राज्यसभा से नई राजनीति पारी की शुरुआत करेंगे अमित शाह

गुजरात में 8 अगस्त को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को उतारने का फैसला किया है। वरिष्ठ बीजेपी नेता जेपी नड्डा ने संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद यह घोषणा की है। इसके साथ ही पार्टी ने संपतिया उइके को मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव में उतारने का फैसला किया है।
बता दें कि राज्य से कुल 11 राज्यसभा सदस्यों में से तीन, स्मृति ईरानी और दिलीप भाई पंड्या दोनों बीजेपी के और कांग्रेस के अहमद पटेल का कार्यकाल आगामी 18 अगस्त को खत्म हो रहा है। दरअसल राज्य में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे में बीजेपी संसदीय बोर्ड का यह कदम राज्य में मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार बताए जा रहे अमित शाह को राज्य की राजनीति से दूर करने के स्पष्ट संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार एवं राज्यसभा सदस्य अहमद पटेल ने भी राज्यसभा चुनावों के लिए बुधवार को नामांकन दाखिल किया। उनकी कोशिश लगातार पांचवी बार गुजरात से राज्यसभा पहुंचने की है और इसके लिए उन्होंने कांग्रेस से हाल ही बगावत कर चुके शंकर सिंह वाघेला से भी समर्थन मांगा है. हालांकि यहां कयास लगाए जा रहे हैं कि वाघेला गुट के 11 कांग्रेसी विधायक शायद ही कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दें।
गौर करने वाली बात यह भी है कि गुजरात की 182 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 57 विधायक हैं, जबकि बीजेपी के पास 121 विधायक हैं। ऐसे में बीजेपी के दोनों उम्मीदवारों की जीत पक्की मानी जा रही है। वहीं कांग्रेस को जीत के लिए 47 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। उसे एनसीपी के दो और जेडीयू के एक विधायक से भी समर्थन का भरोसा है। हालांकि यहां देखना होगा कि अगर 11 बागी विधायक का बगावती तेवर बरकरार रहा तो कांग्रेस के लिए मामला कांटे का बन जाएगा।

सीमा विवाद से जूझ रहे भारत को श्रीलंका से मिली संजीवनी

सिक्किम में सीमा विवाद को लेकर भारत से उलझे चीन को श्रीलंका से तगड़ा झटका लगा है। श्रीलंका में बंदरगाह बना रहे चीन के सामने नई शर्तें लगा दी गई हैं और गौर करने वाली बात ये है कि श्रीलंका ने भारत के सामरिक हितों को ध्घ्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। इस संबंध में श्रीलंका कैबिनेट ने मंगलवार को हंबनटोटा पोर्ट को विकसित करने के लिए एक संशोधित समझौता पास किया।
श्रीलंका चीन की कंपनी की मदद से हंबनटोटा पोर्ट को विकसित करना चाहता है। इसके तहत किए गए पहले समझौते का खुद श्रीलंका में ही लोगों ने काफी विरोध किया, जिसके बाद इस समझौते में संसोधन करना पड़ा। यह बंदरगाह दुनिया की सबसे व्यस्त शिपिंग लेन के करीब है, यह उस वक्घ्त विवादों में घिर गया जब निजीकरण के प्रयासों के तहत इसके चीनी कंपनी के हाथों में जाने की बात सामने आई।
चीन मर्चेंट्स पोर्ट होल्डिंग्स ने 1.5 बिलियन डॉलर (करीब 9 हजार 7 करोड़ रुपये) में इस बंदरगाह को विकसित करने का समझौता किया। इसके तहत कंपनी को इसमें 80 फीसदी हिस्सेदारी देने की बात तय की गई। अब नए समझौते में श्रीलंका सरकार ने बंदरगाह पर वाणिज्यिक परिचालन में चीन की भूमिका को सीमित करने की मांग की है। बंदरगाह पर व्यापक सुरक्षा निगरानी खुद के पास ही रखने को कहा है।
हंबनटोटा पोर्ट एशिया में आधुनिक सिल्क रूट का अहम हिस्सा है। इंडस्ट्रियल जोन विकसित करने के नाम पर चीन यहां 15000 एकड़ जमीन अधिगृहित करने की योजना में है। ऐसे में श्रीलंका के अलावा दूसरे देशों खासकर भारत की तरफ से ऐसी चिंता जाहिर की गई कि चीन इसका इस्तेमाल नेवी बेस के तौर पर कर सकता है। श्रीलंका में भी इसे लेकर काफी विरोध प्रदर्शन हुए। लोगों ने अपनी जमीन खोने का डर जताया था। इसके अलावा श्रीलंका के राजनेताओं ने इतने बड़े जमीन के टुकड़े का नियंत्रण चीन के पास जाने को देश की संप्रभुता के साथ समझौते के रूप में भी देखा था।

