105 किमी सफर तय कर लिया गंगा स्वच्छता का संकल्प

ऑस्ट्रिया के डांस टीचर राइन हार्ड कोप उर्फ रियो ने गंगा की स्वच्छता के लिए एक साहसिक पहल की है। उन्होंने श्रीनगर गढ़वाल से ऋषिकेश तक गंगा में 105 किलोमीटर का सफर तैराक बनकर पूरा किया। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि ऐसा करने वाले वह पहले व्यक्ति हैं। जिसे वह गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए भेजेंगे।

46 वर्षीय राइन हार्ड कोप उर्फ रियो ने इसी महीने की 14 तारीख को श्रीनगर गढ़वाल से अपने अभियान की शुरुआत की। 105 किलोमीटर की यात्रा उन्होंने सात पड़ावों में पूरी की। पहला पड़ाव बागवान, दूसरा देवप्रयाग, तीसरा व्यास घाट, चौथा कौड़ियाला, पांचवां पाथो कैंप व्यासी, छठा गूलर और सातवां ऋषिकेश रहा। सोमवार को आखिरी पड़ाव ऋषिकेश पहुंचने पर रियो ने मीडिया से अपने अभियान का मकसद और अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा, गंगा स्वच्छता का संदेश देने के लिए उन्होंने ऐसा किया। यह अभियान उनके लिए यादगार रहा।

अब हरिद्वार से इलाहाबाद
रियो के इस अभियान को आयोजित करने वाले व्हाइटर वर्ल्ड एक्सपीडीशन के संचालक भीम सिंह चौहान ने बताया कि रियो ने बड़ी कुशलता के साथ इस चुनौती को पूरा किया। आने वाले समय में रियो ने हरिद्वार से इलाहबाद तक गंगा में तैरकर जाने की योजना बनाई है। रियो के अभियान को उनके मित्र ऑस्ट्रिया निवासी मार्क्स ने शूट किया है।

पालिकाध्यक्ष ने किया स्वागत
सोमवार को ऋषिकेश में अभियान के समापन अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष मुनिकीरेती रोशन रतूड़ी ने रियो का स्वागत किया। कहा, साहसिक पर्यटन उत्तराखंड की पहचान है। रियो ने जिस तरह से इस अभियान को पूरा कर गंगा की निर्मलता और स्वास्थ्य का संदेश दिया वह सराहनीय है।

रात्रि मनाही के बावजूद अंधेरे में भी गंगा में हो रही राफ्टिंग

रोक के बावजूद रात के वक्त धड़ल्ले से राफ्टिंग हो रही है। शनिवार देर रात भी मुनिकीरेती पुलिस ने एक राफ्टिंग संचालक पर कार्रवाई कर इस मामले में चालान ठोक दिया। नीमबीच पर हुई छापेमारी की इस कार्रवाई में पुलिस राफ्ट को पकड़कर थाने ले आई। पांच हजार रुपये का चालान काटने के साथ ही राफ्टिंग संचालक को दोबारा रात के समय गंगा में राफ्ट का संचालन न करने की हिदायत दी गई है।

पुलिस की इस कार्रवाई से अलबत्ता राफ्टिंग व्यवसायियों में रोष है। रविवार को इस संबंध में राफ्टिंग संचालकों ने आपस में बैठक की। राफ्टिंग रोटेशन अध्यक्ष दिनेश भट्ट ने थाना प्रभारी मुनिकीरेती आरके सकलानी से वार्ता भी की। दिनेश भट्ट ने मुनिकीरेती क्षेत्र में वन-वे सिस्टम लागू करने की मांग की। हालांकि थाना प्रभारी आरके सकलानी ने मांगों को नाजायज ठहराया। उनका कहना था कि दुर्घटना के मद्देनजर रात में गंगा में राफ्ट चलाए जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

नियमों का सालों से पालन नहीं
कई साल से गंगा में नियमों को ताक पर रखकर राफ्टिंग हो रही है। पर्यटकों की सुरक्षा की दृष्टि से राफ्टिंग के लिए कई नियम बनाए गए हैं। इनमें से क्याक का संचालन, राफ्टिंग शुरू करने वाले स्थान पर ही राफ्टों में हवा भरना, वाहनों में राफ्टों का ओवरलोड न होना, रात्रि में गंगा में राफ्टों के संचालन पर प्रतिबंध जैसे कई मानक हैं, जिनका आज तक पालन नहीं हुआ।

