मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने की राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने सचिवालय में प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस अवसर पर उन्होंने सभी दलों से प्रदेश में सकुशल मतदान संपन्न कराने को लेकर अपील की।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि प्रदेश में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है, जिसके दृष्टिगत सभी राजनैतिक दलों की एक्सपेंडिचर मॉनिटरिंग भी शुरू की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि माननीय निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार सभी दल अपने उम्मीदवारों के नामांकन सम्बन्धी प्रक्रिया, चुनावी रैली व अन्य गतिविधियों को संचालित करें।

इस अवसर पर अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी. अंशुमान, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी नमामि बंसल, प्रताप शाह, स्टेट नोडल (एक्सपेंडेचर मॉनिटरिंग) मनमोहन मैनाली, सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तु दास समेत सभी मान्यता प्राप्त दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

माइक्रो लेवल मैनेजमेंट गुरु साबित हो रहे हैं सीएम धामी

गत 2 वर्षाे में सीएम धामी का माइक्रो लेवल मैनेजमेंट मॉडल न केवल राज्य की जनता के बीच वरन अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बना है। जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर शिकायतों और समस्याओं के निवारण के प्रति उनकी परतिबद्धता और संवेदनशीलता ने उन्हें एक जननेता के रूप में उभारा है। सीएम धामी का सरलीकरण, समाधान व निस्तारण का मंत्र शुरुआत में केवल शिगूफा लगा था परंतु पिछले वर्षों में इस पर उनके द्वारा की गई कार्यवाही से उनकी प्रतिबद्धता परिलक्षित हुई है।

सरलीकरण, समाधान व निस्तारण का मंत्र और उसको अमली जामा पहना कर जनसेवा के मार्ग को प्रशस्त करना धामी की एक बहुत बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

तय जवाबदेही
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को भी अपने मिशन और विजन के साथ बखूबी जोड़ने में अभी तक कामयाब साबित हुए हैं, सचिवालय में हो रही ताबड़तोड़ बैठकें और अधिकारियों से सीधा संवाद विशेषकर सचिवालय से लेकर निदेशालय और जनपद से लेकर ब्लॉक तक के अधिकारियों को एक साथ जोड़ना और सभी की जवाबदेही तय करना सीएम धामी के धाकड़ प्रशासक की छवि को उकेरने का कार्य कर रहा है।

जनता और नौकरशाही के बीच बने सेतु
सचिवालय में हो रही बैठकों में सीधा शिकायतकर्ताओं और लाभार्थियों से संवाद करना हो या फिर अधिकारियों को इसी दौरान निर्देशित करना हो, यह धामी की समयबद्धता और जनसमस्याओं के प्रति सरकार की जिम्मेदारी की समझ को प्रदर्शित करता है। अधिकारियों के लिए टारगेट सेट करना और विभागों के पास आ रही शिकायतों को अपने स्तर पर शीध्र समाधान देना धामी सरकार के गुड गवर्नेंस का प्रमाण है।

उत्तराखंड में लोगों की समस्याओं के सामधान के लिए शुरू की गई सीएम हेल्पलाइन 1905 सेवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के गुड गवर्नेंस मॉडल को साकार करती नजर आ रही है।

समस्याओं का घर बैठे ही समाधान हो सके, लोगों को विभागों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए मुख्यमंत्री धामी स्वयं इसकी मॉनिटरिंग भी करते रहते हैं।

धामी के मॉडल का ही असर है कि जनवरी 2024 में हेल्पलाइन में दर्ज कुल 95573 शिकायतों में से 61 प्रतिशत का निस्तारण हो चुका है। बीते सोमवार को मुख्यमंत्री धामी ने हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों की मॉनिटरिंग के दौरान फरियादियों से वार्ता कर उनका फीडबैक भी लिया। इससे पहले भी कई बार धामी हेल्पलाइन में शिकायतें दर्ज कराने वाले लोगों को फोन कर उनका फीडबैक ले चुके हैं, इससे जनता में धामी के इस मॉडल के प्रति विश्वास सुदृढ़ हुआ है।

