ऑपरेशन क्लीन से कश्मीर में होगा आंतकवादियों का सफाया

पिछले वर्ष जुलाई में जब हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी को मारा था, उसके बाद से ही घाटी में घुसपैठ जारी है और माहौल लगातार तनावपूर्ण बना हुआ है। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत खुद कई बार घाटी का दौरा कर चुके हैं। वर्ष 1990 के बाद से घाटी में आतंकियों को खदेड़ने के बाद सबसे बड़ा ऑपरेशन ऑपरेशन क्लीन अप लॉन्च हो चुका है। सेना ने मई में कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन की शुरुआत के साथ ही आतंकियों के खिलाफ सबसे बड़ा अभियान शुरू किया था। इस समय घाटी में करीब 4,000 से ज्यादा सेना के जवान, सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस के जवान इस ऑपरेशन का हिस्सा हैं।
शनिवार को सेना ने कश्मीर के सोपोर में लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकियों को मार गिराया। इसके साथ ही अब तक इस वर्ष सेना ने 122 आतंकियों का खात्मा कर डाला है। दिसंबर 2016 तक सेना ने घाटी में करीब 120 आतंकी मारे थे। आतंकियों के मारे जाने की आंकड़ें मे इजाफा होगा, इस बात की पूरी गारंटी है। सेना ने घाटी से आतंकियों के सफाए के लिए डेडलाइन तय की है। इस डेडलाइन के तहत घाटी में सर्दियों के शुरू होने से पहले सेना ने सभी आतंकियों को मार गिराने और घाटी को आतंकियों से आजाद कराने का लक्ष्य तय किया है। सेना ने कश्मीर के आतंकियों के खिलाफ अब अपनी रणनीति बदल ली है। मई में जब हिजबुल कमांडर सबजार भट को मार गया था तो उस ऑपरेशन ने साफ कर दिया था कि सेना किस तरह से कश्मीर खासतौर पर साउथ कश्मीर में मौजूद आतंकियों के खिलाफ आक्रामक हो गई है।

देश के इतिहास में 3 सर्वोच्च पद पर संघ विचारधारा के लोग

एनडीए के उम्मीद्वार वेंकैया नायडू को भारत के 13वें उपराष्ट्रपति के रूप में चुना गया है। वो भारत के 15वें उपराष्ट्रपति कार्यकाल को संभालेंगे। इनसे पहले हामिद अंसारी लगातार दो बार उपराष्ट्रपति रहे थे। यह पहली बार है जब भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पद पर संघ से जुड़े व्यक्ति आसीन हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संघ से काफी पुराना नाता है और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी छात्र जीवन में संघ से जुड़ गए थे। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी आरएसएस के प्रचारक रह चुके हैं। गौरतलब है कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान अपने भाषण में कहा था, आजाद भारत के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है जब भारत के सभी सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर एक ही विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति आसीन हैं।
उपराष्ट्रपति नायडू छात्र जीवन के समय 70 के दशक में आरएसएस से जुड़े थे। इस दौरान उनकी पहचान बतौर आंदोलनकारी छात्र के रूप में हो गयी थी। वेंकैया ने 1972 में जय आंध्र आंदोलन में भाग लिया था। इसके बाद 1973 से 74 तक आंध्र प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष भी रहे थे। बता दें कि नायडू बतौर स्वंय सेवक दूसरे उपराष्ट्रपति हैं। उनसे पहले भैरोसिंह शेखावत 2002 से 2007 तक उपराष्ट्रपति के पद पर रहे थे।

अयोध्या रामजन्म भूमिः देश दुनिया की नजरें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकेगी

देश विदेश में अयोध्या का नाम सुनते साथ ही हिन्दूओं की आस्था के प्रतीक श्रीराम की तस्वीर उभर कर सामने आ जाती है। इस मामले में नया घटनाक्रम यह है कि अब अयोध्या रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 11 अगस्त से करने का फैसला किया है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने 3 जजों की स्पेशल बेंच तैयार की है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को कोर्ट के बाहर सुलझाने का सुझाव दिया था। ये एक ऐसा विवाद है, जिसकी आंच में भारतीय राजनीति आजादी के बाद से ही झुलसती रही है। 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहा दी गई थी, जिसका मुकदमा आज भी लंबित है।
आपकों बताते चले कि देश की आजादी से पूर्व इस स्थान को लेकर दोनों पक्षों में विवाद है। एक ओर हिन्दू इसे श्री राम की जन्म स्थली बताकर राम मंदिर का निर्माण करना चाहते है वहीं मुस्लिम इसे बाबरी मस्जिद बताकर अपना पक्ष रख रहे है। दोनों के दावे अब तक कई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गये है। पूर्व में इलाहाबाद कोर्ट ने उक्त स्थान की खुदाई करवाकर जिस पक्ष के अवशेष मिलेंगे, उसका दावा पुख्ता माना जायेगा कहा था। जिस पर खुदाई के दौरान हिन्दूओं से संबधित अवशेष मिले जिस पर कोर्ट ने इस स्थान को हिन्दुओं का माना। मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे किये।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को कोर्ट के बाहर सुलझाने का सुझाव भी दिया। लेकिन कोई ठोस निर्णय सामने नही आ सका। अब फिर सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई 11 अगस्त से करने का फैसला किया है। अब देश दुनिया की नजरें फिर से हिन्दुस्तान की ओर होंगी। सुप्रीम कोर्ट के ट्रायल और फैसले से देश की राजनीति में इसका सीधा असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

लाल चौक पर तिरंगा फहराने में इसबार मिलेगी कामयाबी!

गुजरात मे अहमदाबाद की 14 साल की मुस्लिम बच्ची ने ऐलान किया है कि इस राखी के दिन वह श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा लहराएंगी। एक समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए तंजीम मेरानी ने कहा कि मैं राखी का त्योहार जवान भाइयों के साथ मनाने वाली हूं और जवानों को राखी भी बांधूंगी।
तंजीम ने बताया, पिछले साल उसे एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया था और जिस पर उसने वहीं पर तिरंगा फहराया था। तंजीम का कहना है कि इस साल वह लाल चौक पर तिरंगा फहराकर ही रहेगी। उसका कहना है कि इस बार मैंने रक्षाबंधन का दिन इसलिए चुना है क्योंकि यह भाई-बहन का त्योहार है। राखी का यह त्योहार मैंने सेना के जवान भाइयों के साथ मनाने का संकल्प लिया है।
तंजीम की इस कोशिश में परिवार का भी पूरा समर्थन है। तंजीम के पिता बताते है कि मुझे भी लगता है कि कश्मीर जाने के लिए यह सही वक्त नहीं है, लेकिन सही वक्त के लिए हम कब तक इंतजार करें? किसी न किसी को तो इस दिशा में पहल करनी ही होगी जैसे इस बार मेरी बेटी ने यह शुरुआत की है। मैं अपनी बेटी की कोशिश के साथ खड़ा हूं। यह एक त्योहार है और इसें हिंदू-मुस्लिम के चश्मे से नहीं देखना चाहिए।
गौरतलब है कि पिछले साल भी तंजीम श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराना चाहती थीं। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के कारण सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी थी। इस वजह से तंजीम को लाल चौक पर तिरंगा लहराने की अनुमति नहीं मिल सकी थी।

