सीएम ने पीएम मोदी को कुंभ मेले को 500 करोड़ देने को जताया आभार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में प्रस्तावित कुंभ मेला 2027 की तैयारियों के लिए भारत सरकार द्वारा 500 करोड़ रुपये की धनराशि जारी किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और सामाजिक समरसता का विश्वविख्यात महापर्व है। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत यह धनराशि कुंभ मेला 2027 को दिव्य, भव्य और सुव्यवस्थित स्वरूप प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण, यातायात प्रबंधन, पेयजल, स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कार्यों को गति मिलेगी। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री ने पूर्व में प्रधानमंत्री से कुंभ में सहायता हेतु अनुरोध किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार निरंतर उत्तराखंड के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। चारधाम परियोजना, ऑल वेदर रोड, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार सहित विभिन्न विकास कार्यों में केंद्र का सहयोग राज्य के लिए संबल सिद्ध हुआ है। कुंभ मेला 2027 के सफल आयोजन के लिए यह सहयोग राज्य सरकार के संकल्प को और मजबूती प्रदान करेगा।

धामी ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से कुंभ मेला 2027 ऐतिहासिक, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन के रूप में स्थापित होगा तथा देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्ता पूर्ण कार्य सुनिश्चित करते हुए दिव्य और भव्य कुंभ मेला 2027 आयोजित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उत्तराखंड में सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा के लिए बनेगी एसओपी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी कार्यालयों और कार्यस्थलों पर अधिकारी- कर्मचारी और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए मुख्य सचिव को एसओपी बनाने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर, 21 फरवरी को प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुई घटना के साथ ही हाल के समय में अन्य स्थानों पर सरकारी अधिकारी- कर्मचारियों के साथ हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए, ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने कर्मचारी नेताओं की बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि सरकार कार्मिकों के मान – सम्मान और सुरक्षा को लेकर हमेशा गंभीर रही है।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को फोन कर, अधिकारी, कर्मचारियों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने डीजीपी को भी निर्देश दिए हैं कि सरकारी कार्यालयों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, साथ ही इस तरह की घटनाओं पर त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाए, उन्होंने एसएसपी देहरादून को भी शिक्षा निदेशालय में हुई घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।

इस मौके पर राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रताप सिंह पंवार, उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के अध्यक्ष राम सिंह चौहान, महामंत्री मुकेश बहुगुणा एवं अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

नीलकंठ में पार्किंग बनने से 500 वाहनों के खड़े होने की व्यवस्था होगी: राजेश कुमार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में राज्य के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसी कड़ी में जनपद पौड़ी गढ़वाल स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल नीलकंठ महादेव मंदिर में बहुप्रतीक्षित बहुमंजिला पार्किंग निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। आज राज्य सचिवालय में आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में नीलकंठ में बन रही बहुमंजिला पार्किंग की प्रगति को लेकर एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में धीरेन्द्र कुमार सिंह, संयुक्त सचिव आवास, डीपी सिंह, अपर आयुक्त हुडा, बीरेन्द्र प्रसाद भट्ट, प्रोजेक्ट मैनेजर, पेयजल, सहित सभी अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

सचिव आवास डॉ आर राजेश कुमार ने जानकारी देते हुए कहा कि क्षेत्र में लगातार बढ़ती वाहन संख्या और तीर्थयात्रियों की भीड़ को देखते हुए इस परियोजना को स्वीकृति की प्रक्रिया में आगे बढ़ाया गया है। प्रस्तावित पार्किंग में 300 से अधिक चारपहिया तथा 200 से अधिक दोपहिया वाहनों के खड़े होने की व्यवस्था की जाएगी। इससे न केवल यातायात दबाव कम होगा, बल्कि तीर्थ सीजन के दौरान अव्यवस्था और जाम की समस्या से भी राहत मिलेगी। प्रस्ताव के अनुसार पार्किंग भवन में भूतल (स्टिल्ट) सहित कुल चार स्तर होंगे, जिनमें तीन फ्लोर ऊपर निर्मित किए जाएंगे। संपूर्ण ढांचा आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा, ताकि भारी भीड़ के समय भी वाहनों का सुचारु संचालन संभव हो सके। लंबे समय से अव्यवस्थित पार्किंग नीलकंठ क्षेत्र की बड़ी समस्या रही है, जिससे स्थानीय व्यापार और श्रद्धालुओं को असुविधा का सामना करना पड़ता था।