वन-वे व्यवस्था हो
मुनिकीरेती में वन-वे व्यवस्था लागू हो चाहिए। वर्तमान में पुलिस मधुबन बस पार्किंग और खारास्रोत के रोटेशन काउंटर से चल रही राफ्टों को विठ्ठल आश्रम वाले रास्ते से भेज रही है। राफ्टिंग वाले वाहन इस रूट में जाम में फंस जाते हैं। इससे पर्यटकों और राफ्टिंग व्यवसायियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जाम में फंसने के कारण एक ही पर्यटक को राफ्टिंग करने में सुबह से शाम लग रही है। मधुबन बस पार्किंग और खारास्रोत के राफ्टिंग व्यवसायियों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। बीते शनिवार को भी पकड़ी गई राफ्ट जाम में फंस गई थी। इससे वह देरी से एंडिंग प्वांईंट पहुंच पाई।
दिनेश भट्ट, गंगा नदी राफ्टिंग रोटेशन अध्यक्ष

रोटेशन अध्यक्ष की मांग नाजायज
राफ्टिंग रोटेशन अध्यक्ष की मांग नाजायज है। गंगा में दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए रात के समय चलने वाली राफ्टों का चालान किया जाता है। ट्रैफिक सुविधाओं के अनुसार राफ्टिंग वाहनों को बाईपास मार्ग से भेजा जाता है। ट्रैफिक नियंत्रण और गंगा में दुर्घटनाओं को रोकना पुलिस की प्राथमिकता है।
आरके सकलानी, थाना प्रभारी मुनिकीरेती

कोर्ट ने पति को पाया दोषसिद्ध, सुनाई आठ साल की सजा

अपनी पत्नी से जबरन वेश्यावृत्ति कराने तथा दहेज के लिए उत्पीड़न करने का दोष साबित होने पर आरोपी पति को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मनीष मिश्रा की अदालत ने आठ साल की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को वेश्यावृत्ति कराने पर सात साल, जबकि दहेज के लिए उत्पीड़न करने पर एक साल की सजा सुनाई है।

रायवाला निवासी एक महिला ने थाना रायवाला में 12 मार्च 2011 को तहरीर देकर अपने पति के खिलाफ जबरन वेश्यावृत्ति कराने, दहेज के लिए उत्पीड़न करने, मारपीट, गाली गलौच, जान से मारने की धमकी देने तथा कमरे में बंधक बनाकर रखने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था।

पीड़ित महिला ने बताया था कि 25 अप्रैल 2010 को उसकी शादी सिविल लाइंस, लुधियाना पंजाब के रहने वाले व्यक्ति से हुई थी। शादी के बाद से ही उसका पति और ससुराल पक्ष के लोग उससे रुपयों की मांग करने लगे। इसके बाद दहेज न लाने पर गाली गलौच, मारपीट, जान से मारने की धमकी और कमरे में बंधक बनाकर रखने लगे। महिला ने पति पर जबरन वेश्यावृत्ति कराने का भी आरोप लगाया था। बृहस्पतिवार को न्यायाधीश मनीष मिश्रा ने आरोपी को पत्नी से जबरन वेश्यावृत्ति कराने व दहेज उत्पीड़न का दोषी पाया।

शुक्रवार दोपहर में न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए दोषी को वेश्यावृत्ति कराने पर सात साल का कठोर कारावास तथा 10 हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया। अर्थदंड न देने की अवस्था में दोषी को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। साथ ही न्यायालय ने दहेज के लिए उत्पीड़न करने में एक वर्ष की सजा और पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न अदा करने पर दोषी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

पहलः पुराने कूड़े को रिसाइकिल कर खाद बना रही नगर पालिका मुनिकीरेती

नगर पालिका मुनिकीरेती पुराने कचरे को रिसाइकिल कर जैविक खाद बनाने में जुट गई है। शुक्रवार से पालिका ने इस पर काम करना भी शुरू कर दिया है। विगत कई वर्षों से नगर पालिका मुनिकीरेती क्षेत्र का कूड़ा खारास्रोत बाईपास पुल के समीप डंप किया जा रहा है। यहां अभी तक लगभग 8500 मिट्रिक टन कूड़ा जमा हो चुका है, जोकि वर्तमान में सड़ी गली अवस्था में है। अब पालिका इस कूड़े को रिसाइकिल करने में जुट गई है। इसके लिए शुक्रवार से यहां दो ट्रॉमेल और दो कन्वेयर मशीन लगाई गई हैं।