राज्यसभा चुनाव में दबेगा नोटा, कांग्रेस में मची खलबली

गुजरात राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को अब सुप्रीम कोर्ट से भी झटका लगा है। गुजरात की 3 सीटों पर 8 अगस्त को होने वाले चुनावों में नोटा प्रयोग पर स्टे लगाने की कांग्रेस की अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। इसका मतलब यह है कि राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग नोटा के विकल्प के साथ ही होगी। इससे पहले, कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के सामने दलील दी थी कि अगर नोटा पर स्टे नहीं दिया गया तो विधायकों के वोट दूसरे पक्ष के लोग खरीद लेंगे और उसके कैंडिडेंट्स चुनाव हार जाएंगे।
कांग्रेस ने कहा कि अगर नोटा का ऑप्शन बंद नहीं किया गया तो गुजरात चुनाव में यह भ्रष्टाचार का सबब बन सकता है क्योंकि मुकाबला बेहद कड़ा है। कांग्रेस की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है कि गुजरात में तीन राज्यसभा सीट पर चार कैंडिडेट्स खड़े हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह विधायकों को नोटा का विकल्प देने के मुद्दे पर 18 सितंबर को विस्तृत सुनवाई करेगा।
कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव में नोटा के इस्तेमाल से जुड़ा नोटिफिकेशन काफी पहले 2014 में जारी किया था, ऐसे में कांग्रेस को इसकी खामियां इस वक्त क्यों नजर आ रही हैं? सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, यह एक संवैधानिक मुद्दा है, जिसपर बहस की जरूरत है। कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा कि वह कांग्रेस की याचिका पर 2 हफ्ते में जवाब दे।
कोर्ट ने कांग्रेस के वकील से कहा कि जनवरी 2014 में चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के बाद से हुए कई राज्यसभा चुनाव हुए, उस वक्त आप कहाँ थे और अब जबकि ये आपके फेवर में नही है तब इसे क्यों चुनौती दे रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस बात पर सुनवाई के लिए तैयार है कि राज्यसभा चुनाव में नोटा का प्रावधान संवैधानिक है या नहीं, लेकिन सवाल ये है कि केवल इसी चुनाव के लिए ही क्यों ? चुनाव आयोग ने भी कोर्ट में अपना पक्ष रखा। आयोग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नोटा का प्रावधान किया गया है और उसके बाद कई चुनाव हुए जिसमे नोटा का इस्तेमाल भी हुआ।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद एनडीए सरकार ने इस मामले में रणनीतिक चुप्पी साध रखी है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि गुजरात चुनाव में नोटा के इस्तेमाल को लेकर ईसी की ओर से 24 जुलाई को जारी नोटिफिकेशन से सरकार का कोई संबंध नहीं है। गुजरात की सीटों के लिए होने जा रहे राज्यसभा चुनाव में नोटा के विकल्प का इस्तेमाल होने जा रहा है। बीजेपी ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी और बलवंत सिंह राजपूत को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस की तरफ से एकमात्र उम्मीदवार अहमद पटेल हैं। कांग्रेस ने नोटा के इस्तेमाल पर ऐतराज जताया है। कांग्रेस ने कहा है कि चुनाव आयोग बिना संवैधानिक संशोधन के राज्यसभा चुनाव में नोटा के विकल्प का इस्तेमाल नहीं कर सकता। कांग्रेस ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 84 का उल्लंघन है।
चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर हुए राजनीतिक विवाद पर करारा जवाब दिया। आयोग ने बुधवार को कहा कि राज्यसभा चुनाव में बैलट पेपर में नोटा के इस्तेमाल करने की पहली घटना नहीं है। आयोग ने आंकड़ों के साथ कहा कि 2014 से लेकर अब तक राज्यसभा के चुनाव 25 बार हुए जिनमें 95 सीटों पर वोटिंग हुई। इन सभी सीटों पर नोटा का इस्तेमाल हुआ था।