*02 बेड का आकस्मिक स्वास्थ्य सहायता केंद्र भी किया जाएगा स्थापित*
विशेष रूप से इस बहुमंजिला पार्किंग परिसर में दो बेड का आकस्मिक स्वास्थ्य सहायता केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं, विशेषकर बुजुर्गों के लिए आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना एक सराहनीय पहल मानी जा रही है। साथ ही अधिकारियों एवं राजकीय कार्मिकों के लिए प्रतीक्षालय और विश्राम कक्ष की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इस निर्माण कार्य हेतु गठित आयोजन का नियोजन विभाग की डीपीसी के माध्यम से परीक्षण किया जा चुका है। प्रशासनोपरांत स्वीकृत लागत पर प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान किए जाने के लिए 29 जनवरी 2026 को विभागीय व्यय समिति की बैठक आयोजित की गई थी। इसके क्रम में 23 फरवरी 2026 को सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में परियोजना से संबंधित बिंदुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

*आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान*
आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के विजन और मिशन के अनुरूप राज्य के धार्मिक स्थलों को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और सुविधायुक्त बनाने की दिशा में ठोस कार्यवाही की जा रही है। नीलकंठ में प्रस्तावित बहुमंजिला पार्किंग केवल एक आधारभूत संरचना परियोजना नहीं, बल्कि तीर्थ पर्यटन को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि तीर्थस्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर यातायात व्यवस्था, सुरक्षित पार्किंग और आपात चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। परियोजना को तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है और सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पारदर्शिता के साथ पूर्ण की जा रही हैं। अंतिम प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्राप्त होते ही निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। हमारा उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सम्मानजनक अनुभव प्राप्त हो तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले।प्रशासन का मानना है कि यह परियोजना न केवल यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करेगी, बल्कि तीर्थ पर्यटन को नई दिशा देने में भी सहायक सिद्ध होगी। अब सभी की निगाहें अंतिम प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति पर टिकी हैं, जिसके उपरांत निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होने की संभावना है।

सीएम धामी ने विराट हिन्दू सम्मेलन में किया प्रतिभाग

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बालावाला देहरादून में विराट हिन्दू सम्मेलन में प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि यह मात्र एक सम्मेलन नहीं, बल्कि हिंदू समाज की चेतना, एकता और आत्मगौरव का महापर्व भी है। हिंदू समाज आज न केवल जागृत और समर्पित है बल्कि अपने धर्म, संस्कृति एवं राष्ट्र के प्राचीन वैभव को पुनः लौटाने के लिए पूर्ण निष्ठा के साथ संगठित भी हो रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण करने के उपलक्ष में पूरे देश में इस प्रकार के विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का विषय है कि वे विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन से जुड़े हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 100 वर्षों में देश के सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित कर राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन के हृदय में सशक्त रूप से स्थापित करने का कार्य भी किया है। शिक्षा, कृषि, ग्राम विकास, समाज कल्याण, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान, सेवा कार्य, कला और विज्ञान ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहाँ संघ के स्वयंसेवकों ने निस्वार्थ भाव से योगदान न दिया हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा हुआ देश है। यहां भाषा, संस्कृति, जाति और क्षेत्र के आधार पर अनेकों भिन्नताएँ हैं। लेकिन इन सबके बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हमेशा भेदभाव से ऊपर उठकर भारत की एकात्मता को मजबूत किया है और जन-जन में एक भारत – श्रेष्ठ भारत की भावना जगाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश में भाषाएं अलग हो सकती है, परंपराएँ भिन्न हो सकती हैं, पूजा- पद्धतियां और जीवन शैली अलग हो सकती है, परंतु मूल सत्य और मानवीय मूल्य एक ही रहते हैं। इसी भावना का व्यापक स्वरूप ही हिंदुत्व है । जो भारत को अपनी मातृभूमि और पितृभूमि मानता है, इसकी संस्कृति, परंपरा, जीवनशैली और मूल्यों का आदर करता है, उसकी पूजा-पद्धति चाहे कोई भी हो, पर उसकी आत्मा हिंदू है। हिंदुत्व हमें सिखाता है कि हम सब एक हैं, हमारी विविधताएँ ही हमारी शक्ति हैं, और हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि के मूल स्वरूप को बनाये रखने लिए निरंतर कार्य कर रही है। सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून के साथ ही ऑपरेशन कालनेमी के माध्यम से सनातन धर्म को बदनाम करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जा रही है। देश में सबसे पहले यूसीसी लागू कर सभी को समान अधिकार देना हो, मदरसा बोर्ड को खत्म कर सभी संप्रदायों के बच्चों के लिए राज्य में समान शिक्षा व्यवस्था की नींव डालनी हो या फिर राज्य में “हिन्दू स्टडी सेंटर बनाकर सनातन हिंदू संस्कृति के विभिन्न विषयों में शोध करने वाले युवाओं की सहायता करनी हो, हर क्षेत्र में कार्य किये जा रहे हैं।

