तीलू रौतेली पुरस्कार और आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार की धनराशि 51 हजार रूपये

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की है कि अगले वर्ष से तीलू रौतेली पुरस्कार एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार की धनराशि बढ़ाकर 51 हजार रूपये किया जायेगा। भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी वन्दना कटारिया उत्तराखण्ड में महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की ब्रांड एम्बेसेडर होंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सर्वे चौक स्थित आई.आर.डी.टी सभागर में ‘‘तीलू रौतेली पुरस्कार एवं ‘‘आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार‘‘ हेतु चयनित राज्य की महिलाओं को सम्मानित किया। इस वर्ष 22 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार एवं 22 महिलाओं को आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्तकताओं को 31 हजार रूपये की सम्मान धनराशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। जबकि आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार के तहत 21 हजार रूपये की सम्मान राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड में हर क्षेत्र में मातृ शक्ति की बड़ी भूमिका रही है। उत्तराखण्ड अलग राज्य निर्माण की मांग हेतु महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने मातृ शक्ति को नमन करते हुए कहा कि कि महिला सशक्तीकरण की दिशा में राज्य सरकार द्वारा अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना शुरू की गई है। कोरोना काल में जिन बच्चों ने अपने माता-पिता या सरंक्षक को खोया है, उनको राज्य सरकार प्रति माह 3 हजार रूपये एवं निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था कर रही है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थित मजबूत होनी जरूरी है। बच्चों के शुरूआती चरण के विकास में आंगनबाडियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। माता-पिता के बाद बच्चों को संस्कार देने के शुरूआत आंगनबाड़ी से ही होती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जो लोग सीमित संसाधन होने पर बड़ी उपलब्धि हांसिल करते हैं, उनकी अलग ख्याति होती है। प्रधानमंत्री का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का जीवन सामान्य परिस्थितियों में बीता, लेकिन आज उनकी कार्यशैली से भारत को वैश्विक पटल पर एक अलग पहचान मिली है। आज देश हर क्षेत्र में तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने अपने बचपन के संस्मरणों को साझा करते हुए कहा कि प्रारम्भिक शिक्षा के दौरान हम भी तख्ती (पाटी) पर लिखते थे। जिसके लिए चूने का घोल इस्तेमाल किया जाता था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा में अनेक कार्य किये जा रहे हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि मातृ शक्ति को इन योजना का लाभ मिले। राज्य में मुख्यमंत्री महालक्ष्मी योजना चलाई जा रही है। जिसमें गर्भवती महिलाओं एवं नवजात कन्या शिशु के लिए किट दी जा रही है। राज्य सरकार जनता के साथ साझीदार की भूमिका में कार्य कर रही है। समाज के हर वर्ग के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा अनेक जन कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है।
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि उत्तराखण्ड की वीरांगना तीलू रौतेली के जन्म दिवस के अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य करने वाली राज्य की चयनित महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार एवं आंगनबाड़ी में अच्छा कार्य करने वाली महिलाओं को आंगनबाड़ी कार्यकत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मात्र 15 वर्ष की आयु में ही वे रणभूमि में कूद पड़ी थी। उन्होंने बहुत कम आयु में सात युद्ध लड़े। यह दिन प्रदेश की महिलाओं को सम्मानित करने का सबसे अच्छा दिन है। तीलू रौतेली ने जिस वीरता का परिचय दया, आज यह हमारे सामने एक इतिहास है।
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने में आंगनबाड़ी कार्यकत्रयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कोविड के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों द्वारा सराहनीय कार्य किया गया है। उन्होंने कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की वेशभूषा में प्रतिभाग किया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के पिताजी ने आंगनबाड़ी केन्द्र के लिए अपनी जमीन दान दी थी।।

इनको किया गया सम्मानित-तीलू रौतेली पुरस्कार
डॉ. राजकुमारी भंडारी चौहान, श्यामा देवी, अनुराधा वालिया, डॉ. कंचन नेगी, रीना रावत, वन्दना कटारिया, चन्द्रकला तिवाड़ी, नमिता गुप्ता, बिन्दुवासिनी, रूचि कालाकोटी, ममता मेहता, अंजना रावत, पार्वती किरौला, कनिष्का भण्डारी, भावना शर्मा, गीता जोशी, बबीता पुनेठा, दीपिका बोहरा, दीपिका चुफाल, रेखा जोशी, रेनू गडकोटी, पूनम डोभाल।