चीन ने पीएम मोदी की प्रशंसा कर विश्व को चौंकाया

चीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भारत की खुली विदेश आर्थिक नीति की बुधवार को प्रशंसा की है। डोकलाम को लेकर जारी तनातनी और उकसावे भरे अपने बयानों के बीच चीन का यह बयान चौकाने वाला है।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ से जारी एक बयान में कहा गया है, भारत लगातार ही विदेशी निवेश आकर्षित कर रहा है, उसने निवेश के लिए सकारात्मक माहौल बनाया है और पिछले दो वर्षों के दौरान दुनिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा गंतव्य रहा है।
इसमें साथ ही कहा गया है, भारत और चीन के बीच व्यापार सहयोग मजबूत करने और उनकी खुली व्यापार नीति की पैरवी से निश्चित रूप से मुक्त वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने और संरक्षणवाद का मुकाबला करने में प्रोत्साहन मिलेगा। इस बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने एक सक्रीय विदेश नीति लागू की, विदेशी निवेश नीति को सुधारा है और घरेलू उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतरने के लिए प्रोत्साहित किया है।
भारत में चीनी राजदूत के हवाले से इस लेख में कहा गया है, भारत का मौजूदा सुधार प्रक्रिया और खुली नीति बेहद आकर्षक है। इसमें साथ ही कहा गया है, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों विकासशील राष्ट्रों का रुख एक समान है। उदाहरण के लिए, भारत ने हरित अर्थव्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबधता दिखाई है और पेरिस जलवायु समझौते को लागू करने अग्रणी रहा है।
डोकलाम को लेकर भारत के खिलाफ उकसावे भरे बयानों के बीच शिन्हुआ में प्रकाशित यह लेख एक अप्रत्याशित अपवाद के रूप में देखा जा रहा है। इससे पता चलता है कि बीजिंग वैश्विक वित्तीय संस्थानों में उभरते राष्ट्रों को अधिक अधिकार दिए जाने, वैश्विकरण विरोधी रुख का विरोध करने सहित उन तमाम मुद्दों पर भारत से साथ चाहता है, जो उसे अपने हित में दिखते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को किसने बताया महानतम नेता!

फिल्म परमाणु पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में किए गए 5 परमाणु बम के पोखरण, राजस्थान में हुए परिक्षण की सच्ची घटना पर आधारित है। इसको लेकर फिल्म के लीड एक्टर जॉन अब्राहम कहते हैं, यह एक मनोरंजक फिल्म है। अटल बिहारी वाजपेयी हमारे देश के महानतम प्रधानमंत्री में से एक हैं। परमाणु यह एक फिल्म है और इसे मनोरंजक होना होगा। हम लोग न तो राजनीतिज्ञ है और न ही इस फिल्म में राजनीति से जुड़ा कुछ दिखा रहे हैं। हमने बस यही प्रयास किया है कि एक मनोरंजक फिल्म बनाएं। इसके अलावा यह सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म है। वह घटनाएं जोकि भारत में घटित हुई थीं। गौरतलब है कि जब देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे उन्होंने पोखरण में 5 परमाणु बम के परीक्षण करवाए थे। यह परीक्षण इस तरह किये गये कि पूरे विश्व को इसकी बिल्कुल भी भनक नहीं लगी और परमाणु परीक्षण सफल होने के बाद विश्व को इसकी जानकारी मिली।

प्रणब मुखर्जी ने भारतीय राजनीति के दिग्गज नेताओं को याद किया

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के लिए रविवार शाम संसद में विदाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संसद के सेंट्रल हॉल में विदाई कार्यक्रम में शामिल होने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन समेत दोनों सदन के सदस्य मौजूद रहे। इनमें पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया भी मौजूद रहीं। सोमवार को प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल का आखिरी दिन है। नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 25 जुलाई को शपथ लेंगे।

