बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित राज्य बना लद्दाख

भारत सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाकर जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का ऐलान कर दिया है। राष्ट्रपति के आदेश पर अनुच्छेद 370 को जम्मू-कश्मीर से हटा दिया गया है। इसी के साथ जम्मू और कश्मीर राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया गया है। जम्मू-कश्मीर एक अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा, जबकि लद्दाख को अलग से केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है।

गौरतलब है कि पिछले 70 सालों से लद्दाख के लोग केंद्र शासित प्रदेश के दर्जे की मांग करते रहे थे। लद्दाख को अलग से केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है, मगर, यहां विधानसभा नहीं होगी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि वहां के लोग काफी लंबे समय से इसे अलग केंद्र शासित प्रदेश के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग कर रहे थे।

लद्दाख की खुबियां
लद्दाख बेहद खूबसूरत है और हर साल देशभर से हजारों लोग यहां पहुंचते हैं। इसे ठंडा मरूस्थल भी कहते हैं। खासतौर पर मोटरसाइकिलों पर सवार युवा यहां के स्पेशल टूर बनाते हैं। यह उत्तर में कराकोरम पर्वत और दक्षिण में हिमालय पर्वत के बीच स्थित है। लद्दाख के उत्तर में पड़ोसी देश चीन और पूर्व में चीन के कब्जे वाले तिब्बत की सीमाएं मिलती हैं। यह सीमावर्ती इलाका है और इस दृष्टि से इसका सामरिक महत्व भी खास है। लद्दाख समुद्र तल से 9842 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। लद्दाख की राजधानी और प्रमुख शहर लेह है। लेह के उत्तर में कराकोरम दर्रा है।

जम्मू कश्मीर में फहरेगा तिरंगा, अनुच्छेद 370 को केंद्र सरकार ने किया खत्म

सोमवार को मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के साथ ही राज्यसभा में राज्य पुनगर्ठन बिल के जरिए सूबे को दो हिस्सों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांट कर इन्हें केंद्रशासित प्रदेश घोषित करने का प्रस्ताव रखा है। इनमें जम्मू कश्मीर को विधायिका शक्ति वाला तो लद्दाख को बिना विधायिका शक्ति वाला केंद्रशासित प्रदेश बनाने का प्रस्ताव है।

बिल पर राज्यसभा ने सोमवार को ही मुहर लगा दी है। अब मंगलवार को लोकसभा में बिल पर मुहर लगते ही जम्मू कश्मीर न सिर्फ विशेष राज्य का दर्जा खो देगा, बल्कि पूर्ण राज्य के रूप में इसका अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा। सोमवार को जब गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370(1) में निहित शक्तियों का उपयोग करते हुए इस अनुच्छेद के अन्य सभी खंडों को निरस्त करने का संकल्प पेश किया तो पूरा सदन हक्का बक्का रह गया।

इसके साथ ही जब शाह ने राज्य पुनगर्ठन बिल के जरिए राज्य को दो हिस्सों में बांटने, पूर्ण राज्य की जगह इन्हें केंद्रशासित प्रदेश घोषित करने संबंधी प्रस्ताव रखा तो सदन में एकबारगी भूचाल आ गया। शाह ने संकल्प और बिल पेश करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 में समय समय में संशोधन होता रहा है। अब जरूरी है कि राज्य से आतंकवाद के खात्मे और विकास के लिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

ये होंगे महत्वपूर्ण बदलाव
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी लागू होगी भारतीय दंड संहिता
राज्य का अपना अलग संविधान खत्म
राज्य का अलग झंडा भी नहीं रहेगा
छह साल की जगह अन्य राज्यों की तरह 5 साल का होगा विधानसभा का कार्यकाल
पूर्ण राज्य और विशेष राज्य का दर्जा होगा खत्म
दो नए केंद्रशासित प्रदेशों का होगा उदय
पूर्ण राज्य की संख्या 29 से घट कर होगी 28
चंडीगढ़ की तरह बिना विधायिका शक्ति वाला केंद्रशासित प्रदेश होगा लद्दाख