राज्य स्तरीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ती पुरस्कार
गौरा कोहली, पुष्पा प्रहरी, पुष्पा पाटनी, गीता चन्द, गलिस्ता, अंजना, संजू बलोदी, मीनू, ज्योतिका पाण्डेय, सुमन पंवार, राखी, सुषमा गुसांई, आशा देवी, दुर्गा बिष्ट, सोहनी शर्मा, वृंदा, प्रोन्नति विस्वास, हन्सी धपोला, गायत्री दानू, हीरा भट्ट, सुषमा पंचपुरी, सीमा देवी।

मुख्यमंत्री ने आईटीबीपी के अधिकारियों की पासिंग आउट परेड में प्रतिभाग किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आईटीबीपी एकेडमी, मसूरी में आईटीबीपी के 42 सहायक सेनानी (जी.डी.) एवं 11 सहायक सेनानी (अभियन्ता) की पासिंग आउट परेड समारोह में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने सभी 53 प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि वे सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें आईटीबीपी जैसे उत्कृष्ट बल में सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है। जिसके हिमवीर लद्दाख के कराकोरम पास से अरुणाचल प्रदेश के जेचप ला तक 3488 कि०मी० की अति दुर्गम सीमा की सुरक्षा पूरी मुस्तैदी के साथ कर रहे है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश के वीर सैनिकों ने आजादी के बाद हर संघर्ष में अप्रतिम शौर्य का परिचय दिया है। मुख्यमंत्री ने बल के शहीदों को नमन करते हुए कहा कि शहीदों की शहादत के कारण ही आज हम सुरक्षित हैं।
“ये देश चैन से सोता है, वो पहरे पर जब होता है,
जो आँख उठाता है दुश्मन तो अपनी जान वो खोता है, उनकी वजह से आज सुरक्षित ये सारी आवाम है,
सरहद पर खड़े रखवालों को दिल से मेरा सलाम है।”

आईटीबीपी के हिमवीरों का सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं एक पूर्व सैनिक के पुत्र हैं और इस कार्यक्रम में प्रतिभाग कर उन्हें गर्व की अनुभूति हो रही है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है, ’वीर भोग्या वसुन्धरा’। हमारे आईटीबीपी के हिमवीर हमेशा मातृभूमि की सुरक्षा, अपने ध्येय वाक्य “शौर्य दृढ़ता, कर्म निष्ठा के साथ करते है। हिमालय में माउन्टेन क्लाईमबिंग हो या रीवर राफ्टिंग जैसे साहसिक खेल-कूद या फिर सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों के लिये कल्याणकारी गतिविधियों का आयोजन, प्रत्येक क्षेत्र में इस बल ने न केवल अमिट छाप छोड़ी है, बल्कि अन्य बलों के लिए उदाहरण भी प्रस्तुत किये है।

मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड में आपदा के दौरान सहायता के लिए आईटीबीपी का आभार व्यक्त किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि बल द्वारा आपदा प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। बल के हिमवीरों ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं एवं दुर्घटनाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को बेहद तत्परता एवं कुशलता के साथ किया है। 2013 की केदारनाथ आपदा तथा 2021 में तपोवन आपदा के समय आईटीबीपी के द्वारा आपदा प्रबंधन हेतु किये गये प्रयासों से जान माल की क्षति को काफी हद तक कम किया जा सका। इस बल द्वारा हमारे राज्य में कैलाश मानसरोवर यात्रा, चार धाम यात्रा तथा राज्य के सुदूर व दुर्गम क्षेत्रों में यात्रियों एवं आम जनमानस को सुरक्षा एवं मेडिकल कवर प्रदान करवाने की जिम्मेदारी को लगातार कई वर्षों से सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने राज्य की समस्त जनता की ओर से बल कर्मियों के इस अमूल्य योगदान के लिए आभार व्यक्त किया।