इस अवसर पर विधायक बृज भूषण गैरोला, पार्षद प्रशांत खरोला, ब्रहम्चारी केशर स्वरूप, ललित बुड़ाकोटी, सुभाष बड़थ्वाल, गोपाल सिंह एवं बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता इसका वैज्ञानिक व्याकरण: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने गार्गी बालिका संस्कृत छात्रवृत्ति, डॉ. भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति भी विद्यार्थियों को प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षा स्वाध्याय केन्द्र एवं ई-संस्कृत संभाषण शिविर का वर्चुअल शुभारंभ और उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के त्रैमासिक पत्र संस्कृत वार्ता का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान ऊँचे पर्वतों और ऐतिहासिक मंदिरों से ही नहीं, बल्कि ज्ञान और आस्था की भाषा देववाणी संस्कृत से भी है। वेदों से लेकर उपनिषदों तक, रामायण से लेकर महाभारत तक, आयुर्वेद से लेकर खगोलशास्त्र तक, गणित से लेकर दर्शनशास्त्र तक हमारे ज्ञान की जड़ें संस्कृत में ही निहित हैं। संस्कृत हमारे अतीत की स्मृति मात्र नहीं, बल्कि हमारे भविष्य की संभावना भी है। संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता इसका वैज्ञानिक व्याकरण है। पाणिनि द्वारा रचित अष्टाध्यायी आज भी विश्व के भाषाविदों के लिए आश्चर्य का विषय है। आज विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में संस्कृत की वैज्ञानिकता पर विभिन्न प्रकार के शोध किए जाते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने के विशेष प्रयास किए गए हैं। संस्कृत साहित्य को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कराया जा रहा है। एआई के माध्यम से संस्कृत ग्रंथों को नए स्वरूप में सबके सामने रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से संस्कृत अध्ययन और शोध का केंद्र रही है। राज्य में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। सभी जनपदों में आदर्श संस्कृत ग्रामों की स्थापना की गई है। उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है। राज्य में पहली बार ‘गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना’ की शुरुआत की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार के माध्यम से अखिल भारतीय शोध सम्मेलन, अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन, अखिल भारतीय वेद सम्मेलन, अखिल भारतीय संस्कृत कवि सम्मेलन, संस्कृत शिक्षक कौशल विकास कार्यशाला और संस्कृत छात्र प्रतियोगिता जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संस्कृत विद्यार्थियों के लिए सरकारी सहायता, शोध कार्यों में सहयोग एवं रोजगार के अवसर सुनिश्चित कर इसे नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं।

संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार द्वारा राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किये हैं। संस्कृत विश्वविद्यालय में सुविधाओं को बढ़ाया गया है। प्रत्येक जनपद में एक-एक संस्कृत ग्राम बनाये गये हैं। संस्कृत को बढ़ावा देने के अलग सिस्टम बनाने की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं।

इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, खजान दास, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकान्त पाण्डेय, निदेशक संस्कृत शिक्षा कंचन देवराड़ी मौजूद थे।

मन की बात कार्यक्रम जन-जन को प्रेरित करने वाला माध्यम: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में जन प्रतिनिधियों और संस्कृति स्कूल के बच्चों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के 131वें एपिसोड को सुना। मुख्यमंत्री ने कहा कि मन की बात कार्यक्रम जन-जन को प्रेरित करने वाला माध्यम है, जो नवाचारों, सामाजिक एकता तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान को प्रोत्साहित करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस एपिसोड में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर वैश्विक शिखर सम्मेलन, अंगदान की प्रेरणादायक कहानियां तथा डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी से सावधानी बरतने पर जोर दिया। उन्होंने प्रदेशवासियों से इन संदेशों को अपनाने तथा AI, स्वास्थ्य जागरूकता एवं डिजिटल सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, विधायक खजानदास, सविता कपूर, सुरेश गड़िया, पूर्व विधायक बलवंत सिंह भौंरियाल मौजूद थे।