इन्होंने किया समर्थन
राज्य पुनगर्ठन बिल का राजग के इतर बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस, बसपा और आम आदमी पार्टी ने समर्थन किया।

इन्होंने किया वाकआउट
कांग्रेस, डीएमके ने किया विरोध तो सहयोगी जदयू, सपा ने किया वाकआउट।

हंस फाउंडेशन के संस्थापक के जन्मदिन पर सीएम ने की शिरकत, बोले फाउंडेशन का प्रयास प्रत्येक रूप में सराहनीय

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने रविवार को नन्दा की चौकी, प्रेमनगर, देहरादून स्थित एक स्थानीय होटल में हंस फाउंडेशन के संस्थापक भोले महाराज के जन्मोत्सव कार्यक्रम में शिरकत की, उन्होंने हंस फाउंडेशन की ओर से समाज हित के कार्यों के लिए प्रदान की गई एम्बुलेन्स व स्कूल बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। हंस फाउण्डेशन की ओर से उत्तराखण्ड के 03 जनपदों के लिए एम्बुलेन्स व विद्यालय रथ योजना के तहत उत्तराखण्ड के 09 स्कूलों के लिए बसें प्रदान की गई।

उत्तरकाशी जनपद के मोरी ब्लॉक के 20 गांवों के 556 परिवारों को हंस ऊर्जा के तहत सोलर लाईट वितरण, ऋषिकेश के गंगा तटों पर प्रथम जल एम्बुलेन्स का अवतरण, प्रदेश की विभिन्न बालिका स्कूलों में छात्रावासों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग व डिस्पोजल मशीनों का शुभारम्भ एवं शिक्षा अभियान के तहत संचालित होने वाले उत्तराखण्ड के स्कूलों में स्कूल यूनिफार्म, पठन-पाठन सामग्री, कम्प्यूटर लैब, साइंस लैब का वितरण किया गया।

भोले महाराज को जन्मदिवस की बधाई व शुभकामना देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि हंस फाउंडेशन ने आज देश के सबसे बड़े ट्रस्ट व दाता के रूप में अपनी पहचान बनाई है। स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति सहित सभी क्षेत्रों में हंस फाउंडेशन का महत्वपूर्ण योगदान है। फाउंडेशन के प्रयास प्रत्येक रूप में सराहनीय है। उनके द्वारा असीम सेवाएं राज्य व राज्य से बाहर दी जा रही है। माता मंगला देवी की ओर से गरीब व वंचित वर्ग की सहायता हेतु विभिन्न सेवा कार्य किए जा रहे है। इन प्रयासों को निश्चित रूप से सराहा जाना चाहिए।

ट्रक खड़ा कर सो रहा था ड्राइवर, रूपयों से भरी कमीज लेकर भागा बंदर

मुनिकीरेती के ढालवाला क्षेत्र में ट्रक के अंदर सो रहे व्यक्ति की कमीज बंदर उठा ले गया। कमीज की जेब में करीब सात हजार रुपए, जरूरी दस्तावेज तथा गाड़ी की चाबी थी। एक स्थानीय ने बंदर को कुछ खाने को फेंका तो बंदर लालच में आकर कमीज छोड़ गया। कमीज में सात हजार रुपए, आईडी और गाड़ी की चाभी है। शनिवार की दोपहर चीनी गोदाम रोड ढालवाला में चाय की दुकान चलाने वाले कमलेश्वर कोठारी ने पुलिस को फोन से सूचना दी कि एक बंदर किसी की कमीज उठा ले आया है।

कमलेश्वर के मुताबिक बंदर अपने साथ कमीज लेकर घूम रहा है, जब उन्होंने उसे खाने की वस्तु दी तो उसने कमीज नीचे छोड़ दी। सूचना पाकर चौकी प्रभारी ढालवाला विनोद कुमार शर्मा ने दो कांस्टेबल को मौके पर रवाना किया।

