नाना को पहाड़ी संस्कृति से सीएम ने कराया रुबरु

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नाना पाटेकर को पहाड़ी टोपी पहनाई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड में फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। फिल्म नीति को और अधिक आकर्षक बनाया जा रहा है ताकि राज्य में अधिक से अधिक फिल्म निर्माता आयें। सिंगल विंडो सिस्टम से शूटिंग की अनुमति प्रदान की जा रही है। शूटिंग हेतु कोई भी शुल्क नही लिया जा रहा है। 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के अन्तर्गत उत्तराखण्ड राज्य ने मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट (स्पेशल मेंशन) पुरस्कार प्राप्त किया है।
फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड का नैसर्गिक सौन्दर्य फिल्मों की शूटिंग के लिए बहुत अच्छा है एवं फिल्मांकन के लिए वातावरण भी बहुत अच्छा है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड के लोग बहुत अच्छे हैं, यहां के लोगों के व्यवहार में सौम्यता है। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड में फिल्म शूटिंग का उनका अच्छा अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि वे उत्तराखण्ड में अपना घर बनाना चाहते हैं। नाना पाटेकर उत्तराखण्ड में एक मराठी फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं।

वन्यजीव सप्ताह का शुभारंभ कर सीएम ने की कई घोषणाएं

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को लच्छीवाला नेचर पार्क में राज्य वन्यजीव सप्ताह 2022 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राजाजी नेशनल पार्क की ऑफिशियल वेबसाइट लॉच की एवं राजाजी नेशनल पार्क के लिए 2 रैपिड रिस्पांस वाहन का लोकार्पण भी किया। वन्यजीवों से हुई मवेशी एवं फसल क्षति के लिए 16 लोगों को मुआवजा चेक भी मुख्यमंत्री ने प्रदान किये।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य वन्यजीव सप्ताह 2022 के शुभारंभ के अवसर पर घोषणा की कि वन्यजीवों द्वारा वयस्क एवं अवयस्क की मृत्यु पर देय अनुग्रह राशि की दर को 4 लाख रूपये से बढ़ाकर 5 लाख रूपये किया जायेगा। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को देय अनुग्रह राशि को 50 हजार रूपये से बढ़ाकर 1 लाख रूपये किया जायेगा। प्रदेश में राजकीय ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले वन कर्मियों के परिजनों को सम्मान स्वरूप 15 लाख रूपये अनुग्रह राशि के रूप में भुगतान किया जायेगा। प्रदेश में जिम कॉर्बेट हैरिटेज ट्रेल की स्थापना की जायेगी। जिसमें कॉर्बेट के जीवन से जुड़े स्थानों को चिन्हित कर वहां पर ईको पर्यटन की विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा दिया जायेगा। इसमें चम्पावत, तल्लादेश, मंच, बूम, कालाढूंगा, चूका, दूर्गा पीपल, देवीधूरा, चौगढ़, कालाढूंगी, नैनीताल, मोहान, काठ की नाव, कांडा, मुक्तेश्वर एवं रूद्रप्रयाग जैसे स्थानो पर विशेष पट्टिका का निर्माण किया