सीएम धामी ने स्वामी विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय में सुविधाओं को और सशक्त बनाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज पीपलकोटी स्थित स्वामी विवेकानंद धर्मार्थ चिकित्सालय का निरीक्षण कर वहां की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अस्पताल प्रबंधन, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों से संवाद कर अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, आधुनिक उपकरणों तथा मरीजों को प्रदान की जा रही उपचार सेवाओं की विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने अस्पताल में संचालित विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं, आपातकालीन व्यवस्थाओं, जांच सुविधाओं तथा दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के उपचार की प्रक्रिया की समीक्षा की। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि सीमांत और दुर्गम क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को यहां गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद हेल्थ मिशन सोसाइटी द्वारा सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं के साथ संचालित यह चिकित्सालय पर्वतीय क्षेत्रों के लिए वरदान सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के अंतिम छोर तक रहने वाले नागरिकों को भी उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों और इस दिशा में सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने चिकित्सकों और समस्त स्टाफ के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद जिस समर्पण भाव से सेवाएं दी जा रही हैं, वह अत्यंत प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार स्वास्थ्य अवसंरचना को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती को लेकर सरकार निरंतर प्रयासरत है, ताकि आमजन को बेहतर उपचार के लिए दूर-दराज़ न जाना पड़े।

इस अवसर पर अस्पताल प्रबंधन ने मुख्यमंत्री को संस्थान की उपलब्धियों, भविष्य की योजनाओं एवं आवश्यकताओं से भी अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह निरीक्षण राज्य सरकार की जनकल्याणकारी और संवेदनशील कार्यशैली का प्रमाण है, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

सीमांत क्षेत्रों के निवासी देश की सीमा के प्रहरी: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनपद चमोली के बिरही (बेडूबगड़) में नीति-माणा जनजाति कल्याण समिति की ओर से आयोजित तीन दिवसीय जनजाति समागम 2026 के समापन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नीति घाटी भोटिया जनजाति के शीतकालीन प्रवास एवं अन्य भूमि संबंधी मामलों का निस्तारण किये जाने, बेडूबगड़ भोटिया पड़ाव में सामुदायिक भवन का निर्माण, स्व. गौरा देवी जी की प्रतिमा एवं पार्क निर्माण किये जाने, बैरासकुंड मंदिर का सौंदर्यीकरण किये जाने, बेडूबगड़ पड़ाव की भूमि को सुरक्षित करने के लिए कार्य किये जाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन हमारी जनजातीय परंपराएं, सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है। जनजातीय समाज ने सदियों से अपनी परंपराओं और प्रकृति संरक्षण की भावना को पहचान दिलाने का काम किया है। हमारे सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय भाई देश के सजग प्रहरी भी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान, एकलव्य आदर्श विद्यालय समेत जनजातीय समाज के लिए कई कल्याकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे जनजातीय समाज की आजीविका में सुधार हुआ है। समाज के अन्तिम पंक्ति में खडे व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना हमारा उद्देश्य है।

मुख्यमंत्री ने कहा जनजाति समाज के बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने हेतु प्राइमरी से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। प्रदेश में 16 स्थानों में राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं। जनजाति समुदाय की बेटियों की शादी के लिए 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि जनजातीय संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए प्रत्येक वर्ष जनजातीय महोत्सव एवं खेल महोत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है। टिम्मरसैंण महादेव के सौंदर्यकरण और पहुंच मार्ग के लिए 26 करोड़, हीरामणि मंदिर के लिए 75 लाख और मलारी गांव के सामुदायिक स्थल के लिए 34 लाख की राशि जारी की चुकी है।

मुख्यमंत्री ने आयोजन में जनसहभागिता को अनुपम उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन ही उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान हैं। ये आयोजन न केवल समाज में समरसता और एकता को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और मूल जड़ों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए सामूहिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा जनजातीय समुदाय ने सदियों से अपनी परंपराओं, लोकज्ञान और प्रकृति-संरक्षण की भावना से हमारी सभ्यता को मजबूती प्रदान की है। विशेषकर सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले हमारे जनजातीय भाई-बहनों का जीवन हमेशा से संघर्ष, अनुशासन और सामूहिकता की अनुपम मिसाल रहा है। आज आवश्यकता है कि हमारी इस महान जनजातीय परंपरा के पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय उत्पादों और प्राकृतिक संसाधनों को सहेजा जाए, जिससे ये ज्ञान हमारी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंच सके।

उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय भी आदरणीय प्रधानमंत्री जी की सकारात्मक सोच का प्रतीक है। देशभर में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के संग्रहालय स्थापित किए गए हैं। पूरे देश के लिए ये गर्व की बात है कि आज संथाल आदि वासियों की बेटी आदरणीय श्रीमती द्रौपदी मूर्मू जी देश के सर्वाेच्च संवैधानिक पद पर आसीन हैं। जो ये दिखाता है कि जनजातीय समुदाय अब देश का नेतृत्व करने में भी सक्षम है। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री जी ने जनजातीय समाज के विकास के लिए बजट को 3 गुना बढ़ाकर ये सुनिश्चित किया है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी सुविधाओं का लाभ इस समुदाय के प्रत्येक परिवार तक पहुँचे ये सभी ऐतिहासिक परिवर्तन केवल डबल इंजन वाली केन्द्र व राज्य सरकार में ही संभव हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा माणा को देश के अंतिम गांव की जगह देश के प्रथम गांव की संज्ञा दी, और उनके इसी विचार और मार्गदर्शन से प्रेरणा लेते हुए हमारी सरकार भी उत्तराखंड के जनजातीय समूदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तहत प्रदेश के 128 जनजातीयगांवों को चिन्हित किया है। जहाँ अब बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ -साथ रोज़गार, बेहतर शिक्षा औरस्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।साथ ही, राज्य में कालसी, मेहरावना, बाजपुर और खटीमा में संचालित एकलव्य आदर्शआवासीय विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय बच्चों को निशुल्क शिक्षा और आवास की सुविधा मिल रही है। वहीं, देहरादून के चकराता और बाजपुर में नए आवासीय विद्यालयों का निर्माण कार्यभी तेजी से जारी है। वर्तमान में 16 राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय भी संचालित किए जा रहे हैं। राज्य में जनजातीय वर्ग के जो शिक्षित बेरोजगार युवा हैं। उन्हें तकनीकी शिक्षा सेजोड़ने के लिए तीन आई.टी.आई. संस्थान भी संचालित किए जा रहे हैं, जिससे वे कौशल प्राप्त कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें । इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले जनजातीय छात्र-छात्राओं के लिए निशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की गई है और उन्हें हर माह छात्रृत्ति भी दी जा रही है।

उन्होंने कहा जनजातीय समुदाय की बेटियों के विवाह हेतु 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है तथा जनजातीय शोध संस्थान के लिए 1 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड भी स्थापित किया गया है। वहीं, जनजातीय संस्कृति को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य मेंप्रतिवर्ष जनजाति महोत्सव एवं खेल महोत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा हमारा प्रयास है कि देवभूमि में पलायन रुके और हमारे युवाओं को अपने ही गाँव में रोजगार के अवसर मिलें, इसी दिशा में होम स्टे योजना एक मजबूत माध्यम बनकर उभरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चमोली जनपद में 800 से अधिक होम स्टे संचालित हो रहे हैं, जिनसे 4 हजार से अधिक स्थानीय लोग स्वरोजगार से जुड़ चुके हैं। वहीं, उत्तराखंड की जनजातीय संस्कृति अपने आप में पर्यटन का एक बड़ा आकर्षण है। इसालिए होम स्टे के साथ-साथ साहसिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के जरिए न कवल आजीविका के नए अवसर सृजित कर रहे हैं, बल्कि अपनी समृद्ध परंपराओंऔर संस्कृति को भी वैश्विक पहचान दिला रहे हैं।