11 करोड़ नकदी बरामद, आभूषणों की कीमत का आंकलन करने में जुटी टीम

कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार और उनके सहायकों पर कथित कर चोरी के मामले को लेकर उनके कई ठिकानों पर चल रही आयकर विभाग की तलाशी में अब तक 11 करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी बरामद हुई है। गुजरात में राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर विधायकों को भाजपा के पाले में जाने से रोकने के लिए कांग्रेस के 44 विधायकों को बेंगलूरू के रिजॉर्ट में रखा गया और उनकी जिम्मेदारी शिवकुमार को दी गई। गुजरात राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल कड़े मुकाबले का सामना कर रहे हैं।
गुरुवार को लगातार दूसरे दिन भी कई ठिकानों पर छापेमारी जारी रही। आयकर अधिकारियों ने कई दस्तावेज, अकाउंट बुक्स और वित्तीय कागजात बरामद किए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी तक दिल्ली से करीब 8.33 करोड़ रुपये, बेंगलूरू से 2.5 करोड़ रुपये और मैसुर से 60 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। अधिकारी ने कहा, ‘‘विभिन्न ठिकानों से अभी तक करीब 11.43 करोड़ रुपये बरामद किए गए हैं। कुछ ठिकानों पर तलाशी चल रही है।’’
उन्होंने बताया कि तलाशी के दौरान मिले कुछ आभूषणों की कीमत का आकंलन किया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि विभाग कुछ कथित बेनामी संपत्ति समेत रियल एस्टेट में निवेशों से संबंधित दस्तावेजों का विश्लेषण भी कर रहा है। विभाग ने कहा कि वह कथित कर चोरी और रियल एस्टेट, आभूषण और अन्य क्षेत्रों में बड़े गुप्त निवेश के मामले में शिवकुमार की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि विभाग सिंगापुर और अन्य देशों में उनसे जुड़े निवेशों की जांच भी कर रहा है। आयकर विभाग ने कर चोरी के मामले में शिवकुमार के 64 ठिकानों और संपत्तियों पर कल तलाशी ली थी जिससे राजनीतिक तूफान आ गया था। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस शिवकुमार पर छापों के खिलाफ आज शहर में प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस ने केंद्र पर तानाशाही वाला रवैया अपनाने और लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाया है। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले शिवकुमार वोक्कालिंगा समुदाय के प्रभावशाली नेता हैं और देश के सबसे अमीर मंत्रियों में से एक हैं।
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव के लिए दायर किए गए हलफनामे में उन्होंने अपनी संपत्ति 251 करोड़ रुपये से ज्यादा की बताई थी। कांग्रेस आलाकमान से नजदीकी रखने वाले 55 वर्षीय शिवकुमार को पार्टी को मुश्किल से निकालने वाला माना जाता है। वह छह बार विधायक रहे हैं। उन्हें मुख्यमंत्री बनने की उनकी महत्वाकांक्षा के लिए भी जाना जाता है। रिजॉर्ट पर कल मारे गए छापे को लेकर संसद में भारी हंगामा हुआ तथा कांग्रेस ने इसे एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए अभूतपूर्व रूप से निशाना बनाने वाला बताया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि भाजपा के खिलाफ आवाज को दबाने के लिए यह राजनीति से प्रेरित कार्रवाई है।

गिलानी के बेटे की मांग, आने जाने का खर्च दे एनआईए

टेरर फंडिंग के सिलसिले में दिल्ली बुलाये गये हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के बेटे नसीम ने भारत सरकार से अजीब मांग की है। अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का छोटा बेटा नसीम गिलानी की मांग है कि जम्मू-कश्मीर सरकार उसे श्रीनगर से दिल्ली और दिल्ली से वापस श्रीनगर जाने का खर्च दे। अंग्रेजी वेबसाइट एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक एनआईए चीफ शरद कुमार तब आश्चर्यचकित रह गये जब उनके डेस्क पर अलगाववादी नेता नसीम गिलानी की ओर से एक पत्र आया। जम्मू कश्मीर के शेर ए कश्मीर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर नसीम गिलानी ने इस पत्र के जरिये कहा है कि एनआईए को सीधे उसे समन भेजने के बजाए यूनिवर्सिटी को भेजना चाहिए, ताकि वो दिल्ली आने जाने का खर्चा विश्वविद्यालय से ले सके। नसीम गिलानी ने कहा कि एनआईए को समन मेरे विश्वविद्यालय को भेजना चाहिए ताकि मैं महंगाई और ट्रेवलिंग एलाउंस ले सकूं। फिलहाल एनआईए ने नसीम की इस अपील को मान लिया है कि लेकिन उन्हें लगता है कि नसीम की इस मांग का मकसद कुछ और है।
बता दें कि टेरर फंडिग के इस केस में एनआईए ने लगभग आधा दर्जन अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार किया है। इसमें सैयद अली शाह गिलानी का दामाद अल्ताफ अहमद शाह भी शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नसीम गिलानी चाहता है कि यूनिवर्सिटी के जरिये समन मिलने पर वो ऐसी स्थिति पैदा कर दे ताकि एनआईए उसे पूछताछ के लिए अल्ताफ अहमद शाह के आमने-सामने ना ला सके। इस मामले में नसीम गिलानी का बड़ा भाई नईम गिलानी भी एनआईए के रडार पर है, लेकिन समन भेजे जाने के बावजूद बीमारी का बहाना बनाकर वो एनआईए के सामने पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हुआ है।
बता दें कि हुर्रियत नेताओं पर आरोप है कि इन लोगों ने प्रतिबंधित आतंकी संगठनों हिज्बुल मुजाहिद्दीन और लश्कर ए तैयबा के साथ मिलकर कश्मीर घाटी में हिंसा और हंगामा करने के लिए पाकिस्तान से फंड लिया। एनआईए ने इसी मामले में हुर्रियत के नेताओं को गिरफ्तार किया है। एनआईए को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान ऐसा सबूत मिलेगा जिससे सैयद अली शाह गिलानी पर भी मुकदमा चलाया जा सके। खबर है कि प्रवर्तन निदेशालय से पूछताछ के दौरान इस मामले में गिरफ्तार शबीर शाह ने गिलानी की ओर इशारा किया है और कहा है कि पाकिस्तान से आने वाले फंड का बड़ा हिस्सा गिलानी के पास जाता था। जांच एजेंसियां अब इस मामले में सबूत इकट्ठा कर रही हैं।

