राष्ट्रपति ने किया 2001.94 करोड़ रूपये की 9 विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु का पहली बार उत्तराखण्ड आगमन पर मुख्यमंत्री आवास में नागरिक अभिनन्दन किया गया। मुख्यमंत्री आवास में आयोजित गरिमापूर्ण कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने 2001.94 करोड़ रूपये की 9 विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। राष्ट्रपति ने 528.35 करोड़ रूपये की 3 योजनाओं का लोकार्पण और 1473.59 करोड़ की 6 योजनाओं का शिलान्यास किया। इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.), मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति द्वारा लोकार्पित की गयी योजनाओं में 330.64 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान (मेडिकल कॉलेज) अल्मोड़ा, पिटकुल द्वारा हरिद्वार जनपद के पदार्था में 84 करोड़ रूपये की लागत से 132 के.वी. के आधुनिक तकनीक के बिजली घर एवं इससे संबंधित लाइन का निर्माण, जिला रूद्रप्रयाग में 113.71 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित 4.5 मेगावाट की कालीगंगा-द्वितीय लघु जल विद्युत परियोजना शामिल हैं।
राष्ट्रपति द्वारा जिन योजनाओं का शिलान्यास किया गया उनमें 306 करोड़ रूपये की लागत से चीला पॉवर हाऊस 144 मेगावाट की योजना का रेनोवेशन कार्य, देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत 204.46 करोड़ की लागत से इंटीग्रेटेड ऑफिस कॉम्पलेक्स ग्रीन बिल्डिंग का निमार्ण, 131 करोड़ रूपये की लागत से हरिद्वार के मंगलोर में 220 के.वी. सबस्टेशन, 750 करोड़ रूपये की लागत से देहरादून के मुख्य मार्गों की ओवर हेड एचटी एवं एलटी विद्युत लाइनों को भूमिगत किये जाने का कार्य, 32.93 करोड़ रूपये की लागत से राजकीय पॉलिटेक्निक नरेन्द्र नगर में दूसरे चरण का निर्माण कार्य और चंपावत के टनकपुर में 49.20 करोड़ रूपये की लागत से आधुनिक अन्तर्राज्यीय बस टर्मिनल का शिलान्यास शामिल है।
इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में राष्ट्रपति उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित हुई। राष्ट्रपति के समक्ष प्रदेश की लोक संस्कृति का लोक कलाकारों द्वारा प्रदर्शन किया गया।
राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने कहा कि देव-भूमि, तपोभूमि और वीर-भूमि उत्तराखंड में आना, मैं अपना सौभाग्य मानती हूं। हिमालय को महाकवि कालिदास ने ‘देवात्मा’ कहा है। राष्ट्रपति के रूप में, हिमालय के आंगन, उत्तराखंड में, आप सब के अतिथि-सत्कार का उपहार प्राप्त करके, मैं स्वयं को कृतार्थ मानती हूं। राष्ट्रपति ने अभिनंदन-समारोह के उत्साह-पूर्ण आयोजन के लिए राज्यपाल, मुख्यमंत्री और उत्तराखंडवासियों को धन्यवाद दिया।
राष्ट्रपति ने विभिन्न विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से लोगों के लिए जन-सुविधाएं बढ़ेंगी। उन्होंने इन परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के सुव्यवस्थित मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के ऊर्जावान नेतृत्व में, उत्तराखण्ड समग्र विकास के पथ पर अग्रसर है। राज्य के विकास की इस यात्रा में उत्तराखंड के परिश्रमी और प्रतिभाशाली निवासियों का महत्वपूर्ण योगदान है।