इस मौके पर थराली विधायक भूपाल राम टम्टा, कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल, भाजपा जिला अध्यक्ष गजपाल बर्तवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष चमोली दौलत सिंह बिष्ट,पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी, नगर पालिका अध्यक्ष गोपेश्वर संदीप रावत, नीति माणा जनजाति कल्याण समिति के अध्यक्ष हरीश परमार, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार बीडी सिंह, दलबीर दानू, राज्य मंत्री हरक सिंह नेगी, भाजपा महामंत्री अरुण मैठाणी, बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार, मुख्य विकास अधिकारी डॉ अभिषेक त्रिपाठी सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक होगा कुंभ मेला: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में कुंभ मेला-2027 की तैयारियों की समीक्षा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार में अगले वर्ष आयोजित होने वाला कुंभ मेला दिव्य, भव्य और ऐतिहासिक होगा। मेले के दौरान श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधा, सुगमता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस महाआयोजन की व्यवस्थाओं में कोई भी कमी नहीं रहने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कुंभ मेले से संबंधित कार्य निर्धारित समय पर पूर्ण करने के सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी विभाग बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें और लिए गए निर्णयों का अविलंब अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

मेला नियंत्रण भवन, हरिद्वार में आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री ने मेले की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों पर हुई कार्रवाई तथा वर्तमान में चल रहे कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली। मुख्यमंत्री ने मेले से संबंधित सभी कार्य आगामी अक्टूबर माह तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मेले के लिए सभी प्रमुख स्थायी कार्यों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है तथा अस्थायी कार्यों के प्रस्तावों को अंतिम रूप देकर उन्हें भी समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। जोन एवं सेक्टर स्तर पर की जाने वाली तैयारियों को तय लक्ष्यों और समयसीमा के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण ढंग से संपन्न करने के निर्देश दिए गए। निर्माण कार्यों की मॉनिटरिंग हेतु थर्ड पार्टी ऑडिट भी कराने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने मेले के दौरान परिवहन एवं पार्किंग की प्रभावी एवं पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए वैकल्पिक मार्गों को चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के सुरक्षित एवं सुविधाजनक आवागमन तथा स्नान की समुचित व्यवस्था की जाए। संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए स्नान, आवागमन एवं ठहराव के लिए विस्तृत योजना तैयार की जाए। महिला एवं वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रबंध किए जाने के भी निर्देश दिए गए।

कुंभ क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्य में स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग भी लिया जाए। स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि बीमार श्रद्धालुओं को निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने के लिए बोट एवं बाइक एंबुलेंस की व्यवस्था की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ मेले के सुव्यवस्थित एवं सफल आयोजन के लिए साधु-संतों, अखाड़ों, जनप्रतिनिधियों तथा धार्मिक एवं स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग लिया जाए और उनके सुझावों को ध्यान में रखकर कार्य किए जाएं।

उन्होंने कुंभ मेले में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती पर जोर दिया। साथ ही साइबर सुरक्षा, अग्निशमन व्यवस्था तथा रेस्क्यू कार्यों के लिए दक्ष कार्मिकों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा।

स्थायी कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कुंभ क्षेत्र में निर्मित सभी पुलों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर उनकी मरम्मत समय पर पूर्ण की जाए। गंगा नदी के घाटों के अनुरक्षण हेतु यदि गंग नहर के क्लोजर की आवश्यकता हो तो उत्तर प्रदेश के अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया जाए। घाटों के सुदृढ़ीकरण, सुरक्षा रेलिंग तथा फिसलन-रोधी व्यवस्थाएं समय से पूर्ण की जाएं। कुंभ प्रारंभ होने से पूर्व सभी विद्युत लाइनों को भूमिगत कर लिया जाए।

कुंभ क्षेत्र में भूमि प्रबंधन एवं आवंटन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी मॉनिटरिंग मेलाधिकारी स्वयं करें तथा क्षेत्र को अतिक्रमणमुक्त रखा जाए।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल तथा पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने भी प्रतिभाग करते हुए उपयोगी सुझाव दिए। इस अवसर पर मेलाधिकारी सोनिका ने बैठक में मेले से संबंधित स्वीकृत कार्यों की प्रगति की जानकारी दी तथा प्रस्तावित कार्यों एवं व्यवस्थाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किया। बैठक में सचिव, शहरी विकास विभाग नितेश कुमार झा; सचिव, लोक निर्माण विभाग पंकज कुमार पाण्डे; आयुक्त, गढ़वाल मंडल विनय शंकर पाण्डेय; सचिव, पेयजल रणवीर सिंह चौहान; सचिव, सिंचाई युगल किशोर पंत, सचिव, पर्यटन धीराज गर्ब्याल; अपर पुलिस महानिदेशक ए.पी. अंशुमान तथा उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल की डीआरएम विनीता श्रीवास्तव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने मेले की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी।

