेंट प्रोफेसर में इन्द्रजीत सिंह, डॉ. नन्दिनी सिंह, ए.के. राय और डॉ. नरेश मोहन चड्ढ़ा शामिल हैं। भौतिक विज्ञान विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर इन्द्रजीत सिंह वर्ष 2004, डॉ0 नरेश मोहन चड्ढ़ा वर्ष 2003, डॉ. नन्दिनी सिंह तथा ए.के. सिंह वर्ष 2004 से लगातार गैरहाजिर चल रहे थे। जिन्हें विभाग द्वारा समय-समय पर चेतावनी पत्र निर्गत किये गये और पंद्रह दिन के भीतर ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए कहा गया। इसमें अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए कहा गया। इसके साथ-साथ विभाग ने प्राध्यापकों को जारी नोटिस को समाचार पत्रों में भी प्रकाशित कराया लेकिन किसी भी प्राध्यापक ने विभागीय पत्रों का कोई भी जवाब नहीं दिया। जिसके उपरांत विभाग ने अवैध रूप से अनुपस्थित चल रहे इन असिस्टेंट प्रोफेसर के खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई अमल में लाई जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी है।

उच्च शिक्षा विभाग में कई वर्षों से अवैध रूप से गैरहाजिर चल रहे 04 असिस्टेंट प्रोफेसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई है। उच्च शिक्षण संस्थानों में लापरवाही और अनुशासनहीनता को कतई भी बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। भविष्य में भी ऐसे कार्मिकों के खिलाफ सख्त कदम उठाये जायेंगे
– डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड सरकार।

सीएम धामी का संकल्प ले रहा आकार, 15-29 के आयु वर्ग में बेरोजगारी में आई 4.4 फीसदी की कमी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संकल्प आकार ले रहा है। रोजगार देने में भी उत्तराखंड कीर्तिमान बना रहा है। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) रिपोर्ट में भी उत्तराखंड ने राष्ट्रीय औसत को भी पछाड़ दिया है। उत्तराखंड में बीते एक वर्ष में रोजगार के अवसर बढ़ने से बेरोजगारी घटी है। सभी आयु वर्गाे पर नजर डालें तो इसकी दर 4.5 फीसदी से घटकर 4.3 प्रतिशत पर आ गई है। जबकि 15-29 वर्ष के आयु वर्ग में 14.2 से घटकर 9.8 प्रतिशत पर आ गई है।

राज्य में वर्ष 2022-23 की तुलना में 2023-24 में सभी आयु वर्गों में श्रमिक जनसंख्या अनुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 15-29 वर्ष के आयु वर्ग में श्रमिक जनसंख्या अनुपात 27.5 प्रतिशत से बढ़कर 44.2 प्रतिशत हो गया है। युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिले हैं।

इसी प्रकार 15-59 वर्ष के आयु वर्ग में श्रमिक जनसंख्या अनुपात अनुपात 57.2 प्रतिशत से बढ़कर 61.2 प्रतिशत पहुंच गया है। जबकि 15 साल और उससे ऊपर की श्रेणी के लिए यह 53.5 प्रतिशत से बढ़कर 58.1 फीसदी हो गया है।

श्रम बल में युवाओं की भागीदारी बढ़ी
श्रम बल में भी वर्ष 2022-23 के मुकाबले में वर्ष 2023-24 में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है। 15-29 वर्ष के आयु वर्ग में श्रम बल भागीदारी दर 43.7 से बढ़कर 49 प्रतिशत पहुंच गई है। इसी प्रकार 15-59 के आयु वर्ग में 60.1 प्रतिशत से बढकर 64.4 प्रतिशत और 15 वर्ष और उससे अधिक की श्रेणी में 56 प्रतिशत से बढ़कर 60.7 प्रतिशत पहुंच गई है।