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी परंपरा में नगाधिराज हिमालय के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को देवताओं का वंशज माना गया है। इस प्रकार उत्तराखंड के भाई-बहन एक दिव्य परंपरा के वाहक हैं। आप सबके बीच आकर मैं विशेष प्रसन्नता का अनुभव कर रही हूं। उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता और यहां के लोगों के प्रेमपूर्ण व्यवहार ने स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी से लेकर प्रकृति के सुकुमार कवि, सुमित्रानंदन पंत को मंत्रमुग्ध किया था। इस प्राकृतिक सुंदरता को बचाते हुए ही विकास के मार्ग पर हमें आगे बढ़ना है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत माता की धरती के बहुत बड़े भाग को निर्मित और सिंचित करने वाली नदी-माताओं के स्रोत उत्तराखंड में हैं। हिमालय और उत्तराखंड भारत-वासियों की अंतरात्मा में बसे हुए हैं। हमारे ऋषि-मुनि ज्ञान की तलाश में हिमालय की गुफाओं और कंदराओं में आश्रय लेते रहे हैं। यह लोक-मान्यता है कि लक्ष्मण जी के उपचार के लिए इसी क्षेत्र के द्रोण-पर्वत को ‘संजीवनी बूटी’ सहित हनुमान जी ले कर गए थे। इस तरह आध्यात्मिक शांति और शारीरिक उपचार दोनों ही दृष्टियों से उत्तराखंड कल्याण का स्रोत रहा है।
आधुनिक चिकित्सा तथा आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्रों में उत्तराखंड निरंतर अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए नए-नए संस्थान भी स्थापित कर रहा है। उत्तराखंड में नेचुरोपैथी के अनेक प्रसिद्ध केंद्र हैं जहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग आकर स्वास्थ्य-लाभ करते हैं। उत्तराखंड में नेचर टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म के साथ-साथ मेडिकल टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। इससे युवाओं में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वयं पर्वतराज हिमालय और उत्तराखंड के शूरवीर लोग भारत माता के प्रहरी भी रहे हैं। हमारे वर्तमान सीडीएस जनरल अनिल चौहान उत्तराखंड के ही सपूत हैं। भारत के प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत भी इसी धरती की विभूति थे। 1990 के दशक में जनरल बिपिन चंद्र जोशी ने चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के रूप में भारत माता की सेवा की थी। कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देकर देश की रक्षा करने वाले मेजर राजेश सिंह अधिकारी और मेजर विवेक गुप्ता का बलिदान सभी देशवासी हमेशा याद रखेंगे। उन दोनों सूरमाओं को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। 1962 के युद्ध में अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले महावीर चक्र से सम्मानित जसवंत सिंह रावत एक अमर सेनानी के रूप में भारतवासियों को हमेशा याद रहेंगे। स्वाधीनता के तुरंत बाद कश्मीर में घुसपैठियों से लोहा लेते हुए अपने प्राणों का बलिदान करने वाले सैनिक दीवान सिंह को कृतज्ञ राष्ट्र ने महावीर चक्र से सम्मानित किया था। भारत माता के लिए मर-मिटने वाले उन सभी वीरों को मैं सादर नमन करती हूं और ऐसे वीरों की जननी उत्तराखंड की भूमि को शत-शत प्रणाम करती हूं। इस धरती के शूरवीरों को अशोक-चक्र और कीर्ति-चक्र से भी सम्मानित किया गया है। मैं सभी देशवासियों की ओर से उत्तराखंड के वीर सपूतों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती हूं।