मुख्यमंत्री का साफ कहना है कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही जनता के प्रति होनी चाहिए। अधिकारी शिकायतकर्ताओं के प्रति सेवा भाव से कार्य करें एवं उनकी समस्याओं को बेवजह लंबित न रखें।

———————————–
गुड गर्वनेंस से सरकार की आय में हो रही वृद्धि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के नारे को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गुड गवर्नेंस मॉडल आत्मसात करता नजर आ रहा है। सुशासन की दृष्टि से दिया गया यह मॉडल लोगों को खासा पंसद आ रहा है। इससे न सिर्फ जनता की समस्याओं का सरलीकरण, समाधान और निस्तारण हो रहा है बल्कि प्रदेश सरकार की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है।
यह धामी के गुड गवर्नेंस मॉडल का ही असर है कि इस साल परिवहन निगम ने घाटे से बाहर निकल अधिक मुनाफा कमाया। यूकाडा ने भी केदारनाथ धाम के लिए शुरू हुई हेलीकॉप्टर बुकिंग से एक साल में 49 करोड़ की आय प्राप्त की। पिछले 15 सालों में यह सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। उत्तराखंड को नशा मुक्त बनाने के संकल्प पर भी सरकार तेजी से काम कर रही है। इससे लोगों को जागरूक करने के साथ ही नशा तस्करों पर भी नकेल कसी जा रही है।
गुड गवर्नेंस मॉडल की सबसे अच्छी बात यह है कि मुख्यमंत्री धामी खुद कार्यों की मॉनिटरिंग करते रहते हैं। जिसका असर विभागों की कार्यशैली में साफ नजर आ रहा है। कई बार धामी खुले मंचों से इस बात का जिक्र कर चुके हैं कि हमारी सरकार का प्रयास समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास को पहुंचाना हैं। इस मॉडल की मूल अवधारणा में प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, सामाजिक न्याय, सहयोगी शासन, और नागरिकों के साथ संवेदनशीलता को बढ़ावा देना शामिल है।

मंत्री अग्रवाल के नेतृत्व में 500 कांग्रेसियों ने थामा भाजपा का दामन

ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी से जुड़े करीब 500 कार्यकर्ताओं ने क्षेत्रीय विधायक व मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

देहरादून प्रदेश कार्यालय में मंत्री डॉ अग्रवाल ने कहा कि आज मोदी है तो हर काम मुमकिन है। कहा कि आज विश्व में पीएम मोदी जी का डंका बज रहा है। हमारे पास नीति, नियत और नेतृत्व है, जबकि कांग्रेस व अन्य पार्टी दिशाहीन है।

डॉ अग्रवाल ने कहा कि ऋषिकेश विधानसभा के कांग्रेस पार्टी से जुड़े कार्यकताओं को उचित सम्मान नहीं मिल पा रहा था। कहा कि भाजपा की साफ नीति से प्रभावित होकर आज भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।

पार्टी कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने जितेंद्र पाल पाठी महानगर अध्यक्ष युवा कांग्रेस, एकांत गोयल पूर्व ज़िला अध्यक्ष कांग्रेस आईटी, अजय दास छात्र संघ प्रभारी वन्देमातरम्,ग्रुप छात्र संघ महासचिव माधवेन्द्र मिश्रा, छात्र संघ सहसचिव राहुल गौतम, छात्र महासंघ उपाध्यक्ष विपिन तिवारी, विक्रम यूनियन उपाध्यक्ष इंद्रजीतपाल, कोषाध्यक्ष महेंद्र पाल, अरुण पांडेय, आदित्य पाल, अनुज कुमार, रवि वर्मा संध्या गोयल, दिव्या पाल पाठी अपने साथ 200 से अधिक कार्यकर्ताओ को सदस्यता दिलाई। जबकि पूर्व सभासद सोनू पांडेय अपने साथ 50 से अधिक लोगों के साथ पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