सुमित्रा महाजन ने पढ़ा विदाई भाषण
राष्ट्रपति के विदाई कार्यक्रम में लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने विदाई भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के राजनीतिक करियर का बखान किया। साथ ही उनकी उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि प्रणब मुखर्जी ने हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी। इसके बाद सुमित्रा महाजन ने राष्ट्रपति को विदाई भाषण की प्रति भेंट की।

प्रणब मुखर्जी का आखिरी भाषण
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने लोकसभा स्पीकर और उपराष्ट्रपति का धन्यवाद किया। साथ ही संसद के सभी सदस्यों का अभिवादन स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि मैं 34 साल की उम्र में पहली बार सांसद के रूप 22 जुलाई 1969 को राज्यसभा पहुंचा।
इस दौरान उन्होंने अपने संसदीय कार्यकाल का जिक्र करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, बीजेपी के वरिष्ठ सांसद लालकृष्ण आडवाणी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी याद किया। राष्ट्रपति मुखर्जी ने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को भी याद किया। वहीं प्रणब मुखर्जी ने ये भी कहा कि देश की एकता संविधान का आधार है।

मोदी ने दी डिनर पार्टी
इससे पहले शनिवार को दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के सम्मान में डिनर पार्टी रखी थी। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने प्रणब मुखर्जी को स्मृति चिन्ह भेंट किया। देश के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। इस समारोह में नव-निर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ मोदी कैबिनेट के मंत्री और एनडीए के सहयोगी दलों के नेता शामिल हुए।

चीन के आगे कहीं नही टिकता भारतः चीन

डोकलाम विवाद पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जो बयान दिया था उस पर चीन की प्रतिक्रिया आई है। चीन ने इस मुद्दे पर सुषमा स्वराज को ही झूठा करार दिया है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपने एक आर्टिकल में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को झूठ बोलने का दोषी ठहराया है। साथ ही उने कहा है कि डोकलाम इलाके से दोनों देशों द्वारा एक साथ सेनाएं हटाने को भारत की कोरी कल्पना बताया है।
ग्लोबल टाइम्स ने 21 जुलाई को एक एडीटोरियल में लिखा है, अगर भारत अपने सैनिक नहीं हटाता है तो चीन के पास आखिरी विकल्प है उससे लड़ाई और बगैर किसी कूटनीति के लड़ाई का खात्मा। सुषमा स्वराज ने संसद के मॉनसून सत्र में साफ किया था कि चीन डोकलाम के ट्राइ जंक्घ्शन में यथास्थिति बदलना चाहता है और इससे भारत की सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। डोकलाम में चीन भारी सैन्य वाहन और टैंक की आवाजाही लायक सड़क बनाना चाहता है। डोकलाम इलाके को चीन अपना डोंगलॉन्ग इलाका बताता है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, भारतीय विदेश मंत्री ने झूठ बोला, सबसे पहली बात ये है कि भारत ने उस इलाके में घुसपैठ किया है, भारत के रवैये से पूरी दुनिया हैरान है और उसे किसी देश का समर्थन नहीं मिल रहा है। चीन के आगे नहीं टिकता भारत
चीनी अखबार ने लिखा है कि सैन्य क्षमता के मामले में भारत चीन से बहुत पीछे है और मामले ने सैन्य समाधार का रुख किया तो इसमें कोई संदेह नहीं कि हार भारत को होगी। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक भारत ने चीन की सीमा में घुसपैठ की है तो ऐसे में स्वराज संसद में झूठ बोल रही हैं और देश को गुमराह कर रही हैं। एडीटोरियल के मुताबिक स्वराज का बयान यह बताने के लिए काफी है कि भारत कैसे बयान बदलकर अपना रुख बदल रहा है। आर्टिकल में लिखा है कि पहले भारत ने डोंगलांग को एक ट्राइ-जंक्शन बताने के साथ ही इस पूरे मसले की शुरुआत की। इससे साफ पता लगता है कि कैसे भारत अब अपना रुख बदल रहा है।

