पर्वतारोहियों की तलाश को रवाना हुई एसडीआरएफ की टीम

मुनस्यारी (पिथौरागढ़) से नंदा देवी ईस्ट 7434 मीटर की ऊंची चोटी फतह करने गए छह विदेशी पर्वतारोहियों सहित एक भारतीय लापता हो गया हैं। यह दल नंदा देवी फतह को 13 मई को रवाना हुआ था। वहीं, लापता होने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और तहसील प्रशासन ने राजस्व दल और एसडीआरएफ की टीम को मौके के लिए रवाना कर दिया है।

मैसर्स हिमालयन रन एवं ट्रेक लिमिटेड नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित इस पर्वतारोहण अभियान में ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका और आस्ट्रेलिया के सात पर्वतारोही शामिल हैं। जिसमें टीम लीटर इंग्लैंड के मार्टिन मैक्रन हैं। दल में जॉन मैक्लॉरेन, रूपर्ट ह्रवेल, रिचर्ड पायने निवासी यूके, रूथ मैक्क्रेन निवासी आस्ट्रेलिया, एंथोनी सूडेकम, रोनाल्ट बरमेल निवासी यूएसए और चेतन पांडेय भारतीय पर्वतारोहण संस्थान के लाइजन ऑफिसर शामिल हैं। दल 13 मई को मुनस्यारी से रवाना हुआ। दल को शनिवार एक जून को मुनस्यारी लौटना था।

जानकारी के मुताबिक दल के सदस्य जब 6000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर थे तब से लापता हैं। जिसकी सूचना जिला प्रशासन को दे दी गई है। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और मुनस्यारी तहसील प्रशासन सक्रिय हो गए हैं। जिलाधिकारी डॉ. वीके जोगदंडे ने मुनस्यारी तहसील प्रशासन को निर्देश जारी कर दिए हैं। एसडीएम मुनस्यारी आरसी गौतम ने राजस्व दल व आपदा प्रबंधन दल को मौके पर जाने के लिए भेज दिया है।

ऋषिकेश पार्षद रीता गुप्ता का जाति प्रमाणपत्र निरस्त

नगर निगम ऋषिकेश की महिला पार्षद रीता गुप्ता का जाति प्रमाणपत्र जांच के बाद निरस्त कर दिया गया है। इसके बाद शहरी विकास विभाग ने वार्ड नंबर-3 से विजयी रहीं पार्षद रीता गुप्ता का चयन निरस्त करने की घोषणा कर दी है।

शहरी विकास विभाग के सचिव शैलेश बगौली की ओर से जारी पत्र के अनुसार नगर निगम ऋषिकेश के वार्ड नंबर-3 दुर्गा मंदिर में आरक्षित श्रेणी (पिछड़ी जाति महिला) से विजयी प्रत्याशी रीना गुप्ता पत्नी प्रवीण गुप्ता का पिछड़ी जाति प्रमाणपत्र निरस्त हो गया है। इस आधार पर रीना गुप्ता का पार्षद पद रिक्त घोषित किया जाता है। बता दें, चुनाव के दौरान भी जाति प्रमाणपत्र पर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। मामला विचाराधीन होनेे के कारण पार्षद पद की दावेदारी पर रोक नहीं लगाई गई थी।

सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी देहरादून सुशील जोशी के अनुसार किसी भी स्थिति में पद रिक्त होने के बाद उपचुनाव का प्राविधान है। विशेष परिस्थितियों में कोर्ट के आदेश पर चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी को विजेता घोषित किया जा सकता है। इस मामले में मुख्य नगर आयुक्त चतर सिंह चौहान का कहना है कि आदेश की प्रति अभी प्राप्त नहीं हुई है। आदेश मिलने के बाद नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।

बीमा सुविधा की जानकारी न होने पर वंचित रह जाते है पर्यटक

ऋषिकेश पूरे देश सहित विदेशों में भी राफ्टिंग के लिए प्रसिद्ध है। यहां प्रत्येक वर्ष कोने-कोने से लोग राफ्टिंग का लुत्फ उठाने के लिए पहुंचते है। मगर, क्या आप जानते है राफ्टिंग के दौरान कुछ ऐसी जानकारी भी है जो आपको बताई नहीं जाती है। आइए हम आपको बताते है क्या है वह जानकारी

