यूकेएसएसएससी के अधिकारी सरकार के रडार पर, विजिलेंस जांच के आदेश

सतर्कता विभाग ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के पूर्व सचिव संतोष बडोनी, पूर्व परीक्षा नियंत्रक नारायण सिंह डांगी, आयोग के तीन अनुभाग अधिकारियों और आरएमएस कंपनी के मालिक सहित कुल छह के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश जारी किए हैं। विजिलेंस इनके खिलाफ जल्द मुकदमा दर्ज कर सकती है।
आयोग की एक के बाद एक कई परीक्षाओं पर सवाल उठने के बाद, सरकार ने एसटीएफ से इस मामले में आयोग के अधिकारियों की भूमिका पर रिपोर्ट मांगी थी। जिसमें सामने आया कि परीक्षा आयोजित करवाने वाली कंपनी आरएमएस टैक्नोसॉल्यूशन का अनुबंध, अक्तूबर 2019 में ही समाप्त हो गया था। इसके बावजूद कंपनी से ना सिर्फ काम लिया गया बल्कि भुगतान भी किया गया। एसटीएफ ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट की थी। अब शनिवार को इसी रिपोर्ट के आधार पर सीएम से अनुमोदन लेने के बाद सतर्कता विभाग ने आयोग के तत्कालीन सचिव, परीक्षा नियंत्रक सहित छह के खिलाफ विजिलेंस जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
आयोग के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक नारायण सिंह डांगी के साथ ही संतोष बडोनी को भी बतौर परीक्षा नियंत्रक इसके लिए जिम्मेदार माना गया है। डांगी इसी साल जनवरी में रिटायर हो गए थे, इसके बाद परीक्षा नियंत्रक की भूमिका भी बडोनी के पास थी। इसके साथ ही आयोग में गोपन विभाग के अनुभाग अधिकारी बृजलाल बहुगुणा, दीपा जोशी, कैलाश नैनवाल भी जांच के दायरे में आए हैं। कंपनी को किए गए भुगतान की फाइल में इन सभी के हस्ताक्षर हैं। इसके साथ ही आरएमएस टैक्नोसॉल्यूशन के मालिक राजेश चौहान की भी विजिलेंस जांच होगी। इसमें से संतोष बडोनी को आयोग से हटाने के बाद सरकार निलंबित भी कर चुकी है। जबकि पीसीएस अधिकारी डांगी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बहुगुणा और दीपा जोशी की नियुक्ति मूल रूप से दूसरे विभागों में है, दो साल पहले ही उनका कैडर मर्जर किया गया।
भर्ती घपले में गिरफ्तार आरोपियों की कमाई अवैध संपत्तियों की जब्ती की कार्रवाई जल्द हो सकती है। एसटीएफ की टीमें सरगना सैयद सादिक मूसा समेत जिला पंचायत सदस्य हाकम सिंह रावत, लखनऊ की निजी कंपनी के मालिक राजेश चौहान, धामपुर के माफिया केंद्रपाल, रामनगर के चंदन मनराल समेत तमाम आरोपियों की अवैध संपत्तियों का ब्योरा जुटा रही है।
वन दरोगा भर्ती की ऑनलाइन परीक्षा में नकल माफिया के गठजोड़ का पर्दाफाश करने में एसटीएफ को समय लग रहा है। सूत्रों के मुताबिक, ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि एसटीएफ दिल्ली की भर्ती एजेंसी, परीक्षा सेंटरों और निरीक्षकों की सीडीआर का इंतजार कर रही है, जिससे पूरी सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
एसटीएफ की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के साथ आयोग का अनुबंध अक्तूबर 2019 में समाप्त हो गया था। इसके बावजूद कंपनी से दो दर्जन परीक्षाएं आयोजित करवाई गईं। जिसके लिए 22 करोड़ रुपये का भुगतान अलग-अलग चरणों में किया गया। इन सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक सम्पत्ति की जांच के आदेश दिए गए हैं। नियमानुसार सरकारी कार्मिकों के खिलाफ जांच के लिए कार्मिक विभाग से अनुमति ली जाती है, अब अनुमति मिलने के बाद विजिलेंस मुकदमा दर्ज करते हुए, जांच शुरू करेगी।