जायेगा, इसके साथ ही ट्रैक मार्गों का जीर्णाेद्धार किया जायेगा और होम स्टे को बढ़ावा दिया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वन विभाग द्वारा शिक्षा विभाग के सहयोग से प्रदेश के विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के बीच मानव-वन्यजीव संघर्ष के निवारण की जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जायेगा। प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष निवारण में सकारात्मक सहयोग एवं त्वरित कार्यवाही के लिए 10 संवेदनशील वन प्रभागों में त्वरित कार्यवाही दल का गठन किया जायेगा, 5 स्थानों पर त्वरित कार्यवाही दल का गठन पहले ही किया जा चुका है। भारत सरकार से कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में गर्जिया पर्यटन जोन को प्रारम्भ करने के लिए अनुमति प्रदान हो चुकी है, इसे शीघ्र ही प्रारंभ किया जायेगा। शिवालिक एलीफेंट रिजर्व की पुनर्स्थापना की जायेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि प्रत्येक जिले में प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर एक-एक नए पर्यटन स्थल को विकसित किए जाएं। नये पर्यटन स्थलों का निर्माण में विशेष ध्यान रखा जाए कि उनके प्राकृतिक स्वरूप से अधिक छेड़छाड न हो। उन्होंने कहा कि वन्यजीव हमारी आस्था और संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। हमारी संस्कृति में देवताओं के साथ वन्यजीवों को भी पूजनीय माना गया है। वन्यजीवों के संवर्धन एवं संरक्षण की जिम्मेदारी सबकी है। मानव एवं वन्य जीव संघर्ष को कम करने की दिशा में तेजी से कार्य करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से राज्य में इकोनॉमी और ईकोलॉजी में सामंजस्य स्थापित करने के लिए अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। आज संपूर्ण विश्व का वन्यजीव संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील मुद्दे पर ध्यान गया। उन्होंने कहा क्लाइमेट चेंज जैसे गंभीर मुद्दों पर आज विश्व चिंता कर रहा है एवं इन मुद्दों पर दूरदर्शी सोच के साथ कठोर नीति बनाए जाने की आवश्यकता है। पर्यावरण एवं विकास में संतुलन बनाना बहुत जरूरी है।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की परंपराओं में वनों एवं वन्यजीवों का महत्वपूर्ण स्थान है। हमारी आर्थिकी को बढ़ावा देने में भी वनों का महत्वपूर्ण योगदान है। हमारे राज्य के लोग जंगलों वन्य जीव के संरक्षण हेतु बेहद संवेदनशील एवं जागरूक हैं। आर्थिक मजबूती के साथ पर्यावरण की रक्षा हमारी प्राथमिकता है। वनों एवं वन्यजीव को संरक्षित करने का संदेश हमारी संस्कृति में गानों के माध्यम से भी दिया गया है।
इस अवसर पर विधायक बृजभूषण गैरोला, प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक विनोद कुमार सिंघल, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ डॉ. समीर सिन्हा, निदेशक राजाजी टाइगर रिजर्व डॉ. साकेत बडोला एवं वन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