पुलिस कर्मियों ने छोड़ी गई कमीज से आईडी देखने के बाद व्यक्ति की तलाश की तो उसकी पहचान सुरेश कुमार यादव पुत्र आदित्य राम यादव निवासी स्टार पोस्ट ऑफिस पीडी थाना कौंधियारा जिला इलाहाबाद के रूप में हुई। पुलिस कमीज लेकर चौकी आ गई और सुरेश कुमार यादव को चौकी बुलाया।

चौकी पहुंच सुरेश ने बताया कि वह हिलवेज कंपनी में ट्राला चलाता है। चीनी गोदाम रोड पर ट्राला खड़ा कर वह सो गया था। उसी दौरान बंदर ने केबिन के अंदर घुसकर उसकी कमीज उठाकर चलता बना। वे काफी देर से कमीज में रखे दस्तावेज, रुपयों और गाड़ी की चाभी को लेकर परेशान थे। मौके पर पुलिस ने सुरेश कुमार यादव को उसके 7000 रुपए, आधार कार्ड, पैन कार्ड और गाड़ी की चाभी सौंप दी

पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान वर्दी में रहेंगेः एसएसपी

देहरादून जिले का चार्ज संभालते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अरुण मोहन जोशी ने थाना और चौकी प्रभारियों के खिलाफ कड़ा रूख अख्तियार किया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो थाना और चौकी प्रभारी घर बैठे ही काम कर रहा है, वह दूसरी जगह पोस्टिंग तलाश लें। इसके अलावा तिराहे, चौराहे से लेकर भीड़ वाले इलाकों में हर वक्त पुलिस फोर्स को तैनाती के निर्देश दिए।

राजधानी के एसएसपी अरुण मोहन जोशी ने कार्यभार ग्रहण करने के दूसरे दिन थानेदारों के पेंच कसने शुरू कर दिए। रविवार को सभी थानेदारों को लिखित और मौखिक रूप से आदेश जारी किए गए कि घर से थाना-चौकी नहीं चल सकती है। उन्होंने ड्यूटी के दौरान वर्दी के साथ तैनात रहने के निर्देश दिए हैं। एसएसपी ने कहा कि राजधानी के कुछ थाना-चौकी इंचार्ज आरामतलब नौकरी कर रहे हैं। इनकी सूचना उनके पास पहले से मौजूद है। उन्होंने सभी इंचार्ज को थाना-चौकी से बाहर निकलकर गश्त, चेकिंग पर रहने के निर्देश दिए। शहर में पुलिस की मौजूदगी शत फीसद हो, इसके लिए ट्रैफिक और थाना पुलिस को समन्वय बनाकर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए गए।

थानेदारों और चौकी इंचार्ज की जीपीएस लोकेशन को भी अपडेट रखने के निर्देश दिए हैं। इसकी जिम्मेदारी एसपी सिटी श्वेता चौबे को सौंपी गई है। एसएसपी ने सीसीटीवी कैमरों और औचक निरीक्षण से भी मॉनिटरिग करने की बात कही। ताकि ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर आपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण लग सके।