श्री देवभूमि लोक संस्कृति विरासतीय शोभायात्रा समिति ने सम्मानित किया

श्री देवभूमि लोक संस्कृति विरासतीय शोभायात्रा समिति ने रविवार को सम्मान समारोह आयोजित कर महाकुंभ के दौरान देवडोली शोभायात्रा और स्नान कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले 80 लोगों को सम्मानित किया।
रविवार को ढालवाला स्थित एक होटल में श्री देवभूमि लोक संस्कृति विरासतीय शोभायात्रा समिति ने सम्मान समारोह आयोजित किया। समारोह का शुभारंभ पूर्व मंत्री मोहन सिंह रावत गांववासी और शिक्षाविद समिति के संस्थापक विद्या दत्त रतूड़ी ने किया। दोनों अतिथियों ने बीते वर्ष हुए महाकुंभ के दौरान देवडोली शोभायात्रा व स्नान कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले ढालवाला, ऋषिकेश और टिहरी गढ़वाल क्षेत्र के लोागें को स्मृति चिह्न और देकर मानपत्र प्रदान किया। सम्मानित होने वालों में भगवान सिंह रांगड़, गजेंद्र सिंह कंडियाल, ऊषा भंडारी, द्वारिका बिष्ट,माधुरी चमोली, ज्योति सजवान, रतन सिंह पंवार, डॉ एस. एन. रतूड़ी, चंदन सिंह पोखरियाल, महिपाल बिष्ट, विजयपाल रांगड़, घनश्याम नौटियाल, सुरेंद्र भंडारी, रमेश पैन्यूली, भुवन चंद पंत, विनय उनियाल, धन सिंह रांगड़, राम सिंह सजवाण, माधवानंद रतूड़ी, सुनीता बिष्ट, उषा चमियाला, सरस्वती जोशी आदि सहित कुल 80 लोग शामिल रहे।
कार्यक्रम संचालक डॉ. धीरेंद्र रांगड़ ने बताया कि इन लोगों को संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय द्वारा प्रदत सम्मान पत्र व स्मृति चिह्न वितरित किए गए हैं। मौके पर समिति उपाध्यक्ष बंशीधर पोखरियाल, सचिव द्वारिका प्रसाद भट्ट, शिवप्रसाद चमोली, हर्षमणि व्यास, स्वामी नागेंद्र पुरी महाराज, संजय शास्त्री, स्वामी मुकुंद दास कृष्ण महाराज, भोपाल सिंह चौधरी, आसाराम व्यास, पितांबर दत्त पैन्यूली आदि उपस्थित रहे।