स्वच्छता के प्रयासों को सीएम ने सराहा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आजादी के अमृत महोत्सव के अन्तर्गत राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित स्वच्छता सर्वेक्षण 2022 में देश के 100 से कम निकाय वाले राज्यों में उत्तराखंड को तीसरा स्थान प्राप्त होने, देश भर में गंगा नदी के समीपवर्ती निकायों में हरिद्वार को प्रथम स्थान प्राप्त होने पर प्रदेशवासियों को बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के लंढौर कैंट, डोईवाला, नरेन्द्र नगर तथा रामनगर का चयन स्वच्छ भारत मिशन के तहत किये जाने पर निकायों के प्रयासों को सराहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर राज्य को यह सम्मान स्वच्छता के संदेश को जन-जन तक पहुचाने में मददगार होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पर्यटन, फिल्मांकन एवं स्वास्थ्य के साथ अब स्वच्छता के लिये राष्ट्रीय स्तर पर मिले यह पुरस्कार हमें प्रेरणा देने का कार्य भी करेंगे।

स्थानीय कलाकारों के द्वारा किया जा रहा बेहतरीन मंचन

1955 से स्थापित सुभाष बनखंडी श्री रामलीला कमेटी के द्वारा रंगमंच के छठे दिन केवट लीला, दशरथ मरण, भरत विलाप और चित्रकूट की लीलाओं का मंचन स्थानीय कलाकारों द्वारा दिया गया।
केवट लीला में दिखाया गया कि जब प्रभु राम सरयू नदी को पार करने के लिए केवट से मदद मांगते हैं तो केवट उनसे कहता है कि मैं जिस तरह आज आपको नदी पार कर आ रहा हूं हे प्रभु आप भी मुझे भवसागर पार कराना। केवट और श्री राम के द्वारा मार्मिक व बहुत सुंदर लीला का मंचन किया गया। वही अयोध्या में राजा दशरथ को जब मंत्री सुमंत के द्वारा पता चलता है कि श्रीराम वन से नहीं लौटे तो दशरथ उनके वियोग में अपने प्राण त्याग देते हैं। इस दुखद दृश्य को देखकर कई श्रद्धालुओ की आंखें भर आई और पूरा पंडाल भावुक हो गया।
भरत विलाप की लीला में दिखाया गया कि पिता की मृत्यु के बाद जब भरत को महल बुलाया जाता है तो उनके द्वारा अपनी मां से नाराजगी जताई जाती है और मंथरा को धक्के मार कर बाहर निकाल दिया जाता है। इसके बाद भरत श्री राम से मिलने के लिए वन जाते हैं और उनसे आग्रह करते हैं कि आप वापिस आ जाइए लेकिन श्रीराम अपने पिता के वचन को निभाने के लिए भरत को मना लेते हैं। जिस पर भरत भी उनकी तरह वनवासी जीवन बिताने की बात कहकर उनकी खड़ाऊ लेकर वापस लौट जाते हैं। चित्रकूट लीला में दिखाया गया कि श्री राम चित्रकूट में कुटिया बनाकर माता सीता और अपने भाई लक्ष्मण के साथ वनवासी जीवन बिताने लगते है।
इस अवसर पर रामलीला कमेटी सुभाष बनखंडी के अध्यक्ष विनोद पाल, महामंत्री हरीश तिवाड़ी, राजेश दिवाकर, राकेश पारछा, दीपक जोशी, रोहताश पाल, हुकुम चंद, मनमीत कुमार, पप्पू पाल, संजय शर्मा, प्रशांत पाल, महेंद्र कुमार, अनिल धीमान, ललित शर्मा, दया शंकर पांडेय, अशोक मौर्य, सुभाष पाल, पवन पाल, नीतीश पाल आदि उपस्थित रहे।

2 अक्टूबर को देहरादून से रामपुर तिराहा पहुंचेगा ‘प्रवासी-निवासी मार्च‘

प्रवासी उत्तराखंडियों को एकजुट-एकमुट करने की कवायद नये सिरे से हो रही है। हस्तक्षेप संगठन ने यह पहल की है। संगठन दो अक्टूबर को देहरादून से रामपुर तिराहा तक साइकिल मार्च का आयोजन कर रहा है। इसकी शुरुआत 29 सितम्बर से हो रही है। इस मार्च में 20 शहरों के प्रवासी उत्तराखंडी साइकिलिस्ट भाग लेंगे। संगठन के अध्यक्ष केशर सिंह बिष्ट ने बताया कि इस रैली का मुख्य उद्देश्य प्रवासी लोगों को एकजुट करना है ताकि पहाड़ के संवेदनशील मुद्दों पर लोग मुखर हो सकें।
हस्तक्षेप संगठन के तहत आयोजित इस साइकिल रैली को प्रवासी निवासी मार्च का नाम दिया गया है। संगठन के अध्यक्ष केशर सिंह बिष्ट ने बताया कि इस मार्च का उद्देश्य उत्तराखंड के संवेदनशील मुद्दों पर ’प्रवासियों’ की संवेदनशीलता को मुखर करना है साथ ही अपनी मूल भूमि से अलग-थलग पड़े ’प्रवासियों’ को ’निवासी मुद्दों’ पर एकजुट करना व राज्य की मूल धारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में यह एक नई पहल है। इसके माध्यम से प्रवासियों व निवासियों’ को एकजुट कर उनके बीच आपसी संवाद को सशक्त करना है।
साइकिल मार्च में देश भर से विभिन्न प्रवासी लोगों का 20 से भी अधिक कारों का काफिला रहेगा। साथ ही एक मेडिकल वैन भी मौजूद रहेगी। मार्च के दौरान उत्तराखंड आंदोलन के गीतों से गुंजायमान ट्रक व उसमें सवार ’मार्च’ के अन्य सहयोगी और सांस्कृतिक दल भी रहेगा। काफिले में शामिल लोगों के लिए ’पहाड़ी भोज’ का वाहन भी साथ चलेगा।

