बिना तैयारी बैठक में पहुंचे अधिकारियों पर सीएम धामी सख्त, जताई कड़ी नाराजगी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज सचिवालय में आयोजित मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों के बिना तैयारी के उपस्थित होने पर सख्त नाराजगी व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है और इस प्रकार की बैठकों में बिना पूरी तैयारी के आना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में सभी अधिकारी पूर्ण तैयारी और तथ्यात्मक जानकारी के साथ ही बैठक में उपस्थित हों।

मुख्यमंत्री ने विभागों एवं अधिकारियों के बीच आपसी समन्वय और संवाद की कमी पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई मामलों में विभागीय तालमेल के अभाव के कारण विकास कार्य अनावश्यक रूप से लंबित हो रहे हैं, जो स्वीकार्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने सभी सचिवों को संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की घोषणाओं की एक बार पुनः गहन समीक्षा करने के कड़े निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाएं सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता का विषय हैं और जनता से किए गए वादों को समयबद्ध तरीके से पूरा करना सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने निर्देश दिए कि किस विभाग में कितने प्रतिशत घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं और कितनी लंबित हैं, इसकी विस्तृत रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत की जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी लंबित घोषणाओं के संबंध में 15 जून तक शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही जिन कार्यों के शासनादेश जारी हो चुके हैं, उन पर तत्काल कार्य प्रारंभ सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनावश्यक देरी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी कड़ी नाराजगी व्यक्त की कि कई स्थानों पर घोषणाओं के अनुरूप कार्य प्रारंभ होने के बावजूद शिलापट्ट नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित कार्यस्थलों पर शिलापट्ट लगाना सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा संबंधित जिलाधिकारी इसकी जिम्मेदारी तय करेंगे।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि जो विषय जिला स्तर पर हल हो सकते हैं, उन्हें अनावश्यक रूप से शासन स्तर पर लंबित रखना उचित नहीं है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिस स्तर पर कार्य लंबित है, उसी स्तर पर उसका तत्काल समाधान किया जाए।

मुख्यमंत्री ने सभी सचिवों को निर्देश दिए कि 15 जून से पहले सभी लंबित घोषणाओं की पुनः समीक्षा बैठक आयोजित की जाए और प्रत्येक कार्य की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की जाए।

इसके उपरांत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अल्मोड़ा जनपद के विधानसभा क्षेत्र सल्ट, रानीखेत, सोमेश्वर एवं जागेश्वर से संबंधित विभिन्न विकास घोषणाओं की विस्तृत समीक्षा की।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनता से किए गए सभी वादों और घोषणाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए तथा विकास कार्यों में किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र के संतुलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जिन घोषणाओं पर शासनादेश जारी हो चुके हैं, उनके कार्यों में तेजी लाई जाए तथा लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

समीक्षा के दौरान विधानसभा क्षेत्र सोमेश्वर की कुल 90 घोषणाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। इनमें बड़ी संख्या में घोषणाओं पर शासनादेश जारी किए जा चुके हैं तथा अनेक कार्यों पर तेजी से कार्यवाही चल रही है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से पेयजल, सिंचाई, चिकित्सा-स्वास्थ्य, विद्यालयी शिक्षा, ऊर्जा, कृषि एवं कृषक कल्याण सहित विभिन्न विभागों से संबंधित लंबित मामलों में शीघ्र प्रगति लाने के निर्देश दिए।

विधानसभा क्षेत्र सल्ट की कुल 69 घोषणाओं की समीक्षा के दौरान बताया गया कि अनेक घोषणाओं पर शासनादेश जारी कर कार्य प्रारंभ किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने धर्मस्व, ग्राम्य विकास, चिकित्सा-स्वास्थ्य, पर्यटन, लोक निर्माण, शिक्षा एवं शहरी विकास से जुड़े लंबित कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

विधानसभा क्षेत्र रानीखेत की कुल 33 घोषणाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र में सड़क, पर्यटन, सिंचाई, स्वास्थ्य, खेल और आधारभूत सुविधाओं से संबंधित योजनाएं स्थानीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपूर्ण एवं लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।

वहीं विधानसभा क्षेत्र जागेश्वर की कुल 48 घोषणाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने पर्यटन, पेयजल, युवा कल्याण, शिक्षा, संस्कृति, आवास और धार्मिक महत्व की योजनाओं को शीघ्र पूरा करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जागेश्वर क्षेत्र धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां की विकास परियोजनाओं में तेजी लाई जाए।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार विकल्प रहित संकल्प के साथ प्रदेश के अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा का उद्देश्य यही है कि आम जनता को समय पर योजनाओं का लाभ मिले और उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित करे।

