उत्तराखण्ड में फिल्म निर्माता-निर्देशकों को राज्य सरकार से मिला प्रोत्साहन- बंशीधर तिवारी

विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में भारत के राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू द्वारा उत्तराखण्ड को 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के अन्तर्गत Most Film Friendly State (Special Mention) पुरस्कार प्रदान किया गया। राज्य सरकार की ओर से यह पुरस्कार महानिदेशक, सूचना एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद बंशीधर तिवारी द्वारा प्राप्त किया गया है।
महानिदेशक, सूचना एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद बंशीधर तिवारी ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य को यह पुरस्कार मिलने से प्रदेश में फिल्मों की शूटिंग को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा। महानिदेशक, सूचना ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये है। राज्य सरकार में फिल्म निर्माता-निर्देशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाया गया है, जिसका परिणाम है कि आज उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। मुख्यमंत्री श्री धामी द्वारा प्रदेश की फिल्म नीति को और अधिक आकर्षक बनाया जा रहा है। फिल्म नीति को और अधिक आकर्षक और व्यावहारिक बनाया जा रहा है। इससे राज्य में फिल्म निर्माण क्षेत्र को और अधिक प्रोत्साहित किया जा सकेगा। राज्य में अधिक से अधिक फिल्म निर्माता आ सकेंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकेंगे। राज्य सरकार द्वारा फिल्म नीति को आकर्षक बनाया गया है, जिसमें सिंगल विंडो शूटिंग अनुमति प्रदान किया जाना। अब राज्य में शूटिंग हेतु कोई भी शुल्क नही लिया जा रहा है। नई फिल्म नीति में रुपये 1.5 करोड़ तक अनुदान दिये जाने की व्यवस्था है। इसके साथ ही शूटिंग अवधि में पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराया जाना शामिल है। क्षेत्रीय फिल्मों को स्थानीय सिनेमाघरों द्वारा सप्ताह में एक शो अनिवार्य रूप से दिखाया जाना है।
महानिदेशक, सूचना एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद बंशीधर तिवारी ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के इस पुरस्कार के लिए उत्तराखण्ड राज्य का चयन हम सभी के लिए गौरव की बात है। अल्प कार्यकाल में देश के अन्य राज्यों को पीछे छोड़ते हुए उत्तराखण्ड राज्य का इस पुरस्कार के लिए चयन हुआ है। उन्होंने कहा की आगे भी सुविधा और सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा ताकि अधिक से अधिक फ़िल्मों की शूटिंग उत्तराखंड में हो सके और उत्तराखंड विश्व पटल पर अपनी उपस्थिति और बेहतर तरीक़े से दर्ज करा सके।
उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी डॉ. नितिन उपाध्याय ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य को 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के अन्तर्गत Most Film Friendly State (Special Mention) का पुरस्कार प्रदान किया गया है। भारत सरकार द्वारा यह पुरस्कार फिल्म उद्योग को आगे बढ़ाने, जिसमें राज्य में फिल्म निर्माण के लिए अनुकूल वातवारण तैयार करना शामिल है। इसके साथ ही फिल्म और कला क्षेत्र को प्रोत्साहन देना एवं बंद पड़े सिनेमा हॉल को फिर से खोलने के लिए प्रोत्साहित करना है। उत्तराखण्ड राज्य को यह पुरस्कार राज्य में फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया गया है।राज्य में उत्तराखण्ड राज्य सरकार द्वारा फिल्म निर्माताओं की सुविधाओं के दृष्टिगत आकर्षक फिल्म नीति लागू की गई है। विगत एक वर्ष में राज्य में 150 से अधिक फिल्मों, धारावाहिक, डाक्यूमेंट्री आदि की शूटिंग की गई है। इनमें द कश्मीर फ़ाइल, मीटर चालू, बत्ती गुल, परमाणु, बाटला हाउस, कबीर सिंह, केदारनाथ, नरेन्द्र मोदी, स्टूडेंट ऑफ द ईयर, परमाणु, रागदेश, तड़प, वार, डिस्कवरी चैनल पर प्रसारित कार्यक्रम Man vs Wild आदि कई बड़े नाम भी शामिल है। वर्ष 2017 के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के अन्तर्गत Special Mention Certificate for Film Friendly Environment पुरस्कार प्रदान किया गया था।
वर्ष 2017 में पर्यटन पुरस्कार के अर्न्तगत उत्तराखण्ड राज्य को “राष्ट्रीय फिल्म संवर्धन हितैषी राज्य” का पुरस्कार प्रदान किया गया है। वर्ष-2018 के तहत सर्वश्रेष्ठ फिल्म प्रमोशन फ्रेण्डली स्टेट पुरस्कार-2018, वर्ष-2019 में मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट का प्रथम पुरस्कार-2019 मिला है। इन पुरस्कारों हेतु राष्ट्रीय स्तर पर गठित चयन समिति द्वारा निर्धारित मानकों का परीक्षण कर यह पुरस्कार प्रदान किया जाता है। पुरस्कार हेतु निर्धारितों मानकों के अनुसार विवरण भारत सरकार को प्रेषित की किया जाता है, जिसमें Ease of filming, Infrastructure, सब्सिडी, Database, Marketing and Promotion एवं विगत वर्षो में राज्य में शूटिंग की गई फिल्मों की संख्या का विवरण प्रदान करना होता है।