ऋषिकेश में करीब 480 राफ्टों का संचालन होता है। प्रत्येक राफ्ट से 8496 रुपये सालाना बीमा पॉलिसी के रूप में जमा कराया जाता है। इस हिसाब से सालाना 40 लाख 78 हजार की बीमा राशि यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को लगातार अदा की जाती है। दिलचस्प यह है कि पर्यटकों की सुरक्षा के नाम पर जमा हो रही इस राशि का फायदा बीत 10 साल में किसी यात्री को नहीं मिल पाया है।

राफ्टिंग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का बीमा दो लाख रुपये निर्धारित होता है। अमूमन राफ्टिंग करने आए अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती। पॉलिसी के अनुसार साल भर में दो राफ्टों में 20 लोगों का चालीस लाख रुपये का बीमा होता है। पर्यटन विभाग के नियमों के अनुसार एक राफ्ट में 8 पर्यटक, एक गाइड और एक हेल्पर राफ्टिंग कर सकते हैं। एक राफ्ट और 10 लोगों की वार्षिक बीमा रकम 8496 रुपये राफ्टिंग कंपनियों की ओर से जमा कराई जाती है। राफ्टिंग के दौरान हादसे में मृत्यु हो जाने पर दो लाख रुपये मृतक के नॉमिनी को अदा करने का प्रावधान है।

तीन साल में तीन मौतें
पुलिस के अनुसार बीते तीन साल में राफ्टिंग के दौरान तीन मौतें हो चुकी हैं। इनमें सभी बाहरी प्रदेशों के पर्यटक थे। अक्टूबर 2017 में चेन्नई की सुभाषनी, दिसंबर 2018 में सुल्तानपुर यूपी से ऐश्वर्य प्रताप सिंह और बीते फरवरी माह में एक 60 वर्षीय महिला की राफ्ट पलटने से मौत हो गई थी। जागरुकता के अभाव में किसी नॉमिनी ने बीमा की रकम पाने के लिए क्लेम ही नहीं किया।

वहीं, गंगा नदी राफ्टिंग रोटेशन समिति के अध्यक्ष दिनेश भट्ट का कहना है कि गंगा में राफ्टिंग के दौरान सुरक्षा हमारा पहला कर्तव्य है। पर्यटकों को राफ्टिंग में भेजने से पहले ही राफ्टिंग कंपनियों के द्वारा मौखिक रूप से बीमा की जानकारी दी जाती है। जबकि यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के प्रबंधक विवेक पुरी कहते है कि बीते 10 वर्षों में राफ्टिंग के दौरान हुई दुर्घटना के करीब चार मामले आए हैं। राफ्टिंग के दौरान केवल मृत्यु होने पर ही दो लाख रुपये मृतक के नॉमिनी को दी जाती है। इसमें राफ्टिंग कंपनी के माध्यम से बीमा की रकम के लिए आवेदन करना होता है।

कंपनी जीडीसीएल के निर्माण कार्य पर नमामि गंगे असंतुष्ट, ठोका जुर्माना

लक्कड़घाट में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए नगर के मार्गों पर नमामि गंगे का सीवर लाइन बिछाने का काम चल रहा हैं। इस कार्य को दिल्ली की जीडीसीएल कंपनी कर रही है। कंपनी को दिए समय के मुताबिक काम अभी तक 60 फीसदी हो जाना चाहिए था मगर, अभी तक 42 प्रतिशत ही कार्य पूरा हो सका हैं। वहीं कंपनी के कार्य में कई बार शिकायतें तथा दुर्घटना भी हो रही है। इसी को देखते हुए नमामि गंगे ने कंपनी को एक लाख रूपए का जुर्माना लगाया हैं। वहीं अन्य जुर्माने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया है।

नमामि गंगे के प्रोजेक्ट मैनेजर संदीप कश्यप ने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के तहत कुल 72 करोड़ रुपये की लागत से लक्कड़घाट पर एक 26 एमएलडी का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, तीन पंपिंग स्टेशन (मायाकुंड, बापूग्राम, सर्वहारानगर) तथा करीब 15 किलोमीटर मार्ग पर भूमिगत सीवर लाइन बिछाने का काम चल रहा है। इस पूरे कार्य का जिम्मा दिल्ली की कंपनी जीडीसीएल को सौंपा गया है। उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से निर्माण कार्य में आए दिन लापरवाही के मामले सामने आ रहे है। इसी के चलते 24 अप्रैल को कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा उच्चाधिकारियों को और जुर्माना लगाने के लिए पत्राचार किया गया है।

