सीएम तीरथ सिंह रावत ने शाही स्नान पर पहुंचे श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर किया स्वागत, लिया संतो का आर्शीवाद

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने आज हरिद्वार में हर की पैड़ी पहुंचकर मां गंगा से प्रदेशवासियों की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की।

इस अवसर पर शाही स्नान के लिए मां गंगा के तट पर आए साधु-संतों और श्रद्धालुओं का मुख्यमंत्री ने स्वागत किया। इस अवसर पर श्री गंगा सभा के पदाधिकारियों ने भी मुख्यमंत्री का गंगाजली, प्रसाद और चुनरी भेंट कर स्वागत किया।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने सभी साधु-संतों का आभार माना। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर मां गंगा में शाही स्नान करने के लिए श्रद्धालु रात से ही जुटने लगे थे। जनता की सुविधा के लिए हमारी सरकार ने सभी इंतजाम कर रखे हैं। कई श्रद्धालुओं ने अलसुबह स्नान किया और वे सुरक्षित अपने घरों को लौटे। इसके पश्चात अखाड़े के साधु-संतों का स्नान शुरू हुआ और सभी ने शांतिपूर्ण तरीके से स्नान किया। सभी अखाड़े के साधु संतों का स्नान होने के पश्चात फिर जनता ने स्नान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ में जनता के लिए कोई भी रोक-टोक नहीं है, किसी से भी सख्ती नहीं की जाएगी। उन्होंने जनता से निवेदन किया कि कोविड-19 से बचाव की गाइडलाइन का पालन करने के साथ ही मास्क पहनने व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज कुंभ का प्रथम शाही स्नान है। इसे विशेष बनाने के लिए सभी साधु-संतों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि सभी साधु-संत काफी खुश नजर आ रहे हैं साथ ही प्रशासन भी जनता की समस्याएं दूर करने के लिए मुस्तैदी से लगा है। उन्होंने कहा कि दिव्य, भव्य और सुरक्षित कुंभ के आयोजन के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है।

महाशिवरात्रि पर शाही स्नान से पूर्व श्रद्धालुओं पर होगी पुष्प वर्षाः तीरथ सिंह रावत

हरिद्वार कुम्भ मेले में महाशिवरात्रि के अवसर पर पहले शाही स्नान में श्रद्धालुओं पर हेलीकाप्टर से पुष्प वर्षा की जाएगी। शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जरूरी सावधानियों का पालन करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि कुम्भ में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। आगंतुक श्रद्धालु गंगा जी में सुविधापूर्वक पवित्र स्नान कर सकें। संतों का सम्मान सबसे ऊपर है। कुम्भ की दिव्यता और भव्यता सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी को मिलकर प्रदेश को विकास की ओर ले जाना है। इसमें जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अधिकारी अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करें। उत्तराखण्ड का विकास हम सभी का दायित्व है। सभी लोग अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करें।

बैठक में प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक बंशीधर भगत, मुख्य सचिव ओमप्रकाश, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, मनीषा पंवार, प्रमुख सचिव आनंदवर्द्धन, आरके सुधांशु, सचिव अमित नेगी, नितेश झा, राधिका झा, दिलीप जावलकर, सौजन्या आदि उपस्थित थे।

उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ली पद व गोपनीयता की शपथ

उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री के रूप में तीरथ सिंह रावत ने पद व गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने राजभवन में उन्हें शपथ दिलाई। तीरथ छात्र राजनीति से ही सक्रिय रहे हैं। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मंत्री भी रह चुके हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद खंडूरी के सबसे करीबी लोगों में शामिल तीरथ सिंह को 2012 के विधानसभा में चुनाव में चैबट्टाखाल सीट से मैदान में उतारा गया, जहां उन्होंने जीत हासिल की। फरवरी 2013 में उन्हें पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई और 2015 में उन्हें प्रदेश की राजनीति से हटाकर राष्ट्रीय महासचिव का दायित्व दे दिया गया।