बैठक में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, विधायक सल्ट, रानीखेत एवं जागेश्वर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु सहित सभी संबंधित विभागों के सचिव तथा संबंधित जिलों के जिलाधिकारी उपस्थित रहे।

देवभूमि का देवत्व और सांस्कृतिक मूल्य हर हाल में सुरक्षित रहेंगेः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज देहरादून जनपद के सेलाकुई स्थित आद्यशक्ति श्री माता वैष्णो देवी धाम सेवा समिति द्वारा आयोजित भव्य मां भगवती जागरण कार्यक्रम में प्रतिभाग कर मां भगवती की पूजा-अर्चना की तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बीच मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपराओं को अक्षुण्ण बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति के स्वर्णिम पुनर्जागरण का काल प्रारंभ हुआ है। उन्होंने कहा कि सदियों की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि भारत की आस्था, संस्कृति और स्वाभिमान की पुनर्स्थापना का ऐतिहासिक क्षण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जिस दृढ़ संकल्प के साथ राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देशभर में सनातन संस्कृति को सशक्त करने के लिए अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक, केदारनाथ पुनर्निर्माण, बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान सहित अनेक धार्मिक स्थलों का विकास भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण का कार्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विशेष मार्गदर्शन में तेजी से आगे बढ़ा और आज केदारपुरी एक नए दिव्य एवं भव्य स्वरूप में विश्व के सामने है। उन्होंने कहा कि अभी 22 अप्रैल से चारधाम यात्रा प्रारंभ हुई है और अब तक तीन लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदार सहित चारधामों में दर्शन कर चुके हैं, जो उत्तराखंड के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2024 से उत्तराखंड में शीतकालीन यात्रा की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं इस पहल का समर्थन किया और इसकी शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शीतकालीन यात्रा का उद्देश्य यह है कि प्रदेश के धार्मिक स्थलों में पूरे वर्ष श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहे, स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आदि कैलाश यात्रा के बाद वहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के इस दौरे ने सीमांत क्षेत्रों को नई पहचान दी है तथा स्थानीय पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिला है। राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर तेजी से कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर बनने के बाद यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं कुछ दिन पूर्व मात्र ढाई घंटे में दिल्ली से देहरादून पहुंचे, जो इस परियोजना की उपयोगिता को दर्शाता है। इससे पर्यटन, व्यापार और तीर्थाटन को नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सिख श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे परियोजना भी एक महत्वपूर्ण पहल है। इस परियोजना के पूर्ण होने से श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी और यात्रा अधिक सुगम एवं सुरक्षित बनेगी। साथ ही यह क्षेत्रीय विकास को भी गति देगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में जन्म लेना बहुत बड़े सौभाग्य की बात है, लेकिन जिन लोगों का जन्म यहां नहीं हुआ और जिन्होंने इस भूमि को अपनी कर्मभूमि बनाया है, वे भी उतने ही सौभाग्यशाली हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि देवभूमि का देवत्व बना रहे, यहां के सांस्कृतिक मूल्य सुरक्षित रहें और हमारी परंपराएं आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचें।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने संकल्प लिया है कि उत्तराखंड की भावी पीढ़ियों और आने वाले बच्चों का भविष्य सुरक्षित बनाया जाए। इसके लिए सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण, धार्मिक स्थलों का विकास, पर्यावरण संरक्षण और संतुलित विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकल्प रहित संकल्प के मंत्र के साथ विकास और विरासत दोनों को समान प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए भी निरंतर कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज को एकजुट करने का कार्य करते हैं तथा युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं।

इस अवसर पर विधायक सहदेव सिंह पुंडीर, अन्य जनप्रतिनिधिगण, आयोजन समिति के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

सीएम धामी ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लोगों की समस्याओं को सुना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लोगों की समस्याओं को सुना। जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने सड़क, पेयजल, विद्युत, स्वास्थ्य, शिक्षा, भूमि संबंधी मामलों तथा अन्य जनहित से जुड़े विषयों पर अपनी समस्याएं मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री कार्यालय एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त सभी शिकायतों एवं मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए तथा प्रत्येक प्रकरण की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की लापरवाही अथवा अनावश्यक विलंब न किया जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्राप्त शिकायतों को संबंधित विभागों को तत्काल प्रेषित करते हुए समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए तथा शिकायतकर्ता को की गई कार्रवाई की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को उसकी समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान प्राप्त हो। जनसुनवाई जैसे कार्यक्रम शासन और जनता के बीच संवाद स्थापित करने का सशक्त माध्यम हैं, जिनके माध्यम से सरकार को जमीनी स्तर की समस्याओं की जानकारी प्राप्त होती है और उनके समाधान के लिए प्रभावी निर्णय लिए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनकल्याण, सुशासन और समग्र विकास के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। प्रदेश के दूरस्थ एवं सीमांत क्षेत्रों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सख्त निर्देश दिये गये हैं कि जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ सरलता एवं समयबद्ध रूप से लोगों को प्राप्त हो।