पन्द्रह सूत्रीय कार्यक्रम के क्रियान्वयन को राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति की बैठक

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम योजना के प्रस्तावों पर अनुमोदन हेतु प्रधानमंत्री पन्द्रह सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय समिति की बैठक आयोजित हुयी।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को नई गाईडलाइन के अनुसार अपने जनपदों में आ रहे सभी गांवों को चिन्हित किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि आवश्यकता के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर लिए जाएं। उन्होंने अगले 2 सप्ताह में इस हेतु जनपद स्तरीय समितियों के बैठकें आयोजित कर प्रस्ताव शीघ्र भेजे जाने के भी निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति की बैठक देरी से आयोजित किए जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए इस बैठक में स्वीकृत प्रस्तावों को शीघ्र अतिशीघ्र भारत सरकार को भेजे जाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारियों को इस योजना के अन्तर्गत अगले 5 सालों के लिए एरिया स्पेसिफिक कॉम्प्रीहेंसिव डेवेलपमेंट प्लान भी तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को सभी सम्बन्धित विभागों से विभागवार प्रस्ताव मांगे जाने के भी निर्देश दिए। उक्त योजना के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा 90ः10 के रूप में वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जाती है। योजना हेतु नई गाईडलाईन के अनुसार योजना के दायरे में आकांक्षी ऐसे क्षेत्र आते हैं, जो जनपदों के रूप में जनपद हरिद्वार एवं ऊधमसिंह नगर के संपूर्ण क्षेत्र के साथ-साथ राज्य के ऐसे क्षेत्र जहां 15 किमी परिधि के कैचमेंट एरिया में 25 प्रतिशत से अधिक अल्पसंख्यक आबादी निवासरत हो। पूर्व में योजना के अन्तर्गत उत्तराखण्ड के चिन्हित अल्पसंख्यक बाहुल्य 4 जनपदों के 15 विकासखण्डों एवं 7 नगर निकायों में लागू थी। योजनान्तर्गत राज्य स्तरीय समिति कुल 56 कार्य लागत रू0 201.36 करोड़ के प्रस्तावों को अनुमोदन प्रदान किया गया, जो अब भारत सरकार को भेजे जाएंगे।
इस अवसर पर विधायक फुरकान अहमद, प्रमुख सचिव एल. फैनई, सचिव रविनाथ रमन, विजय कुमार यादव सहित समिति के अन्य सदस्य एवं उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।