राष्ट्रीय औसत को भी पछाड़ा
श्रमिक जनसंख्या औसत में उत्तराखंड ने राष्ट्रीय औसत को भी पीछे छोड़ दिया है। उत्तराखंड में 15-29 के आयु वर्ग में यह औसत 49 प्रतिशत रहा है वहीं राष्ट्रीय औसत 46.5 प्रतिशत है। इसी प्रकार 15-59 के आयु वर्ग में उत्तराखंड का 64.4 तो राष्ट्रीय औसत 64.3 और 15 वर्ष और उससे अधिक वर्ष की श्रेणी में उत्तराखंड का 60.7 तो राष्ट्रीय औसत 60.1 रहा है।
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उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों के साथ खड़ा करना हमारा संकल्प है। देवतुल्य जनता के आशीर्वाद से हम इस संकल्प को पूरा करने लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। हम रोजगार के अधिकाधिक अवसर सृजित कर रहे हैं। सरकारी क्षेत्र में ही 16 हजार से अधिक युवाओं को हमने नियुक्ति दी है। निजी क्षेत्र में भी यह सिलसिला शुरू हो चुका है। आने वाले वर्षों में निवेश के अधिकांश करारों के धरातल पर उतरने से लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा। उत्तराखंड युवाओं को सिर्फ रोजगार ही नहीं देगा, बल्कि उन्हें दूसरों को भी रोजगार देने वाला बनाएगा।

-पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

एफएसएसएआई ने किया सुद्धोवाला जिला कारागार को ईट राईट कैंपस घोषित

सुरक्षित स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय दृष्टि से बेहतर भोजन उपलब्ध कराने एवं स्वच्छता के मानकों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा राज्य सचिवालय परिसर एवं जिला कारागार परिसर को ईट राईट कैम्पस का प्रमाण पत्र निर्गत किया गया है।

आज राज्य सचिवालय स्थित सभागार में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में इस सम्बन्ध में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर मुख्य सचिव द्वारा भारत सरकार की ओर से निर्गत ईट राईट कैम्पस प्रमाण पत्र को सचिवालय प्रशासन के सचिव श्री दीपेन्द्र चौधरी एवं उपमहानिरीक्षक जेल को विधिवत प्रदान किया गया। इस महत्वपूर्ण एवं कारगर पहल के लिए मुख्य सचिव ने सचिवालय प्रशासन की सराहना की और कार्यक्रम में मौजूद महानिरीक्षक जेल की ओर से ईट राईट कैम्पस प्रमाणीकरण हेतु किये गये प्रयासों की प्रशंसा की।

सीएस ने इस उपलब्धि के लिए सचिवालय परिसर में कार्यशील विभिन्न खान-पान सेवाओं यथा इंदिरा अम्मा भोजनालय, जी.एम.वी.एन कैंटीन के फूड सुपरवाइजर को अपनी ओर से शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि उन्हें सुरक्षित एवं स्वच्छ खाद्य पदार्थ के मानक अनुसार अपनी सेवाएं बनाये रखने की कसौटी पर प्रतिदिन खरा उतरना चाहिए।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन, उत्तराखण्ड के तत्वाधान में सचिवालय प्रशासन द्वारा की गई इस पहल को अनिवार्य बताते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सचिवालय एक अनुकरणीय स्थल है और यहां पर राज्य के विभिन्न स्थानों से जनमानस का आवागमन बना रहता है जिसे देखते हुए इस परिसर को ईट राईट कैम्पस के रूप में घोषित किया जाना राज्य सरकार के अन्य संस्थानों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत होगा।

इसी प्रकार राज्य में स्थित जेलों के भोजनालय तथा कैंटीन द्वारा खाद्य सुरक्षा के मानकों अनुसार कैदियों को खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित कराना भी सरकार के लिए सर्वाेच्च प्राथमिकता का विषय है। इस दिशा में जिला कारागार, सुद्धोवाला को निर्गत ईट राईट कैम्पस का प्रमाण पत्र महत्वपूर्ण कदम है।