इस अवसर पर फिल्म अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी ने भी मुख्यमंत्री से भेंट कर उत्तराखण्ड में चारधाम यात्रा में श्रद्धालु के लिए की गई बेहतर व्यवस्थाओं के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन बेहतर यात्रा व्यवस्थाओं के लिए पूरी तत्परता से कार्य कर रहा है। आंगनबाड़ी कर्मियों ने भी उनकी समस्याओं और मांगों पर सकारात्मक आश्वासन के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

सीएम धामी ने आंगनबाड़ी संगठन के प्रतिनिधिमंडल को उनकी मांगों के लिये आश्वस्त किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सचिवालय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ती/सेविका/मिनी कर्मचारी संगठन, उत्तराखण्ड के प्रतिनिधिमंडल ने संगठन की अध्यक्ष रेखा नेगी के नेतृत्व में भेंट कर अपनी विभिन्न मांगों एवं समस्याओं से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कर्मियों की समस्याओं एवं मांगों पर प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि के विषय में गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है।

बैठक में सचिव महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा अवगत कराया गया कि आंगनबाड़ी कर्मियों के मानदेय वृद्धि के संबंध में भारत सरकार से भी अनुरोध किया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए सकारात्मक आश्वासन के उपरांत संगठन के प्रतिनिधियों ने हड़ताल को स्थगित किए जाने पर सहमति व्यक्त की।

इस अवसर पर सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के सचिव चन्द्रेश कुमार तथा विभागीय निदेशक बी.एल. राणा भी उपस्थित रहे।

मानसून से पहले उत्तराखण्ड को बड़ी सौगात, सफल हुआ सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम परीक्षण

देहरादून। राष्ट्रीय स्तर पर आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा सी-डॉट द्वारा उत्तराखण्ड सहित पूरे देश में सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम के माध्यम से सफल परीक्षण अलर्ट जारी किया गया। प्रातः 11 बजकर 46 मिनट पर यह अलर्ट संदेश प्रसारित किया गया।

उत्तराखण्ड ने लगातार इस आधुनिक तकनीक को जल्द से जल्द लागू किए जाने के लिए केंद्र सरकार एवं संबंधित एजेंसियों के समक्ष प्रभावी पैरवी की थी। इस उपलब्धि पर माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है।

इस सफल परीक्षण के साथ ही राज्य में आपदाओं के दौरान आम जनमानस तक त्वरित एवं लक्षित चेतावनी संदेश पहुंचाने हेतु सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ हो गया है। इस तकनीक के माध्यम से अब उत्तराखण्ड में किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में स्थित मोबाइल उपभोक्ताओं को एक साथ अलर्ट भेजे जा सकेंगे।

बता दें कि उत्तराखण्ड में आगामी मानसून सीजन से पहले ही इस तकनीक को लागू करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष अनुरोध पर इस प्रणाली का प्रथम परीक्षण भी उत्तराखण्ड में ही किया गया था। राज्य द्वारा उस परीक्षण के आधार पर महत्वपूर्ण तकनीकी एवं व्यवहारिक फीडबैक राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा सी-डॉट को उपलब्ध कराए गए थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह तकनीक उत्तराखण्ड जैसे आपदा-संवेदनशील राज्य के लिए अत्यंत उपयोगी एवं वरदान सिद्ध होगी। विशेष रूप से चारधाम यात्रा एवं आगामी मानसून सीजन के दौरान इस प्रणाली का व्यापक उपयोग किया जाएगा, जिससे यात्रियों एवं स्थानीय निवासियों को समय रहते सटीक एवं प्रभावी चेतावनी उपलब्ध कराई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा निरंतर यह प्रयास किया गया कि मानसून प्रारंभ होने से पूर्व यह तकनीक राज्य को उपलब्ध हो, ताकि संभावित आपदाओं के प्रति जनमानस को समय रहते सचेत किया जा सके।