सैनिकों के परिजनों के दर्द को महसूस किया है-मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सैनिक की वीरता तो बाल्यकाल से देखी ही है पर उनके परिजनों का संघर्ष भी देखा है। उस माँ बाप का दर्द देखा है जिसका बेटा सीमा पर देश की आन, बान शान के लिये लड़ रहा है। उस पत्नी के आँखों की विकलता देखी है जो पति के आने की बाट जोहते-जोहते कब बूढी व बीमार हो जाती है पता ही नही चलता। उन बच्चों की सिसकती हुई किलकारियों को सुना है जो अपने पिता से गले मिलने को व्याकुल हों। कितना संघर्ष है एक सैनिक के जीवन में परन्तु इसके बावजूद भी वो दृढता पूर्वक अपने देश के स्वाभिमान को बचाने के लिये हमेशा तत्पर रहता है। मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे पूरे समर्पण के साथ कार्य करेंगे और हमेशा अपने मातहतों के कल्याण को ध्यान में रखेंगे। एक कुशल और योग्य लीडर के रूप में अपने आपको साबित करेंगे। मुख्यमंत्री ने अकादमी के प्रशिक्षण स्टाफ को भी उत्कृष्ठ स्तर का प्रशिक्षण देने के लिए बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इसी प्रकार का बेहतरीन प्रशिक्षण प्रदान करते रहेंगे।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, श्री सुरजीत सिंह देसवाल, महानिदेशक, भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल, उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, एडीजी अभिनव कुमार, दलजीत सिंह चौधरी, मनोज रावत एडीजी आईटीबीपी, निलाभ किशोर, महानिरीक्षक/निदेशक, भारत तिब्बत सीमा पुलिस अकादमी, अजयपाल सिंह, ब्रिगेडियर डॉ रामनिवास सहित अन्य विशिष्ट जन उपस्थित थे।

ऐतिहासिक स्थल पर 101 फीट ऊंचा तिरंगा लहराया

तिरंगा झंडा जिस शान से लहराता है उसे देखकर हर भारतवासी का हृदय भावों से भर जाता है। देश के प्रति समर्पण और प्रेम का संचार मन में होता है। इसी भाव को प्रेरित करने के लिए त्रिवेणी घाट, ऋषिकेश में एमडीडीए द्वारा स्थापित 101 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का अनावरण उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल द्वारा किया गया।
देश की आजादी एवं उसकी आन बान और शान का प्रतीक तिरंगा झंडा राष्ट्र के प्रति सम्मान और देश भक्ति की भावना को जाग्रत करने के उद्देश्य से त्रिवेणी घाट पर 101 फीट ऊँचा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया। ध्वजारोहण के दौरान ध्वजारोहण स्तंभ के शीर्ष तक राष्ट्रीय ध्वज का आरोहण कराया गया और तिरंगे को सलामी दी गयी। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने स्विच दबाकर झंडे का आरोहण किया एवं झंडे को सलामी दी। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रीय गान से पूरा त्रिवेणी घाट गूंज उठा। मौजूद लोगों की आंखों में तिरंगे को फहरता देख एक अलग सी ही चमक दिखी।
बता दें कि यह तिरंगा झंडा 101 फीट ऊंचा 20 फीट चैड़ा और 30 फीट लंबा बनाया गया है। इसके साथ झंडे के लिए फोकस्ड लाइट्स भी लगाई गयी है। इसका सीधा फोकस तिरंगे पर पड़ेगा। हाइमास्क पोल पर लाइट लगाने के बाद रात की रोशनी में देश का राष्ट्रीय ध्वज खूबसूरत नजर आएगा।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हमारे गर्व, शक्ति एवं गौरव का प्रतीक हमारा राष्ट्रीय ध्वज शांति, समृद्धि और सदैव विकास के पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा देता है। आंखों के सामने लहराता राष्ट्रीय तिरंगा और मन में देश के लिए कुछ कर गुजरने का संकल्प भारत को नया भारत बना रहा है।उन्होंने कहा कि तिरंगा झंडा लग जाने के बाद इसे देख आते-जाते लोग खुद को गौरान्वित महसूस करेंगे।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल गोयल ने कहा कि हर कोई इस तिरंगे के लिए आहुति देने को तैयार रहता है। तिंरगे को देखकर आम लोगों में राष्ट्रीयता की भावना जगेगी। देश के लिए मरने मिटने की प्रेरणा मिलेगी।
इस अवसर पर ऋषिकेश मंडल अध्यक्ष दिनेश सती, वीर भद्र मंडल अध्यक्ष अरविंद चैधरी, एमडीडीए के अधिशासी अभियंता श्याम मोहन शर्मा, सहायक अभियंता पूर्णानंद बहुगुणा, नगर निगम पार्षद रीना शर्मा, डीपी रतूड़ी, कविता शाह, अनीता तिवारी, उषा जोशी, सुमित पवार, कविता शाह, प्रदीप कोहली, संदीप खुराना अनीता रैना, सुंदरी कंडवाल आदि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने ड्रोन के माध्यम से केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ड्रोन के माध्यम से श्री केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट, प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजक्ट है। उन्होंने अधिकारियों को कार्यों में और तेजी लाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाय कि श्री केदारनाथ धाम में पुनर्निमाण कार्यों में और तेजी लाने के लिए मानव संसाधन के साथ पर्याप्त उपकरणों की व्यवस्था भी हो।