गृह विभाग की समीक्षा में बोले सीएम, साइबर सुरक्षा तंत्र को मजबूत बनाये

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में गृह विभाग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिये कि साइबर सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जाए। इंटेलिजेंस को और मजबूत करने के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन समस्याओं एवं जन शिकायतों का त्वरित समाधान हो। पुलिसिंग व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए टीम वर्क से कार्य किये जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि जिन कार्यों का समाधान थाना एवं जिला स्तर पर हो सकता है, वे अनावश्यक रूप से पुलिस मुख्यालय एवं शासन स्तर पर न आयें। उन्होंने कहा कि पुलिस का आम जन के साथ अच्छा व्यवहार होना जरूरी है, लेकिन असामाजिक गतिविधियों पर गहनता से नजर रखी जाए एवं संबंधितों पर सख्त कारवाई भी की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्मार्ट पुलिसिंग व्यवस्था के लिए आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाए। ड्रोन का बेहतर उपयोग भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक मैनेजमेंट एवं आपदा प्रबंधन में कैसे किया जा सकता है, इस ओर विशेष ध्यान दिया जाए। पुलिस के आधुनिकीकरण के लिये अन्य राज्यों की बैस्ट प्रैक्टिसेज भी देख ली जाए। भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाए, जिसमें पुलिस, शिक्षा, समाज कल्याण एवं अन्य संबंधित विभागों को शामिल किया जाए। इन विभागों की समन्वय बैठक कर भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए एक्शन प्लान बनाया जाए। पुलिस व्यवस्था को और सशक्त बनाने के लिए समय-समय पर पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए। यातायात की सभी सुचारू व्यवस्थाओं के लिए एसपी ट्रैफिक को नोडल बनाया जाए।
बैठक में जानकारी दी गई कि उत्तराखण्ड में नार्थ ईस्ट राज्यों को छोड़कर अपराध दर देश में न्यूनतम है। क्राईम एण्ड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क सिस्टम में उत्तराखण्ड देश में 6वें एवं हिमालयी राज्यों में दूसरे नम्बर पर है। सभी थानों में सीसीटीवी कैमरों की पूरी व्यवस्था की गई है।
बैठक में मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.संधु, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, डीजीपी अशोक कुमार, विशेष प्रमुख सचिव अभिनव कुमार, सचिव आर. मीनाक्षी सुदंरम, शैलेश बगोली, एडीजी डॉ. पी.वी.के प्रसाद, अमित कुमार सिन्हा, वी. मुरूगेशन, पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

हरिद्वार पंचायत में भाजपा का प्रदर्शन शानदार, विपक्ष के साथ ही भीतरघातियों के मुंह बंद

हरिद्वार जिला पंचायत के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने इस बार अभूतपूर्व जीत दर्ज की है। जितनी सीटें भाजपा इस बार हरिद्वार में जीती है उतनी राज्य गठन से लेकर अब तक कभी नहीं जीत पाई थी। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह जीत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कामकाज पर जनता की मुहर है। राज्य में लगातार दोबारा सत्ता संभालने के बाद पहली चुनावी परीक्षा में धामी सरकार बेहतरीन अंकों के साथ पास होने में कामयाब रही। यह बड़ी जीत युवा नेतृत्व का ही करिश्मा है।
पिछले एक-डेढ़ माह में राज्य में तीन ऐसे बड़े प्रकरण हो चुके हैं जिनका सीधे तौर पर धामी सरकार को सामना करना पड़ा है। खासतौर से सत्ता के गलियारों से ही धामी को तमाम अप्रत्यक्ष चुनौतियों से दो चार होना पड़ा। नोेेब भर्ती घोटाले में जिस तरह से मुख्यमंत्री धामी ने बगैर दबाव के दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे धकेला उससे उन्होंने एक नई लकीर खींच डाली तो विधानसभा भर्ती प्रकरण में भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बगैर देर किए विधानसभा अध्यक्ष से जांच का अनुरोध कर डाला जिसका नतीजा यह हुआ कि बैकडोर से नौकरी पाने वाले आज बाहर हैं और विरोधी चित। वहीं, अंकिता हत्याकांड के बाद राज्य में जिस तरह का माहौल बना तो उसमें भी जनभावनाओं के अनूरूप मुख्यमंत्री ने त्वरित एक्शन लेने में कोई देर नहीं लगाई। इस बीच हरिद्वार में हुआ शराब कांड भी चुनौती के रूप में उभरा लेकिन युवा मुख्यमंत्री ने इन तमाम चुनौतियों के बावजूद हरिद्वार के नतीजों के जरिये दर्शा दिया कि राज्य की राजनीति में अभी दूर-दूर तक उनका कोई सानी नहीं है। धामी और भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की विधानसभा चुनाव के बाद यह पहली परीक्षा थी लेकिन इस जोड़ी ने परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर सबके मुँह बंद कर दिए।
आपको बता दें कि हरिद्वार जिला पंचायत चुनाव में भाजपा ने कभी भी 4 से ज्यादा जिला पंचायत की सीट नहीं जीती थी लेकिन अब तक आये हरिद्वार पंचायत चुनाव के नतीजों में भाजपा 13 सीटों पर जीत हासिल की चुकी है। पूर्व मंत्री यतीश्वरानंद की विधानसभा में भाजपा ने सबसे ज्यादा 7 सीटें जीती। अब माना जा रहा है कि हरिद्वार में भाजपा का जिला पंचायत बोर्ड बनना लगभग तय है, जो अपने आप में एक इतिहास है। पार्टी के इस प्रदर्शन से मुख्यमंत्री धामी सियासी तौर पर पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरे हैं। निश्चित रूप से जनता ने उनके सेवा, समर्पण और सुशासन पर अपनी मुहर लगाई है।