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने इस पहल को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक गेम-चेंजर बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के समुचित उपयोग से राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी। उन्होंने कहा कि सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक समय पर चेतावनी पहुंचाना अब संभव हो सकेगा, जिससे आपदाओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित होगी और जनहानि में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि किसी भी आपदा की स्थिति में, प्रभावित क्षेत्र में सक्रिय सभी मोबाइल टावरों की सीमा में आने वाले उपभोक्ताओं को सेल ब्राडकास्टिंग तकनीक के माध्यम से स्वतः अलर्ट प्राप्त होगा। यह प्रणाली स्थान- विशिष्ट चेतावनी प्रसारण को सक्षम बनाती है, जिससे केवल प्रभावित क्षेत्र के नागरिकों को ही संदेश प्राप्त होता है और अनावश्यक भ्रम की स्थिति से बचा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि यूएसडीएमए द्वारा इस तकनीक से एलर्ट भेजे जाने की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यूएसडीएमए के विशेषज्ञों द्वारा एनडीएमए व सी-डॉट के दिशा-निर्देशन में प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया गया है तथा अब इस तकनीक से एलर्ट भेजे जाएंगे और इसका प्रदेश में व्यापक तौर पर उपयोग किया जाएगा।

15 जून 2026 तक सीएम घोषणाओं के लंबित शासनादेश जारी करने के निर्देश

मुख्यमंत्री घोषणाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने तथा उनकी प्रभावी निगरानी के लिए प्रोग्राम इवैल्यूएशन एंड रिव्यू टेक्निक (पी.ई.आर.टी.) चार्ट तैयार किया जाए। बिजली, पेयजल, वनाग्नि, मानव-वन्यजीव संघर्ष तथा सड़क से संबंधित समस्याओं का विभागों द्वारा यथाशीघ्र समाधान किया जाए। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। विधायकगणों द्वारा अपने क्षेत्रों की जिन समस्याओं को उठाया जा रहा है, अधिकारी उन्हें गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकता के आधार पर उनका समाधान करें। जिन घोषणाओं के अभी तक शासनादेश जारी नहीं हुए हैं, उन्हें 15 जून 2026 तक जारी किया जाए। सभी विभाग आपसी समन्वय से जनसमस्याओं का समाधान करें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री घोषणाओं के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्रों यमकेश्वर, पौड़ी, श्रीनगर, चौबट्टाखाल, लैंसडाउन और कोटद्वार की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को ये निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के प्रत्येक विकासखंड में बालिकाओं के लिए एक-एक छात्रावास बनाया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक ब्लॉक में छात्राओं की सर्वाधिक संख्या वाले विद्यालयों को चिन्हित करते हुए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए। उन्होंने कहा कि रघुनाथ मंदिर, कोट ब्लॉक स्थित लक्ष्मण मंदिर तथा फलस्वाड़ी स्थित सीता माता मंदिर को धार्मिक सर्किट के रूप में भव्यता से विकसित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधायकगणों द्वारा केंद्रीय विद्यालय संगठन खोलने के लिए दिए जा रहे प्रस्तावों पर शिक्षा विभाग तथा संबंधित जिलाधिकारी केंद्र सरकार के मानकों के अनुरूप सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें, ताकि प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे जाने पर उन्हें शीघ्र स्वीकृति मिल सके।युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पौड़ी में मल्टीपरपज हॉल बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विधायकगणों द्वारा बैठक में उठाई गई समस्याओं का संबंधित विभागीय सचिव प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाओं से संबंधित रोपवे प्रकरणों की अलग से समीक्षा की जाए। साथ ही पार्किंग की समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान किया जाए तथा सरकारी कार्यालयों में नियमित रूप से सोलर पैनल लगाए जाएं।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, डॉ. धन सिंह रावत, विधायक रेनू बिष्ट, राजकुमार पोरी, दलीप सिंह रावत, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, रविनाथ रमन, डॉ. पंकज कुमार पांडेय, डॉ. आर. राजेश कुमार, रणवीर सिंह चौहान, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष तथा वर्चुअल माध्यम से गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय और जिलाधिकारी पौड़ी स्वाति भदौरिया उपस्थित थे।