प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री केदारनाथ श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केन्द्र है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में मास्टर प्लान के अनुरूप श्री केदारनाथ को भव्य बनाया जा रहा है।

समयबद्ध, गुणवत्तायुक्त और प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप कार्य पूरा करने के लिए निर्देश
प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप भव्य केदारपुरी के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री धामी कृतसंकल्प हैं। वे लगातार प्रोजेक्ट की मानिटरिंग कर रहे हैं। खराब मौसम के कारण केदारनाथ न जाने पर उन्होंने ड्रोन के माध्यम से केदारनाथ पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट का निरीक्षण और समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने प्रथम चरण में अवशेष आदिगुरू शंकराचार्य की समाधि स्थल एवं मंदाकिनी नदी पर बन रहे ब्रिज के निर्माण कार्य को जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि आने वाले दो-तीन माह में श्री केदारनाथ में कार्य करने के लिए अच्छा समय है, इस दौरान तेजी से कार्य किये जायेंगे।

द्वितीय चरण के कामों में तेजी लाने के मुख्यमंत्री ने दिये निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि श्री केदारनाथ में चल रहे द्वितीय चरण के जो कार्य स्वीकृत हो चुके हैं, उनमें भी तेजी लाई जाय। सरस्वती नदी पर घाट एवं आस्था पथ के निर्माण के कार्य जल्द पूर्ण किये जाय।

प्रथम चरण के कार्य लगभग पूर्ण
प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जानकारी दी गई की श्री केदारनाथ के पुनर्निर्माण कार्यों के तहत प्रथम चरण के कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं। शंकराचार्य सामधि एवं ब्रिज का कार्य भी जल्द पूर्ण हो जायेगा। द्वितीय चरण के कार्यों में 116 करोड़ रूपये के कार्यों की स्वीकृत हो चुकी है। 08 कार्यों पर कार्य शुरू हो गया है। द्वितीय चरण में संगम घाट का नव निर्माण, आस्था पथ में रेन शेटलर, वाटर एटीएम, कमांड एण्ड कंट्रोल रूम, हॉस्पिटल बिल्डिंग एवं अन्य कार्य किये जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री स्वयं केदारनाथ यात्रा के अनेक बार साथ-साथ ड्रोन के माध्यम से कर चुके हैं विकास कार्यों की समीक्षा
प्रधानमंत्री केदारनाथ आपदा के समय से केदार पुरी के पुनर्निर्माण के लिए चिंतित हैं। प्रधानमंत्री स्वयं केदारनाथ यात्रा के अनेक बार साथ-साथ ड्रोन के माध्यम से विकास कार्यों की समीक्षा कर चुके हैं। 2013 में केदारनाथ आपदा के समय मुख्यमंत्री गुजरात रहते हुए उत्तराखंड सरकार प्रस्ताव दिया था कि केदारनाथ के पुनर्निर्माण में सहयोग करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री बाबा केदार से आध्यात्मिक रूप से जुड़े हैं। स्वयं ध्यान गुफा में बैठकर प्रधानमंत्री जी ने बाबा केदार के प्रति अपनी आस्था सार्वजनिक रूप से प्रकट की।
इस अवसर पर मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु, अपर सचिव पर्यटन युगल किशोर पंत एवं वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग मनुज गोयल उपस्थित थे।