एक लाख कर्मचारियों को मिली राहत, नए आदेश जारी

हाल ही में शासन ने सीधी भर्ती और पदोन्नति पाने वाले कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में अंतर को समाप्त करने के संबंध में जो आदेश किया था, उसका लाभ अब प्रदेश के एक लाख कर्मचारियों को मिलने जा रहा है।
दरअसल, छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सीधी भर्ती और पदोन्नति के पदों पर न्यूनतम वेतन निर्धारण में विसंगति पैदा हो गई थी। इसके संबंध में शिक्षा विभाग ने शासन से स्पष्टीकरण मांगा था, जिस पर शासनादेश जारी किया गया। कर्मचारी संगठनों ने जब खोज खबर की तो खुलासा हुआ कि इसका फायदा प्रदेश के समस्त कर्मचारियों को मिलेगा। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के मुख्य संयोजक ठाकुर प्रहलाद सिंह ने कहा कि इससे कर्मचारियों और शिक्षकों को 1000 रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक का वित्तीय लाभ मिलेगा।
प्रदेश में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद सीधी भर्ती और पदोन्नत कर्मचारियों के न्यूनतम वेतन में असमानता की विसंगति पैदा हो गई थी। पदोन्नति के बाद कर्मचारियों को समान पद पर सीधी भर्ती से कम न्यूनतम वेतन निर्धारित हुआ। इसे लेकर पदोन्नति पाने वाले शिक्षक व कर्मचारी सरकार से लगातार विसंगति दूर करने की मांग कर रहे थे।
अब नए शासनादेश से पदोन्नति के बाद कर्मचारी का न्यूनतम वेतन सीधी भर्ती से आए कर्मचारी के बराबर होगा। प्रदेश सरकार के तकरीबन सभी विभागों में इसी तरह की विसंगति है। इनमें प्रमुख विभाग वन, मत्स्य, कृषि, उद्यान, ग्राम्य विकास, गन्ना, आबकारी, परिवहन, सहकारिता, वाणिज्य कर, ग्रामीण अभियंत्रण, राजस्व, खाद्य आपूर्ति, मनोरंजन कर समेत कई अन्य विभागों के कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आशंका जताई कि विभागों के अध्यक्ष शासनादेश को शिक्षा विभाग तक सीमित करके कर्मचारियों को उनके लाभ से वंचित कर देना चाहते हैं। लेकिन परिषद चुप नहीं बैठेगी। शनिवार को परिषद की बैठक में तय हुआ कि कोई विभागाध्यक्ष शासनादेश को लागू करने में हीलाहवाली करेगा तो परिषद उसका घेराव करेगी। बैठक में प्रदीप कोहली, नंद किशोर त्रिपाठी, शक्ति प्रसाद भट्ट, राकेश प्रसाद ममगाईं, गुड्डी मटूड़ा, विजया जोशी, एनएस कुंद्रा, सुभाष शर्मा समेत कई अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

लक्ष्मणझूला पुलः वैकल्पिक पुल को मिले तीन करोड़ रूपए

राज्य सरकार ने विश्व प्रसिद्ध लक्ष्मण झूला के पास वैकल्पिक पुल का निर्माण कराने के लिए प्रथम चरण के तहत वित्तीय प्रावधान कर दिया है। शासन ने शुक्रवार को सेतु निर्माण के लिए 3.360 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी। नया वैकल्पिक पुल 150 मीटर का होगा। लोनिवि के उपसचिव जीवन सिंह ने वित्तीय स्वीकृति का शासनादेश जारी किया।

प्रदेश सरकार पुराने और जर्जर हो चुके लक्ष्मण झूला पुल से आवाजाही पहले ही प्रतिबंधित कर चुकी है। आवाजाही पर रोक लगाने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लोक निर्माण विभाग को जल्द से जल्द वैकल्पिक झूला पुल तैयार करने के निर्देश दिए थे।

उनके निर्देश पर लोक निर्माण विभाग की टीम स्थलीय निरीक्षण करने के बाद सर्वेक्षण में जुट गई। विभाग ने शासन को प्राथमिक आगणन रिपोर्ट सौंपी थी। जिस पर वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। अब वित्तीय प्रावधान करने के बाद लोक निर्माण विभाग को झूला पुल निर्माण की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर शासन अगले चरण की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करेगा।

हत्या मामले में आरोपी पति और ससुर को कोर्ट ने माना दोषी, मिली आजीवन कारावास की सजा

नवविवाहिता की हत्या मामले में न्यायालय ने पति और ससुर को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोनों आरोपियों पर दस-दस हजार रूपए का अर्थदंड भी लगाया है। जिसे न चुकाने पर दोनों आरोपियों को तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। वहीं, अदालत ने दोनों आरोपियों को हत्या का कारण दहेज नहीं पाया है। लिहाजा दहेज के आरोपों से दोनों को बरी किया गया है।