राष्ट्रपति भवन में गरीबों का प्रतिनिधि बनकर जा रहा हूं

रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति चुने गए। रामनाथ कोविंद को 7 लाख 2 हजार 44 वोट और विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को 3 लाख 67 हजार 314 वोट मिले। राष्ट्रपति चुने जाने के बाद रामनाथ कोविंद ने कहा कि गरीबी से उठकर कच्चे घर में पलकर आज यहां तक पहुंचा हूं। राष्ट्रपति भवन में ऐसे गरीबों का प्रतिनिधि बनकर जा रहा हूं।
नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लड्डू खिलाकर मुंह मीठा कराया।
प्रधानमंत्री मोदी बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ रामनाथ कोविंद से मिलने 10 अकबर रोड पहुंचे। प्रधानमंत्री ने गुलाब का फूल देकर और गले में साफा डालकर उनका सम्मान किया। रामनाथ कोविंद ने चुनाव आयोग से मिला प्रमाण पत्र भी दिखाया। प्रधानमंत्री मोदी ने रामनाथ कोविंद के साथ अपने रिश्तों की मजबूती दिखाने के लिए 20 साल पुराना फोटो और बीस साल बाद का बिल्कुल नया फोटो ट्वीट किया है। बीस साल पहले की फोटो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामनाथ कोविंद के साथ एक शादी समारोह में नजर आ रहे हैं। इस फोटो के साथ प्रधानमंत्री ने लिखा, ”बीस साल पहले और वर्तमान।

मीरा कुमार ने बधाई दी
मीरा कुमार ने रामनाथ कोविंद को बधाई देते हुए कहा, मैं नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को बधाई देती हूं. अब उन पर संविधान की रक्षा करने की जिम्मेदारी है। मैं वोट देने वाले हर व्यक्ति को शुक्रिया करती हूं। जिस विचारधारा की लड़ाई लड़ने के लिए मैंने चुनाव लड़ा वो आज 20 जुलाई 2017 को खत्म नहीं हुई है, ये लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

रामनाथ को याद आया गांव और बचपन
जीत के बाद राम नाथ कोविंद ने कहा, आज के चुनाव के लिए सभी का धन्यवाद करता हूं। सांसदों और विधायकों ने मुझ पर भरोसा जताया इसके लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं। विपक्ष की उम्मीदवार रहीं मीरा कुमार जी को शुभकामनाएं देता हूं। जिस पद का गौरव डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णण, अब्दुल कलाम और प्रणव मुखर्जी जैसे विद्वानों ने बढ़ाया है उस पद के लिए चुना जाना मुझे बड़ी जिम्मेदारी का अहसास दिला रहा है। निश्चित रूप से मेरे लिए ये भावुक क्षण है।
कोविंद ने कहा, ”आज दिल्ली में सुबह से बारिश हो रही है। ये बारिश मुझे मेरे बचपन की याद दिला रही है। मैं अपने पैतृक गांव में रहता था, घर कच्चा था मिट्टी की दीवारें थीं। फूस की छत थी जिससे पानी टपकता था। उस वक्त हम सब भाई बहन दीवारे के सहारे खड़े होकर बारिश रुकने का इंतजार करते थे। कोविंद ने कहा, ”आज देश में कितनी राम नाथ कोविंद होंगे जो खेत में काम कर रहे होंगे और पसीना बहा रहे होंगे। मुझे उन लोगों से कहना है कि परौंख गांव का रामनाथ कोविंद उन्हीं का प्रतिनिधि बनकर जा रहा है। इस पद पर चुना जाना ना मैंने कभी सोचा था और ना कभी ऐसा लक्ष्य था।

क्या वेंकैया नाडयू फिर फेरेंगे विपक्ष के मंसूबों पर पानी?