संस्कार भारती के कार्यक्रम से ललित कलाओं को मिला संरक्षण-सीएम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शनिवार को हरिद्वार रोड स्थित संस्कृति विभाग के प्रेक्षागृह में संस्कार भारती द्वारा स्वाधीनता के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित उत्तराखण्ड कला दर्शन कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद डॉ.रमेश पोखरियाल ‘निशंक‘, विधायक सविता कपूर, ओजस हिरानी, पंकज अग्रवाल भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि संस्कार भारती के प्रयास राष्ट्रप्रेम, साहित्य कला व पुरातन समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित भाव से बढ़ावा देने वाले रहे है। संस्कार भारती की ललित कलाओं के संरक्षण क्षेत्र में भी सबसे बड़े केन्द्र के रूप में पहचान बनी है। इस क्षेत्र के कलाकारों को संगठन से जोड़ कर राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने का भी कार्य हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड कला संस्कृति एवं साहित्य का संगम है, इसके उत्थान के लिये राज्य सरकार कृत संकल्पित है। उन्होंने कहा कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिये उपयुक्त स्थल की पहचान कर इसके लिये भवन बनाने के भी प्रयास किये जायेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले देश में निराशा एवं मायूसी का वातावरण था। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश को नई पहचान मिली है। हमारे देश की कला, आध्यात्म व योग के साथ ही सांस्कृतिक पहचान भी बनी है। उन्होंने कहा कि पौराणिक कलाकृतियों एवं परम्पराओं के संरक्षण की दिशा में काशी विश्वनाथ कोरडोर का निर्माण सबके सामने है। उन्होंने कहा कि पहले काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिये एक पतला और संकरा रास्ता हुआ करता था, आज वह दिव्य एवं भव्य रूप ले चुका है। प्रधानमंत्री के दृढ़ निश्चय से हमारी समृद्ध संस्कृति को पूरा विश्व जानने लगा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब 90 के दशक में अयोध्या गये थे तो रामलला के टेन्ट में दर्शन होते थे, आज भव्य राममन्दिर का निर्माण प्रारम्भ हो चुका है। राममन्दिर के निर्माण से पूरी अयोध्या का महत्व देश व दुनिया में जा रहा है। इससे पूरे विश्व में हमारी कला व संस्कृति को नई पहचान मिलेगी तथा कला संस्कृति एवं आध्यात्म का समन्वय स्थल बनेगा। इसी प्रकार केदारनाथ मन्दिर परिसर के पुनर्निर्माण से लाखो श्रद्धालु वहां की दिव्यता से अविभूत है। बद्रीनाथ मन्दिर का भी सौन्दर्यीकरण किया जा रहा है।

नीति के प्रस्तावित ड्राफ्ट पर लोगों से मांगे गए हैं सुझाव, जानिए सरकार की ये खास पहल

उत्तराखंड को फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन बनाने के लिए नई फिल्म नीति-2022 में सरकार कई प्रोत्साहन व वित्तीय सहायता देने जा रही है। नीति के प्रस्तावित ड्राफ्ट पर लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। नीति में फिल्मों की शूटिंग के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को लागू किया जाएगा। इसके अलावा राज्य की गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी बोलियों में बनने वाली फिल्मों पर 40 प्रतिशत अनुदान या अधिकतम दो करोड़ का अनुदान दिया जाएगा।

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी नितिन उपाध्याय ने बताया कि उत्तराखंड फिल्म नीति-2022 का ड्राफ्ट लोगों के सुझाव के लिए विभागीय वेबसाइट http://www.uttarainformation.gov.in पर प्रकाशित किया गया।
उक्त प्रस्तावित फिल्म नीति-2022 पर यदि अभी भी कोई व्यक्ति सुझाव देने के इच्छुक हो तो दिनांक 15 सितम्बर, 2022 तक विभागीय Email- ufdc2015@gmail.com पर प्रेषित कर सकते हैं। 15 सितम्बर, 2022 तक प्राप्त सुझावों पर विचार करते हुए फिल्म नीति के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने की कार्यवाही की जायेगी।

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी नितिन उपाध्याय ने बताया राज्य के नैसर्गिक सौंदर्य व लोक संस्कृति को विश्व पटल पर लाने के उद्देश्य से देश-विदेश से फिल्म निर्माताओं व निदेशक को शूटिंग के लिए नई नीति में प्रोत्साहन व वित्तीय लाभ देने का प्रावधान किया जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार व पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। नीति में फिल्मों को अनुदान, फिल्म पुरस्कार-सम्मान, उत्तराखंड की बोलियों में बनने वाली फिल्मों एवं कलाकारों को प्रोत्साहन के अलावा शूटिंग की अनुमति के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था की जा रही है।

सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग, उत्तराखण्ड के अधीन गठित उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद द्वारा ‘‘उत्तराखण्ड फिल्म नीति-2022’’ का ड्राफ्ट तैयार कर लोगों के सुझाव प्राप्त करने हेतु दिनांक 20 जुलाई, 2022 का विभागीय वैबसाईट लिंकः
http:// www.uttarainformation.gov.in/images/download/filmpolicydraft2022.pdf पर अपलोड किया गया था। उक्त के क्रम में फिल्म पॉलिसी को लेकर कतिपय व्यक्तियों एवं संस्थाओं के सुझाव प्राप्त हुए है।