घबराएं नहीं, शनिवार को आपके फोन में आएगा अलर्ट, बजेगी घंटी

देहरादून। शनिवार को राज्य में सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम के माध्यम से एक परीक्षण अलर्ट जारी किया जाएगा। इस परीक्षण का उद्देश्य राज्य में स्थापित आपातकालीन सूचना प्रसारण प्रणाली की कार्यक्षमता का मूल्यांकन करना तथा यह सुनिश्चित करना है कि आपदा की स्थिति में चेतावनी संदेश समयबद्ध एवं व्यापक रूप से प्रसारित हो सकें। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा नागरिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे इस परीक्षण अलर्ट को परीक्षण अलर्ट ही समझे। इस अलर्ट से किसी भी प्रकार से घबराने की आवश्यकता नहीं है।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, देहरादून द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, भारत सरकार, नई दिल्ली के सहयोग से राज्य में आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ बनाने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मौसम पूर्वानुमान एवं आपदा संबंधी सूचनाओं को आम जनमानस तक समय पर और प्रभावी ढंग से पहुँचाना है, ताकि संभावित आपदाओं के प्रति लोगों को पहले से सचेत किया जा सके और जन-धन की हानि को न्यून किया जा सके।
यह परीक्षण विभिन्न मोबाइल नेटवर्क सेवा प्रदाताओं के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में किया जाएगा, जिससे यह आकलन किया जा सके कि अलर्ट संदेशों का प्रसारण कितनी प्रभावशीलता से हो रहा है तथा किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। साथ ही, विभिन्न परिस्थितियों में संदेशों की त्वरितता एवं सटीकता का भी परीक्षण किया जाएगा।
इस समग्र प्रक्रिया का उद्देश्य भविष्य में किसी भी आपदा की स्थिति में राज्य के नागरिकों को समय रहते सचेत करना है, ताकि वे आवश्यकतानुसार सावधानी बरत सकें। इसके अतिरिक्त, इस प्रणाली के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों में प्रशासन एवं आम जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।
भविष्य में किसी भी प्रकार के आपदा के सम्भावना होने पर वास्तविक अलर्ट जारी किया जायेगा। ऐसे अलर्ट को गंभीरता से लिया जाना होगा तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन किया जाना आवश्यक होगा। ऐसा करने से हमें आपदा के पूर्व ससमय चेतावनी प्राप्त हो सकेगी तथा हम अपना, परिजनों, अपने सुभचिन्तकों, अपने मित्रों तथा जनसामान्य का बचाव कर सकेंगे। भविष्य में समय-समय पर इस प्रणाली के बारे में जागरूकता कार्यक्रम चलाते हुए लोगों को जागरूक किया जायेगा। यह संयुक्त प्रयास राज्य को आपदाओं के प्रति अधिक सजग, सुरक्षित एवं सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

यह संदेश आएगा
देहरादून। भारत द्वारा स्वदेशी तकनीक का उपयोग करते हुए अपने नागरिकों के लिए त्वरित आपदा चेतावनी सेवा हेतु सेल ब्रॉडकास्ट की शुरुआत की जा रही है।
सतर्क नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र।
इस संदेश की प्राप्ति पर जनता से किसी प्रकार की कोई कार्रवाई अपेक्षित नहीं है।
यह एक परीक्षण संदेश है।
गृह मंत्रालय

सीएम धामी ने किए मां राजेश्वरी के दर्शन, 1100 कन्याओं का अभिषेक कर श्री पीठम स्थापना महोत्सव में किया प्रतिभाग

अल्मोड़ा जनपद के डोल स्थित आश्रम में आयोजित श्री कल्याणिका हिमालय देवस्थानम न्यास के श्री पीठम स्थापना महोत्सव कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 1100 कन्याओं का पूजन कर माँ राजेश्वरी का अभिषेक एवं पूजा-अर्चना की तथा प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि की कामना की।

डोल आश्रम में आगमन पर मुख्यमंत्री द्वारा आश्रम परिसर में स्थापित श्रीयंत्र एवं यहां संचालित आध्यात्मिक गतिविधियों का अवलोकन किया गया। उन्होंने कहा कि यहाँ स्थापित दुनिया के सबसे बड़े श्रीयंत्र को देखकर एक विशेष आध्यात्मिक अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि बाबा कल्याणदास की साधना एवं तपस्या के कारण यह स्थान आज पूरे विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। साथ ही उन्होंने बाबा कल्याणदास द्वारा वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक चेतना के प्रसार हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आश्रम धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक साधना एवं सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है और चारधाम यात्रा में प्रतिवर्ष बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या प्रदेश में विकसित हो रही बेहतर व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं का परिणाम है।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, विधायक मोहन सिंह मेहरा, विधायक मनोज तिवारी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल, जिलाधिकारी अंशुल सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर घोड़के, मुख्य विकास अधिकारी रामजीशरण शर्मा सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

धामी कैबिनेट बैठक में यह रहे फैसले, जानिए…

1. परिवहन विभाग के अन्तर्गत उत्तराखण्ड मोटर यान (संशोधन) नियमावली 2026 को मंत्रीमण्डल को अनुमोदन।

मंत्रीमण्डल द्वारा परिवहन विभाग में पूर्व में सृजित पदों के सापेक्ष वर्दी निर्धारण को लेकर अनुमोदन प्रदान किया गया, जिसमें अब पुलिस विभाग के चालकों के अनुसार, प्रवर्तन चालकों का भी वर्दी का निर्धारण किया गया है।

2. कुम्भ मेला-2027 को लेकर हरिद्वार में होने वाले स्थाई एवं अस्थाई निर्माण कार्यों की स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए 01 करोड़ तक के कार्यों को मेलाधिकारी द्वारा तथा 05 करोड़ तक कार्यों को आयुक्त गढ़वाल मंडल द्वारा स्वीकृत किए जाने हेतु मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया। 05 करोड़ से अधिक के कार्यों में पूर्व की भांति शासन से स्वीकृति प्राप्त की जायेगी।

3. उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नियमावली 2026 में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी

उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नियमावली (संशोधन) 2026 के अन्तर्गत सैनिकों से संबंधित बढ़ते मामलों को देखते हुए अब जिला सैनिक कल्याण अधिकारी भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में पदेन सदस्य के रूप में नामित होंगे। इसके अतिरिक्त विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दी जाने वाली निःशुल्क सेवा के अन्तर्गत ऐसेड अटैक विक्टिंग को भी शामिल करने का मंत्रिमंडल द्वारा दिया गया अनुमोदन।

4. औद्योगिक विकास विभाग के अन्तर्गत उत्तराखंड उप खनिज परिहार नियमावली 2023 में संशोधन करते हुए पूर्व में खनिज पर निर्धारित रॉयल्टी की दर ₹7 प्रति कुंतल से बढ़ाकर ₹8 प्रति क्विंटल किए जाने का निर्णय मंत्रीमण्डल द्वारा लिया गया।

5. पूर्व में पारित आबकारी नीति के तहत 6 प्रतिशत वैट की दरों का निर्धारण किया गया था। आबकारी नीति के अनुसार ही वाणिज्य कर विभाग द्वारा अपनी नियमावली में 6 प्रतिशत वैट की दरों के संशोधन हेतु प्रस्ताव रखा गया था, जिस पर मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया।

6. परिवहन विभाग द्वारा 250 बस क्रय करने के प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल द्वारा दी गई अनुमति।

7. परिवहन विभाग को पूर्व में शासन द्वारा 100 बस खरीदने की अनुमति दी गई थी। वर्तमान समय में जीएसटी के रेट 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत होने के चलते अब परिवहन विभाग को 100 की जगह 109 बस क्रय करने की अनुमति मंत्रीमण्डल द्वारा दी गई।

8. वन विभाग के अन्तर्गत उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली, 2016 के संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी।

उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली, 2016 में संशोधन करते हुए वन दरोगा के पद के लिए शैक्षिक अर्हता को इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक किए जाने तथा वन दरोगा की आयु सीमा को 21 वर्ष 35 वर्ष करने एवं वन आरक्षी हेतु आयु सीमा 18 वर्ष से अधिकतम 25 वर्ष किए जाने का मंत्रीमंण्डल द्वारा अनुमति दी गई। इस संबंध में कार्मिक विभाग द्वारा पूर्व में पारित वर्दीधारी नियमावली के अनुबन्ध भी लागू रहेंगे।

9. अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अन्तर्गत अक्टूबर 2025 में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 2025 को अधिसूचित किया गया था, इसमें अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता एवं संस्थानों की शैक्षिक उत्कृष्टता को सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने एवं अन्य कार्यों की व्यवस्था इस अधिनियम में की गई थी। इस व्यवस्था में कक्षा 01 से कक्षा 12 तक संचालित अल्पसंख्यक संस्थाओं को विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर से संबद्धता लेने का प्रावधान किया गया था।

वर्तमान में राज्य में 452 मदरसे है, जिनमें लगभग 400 से अधिक मदरसो में कक्षा 01 से कक्षा 8 तक की ही पढ़ाई कराई जाती है। इन मदरसों के अनुरोध एवं उनकी सुविधा के लिए कक्षा 01 से 8 तक के संचालन करने वाले अल्पसंख्यक संस्थाओं की संबद्धता अब जिला स्तरीय शिक्षा समिति/शासन द्वारा निर्धारित सक्षम अधिकारी द्वारा निर्धारित किया जाएगा। कक्षा 09 से 12 तक के संचालन करने वाले अल्पसंख्यक संस्थाओं को विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर से संबद्धता लेनी होगी। इस व्यवस्था को लागू करने हेतु मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया गया। अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में अध्यादेश लाने का भी अनुमोदन मंत्रीमण्डल द्वारा प्रदान किया गया।

10. कार्मिक विभाग के अन्तर्गत विभिन्न विभागों में एकल संवर्ग में एक वर्ष के भीतर प्रतीक्षा सूची प्राप्त हो गई है तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाए और भविष्य हेतु एक स्पष्ट एसओपी बना ली जाए, ताकि सभी विभागों और आयोगों को इसके संबंध स्पष्टता सुनिश्चित हो सके, जिस पर मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमोदन प्रदान किया।