ट्रॉमेल में पुराने कूड़े को छाना जा रहा है, जबकि कन्वेयर के जरिये जैविक खाद तैयार की जा रही है। इस जैविक खाद को दो रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाएगा। इसके अलावा पुराने कचरे से मिली प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल हैंगिंग गार्डन के रूप में किया जाएगा। मशीन से कूड़ा छनने के बाद ऐसा कूड़ा जिसे रिसाइकिल नहीं किया जा सकता है, उसे हरिद्वार भेजा जाएगा। अधिशासी अधिकारी बद्री प्रसाद भट्ट ने बताया कि अभी तक नए कूड़े को ही रिसाइकिल किया जा रहा था, लेकिन शुक्रवार से पुराने कूड़े को भी रिसाइकिल करना शुरू कर दिया गया है।

कूड़ा रिसाइकिल के लिए नगर पालिका मुनिकीरेती ने जो दो ट्रॉमेल और दो कन्वेयर मशीन लगाई हैं, उनकी कुल कीमत 6 लाख 68 हजार रुपये है। ईओ बद्री प्रसाद भट्ट ने बताया कि 1 लाख 78 हजार रुपये से दो ट्रॉमेल जबकि चार लाख 90 हजार से दो कन्वेयर मशीनें खरीदी गई हैं। उन्होंने बताया कि सभी मशीनों को मंत्री सुबोध उनियाल ने विधायक निधि से उपलब्ध कराया है।

हेमकुंड साहिब यात्रा को पॉलिथीन मुक्त बनाने की गुरूद्वारा ट्रस्ट ने की पहल

माता वैष्णो देवी की तरह ही श्रीहेमकुंड साहिब में भी श्रद्धालुओं को डिग्रेडेबल थैले में प्रसाद दिया जाएगा। यात्रा को पॉलिथीन मुक्त बनाने के लिए गुरुद्वारा श्रीहेमकुंड मैनेजमेंट ट्रस्ट इस साल से यह पहल करने जा रहा है। इसके लिए उसने पूरी तैयारी भी कर ली है। यह थैला दिखने में प्लास्टिक की तरह ही होगा, लेकिन जमीन पर पड़ा रहने पर यह 180 दिन यानी छह माह में खाद में बदल जाएगा।

यह पूरी तरह सल्फर और गंध मुक्त होगा। अभी तक होता यह है कि रोक के बावजूद यात्रा पर पहुंचने वाले श्रद्धालु पॉलिथीन का उपयोग धड़ल्ले से करते हैं। इस पर रोक के लिए यह पहल की जा रही है। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष सरदार नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा के मुताबिक यात्रियों से पॉलिथीन का कोई भी सामान यात्रा मार्ग पर उपयोग न करने की विशेष अपील की गई है। ट्रस्ट का मानना है कि उसकी पहल से श्रद्धालु यहां की सकारात्मक छवि लेकर अपने यहां लौटेंगे। पिछले वर्ष श्री हेमकुंड साहिब के लिए करीब ढाई लाख श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे थे।

पहला जत्था 30 मई को होगा रवाना
चारधाम यात्रा की तरह श्रीहेमकुंड यात्रा को भी संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति की संचालित करती है। इस वर्ष काफी बर्फवारी होने के चलते एक जून से श्री हेमकुंड साहिब के कपाट खुलेंगे। इसके लिए पहला जत्था 30 मई को रवाना होगा। रोटेशन के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी बृज भानु प्रकाश गिरी ने बताया कि इस वर्ष एक जून से हर रोज गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट को चार बसें प्रदान की जाएंगी। डिमांड बढ़ने पर यह संख्या बढ़ाई भी जा सकती है।

इन देेशों से पहुंचेंगे श्रद्धालु
श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए भारत के सभी प्रांतों के श्रद्धालुओं के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, कनाडा, बैंककॉक, न्यूजीलैंड, इटली, बेल्जियम, पाकिस्तान सहित कई देशों के श्रद्धालु दर्शन को हर वर्ष पहुंचते हैं।

कैंसर पीड़ितों के लिए कटा डाले बाल, विग बनाने के आएंगे काम

रामनगर (रुड़की) की सोनम भटेजा ने कैंसर पीड़ितों के लिए अपने बाल कटवा डाले। यह वहीं बाल है जिनसे उन्हें बेपनां प्यार था। इतना ही नहीं बचपन से अभी तक कैंची तक चलने नहीं दी। अब उनके यह बाल कैंसर पीड़ितों की विग बनाने के काम आएंगे।