स्वतंत्रता दिवस को भव्य रुप से मनाने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु ने विभागीय अधिकारियों को स्वतंत्रता दिवस को भव्य तरीके से मनाने के लिए कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों को जो तैयारियां की जानी हैं उसको समय से संपादित करें। कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले लोग अनिवार्य रूप से मास्क पहनकर प्रतिभाग करेंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करेंगे। आमंत्रित किये गये लोगों को ई-पास जारी करें तथा विगत वर्षों में विभिन्न विभागों के कार्मिकों द्वारा किये गये बेहतर कार्यों तथा कोरोना काल में बेहतरीन कोरोना वारियर्स को सम्मानित करवाने के लिये सभी विभाग ऐसे लोगों की सूची खेल विभाग को सौंप दें।
उन्होंने निर्देश दिये कि सभी जिलाधिकारी सुनिश्चित करें कि स्वतंत्रता सेनानियों को उनके आवास पर जाकर सम्मानित किया जाये तथा मुख्य कार्यक्रम में जिन लोगों को सम्मानित किया जाना है उनका अनिवार्य रूप से आरटीपीसीआर टेस्ट करके ही उन्हें सम्मिलित किया जाये। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को कार्यक्रम से जोड़ने और एक भारत श्रेष्ठ भारत तथा आत्म निर्भर भारत का संदेश प्रसारित करने को कहा।
राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम परेड ग्राउंड में आयोजित होना प्रस्तावित हैं जहां पर मुख्यमंत्री द्वारा प्रातः 10 बजे ध्वजारोहण करके कार्यक्रम की शुरूआत करेंगे। तत्पश्चात परेड की सलामी और सम्मान समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित करेंगे। इस बार भी परेड में पैरामिलिट्री फोर्स, पी.ए.सी, नागरिक पुलिस, होमगार्ड आदि के दस्ते भाग लेंगे।
विभिन्न जनपदों में प्रभारी मंत्री ध्वजारोहण करके कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। सभी सरकारी और गैर सरकारी भवनों पर सम्बन्धित विभागाध्यक्ष, कार्यालयाध्यक्ष द्वारा प्रातः 9 बजे ध्वजारोहण किया जायेगा तथा जनपद देहरादून के कलक्ट्रेट में जिलाध्यक्ष द्वारा प्रातः 9ः30 बजे ध्वजारोहण किया जायेगा।
इस बार के मुख्य कार्यक्रम में कोविड-19 के चलते बच्चों का प्रतिभाग नहीं कराया जायेगा। एन.सी.सी को परेड में सम्मिलित नहीं किया जायेगा, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किये जायेंगे तथा कवि सम्मेलन भी आयोजित नहीं किया जायेगा। विगत वर्ष की तरह स्वतंत्रता सेनानियों को उनके घर जाकर सम्मानित किया जायेगा। विभिन्न सार्वजनिक भवन में साफ-सफाई और उनको प्रकाशमान किया जायेगा और विभिन्न जनपदों में वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जायेगा।
महत्वपूर्ण स्थलों, चैराहों पर देश भक्ति गीतों का प्रसारण किया जायेगा। एक सप्ताह पूर्व से ही शहीद स्थल, पार्क व स्मरणीय व्यक्तियों के स्टैच्यू इत्यादि की साफ-सफाई की जायेगी तथा टी.वी, रेडियो, सोशल मीडिया के माध्यम से देश भक्ति के गीतों का प्रसारण किया जायेगा।
इस दौरान बैठक में अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल.एल. फैनई, पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, डॉ. रंजीत सिन्हा, एस.ए. मुरूगेशन, एच.सी. सेमवाल, प्रभारी सचिव डॉ. वी. षणमुगम, विनोद कुमार सुमन, महानिदेशक सूचना रणवीर सिंह चैहान सहित सम्बंधित विभागीय अधिकारी बैठक में उपस्थित थे तथा सभी जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े हुए थे।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग और बलिदान को युवा पीढ़ी का बताया जाये-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित कैम्प कार्यालय में देश की स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित हो रहे आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम की आयोजन व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमृत महोत्सव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ’राष्ट्र सर्वप्रथम’ के विजन को बताता है। इस आयोजन के लिये भारत सरकार द्वारा जो निर्देश दिये गये हैं उसके अनुसार कार्यक्रमों का गरिमा व भव्यता के साथ आयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि अब इसकी समयावधि वर्ष 2023 तक बढ़ाई गई है। अतः इस अवधि में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की स्पष्ट रूप रेखा निर्धारित कर ली जाय। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव का संदेश आमजन तक पहुंचे, इसकी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाय।