वहीं, चन्द्रेश्वर नगर से 200 से अधिक लोगों ने रजनी अग्रवाल के साथ पार्टी की सदस्यता ली। इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, जिलाध्यक्ष रविन्द्र राणा, राज्यसभा सांसद कल्पना सैनी, मंत्री सुबोध उनियाल, राज्यमंत्री मधु भट्ट, प्रदेश महामंत्री आदित्य कोठारी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

लोकसभा चुनावः उत्तराखण्ड में पहले चरण में होगा चुनाव

लोकसभा चुनाव को लेकर आज भारतीय निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है। उत्तराखंड में पहले चरण में 19 अप्रैल को पांचों सीटों पर मतदान होगा। वहीं, चार जून को मतगणना होगी।

बता दें कि 2019 में भी उत्तराखंड में पहले चरण में ही 11 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। तब कुल 57.09 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। यह आंकड़ा वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव की तुलना में कम था। नैनीताल संसदीय क्षेत्र में सबसे अधिक 66.39 प्रतिशत और पौड़ी में सबसे कम 48.78 प्रतिशत मतदान हुआ था। जबकि 2014 में 62.15 प्रतिशत मतदान हुआ था।

’भाजपा पांचों सीटों पर घोषित कर चुकी प्रत्याशी’
बता दें कि, उत्तराखंड में पांच लोकसभा सीट हैं। चुनाव के लिए भाजपा पांचों सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। टिहरी गढ़वाल सीट से माला राज्यलक्ष्मी शाह, नैनीताल सीट से अजय भट्ट और अल्मोड़ा सीट से अजय टम्टा को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, पौड़ी गढ़वाल सीट पर सांसद व पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी और हरिद्वार से पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पर दांव लगाया है।

’कांग्रेस तीन सीटों पर घोषित कर चुकी उम्मीदवार’
कांग्रेस ने उत्तराखंड की तीन लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। टिहरी गढ़वाल सीट से जोत सिंह गुनसोला, पौड़ी सीट से गणेश गोदियाल और अल्मोड़ा से प्रदीप टम्टा पर दांव खेला गया है। दो सीटों पर अभी भी सस्पेंस बना है।

’उत्तराखंड में मतदाता’
83,37066 कुल मतदाता
4361360 पुरुष मतदाता
3975134 महिला मतदाता
286 ट्रांसजेंडर मतदाता

गढ़वाल लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा सर्विस मतदाता
टिहरी- 12,876
गढ़वाल- 34,963
अल्मोड़ा- 29,157
नैनीताल- 10,616
हरिद्वार- 5,745