ज्ञातव्य है कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा ऐसे सभी कार्य स्थल, जहां पर कार्य करने वाले अधिकांश लोग, कम से कम एक बार का जलपान अथवा भोजन नियमित रूप से ग्रहण करते हैं, को सुरक्षित एवं स्वस्थ खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए ईट राईट कैम्पस पहल आरम्भ की गई है।

इस क्रम में खाद्य एवं औषधि प्रशासन, उत्तराखण्ड के तत्वाधान में विगत दिनों राज्य सचिवालय तथा जिला कारागार परिसर, सुद्धोवाला, देहरादून में संचालित समस्त कैंटीन, भोजनालय एवं अन्य खान-पान सेवाओं का फूड सेफ्टी ऑडिट किया गया तथा यहां पर काम करने वाले फूड हैंडलर्स को फूड सेफ्टी आधारित फास्टैक प्रदान किया गया।

भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा प्रशिक्षण हेतु एकेडमी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, ऑडिट कार्यों के लिए यू.आर.एस सर्टिफिकेशन तथा इस पहल के संचालन के लि एद रेड कार्पेट वेंचर जैसी अनुभवी संस्थाओं को अधिकृत किया गया था। इस संपूर्ण प्रक्रिया में राज्य सचिवालय तथा जेल प्रशासन को किसी प्रकार का वित्तीय भार वहन नही करना पड़ा तथा समस्त व्यय सी.एस.आर के तहत अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था हर्बलाइफ इंडिया द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के दौरान सचिव, सचिवालय प्रशासन, दीपेन्द्र चौधरी, आईजी विमला गुंजयाल, अपर सचिव अनुराधा पाल, उप-महानिरीक्षक जेल, श्री दधिराम मौर्य, अपर आयुक्त, एफ.डी.ए, ताजबर सिंह, गणेश कण्डवाल,उपायुक्त/नोडल ऑफिसर ईट राईट इण्डिया, सचिवालय परिसर में स्थित इंदिरा अम्मा भोजनालय, जी.एम.वी.एन कैंटीन, मिलेट बेकरी तथा आंचल डेरी के फूड सुपरवाइजर एवं भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा अधिकृत ट्रेनिंग पार्टनर, फूड ऑडिटर आदि मौजूद रहे।

पंडित दीनदयाल जी को उनकी जयंती पर प्रतिमा मे की गई पुष्पांजलि

नगर निगम स्थित पंडित दीनदयाल पार्क पर उनकी जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर पंडित उपाध्याय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया गया।

आज मंत्री डॉ अग्रवाल ने कहा कि गरीबों व माँ भारती की सेवा करने के भाव को लेकर जबरदस्त उत्साह, जज्बे, जुनून और दृढ़ विश्वास के साथ, वे 1937 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हुए। इसके बाद जनसंघ के महासचिव के रूप में राजनीति में कदम रखा और 29 दिसम्बर 1967 को जनसंघ के अध्यक्ष बने। उन्होने 1951 से 1967 तक इस जिम्मेवारी का बखुबी निर्वहन किया।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि पण्डित दीन दयाल जी एक ऐसी व्यवस्था के विरोधी थे जो रोजगार के अवसर को कम करती है लेकिन सामाजिक समानता, पूंजी और सत्ता के विकेंद्रीकरण के पक्षधर थे। स्वतंत्रता, समानता और न्याय की गारंटी देने वाली भारतीय संस्कृति पर उनका विचार बिल्कुल स्पष्ट था। भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सुशासन के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में व ग्रामीणों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने में दीन दयाल उपाध्याय जी के पदचिन्हों का अनुसरण किया।

