मुख्यमंत्री के निर्देश पर यात्रियों की दैनिक निर्धारित सीमा समाप्त

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर गढ़वाल आयुक्त/अध्यक्ष, चारधाम यात्रा प्रशासन द्वारा यात्रियों की सुविधा के मद्देनजर ऋषिकेश एवं हरिद्वार में चारों धामों के दर्शन हेतु निर्धारित की गई सीमा को समाप्त करने का निर्णय लिया है।
गढ़वाल आयुक्त/अध्यक्ष, चारधाम यात्रा प्रशासन विनय शंकर पांडेय ने बताया है कि वर्तमान में चारों धामों में भीड़ सामान्य होने के दृष्टिगत मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार जनहित में यह निर्णय लिया गया है कि यात्रियों की सुविधा हेतु ऋषिकेश एवं हरिद्वार में चारो धामों के दर्शन के लिए जो कोटा निर्धारित किया गया था, उसे समाप्त करते हुए अब यात्री ऋषिकेश एवं हरिद्वार के रजिस्ट्रेशन काउन्टर में स्वंय भौतिक रूप से उपस्थित होकर चारों धाम/दो धाम या किसी भी धाम का सीधे रजिस्ट्रेशन प्राप्त कर अपनी यात्रा पर सुगमता से जा सकते हैं। यह आदेश चारों धामों में आने वाले यात्रियों की सुविधा हेतु तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

गत वर्ष की तुलना में एक माह में डेढ़ गुना अधिक श्रद्धालु पहुँचे चारधाम
गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने अवगत कराया है कि विगत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष चारधाम यात्रियों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। गत वर्ष चारधाम यात्रा प्रारम्भ के एक माह में 12,35,517 श्रद्धालुओं द्वारा धामों के दर्शन किये गये थे, जबकि इस वर्ष 19,64,912 श्रद्धालुओं द्वारा चारों धामों के दर्शन किये जा चुके हैं, जो गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष लगभग डेढ गुना अधिक है।

मुख्यमंत्री धामी ने जिलाधिकारियों को दिए समयबद्ध कार्य के आदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रदेश में आपदा मद के तहत होने वाले कार्याे के लिए रू.13 करोड़ की दूसरी किश्त जारी की गई है। इस धनराशि से सभी जिलों में क्षतिग्रस्त मार्गों, पुलियाओं, पेयजल लाइनों, सिंचाई नहरों, स्कूल भवनों की मरम्मत आदि के कार्य किए जाएंगे।
प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2024-25 में आपदा मद में मरम्मत कार्याे के लिए प्रदेश के सभी 13 जिलों के लिए रू.26 करोड़ की धनराशि का प्रावधान किया गया है। इसके तहत पहली किश्त के रूप में रू.13 करोड़ की धनराशि पूर्व में जारी की जा चुकी है। आज इसकी दूसरी किश्त जारी कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिए हैं कि आसन्न मानसून सीजन को देखते हुए सभी कार्य समयबद्ध तरीके से पूर्ण कर लिए जाएं। इसमें किसी भी स्तर पर कोताही न बरती जाए। पैदल मार्गों और पुलियाओं की मरम्मत का कार्य प्राथमिकता से किया जाए। यह भी अनिवार्य रूप से देख लिया जाए कि पेयजल लाइनें और सिंचाई नहरें चालू हालत में हैं या नहीं।
बता दें, दो दिन पूर्व ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आसन्न मानसून को देखते हुए सचिवालय में आला अधिकारियों की बैठक लेकर विभागों की तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मानसून को देखते हुए 15 जून से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं।

वन कर्मियों को तत्काल एयरलिफ्ट कर हल्द्वानी बेस अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश

बिनसर वन्यजीव विहार में वनाग्नि से 4 वनकर्मियों की मृत्यु पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा दुःख प्रकट किया है। उन्होंने इस घटना में झुलसे चार अन्य वनकर्मियों को तत्काल हल्द्वानी बेस अस्पताल में एयरलिफ्ट किये जाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह घटना बेहद हृदय विदारक है और दुःख की इस घड़ी में पूरी उत्तराखंड सरकार वनकर्मियों के परिजनों के साथ खड़ी है। उन्होंने इस हादसे में झुलसकर घायल होने वाले चार वन्य कर्मियों को तत्काल हल्द्वानी बेस अस्पताल में एयरलिफ्ट करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। गंभीर घायलों को आवश्यकतानुसार उपचार हेतु हल्द्वानी से एम्स ऋषिकेश एयरलिफ्ट करने के भी निर्देश मुख्यमंत्री धामी ने दिए। इसके साथ-साथ मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपए की अनुग्रह धनराशि दिए जाने के निर्देश मुख्यमंत्री धामी के द्वारा दिए गए।
मुख्यमंत्री के विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते ने बताया कि घटना पर शासन पूरी नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार घायल कर्मियों को एयरलिफ्ट कर हल्द्वानी अस्पताल लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मृतकों का आज ही पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है ।
विदित हो कि यह दुर्घटना आज दोपहर में 3.30 बजे के करीब बिनसर वन्यजीव विहार, अल्मोड़ा के सिविल सोयम वन प्रभाग में घटित हुई। बताया गया कि बोलेरो वाहन में 8 वनकर्मी सवार थे। वनाग्नि से बोलेरो वाहन में सवार 4 वन कर्मियों की आग में झुलसने से मृत्यु एवं 4 अन्य वन कर्मियों के आग से झुलसने से घायल होने की सूचना प्राप्त हुई।

मुख्य सचिव ने 16वें वित्त आयोग द्वारा मांगी गई सूचनाओं को तत्काल भेजने की डेडलाइन दी

राज्य के सभी विभागों को ऑनरशिप की कार्यशैली से कार्य करने की सख्त हिदायत देते हुए सीएस राधा रतूड़ी ने सभी विभागों को 16वें वित्त आयोग द्वारा मांगी गई सूचनाओं को तत्काल वित्त विभाग को प्रेषित करने करने की डेडलाइन दी है। इसके साथ ही मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने गुरूवार को सचिवालय में 16वें वित्त आयोग का मैमोरेण्डम तैयार करने हेतु आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए आयोग से उत्तराखण्ड राज्य हेतु जलस्रोतों व धाराओं के पुनर्जीवीकरण की रिपोर्ट शामिल करने, आपदा प्रबन्धन राज्य