एक नजर में तीरथ सिंह रावत

पिता का नामः कमल सिंह रावत
जन्मतिथिः नौ अप्रैल 1964
निवासीः ग्राम सीरों, पट्टी असवालस्यूं, पौड़ी गढ़वाल।
शिक्षाः हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से समाज शास्त्र में परास्नातक।

राजनीतिक सफर

1983 से 1988 तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे। उसके बाद अभाविप के संगठन मंत्री और राष्ट्रीय मंत्री, गढ़वाल विवि में छात्र संघ अध्यक्ष व छात्र संघ मोर्चा (उत्तर प्रदेश) में प्रदेश उपाध्यक्ष रहे। भाजयुमो (उत्तर प्रदेश) के प्रदेश उपाध्यक्ष व राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे।

1997 में पहली बाद उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य निर्वाचित।
2000 में राज्य गठन के बाद उत्तराखंड की अंतरिम सरकार में शिक्षा राज्य मंत्री का दायित्व।
2007 में भाजपा के प्रांतीय महामंत्री बने।
2012 के विस चुनाव में चैबट्टाखाल से जीत हासिल की।
2013 में उत्तराखंड दैवीय आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के अध्यक्ष रहे।
वर्ष 2013 में ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।

पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद खंडूरी के सबसे करीबी लोगों में शामिल तीरथ सिंह को 2012 के विधानसभा में चुनाव में चैबट्टाखाल सीट से मैदान में उतारा गया, जहां उन्होंने जीत हासिल की। फरवरी 2013 में उन्हें पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई और 2015 में उन्हें प्रदेश की राजनीति से हटाकर राष्ट्रीय महासचिव का दायित्व दे दिया गया।

मैंने कभी भी यहां पहुंचने की कल्पना नहीं की

उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि मुझ पर भरोसा करने के लिए लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी चीफ का धन्यवाद करता हूं। मैं पार्टी का ऐसा कार्यकर्ता हूं जो एक छोटे गांव से आता है। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं यहां पहुंचूंगा। मैं जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश करुंगा।

जानिए तीरथ सिंह रावत के बारे में खास बातें…
राज्य के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत 2000 में उत्तराखण्ड के प्रथम शिक्षा मंत्री चुने गए थे।
वर्ष 1997 में वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य के सदस्य निर्वाचित हुए।
इसके बाद 2007 में उत्तराखण्ड के प्रदेश महामंत्री चुने गए थे। उसके बाद वह उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं।
वर्तमान में तीरथ सिंह रावत भाजपा के राष्ट्रीय सचिव के साथ साथ गढ़वाल लोकसभा से सांसद भी हैं।
पौड़ी सीट से भाजपा के उम्मीदवार के अतिरिक्त 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हिमाचल प्रदेश का चुनाव प्रभारी भी बनाया गया था।
तीरथ ने गढ़वाल विवि के बिड़ला परिसर श्रीनगर से छात्र राजनीति शुरू की।
वर्ष 1992 में वह सबसे पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से गढ़वाल विवि बिड़ला परिसर श्रीनगर के छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव लड़े और जीते।
इसके बाद वे अभाविप के प्रदेश संगठन मंत्री, भाजयुमो में प्रदेश उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य रहे।
2019 के लोकसभा चुनाव में तीरथ ने गढ़वाल संसदीय सीट से संसदीय राजनीति में पहला कदम रखा था।
पौड़ी-गढ़वाल सीट पर भाजपा प्रत्याशी तीरथ सिंह रावत ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मनीष खंडूड़ी को हराया था। तीरथ को 506980 और मनीष खंडूरी को 204311 वोट मिले थे।
वर्ष 2012 में विधानसभा चैबट्टाखाल से विधायक चुने जाने के बाद वर्ष 2013 में उन्हें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया।
वर्ष 2017 में सिटिंग विधायक होते हुए टिकट कटने के बाद पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी सौंपी।
वर्तमान में तीरथ हिमाचल प्रदेश के प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। रामजन्मभूमि आंदोलन में दो माह तक जेल में रहे तीरथ ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।
नवनिर्वाचित गढ़वाल सांसद तीरथ सिंह रावत ने प्रदेश अध्यक्ष, प्रभारी और प्रत्याशी के रुप में शत-प्रतिशत परिणाम दिए।
तीरथ को 2013 में भाजपा के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटें भाजपा की झोली में गईं।
लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी ने तीरथ को गढ़वाल सीट से प्रत्याशी बनाए जाने के साथ ही हिमाचल प्रदेश के प्रभारी का दायित्व भी सौंपा।
उन्होंने अपनी जीत के साथ हिमाचल प्रदेश की चारों सीटें जिताकर पार्टी में खुद के कद को और मजबूत किया।