नीति में ये मिलेंगे लाभ
– पर्वतीय क्षेत्रों में सिनेमाघरों व स्टूडियो में उपकरण खरीदने पर 25 प्रतिशत या अधिकतम 25 लाख का अनुदान।
– पर्वतीय क्षेत्रों में मोबाइल थियेटर वाहन खरीदने पर 15 लाख का अनुदान।
– फिल्म प्रशिक्षण संस्थान के लिए 25 प्रतिशत या अधिकतम 50 लाख का अनुदान।
– स्थानीय बोली में बनने वाली फिल्मों की शूटिंग के दौरान किए गए व्यय पर 40 प्रतिशत अनुदान।
– स्थानीय व हिंदी में सर्वोत्तम फिल्म को 10 लाख का पुरस्कार
– शूटिंग के दौरान फिल्म यूनिटों को जीएमवीएन व केएमवीएन के रेस्ट हाउस में ठहरने पर 50 प्रतिशत छूट दी जाएगी।

चारधाम यात्रा में देश ही विदेशों से भी पहुंच रहे श्रद्धालु

चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड टूटता जा रहा है। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री सहित यमुनोत्री धामों में देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। चारधाम यात्रा के लिए आने वाले यात्रियों की लगातार बढ़ रही संख्या को देखते हुए सचिव पर्यटन और उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के सीईओ सचिन कुर्वे ने उम्मीद जताई है कि इस बार तीर्थयात्रियों की संख्या का नया रिकॉर्ड बनेगा।
चारधाम में अब तक 33,47,287 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। जबकि सितंबर माह के लिए 5 लाख से अधिक तीर्थयात्री दर्शन के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। चारधाम यात्रियों के लिए हेली सेवाएं भी दोबारा बहाल हो गई हैं। सचिव पर्यटन सचिन कुर्वे ने कहा कि इस वर्ष चार धाम यात्रियों की संख्या एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर है।
पर्यटन विभाग देवभूमि उत्तराखंड में आने वाले सभी श्रद्धालुओं का हार्दिक स्वागत करता है और उन्हें अधिकतम सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए सर्वथा प्रतिबद्ध है। यात्रियों की सुरक्षा के दृष्टिगत चार धाम यात्रा के लिए पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है सभी यात्रियों से अनुरोध है कि वह चार धाम यात्रा पोर्टल पर पंजीकरण करने के उपरांत ही यात्रा आरंभ करें।
गौरतलब है कि खराब मौसम के कारण रोकी गई यात्रा को फिर से शुरू किया गया और केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं फिर से शुरु कर दी गई हैं। चारधाम के साथ ही हेमकुंड साहिब में अब तक 33,47,287 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। जिसमें यमुनोत्री में 394573, गंगोत्री में 506073, केदारनाथ में 1100890, बद्रीनाथ में 1176666 और हेमकुंड साहिब में 169085 तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं।
वहीं, केदारनाथ धाम की यात्रा में इस साल लगातार रिकार्ड बन रहा है। अब तक धाम के दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या 11 लाख पार कर गई है। यह अब तक की सबसे अधिक संख्या है। हालांकि अभी इस संख्या के और भी अधिक होने की उम्मीद है। यात्रा के लिए सितम्बर के साथ ही अक्तूबर पूरा महीना शेष है। ऐसे में कपाट बंद होने तक इस बार केदारनाथ दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों का नया रिकार्ड बनेगा।