थाना रायवाला में पंकज शर्मा ने तहरीर दी थी। उन्होंने बताया था कि उनकी बहन मंजू तिवारी का विवाह हरिपुर कलां निवासी रोहित तिवारी पुत्र ओम प्रकाश तिवारी के साथ नौ फरवरी 2018 को हुआ था। एक जुलाई 2018 को रोहित ने उन्हें फोन पर सूचना दी कि उनकी बहन ने आत्महत्या कर ली है। इसके बाद वह दो जुलाई को बहन के ससुराल पहुंचे। उन्हें बहन की आत्महत्या वाले पहलू पर आशंका हुई और थाना रायवाला में लिखित शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की।

थाना रायवाला ने जांच कर आरोपी पति और ससुर पर हत्या का मामला दर्ज करते हुए आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय की अदालत में दोनों पक्षों की अंतिम बहस हुई। इसमें शासन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (दाण्डिक) राजेश पैंयूली ने ठोस पैरवी की। इसके आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों रोहित तिवारी पुत्र ओम प्रकाश तिवारी तथा ओम प्रकाश तिवारी पुत्र गंगाराम निवासीगण ग्राम सुरजीपुर, थाना गोकुल बहेटा हरदोई उत्तर प्रदेश, हाल किराएदार श्रीबालाजी धाम गली नंबर 03, हरिपुरकलां थाना रायवाला देहरादून को मंजू तिवारी की हत्या का दोषी पाया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने किया संगंध पौध केंद्र के लोगो का विमोचन

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को सचिवालय में कृषि एवं उद्यान विभाग की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कृषि एवं उद्यान विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिये कि सीएम डेशबोर्ड के अन्तर्गत विभिन्न क्षेत्रों में विभागों को प्रतिमाह जो लक्ष्य मिला है, वह लक्ष्य पूर्ण किया जाय। इसके लिए संबधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना जरूरी है। 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने के लिए हर संभव प्रयास किये जायें। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने संगंध पौध केन्द्र के लोगो का विमोचन भी किया।

कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि किसानों को जो मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किये जा रहे हैं, उनका सही इस्तेमाल हो। विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में इस बात का विशेष ध्यान दिया जाय कि किसानों को इसका लाभ हो। यह सुनिश्चित किया जाय कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा के लिए जो क्लेम हो रहें हैं, उनका भुगतान जल्द हो। लघु व सीमांत कृषकों तक कृषि यंत्रों की पहुंच हो, इसके लिए फार्म मशीनरी बैंक की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जाय। मुख्यमंत्री ने कहा कि एकीकृत कृषि को बढ़ावा दिया जाय। परम्परागत फसलों मण्डुवा, सॉवा, रामदाना, गहत के उत्पादन में कैसे वृद्धि की जा सकती है, इसके लिए प्रयास किये जाये। कृषकों को इसके लिए प्रोत्साहित भी किया जाय। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत लाभार्थियों के पंजीकरण की जानकारी भी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका भी आकलन किया जाए कि जमीनी स्तर पर कृषि एवं उद्यान के क्षेत्र में रोजगार की उपलब्धता क्या रही उन्होंने उद्यान विभाग में रिक्त पदों को भरने से पूर्व कृषि एवं उद्यान विभाग में कुल पदों की स्थिति की जानकारी करने के बाद सरप्लस पदों पर भर्ती की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अन्तर्गत लगभग 85 प्रतिशत लाभार्थियों का पंजीकरण किया जा चुका है। परम्परागत कृषि योजना के तहत सभी 3900 कलस्टरों में कार्य शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्तर्गत इस वर्ष 69641 के क्लेम का भुगतान किया गया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 5.50 लाख कृषकों को 165.97 करोड़ रूपये का वितरण किया जा चुका है।

उद्यान विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि रेशम के उत्पादन व इससे बनने वाले उत्पादों के लिए ग्रोथ सेंटर विकसित किया जाए। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। कृषकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सचल दलों को मजबूत करना जरूरी है। कृषि व बागवानी को वन्यजीवों के नुकसान से बचाने के लिए कारगर उपाय तलाशे जाय। सगन्ध उत्पादों, औषधीय व औधनिक फसलों के उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि के प्रयास किये जाय।