मुख्यमंत्री ने परिवार से मिलकर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की बात कही

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज पौड़ी के श्रीकोट में अंकिता भंडारी के परिजनों से मुलाकात की और भरोसा दिलाया कि पूरी सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि फास्ट ट्रेक कोर्ट में सुनवाई कराते हुए अंकिता के हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पौड़ी जनपद अंतर्गत श्रीनगर के डोभ श्रीकोट गांव पहुँचे और अंकिता के परिजनों से भेंट कर उन्हें ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए हमारी सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
मामले की जांच को डीआईजी पी.रेणुका देवी के नेतृत्व में एक एसआईटी टीम गठित की गई है जिसने अपनी जांच प्रारंभ कर दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस हत्याकांड के तीनों आरोपितों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और जांच में जिन भी लोगों की भूमिका संदेह के दायरे में है उन पर भी कानून सम्मत कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता की धनराशि भी प्रदान की। इस दौरान कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, जिलाधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, एसएसपी यशवंत सिंह चौहान, एसडीएम आकाश जोशी आदि भी उपस्थित रहे।

सेवा, समर्पण और सुशासन की नीति से प्रगति के पथ पर बढ़ रहा है अपना उत्तराखंड

धामी राज में तेजी से उत्तराखंड विकास के पथ पर अग्रसर है। मुख्यमंत्री धामी की कार्यशैली का ही कमाल है कि महज 6 माह में रानीपोखरी पुल का निर्माण हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को रानीपोखरी, देहरादून में अयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए विकासखण्ड डोईवाला के अन्तर्गत भानियावाला ऋषिकेश मोटर मार्ग के कि०मी०15 में 280 मीटर लंबे रानीपोखरी सेतु एवं विधानसभा विकासनगर के अन्तर्गत लम्बरपुर लांघा मोटर मार्ग के कि0मी0 2 में शीतला नदी के उपर 180 मीटर लंबे सेतु के निर्माण कार्य का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने पुल का निरीक्षण भी किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा केन्द्रीय सड़क अवसंरचना निधि (₹ 1618.55 लाख ) के अन्तर्गत जनपद देहरादून के विकासखण्ड डोईवाला के अन्तर्गत भानियावाला ऋषिकेश मोटर मार्ग के कि०मी०15 में 280 मीटर स्पान के पी०एस०सी० गर्डर रानीपोखरी सेतु का निर्माण कार्य व राज्य योजना (₹342.56 लाख ) के अंतर्गत उक्त सेतु हेतु पहुंच मार्ग के निर्माण कार्य का लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क निधि के अंतर्गत ₹1318.63 लाख की लागत से विधानसभा विकासनगर के में लम्बरपुर लांघा मोटर मार्ग के कि0मी0 2 में शीतला नदी के उपर 180 मीटर स्पान के आर.सी.