मुख्यमंत्री ने पलायन रोकने के लिये बतायी प्रभावी चिंतन की जरूरत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पलायन रोकने के लिये प्रभावी चिंतन की जरूरत बतायी है। पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन के कारणों का गहराई से अध्ययन किये जाने, युवाओं में स्वरोजगार के प्रति जागरूकता के लिये ग्रामीण उद्यमिता विकास कार्यशालाओं के आयोजन तथा जनपद स्तर पर जन कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा के निर्देश दिये हैं। इसमें जिला स्तरीय अधिकारियों का सहयोग लिये जाने की भी बात मुख्यमंत्री ने कही है। उन्होंने कहा कि आयोग के सुझावों पर शासन स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन की व्यवस्था सुनिश्चित हो। राज्य की रिवर्स माइग्रेशन की स्थिति का अध्ययन एवं राज्य में वापस आये लोगों के अनुभवों का लाभ लेने पर भी ध्यान देने को कहा। राज्य स्थापना दिवस के आसपास प्रदेश में आयोजित प्रवासी सम्मान समारोह के आयोजन तथा हाउस ऑफ हिमालयाज की सफलता के लिये राज्य के परम्पारागत उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देने की भी मुख्यमंत्री ने जरूरत बतायी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की 7 वीं बैठक आयोजित हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों की आजीविका में तेजी से वृद्धि हो उसके लिए भी व्यापक स्तर पर कार्य योजनाएं बनानी होंगी। सरकार द्वारा पर्वतीय क्षेत्रों में लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों की आजीविका वृद्धि के साथ ही शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के लिए निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। उद्योग, पर्यटन, कृषि, बागवानी को बढ़ावा देने के लिए निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग रिवर्स पलायन कर राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार के साथ ही अन्य लोगों को भी स्वरोजगार से जोड़ रहे हैं, ऐसे लोगों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में वन पंचायत नियमावली को मंजूरी दी गई है। इससे जड़ी-बूटी उत्पादन, वृक्षारोपण, जल संचय, वनाग्नि रोकथाम, इकोटूरिज्म के क्षेत्र में भी बेहतर कार्य हो सकेंगे तथा इस क्षेत्र में स्वरोजगार के साधन उपलब्ध होंगे। उन्होंने वन पंचायतों एवं सभी संबंधित विभागों के साथ मिलकर जंगली जानवरों से खेती के नुकसान को कम करने पर भी ध्यान देने को कहा इससे हाउस ऑफ हिमालयाज के लिये उत्पादों की उपलब्धता में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड वेडिंग डेस्टिनेशन बने, इस दिशा में भी प्रयास होने चाहिए। यहां का सौंदर्य देश व दुनिया के लोगों को आकर्षित करता रहा है। राज्य सरकार वेडिंग डेस्टिनेशन के लिये राज्य में विस्तृत नीति तैयार करने जा रही है। शीघ्र ही इसके परिणाम सामने आयेंगे।

बैठक में ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एस. एस. नेगी ने कहा कि आयोग द्वारा अब तक 21 रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत की जा चुकी हैं। जिनमें राज्य के विभिन्न जनपदों में सामाजिक, आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने तथा पलायन को कम करने से सम्बन्धित सिफारिसें प्रस्तुत की गई हैं। उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा राज्य में पलायन की स्थिति पर द्वितीय सर्वेक्षण रिपोर्ट भी शासन को प्रस्तुत की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि आयोग द्वारा स्वरोजगार को बढ़ावा दिए जाने हेतु विभिन्न स्थनों पर कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। जनपद पौड़ी, चमोली एवं रूद्रप्रयाग हेतु प्रथम ग्रामीण स्वरोजगार कार्यशाला पौड़ी में, जनपद बागेश्वर, नैनीताल एवं अल्मोडा हेतु, द्वितीय ग्रामीण स्वरोजगार कार्यशाला हल्द्वानी (नैनीताल में), जनपद पिथौरागढ़, चम्पावत एवं ऊधमसिंह नगर हेतु तृतीय ग्रामीण स्वरोजगार कार्यशाला आयोजन रूद्रपुर, ऊधमसिंह नगर में एवं जनपद उत्तरकाशी, टिहरी, देहरादून एवं हरिद्वार हेतु चतुर्थ ग्रामीण स्वरोजगार कार्यशाला देहरादून में आयोजित किए गए।

बैठक में आयोग के सदस्यों ने बताया कि उनके द्वारा भारत-चीन अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से लगे जनपद उत्तरकाशी चमोली एवं पिथौरागढ़ के क्षेत्रों में स्थानीय निवासियों से संवाद किया गया एवं विभिन्न विभागों द्वारा संचालित स्वरोजगारपरक योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ चर्चा की गयी। पलायन पर विधान सभा समिति की उपस्थिति में सुझावों पर विचार के साथ शिक्षा विभाग के साथ बैठकें, वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय एवं अन्य विश्वविद्यालयों के साथ बैठकें एवं समय-समय पर आयोग द्वारा आयोजित विभिन्न विभागों के साथ बैठकों में मांगे गए सुझावों पर आयोग द्वारा कार्य गतिमान है।