पूर्णानंद घाट में धूमधाम से मनाई गई हरतालिका तीज

ऋषिकेश गंगा आरती ट्रस्ट, पूर्णानंद घाट में देवभूमि मां गंगे स्वयंसेवी चौरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ी महिलाओं ने हरतालिका तीज कार्यक्रम हर्षाेल्लास से मनाया। कार्यक्रम में पं. हरिओम शर्मा ज्ञानी के आचार्यत्व में यज्ञ एवं पूजा अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की गई। साथी ही गंगा की अविरलता तथा निर्मलता के लिए अग्नि को साक्षी मानते हुए संकल्प लिया गया। सुशील गुप्ता ने कहा भादो के महीने में जब संपूर्ण धरा पर हरियाली की चादर बिछी रहती है, प्रकृति के इस मनोरम क्षण का आनंद लेने के लिए लोग लोक गीत अथवा तीज के गीत गाकर उत्सव मनाया जाता है।
देवभूमि मां गंगे स्वयंसेवी चौरिटेबल ट्रस्ट संस्थापक अध्यक्ष रीना उनियाल ने बताया कि संस्था की ओर से समय-समय पर मनाए जाने वाले त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं, समाजसेवा के क्षेत्र में काम करने के साथ-साथ मिलजुलकर महिलाओं के साथ त्योहार मनाने में अपना योगदान देती हैं।
सुशीला सेमवाल ने बताया कि सबका साथ हो, गंगा साफ हो के संकल्प को साध कर पूर्णानंद धाट पर उपस्थित लोगों को स्वच्छता की शपथ दिलाई गई व गंगा स्वच्छता की अपील की गई।
डॉक्टर ज्योति शर्मा ने बताया कि लुप्त होती संस्कृति व परंपरा को अमली जामा पहनाने और रिश्तों की कड़वाहट को दूर करने की जिम्मेदारी ऋषिकेश गंगा आरती ट्रस्ट निभा रहा है।
अमिता उनियाल ने बताया कि मंडल की ओर से महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रम भी समय-समय पर किए जाते हैं व अपनी गढ़वाल की संस्कृति बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रोग्राम किये जाते हैं।
कार्यक्रम में आनंद गुप्ता, सुशील गुप्ता, सुषमा बहुगुणा, योगेश उनियाल, ज्योति उनियाल, बबीता सकलानी एवं सैला खंडूरी, सुमन, मधुर रतूड़ी ममता नेगी, सुनीता बिष्ट आदि मौजूद रहे।

समाजसेवी नेगी को उत्तराखण्डी अचीवर्स अवार्ड

स्वास्थ्य, शिक्षा एवं लोक संस्कृति में उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ राजे नेगी को उत्तराखण्डी अचीवर्स अवार्ड 2022 से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ नेगी ने कार्यक्रम आयोजकों को धन्यवाद देते हुए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में मिले विशिष्ट सम्मान को अपने माता-पिता और परिवार को सर्मपित किया है। कहा कि,परिजनों की प्रेरणा के बूते ही वह आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं।
उल्लेखनीय है कि इम्ब्लीस टेलेंट मैनेजमेंट के द्वारा आईआरडीटी ऑडिटोरियम में उत्तराखंडी अचीवर्स अवार्ड समारोह का आयोजन किया गया था जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यातिथि कबीना मंत्री गणेश जोशी एवं पूर्व राज्य मंत्री भाजपा नेता करन बोहरा ने किया। ऋषिकेश से समाजसेवी डॉ राजे नेगी को स्वास्थ्य, शिक्षा एवं लोक संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु बेस्ट सोशियल वर्कर के लिए उत्तराखण्डी अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित किया गया।
इस मौके पर कार्यक्रम सयोंजक इम्ब्लीस की डायरेक्टर ख्याति शर्मा, आलोक शर्मा एवं पूर्व राज्य मंत्री करन बोहरा ने समाजसेवी डॉ राजे नेगी को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।