पर्यटन के सर्वांगीण विकास के लिए प्रदेश को मिला प्रथम पुरस्कार

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर उत्तराखंड राज्य को पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा बेस्ट एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन और पर्यटन के सर्वांगीण विकास के लिए प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया है। प्रदेश के पर्यटन व संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ से यह पुरस्कार प्राप्त किया। इस अवसर पर सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे भी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड को ये पुरस्कार मिलने पर पर्यटन मंत्री महाराज ने समस्त प्रदेशवासियों और पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों को बधाई दी। महाराज ने कहा कि यह सम्मान उत्तराखंड के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य देश-विदेश के सैलानियों को प्रदेश में आने का निमंत्रण देता है जहां पर्यटन की सभी श्रेणियों में हर प्रकार की सुविधाएं और अवसर उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि मंगलवार को ही मसूरी में हेलीकॉप्टर के माध्यम से हिमालय दर्शन की सेवा का भी शुभारंभ किया गया है।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने कहा पर्यटन विभाग उत्तराखंड में पर्यटकों को आकर्षित करने वाली कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को मिले दोनों पुरस्कार यह सिद्ध करते हैं कि प्रदेश को लेकर पर्यटकों के बीच लोकप्रियता निरंतर बढ़ रही है। श्री महाराज ने कहा कि हिमालय दर्शन सेवा शुरू होने से प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में और बढ़ोत्तरी होगी। पर्यटक जॉर्ज एवरेस्ट से हेलीकॉप्टर के माध्यम से हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियों और उत्तराखंड के अलौकिक नैसर्गिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे।

पर्यटन के क्षेत्र में राज्य में उठाये गये नए कदमों की जानकारी देते हुए सतपाल महाराज ने कहा कि पर्यटकों की बढ़ती हुई रूचि को देखते हुए पर्यटन विभाग ने विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर एक बहुत ही आकर्षक फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी कॉन्टेस्ट का भी शुभारंभ किया है। इसके अंतर्गत पांच विभिन्न श्रेणियों में फोटो एवं वीडियो ऑनलाइन आमंत्रित किए जा रहे हैं। इस कॉन्टेस्ट के माध्यम से पर्यटन प्रेमियों को 25 लाख रुपए से भी अधिक के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

महाराज ने बताया उत्तराखंड पर्यटन द्वारा देशभर के ट्रैवल इनफ्लुएंसर के लिए भी एक आकर्षक योजना लांच की गई है जिसके अंतर्गत अंग्रेजी ही नहीं अपितु क्षेत्रीय भाषाओं में वीडियो बनाने वाले ट्रैवल इनफ्लुएंसर का इंपैनलमेंट पर्यटन विभाग में किया जाएगा। इसके पश्चात उन्हें उत्तराखंड में विभिन्न स्थानों पर परिचयात्मक भ्रमण अर्थात फैमिलियराइजेशन टूर आयोजित करवाए जाएंगे, जो उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रायोजित होंगे। श्री महाराज ने कहा कि हमारी योजना है कि ट्रैवल और टूरिज्म क्षेत्र के इनफ्लुएंसर्स के माध्यम से उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, यहां की लोक कलाएं, यहां की ग्रामीण संस्कृति, यहां की एडवेंचरस भू-पारिस्थितिकी, होमस्टे, अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव और पौष्टिक व्यंजन देश के कोने-कोने तक पहुंचें।