बैठक में मेयर हरिद्वार किरन जैसल, मेयर रुड़की अनीता अग्रवाल, मेयर ऋषिकेश शंभू पासवान, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, विधायक रुड़की प्रदीप बत्रा, विधायक हरिद्वार ग्रामीण अनुपमा रावत, विधायक ज्वालापुर रवि बहादुर, दायित्वधारी अजीत चौधरी, जयपाल सिंह चौहान, देशराज कर्णवाल, शोभाराम प्रजापति, पूर्व मंत्री एवं प्रदेश उपाध्यक्ष स्वामी यतीश्वरानंद, जिलाध्यक्ष भाजपा हरिद्वार आशुतोष शर्मा, जिलाध्यक्ष रुड़की डॉ. मधु, पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप, सचिव सी. रविशंकर, आनंद स्वरूप, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा, अपर जिलाधिकारी पी.आर. चौहान, अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

उत्तराखंड में अब रोड सेफ्टी के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट

उत्तराखण्ड में परिवहन क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक सुधारों को केन्द्र सरकार ने सराहते हुए पूंजीगत निवेश योजना (SASCI) 2025-26 के अंतर्गत राज्य को ₹105.11 करोड़ की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है। साथ ही अप्रैल से पूर्व लागू किए गए सुधारों के लिए ₹20 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि भी स्वीकृत की गई है। इस प्रकार कुल ₹125 करोड़ की प्रोत्साहन राशि परिवहन विभाग, उत्तराखण्ड को प्राप्त हुई है।

यह उपलब्धि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में परिवहन क्षेत्र में लागू की जा रही तकनीक आधारित सुधारात्मक नीतियों का परिणाम मानी जा रही है।

इस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड में परिवहन क्षेत्र में तकनीक आधारित सुधारों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के साथ-साथ पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो रही है। इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट एवं वाहन स्क्रैपिंग नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में दुर्घटनाओं में कमी लाने तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। केन्द्र सरकार द्वारा प्राप्त यह प्रोत्साहन राशि राज्य में स्मार्ट एवं सुरक्षित परिवहन व्यवस्था विकसित करने में सहायक सिद्ध होगी।

सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत राज्य में हाई-रिस्क, हाई-डेंसिटी एवं क्रिटिकल जंक्शनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट सिस्टम लागू किए गए हैं। इसके अंतर्गत दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में ANPR (ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे लगाए गए हैं तथा उन्हें ट्रैफिक कंट्रोल रूम एवं ई-चालान प्रणाली से इंटीग्रेट किया गया है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसम्बर 2025 तक 20 स्थानों पर ANPR कैमरे स्थापित कर दिए गए हैं, जबकि राज्य में अब तक कुल 37 लोकेशनों पर कैमरे लगाए जा चुके हैं। इन कैमरों के माध्यम से ट्रिपल राइडिंग, ओवरस्पीडिंग, बिना हेलमेट जैसे मामलों में प्रतिदिन 5 हजार से अधिक चालान किए जा रहे हैं।

विशेष उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन गया है जहां ANPR कैमरों के माध्यम से ग्रीन सेस की वसूली की जा रही है। इस प्रणाली के तहत वाहनों को रोके बिना ही Fastag वॉलेट से ग्रीन सेस स्वतः कटकर संबंधित खाते में जमा हो जाता है।

*वाहन स्क्रैपिंग नीति में प्रभावी क्रियान्वयन*

वाहन स्क्रैपिंग नीति के अंतर्गत पुराने वाहनों को पंजीकृत स्क्रैपिंग केंद्रों में निस्तारित करने पर जारी प्रमाण पत्र के आधार पर नए वाहन क्रय करने पर विभिन्न श्रेणियों में रोड टैक्स में 50 प्रतिशत तक की छूट प्रदान की जा रही है।

राज्य में अब तक 564 सरकारी एवं 5861 निजी वाहनों को स्क्रैप किया जा चुका है। इसके लिए कुल 6425 वाहनों के विरुद्ध ₹9.58 करोड़ की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है।

*ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS)*

राज्य में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों की स्थापना को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इस दिशा में दो ATS को Preliminary Registration Certificate जारी किए जाने पर ₹2.5 करोड़ की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है।

इन सुधारात्मक योजनाओं का क्रियान्वयन सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर परिवहन सचिव बृजेश कुमार संत के निर्देशन में किया गया है, जिससे उत्तराखण्ड परिवहन क्षेत्र में नवाचार आधारित सुधार लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।