मंत्री डॉ अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी मार्गदर्शन में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ‘‘लोकल से वोकल’’ का सपना देखना वास्तव में हमारे लिए खुशी की बात है। प्रधानमंत्री जी की इस सोच में पण्डित दीन दयाल जी के विचार पूरी तरह झलकते है।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि देश में कोविड -19 महामारी प्रबंधन, वैक्सीन का निर्माण, सामूहिक टीकाकरण अभियान, और ब्वॅप्छ जैसे तकनीकी सिस्टम उपयोग ने पूरी दुनिया के सामने हमारी क्षमताओं को सिद्ध कर दिया है। इसी वजह से अब कोरोना वायरस का मुकाबला करने में हम पूरी तरह सक्षम हैं। यही दीन दयाल जी का ‘स्वदेशी आर्थिक मॉडल’ का विचार था।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि आज हमारे स्टार्ट-अप एक मजबूत भारत की नींव रख रहे हैं। देश अब यूनिकॉर्न के शतक की ओर बढ़ रहा है।2020-21 के दौरान 2.5 लाख से अधिक ट्रेडमार्क पंजीकृत किया जाना इस बात का प्रमाण है कि पंजीकृत स्टार्ट-अप्स ने रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। केंद्र सरकार की दीन दयाल अंत्योदय योजना एक व्यापक योजना है जिसका उद्देश्य कौशल विकास और अन्य माध्यमों से आजीविका के अवसरों को बढ़ाकर शहरी और ग्रामीण गरीबों का उत्थान करना है।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि उनकी प्रतिज्ञा थी कि हमें हर भारतवासी को भारत माता की संतान होने पर गर्व का अनुभव करवाना है। हम भारत माता को ‘‘सुजलां, सुफलां‘‘ के वास्तविक अर्थों को धरातल पर उतारने में स्वयं को समर्पित कर देंगे।

इस अवसर पर मण्डल अध्यक्ष सुमित पंवार, सन्दीप गुप्ता, कृष्ण कुमार सिंघल, प्रदीप दुबे, बृजेश शर्मा, इंद्र कुमार गोदवानी, चेतन शर्मा, कपिल गुप्ता, राजपाल ठाकुर, मण्डल अध्यक्ष माधवी गुप्ता, जिला उपाध्यक्ष दिनेश सती, प्रतीक कालिया, संजय व्यास, दीपक बिष्ट, संजीव पाल, राजपाल ठाकुर, रूपेश गुप्ता, राजू दिवाकर, सोनू प्रभाकर, नंद किशोर जाटव, अखिलेश मित्तल, राधे जाटव, रमन अग्रवाल, सीमा रानी, रीता गुप्ता, सुधा असवाल, सचिन अग्रवाल, सोनू पांडेय, विनायक कुमार, आदि उपस्थित रहे।

जल जनित बीमारियों से बचाव के लिए पुख्ता व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंः सीएम

सभी सड़कें 15 अक्टूबर तक गड्ढ़ा मुक्त की जाएं। राज्य में अतिवृष्टि से प्रभावित सभी क्षेत्रों में स्थिति सामान्य करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किये जाएं। सचिव, विभागाध्यक्ष एवं सभी जिलाधिकारी पुनर्निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा करें। जो कार्य पूर्ण किये जा चुके हैं, उनका भौतिक सत्यापन किया जाए। जो सड़कें अभी बंद हैं, उन्हें यथाशीघ्र सुचारू किया जाए। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर सड़कों के स्थाई ट्रीटमेंट की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ये निर्देशआपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दिये।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रदेश में आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में सभी स्थितियां सामान्य बनाई जाएं। यह सुनिश्चित किया जाए कि जन सामान्य को किसी भी प्रकार से परेशानी न हो। इसके लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य कर समस्याओं का समाधान करें। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान का आंकलन कर मानकों के अनुसार क्षतिपूर्ति की जाए। सभी जिलाधिकारी अपने जिलों को आदर्श जनपद बनाने की दिशा में कार्य करें। जिन गांवों से लोगों को विस्थापित करना है, विस्थापन की कार्यवाही भी जल्द की जाए। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिये कि वे नियमित जनपदों की विभिन्न व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण करें।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वर्षाकाल के बाद होने वाली जल जनित बीमारियों से बचाव के लिए पुख्ता व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। जल जनित रोगों से बचाव के लिए मुख्यमंत्री ने नियमित जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिये हैं। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये हैं कि सफाई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। अस्पतालों में सफाई व्यवस्था के साथ ही मरीजों को सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश मुख्यमंत्री ने दिये हैं। उन्होंने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में आंतरिक मार्गों की मरम्मत एवं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिये हैं।