11. मा. सर्वाेच्च न्यायालय, नई दिल्ली में रिट याचिका रजनीश कुमार पांडे व अन्य बनाम भारत सरकार में 28 अक्टूबर, 2021 को निर्णय पारित हुआ था। जिसके क्रम में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 2022 में माध्यमिक स्तर हेतु विशेष शिक्षा शिक्षकों की शैक्षिक अर्हताएं तय की गई थी, उसी के अनुसार विशेष शिक्षा शिक्षक के पदों पर भर्ती हेतु उत्तराखंड विशेष शिक्षा शिक्षक नियमावली में शैक्षिक योग्यताएं रखी गई है, जिस पर मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदन दिया गया।

12. उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा शैक्षिक संवर्ग सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को कैबिनेट की मंजूरी।

उत्तराखण्ड संस्कृत शिक्षा शैक्षिक संवर्ग सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को मंत्रिमंडल द्वारा अनुमति दी गई। पूर्व में प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता, सहायक अध्यापक के कुल 62 पद सृजित किए गए थे, परंतु उनकी सेवा नियमावली प्रख्यापित नहीं की गई थी, जिसके कारण अध्यापकों के प्रमोशन आदि प्रभावित हो रहे थे।

13. लोक निर्माण विभाग के अर्न्तगत 2023 में 2010 पदों पर जेई की भर्ती हुई थी, जिसमें दिव्यांग श्रेणी के 07 पदों पर भर्ती की जानी थी, परंतु उस समय उस कैटेगरी के लोग नहीं मिल पाने की वजह से सामान्य श्रेणी से उनकी भर्ती की गई। मा. उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार दिव्यांगजनों के पदों को 2023 से ही रिक्त रखना था। क्यांेकि यह पद रिक्त नहीं रखे जा सके, जिन्हें 2023 से ही सृजित करने के प्रस्ताव को मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमति दी गई।

14. पूर्व में 01 जनवरी, 2026 को मंत्रिमंडल का निर्णयनुसार पेंशन हेतु अर्हकारी सेवा और विधिमान्य अधिनियम के संबंध में 16 जनवरी, 2026 को वर्कचार्ज कर्मियों को पेंशन दिये जाने एवं उनकी सेवा की गणना के संबंध में शासनादेश निर्गत किये गये थे। इसके उपरांत कई कार्मिक द्वारा मा. उच्च न्यायालय में गए थे और मा. उच्च न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश जारी किये गये। मा. उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश को मंत्रीमण्डल के संज्ञानार्थ प्रस्तुत किया गया।

15. उत्तराखंड अधिप्राप्ति नियमावली, 2025 के अंतर्गत सूचीबद्ध ‘डी‘ श्रेणी के ठेकेदारों हेतु निविदा सीमा को 01 करोड़ से बढ़ाकर डेढ़ करोड़ किये जाने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल द्वारा अनुमति दी गई।

16. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के क्रम में पूर्व में सरकारी कॉलेज हेतु मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना शुरू की गई थी। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा वर्तमान में 21 अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों है, जहां नियमित प्राचार्य है, ऐसे महाविद्यालयों में भी मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना को लागू करने के प्रस्ताव को मंत्रिमंडल द्वारा अनुमति दी गई।

17. वन विभाग द्वारा वन क्षेत्रों की सीमा पर प्रस्तावित मौन पालन की नीति को मंत्रीमण्डल द्वारा दी स्वीकृति।

प्रदेश में लोगों की आर्थिकी में वृद्धि करने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने एवं मानव और हाथी संघर्ष को कम करने तथा वन क्षेत्रों की सीमा में मौनपालन की सम्भावना को देखते हुए उत्तराखंड वन सीमांत मौनपालन मधुमक्खी आधारित आजीविका एवं मानव हाथी संघर्ष न्यूनीकरण नीति को मंत्रीमण्डल द्वारा अनुमति दी गई। राज्य का 70 प्रतिशत भूभाग वन अच्छादित है, जिससे वन क्षेत्रों की सीमा में मौनपालन की सम्भावना अत्याधिक है।

आवास विभाग के अधिसूचित क्षेत्र में पंचायतों का नक्शा पास करने का अधिकार खत्म, एक हफ्ते में प्रस्ताव मांगे