गरिमामयी आयोजन हो

मुख्यमंत्री ने इस आयोजन के तहत अब तक हुए कार्यक्रमों की जानकारी भी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि भावी कार्यक्रमों के आयोजन के लिये सभी जिलाधिकारियों एवं विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिये जाय। आयोजन गरिमा के साथ आयोजित हो इसके लिये सभी सम्बन्धित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।

युवा जानें स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान को

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान हमारे लिये सर्वोपरि है। इस अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम, आजादी के लिये हमारे पूर्वजों द्वारा दिये गये बलिदान से भावी पीढ़ी को परिचित कराने में भी मददगार होंगे। उन्होंने इस आयोजन में विभिन्न संस्थानों, संगठनों, स्वयं सेवी संस्थाओं, एन.सी.सी, एन.एस.एस. की भी भागीदारी सुनिश्चित कराने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी महान विभूतियों के जीवनवृत्त पर प्रदर्शनी आदि के साथ ही उनके जीवन दर्शन पर आधारित लघु फिल्में भी तैयार की जाय। उन्होंने इस आयोजन के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान आदि से सम्बन्धित राज्य स्तरीय गीत तैयार कर उसके माध्यम से भी प्रचार प्रसार के निर्देश दिये।

हर घर झंडा

मुख्यमंत्री ने इस आयोजन के तहत आयेजित होने वाले ‘‘हर घर झंडा कार्यक्रम’’ के सम्बंध में प्रभावी कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने इस सम्बंध में आवश्यक दिशा निर्देशों का भी अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा।

इस सम्बंध में सचिव संस्कृति हरि चन्द्र सेमवाल ने बताया कि इस आयोजन के तहत पूरे देश में 75 ऐतिहासिक महत्व के विशिष्ट स्थलों से प्रत्येक राज्य से दो या तीन विशिष्ट स्थलों को शामिल किये जाने की प्रक्रिया में राज्य से अल्मोड़ा एवं देहरादून को चयनित किया गया है। इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में समिति का भी गठन किया गया है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के अंतर्गत अब तक सभी जनपदों में संबंधित विभागों द्वारा मैराथन दौड़, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर प्रदर्शनी, नशा मुक्ति कार्यक्रम, विचार गोष्ठी, सम्मेलनध्सेमिनार, वृक्षारोपण का आयोजन किया गया है, जबकि खादी प्रदर्शनी, क्विज कार्यक्रम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जीवनवृत्त पर नुक्कड़ नाटक पेंटिंग प्रतियोगिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से सम्बन्धित स्थलों का भ्रमण, निबंध प्रतियोगिता, साइकिल रैली के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

इस अवसर पर पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, अपर प्रमुख सचिव अभिनव कुमार, सचिव राधिका झा, प्रभारी सचिव डॉ. वी षणमुगम, महानिदेशक सूचना रणवीर सिंह चैहान, अपर सचिव युगल किशोर पंत, निदेशक उद्योग सुधीर नौटियाल, निदेशक संस्कृति वीणा भट्ट सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

शौर्य का प्रतीक मिग-21 लड़ाकू विमान पहुंचा दून

वायु सेना के शौर्य का प्रतीक मिग-21 लड़ाकू विमान अब गढ़ी कैंट के चीड़बाग में निमार्णाधीन युद्ध स्मारक (शौर्य स्थल) की शान बढ़ाएगा। रविवार को विमान यहां पहुंच गया है। जिसे विधिवत पूजा अर्चना के बाद युद्ध स्मारक पर उतारा गया।