प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य में प्राकृतिक आपदा से बचाव के लिए कुल 427.87 करोड़ रूपये की धनराशि आवंटित की जा चुकी है। इसमें राज्य आपदा मोचन निधि से 386.87 करोड़ रूपये, राज्य सेक्टर न्यूनीकरण मद से 15 करोड़ और राज्य सेक्टर नॉन एसडीआरएफ मद से 26 करोड़ रूपये अवमुक्त किये गये हैं। राज्य आपदा मोचन निधि के पुर्स्थापना और पुनर्वास मद के लिए विभागों को 95 करोड़ की धनराशि और दी जा रही है। इसके लिए लोक निर्माण विभाग को 50 करोड़, पीएमजीएसवाई को 15 करोड़, पेयजल निगम को 20 करोड़ एवं यूपीसीएल को 10 करोड़ रूपये की धनराशि दी जा रही है।

बैठक में राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रोहिला, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलैश बगोली, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पाण्डेय, आर.सी अजय मिश्रा, संबंधित विभागों के अपर सचिव, विभागध्यक्ष एवं सभी जिलाधिकारी जुड़े थे।

धामी सरकार में हर भ्रष्टाचारी की जगह जेल, छोटा हो या बड़ा किसी को नहीं देवभूमि में छूट

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भ्रष्टाचारमुक्त शासन की मुहिम रिश्वतखोरों के लिए काल साबित हो रही है। महज तीन साल से कम समय में विजिलेंस ने रिकॉर्ड 57 ट्रैप कर 68 भ्रष्टाचारियों को जेल भेजा है। भ्रष्टाचारियों पर यह कार्रवाई ’भ्रष्टाचारमुक्त एप 1064’ की लांचिंग के बाद तेजी से हुई है। एप पर अब तक करीब 973 विजिलेंस और नॉन विजिलेंस की शिकायतों दर्ज हुई हैं। इनमें से भ्रष्टाचार से जुड़ी 38 शिकायतों पर विजिलेंस जांच गतिमान है। जबकि नॉन विजिलेंस से जुड़ी शिकायतें सम्बन्धित विभागों को भेजी गई हैं।

देवभूमि को भ्रष्टाचार के दानवों से मुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार सख्त प्रशासक की भूमिका में कार्य कर रही है। खासकर मुख्यमंत्री धामी का साफ संदेश है कि भ्रष्टाचारी चाहिए बड़ा हो या छोटा, सब की जगह जेल में है। इस पर मुख्यमंत्री धामी सरकार ने आईएएस, आईएफएस समेत कई पॉवरफुल को जेल भेजकर पहले ही अपनी मंशा जगजाहिर कर दी थी। इसका परिणाम यह रहा कि 23 साल के उत्तराखंड में जहां भ्रष्टाचार से जुड़े 281 ट्रैप में कुल 303 गिरफ्तार हुए हैं। वहीं, अकेले धामी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में रिकॉर्ड 57 ट्रैप कर विजिलेंस ने 68 भ्रष्टाचारियों को सलाखों के भीतर डाला है। विजिलेंस की इस कार्रवाई में 13 से ज्यादा सरकारी कर्मचारी और बड़े अधिकारी भी शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री धामी ने अपने दूसरे कार्यकाल में भ्रष्टाचारियों पर कड़ी कार्रवाई की ठानी और “भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड“ की मुहिम को आगे बढ़ाया। इस मुहिम के लिए विजिलेंस ने भी “1064 एप“ पर मिली भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई कर भ्रष्टाचारियों को गिरफ्तार किया। अब यह एप न केवल विजिलेंस बल्कि आम नागरिक के लिए भी मददगार साबित हो रहा है। इस एप के मार्फत आम नागरिक बेझिझक रिश्वतखोरों, कामचोरों और बेवजह काम लटकाने वालों को सबक सीखा रहे हैं। यही नहीं पहले लोग विजिलेंस के पास जाने से न केवल डरते थे, बल्कि बचते भी थे। इसके पीछे सरकारें विजिलेंस को खुली छूट नहीं देती थी। इससे भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद रहते थे। लेकिन अब ऑनलाइन शिकायत दर्ज होने के बाद विजिलेंस की भी मजबूरी है कि शिकायत को जिम्मेदारी के साथ समय पर निस्तारण करें। यही कारण है कि पिछले 20 सालों तक 220 ट्रैप में 232 गिरफ्तार हुए और अब 3 साल में ही रिकॉर्ड 57 ट्रैप कर 68 भ्रष्टाचारियों पर विजिलेंस ने बड़ी करवाई की है। जबकि इस साल अब तक रिकॉर्ड 23 ट्रैप कर 30 को जेल भेज दिया है।