लोनिवि, निगम, एनएच को दिया मुआवजा
प्रोजेक्ट मैनेजर (नमामि गंगे) संदीप कश्यप ने बताया कि भूमिगत सीवर लाइन बिछाने के कार्य के लिए जिस विभाग की सड़क को उखाड़ा जा रहा है, उसे पिछले वर्ष ही धनराशि उपलब्ध करा दी गई है। इसमें लोक निर्माण विभाग को दो करोड़ 31 लाख, नेशनल हाईवे को 94 लाख, नगर निगम को 87 लाख रुपये दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि भूमिगत लाइन बिछाने का कार्य पूर्ण होने पर इसका टेस्टिंग कराया जाएगा। इस दौरान कहीं से भी लीकेज की समस्या आती है, तो दोबारा उसे दुरुस्त किया जाएगा। इसके बाद ही सड़क निर्माण हो सकेगा।

अग्नि सुरक्षा उपकरणों के चल रहे सात संस्थानों को विभाग ने थमाया नोटिस

गुजरात के सूरत में कोचिंग संस्थान में आग लगने से 20 छात्रों की मौत हो गई। इस घटना ने देशभर में संचालित कोचिंग संस्थानों केंद्र बिंदु पर ला दिया है। अब ऋषिकेश का अग्निशमन विभाग ने इस पर काम करना शुरू कर दिया। अग्नि शमन अधिकारी अर्जुन सिंह रांगड़ ने मंगलवार को यहां के कुल सात कोचिंग सेंटरों को नोटिस थमाए है।

उन्होंने बताया कि बिना अग्नि सुरक्षा के संचालित हो रहे कोचिंग संस्थानों की सूची बनानी शुरू कर दी है। मंगलवार को विभाग की ओर से रेलवे रोड स्थित असेन्डर्स कोचिंग सेंटर, तिलक मार्ग जौहर कांपलेक्स स्थित गुरुकुल आईएएस, विक्रमशिला, आईटी कंप्यूटर एजुकेशन, अंबेडकर चौक स्थित सदानी इंस्टीट्यूट, देहरादून रोड स्थित कोटा क्लासेस को नोटिस थमाया है। एफएसओ ने इन कोचिंग सेंटर को आग बुझाने के लिए कार्बन डाई आक्साइड से भरे सिलेंडर न रखने, फायर अलार्म न लगाने, प्रवेश मार्ग पर झूलते तारों तथा प्रवेश और निकासी मार्ग अलग-अलग न होने के लिए नोटिस दिया है।

दो जून को लगेगी विशेष प्रयोगशाला
अग्निशमन अधिकारी अर्जुन सिंह रांगड़ ने बताया कि दो जून दिन रविवार को शैल विहार स्थित फायर स्टेशन पर कोचिंग संस्थानों के लिए विशेष प्रयोगशाला आयोजित की गई है। इसमें नगर के सभी कोचिंग संस्थानों को अग्नि सुरक्षा से संबंधित उपकरणों की जानकारी दी जाएगी। इस दौरान कोचिंग संचालकों को उपकरणों को चलाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

आचार्य बालकृष्ण को मिला इंफेल्यिुंस प्यूपिल इन हेल्थ केयर अवॉर्ड

आचार्य बालकृष्ण को स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे उनके योगदान को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था यूएनएसडीजी ने उन्हें इंफेल्यिुंस प्यूपिल इन हेल्थ केयर अवॉर्ड से सम्मानित किया है। स्विटजरलैंड में आयोजित शिखर समिट में 50 देशों से लगभग 500 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था।

जेनेवा में हुए आयोजन में आचार्य बालकृष्ण ने संबोधन संस्कृत भाषा में दिया, जिसे अन्य भाषाओं में अनुवाद किया गया। आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि संस्कृत देव भाषा होने के साथ-साथ वैज्ञानिक भाषा भी है, जिसका अपना अलग महत्व है और अन्य किसी भाषा में उसकी कोई बराबरी नहीं।