वैसे तो सोनम भटेजा गृहणी हैं, उन्होंने अंग्रेजी में एमए किया है। ऐसे बच्चें जो फीस देने में अक्षम है, वह उन्हें निशुल्क ट्यूशन पढ़ाती हैं, उनके पति कारोबारी हैं। सोनम के अनुसार उन्हें अपने बालों से बेहद प्यार है और लंबे रखने का शौक भी। इसलिए उन्होंने बचपन में कभी बालों पर कैंची नहीं लगने दी। उनके बाल कमर से भी नीचे थे। लेकिन, एक दिन तब उनकी धारणा बदल गई, जब उन्होंने इंटरनेट पर कैंसर पीड़ितों के बारे में पढ़ा। उसमें मुंबई के मदद ट्रस्ट का भी उल्लेख था। साइड में बताया गया था कि कैंसर पीड़ितों का उपचार शुरू होने पर उनके बाल झड़ जाते हैं। यह कीमोथेरेपी का साइड इफेक्ट है। कैंसर पीड़ित महिलाएं बाल झड़ जाने से बेहद कुंठित महसूस करती हैं। क्योंकि उनका सिर पूरी तरह गंजा हो जाता है।

साइट पर यह भी बताया गया था कि इन कैंसर पीड़ित महिलाओं के लिए मदद ट्रस्ट विग तैयार करता है। जो कि केवल असली बालों से ही बनता है। इसके लिए 12-13 इंच लंबे बाल होना जरूरी है। एक विग बनाने में तीन से चार महिलाओं के बालों की जरूरत होती है। सोनम बताती हैं कि इसे पढ़कर उन्होंने फैसला किया कि वह अपने बाल दान करेंगी। इसके बाद उन्होंने उन्होंने ट्रस्ट के बारे में जानकारी जुटाई। पता चला कि ट्रस्ट वास्तव में कैंसर पीड़ित महिलाओं के लिए निशुल्क विग तैयार करता है। जब उन्हें भरोसा हो गया तो उन्होंने ट्रस्ट से संपर्क साधा। ट्रस्ट ने बाल कैसे कटवाने है, इसके बारे में जानकारी दी।

ट्रस्ट के निर्देशों के अनुसार उन्होंने पहले बालों को धोया और जब वह सूख गए तो ब्यूटी पार्लर जाकर उन्हें 13 इंच मेजर करवाया। इसके बाद दोनों ओर से रबड़ लगवाकर उन्हें कटवा दिया। फिर बालों को उनके एक परिचित मुंबई जाकर ट्रस्ट को दे आए। यह इसी साल जनवरी की बात है। सोनम के अनुसार, वह बेहद खुश हैं कि उन्होंने अपने प्यारे बाल उन लोगों के लिए दान किए हैं, जिन्हें उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है। बाल बढ़ जाने पर वह दोबारा उन्हें दान करेंगी। उन्होंने बताया कि संबंधित ट्रस्ट की ओर से एक प्रमाण-पत्र उन्हें भेजा गया है।

चलती बस से तीन साल का छात्र गिरा, मां ने दर्ज कराया मुकदमा

स्कूल से घर आते समय साढ़े तीन साल का बच्चा बस की खिड़की से नीचे गिर गया। उसके सिर और चेहरे में गंभीर चोटें आई हैं। छात्र को कई टांके लगे हैं। छात्र के माता-पिता का आरोप है कि घटना होने के बाद भी प्रबंधन ने अब तक यह नहीं बताया कि हादसा कैसे और किसकी लापरवाही से हुआ। फिलहाल बच्चे की मां ने प्रेमनगर थाने में स्कूल प्रबंधन और वहां के स्टॉफ के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम और आइपीसी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है।