एनकाउंटर को झूठ बताने वाले क्या माफी मांगेंगेः नरेश बसंल

राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने उत्तराखंड के लाल अमर शहीद दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा व अन्य बाटला हाऊस इनकाउंटर मे शामिल पुलिस अधिकारीयो व जवानों की वीरता को सलाम व शहादत को शत-शत नमन किया और नमन् किया। बतादें कि 13 सितंबर 2008 में दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट हुए थे, में 39 लोग निर्दोष मारे गए थे।

सासंद राज्य सभा नरेश बंसल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने बाटला हाउस एनकाउंटर केस में शामिल आंतकी आरिज खान उर्फ जुनैद को दोषी करार दिया है इससे यह साफ हो गया है कि एनकाउन्टर फर्जी नही था तथा जुनैद व उसके साथी ही दोषी थे।

सासंद बंसल ने कहा कि आतंकवादियों से लोहा ले रहे उत्तराखंड के लाल अमर शहीद दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा को आज इंसाफ मिला है। कोर्ट ने साफ कहा है,जुनैद दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा की शहादत का जिम्मेदार है।

उन्होंने उस समय एनकाउंटर को गलत तथा फर्जी बताने वाले,आतंकवादियों की मौत पर आंसू बहाने वालों से पुछा है कि क्या ममता बनर्जी, सोनिया गांधी, अरविंद केजरीवाल, दिग्विजय सिंह सहित जिन नेताओं ने एनकाउंटर को फर्जी बाताया था क्या वे सभी अब माफी मांगेंगे?

सासंद राज्य सभा नरेश बंसल जी ने सवाल किया है कि जो रोए थे आतंकवाद के जनाजे पर वो आतंकियो से क्या रिश्ता है बताएँ, यूँ ही देश को गुमराह करने का काम करतें रहें।

नारी शक्ति समस्या नहीं समाधानः स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज


अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर परमार्थ निकेतन की ओर से महिला सशक्तिकरण हेतु विभिन्न गतिविधियों का आयोजित हुआ। ऋषिकेश के खारास्रोत और चन्द्रेश्वर नगर की महिलाओं और बालिकाओं के साथ ’’शिक्षा, स्वास्थ्य, गरिमा, सुरक्षा और सशक्तिकरण’’ विषयों पर विशेष चर्चा और जिज्ञासा समाधान सत्र का आयोजन किया।

डिवाइन शक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष साध्वी भगवती सरस्वती को ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी देहरादून में ’’मोटिवेशनल स्पीकर विशेष अतिथि’’ के रूप में आमंत्रित कर साध्वी जी को सम्मानित किया। तत्पश्चात मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, कोलकत्ता की अध्यक्ष स्निग्धा शाह ने बहुत ही सौहार्दपूर्वक डा साध्वी भगवती सरस्वती को ’’समकालीन दुनिया में आध्यात्मिकता के महत्व’’ विषय पर उद्बोधन देने हेतु आमंत्रित किया। साध्वी जी ने आनॅलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से सभी को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनायें देते हुये सम्बोधित किया। ’