छावनी परिषद देहरादून की मुख्य अधिशासी अधिकारी तनु जैन ने कैंट बोर्ड कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि देश के सैन्य इतिहास में देवभूमि के रणबांकुरों के शौर्य के असंख्य किस्से दर्ज हैं। उनके इस अदम्य साहस और बलिदान के प्रतीक के रूप में पूर्व राज्य सभा सदस्य तरुण विजय की पहल पर युद्ध स्मारक की नींव रखी गई थी। युद्ध स्मारक में मिग-21 रखने का प्रस्ताव करीब दो साल पहले कैंट बोर्ड की बैठक में पास हुआ था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया के विशेष प्रयास से विमान यहां पहुंच गया है।

इधर, पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं युद्ध स्मारक के अध्यक्ष तरुण विजय ने बताया कि देश के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए तैयार हो रहे शौर्य स्थल में नभ, जल और थल तीनों सेनाओं की निशानियां रखी जानी हैं। मिग-21 दून पहुंच गया है। युद्ध स्मारक की शान बढ़ाने के लिए चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) विपिन रावत की ओर से दो राइफल पहले ही दी जा चुकी हैं। इसके अलावा नौ सेना के साहस के प्रतीक के रूप में एक जहाज की सिफारिश भी रक्षा मंत्रालय से की गई है।

भारत में मिग 21 लड़ाकू विमान का इस्तेमाल 1964 से शुरू हुआ है। ये इकलौता ऐसा विमान है जिसका इस्तेमाल दुनियाभर के करीब 60 देशों ने किया है। मिग 21 एविएशन के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक संख्या में बनाया गया सुपरसोनिक फाइटर जेट है। पाकिस्तान के साथ हुए 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध में भी मिग 21 ने मुख्य भूमिका निभाई थी। मिग 21 लड़ाकू विमान की रफ्तार 2229 किमी प्रति घंटा की है। इसमें टर्बोजेट इंजन लगा हुआ है, जो विमान को सुपरसोनिक रफ्तार देता है।

केदारनाथ में अवस्थापना सुविधाओं का विकास करने में जुटी धामी सरकार

विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ धाम में यात्रा और पूजा का सफल आयोजन कराने के लिए रावल और पुजारियों को एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं मिलेगी। इसके लिए केदारनाथ धाम में रावल व पुजारियों के लिए तीन मंजिला इमारत का निर्माण किया जाएगा। जिसके लिए शासन की ओर से 10 करोड़ रुपये का बजट जारी किए गए हैं। केदारनाथ के रावल ही धाम में छह माह की पूजा-अर्चना के लिए पुजारी को अधिकृत करते हैं।

श्री केदारनाथ धाम से करीब 300 मीटर सरस्वती नदी समीप बनने वाले तीन मंजिला इमारत में 18 कक्षों का निर्माण किया जाएगा। 6.39 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस इमारत में रावल निवास, पुजारी आवास, भोग मंडी, पंथेर आवास, समालिया आवास, वेदपाठी आवास, पूजा कार्यालय आदि की व्यवस्था की जाएगी। जिसके लिए उत्तराखंड शासन की ओर से 10 करोड़ रुपये की धनराशि उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड को प्राप्त हो चुकी है। जिसकी पहली किस्त 27 मार्च और दूसरी किस्त 12 जुलाई को जारी की गई।

दिलीप जावलकर, पर्यटन सचिव ने बताया कि तीन मंजिला इमारत का निर्माण होने के बाद यात्रा के साथ पूजा का सफल और आसानी से आयोजन हो सकेगा। शासन की ओर से इसके लिए 10 करोड़ रुपये का बजट जारी कर दिया गया है। इसका सीधा लाभ रावल व पुजारियों को मिलेगा।

रविनाथ रमन, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड ने बताया कि 265 वर्ग मीटर में होने वाले भवन निर्माण के लिए स्थानीय जिलाधिकारी की ओर से उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड को मंदिर परिसर के समीप भूमि उपलब्ध करा दी गई है। निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।