राज्य में निर्माण गतिविधियों को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में सचिवालय में अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में तय किया गया कि राज्य के नियोजित क्षेत्रों के बाहर स्थित परियोजनाओं के मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को उत्तराखण्ड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) की निर्माणाधीन वेबसाइट से जोड़ा जाएगा। इसके तहत मानचित्र स्वीकृति प्राधिकारियों को पोर्टल में शामिल किया जाएगा, जिससे स्वीकृति प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध हो सके। बैठक में रेरा सदस्य नरेश मठपाल, पंकज कुलश्रेष्ठ, एमडीडीए सचिव मोहन सिंह वर्निया, अपर जिलाधिकारी उत्तरकाशी मुक्ता मिश्रा, संयुक्त निदेशक पंचायती राज एमएस राणा, वरिष्ठ नगर एवं ग्राम नियोजक शशि मोहन श्रीवास्तव समेत विभिन्न प्राधिकरणों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। बैठक में रेरा से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और निर्माण स्वीकृति से संबंधित जटिलताओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क पर पुनर्विचार के संकेत
बैठक में 1 अगस्त 2025 के शासनादेश के तहत भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में बढ़ोतरी के मुद्दे पर विशेष चर्चा हुई। वर्तमान प्रावधान के अनुसार, आवासीय या पर्यटन उपयोग में परिवर्तन पर सर्किल रेट के बराबर शुल्क तथा व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तन पर 1.5 गुना शुल्क लिया जा रहा है अधिकारियों ने बताया कि बढ़े हुए शुल्क के कारण आम लोगों को मानचित्र स्वीकृति में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर आवास सचिव ने सभी विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने बोर्ड की बैठकों में इस विषय पर विचार कर एक सप्ताह के भीतर संशोधित प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराएं, ताकि जनहित में राहत देने पर निर्णय लिया जा सके।

आवास विभाग के अधिसूचित क्षेत्र में पंचायतों का नक्शा पास करने का अधिकार समाप्त
बैठक में एक बड़ा निर्णय लेते हुए स्पष्ट किया गया कि अब पंचायती राज संस्थाओं को अधिसूचित क्षेत्रों में नक्शा पास करने का अधिकार नहीं रहेगा। दरअसल, 2025 के संशोधित अधिनियम की धारा-59 के तहत पंचायती राज अधिनियम की धारा-106 को निरस्त कर दिया गया है। इसके चलते अब केवल विकास प्राधिकरण ही अधिसूचित क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इस निर्णय के बाद आवास विभाग ने पंचायती राज विभाग को निर्देशित किया कि वे तत्काल प्रभाव से एक सर्कुलर जारी कर सभी जिला पंचायतों को इस नई व्यवस्था की जानकारी दें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

रेरा के जरिए कॉलोनियों पर कड़ी निगरानी
बैठक में यह भी तय किया गया कि विकास प्राधिकरणों के अधिसूचित क्षेत्रों से बाहर भी यदि कहीं भूखंडों का उपविभाजन या कॉलोनी विकसित की जा रही है, तो वहां रेरा के माध्यम से सख्त निगरानी और विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्राधिकरणों और रेरा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अवैध कॉलोनियों और अनियोजित विकास पर रोक लगाई जा सके।

अवैध निर्माण रोकने के लिए बनेगा कॉमन ड्राफ्ट
राज्य में बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर भी बैठक में चिंता जताई गई। स्थगित क्षेत्रों में कार्रवाई के दौरान आ रही दिक्कतों को देखते हुए आवास सचिव ने नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को निर्देश दिए कि अवैध निर्माण रोकने के लिए एक कॉमन ड्राफ्ट तैयार किया जाए। यह ड्राफ्ट सभी प्राधिकरणों के लिए एक समान कानूनी ढांचा प्रदान करेगा, जिससे अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज और प्रभावी हो सकेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इस ड्राफ्ट को जल्द से जल्द शासन को उपलब्ध कराया जाए।

ऑनलाइन सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता
बैठक के अंत में आवास सचिव ने कहा कि रेरा पोर्टल के माध्यम से मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को ऑनलाइन करने से पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी। साथ ही आम लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाने और तय समयसीमा के भीतर कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस बैठक के फैसलों से साफ है कि राज्य सरकार निर्माण क्षेत्र में सख्ती के साथ-साथ व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। आने वाले दिनों में इसका सीधा असर आम लोगों और रियल एस्टेट सेक्टर दोनों पर देखने को मिलेगा।

मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को रेरा पोर्टल से जोड़ा जाएगा- डॉ. आर. राजेश कुमार
राज्य में निर्माण और विकास गतिविधियों को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने के लिए सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। आज की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को रेरा पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी बन सके। इससे आम नागरिकों को अनावश्यक जटिलताओं से राहत मिलेगी और समयबद्ध स्वीकृति सुनिश्चित होगी। भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क को लेकर प्राप्त फीडबैक के आधार पर सभी विकास प्राधिकरणों से प्रस्ताव मांगे गए हैं, ताकि जनमानस को राहत देने के विकल्पों पर विचार किया जा सके। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अधिसूचित क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति का अधिकार केवल प्राधिकरणों के पास होगा, जिससे एकरूपता बनी रहे। अवैध निर्माण और अनियमित कॉलोनियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए रेरा और प्राधिकरणों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा। हमारा उद्देश्य है कि विकास योजनाएं नियमों के अनुरूप हों और आम जनता को सरल, पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था का लाभ मिल सके।