स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने आनॅलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भारत की मातृशक्तियों को शुभकामनायें दीं। ’’मातृशक्ति के बिना संसार की कल्पना नहीं की जा सकती। ‘‘मातृशक्ति के बिना तो संसार ही नहीं है। आप है तो संसार हैय बेटियाँ हैं तो सृष्टी है बाकी सब बाद में है। अपनी शक्ति का मातृशक्ति को अनुभव करना है और शक्ति को अपने भीतर जगाना है।

साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हो रहे सभी प्रकार के भेदभावों को हर जगह से समाप्त करना ही सही मायने में महिला सशक्तिकरण है। हम सभी को यह विचार करना जरूरी है कि जो नारी प्रति दिन अपने घरों, समुदायों और दुनिया में व्यापक स्तर पर प्रेम, सद्भाव, स्वास्थ्य और सुरक्षा लाने के लिए लगन से काम करती हैं उन सभी माताओं, बहनों, मित्रों शिक्षकों, कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों, लेखकों आदि अनेक क्षेत्रों में कार्यरत सभी नारी शक्तियों की सेवा को नमन जो अपने से अधिक देखभाल दूसरों की करती है। आज का दिन उन सभी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। साध्वी जी ने नारियों को संदेश देते हुये कहा कि आप स्वयं से प्रेम करें और फिर प्रेममय समाज की नींव रखें।

32 वाँ अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्वस के दूसरे दिन की शुरूआत आनॅलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से आध्यात्मिक व्याख्यान श्रृंखला में लॉस एंजिल्स में अगापे इंटरनेशनल स्पिरिचुअल सेंटर के संस्थापक डॉ माइकल बेकविथ ने ’जीवन का उद्देश्य, चेतना और आध्यात्मिक विकास’ विषय पर उद्बोधन दिया। तत्पश्चात योग और संगीत की कक्षाओं की शुरूआत हुई।

योग पूरे विश्व को भारत द्वारा दिया गया अमूल्य उपहारः राज्पाल उत्तराखंड

गढ़वाल मण्डल विकास निगम लिमिटेड व पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का समापन राज्यपाल बेबी रानी मौर्य द्वारा किया गया। समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि योग का मतलब जोड़ना है। योग पूरे विश्व को भारत द्वारा दिया गया अमूल्य उपहार है, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने योग को समूचे विश्व में एक नई पहचान दी है, युवा पीढ़ी का आहवान करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को योग को आत्मसात करना चाहिए। तभी हम विकसित भारत का निर्माण कर सकते हैं, योग एक साधना ही नहीं वरन एक सस्कृति है, जो कि ऋषिमुनियों ने कठिन तप से प्राप्त की है।

इससे पूर्व पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि योग की शक्ति से ही हम भारत को विश्व गुरू बना सकते हैं। आज विश्व में फैल रही तमाम वैश्विक बीमारियों से हमें योग ही बच सकता है कोरोना से लडने में योग ने अहम भूमिका का निर्वहन किया है।

वन मंत्री हरक सिंह रावत ने अपने सम्बोधन में कहा कि योग अब देवभूमि उत्तराखण्ड से पूरी दुनिया में आम लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। पश्चिमी देशों ने भी योग के महत्व को स्वीकार करते हुए योग को अपनाया है यही वजह है कि 21 जून को पूरी दुनिया योग दिवस मना रही है।

योग महोत्सव में उपस्थित विधान सभा अध्यक्ष प्रेम चन्द्र अग्रवाल ने कहा कि ऋषिकेश योग की धरती है और यहाँ से बहती हुई गंगा की तरह योग पूरी दुनिया में प्रवाहित हो रहा है। इस मौके पर विभिन्न देशों के उच्चायुक्तों ने भी कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। जिसमें बोसनियां के उच्चायुक्त मोहम्मद शिनजिक, नोर्थ मेसोडोनिया के राजदूत नेहथ ईमिनी, फिजी के उच्चायुक्तों कमलेश शशि प्रकाश एवं त्रिंडाड एण्ड टैबगो के राजदूत डाॅ0 रोजर गोपाल ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