होने के कारण रिकवरी की गाइडलाइन्स पर पुनर्विचार करने, पर्यटन प्रदेश होने के कारण राज्य में मूल आबादी के साथ ही फलोटिंग आबादी के कारण राज्य की बुनियादी सुविधाओं पर अत्यधिक दबाव होने के कारण वित्तीय संसाधनों व विभिन्न योजनाओं पर प्रभाव, राज्य में वन क्षेत्र की अधिकता, प्रदेश में ऊर्जा की अवसंरचना सुविधाओं को मजबूत बनाने सम्बन्धित बिन्दुओं पर विचार करने का आग्रह किया।
वित्त आयोग से ई वाई द्वारा उत्तराखण्ड के विशेष सन्दर्भ में जल स्रोतों व धाराओं के पुनर्जीवीकरण की रिपोर्ट को सम्मिलित करने पर विचार करने हेतु ई वाई द्वारा सहमति व्यक्त की गई।
ई वाई द्वारा सम्बन्धित विभागों से मुख्यतः राजस्व खाते के आधिक्य एवं इसको संतुलित करने, राजकोषीय घाटे को कम करने, राज्य के पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों में शहरीकरण की सीमाओं, प्रति व्यक्ति आय, विभागों की अवशेष देनदारियों, पूंजीगत व्यय जैसे पर विस्तार से चर्चा की गई।
विदित है कि 13 जून से 19 जून 2024 तक 16वें वित्त आयोग से ई वाई डी के श्रीवास्तव द्वारा राज्य सरकार के विभागों के साथ 16वें वित्त आयोग का मेमोरेंडम तैयार करने तथा बजट के पूर्वानुमान हेतु विभिन्न बैठकें आयोजित की जाएगी।
बैठक में अपर मुख्य सचिव आन्नद वर्धन, सचिव शैलेश बगौली, दिलीप जावलकर सहित सभी विभागों के अधिकारी एव वित्त आयोग के पदाधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने रीठा साहिब, चम्पावत में कार पार्किंग निर्माण हेतु प्रदान की वित्तीय स्वीकृति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भूतपूर्व सैनिकों आश्रितों को शैक्षिक सहायता (छात्रवृत्ति) योजना के तहत छात्रवृत्ति राशि की स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य के भूतपूर्व सैनिकों आश्रितों को इंजीनियरिंग, मेडिकल व पी.एच.डी. की शिक्षा ग्रहण करने हेतु शैक्षणिक सहायता (छात्रवृत्ति) योजना के तहत 91 विद्यार्थियों को 11 लाख 6 हजार की धनराशि की स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए स्वीकृत छात्रवृत्ति के तहत इंजीनियरिंग के 83 छात्रों को 9,96,000, मेडिकल के 6 छात्रों को 90,000, पी.एच.डी. के 2 छात्रों को 20,000 की धनराशि की स्वीकृति प्रदान की है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने जनपद चम्पावत के रीठा साहिब में कार पार्किंग निर्माण कार्य के लिए 9 करोड़ 89 लाख की धनराशि की भी स्वीकृत प्रदान की है।