पर्यटन मंत्री महाराज ने कहा, प्रदेश में शीतकालीन पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए इस बार कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इनमें अक्टूबर 2022 से जनवरी 2023 तक होने वाला ट्रैक ऑफ द ईयर-पिंडारी ग्लेशियर और बागची बुग्याल, मसूरी व नैनीताल में दिसंबर 2022 में आयोजित होने वाला विंटर लाइन कार्निवाल, दिसंबर 2022 से जनवरी 2023 तक चंपावत में राफ्टिंग चौंपियनशिप, फरवरी 2023 में औली में आयोजित होने वाली नेशनल स्कीइंग चौंपियनशिप और मार्च 2023 में ऋषिकेश में होने वाला अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव जैसे आयोजन शामिल हैं।

मुख्य सचिव ने पुनर्निर्माण कार्याे का निरीक्षण किया

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने मंगलवार को हेमकुंड साहिब और बद्रीनाथ धाम में यात्रा व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ ही मास्टर प्लान के तहत संचालित पुनर्निर्माण कार्याे का निरीक्षण किया।
हेमकुंड साहिब में इमरजेंसी रेस्क्यू कार्याे के लिए नव निर्मित हैलीपेड, ट्रैक रेलिंग, सुलभ शौचालय व अन्य निर्माण कार्याे का निरीक्षण करने के साथ मुख्य सचिव ने हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा पहुंचकर गुरु दरवार में मत्था टेका।
इसके बाद मुख्य सचिव हेलीकॉप्टर से बद्रीनाथ पहुंचे और यहां पर मास्टर प्लान के अन्तर्गत संचालित पहले चरण के पुनर्निर्माण कार्याे का जायजा लेते हुए निर्माण कार्याे में तेजी लाने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने मुख्य सचिव को बद्रीनाथ में निर्माण कार्याे की प्रगति से अवगत कराया। इस दौरान मुख्य सचिव ने भगवान बद्रीनाथ के दर्शन करने के साथ ही बद्रीनाथ से मूसा पानी ताक बॉर्डर डेवलपमेंट प्लान के अन्तर्गत सड़क मार्ग का निरीक्षण भी किया।
निरीक्षण के दौरान अधीक्षण अभियंता राजेश शर्मा, एसडीएम कुमकुम जोशी, गावर कन्स्ट्रक्शन लि. के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पीएल सोनी, ईओ सुनील पुरोहित सहित निर्माणदायी एवं कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारी मौजूद रहे।

माता अहिल्या का उद्धार कर श्रीराम ने श्राप से दिलाई मुक्ति

सुभाष बनखंडी श्री रामलीला कमेटी के द्वारा रंगमंच के तीसरे दिन श्रीराम जन्म, श्री सीता जन्म, ताड़का और सुबाहु वध व अहिल्या उद्धार की लीलाओं का मंचन स्थानीय कलाकारों द्वारा दिया गया।
श्रीराम जन्म की लीला में दर्शाया गया कि राजा दशरथ की संतान ना होने के चलते उनके द्वारा एक यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसके पश्चात उनकी तीन रानियों को चार पुत्रों की प्राप्ति हुई। वहीं, श्री सीता जन्म में दर्शाया गया कि राजा जनक के यहां अकाल पड़ने की वजह से ऋषि-मुनियों ने उन्हें स्वयं हल चलाने की सलाह दी गई। जिसके फलस्वरुप राज्य में वर्षा होने की संभावना जताई गई। राजा जनक के द्वारा हल चलाने पर पृथ्वी से एक घड़े में उन्हें एक कन्या की प्राप्ति हुई। जिसका नाम सीता रखा गया और राज्य में वर्षा होने से अकाल की समस्या का समाधान हो गया।
वहीं, ताड़का और सुबाहु वध में दर्शाया गया कि राक्षसों का आंतक बढ़ने से ऋषि-मुनियों के यज्ञ प्रभावित होने लगे। जिस पर विश्वामित्र ऋषि ने राजा दशरथ से मदद मांगी। उन्होंने श्रीराम और लक्ष्मण को अपने साथ जंगल ले जाकर ताड़का और मारिच-सुबाहु का वध करने की बात कही। राजा दशरथ ने स्वयं चलकर उनका वध करने का अनरोध किया लेकिन विश्वामित्र ने उनके पुत्रों के द्वारा ही उनका वध होगा, ऐसा बताया। जिस पर पिता की आज्ञा पाकर श्रीराम और लक्ष्मण जंगल पहुंचे। उन्होंने ताड़का और सुबाहु का वध किया। मारिच श्रीराम से अपनी जान बचाकर भागने में सफल रहा।
वहीं, अहिल्या उद्धार में दर्शाया गया कि विश्वामित्र ने श्रीराम के द्वारा पत्थर बनी अहिल्या का उद्धार करवाया। इस अवसर पर रामलीला कमेटी सुभाष बनखंडी के अध्यक्ष विनोद पाल, महामंत्री हरीश तिवाड़ी, राजेश दिवाकर, राकेश पारछा, दीपक जोशी, रोहताश पाल, हुकुम चंद, मनमीत कुमार, पप्पू पाल, संजय शर्मा, प्रशांत पाल, महेंद्र कुमार, अनिल धीमान, ललित शर्मा, दया शंकर पांडेय, अशोक मौर्य, सुभाष पाल, पवन पाल, नीतीश पाल आदि उपस्थित रहे।