8 माह में 23 ट्रैप कर 30 रिश्वतखोर भेजे जेल
2022 में मुख्यमंत्री के भ्रष्टाचारियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश का असर रहा कि विजिलेंस ने 14 ट्रैप और 15 गिरफ्तारी की। 2023 में विजिलेंस ने यह कार्रवाई आगे बढाते हुए 18 ट्रैप कर 20 भ्रष्टाचारियों को जेल भेजा है। जबकि 2024 में विजिलेंस भ्रष्टाचारियों पर ताबड़तोड़ कार्यवाई में जुटा है। अब तक 9 माह में विजिलेंस ने रिकॉर्ड 23 ट्रैप कर 30 रिश्वतखोरों को जेल भेजा है। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर सख्त कार्रवाई के साथ कार्य कर रही है। भ्रष्टाचारी छोटा हो या बड़ा, सब की जगह जेल में हैं। देवभूमि में भ्रष्टाचारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। इसके लिए सरकार ने विजिलेंस को पहले से ज्यादा संसाधन युक्त बनाकर भ्रष्टाचारियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मेरे द्वारा स्वयं विजिलेंस के कार्यों की मॉनिटरिंग और समीक्षा की जा रही है।

देवभूमि में मिलावटखोरी नहीं की जाएगी बर्दाश्त, मिलावटखोरी पर होगी कड़ी कार्रवाईः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के निर्देशों पर खाद्य संरक्षा एवं औषधि नियंत्रक विभाग ने प्रदेशभर में देशी घी और मक्खन में मिलावट पर अंकुश लगाने के लिए व्यापक अभियान शुरू कर दिया गया है। राज्य के सभी जनपदों में अभियान शुरू हो गया है। देशी घी और मक्खन के साथ ही मिठाई की दुकानों से सैंपल भी लिये गये। स्वास्थ्य सचिव और खाद्य आयुक्त डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि राज्य में मिलावटी घी और मक्खन बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर लड्डू का सैंपल लेकर जांच के निर्देश दिए हैं साथ ही बाजार में बिकने वाले घी की जांच के लिए भी कहा गया है।

कई नामी कंपनियों के घी व मक्खन के सैंपल लिए गए

खाद्य विभाग के अपर आयुक्त ताजबर जग्गी ने कहा कि मिलावटी घी और मक्खन पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेशव्यापी अभियान शुरू कर दिया गया है। सभी जनपदों में मिठाइयों की दुकानों और देशी घी व मक्खन बेचने वालों की दुकानों पर छापेमारी के निर्देश अधिकारियों को दिये गये थे। जिसको लेकर कार्रवाई शुरू हो गई है। जांच टीम द्वारा कई कंपनियों के घी व मक्खन के सैंपल भी लिये गये है। सैंपल का टेस्ट रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान मण्डल के उपायुक्त और जनपदीय अभिहित अधिकारी के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है। जिसमें वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी राज्य में स्थित विनिर्माण इकाइयों, भण्डारणकर्ता विक्रेताओं का सघन निरीक्षण करते स्थानीय एवं विभिन्न ब्रांडों के घी एवं मक्खन के विधिक एवं सर्विलांस नमूनों का संग्रहण करेंगे।