नई दिल्ली।
कांग्रेस की अगुवाई में 18 विपक्षी दलों द्वारा गोपाल कृष्ण गांधी को उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के बाद बीजेपी पर दबाव था कि इस पद के लिए किसी कद्दावर शख्सियत को मैदान में उतारे। आखिरकार बीजेपी ने वेंकैया नाडयू पर दांव खेला। नायडू पार्टी और एनडीए के लिए संकटमोचक रहे हैं फिर भी उनपर उपराष्ट्रपति के लिए दांव खेलने का फैसला बीजेपी का बहुत सोच-समझकर लिया गया फैसला है।
उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं। ऐसे में नायडू के लंबे संसदीय अनुभव का लाभ मिलेगा। उनकी जीत तय मानी जा रही है। वह अबतक के सभी उपराष्ट्रपतियों में राज्यसभा का सबसे ज्यादा अनुभव रखने वाले होंगे। इसके अलावा वह संसदीय कार्य मंत्री भी रहे हैं। अबतक कोई भी उपराष्ट्रपति संसदीय कार्यमंत्री नहीं रहा है। मोदी सरकार को राज्यसभा के उपसभापति के तौर पर उपराष्ट्रपति पद की संवेदनशीलता का बखूबी अंदाजा है और यह उसके फैसले में भी झलक रहा है।
वेंकैया नायडू 1998 से अब तक लगातार राज्यसभा का सदस्य रहे हैं। उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के बाद उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया है। उन्होंने राज्यसभा में कर्नाटक और राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया है, इस तरह उन्होंने सदन में उत्तर और दक्षिण भारत दोनों का प्रतिनिधित्व किया है। वह बीजेपी के कद्दावर नेता रहे हैं। उनके पास राजनीतिक, संसदीय और प्रशासनिक तीनों अनुभव हैं।
राज्यसभा में अपने सबसे ज्यादा अनुभवी सदस्यों में से एक को उपराष्ट्रपति पद के लिए उतारकर मोदी सरकार ने इस पद की अहमियत को तवज्जो दिया है। इसके अलावा नायडू की ईमानदारी भी संदेह से परे हैं। एक किसान के बेटे वेंकैया नायडू ग्रासरूट लेवल से उठे हैं और आज वह जो कुछ भी हैं उसके पीछे उनकी मेहनत और लगन है।
नायडू विधायक और सांसद रह चुके हैं। एक राष्ट्रीय दल के अध्यक्ष रह चुके हैं। वह केंद्र में शहरी विकास के साथ-साथ ग्रामीण विकास मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, इससे वह ग्रामीण भारत और शहरी भारत दोनों के आकांक्षाओं से अच्छी तरह परिचित हैं। नायडू को उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ने राजनीतिक शख्स को इस उच्च संवैधानिक पद पर बैठाने की अपनी प्रतिबद्धता को दिखाया है। इससे पहले बीजेपी ने लंबे संसदीय जीवन वाले अपने कद्दावर नेता भैरो सिंह शेखावट को इस पद के लिए चुना था।

भाजपा के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होंगे वेंकैया नायडू

बीजेपी ने उपराष्ट्रपति पद के लिए केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू के नाम पर अंतिम मुहर लगा दी है। लेकिन 31 मई को जब नायडू से उप-राष्ट्रपति उम्मीदवारी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा था कि वह ना तो राष्ट्रपति बनना चाहते हैं, और ना ही उपराष्ट्रपति वह ऊषा के पति होकर ही खुश हैं। दरअसल, ऊषा वेंकैया की पत्नी का नाम है और नायडू ने अपनी पत्नी के नाम का उदाहरण देकर खबरों पर विराम लगा दिया था। तब नायडू के अलावा लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, नजमा हेपतुल्लाह और शरद यादव सहित कई अन्य नेताओं के नाम रेस में बताए जा रहे थे। हालांकि सोमवार को अपने नाम के ऐलान से ठीक पहले नायडू ने कहा था कि पार्टी अगर उन्हें नाम पर विचार करती है तो उन्हें पार्टी का फैसला मंजूर होगा। भाजपा दक्षिण राज्यों में मजबूत होना चाहती है, इस लिए हाईकमान ने वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है।

देहरादून का आशियाना बना राष्ट्रपति का सचिवालय

देहरादून।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने देहरादून पहुंचकर राजपुर रोड आशियाना स्थित उपभवन का उद्घाटन किया। यहां वह विशिष्ट अतिथियों के साथ भोज में भी शामिल हुए। दिल्ली लौटते वक्त खराब मौसम के चलते उनका हेलीकॉप्टर जीटीसी हेलीपैड से जौलीग्रांट एयरपोर्ट के लिए उड़ान नहीं भर सका। ऐसे में वह सड़क मार्ग से जौलीग्रांट के लिए रवाना हुए।
करीब तीन घंटे देहरादून में बिताने के बाद राष्ट्रपति दिल्ली के लिए रवाना हो गए। खराब मौसम के चलते वह कार से ही जौलीग्रांट रवाना हुए। प्रेसिडेंट के लिए पहले ही से ही कंटीजेंसी प्लान तैयार किया गया था। इसी के तहत वह कार से जौलीग्रांट को रवाना हुए। इससे पहले जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर सेना के विशेष विमान से राष्ट्रपति दोपहर करीब पौने बारह बजे विशेष विमान से पहुंचे। इस मौके पर प्रदेश के राज्यपाल डॉ. केके पॉल, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उनकी आगवानी की। स्वागत के उपरांत राष्ट्रपति सेना के हेलीकॉप्टर से जीटीसी हेलीपैड पहुंचे। यहां से वह राजपुर रोड स्थित राष्ट्रपति आशियाना में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे।
इस दौरान वह राष्ट्रपति सचिवालय का उद्घाटन करने के साथ ही विशिष्ट अतिथियों के साथ भोज में शामिल हुए। राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए शहर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। जीटीसी हेलीपैड से लेकर आशियाना तक जब उनका काफिला गुजरा तो पूरी सड़क को जीरो जोन कर दिया गया। उनके आशियाना पहुंचने के बाद ही वाहनों की आवाजाही सुचारु हो सकी।