आदर्श जनपद बनाने के लिए लिए बनाई जा रही कार्ययोजना और गतिमान कार्यों की समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में जनपद चम्पावत को आदर्श जनपद बनाने के लिए लिए बनाई जा रही कार्ययोजना और गतिमान कार्यों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को आदर्श राज्य बनाने के लिए जनपद चम्पावत को मॉडल जनपद के रूप में लिया जा रहा है। चम्पावत ऐसा जनपद है जिसमें राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से मैदान, तराई, भाबर और पर्वतीय क्षेत्र शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि आदर्श जनपद चम्पावत के लिए बनाई जा रही कार्य योजना पर तेजी से कार्य किये जाएं। उन्होंने कहा कि विकास के साथ विरासत को भी आगे बढ़ाना है। अधिकारियों को मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि विकास कार्यों में पारिस्थितिकी और पर्यावरण में समन्वय बनाकर कार्य करें। प्रकृति द्वारा हमें प्रदान की गई विरासतों के संरक्षण के साथ विकास कार्य किये जाएं। उन्होंने कहा कि अभी तक बनाई गई कार्ययोजना के अनुसार कार्यों को धरातल पर तेजी से उतारा जाए। चरणबद्ध तरीके से कार्यों में तेजी लाई जाए, यह सुनिश्चित किया जाए कि कार्यों के परिणाम जल्द धरातल पर दिखें। उन्होंने कहा कि आदर्श चम्पावत के लिए नोडल अधिकारी जनपद के अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं के साथ नियमित बैठकें करें। उन्होंने कहा कि आदर्श चम्पावत के लिए और क्या बेहतर कार्य हो सकते हैं, इसके लिए स्थानीय स्तर पर लोगों के सुझाव भी लिये जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चम्पावत जनपद में धार्मिक, आध्यात्मिक और साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में अनेक संभावनाएं हैं। चम्पावत जनपद में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटक की सुविधा के दृष्टिगत तीन से चार दिन की यात्रा के लिए सर्किट बनाए जाएं। पूर्णागिरी में श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रहती है, श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि शारदा कॉरिडोर और चम्पावत के आईएसबीटी को भी विस्तारित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि निर्माण संबधी कार्यों में पारिस्थितिकी से संबंधित पहलुओं का विशेष ध्यान रखा जाए।
बैठक में प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जानकारी दी गई कि चम्पावत जनपद में पर्यटन, कृषि और बागवानी, हेल्थकेयर, शिक्षा, दुग्ध और उससे संबंधित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विस्तृत कार्ययोजना पर कार्य किया जा रहा है। चम्पावत को आदर्श राज्य बनाने के लिए 2030 तक के लिए लघु, मध्यम और दीर्घकालिक योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। जनपद में कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने, एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने, डेस्टिनेशन वेडिंग हब बनाने, किवी और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किये जा रहे हैं। आदर्श चम्पावत के लिए जिन योजनाओं पर कार्य किये जा रहे हैं, भविष्य में स्थानीय स्तर पर ये लोगों की आर्थिकी को तेजी से बढ़ाने में काफी कारगर साबित होंगी।
जिलाधिकारी चम्पावत नवनीत पाण्डेय ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जनपद में प्रत्येक पात्र व्यक्ति को मिले, इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चम्पावत जनपद में सैलर एनर्जी के क्षेत्र में अनेक संभावनाएं हैं, इस दिशा में विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनपद में ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में पलायन बढ़ रहा है, इसको ध्यान में रखते हुए टाउन प्लानिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बैठक में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव शैलेश बगोली, एस.एन.पाण्डेय, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, अपर सचिव जगदीश चन्द्र कांडपाल एवं कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारी उपस्थित रहे।