उनका मानना था कि राज्य में लोगों का रूझान रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में बढ़ रहा है। राज्य में कृषि एवं बागवानी को बढ़ावा देने के लिए फसलों को जंगली जानवरों से बचाव के लिए सुरक्षात्मक उपाय करने, पर्वतीय क्षेत्रों में युवाओं एवं महिलाओं को अधिक से अधिक स्वरोजगार से जोड़ने तथा त्रिजुगीनाराण के साथ ही अन्य धार्मिक व पर्यटन स्थलों पर वेडिंग की सुविधायें विकसित करने पर ध्यान देने का सुझाव रखा। मुख्यमंत्री द्वारा अपने जनपदों के प्रवास में होम स्टे में रात्रि विश्राम की परम्परा को सभी ने होम स्टे योजना को बढ़ावा देने वाला बताया।

बैठक में उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, सचिव ग्राम्य विकास राधिका झा, आयोग के सदस्य राम प्रकाश पैन्यूली, दिनेश रावत, सुरेश सुयाल, अनिल सिंह शाही, रंजना रावत, आयोग के सदस्य सचिव राजेन्द्र सिंह रावत, ग्राम्य विकास के उपायुक्त, ए०के० राजपूत एवं ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग के शोध अधिकारी, गजपाल चन्दानी आदि उपस्थित रहे।

कैबिनेट बैठकः वन पंचायतों को मजबूत और स्वावलम्बी बनाने के लिए ब्रिटिश काल के अधिनियमों में किया गया संशोधन

उत्तराखण्ड में वन पंचायतों को मजबूत और स्वावलम्बी बनाने के लिए धामी कैबिनेट ने वन पंचायत संशोधन नियमावली को मंजूरी दी है। इसके लिए वन पंचायत के ब्रिटिश काल के अधिनियमों में संशोधन किया गया है। नई नियमावली के तहत अब नौ सदस्यीय वन पंचायत का गठन किया जाएगा, जिसके पास जड़ी-बूटी उत्पादन, वृक्ष रोपण, जल संचय, वन अग्नि रोकथाम, इको टूरिज्म में भागीदारी के अधिकार होंगे, इससे वन पंचायतों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होने की संभावना है। सबसे अहम बात है कि पहली बार त्रिस्तरीय स्थानीय निकायों को भी वन पंचायत के वन प्रबंधन से जोड़ा गया है।

उत्तराखंड भारत का एक मात्र राज्य है जहां वन पंचायत व्यवस्था लागू है। यह एक ऐतिहासिक सामुदायिक वन प्रबंधन संस्था है जो वर्ष 1930 से संचालित हो रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सोच है कि वन पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाया जाना चाहिए। उनके दिशा निर्देश पर वन पंचायत प्रबंधन के 12 साल बाद बदलाव किए गए हैं।

मौजूदा समय में प्रदेश में कुल 11217 वन पंचायतें गठित हैं जिनके पास 4.52 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र है। वन पंचायत नियमावली में किए गए संशोधन के बाद अब प्रत्येक वन पंचायत 9 सदस्यीय होगी। इसमें एक सदस्य ग्राम प्रधान द्वारा और एक सदस्य जैवविविधता प्रबंधन समिति द्वारा नामित किया जायेगा। ऐसी वन पंचायतें जो नगर निकाय क्षेत्र में आती है वहां नगर निकाय प्रशासन द्वारा एक सदस्य को वन पंचायत में नामित किया जायेगा।