उत्तराखंड की बेटी ने हॉकी में हैट्रिक लगाकर टीम इंडिया को दिलाई जीत

हरिद्वार के छोटे से गांव की वंदना कटारिया ने ओलंपिक में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी वंदना कटारिया ने टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रच दिया है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में वंदना ने तीन गोल दागे और टीम को जीत दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई।

वंदना ने ओलंपिक में हैट्रिक लगाकर पहली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी का यह खिताब भी अपने नाम कर लिया है। बता दें कि 1984 के बाद किसी भारतीय ने ओलंपिक में हैट्रिक नहीं लगाई थी।

वंदना ने ऐतिहासिक उपलब्धि से दिवंगत पिता को श्रद्धांजलि दी है। अपनी तैयारी के चलते वह पिता के निधन पर भी गांव नहीं आ सकी थीं। वंदना की इस उपलब्धि पर परिजनों, ग्रामीणों और जिले के खेल अधिकारियों में जश्न का माहौल है। बहादराबाद ब्लॉक क्षेत्र के गांव रोशनाबाद निवासी वंदना कटारिया ने पढ़ाई के साथ हॉकी को अपना कॅरियर बनाने के लिए जी जान से मेहनत की है।

वंदना कटारिया का जन्म 15 अप्रैल 1992 में रोशनाबाद में ही हुआ है। वंदना कटारिया ने पहली बार जूनियर अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में 2006 में प्रतिभाग किया। वर्ष 2013 में देश में सबसे अधिक गोल करने में सफल रहीं।

जर्मनी में हुए जूनियर महिला विश्वकप में वंदना कटारिया कांस्य पदक विजेता बनीं। वंदना ने हॉकी में फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान भी रह चुकी हैं।

2021 मई में पिता नाहर सिंह का आकस्मिक निधन हो गया। तब गांव नहीं आ पाई थीं। तब ओलंपिक के लिए बेंगलुरु में चल रहे कैंप में तैयारी कर रही थीं। उसकी हैट्रिक लगाने से गांव में जश्न है।

ग्रामीण परिवार के लोगों को शुभकामनाएं देने पहुंच रहे हैं। उप जिला खेल अधिकारी वरुण बेलवाल ने वंदना कटारिया को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि करोड़ों भारतीय की दुआओं से महिला हॉकी टीम जरूर ओलंपिक से मेडल लेकर आएगी।

सीएम ने पौधादान कार्यक्रम में किया प्रतिभाग, हरेला पर्व पर प्रकृति के संरक्षण का लें संकल्प

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार रोड, देहरादून स्थित एक स्थानीय वेडिंग प्वाइंट में हरेला पर्व पर आयोजित पौधादान कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। उन्होंने विधायकगणों एवं अन्य गणमान्यों को पौधारोपण हेतु पौधे दिये और लोगों को अधिक से अधिक पौधारोपण के लिए प्रेरित करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 जुलाई को उत्तराखण्ड में हरेला पर्व मनाया जाता है। प्रकृति के संरक्षण के उद्देश्य से उत्तराखण्ड में हरेला पर्व मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के संरक्षण के लिए हरेला पर्व के अवसर पर सभी को पौधारोपण करने का संकल्प लेना होगा। जुलाई एवं अगस्त माह का समय पौधारोपण के लिए सबसे उपयुक्त है। हमें अपनी परम्पराओं एवं परिवेश को बढ़ावा देना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज विज्ञान तेजी से प्रगति कर रहा है, वैज्ञानिक प्रगति के साथ ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में हमें और तेजी से आगे बढ़ना होगा। नमामि गंगे के तहत इस दिशा में सराहनीय प्रयास हुए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि पर्यावरणीय सन्तुलन बहुत जरूरी है। व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण कर सबको अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा। पीपल एवं बरगद के अधिक वृक्षारोपण पर हमें ध्यान देना होगा।

इस अवसर पर विधायक विनोद चमोली, मुन्ना सिंह चैहान, सहदेव सिंह पुण्डीर, खजानदास, मेयर सुनील उनियाल गामा, देहरादून की जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चैहान, भाजपा के महानगर अध्यक्ष सीताराम भट्ट आदि उपस्थित थे।