सी बॉक्स, कलवर्ट के निर्माण कार्य का भी लोकार्पण किया। इस अवसर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डोईवाला विधानसभा के अंतर्गत सनगांव पुल से कंडोली खर्क मोटर मार्ग के निर्माण कार्य, लच्छीवाला रेंज कार्यालय से दुधली (वन विभाग मार्ग) की मरम्मत के कार्य किए जाने, श्री कालू सिद्ध मंदिर से धन्याड़ी तक वन विभाग मोटर मार्ग का निर्मााण कार्य, हर्रावाला में राजकीय कन्या हाईस्कूल के लिये तीन कक्ष व शौचालय निर्माण कार्य किए जाने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पुल के उद्घाटन पर क्षेत्र वासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राजधानी एवं ऋषिकेश के साथ ही गढ़वाल को जोड़ने वाला यह पुल अत्यधिक महत्वपूर्ण है, इसके पुनर्निर्माण से क्षेत्रीय जनता के साथ ही उत्तराखंड आने वाले सैलानियों को भी सुगमता होगी। उन्होंने लम्बरपुर लांघा मोटर मार्ग एवं रानीपोखिर में बने दोनों पुलों के निर्माण में शामिल रहे लोक निर्माण के सभी अधिकारियों, केंद्रीय एजेंसियों और हमारे मेहनतकश कामगारों का आभार व्यक्त किया, उन्होंने कहा उत्तराखंड में कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना हमारी प्राथमिकता है और हम निरंतर इस दिशा में आगे बढ़ रहे है, हमारी सरकार सड़कें के विकास हेतु प्रतिबद्ध है, आज प्रदेश में जिस स्तर पर सड़को का निर्माण कार्य किया जा रहा है वह अभूतपूर्व है। हमने चार धाम सड़क परियोजना की ही तरह मानसखंड कॉरिडोर को भी राज्य का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट तय कर इस पर कार्य करना शुरू कर दिया है, हम प्रदेश में केवल नए मार्गों का निर्माण ही नहीं कर रहे बल्कि इन पर आवाजाही को सुरक्षित करने का भी कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा हमारी सरकार जिस भी कार्य का शिलान्यास करती है उसका लोकार्पण भी करेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में हमारे सीमांत इलाकों तक सड़कों का नेटवर्क बन रहा है, चार धाम हेतु बनी ऑल वेदर रोड से अब यात्रा सुगम सुरक्षित हो गई है, वही पहाड़ों में रेल पहुंचाने का सपना भी अब पूरा होता दिखाई दे रहा है, उन्होंने कहा ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन का कार्य तेज गति के साथ आगे बढ़ रहा है। दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके पूरा होने पर यह दूरी मात्र दो घंटे की हो जाएगी, उसके बाद और अधिक संख्या में तीर्थयात्री, पर्यटन उत्तराखंड राज्य में आएंगे, हम जनसेवा को ध्येय मान कर कार्य कर रहे हैं और हमारा लक्ष्य उत्तराखंड का सर्वांगीण विकास है।
मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री की अपेक्षा के अनुरुप हम वर्ष 2025 तक उत्तराखण्ड को प्रत्येक क्षेत्र में आदर्श राज्य बनाने के लिए निरंतर प्रयत्नशील हैं और हम जन-जन की आशा को सफलता में परिवर्तित करेंगे। उन्होंने कहा हमने यह सभी विभागों एवं अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि कोई भी कार्य योजना को तय समय में पूरी गुणवत्ता के साथ किया जाए ताकि समय एवं संसाधनों की बचत हो सके। इस दौरान सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक, कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद्र अग्रवाल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, विधायक बृजभूषण गैरोला आदि उपस्थित रहे।