दरअसल, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सोच है कि वन पंचायतें स्वतंत्र रूप से अपनी उपज का विपणन करें। इस दिशा में जो नियमावली बनाई गई है उसमें वन पंचायतों को अपने अपने क्षेत्रों में जड़ी-बूटी उत्पादन, वृक्ष रोपण, जल संचय, वन अग्नि रोकथाम, इको टूरिज्म में भागीदारी का अधिकार मिलेगा। इससे उन्हें होने वाली आय को वे वनों के रखरखाव में लगा सकेंगे। इतना ही नहीं नए नियमों के तहत अब वन पंचायतों को मजबूत करने के लिए उन्हें गैर प्रकाष्ठीय वन उपज जैसे फूल पत्ती जड़ी-बूटी, झूला घास आदि के रवन्ने अथवा अभिवहन पास जारी करने का अधिकार दिया गया है, इससे प्राप्त शुल्क को भी वन पंचायतों को अपने बैंक खाते में जमा करने का अधिकार होगा। वन पंचायतें अभी तक ग्राम सभा से लगे अपने जंगलों के रखरखाव, वृक्षारोपण, वनाग्नि से बचाव आदि का काम स्वयं सहायता समूह या सहकारिता की तरह करती आई हैं लेकिन इसका प्रबंधन डीएफओ के स्तर से किया जाता था। अब वन पंचायतों के वित्तीय अधिकार बढ़ा दिए गए हैं।

इसके अलावा, वन पंचायतों को वन अपराध करने वालों को से जुर्माना वसूलने जाने का अधिकार भी पहली बार धामी सरकार द्वारा दिया जा रहा है। वन पंचायतों को सीएसआर फंड अथवा अन्य स्रोतों से मिली धनराशि को उनके बैंक खाते में जमा करने का अधिकार दिए जाने की भी व्यवस्था नये नियमावली में की गई है, जिससे वन पंचायतों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकेगा। नई नियमावली में न सिर्फ वन पंचायतों के अधिकार बढ़ाये गये हैं बल्कि वन पंचायत पदाधिकारियों की कर्तव्यों और जवाबदेही भी निर्धारित की गई है। वन पंचायतों के वनों में कूड़ा निस्तारण को भी प्राथमिकता में रखा गया है। नई नियमावली में ईको टूरिज्म को प्रोत्साहित करने के लिए भी कई प्राविधान किए गए हैं।

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखना तकनीकी संगठनों की जिम्मेदारी हैः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ द्वारा आयोजित ’आभार एवं अभिनन्दन समारोह’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर महासंघ की विभिन्न लंबित मांगों पर शासनादेश निर्गत किए जाने पर महासंघ पदाधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के सभी पदाधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य के कुशल और प्रतिभाशाली इंजीनियर, राष्ट्र एवं राज्य के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। इंजीनियर हमारे राज्य की प्रगति का मुख्य स्तंभ है। उन्होंने कहा राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कथन अनुसार 21वी सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का बनाने पर निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अंतर्गत बनने वाले बुनियादी ढांचे, विभिन्न विकास योजनाओं, सरकारी भवनों, आदि हमारी प्रदेश में विकास को सुनिश्चित करता है। ऐसे में इन बुनियादी ढांचों /निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चहिए। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखना तकनीकि संगठनों के ही हम सबकी जिम्मेदारी है। इस बात का विशेष तौर पर ध्यान रखें कि राज्य में किसी भी विकास योजना / परियोजना बुनियादी ढांचे के विकास से लेकर तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन्वेस्टर ग्लोबल समिट में 3.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक के एमओयू साइन हुए। अब तक 71,000 करोड़ रुपए एमओयू की ग्राउंडिंग हो चुकी है। योजनाओ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने यूआईडीबी का गठन किया है। कालसी में हरीपुर धाम विकसित किया जा रहा है। कैंची धामी, मां पूर्णागिरी मन्दिर का विकास कार्य जारी है। 30 नई नीतियों को लाया गया है। विकास के चौमुखी कार्य प्रगति पर हैं। राज्य सरकार प्रदेश की जनता के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता, सबसे कड़ा नकल विरोधी कानून लागू , धर्मांतरण कानून, दंगारोधी कानून जैसे बड़े एवं कड़े फैसले लिए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान किया है। विभिन्न अभियन्त्रण विभागों में काम कर रहे कनिष्ठ अभियंता और अपर सहायक अभियंताओं के लिए वाहन भत्ते में वृद्धि करने के निर्णय के साथ, प्रथम बार सहायक अभियंताओं को भी वाहन भत्ते के रूप में 4000 रुपए अनुमन्य किए गए हैं, साथ ही 1000 कनिष्ठ अभियन्ताओं को 10 वर्ष की निरंतर सेवा पर उच्च वेतन का लाभ प्रदान किया गया है। कनिष्ठ अभियन्ताओं को अपर सहायक अभियन्ता के पदों में वेतन विसंगति को दूर करने का निर्णय भी लिया गया है । इससे निश्चित ही सरकार के प्रयासों के माध्यम से कनिष्ठ अभियन्ताओं और सहायक अभियन्ताओं के मनोबल में वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनता की परेशानी को अपनी परेशानी समझकर उसका निदान कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के साथ चलने का मंत्र दिया है। हम समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। देवभूमि को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाना हम सब की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।