शैक्षिक भ्रमण पर उत्तराखंड आए सीआरपीएफ के प्रशिक्षु अधिकारी

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से सचिवालय में शैक्षिक भ्रमण पर उत्तराखंड आए सीआरपीएफ के प्रशिक्षु अधिकारियों ने शिष्टाचार भेंट की। मुख्य सचिव और सीआरपीएफ के प्रशिक्षु अधिकारियों के मध्य राज्य में आपदा प्रबंधन, सीमांत गांवो में विकास कार्य और राज्य में संचालित विकास योजनाओं के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखने और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में राज्यों की सहायता में सीआरपीएफ की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। देशव्यापी उपस्थिति के साथ, राज्य पुलिस के साथ सहयोग करते हुए, विभिन्न परिस्थितिजन्य मांगों के साथ तेजी से समायोजन करने की इसकी उल्लेखनीय क्षमता ने सीआरपीएफ को व्यापक रूप से स्वीकृत बलों में से एक होने की प्रतिष्ठा प्रदान की है।
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को उज्जवल भविष्य हेतु शुभकामनाएं दी।

सीएम के हाथों होगा एससीईआरटी के नव निर्मित भवन का लोकार्पण

विद्यालयी शिक्षा विभाग के अंतर्गत विभिन्न संवर्गों के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं। समग्र शिक्षा के अंतर्गत आउटसोर्स के माध्यम से बीआरपी-सीआरपी, रिसोर्स पर्सन, लेखाकार कम सपोर्टिंग स्टॉफ सहित चतुर्थ श्रेणी के कार्मिकों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये गये हैं। इसके अलावा कलस्टर स्कूलों के निर्माण कार्य समय पर पूरा करने को भी अधिकारियों को कहा गया है। मुख्यमंत्री के हाथों एससीईआरटी के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण तथा ‘हमारी विरासत’ पुस्तक का विमोचन शीघ्र किया जायेगा, इसके लिये विभागीय अधिकारियों को सभी तैयारियां पूरी करने को कहा गया है।
शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने आज विद्यालयी शिक्षा निदेशालय स्थित समग्र शिक्षा सभागार में विभागीय समीक्षा बैठक ली। जिसमें उन्होंने प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा के तहत विभिन्न संवर्गों के रिक्त पदों की समीक्षा करते हुये अधिकारियों को जरूरी दिशा निर्देश दिये। डा. रावत ने कहा कि विभाग में लम्बे समय से रिक्त चल रहे पदों को शीघ्र भरा जाय ताकि विभागीय कार्यों में तेजी लाई जा सके। उन्होंने बताया कि समग्र शिक्षा के अंतर्गत बीआरपी-सीआरपी के 955 पद, रिसोर्स पर्सन आईईडी के 161 तथा लेखाकार कम सपोर्टिंग स्टॉफ के 326 पदों के लिये विभागीय स्तर पर भर्ती प्रक्रिया गतिमान है, शीघ्र ही इन पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्तियां दी जायेगी। विभागीय मंत्री ने कहा कि प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिये अधिकारियों को भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक शिक्षा के अंतर्गत प्रथम चरण में बेसिक शिक्षकों के 2917 पदों पर जनपदवार विज्ञप्ति जारी कर दी गई है। माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत सहायक अध्यापक एलटी के 1544 पदों का अधियाचन उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग भेजा जा चुका है, इन पदों के सापेक्ष शीघ्र ही आयोग से चयनित शिक्षकों की सूची उपलब्ध हो जायेगी, जबकि प्रवक्ता के 613 पदों का अधियाचन भी राज्य लोक सेवा आयोग को भेज दिया गया है। डा. रावत ने कहा कि राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी के लगभग 2500 पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से की जा रही भर्ती प्रक्रिया में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को शीघ्र दूर कर दिया जायेगा। डा. रावत ने कहा कि शीघ्र ही मुख्यमंत्री के हाथों एससीईआरटी के नव निर्मित भवन का लोकार्पण तथा नई शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के तहत एससीईआरटी द्वारा तैयार ‘हमारी विरासत’ पुस्तक का विमोचन किया जायेगा। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिये गये हैं।
बैठक में डॉ. रावत ने विद्या समीक्षा केन्द्र के कामकाज की समीक्षा करते हुये अधिकारियों को विद्यालयों, छात्रों एवं शिक्षकों से संबंधित सभी आंकडों को रियल टाइम आधार पर संकलित करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि विद्या समीक्षा केन्द्र के संचालन से शिक्षकों की सारी परेशानियों को दूर किया जा रहा है ताकि शिक्षक अपना पूरा फोकस शैक्षणिक गतिविधियों पर कर सकें। बैठक में विभागीय मंत्री डा. रावत ने कलस्टर विद्यालयों के निर्माण संबंधी प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को कलस्टर विद्यालयों के निर्माण कार्यों में हो रही देरी पर कार्यदायी संस्थाओं के खिलाफ ठोस कार्यवाही करने के भी निर्देश दिये।
बैठक में महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी, अपर सचिव विद्यालयी शिक्षा रंजना राजगुरू, एम.एम. सेमवाल, निदेशक एससीईआरटी वंदना गर्ब्याल, निदेशक प्राथमिक शिक्षा आर.के. उनियाल, निदेशक माध्यमिक एम.एस. बिष्ट, अपर परियोजना निदेशक डा. मुकुल सती, स्टॉफ ऑफिसर शिक्षा बी.पी. मंदोली सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