नाबालिक छात्राओं को पुलिस ने दिल्ली से किया सकुशल बरामद

28 सितंबर को वादी के द्वारा कोतवाली ऋषिकेश में लिखित तहरीर के माध्यम से सूचना दी गई कि उनकी दो नाबालिक पुत्रियां उम्र क्रमशः 17 वर्ष एवं 15 वर्ष दिनांक 27 सितंबर की रात लगभग 10.30 बजे से घर से गायब हैं, अभी तक घर नहीं आई है। लिखित तहरीर के आधार पर कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना प्रारंभ की गई। पुलिस अधीक्षक ग्रामीण एवं क्षेत्राधिकारी ऋषिकेश के निकट पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली के द्वारा स्वयं नेतृत्व करते हुए गुमशुदा दोनों नाबालिग बहनों की तलाश हेतु दो टीमें गठित की गई।
एक टीम के द्वारा गुमशुदा नाबालिगों के घर से आने जाने वाले रास्तों पर दुकानों एवं प्रतिष्ठानों के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को चेक करते हुए, परिजनों एवं आसपास के लोगों से पूछताछ कर मुखबिर तंत्र के माध्यम से तलाश शुरू की गई।
दूसरी टीम के द्वारा गुमशुदा नाबालिगों की तलाश हेतु ऋषिकेश-हरिद्वार-देहरादून के बस अड्डा एवं रेलवे स्टेशनों तथा अन्य संभावित स्थानों पर पर सर्च अभियान चलाया गया। गठित टीमों के द्वारा किए गए कार्यों से महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त आपसी सामंजस्य स्थापित कर ज्ञात हुआ कि उपरोक्त गुमशुदा दोनों नाबालिग बहने सोशल मीडिया के माध्यम से फरीदाबाद हरियाणा निवासी दो लड़कों के संपर्क में आई जिनके द्वारा दोनों बहनों को अच्छी सैलरी वाली जॉब लगाने का प्रलोभन दिया गया। जिसके पश्चात दोनों नाबालिग बहने अपने परिजनों को बिना बताए अपने घर से 27 सितंबर की रात्रि बस के माध्यम से हरिद्वार होते हुए दिल्ली पहुंच गई।
दोनों नाबालिग बहनों के दिल्ली में होने की जानकारी प्राप्त होने पर दोनों गठित टीमों के द्वारा संयुक्त रूप से तत्काल दिल्ली रवाना होकर 29 सितंबर को मात्र 24 घंटे के अंदर कश्मीरी गेट दिल्ली के पास से सकुशल बरामद किया गया। दोनों फरार व्यक्तियों के संबंध में अन्य जानकारियां प्राप्त कर उनकी तलाश जारी है। अभियोग उपरोक्त से संबंधित अग्रिम आवश्यक कार्यवाही जारी है।
पुलिस टीम में उप निरीक्षक चिंतामणि मैठाणी चौकी प्रभारी आईडीपीएल, कांस्टेबल सचिन सैनी, कांस्टेबल युवराज सिंह, कांस्टेबल दुष्यंत, कांस्टेबल रोमिल, कांस्टेबल नवनीत नेगी, एसओजी देहात, कांस्टेबल मनोज, एसओजी देहात शामिल रहे।

2 अक्टूबर को देहरादून से रामपुर तिराहा पहुंचेगा ‘प्रवासी-निवासी मार्च‘

प्रवासी उत्तराखंडियों को एकजुट-एकमुट करने की कवायद नये सिरे से हो रही है। हस्तक्षेप संगठन ने यह पहल की है। संगठन दो अक्टूबर को देहरादून से रामपुर तिराहा तक साइकिल मार्च का आयोजन कर रहा है। इसकी शुरुआत 29 सितम्बर से हो रही है। इस मार्च में 20 शहरों के प्रवासी उत्तराखंडी साइकिलिस्ट भाग लेंगे। संगठन के अध्यक्ष केशर सिंह बिष्ट ने बताया कि इस रैली का मुख्य उद्देश्य प्रवासी लोगों को एकजुट करना है ताकि पहाड़ के संवेदनशील मुद्दों पर लोग मुखर हो सकें।
हस्तक्षेप संगठन के तहत आयोजित इस साइकिल रैली को प्रवासी निवासी मार्च का नाम दिया गया है। संगठन के अध्यक्ष केशर सिंह बिष्ट ने बताया कि इस मार्च का उद्देश्य उत्तराखंड के संवेदनशील मुद्दों पर ’प्रवासियों’ की संवेदनशीलता को मुखर करना है साथ ही अपनी मूल भूमि से अलग-थलग पड़े ’प्रवासियों’ को ’निवासी मुद्दों’ पर एकजुट करना व राज्य की मूल धारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में यह एक नई पहल है। इसके माध्यम से प्रवासियों व निवासियों’ को एकजुट कर उनके बीच आपसी संवाद को सशक्त करना है।
साइकिल मार्च में देश भर से विभिन्न प्रवासी लोगों का 20 से भी अधिक कारों का काफिला रहेगा। साथ ही एक मेडिकल वैन भी मौजूद रहेगी। मार्च के दौरान उत्तराखंड आंदोलन के गीतों से गुंजायमान ट्रक व उसमें सवार ’मार्च’ के अन्य सहयोगी और सांस्कृतिक दल भी रहेगा। काफिले में शामिल लोगों के लिए ’पहाड़ी भोज’ का वाहन भी साथ चलेगा।