देहरादून में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक छापेमारी

गढ़वाल मंडल में डिप्टी कमिश्नर आरएस रावत के नेतृत्व में छापेमारी अभियान चलाया गया। देहरादून जनपद के विभिन्न स्थानों पर देशी घी व मक्खन की जांच की गई। विभिन्न सैंपलों के नमूने इक्कठे कर जांच के लिए लैब भेजे गये। देहरादून जनपद के शहरी क्षेत्रों के अलावा ग्रामीण इलाकों हरबर्टपुर, सहसपुर, सुद्धोवाला में भी सघन छापेमारी अभियान चलाया गया। छापेमारी टीम में सीनियर एफएसओ रमेश सिंह, संतोष सिंह, संजय तिवारी, डीओ मनीष सिंह मौजूद रहे।

कुमाँऊ मण्डल में भी युद्धस्तर पर अभियान शुरू

वहीं कुमाँऊ मण्डल में खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन उपायुक्त अनोज कुमार थपलियाल के नेतृत्व में टीम ने हल्द्वानी क्षेत्र में मिलावटी घी के विक्रय एवं भण्डारण के रोकथाम हेतु नगर के मुख्य घी विक्रेता/थोक विक्रेता/वितरण प्रतिष्ठानों का सघन निरीक्षण अभियान चलाकर नमूने जांच के लिए लैब भेजे गये। अभियान के दौरान टीम द्वारा मंगल पड़ाव, कालाढूंगी रोड एवं रामपुर रोड, हल्द्वानी स्थित घी के थोक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। उपायुक्त अनोज कुमार थपलियाल ने बताया कि घी के विभिन्न ब्राण्डों-पारस, पहलवान, मदर डेयरी एवं हेल्थ मेड देसी घी आदि के कुल चार नमूने संग्रहित किये गये तथा नोवा ब्राण्ड स्किम्ड मिल्क पाउडर का एक नमूना लेकर जांच के लिए लैब भेजे गये। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर तद्नुसार कार्यवाही की जायेगी। वहीं वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी, रामनगर असलम खॉ द्वारा भी घी का एक नमूना संग्रहित किया गया। यह अभियान सम्पूर्ण जनपद में आगे भी जारी रहेगा। अभियान दल में अभिहित अधिकारी, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन, नैनीताल संजय कुमार सिंह, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी, हल्द्वानी, अभय कुमार सिंह तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारी, हल्द्वानी, कैलाश चन्द्र टम्टा आदि मौजूद रहे।

सीएम धामी के नेतृत्व में प्रदेश की संस्कृति और कला को मिल रही नई पहचान

उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और पारंपरिक कलाओं को न केवल एक नई पहचान मिल रही है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियाँ भी इससे प्रेरित होकर जुड़ रही हैं। सोमवार का दिन उत्तराखंडवासियों के लिए गौरव का दिन था, जब अयोध्या में विराजमान भगवान श्रीरामलाल का दिव्य विग्रह देवभूमि की विश्वविख्यात ऐपण कला से सुसज्जित शुभवस्त्रम में सुशोभित हुए। यह शुभवस्त्रम न केवल उत्तराखंड की पारंपरिक कला और समर्पण का प्रतीक था, बल्कि इसने राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि को राष्ट्रीय पटल पर एक नया गौरवशाली अध्याय जोड़ा।