विश्व हेल्थ समिट जेनेवा, स्विटजरलैंड में इंफेल्यिुंस प्यूपिल इन हेल्थ केयर अवॉर्ड से आयुर्वेद के आचार्य बालकृष्ण को सम्मानित किया गया। जेनेवा में केन्या के राष्ट्रपति उहरू केन्याता ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्व के 10 सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व की श्रेणी में स्थान देकर प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया।

दुनिया के 5 उन शीर्ष व्यक्तियों को यह सम्मान दिया गया है, जिन्होंने मानवता के स्वास्थ्य स्तर और उसकी गुणवत्ता में सुधार करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आचार्य बालकृष्ण के अलावा यह सम्मान पाने वाले चार शीर्ष लोगों में संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) की कार्यकारी निदेशक हेनरिटा एच फोर, विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर डॉक्टर टेड्रोस एधानोम घेब्रेयेसस, चीन के जाने माने वैकल्पिक चिकित्सा विशेषज्ञ एबे ली, प्रोमेडिका के प्रेसीडेंट और सीईओ रेंडी ओस्त्रा शामिल हैं

बिजली की चोरी करते सात परिवार पकड़े

ऊर्जा निगम की विजिलेंस टीम ने बिजली चोरी पकड़ने के लिए बुधवार को नगर क्षेत्र में अभियान चलाया। इस दौरान सात घरों में बिजली चोरी पकड़ी गई। अधिकारियों ने एफआईआर दर्ज कराने के बाद जुर्माने के आकलन के लिए रिपोर्ट संभागीय कार्यालय भेजी है।

सहायक अभियंता विजिलेंस (सर्तकता) हनुमान सिंह रावत के नेतृत्व में टीम ने बुधवार को तीर्थनगरी में अभियान चलाया। इस दौरान वाल्मीकिनगर, नई जाटव बस्ती और अंबेडकर नगर के 10 घरों में औचक निरीक्षण किया गया। इनमें से सात घरों में बिजली चोरी पकड़ी गई।

सहायक अभियंता विजिलेंस सर्तकता हनुमान सिंह रावत ने बताया कि छह माह पूर्व भी वाल्मीकिनगर और नई जाटव बस्ती में बिजली चोरी पकड़ी गई थी। उस वक्त 11 लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई थी। इनमें से अधिकांश ने जुर्माना अदा कर दिया है। ऊर्जा विभाग के अधिशासी अभियंता डीपी सिंह ने बताया कि कार्रवाई के बावजूद बिजली चोरी से लोग बाज नहीं आ रहे हैं। इस संदर्भ में कड़ी कार्रवाई की रणनीति तैयार की जा रही है।

वेश्यावृत्ति मामले में मां बेटे को कोर्ट ने सुनाई 10-10 साल का कठोर कारावास

वेश्यावृत्ति मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मां और बेटे को 10-10 साल की सजा सुनाई है। इसके अलावा अदालत ने अनैतिक देह व्यापार में भी दोनों को पांच-पांच साल की भी सजा सुनाई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

अभियोजन के अनुसार 28 मार्च 2018 को कोतवाली पुलिस ने देहरादून रोड पर एक होटल के पास स्विफ्ट कार रोकी थी। कार से मां बेटा सहित दो लड़कियों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में मूल रूप से पश्चिम बंगाल, हाल निवासी दिल्ली की दो लड़कियों ने मां-बेटे पर वेश्यावृत्ति कराने का आरोप लगाया था। इस मामले में दोनों लड़कियों को सरकारी गवाह बनाकर मां और बेटे को गिरफ्तार किया गया था। मंगलवार को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मनीष मिश्रा की अदालत ने ऋषभ पुत्र स्व. आदर्श कुमार और उसकी मां मंजू निवासी 315 रामनगर लक्खीबाग थाना कोतवाली नगर देहरादून को नौकरी का झांसा देकर वेश्यावृत्ति कराने तथा अनैतिक देह व्यापार का दोषी माना था।

बुधवार को अदालत ने सजा पर अपना फैसला सुनाते हुए मां बेटे को वेश्यावृत्ति कराने में 10-10 साल का कठोर कारावास तथा 10-10 हजार रुपए का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। इसके अलावा अदालत ने अनैतिक देह व्यापार में दोनों को पांच-पांच साल का कठोर कारावास सुनाया। साथ ही दो-दो हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। यह सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