इस अवसर पर प्रान्तीय अध्यक्ष, एस०एस० चौहान, महासचिव मुकेश रतूड़ी, संरक्षक डी.सी. नौटियाल , हरीश नौटियाल, यू.एस महर एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कमेटी गठित करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में कैंप कार्यालय, देहरादून में उत्तराखंड राज्य में कार्यरत संविदा/सामान्य श्रमिकों को कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम-1948 के अंतर्गत आच्छादित किये जाने के सम्बन्ध में बैठक आयोजित हुई।

बैठक में उत्तराखंड राज्य में कार्यरत संविदा /सामान्य श्रमिकों को कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम-1948 के अंतर्गत आच्छादित किये जाने के सम्बन्ध में विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने सभी पहलुओं पर गहन मंत्रणा करने के पश्चात सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में इसके सभी पहलुओं पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने हेतु कमेटी गठित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, शैलेश बगोली, ए.डी.जी अमित सिन्हा सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित थे।

सीएम ने प्रदेशवासियों को फूलदेई के त्योहार की दी हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं

उत्तराखंड का लोकपर्व फूलदेई मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री ने सपरिवार धूमधाम से मनाया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री आवास में रंग बिरंगे परिधानों में सजे बच्चों ने देहरी में फूल व चावल बिखेरकर पारंपरिक गीत ’फूल देई छमा देई, जतुक देला, उतुक सई, फूल देई छमा देई, देड़ी द्वार भरी भकार’ गाते हुए त्योहार की शुरुआत की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी बच्चों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को फूलदेई के त्योहार की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं देते हुए देश व प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि लोक पर्वों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है।

सामाजिक उत्थान एवं आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मददगार होगा पीएम-सूरज पोर्टलः धामी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पी.एम. सूरज पोर्टल प्रधानमंत्री सामाजिक उत्थान एवं रोजगार आधारित जनकल्याण पोर्टल का वर्चुअल शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज सभागार में इस कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सफाई मित्रों (सीवर और सेप्टिक टैंक श्रमिकों) को पीपीई किट प्रदान की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समाज के अंतिम छोर में खड़े हुए लोगों तक विकास की धारा पहुंचने, उनके उत्थान में पीएम-सूरज पोर्टल सहायता करेगा। इस पोर्टल के माध्यम से हमारे राज्य के 490 लाभार्थियों के साथ संवाद का यह प्रयास हम सभी के लिए बहुत ही गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि पीएम-सूरज पोर्टल प्रधानमंत्री के सामाजिक उत्थान एवं रोजगार आधारित जनकल्याण को संदर्भित करता है, इस पोर्टल के माध्यम से समाज का उत्थान होगा एवं रोजगार से जनकल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा, तथा सामाजिक रूप से लाभ से वंचित वर्गों को ऋण सहायता, आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में सहायता प्रदान करेगा, इससे समाज में वंचित, दलित, शोषित, पिछड़े और सफाई कर्मी अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के साथ उसका लाभ पा सकें, इससे समाज में सहयोग और सहभागिता बढ़ने के साथ ही समानता और न्याय की भावना भी स्थापित होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले 10 सालों में वंचित वर्गों, गरीबों, दलितों, समाज के अंतिम छोर में जो खड़े व्यक्तियों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देकर लगातार काम किया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इन सभी के लिए, इन सबके कल्याण के लिए योजनाएं बनाई गई और वंचितों को वरियता दी है क्योंकि अब भारत में विकसित भारत का जो संकल्प लिया है और विकसित भारत बनने की दिशा में तीव्र गति से अब विकास के पथ पर अग्रसर हो रहा है।

उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि हमारा जो वर्ग उपेक्षित रहा है, वंचित रहा है, समाज के अंतिम छोर में रहा है, उन तक विकास पहुंचे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गरीब, पिछड़े, आदिवासी, छोटे किसान सहित सभी वर्गों का इसमें ध्यान रखा गया है। पीएम सूरज पोर्टल का शुभारंभ किया जाना इन सभी वर्गों के उत्थान के लिए है जिन्हें हमेशा हासिये पर रखा गया था। उन्होंने कहा कि एससी, ओबीसी, सफाई कर्मचारियों को एक लाख तक का ऋण दिए जाने का काम किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने अभी सीधे डीबीटी के माध्यम से यह धनराशि अभी ट्रांसफर की है, इसके साथ ही नमस्ते आयुष्मान हेल्थ कार्ड, सेफ्टी टैंक, सीवर आदि की सफाई करने के दौरान सुरक्षा की दृष्टि के लिए पीपीई किट भी प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पहल यह दर्शाती है कि वह देश के हर वर्ग के उत्थान के लिए चिंतित हैं और उनके उत्थान के लिए हमेशा कुछ न कुछ करना चाहते हैं, उनके परिवार को, उनके बच्चों को, उनके भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं और इस सुविधा का जो लाभ है हर पात्र व्यक्ति को मिले, उसके लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान एक-एक गांव में जगह-जगह विकसित भारत संकल्प यात्रा के माध्यम से अनेक लोगों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है और जो वंचित रह गए थे उन सबको भी विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गांव-गांव पहुंचकर गरीब के दरवाजे पर जाकर लाभार्थियों को सीधे-सीधे लाभान्वित करने का काम किया है। जिन्हें दशकों तक सरकार की तरफ से कोई सभी सुविधा नहीं मिली थी उन सभी के जीवन का बदलने का यह सफल प्रयास रहा हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की ही तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बाबा साहब के प्रेम, सम्मान, समानता के विचारों को आत्मसात करते हुए उसी भावना से सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास इस मूल मंत्र को लेकर निरंतर कार्य किया जा रहा है। हमें भी इस मंत्र को आत्मसात करते हुए शोषित, वंचित, दलित, पिछड़े हैं उनके कल्याण के लिए इस अवसर पर संकल्प लेना होगा कि हम सब उनके उत्थान एवं कल्याण के लिए काम करेंगे। उनकी प्राथमिकता के आधार पर काम करेंगे और जिनको भी सहायता की आवश्यकता है उन तक हर स्तर से हम सहायता पहुंचाने का काम करेंगे, तभी हम विकसित भारत के संकल्प को साकार कर पाएंगे और उत्तराखंड को भी देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प को पूर्ण करने की दिशा में हम आगे बढ़ पाएंगे।

इस दौरान राज्यसभा सांसद कल्पना सैनी, जिला पंचायत अध्यक्ष किरन चौधरी, विधायक मदन कौशिक, आदेश चौहान, प्रदीप बत्रा, पूर्व विधायक संजय गुप्ता, कुंवर प्रणब सिंह चौंपियन, डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल, एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल, सीडीओ प्रतीक जैन, एसपी सिटी स्वतंत्र कुमार, वीसी एचआरडीए अंशुल सिंह, एसडीएम अजयवीर सिंह, लक्ष्मीराज चौहान, एमएनए वरूण चौधरी, दर्जा राज्यमंत्री श्यामवीर सैनी, बीजेपी जिलाध्यक्ष संदीप गोयल, शोभाराम प्रजापति, पूर्व मेयर मनोज गर्ग सहित जनसमूह उपस्थित था।