इन शुभवस्त्रों को उत्तराखंड के कुशल शिल्पकारों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रेरणा से तैयार किया, और स्वयं मुख्यमंत्री ने इसे अयोध्या पहुँचाकर श्रीराम मंदिर में भेंट किया। यह शुभवस्त्रम् में न केवल प्रदेश की ऐपण कला नजर आती है बल्कि इसमें निहित भक्ति और श्रम साधकों की अद्वितीय शिल्पकला का अद्भुत समन्वय भी है, जिसने उत्तराखंड की सांस्कृतिक छवि को और अधिक प्रखर बना दिया।

मुख्यमंत्री धामी के गतिशील नेतृत्व में प्रदेश की लोक कला, संगीत, नृत्य और शिल्पों के संवर्धन की दिशा में भी अनेक ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी न केवल राज्य के स्थानीय हस्तशिल्प और कारीगरों को प्रोत्साहित कर रहे हैं, बल्कि राज्य के युवाओं को भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और इसे संजोने की प्रेरणा दे रहे हैं।

सीएम धामी के प्रयासों का ही प्रतिफल है कि उत्तराखंड की पारंपरिक कला और संस्कृति की गूंज अब अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी सुनाई देने लगी है। विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में उत्तराखंड की लोक कलाओं को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे राज्य को वैश्विक पहचान और सम्मान मिल रहा है। धामी का मानना है कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण और संवर्धन आधुनिक संसाधनों और तकनीकों के साथ होना चाहिए ताकि यह अमूल्य विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहे।

मुख्यमंत्री धामी का यह दृढ़ विश्वास है कि राज्य का समग्र विकास तभी संभव है जब उसकी सांस्कृतिक जड़ें मजबूत हों। इसलिए, उनके नेतृत्व में युवाओं को डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया के ज़रिए संस्कृति से जोड़ा जा रहा है। सांस्कृतिक संस्थानों और कला संगठनों के सहयोग से युवाओं को पारंपरिक कलाओं में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वे अपनी संस्कृति पर गर्व करें और इसे और आगे बढ़ा सकें।

उत्तराखण्ड स्किल डेवलपमेंट एण्ड एम्पलॉयमेंट कॉन्फ्रेस की तैयारियों के सम्बन्ध में हुई बैठक

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने आगामी अक्टूबर में नियोजन विभाग व सेतु आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली उत्तराखण्ड स्किल डेवलपमेंट एण्ड एम्पलॉयमेंट कॉन्फ्रेस की तैयारियों के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने राज्य के युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से सशक्त करते हुए उनकी रोजगार की चुनौतियों के समाधान के साथ समावेशी व सतत् विकास की रणनीतियों पर मंथन के उद्देश्य से आयोजित की जाने वाली इस कॉन्फ्रेस से नीति आयोग, अर्न्तराष्ट्रीय श्रम संगठन, इंस्टीटयूट ऑफ हूयमन डेवलपमेंट, इन्टप्रयोन्रशिप डेवलपमेंट इंस्टीटयूट ऑफ इण्डिया, यूएनडीपी व यूनीसेफ को जोड़ने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने उक्त कॉन्फ्रेंस में युवाओं के लिए विदेश में रोजगार के अवसर तथा विदेश की आवश्यकताओं के अनुसार युवाओं हेतु कौशल विकास के कोर्स संचालित करने पर एक विशेष सत्र आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कौशल विकास के साथ विदेशी भाषाओं के कोर्स संचालित करने की रणनीति पर भी कार्य करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को प्रभावी समन्वय के साथ एकीकृत होकर कौशल विकास की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने विशेष रूप से वन विभाग को कौशल विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हुए राज्य में ट्रेकिंग हेतु आने वाले पर्यटकों के लिए स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड के रूप में प्रशिक्षित करने की कार्ययोजना पर कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कौशल विकास व रोजगार के अवसरों को बढ़ाने हेतु सरकारी विभागों व संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी क्षेत्र व गैर सरकारी संगठनों के मध्य सुदृढ़ सहभागिता को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। बैठक में सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम, सचिन कुर्वे सहित सम्बन्धित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।