गुजरात पोत से नशे की सबसे बड़ी खेप पकड़ी

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने गुजरात तट के निकट एक व्यापारिक पोत से करीब 3,500 करोड़ रुपये की कीमत की 1,500 किलोग्राम हेरोइन जब्त की है जो नशीले पदार्थों की अब तक मिली सबसे बड़ी खेपों में से एक है। रक्षा प्रवक्ता ने आज यह जानकारी दी। एक रक्षा प्रवक्ता ने आज बताया कि आईसीजी, खुफिया ब्यूरो, पुलिस, सीमा शुल्क, नौसेना तथा अन्य एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं। रक्षा विभाग के जनसंपर्क अधिकारी अभिषेक मतिमान ने एक बयान जारी कर कहा, ‘‘ भारतीय तटरक्षक बल के पोत ‘समुद्र पावक’ ने गुजरात के तट के निकट एक व्यापारिक पोत का पीछा किया और उसको पकड़ा जिस पर से करीब 3,500 करोड़ रुपये की कीमत की तकरीबन 1,500 किलोग्राम हेराइन मिली।’’
बयान में कहा गया है, ‘‘खुफिया सूचना के आधार पर कल करीब 12 बजे पोत को पकड़ा गया। यह नशीले पदार्थ की अब तक की सबसे बड़ी खेप है।’’ उन्होंने बताया कि जब्ती के बारे में और जानकारियों का इंतजार है क्योंकि पोत अभी समुद्र में है। पोरबंदर विशेष अभियान समूह के एक अधिकारी ने बताया कि आईसीजी ने नशीले पदार्थ की खेप के संबंध में आज शाम करीब चार बजे एक बैठक बुलाई है।