देश के दूसरे सीडीएस का भी उत्तराखंड से है नाता

केंद्र सरकार सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान (रिटायर्ड) को इंडियन डिफेंस फोर्सेज का अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नियुक्त किया है। यह उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है कि देश का दूसरा सीडीएस भी उत्तराखंड से ही नाता रखता है। मालूम हो कि देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत भी पौड़ी जिले के ही रहने वाले थे।
पिछले साल हेलिकॉप्टर हादसे में उनका निधन हो गया था, जिसके बाद से करीब 10 महीने तक सीडीएस पद पर किसी की नियुक्ति नहीं की गई थी। अगले सीडीएस पद पर लेफ्टिनेंट जनरल चौहान के नाम की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह उत्तराखंडवासियों के लिए बहुत ही गर्व की बात है। ले.ज. चौहान मूलतः रामपुर ग्राम सभा ग्वाणा गांव, खिर्सु ब्लॉक, पौड़ी के रहने वाले हैं।
आशा जताई कि ले.ज. चौहान के नेतृत्व में भारतीय सेना हमेशा की तरह राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करेगी। ले.ज. चौहान उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के पौड़ी जिले में राजपूत परिवार से ताल्लुख रखते हैं। पूर्व प्रधानपति अरिवंद रावत का कहना है कि चौहान की तैनाती से पूरे खिर्सु ब्लाक में खुशी की लहर है। देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी से पास-आउट होने के बाद ले.ज. चौहान को भारतीय सेना की गोरखा राइफल्स में 1981 में कमीशन प्राप्त हुआ था।
सीडीएस जैसे अहम पद पर नियुक्ति से पहले ले.ज. चौहान ने कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में आतंक विरोधी अभियानों का खासा अनुभव है। ले. जनरल चौहान की संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत अंगोला में भी तैनाती हो चुकी है। 40 साल की सेना में सेवा के बाद ले. जनरल चौहान पिछले साल 31 मई को सेवानिवृत हुए थे।

गांव के लोगों ने जतायी खुशी
लेफ्टिनेंट जनरल(रिटायर्ड) अनिल चौहान के देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बनने पर उनके मूल गाँव खिर्सू ब्लॉक के रामपुर ग्राम सभा के गवाणा गांव में खुशी की लहर है। ग्राम वासियों का कहना है कि यह पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। ग्राम प्रधान ज्योति देवी का कहना है कि अनिल चौहान जी के सीडीएस बनने की खबर उन्हें देर शाम 8 बजे के करीब पता चली।
उन्होंने कहा कि इससे ग्राम सभा का नाम तो रोशन हुआ ही है साथ ही पूरे प्रदेश का नाम भी रोशन हुआ है। गांव के पूर्व प्रधान अनूप, वार्ड सदस्य सुमन देवी ने कहा कि पौड़ी जिले से देश को लगातार दो सीडीएस मिल चके हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का सेना के रूप में विशेष पहचान रही है।
जिसका परिणाम है कि देश दुनिया मे उत्तराखंड का नाम गूंज रहा है। गांव के ही दर्शन सिंह, मीना देवी का कहना है कि इससे खिर्सू का देश दुनिया के नक्शे में अलग स्थान बना है। देवलगढ़ राजराजेश्वरी मंदिर के मुख्य पुजारी केपी उनियाल व भाजपा के जिला अध्यक्ष सम्पत सिंह रावत व जिला मंत्री जितेंद्र रावत ने भी भी हर्ष जताते हुए इसे पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात कही है।