घटना आठ मई की है। पेशे से बिजनेसमैन एसके गुप्ता निवासी मांडूवाला, निकट शिव मंदिर, प्रेमनगर अभी छह महीने पहले ही दिल्ली से देहरादून शिफ्ट हुए हैं। यहां व्यवस्थित होने के बाद उन्होंने अपने साढ़े तीन साल के बेटे अंश का भाऊवाला के दून हेरिटेज स्कूल में प्ले गु्रप में दाखिला करा दिया। असुविधा से बचने के लिए स्कूल की बस लगा दी। बीती आठ मई को अंश रोज की तरह स्कूल गया, लेकिन दोपहर में जब वह काफी देर तक स्कूल से घर नहीं आया तो परिजनों को चिंता हुई। अंश की मां मंजिता ने स्कूल में फोन किया तो बताया गया कि अंश को चोट लग गई है, लेकिन वह ठीक है। अंश को चोट लगने की बात सुनते ही मंजिता घबरा गईं। उन्होंने दिल्ली में अपने पति को फोन किया और खुद स्कूल पहुंचीं। वहां देखा तो बच्चे के चेहरे पर काफी चोटें लगी थीं, जिससे खून बह रहा था। बेटे की हालत देख मंजिता रोने लगीं, स्कूल स्टॉफ ने जैसे-तैसे उन्हें संभाला। इसके बाद बच्चे को लेकर एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां अंश के चेहरे, पलक और होंठ पर टांके लगे। एसके गुप्ता ने बताया अंश की तबीयत अब ठीक है, लेकिन अभी वह काफी डरा हुआ है।

एसओ प्रेमनगर नरेंद्र गहलावत ने बताया कि अंश के परिजनों की ओर से मिली तहरीर के आधार पर स्कूल की प्रिंसिपल और स्टॉफ के विरुद्ध आइपीसी की धारा 279 (लापरवाही से गाड़ी चलाना), 337 (जीवन को खतरे में डालने वाला जख्म) व किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 75 (बालक के प्रति क्रूरता) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

चालक-परिचालक को हटाया

दून हेरिटेज स्कूल के उप प्रधानाचार्य ओपी शर्मा ने बताया कि हादसे के बाद स्कूल बस के चालक व परिचालक को हटा दिया है। घटना के बाद एसके गुप्ता को फोन कर रहे थे, लेकिन फोन नहीं लगा। तब कार भेज कर बच्चे की मां को स्कूल लाया गया और उनके सामने बच्चे का इलाज कराया गया। बच्चा अब बिल्कुल ठीक है।

2017 में पीएमओ ने धर्मांतरण की आशंका जता जांच आख्या की थी तलब

बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष उषा नेगी ने रानीपोखरी स्थित चिल्ड्रन होम अकादमी में धर्मांतरण का खुलासा करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में पीएमओ भी यहां धर्मांतरण की आशंका जता चुका है। 2017 में उसकी ओर से पत्र जारी कर जांच आख्या भी तलब की गई थी। उन्होंने कहा कि अब इसी को आधार बनाकर मामले की दोबारा से छानबीन की सिफारिश पीएमओ से की जाएगी।

आयोग अध्यक्ष के मुताबिक डीएम देहरादून के निर्देश पर गठित की गई जांच समिति ने एकेडमी में धर्मांतरण की गतिविधियां संचालित होना पाया है। ऐसे में इस आशंका को बल मिलता है कि एकेडमी में काफी समय से धर्मांतरण की गतिविधियां संचालित हो रही थीं। उन्होंने बताया कि पीएमओ के निर्देश पर हुई जांच की फाइल दोबारा खुलवाने की सिफारिश आयोग करेगा।

वासु की मौत का कारण फूड प्वाइजनिंग बताया था
बाल आयोग उस अस्पताल को भी जांच के दायरे में लाएगा, जिसने वासु की मौत का कारण फूड प्वाइजनिंग बताया था। आयोग अध्यक्ष के मुताबिक डीएम की ओर से गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट देखने के बाद अस्पताल के खिलाफ भी जांच की सिफारिश की जाएगी।

उन्होंने एकेडमी में अवैध रूप से संचालित हो रहे कब्रिस्तान की गहन छानबीन कराए जाने की सिफारिश की भी बात कही। आशंका जाहिर की कि एकेडमी में निठारी कांड जैसी साजिश का खुलासा हो सकता है।

मामला यह था
बीती 10 मार्च को एकेडमी में 12 वर्षीय वासु की बेरहमी से पिटाई की गई थी। 11 मार्च को उसकी मौत की पुष्टि हुई। इसका संज्ञान बाल संरक्षण आयोग ने लिया और मामले की जांच की सिफारिश की।

इसी क्रम में डीएम देहरादून एसए मुरुगेशन के निर्देश पर एसडीएम ऋषिकेश प्रेमलाल, मुख्य शिक्षा अधिकारी आशा पैन्यूली और प्रोविजन अधिकारी मीना बिष्ट को संयुक्त रूप से जांच करने का आदेश दिया था। जांच रिपोर्ट डीएम देहरादून को सौंपी गई है।