हरितालिका तीज कार्यक्रम में मंत्री अग्रवाल ने किया प्रतिभाग

कैबिनेट मंत्री व क्षेत्रीय विधायक डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने गोर्खाली समाज की ओर से आयोजित हरितालिका तीज कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। उन्होंने सभी गोर्खाली समाज की व्रती महिलाओं को शुभकामनाएं दी। इस मौके पर साहब नगर स्थित हिमालय माता मंदिर में हॉल के निर्माण के लिए विधायक निधि से पांच लाख रुपए देने की घोषणा भी की।
रविवार को साहब नगर में आयोजित गोर्खाली महिला हरितालिका तीज महोत्सव कार्यक्रम में डा. अग्रवाल बतौर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलित कर किया। डा. अग्रवाल ने कहा कि हरितालिका तीज का विशेष महत्व है। गोर्खाली समाज की महिलाओं को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है। कहा कि इस व्रत से महिलाओं को सुहागिनी होने का गौरव प्राप्त होता है।
डा. अग्रवाल ने कहा कि हरितालिका तीज भगवान शिव और पार्वती जी को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि मां पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए 107 बार तप व व्रत लिया था, 108वीं बार तप और व्रत में उन्हें भगवान शिव पति के रूप में प्राप्त हुए थे।
डा. अग्रवाल ने कहा कि गोर्खाली समाज की महिलाओं सहित अन्य समुदाय के लोगों में भी अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए इस व्रत को लिया जाता हैं। इस मौके पर उन्होंने महिलाओं को हरितालिका तीज की बधाई दी।
इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख भगवान सिंह पोखरियाल, गोर्खाली सभा अध्यक्ष किशन थापा, तीज कमेटी अध्यक्ष संगीता गुरुंग, दिल बहादुर खत्री, विष्णु थापा, प्रधान सोबन कैंतुरा, सरदार बलविंदर सिंह, दीपक थापा, अम्बर गुरुंग, अमर खत्री, समा पंवार, विमला नैथानी, लक्ष्मी गुरुंग, अनिता प्रधान, माया घले, हरीश कक्कड़, पूजा घले, संजना भंडारी, हिमालय देवी मंदिर समिति आदि गोर्खाली सुधार सभा छिद्दरवाला की महिलाएं उपस्थित रही।

पहाड़ी फल बेडू के उत्पादन को बढ़ाने पर पीएम ने दिया जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मन की बात को सुना। मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहाड़ी अंजीर कहे जाने वाले बेडू का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने पिथौरागढ़ प्रशासन के द्वारा बेडू के उत्पादन को बढ़ावा देकर रोजगार सृजन व खनिज एवं वनस्पतियों के संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने इसके लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वास्तव में बेडू स्वास्थ्य के लिए संजीवनी है, जिसके माध्यम से स्थानीय लोगों द्वारा अनेक रोगों का शमन किया जाता है।
मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी पिथौरागढ़ आशीष चौहान से फोन पर बात कर इस सराहनीय पहल के लिए जिला प्रशासन एवं जनपद वासियों को बधाई दी। जिला प्रशासन के सहयोग से पिथौरागढ़ में बेडू से जूस, जैम, चटनी, आचार एवं अन्य सामग्री बनाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मन की बात में प्रधानमंत्री ने जल के संरक्षण एवं संवर्धन, कुपोषण मुक्त भारत के लिए कुपोषण मुक्ति के प्रयासों एवं इसके लिए जागरूकता, मोटे अनाजों के उत्पादन के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने की बात कही। इस दिशा में राज्य सरकार सुनियोजित तरीके से कार्य करेगी।

ब्रह्मकमल टोपी के बाद पहाड़ी गमछा राज्य की पहचान बनेगाः धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में द हिमालयन सेंटर द्वारा तैयार किये गये पहाड़ी गमछे का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रह्मकमल टोपी के बाद पहाड़ी गमछा भी राज्य की पहचान बनेगा।

उन्होंने कहा कि स्थानीय परिवेश और शैली के साथ समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पहचान बनाने के प्रयासों से राज्य को भी पहचान मिलती है।

इस अवसर पर द हिमालयन सेंटर के संस्थापक एवं सीईओ श्री समीर शुक्ला ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका प्रयास विभिन्न प्रांतों की भांति उत्तराखण्ड के अंगवस्त्रों को भी पहचान दिलाना है।