मौके पर सचिव पर्यटन दिलीप जावलकार, डीएम टिहरी ईवा आशीष श्रीवास्तव गढ़वाल मण्डल विकास निगम के प्रबन्ध निदेशक, डाॅ आशीष चैहान, महाप्रबन्धक (पर्यटन), जितेन्द्र कुमार, महाप्रबन्धक (प्रशासन), अवधेष कुमार सिंह, महाप्रबन्धक (वित्त) एवं अभिषेक कुमार आनन्द आदि मौजूद रहे।

षड्यंकारियों के खिलाफ उत्तराखंड के हितैषियों को आना होगा आगे

आज उत्तराखण्ड गर्म है शायद राज्य से सर्दी ने मुंह मोड़ लिया है। आज हर ओर मुख्यमंत्री बदलवाने की दुकानें सजी थी। शायद जब उत्तराखंड बना तब हमारे शहीदों और माताओ ने ये नहीं सोचा था कि जिस राज्ये को बनाने के लिए उन्होंने संघर्ष किया है। वहाँ बाहरी लुटेरे आकर लूट करेंगे और हमारे लोग तमाशा देखेंगे। काश हर बार राज्ये में इस तरह से दुकाने न सजती तो हम भी बहुत आगे निकल गए होते।

…आखिर क्यों इस तरह की हवा चली क्या, किसी का भी दिल्ली से आना ये संकेत है कि मुख्यमंत्री बदलेगा। आखिर क्यों बदले जाए त्रिवेंद्र रावत, क्या इसलिए कि उन्होंने भ्रष्टाचार कम कर दिया या बाहरी लुटेरो की दुकान बंद करदी या यूं कहें कि चंद लोगो की जो भीड़ सचिवालय में दलाली करने की दलालो की फौज खत्म कर दी। इसलिए मुख्यमंत्री बदल दे या गैरसैण को राजधानी बना दी। इसलिए मुख्यमंत्री बदला जाए या सादगी गलत है हर ओर झुठे वादे और बातें होनी चाहिए। इसलिए मुख्यमंत्री बदला जाए।

आखिर दलालो का प्रवेश खोल दिया जाए उत्तराखंड को लूटने दिया जाए, शायद तब सबको सही लगेगा। ये जो मुख्यमंत्री बदलने की दुकान है ये चंद दलालो की है आखिर क्या जनता ने कोई मांग की है या कोई बड़ा घोटाला सामने आया हो। ये अलग है कि कुछ नासमझ अधिकारी गलती कर रहे है तो उनको हटाने की जगह सीधा निसाना मुख्यमंत्री क्यों ? क्या उन अधिकारियों की जांच की मांग नहीं होनी चाहिए कि कहीं वो ही तो ये खेल नहीं खेल रहे। आखिर ऐसा ईमानदार मुख्यमंत्री जिस पर कोई आरोप नहीं है जिसको जनता भी सज्जन ओर ईमानदार कहती हो। जिसको माताओं ओर बेटियों की चिंता हो। जिसको यहाँ के युवाओं का दर्द हो। उसको इन चंद गलत अधिकारियों और दलालो की भेट नहीं चढ़ने दिया जाना चाहिए।

उत्तराखंड के वो चिंतक और लोग जो वास्तव में उत्तराखंड का हित चाहते है उनको आगे आना चाहिए। नही तो चंद बाहरी लोग जो आजकल परेशान हैं वो वापस आकर राज करेंगे और आप सब तमाशा देखेंगे। ’जागो उत्तराखंड जागो’