चारधाम यात्रा प्रबंधन प्राधिकरण के गठन को कार्रवाई तेज करने के निर्देश

मुख्यंमत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को चारधाम प्रबंधन यात्रा प्राधिकरण के गठन हेतु कार्रवाई त्वरित गति से करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने यमुनोत्री धाम में कैरिंग कैपेसिटी (धारण क्षमता) कैसे बढ़ाई जाए, इस पर भी कार्ययोजना शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए।
बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आयोजित बैठक में उन्होंने यह निर्देश दिए। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा प्रबंधन प्राधिकरण का कार्यक्षेत्र सिर्फ चारधामों तक सीमित नहीं होगा अपितु प्रदेश में समस्त प्रकार की यात्राओं के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी उक्त प्राधिकरण के अंतर्गत आएगी। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण गठन के पीछे मुख्य उद्देश्य यही है कि प्रदेश में बढ़ते धार्मिक व सामान्य पर्यटन के मद्देनजर हमारे पास एक ऐसी संस्था हो जो इन सब जिम्मेदारियों व तैयारियों का भलीभांति निर्वहन कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरगामी विजन के चलते आज प्रदेश में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं। खासतौर से इस बार के यात्रा सीजन में यह तथ्य प्रमुखता से उभरा है कि गंगोत्री व यमुनोत्री धामों में तीर्थयात्रियों की संख्या में दोगुना तक वृद्धि हुई है। ऐसे में यमुनोत्री धाम की कैरिंग कैपेसिटी यानि वहां ठहरने की सुविधाएं होटल, गेस्ट हाउस आदि को किस प्रकार से बढ़ाया जाना चाहिए, इस दिशा में भी ठोस कार्य किये जायें। विदित हो कि चारधामों के विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सतत रूप से प्रयासरत रहे हैं और इसी का प्रतिफल है कि श्री बद्रीनाथ धाम व केदारनाथ धाम में मास्टर प्लान के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य किये जा रहे हैं। साथ ही ऑल वेदर रोड के निर्माण के बाद चार धामों की यात्रा अधिक सुगम व सुरक्षित हुई है।

चारधाम यात्रा को कोटद्वार से संचालित करने की संभावना तलाशें, रोपवे की बाधाओं को करें दूर
मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा अभी मुख्य रूप से ऋषिकेश से संचालित होती है लेकिन यहां पर बड़ी संख्या में यात्रियों के पहुँचने के चलते जाम की समस्या भी बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा का संचालन किस तरह से कोटद्वार से भी किया जा सकता है, इसकी भी संभावना तलाशी जायें। मुख्यमंत्री ने केदारनाथ धाम, हेमकुंड साहिब व यमुनोत्री धाम के लिए रोपवे निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

टिहरी झील व आसपास के क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 1200 करोड़ का प्रोजेक्ट
टिहरी झील और आसपास के क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एडीबी ने 1200 करोड़ रुपये का अवस्थापना संबंधी प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया है। उन्होंने इसकी निविदा प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के आने से टिहरी झील के आसपास के क्षेत्र में पर्यटन तेजी से बढ़ेगा। इससे यह झील और भी अधिक आकर्षण का केंद्र बनेगी। मुख्यमंत्री ने पौड़ी जिला मुख्यालय तक पर्यटन को बढ़ावा देने के भी निर्देश दिए ताकि अधिक से अधिक लोग यहां पहुँच सके और यह क्षेत्र भी सीधे पर्यटन से जुड़ सके।