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर सौंपा ज्ञापन
राष्ट्रपति डॉ. प्रणव मुखर्जी के उत्तराखण्ड आगमन पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिह के नेतृत्व में राष्ट्रपति से उनके निवास आशियाना में शिष्टाचार भेंट कर उन्हें ज्ञापन प्रेषित किया। राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन में कांग्रेस प्रतिनिधिमण्डल ने कहा कि आज सबसे अधिक उपेक्षा देश के अन्नदाता की हो रही है। किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य न मिल पाने, समय पर खाद-बीज न मिल पाने तथा बिजली व सिंचाई सुविधा की परेषानियों के कारण किसान लगातार कर्ज के बोझ से दबता जा रहा है। फसल का उचित मूल्य न मिलने से किसान बैंकों का कर्जा नहीं लौटा पा रहे हैं। देशभर का किसान अपनी समस्याओं के समाधान को लेकर आन्दोलनरत है और अपेक्षा कर रहा है कि केन्द्र सरकार उनकी समस्याओं का निदान करेगी, लेकिन केन्द्र सरकार द्वारा किसानों के हित में अभी तक कोई भी सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसी स्थिति में देशभर में किसानों की आत्महत्या के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, औसतन प्रतिदिन 35 किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

कांग्रेस प्रतिनिधिमण्डल ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य में चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने दृष्टि पत्र में राज्य की जनता से वायदा किया था कि सरकार बनने की दषा में किसानों के कर्ज मॉफ किये जायेंगे, किसानों को ब्याज रहित ऋण दिया जायेगा तथा गन्ना किसानों का बकाया भुगतान 15 दिन के अन्दर किया जायेगा। आज राज्य सरकार अपने इन तीनों वायदों से मुकर रही है। देश में किसानों की आत्महत्या से अभी तक अछूती देवभूमि उत्तराखण्ड में भी 16 जून 2017 से किसानें की आत्महत्या का सिलसिला जारी है। बैंक व साहूकारों के कर्ज के बोझ से दबे जनपद पिथौरागढ़, जनपद टिहरी के एवं जनपद उधमसिंहनगर के एक-एक किसान द्वारा आत्महत्या की गई तथा उधमसिंनगर के एक किसान की बैंक की वसूली के नोटिस आने के बाद हृदय घात से मृत्यु हुई। इस प्रकार राज्य में अब तक चार किसानों द्वारा की गई आत्महत्या से इस देवभूमि को शर्मसार होना पड़ा है। उत्तराखण्ड की देवभूमि में किसानों की आत्महत्या का सिलसिला आगे न बढ़े, इस हेतु राज्य सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान की दिषा में गम्भीर नहीं दिखाई दे रही है जो कि चिन्ता का विशय है।
उत्तराखण्ड राज्य में किसानों को उनकी समस्याओं से निजात दिलाने हेतु राज्य सरकार को अविलम्ब ठोस निर्णय लेने की जरूरत है। कांग्रेस ने मांग की है कि उत्तराखण्ड राज्य के किसानों का ऋण माफ किया जाय। फसलों का समर्थन मूल्य घोषित करते हुए लागत से डेढ गुना दाम पर किसानों के उत्पाद को खरीदा जाय। किसानों को कृषि कार्य हेतु ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाय। गन्ना किसानों का बकाया भुगतान शीघ्र किया जाय। मृतक किसानों के आश्रितों को समुचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाय। राष्ट्रपति ने प्रतिनिधिमण्डल की बातों को गम्भीरता पूर्वक सुनने के उपरान्त केन्द्र सरकार से इस विषय में वार्ता करने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि किसान हितों की रक्षा देशहित में आवश्यक है। कांग्रेस प्रतिनिधिमण्डल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट, पूर्व विधायक राजकुमार शामिल रहे।