त्रिवेंद्र के खिलाफ षड्यंत्रकारी फिर हुए बेनकाब

देहरादून। उत्तराखंड राज्य बने हुए 20 वर्ष गुजर गए। मगर, राजनीति के मामले में यहां कभी स्थिरता नहीं ठहरती है। पुराना रिकाॅर्ड खंगाला जाए तो यह साफ तौर पर सामने आ जाता है कि जब भी किसी भी पार्टी का मुख्यमंत्री बना है, उसे हटाने के नित नए षड्यंत्र गढ़े जाते है। किसी न किसी बहाने राजनीतिक चर्चाएं गर्म रहती है, ताकि सरकार को अस्थिर किया जा सके। इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला। जब तेजी से सोशल मीडिया और कुछ चैनलों में प्रायोजित खबरे चलाई गई कि सीएम त्रिवेंद्र बदले जा सकते है। मगर, त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हर बार की ही तरह इस बार भी विरोधियों को पराजित कर दिया।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भले ही गली-गली में जाकर भुट्टे न खाते हो, किसी दुकान पर जाकर जलेबी न खाते हो। मगर, वह कभी अपने लोगों को झूठे वादे करके बेवकूफ नहीं बनाते है। सीएम की छवि बेहद ही सरल और स्पष्टवादी रही है। शायद यही कारण है कि कुछ लोग उन्हें पसन्द न भी करते हों। इसके बावजूद सीएम त्रिवेंद्र अपनी माटी और राज्य के विकास के लिए वचनबद्ध है। जब से त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीएम का पद ग्रहण किया है। तभी से उनके विरोधी उन्हें सत्ता से बाहर करने में लगे हुए है। जिसके लिए समय-समय पर ऐसी अफवाहें चलाई जाती रही है, की सीएम अब हटे तब हटे। अब जबकि त्रिवेंद्र सरकर अपने चार साल पूरे करने जा रही है और एनडी तिवारी के बाद त्रिवेंद्र ही ऐसे सीएम होंगे। जो पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे, तब फिर से ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही है कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन होने जा रहा है। जो कि शर्मनाक है।

अब उत्तराखंड की जनता भी समझ चुकी है कि राज्य में प्रचंड बहुमत की त्रिवेंद्र सरकार ही मजबूत नेतृत्व दे सकती है। बीते रोज देहरादून में केवल कोर ग्रुप की बैठक आयोजित हुई, जिस पर त्रिवेंद्र के विरोधी सक्रिय हुए और खूब अफवाहें फैलाई गई। लेकिन फिर वही हुआ, जो इन 4 सालों में हुआ, त्रिवेंद्र अजेय है और उनके विरोधी पस्त है। अजेय त्रिवेंद्र फिर से राज्य में भाजपा की सरकार बनाने जा रहे है।

अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव 2021ः मन स्थिर रखते हुए शारीरिक व मानसिक विकारों से मुक्ति पाने का साधन है योग

गढ़वाल मण्डल विकास निगम लिमिटेड व पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के चैथे दिन योगसाधकों ने योग की विभिन्न क्रियाओं का अभ्यास कर योगाचार्यों से योग की बारिकियों के गुरमंत्र लिए।

प्रातःकालीन सत्र में आर्ट ऑफ लिविंग के मोहित सती ने मुख्य पाण्डाल में अष्टांग योग एवं सूक्ष्म व्यायाम के बारे में बताते हुए कहा कि हमारे जीवन के हर पहलू में योग छिपा हुआ है, जाने अनजाने हमारी दिनचर्या के पूरे क्रियाकलाप योग से जुड़ते हुए जीवन के अविभाज्य अंग बने हुए हैं। योग केवल शरीर पर ही काम नहीं करता वरन यह मन को शक्तिशाली व तनाव रहित बनाता है। उन्होंने कहा कि कमजोर शरीर को शक्तिशाली मन चला सकता है, परन्तु एक शक्तिशाली शरीर को कमजोर मन नहीं चला सकता है। योग क्रियाओं के द्वारा मन को स्थिर रखते हुए षाररिक एवं मानसिक विकारों से मुक्ति पाने का उपक्रम ही योग है।