मुख्य सचिव ने 31 जुलाई तक डीपीआर भेजने के निर्देश दिए

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने लोक निर्माण, सिंचाई, पशुपालन, स्कूली शिक्षा, कौशल तथा तकनीकी शिक्षा विभाग को 24 घण्टे की डेडलाइन देते हुए अवशेष 383.11 करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट तत्काल नाबार्ड को भेजने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मुख्य सचिव ने 31 जुलाई की समय सीमा निर्धारित करते हुए सभी विभागों को वित्त विभाग को डीपीआर भेजने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने विभागों को भविष्य में नाबार्ड की समयसीमा के अनुसार ही अपने प्रोजेक्ट के बजट बनाकर समयबद्धता से भेजने की सख्त हिदायत दी है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने विभागों को अपने प्रोजेक्ट के प्रस्ताव, आहरण, प्रोजेक्ट कम्पलीशन सर्टिफिकेट (पीसीसी), प्रोजेक्ट कम्पलीशन रिपोर्ट (पीसीआर) को ऑनलाइन जमा करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने विभागों को प्रोजेक्ट पूरे होने पर एक सप्ताह के भीतर प्रोजेक्ट कम्पलीशन सर्टिफिकेट तथा छः माह के भीतर प्रोजेक्ट कम्पलीशन रिपोर्ट (पीसीआर) जमा करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही राधा रतूड़ी ने विभागों को शहरी अवसंरचना विकास निधि (यूआईडीएफ) के तहत पार्किंग, मलिन बस्तियों के पुनर्विकास एवं शहरी वनीकरण के प्रोजेक्ट को शीर्ष प्राथमिकता पर नाबार्ड को भेजने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव रतूड़ी ने विभागों को सख्त हिदायत दी है कि नाबार्ड को सिर्फ उच्च गुणवत्ता वाले तथा योग्य प्रोजेक्ट ही प्रस्तावित किए जाने चाहिए। प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकता भी विभागों द्वारा ही तय की जानी चाहिए तथा विभागों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि फण्डिंग की डुप्लीकेसी ना हो। उन्होंने अपेक्षाकृत छोटे प्रोजेक्ट को नाबार्ड में प्रस्तावित ना करने का सुझाव दिया है। मुख्य सचिव ने विभागों को दिए गए लक्ष्य के 50 प्रतिशत प्रोजेक्ट 30 जून, 60 प्रतिशत प्रोजेक्ट 31 जुलाई तथा 100 प्रतिशत प्रोजेक्ट 15 अगस्त तक वित्त विभाग को भेजने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने वित्त विभाग को भी प्रतिपूर्ति हेतु बिल नाबार्ड में जमा कराने हेतु प्रत्येक चार माह का टारगेट दिया है। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सभी विभागों को कड़ाई से स्पष्ट किया है कि प्रतिपूर्ति लेने में असफल होने वाले विभागों को इस सम्बन्ध में भविष्य में कार्यशैली में सुधार करना होगा। मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को जल स्रोतों एवं नदियों के पुनर्जीवीकरण के प्रोजेक्ट नाबार्ड हेतु प्रस्तावित करने के निर्देश दिए।
बुधवार को सचिवालय में नाबार्ड की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक की अध्यक्षता के दौरान मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा कि राज्य के ग्रामीण विकास में नाबार्ड द्वारा प्राप्त होने वाली वित्तीय सहायता का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
बैठक में जानकारी दी गई कि वित्त विभाग द्वारा कुल 360.47 करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट प्राप्त किए गए हैं जिनमें सिंचाई विभाग से 77.40 करोड़ के 10 प्रोजेक्ट, लोक निर्माण विभाग से 193.11 करोड़ के 89 प्रोजेक्ट, तकनीकी शिक्षा से 66.96 करोड़ के 4 प्रोजेक्ट, पशुपालन से 9.52 करोड़ का 1 प्रोजेक्ट, ग्रामीण निर्माण विभाग से 13.4811 करोड़ के 5 प्रोजेक्ट हैं। वर्ष 2023-24 में राज्य को नाबार्ड द्वारा कुल अनुमोदित 904.4 करोड़ के सापेक्ष भुगतान 954.9 करोड़ रहा है। वर्ष 2024-25 के लिए आरआईडीएफ के तहत 1200 करोड़ का अनुमोदित लक्ष्य तथा 969 करोड़ रूपये का प्रतिपूर्ति लक्ष्य रखा गया है।
राज्य में नाबार्ड के तहत ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) से 2.05 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिचाई सुविधाओं का सृजन एवं पुनर्द्धार किया गया है। लगभग 14,766 किमी ग्रामीण सड़कों के नेटवर्क का निर्माण एवं सुधार किया गया है। 27307 मीटर ब्रिज का निर्माण हो चुका है। 23.77 लाख ग्रामीण आबादी को पेयजल सुविधा मिल चुकी है। 241 स्कूल एवं आईटीआई का निर्माण एवं पुनर्द्धार हो चुका है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव आनंद वर्धन, सचिव दिलीप जावलकर, सीजीएम नाबार्ड सहित वित्त, लोक निर्माण, सिंचाई विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।