यूकेएसएसएससी के अधिकारी सरकार के रडार पर, विजिलेंस जांच के आदेश

सतर्कता विभाग ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पूर्व सचिव संतोष बडोनी, पूर्व परीक्षा नियंत्रक नारायण सिंह डांगी, आयोग के तीन अनुभाग अधिकारियों और आरएमएस कंपनी के मालिक सहित कुल छह के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश जारी किए हैं। विजिलेंस इनके खिलाफ जल्द मुकदमा दर्ज कर सकती है।
आयोग की एक के बाद एक कई परीक्षाओं पर सवाल उठने के बाद, सरकार ने एसटीएफ से इस मामले में आयोग के अधिकारियों की भूमिका पर रिपोर्ट मांगी थी। जिसमें सामने आया कि परीक्षा आयोजित करवाने वाली कंपनी आरएमएस टैक्नोसॉल्यूशन का अनुबंध, अक्तूबर 2019 में ही समाप्त हो गया था। इसके बावजूद कंपनी से ना सिर्फ काम लिया गया बल्कि भुगतान भी किया गया। एसटीएफ ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट की थी। अब शनिवार को इसी रिपोर्ट के आधार पर सीएम से अनुमोदन लेने के बाद सतर्कता विभाग ने आयोग के तत्कालीन सचिव, परीक्षा नियंत्रक सहित छह के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
आयोग के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक नारायण सिंह डांगी के साथ ही संतोष बडोनी को भी बतौर परीक्षा नियंत्रक इसके लिए जिम्मेदार माना गया है। डांगी इसी साल जनवरी में रिटायर हो गए थे, इसके बाद परीक्षा नियंत्रक की भूमिका भी बडोनी के पास थी। इसके साथ ही आयोग में गोपन विभाग के अनुभाग अधिकारी बृजलाल बहुगुणा, दीपा जोशी, कैलाश नैनवाल भी जांच के दायरे में आए हैं। कंपनी को किए गए भुगतान की फाइल में इन सभी के हस्ताक्षर हैं। इसके साथ ही आरएमएस टैक्नोसॉल्यूशन के मालिक राजेश चौहान की भी विजिलेंस जांच होगी। इसमें से संतोष बडोनी को आयोग से हटाने के बाद सरकार निलंबित भी कर चुकी है। जबकि पीसीएस अधिकारी डांगी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बहुगुणा और दीपा जोशी की नियुक्ति मूल रूप से दूसरे विभागों में है, दो साल पहले ही उनका कैडर मर्जर किया गया।
भर्ती घपले में गिरफ्तार आरोपियों की कमाई अवैध संपत्तियों की जब्ती की कार्रवाई जल्द हो सकती है। एसटीएफ की टीमें सरगना सैयद सादिक मूसा समेत जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह रावत, लखनऊ की निजी कंपनी के मालिक राजेश चौहान, धामपुर के माफिया केंद्रपाल, रामनगर के चंदन मनराल समेत तमाम आरोपियों की अवैध संपत्तियों का ब्योरा जुटा रही है।
वन दरोगा भर्ती की ऑनलाइन परीक्षा में नकल माफिया के गठजोड़ का पर्दाफाश करने में एसटीएफ को समय लग रहा है। सूत्रों के मुताबिक, ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि एसटीएफ दिल्ली की भर्ती एजेंसी, परीक्षा सेंटरों और निरीक्षकों की सीडीआर का इंतजार कर रही है, जिससे पूरी सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
एसटीएफ की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के साथ आयोग का अनुबंध अक्तूबर 2019 में समाप्त हो गया था। इसके बावजूद कंपनी से दो दर्जन परीक्षाएं आयोजित करवाई गईं। जिसके लिए 22 करोड़ रुपये का भुगतान अलग-अलग चरणों में किया गया। इन सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक सम्पत्ति की जांच के आदेश दिए गए हैं। नियमानुसार सरकारी कार्मिकों के खिलाफ जांच के लिए कार्मिक विभाग से अनुमति ली जाती है, अब अनुमति मिलने के बाद विजिलेंस मुकदमा दर्ज करते हुए, जांच शुरू करेगी।