अष्टांग योग के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके आठ अंग हैं, यम, नियम, आसन, प्राणायाम, धारणा, ध्यान, प्रतिहार और समाधि इनको भले ही अलग-अलग देखा जाता है मगर ये एक दूसरे से जुडे हुए हैं। पहले छः को जोड़कर ध्यान लगता है और तब वह समाधि की और जाता है, उन्होंने कहा कि घरों में काम करने वाली महिलायें अपने दिनभर की दिनचर्या के दौरान जो काम करती हैं, उस प्रक्रिया में भी जाने अनजाने योग छिपा हुआ रहता है। योग सिर्फ आसन नहीं है वरन यह मन, ष्वास व षरीर को जोड़ने वाली कला है।

दूसरी तरफ नगर पालिका हाल में हठ योगी सन्त स्वामी जीतानन्द ने अभयान्तर क्रिया योग, दण्ड क्रिया, संकुचन प्रसारण, पाद ग्रिहवा योग का अभ्यास कराते हुए इसकी उपयोगिता के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी उन्होंने कहा कि यह क्रिया षरीर को स्वस्थ रखने में इतनी सहायक है कि अन्य योगों की आवष्यकता नहीं पड़ती है। यदि व्यक्ति इन योग क्रियाओं को करता रहे तो उसके जीवन में आरोग्यता का साम्राज्य स्थापित हो जायेगा।

लाईट एण्ड सॉउण्ड हाल में संस्कृत विष्वविद्यालय के प्रोफेसर, डॉ लक्ष्मी नारायण जोषी ने नाड़ी विज्ञान व योग चिकित्सा के बारे में बताते हुए कहा कि शरीर की धमनियों में रक्त संचार से कोई भी अंग सहजता से काम करता रहता है, लेकिन जिस दिन रक्त संचार की यह सहजता धीमी पड़ जाये तो अंगों में विकार उत्पन्न हो जाता है इसलिए योग से शरीर के पूरे तन्त्र को ठीक रखा जा सकता है ताकि सारे अंग प्रत्यंग सही व सुचारू रूप से काम करते रहें। उन्होंने कहा कि नाड़ी चिकित्सा विज्ञान तीन सिद्धान्तों पर काम करता है। पहला-हृदय से षरीर के अंगों को निर्बाध गति से रक्त की आपूर्ति करना दूसरा-मस्तिष्क से निकलने वाली नाड़ियों द्वारा रक्त की आपूर्ति सभी अंगों को मिलते रहना तीसरा-प्राण ऊर्जा की आपूर्ति का शरीर के सभी अंगों तक पहुँचते रहना।

योग महोत्सव में ‘‘पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट’’ दिल्ली द्वारा पिरामिड ध्यान षक्ति योग द्वारा योग साधकों को ध्यान योग के बारे में बताया गया। इस अवसर पर उक्त संस्था की विभा गुप्ता व शक्ति गुप्ता द्वारा बताया गया कि ध्यान योग हमें स्वयं की सांसों से जोड़ना सिखाता है। सांसें सदा से हमारे साथ हैं और मृत्यु पर्यन्त हमारे साथ रहेंगी परन्तु हम उनके साथ कभी नहीं रहे। हम सांसां के साथ रहना सीख रहें हैं, हमें सहज सांसों को सहज रूप में सहज भाव से साक्षी होकर देखना है। क्योंकि सांस ही हमारी गुरू और मित्र दोनों हैं, जब गुरू मित्र बन जाय तो हमें अपनी समस्या के समाधान के लिए किसी और के पास जाने की आवष्यकता नहीं होती।

सांय कालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में त्रिभुवन महाराज व सुमित कुटानी द्वारा षानदार प्रस्तुति दी गई जो दर्षकों के आकर्शण का केन्द्र रहा। योगनगरी मुनि की रेती ऋषिकेश में योग महोत्सव के चैथे दिन विभिन्न विभागों द्वारा लगाये गये स्टालों पर भी प्रतिभागियों व आगन्तुकों की भी काफी भीड देखने को मिली। जिसमें उद्योग विभाग, आयुश विभाग, आध्यात्म विज्ञान व सत्संग केन्द्र जोधपुर राजस्थान का स्टॉल आकर्शण के केन्द्र रहे वही गढ़वाल मण्डल विकास निगम लि0 द्वारा गढ़वाली व्यंजनों का स्टॉल लगाया गया जिसमें बुराँष चाट, कुलथ अनार सोरबा, गहत चाट, कडाली सोरबा, राजमा गलावटी कबाब, मडुवा समोसा चॉट, बुराँस पकोड़े, बुराँस जैली, ब्रॉउन राईस पुडिंग, देहरादूनी पुडिंग आदि परोसे जा रहें हैं।