हाईकोर्टः सरकार चाहे तो खेल कोटे में दे सकती है आरक्षण

उच्च न्यायालय नैनीताल की तीन सदस्यीय पीठ ने सरकारी सेवा में खेल कोटे को निरस्त करने के मामले में फैसला सुनाते हुए सरकार को छूट दी है कि यदि सरकार चाहे तो सभी मापदंडो का अनुपालन करते हुए खेल कोटे में आरक्षण दे सकती है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन, न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने मंगलवार को यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

जानकारी के मुताबिक पिथौरागढ़ निवासी महेश सिंह नेगी व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड के सरकारी विभागों में नेशनल, इंटरनेशनल प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर चुके खिलाडियों का राजकीय सेवाओं में कोटा निरस्त किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से आग्रह किया था कि 20 दिसंबर 2011 को जारी विज्ञप्ति के तहत कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर उसे नियुक्ति दिलाई जाए।

तीन जजों की बैंच गठित की गई थी
उत्तराखंड टेक्निकल बोर्ड आफ एजुकेशन रूड़की के सचिव ने 20 दिसंबर 2011 को विज्ञापन जारी कर उत्तराखंड ग्रुप सी भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन मांगे थे। याचिकाकर्ता ने खेल कोटे में सामान्य श्रेणी में आवेदन किया था। याची को प्रवेश पत्र जारी कर लिखित परीक्षा में 28 दिसंबर 2012 को बुलाया गया। परीक्षा पास करने के बाद उसे 20 अप्रैल 2013 को टंकण परीक्षा के लिए बुलाया गया।

30 जुलाई 2013 को अंतिम परिणाम घोषित किया गया जिसमें याची का नाम 40वें नंबर पर था, लेकिन उन्हें नियुक्ति नहीं मिली। बाद में आरटीआई के तहत मिली जानकारी में पता लगा कि 14 अगस्त 2013 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने क्षैतिज आरक्षण में खेल कोटे को असंवैधानिक घोषित किया था। इसी तरह के अन्य मामले भी हाईकोर्ट के सामने पहुंचे थे। अलग अलग पीठों की राय अलग-अलग होने पर ही तीन जजों की बैंच गठित की गई।

एम्स में स्थानीयता के हिसाब से आरक्षण का प्रावधान नहींः स्वास्थ्य मंत्रालय

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में स्थानीय लोगों को नौकरियों में 70 प्रतिशत आरक्षण की दलील को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने खारिज कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स प्रशासन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया है कि भारत सरकार के अधीन संचालित होने वाले ऑटोनामस संस्थानों में स्थानीयता के हिसाब से आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह नियम एम्स ऋषिकेश पर भी लागू होता है। करीब तीन महीने पहले आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारियों को एम्स से निकाल दिया गया था। इसके बाद करीब 45 निष्कासित कर्मियों ने क्रमिक धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया।

इस मामले में काफी सियासी दखल भी सामने आई। एम्स प्रशासन ने निष्कासन के पीछे तर्क दिया कि अनुबंध के मुताबिक सभी कर्मचारियों ने लिखित सहमति दी थी कि स्थायी नियुक्ति होने के बाद अस्थाई पद पर नियुक्त कर्मियों को निकाला जा सकेगा।

उक्त अनुबंधों के अनुसार ही कर्मचारियों को संस्थान से कार्यमुक्त किया गया। इसी क्रम में स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने एम्स की नौकरियों में 70 फीसदी स्थानीय लोगों को आरक्षण देने का मुद्दा उठाया। इस मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी ज्ञापन सौंपा गया था।

एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने स्पष्ट किया था कि नियमों के विपरीत जाकर वे नौकरियों में आरक्षण की व्यवस्था नहीं दे सकते हैं। निष्कासित कर्मचारियों के समर्थन में मेयर अनिता ममगाईं और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद्र अग्रवाल ने भी एम्स निदेशक से वार्ता की थी।

इसी क्रम में सहमति बनी कि एम्स की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजकर स्थानीयता के आधार पर आरक्षण जारी करने की अनुमति मांगी जाएगी। उक्त प्रस्ताव पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स को स्पष्ट किया है कि डिपार्टमेंट आफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) की गाइडलाइन के अनुसार क्षेत्रीय या राज्य के आधार पर ऑटोनॉमस संस्थानों में आरक्षण की कोई नियमावली नहीं है।