दिव्यांगों के लिए रैंप न होने से हो रही परेशानी

उत्तराखंड की प्रसिद्ध चार धाम यात्रा के प्रवेश द्वार के रेलवे स्टेशन पर ही दिव्यांगों के लिए रैंप जैसी कोई व्यवस्था ही नहीं है। इससे दिव्यांग यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आलम यह है कि एक दिव्यांग को प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक ले जाने के लिए कम से कम तीन लोगों की जरूरत पड़ती है। शुक्रवार को तीर्थनगरी की पैरा ओलंपिक खिलाड़ी नीरजा गोयल रेलवे स्टेशन पर दिव्यांगों के लिए रैंप की व्यवस्था हो, इसके लिए ज्ञापन सौंपने स्टेशन अधीक्षक के कार्यालय पहुंची।

उनका कहना है कि वह पूर्व में भी इस संदर्भ में स्टेशन अधीक्षक के यहां आ चुकी हैं, लेकिन वह मिलते ही नहीं हैं। नीरजा गोयल ने कहा कि एक ओर देश के प्रधानमंत्री दिव्यांगों के उत्थान की बात करते हैं, दूसरी ओर रेलवे स्टेशन पर रैंप की व्यवस्था नहीं है। शुक्रवार को नीरजा को हरिद्वार जाना था। वह ट्रेन से हरिद्वार जाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंची। व्हील चेयर से एक प्लेट फार्म से दूसरे प्लेट फार्म जाने के लिए रैंप की व्यवस्था न होने के कारण उन्हें मजबूरन लोगों की मदद लेकर पटरियां पार करनी पड़ीं। इसी मुद्दे को लेकर नीरजा गोयल शुक्रवार को ज्ञापन देने पहुंची थीं। फिलहाल स्टेशन अधीक्षक से मुलाकात नहीं हो पाई।

वहीं, स्टेशन अधीक्षक राजपाल मीना का कहना है कि दिव्यांगों को व्हील चेयर के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। ज्ञापन देने आई दिव्यांग नीरजा गोयल के साथ फोन पर बात हुई। मैं किसी बैठक में था। लिहाजा नीरजा को सलाह दी थी कि वे स्टेशन मास्टर को ज्ञापन सौंप दें या फिर डीआरएम को फैक्स के जरिए शिकायत भेज सकती हैं।

महिला मौत मामलाः मरीज के बाहर जाने सहित अन्य बिंदु पर निर्मल अस्पताल ने डा. शोएब से मांगा जवाब

बीती बुधवार को ऋषिकेश देहरादून रोड स्थित कंडारी क्लीनिक एंड चिकित्सालय में इलाज के दौरान महिला की मौत के मामले में अब निर्मल अस्पताल प्रबंधन ने भी डॉ. मोहम्मद शोएब के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। अस्पताल प्रबंधन ने शोएब को नोटिस देकर तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा है।

बता दें कि डॉ. मोहम्मद शोएब ने निर्मल अस्पताल में आई महिला को इलाज में कम रुपये लगने की बात कहकर देहरादून रोड स्थित कंडारी क्लीनिक एंड चिकित्सालय भेजा था, जहां महिला का अपेंडिक्स का ऑपरेशन हुआ।

ऑपरेशन के दौरान जब महिला की हालत बिगड़ गई तो डॉ. मोहम्मद शोएब और डॉ. ओएस कंडारी ने महिला के परिजनों को हायर सेंटर रेफर करने की बात कही थी। जब परिजन महिला जौलीग्रांट स्थित हिमालयन अस्पताल ले गए तो चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि महिला की मौत कई घंटे पूर्व ही हो चुकी है। इसके बाद परिजनों ने क्लीनिक पर हंगामा किया था।

परिजनों ने डॉ. मोहम्मद शोएब और डॉ. ओएस कंडारी के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी। इसके बाद से ही मामले ने तूल पकड़ा। डॉ. शोएब निर्मल अस्पताल में भी प्रेक्टिस करते हैं। उक्त अस्पताल का प्रबंधन अनुबंध की शर्तों का पालन न करने, मरीज को नियम विरुद्ध तरीके से बाहर भेजने सहित अन्य बिंदुओं पर अपने स्तर से भी जांच करवा रहा है।