श्री देवभूमि लोक संस्कृति विरासतीय शोभायात्रा समिति ने सम्मानित किया

श्री देवभूमि लोक संस्कृति विरासतीय शोभायात्रा समिति ने रविवार को सम्मान समारोह आयोजित कर महाकुंभ के दौरान देवडोली शोभायात्रा और स्नान कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले 80 लोगों को सम्मानित किया।
रविवार को ढालवाला स्थित एक होटल में श्री देवभूमि लोक संस्कृति विरासतीय शोभायात्रा समिति ने सम्मान समारोह आयोजित किया। समारोह का शुभारंभ पूर्व मंत्री मोहन सिंह रावत गांववासी और शिक्षाविद समिति के संस्थापक विद्या दत्त रतूड़ी ने किया। दोनों अतिथियों ने बीते वर्ष हुए महाकुंभ के दौरान देवडोली शोभायात्रा व स्नान कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले ढालवाला, ऋषिकेश और टिहरी गढ़वाल क्षेत्र के लोागें को स्मृति चिह्न और देकर मानपत्र प्रदान किया। सम्मानित होने वालों में भगवान सिंह रांगड़, गजेंद्र सिंह कंडियाल, ऊषा भंडारी, द्वारिका बिष्ट,माधुरी चमोली, ज्योति सजवान, रतन सिंह पंवार, डॉ एस. एन. रतूड़ी, चंदन सिंह पोखरियाल, महिपाल बिष्ट, विजयपाल रांगड़, घनश्याम नौटियाल, सुरेंद्र भंडारी, रमेश पैन्यूली, भुवन चंद पंत, विनय उनियाल, धन सिंह रांगड़, राम सिंह सजवाण, माधवानंद रतूड़ी, सुनीता बिष्ट, उषा चमियाला, सरस्वती जोशी आदि सहित कुल 80 लोग शामिल रहे।
कार्यक्रम संचालक डॉ. धीरेंद्र रांगड़ ने बताया कि इन लोगों को संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय द्वारा प्रदत सम्मान पत्र व स्मृति चिह्न वितरित किए गए हैं। मौके पर समिति उपाध्यक्ष बंशीधर पोखरियाल, सचिव द्वारिका प्रसाद भट्ट, शिवप्रसाद चमोली, हर्षमणि व्यास, स्वामी नागेंद्र पुरी महाराज, संजय शास्त्री, स्वामी मुकुंद दास कृष्ण महाराज, भोपाल सिंह चौधरी, आसाराम व्यास, पितांबर दत्त पैन्यूली आदि उपस्थित रहे।