उत्तर कोरिया को अमेरिका का जवाब, बम बरसाने वाले उड़ाए विमान

अमेरिका के अधिकारियों ने आज कहा कि उत्तर कोरिया द्वारा हाल ही में किए गए अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण के जवाब में शक्ति प्रदर्शन के लिए अमेरिकी बमवर्षकों ने कोरियाई प्रायद्वीप के ऊपर उड़ान भरी। दक्षिण कोरियाई और जापानी वायु सेनाओं के लड़ाकू विमानों के साथ यूएस बी-1बी बमवर्षकों ने 10 घंटे के द्विपक्षीय मिशन में हिस्सा लेते हुए अभ्यास किया। यह अभ्यास प्योंगयांग द्वारा गत शुक्रवार किए गए दूसरे आईसीबीएम परीक्षण के बाद किया गया। इस परीक्षण के बाद किम जोंग-उन ने कहा कि यह कदम दिखाता है कि देश अमेरिका में किसी भी लक्ष्य पर हमला करने की क्षमता रखता है।
पैसिफिक एयर फोर्सेज कमांडर जनरल टैरेंस ओ शॉनेसी ने अपने एक बयान में कहा,‘‘उत्तर कोरिया अब भी क्षेत्रीय स्थिरता पर सबसे सन्निकट खतरा बना हुआ है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यदि जरूरत पड़ी तो हम त्वरित, घातक अ‍ैर भारी बल से अपनी पसंद के समय और स्थान पर जवाब देने के लिए तैयार हैं।’’ अपनी प्रतिक्रिया में बीजिंग ने सभी पक्षों से संयम बरतने के लिए कहा है। अमेरिका से पहले हाल ही में उत्तर कोरिया ने अपने दूसरे मिसाइल का टेस्ट किया था जिसपर नेता किम जोंग ने कहा था कि पूरा अमेरिका हमारे निशाने पर है। किम जोंग उन ने शनिवार को कहा कि अंतर्महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का दूसरा परीक्षण यह दिखाता है कि उनका देश अमेरिका के मुख्य भूभागों तक हमला कर सकता है।
परीक्षण के घंटों बाद विश्लेषकों ने कहा कि लॉस एंजिलिस और शिकागो समेत अमेरिका के ज्यादातर इलाके अब उत्तर कोरियाई हथियारों की जद में हैं। कोरियाई सेन्ट्रल न्यूज एजेंसी ने कहा कि ह्वासोंग-14 मिसाइल -14 मिसाइल के 3,725 किलोमीटर की अधिकतम ऊंचाई तक पहुंचने और जापान के समुद्र में गिरने से पहले 998 किलोमीटर की दूरी तक जाने के बाद किम ने बड़ी संतुष्टि जताई। एजेंसी ने कहा कि यह परीक्षण इस बात की पुष्टि करने के लिए किया गया कि मिसाइल अधिकतम दूरी तक जाए और साथ ही मिसाइल के अन्य तकनीकी आयामों की जांच करने के लिए परीक्षण किया गया। एजेंसी ने कहा कि यह मिसाइल ‘‘बड़े आकार वाले, भारी परमाणु आयुध’’ ले जाने में सक्षम है। विश्लेषकों ने अनुमान जताया कि उत्तर कोरिया की पहली आईसीबीएम अलास्का तक पहुंच सकती है तथा यह नई मिसाइल और अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम है।

तो क्या मरीयम के कारण गई नवाज शरीफ की कुर्सी

पनामा पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज (शुक्रवार) पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को दोषी करार देते हुए उन्हें अयोग्य ठहराया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद उन्घ्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ ही पाकिस्तान के वित्त मंत्री को भी अयोग्य करार दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने एक मत से यह फैसला सुनाया है। इसमें जस्टिस आसिफ सईद खान खोसा के अलावा जस्टिस गुलजार अहमद, जस्टिस एजाज अफजल खान, जस्टिस इयाज उल अहसान और जस्टिस शेख अजमत सईद शामिल थे। जस्टिस खोसा वही जज हैं जिन्होंने पांच वर्ष पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को अयोग्य करार दिया था। इस फैसले के बाद उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

मरियम के छलके आंसू

सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद पाकिस्तान का राजनीतिक भविष्य एक बार फिर दांव पर है। गौरतलब है कि इस मामले की जांच के लिए बनाई गई जेआईटी ने अपनी रिपोर्ट में शरीफ को प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य ठहराने की सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुनकर नवाज की बेटी मरियम नवाज और बेगम कुलसुम नवाज की आंखों से आंसू छलक पड़े।

देश की राजनीति पर संकट

नवाज शरीफ से पद से हटाए जाने की सूरत में वहां पर छाई राजनीति अस्थिरता भारत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। ऐसे में देश की राजनीति में शून्य छा जाने से यह भी हो सकता है कि वहां की सत्ता पर एक बार फिर से सैन्य तंत्र हावी हो जाए, जैसा कि पहले होता रहा है। पाकिस्तान का यह इतिहास रहा है कि जब-जब देश की सत्ता कमजोर हुई है तब-तब वहां पर सैन्य ताकत उभरकर सामने आई है।