मौके पर जीएमवीएन के प्रबन्ध निदेषक, डॉ. आशीष चैहान, महाप्रबन्धक (पर्यटन), जितेन्द्र कुमार, महाप्रबन्धक (प्रशासन), अवधेष कुमार सिंह, महाप्रबन्धक (वित्त) एवं अभिषेक कुमार आनंद आदि मौजूद रहे।

महाकुम्भ में संतों के दर्शन मात्र से जीवन होता है सफलः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने हरिद्वार में पंचायती अखाड़ा निरंजनी की पेशवाई में शामिल साधु-संतों से आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि महाकुम्भ में संतों के दर्शन मात्र से ही जीवन सफल हो जाता है। संतों के आशीर्वाद से सरकार दिव्य व भव्य और सुरक्षित कुम्भ के आयोजन में पूरी तरह सफल होगी।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने हरिद्वार भ्रमण के दौरान सर्वप्रथम पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की छावनी एसएमजेएन पीजी कॉलेज में पहुंचे। जहां महाकुम्भ की पहली पेशवाई अखाड़े की ओर से निकलनी थी। मुख्यमंत्री ने यहां पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि, अखाड़े के सचिव व मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविन्द्र पुरी, अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद आदि संतों के साथ पूजन कर पेशवाई को रवाना किया।

इसके बाद मुख्यमंत्री पंचदशनाम जूना भैरव अखाड़ा मायादेवी मंदिर में दर्शन पूजन करने पहुंचे। वहां उन्होंने पूजा अर्चना कर मां से दिव्य व भव्य कुंभ के आयोजन का आशीर्वाद मांगा। उन्होंने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरि गिरि आदि से आशीर्वाद लिया। परिसर में ही स्थापित दत्रात्रेय चरण पादुका के साथ ही श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा चरण पादुका का पंच अग्नि अखाड़ा में पूजा की।

यहां से मुख्यमंत्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा कनखल पहुंचे। वहां उन्होंने अखाड़े के महंत रविन्द्रपुरी आदि के साथ धर्मध्वजा का पूजन किया। संतों से आशीर्वाद लेने और कुम्भ की व्यवस्थाओं पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री कनखल स्थित जगदगुरु आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने जगदगुरू शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम से आशीर्वाद प्राप्त किया। वह कनखल के ही शंभू पंचायती अटल अखाड़ा पहुंचे। उन्होंने मंदिर में दर्शन के बाद परिसर में स्थापित धर्मध्वजा का भी पूजन किया।

इसके बाद मुख्यमंत्री बैरागी कैंप कनखल के अखिल भारतीय पंच निर्मोही अनि अखाडे़ पहुंचे। वहां हनुमान मंदिर में पूजा कर अखाड़े के अध्यक्ष महंत राजेंद्र दास महाराज आदि से आशीर्वाद लिया।

इससे पूर्व गुरूकुल कांगड़ी में बने हैलीपैड पहुंचने पर मुख्यमंत्री का मेलाधिकारी दीपक रावत, आईजी कुंभ संजय गुंज्याल, जिलाधिकारी सी. रविशंकर, वरिष्ष्ठ पुलिस अधीक्षक कुंभ जन्मेजय खंडूड़ी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार सेंथिल अबूदई कृष्ण राज एस, दायित्वधारी डा0 विनोद आर्यां, भाजपा जिलाध्यक्ष डा0 जयपाल सिंह चैहान, जिला महामंत्री विकास तिवारी, नरेश शर्मा, विमल कुमार, उज्जवल पंडित, लव शर्मा आदि ने स्वागत किया।