पौड़ी जिले के रहने वाले थे देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत
देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल के पौड़ी जिले के रहने वाले थे। उनका पैतृक गांव विरमोली दवारीखाल ब्लॉक में स्थित है। पिछले साल 08 दिसंबर को तमिलनाडू में जनरल रावत उनकी पत्नी सहित 13 लोगों की चॉपर क्रैश में मृत्यु हो गई थी। खराब मौसम को सेना ने हेलीकॉप्टर हादसे की वजह बताई थी। सीडीएस बनने के बाद जनरल रावत अपने पैतृक गांव कई बार आ चुके थे। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने उत्तराखंड में ही बसने की इच्छा जताई थी।

उत्तराखंड में प्रति एक हजार बालकों पर 984 बालिकाओं का अनुपात

उत्तराखंड में बाल लिंगानुपात में व्यापक सुधार हुआ है, साथ ही राज्य में संस्थागत प्रसव का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत इसे राज्य सरकार की बड़ी उपलब्धि बताते हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में राज्य सरकार विभिन्न पहलुओं पर काम कर रही है। केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ प्रदेश के आम लोंगो को मिल रहा है। उनका कहना है कि लिंगानुपात के आंकड़ों में सुधार के लिये स्वास्थ्य विभाग ने लाभार्थियों को विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ पहुंचाया साथ ही गर्भ में भू्रण के लिंग परीक्षण पर सख्ताई से रोक लगाई। वर्तमान में सूबे में 90 फीसदी संस्थागत प्रसव किये जा रहे हैं, जिनको शतप्रतिशत करने का प्रयास किया जा रहा है।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि पांचवें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2020-21 की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में बाल लिंगानुपात में बेहत्तर सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य में 0-05 आयु वर्ग तक के बच्चों का लिंगानुपात 984 दर्ज किया गया है जोकि विगत वर्षों के मुकाबले बढ़ा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में प्रति 1000 बालकों पर 984 बालिकाएं जन्म ले रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के पांच जनपदों अल्मोड़ा, चमोली, नैनीताल, पौड़ी व ऊधमसिंह नगर में बालकों की तुलना में अधिक बालिकाओं का जन्म हुआ है। जिसमें जनपद अल्मोड़ा में 1000 बालकों के मुकाबले 1444 बालिकाओं ने जन्म लिया, ऐसे ही चमोली में 1026, नैनीताल में 1136, पौड़ी में 1065 व उधमसिंह नगर में 1022 बालिकाएं पैदा हुई।
वहीं बागेश्वर में 1000 बालकों के जन्म के सापेक्ष 940, चंपावत में 926, देहरादून में 823, हरिद्वार में 985, पिथौरागढ़ में 911, रुद्रप्रयाग में 958, टिहरी में 866 व उत्तरकाशी में 869 बालिकाओं ने जन्म लिया, जो कि राष्ट्रीय औसत 929 के मुकाबले कहीं अधिक है। विभागीय मंत्री ने बताया कि राज्य में बाल लिंगानुपात को लगातार बेहत्तर किया जा रहा है, जिसके लिये स्वास्थ्य विभाग द्वारा जनजागरुकता अभियान, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान व अलग-अलग मौकों पर अभिभावकों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अलावा विभाग द्वारा भ्रुण जांच व पीसीपीएनडीटी अधिनियम की जानकारी देते हुये ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण समिति स्तर पर जनजागरूकता अभियान संचालित किये जा रहे हैं। रावत ने बताया कि राज्य में संस्थागत प्रसव को लेकर भी गर्भवती महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है। वर्तमान में सूबे में लगभग 90 फीसदी प्रसव विभिन्न चिकित्सा ईकाईयों में हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में शतप्रतिशत संस्थागत प्रसव का लक्ष्य रखा गया है इसके लिये विभागीय अधिकारियों को जरूरी दिशा निर्देश दे दिये गये हैं।