भरत मंदिर का फैसला 19 एकड़ में फैले लोग नहीं होंगे बेदखल, मगर ये शर्ते होंगी लागू

श्री भरत मंदिर ने बनखंडी में बसे करीब पांच हजार लोगों को न हटाने का फैसला लिया है। मगर, इसकी एवज में कुछ औपचारिक शर्तें भी रखी है। शर्तों के मुताबिक बनखंडी में रह रहे लोगों को बसी जमीनों का आजीवन पट्टा दिया जाएगा। पट्टे की एवज में सक्षम लोग 500 रुपए वर्ग गज के हिसाब से शुल्क अदा करेंगे। इसके अलावा पट्टाधारकों को 10 रुपए सालाना शुल्क अदा करना होगा।

विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने लोगों से राय मशविरा करके प्रस्ताव श्री भरत मंदिर के सामने रखा। गरीबों को जमीन मुफ्त में दान का प्रस्ताव भी था, जिसे श्री भरत मंदिर की ओर से स्वीकार कर लिया गया। समझौते के बाद श्रीभरत मंदिर की ओर से हर्षवर्धन शर्मा ने कहा कि बनखंडी को उजाड़ने की मंशा कभी नहीं रही। यही वजह है कि रामलीला की भूमि को भी दान दे दिया गया है। प्रस्ताव पर अमल के लिए दो माह का समय दिया गया है।

यह भी फैसला किया गया है कि भरत मंदिर की 19 एकड़ जमीन पर जो लोग बस चुके है, उन्हें बेघर नहीं किया जाएगा। ट्रस्ट को जमीन बेचने का अधिकार नहीं होता, लिहाजा लोगों को जमीनों का पट्टा होगा। श्री भरत मंदिर ने यह भी साफ किया कि किसी भी निवासी पर जबरन निर्णय नहीं थोपा जाएगा। पट्टे की एवज में लोगों को 10 रुपए सालाना शुल्क देना होगा। रात करीब नौ बजे समझौता होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।

इससे पहले कोर्ट के आदेशों के मुताबिक शुक्रवार को बनखंडी में बेदखली की कार्रवाई होनी थी। इन्हीं आशंकाओं और भय के चलते लोग सिफारिशों में जुटे रहे। मेयर अनिता ममगाई बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी मिलीं और उन्हें पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। मेयर के मुताबिक मुख्यमंत्री ने लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है। समझौते के दौरान पूर्व पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा, बार एसोसिएशन अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह सजवाण सहित शहर के गणमान्य लोग और बनखंडी निवासी उपस्थित रहे।

समझौता न मानने वालों के खिलाफ दायर होगा अलग से मामला
श्री भरत मंदिर ने यह भी फैसला लिया है कि जो लोग मालिकाना हक के फैसले को नहीं मानेंगे, उनके खिलाफ अलग से मामला दायर किया जाएगा। इसी के तहत बृहस्पतिवार को कोर्ट में भरत मंदिर की ओर से बनखंडीवासियों को बेदखल न करने का प्रार्थना पत्र दाखिल किया जाएगा। कोर्ट से अनुमति भी मांगी जाएगी कि जो लोग समझौते के दायरे में नहीं आ रहे है, उनके खिलाफ नए सिरे से मुकदमा दायर करने की मंजूरी दी जाए। समझौता वार्ता के दौरान कई लोगों ने सवाल उठाया कि जो लोग अपनी जमीन बेचना चाहते हैं, भविष्य में उन्हें क्या दिक्कतें हो सकती हैं। इस पर भरत मंदिर की ओर से हर्षवर्धन शर्मा ने बताया कि यदि कोई निवासी अपना घर या भूूखंड भविष्य में बेचना चाहता है तो उसे ट्रस्ट की ओर से एनओसी की कोई जरूरत नहीं होगी। अलबत्ता, बेची गई जमीन पर सालाना शुल्क 10 रुपए की बजाए 20 रुपए देय होगा।