राष्ट्रपति ने कहा कि हिमालय की पुत्री अर्थात पर्वत-पुत्री पार्वती हम सभी देशवासियों के लिए नारी-चरित्र की गरिमा और शक्ति का प्रतीक हैं। उत्तराखंड सहित सारी हिमालय-भूमि अनादिकाल से शक्ति की उपासना का केंद्र रही है। उसी गरिमा और शक्ति का अंश रानी कर्णावती जैसी वीरांगना, गौरा देवी जैसी वन-संरक्षक और बछेंद्री पाल जैसी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा लहराने वाली प्रथम महिला की जीवन-गाथाओं में देखने को मिलता है। उत्तराखंड की श्रीमती बसंती बिष्ट ने राज्य की प्रथम महिला ग्राम-प्रधान के रूप में जन-सेवा कर के तथा प्रौढ़-शिक्षा से लेकर स्वच्छता तक अनेक जन-कल्याण के कार्यों में योगदान दे कर देश की सभी बहनों-बेटियों के लिए आदर्श स्थापित किया है। उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उत्तराखंड की एक और बहन बसंती देवी ने घरेलू हिंसा और उत्पीड़न का सामना करने वाली महिलाओं की मुक्ति के लिए अभियान चलाया, अनेक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में सहायता की, महिला समूहों के माध्यम से नदी और जंगल के संरक्षण का कार्य किया और बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता का प्रसार किया। उन्हें भी पद्मश्री से अलंकृत किया गया। उत्तराखंड की बेटी वंदना कटारिया ने भारत की राष्ट्रीय महिला हॉकी टीम की श्रेष्ठ खिलाड़ियों में अपना स्थान बनाया है। उत्तराखंड की इस विलक्षण प्रतिभा-संपन्न बेटी को 30 वर्ष से कम की आयु में ही पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तराखंड में बेटियों की युवा पीढ़ी भी प्रगति के पथ पर अग्रसर है। यह सामाजिक परिवर्तन एक विकसित उत्तराखण्ड और विकसित भारत की दिशा में बढ़ता हुआ कदम है। आज से पांच दिन पहले ही दिव्यांग-जनों के सशक्तीकरण के विकास में संलग्न सर्वश्रेष्ठ संगठन का राष्ट्रीय पुरस्कार उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी को दिया गया। यह उपलब्धि एक संवेदनशील समाज का परिचय देती है। इस संवेदनशीलता को सभी देशवासी और अधिक व्यापकता तथा दृढ़ता प्रदान करें।
राष्ट्रपति ने कहा कि सभी देशवासी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। ज्ञात-अज्ञात स्वाधीनता सेनानियों का स्मरण करना हम सभी का कर्तव्य है। बागेश्वर में जन्मीं बिशनी देवी शाह ने स्वाधीनता संग्राम के दौरान अल्मोड़ा नगर-पालिका-भवन पर तिरंगा लहराया और गिरफ्तार की गईं। वे साधारण परिवार की अल्प-शिक्षित महिला थीं। लेकिन भारत के स्वाधीनता संग्राम को उनके द्वारा दिया गया योगदान असाधारण है। पेशावर कांड के ऐतिहासिक नायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की शौर्य-गाथा हमारे स्वाधीनता संग्राम के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। इसी तरह श्रीदेव सुमन, केसरी चंद और इन्द्रमणि बडोनी जैसे अनेक स्वाधीनता सेनानियों ने स्वतन्त्रता संग्राम की गौरव गाथाएं लिखी हैं। उत्तराखंड के सपूत गोविंद वल्लभ पंत ने स्वाधीनता संग्राम, संविधान सभा के विचार-विमर्श तथा राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान द्वारा इस क्षेत्र का और भारत का गौरव बढ़ाया है। उत्तराखंड की इन विभूतियों के योगदान से पूरे देश की युवा पीढ़ी को परिचित कराने के प्रयास होने चाहिए।
राष्ट्रपति ने युवा पीढ़ी के संदर्भ में विश्व के सबसे अच्छे बैडमिंटन खिलाड़ियों में अपना स्थान बनाने वाले लक्ष्य सेन का भी उल्लेख किया। आज से कुछ दिनों पहले ही राष्ट्रपति भवन में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि युवा पीढ़ी के उत्साह और योगदान के बल पर वर्ष 2047 में यानि आज़ादी के शताब्दी वर्ष में हमारा देश विश्व-समुदाय में अपनी क्षमता के अनुरूप श्रेष्ठता प्राप्त कर चुका होगा। तब तक उत्तराखंड के सभी निवासियों का जीवन-स्तर भी कहीं अधिक बेहतर हो चुका होगा। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर प्रस्तुत किये सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत के सभी राज्यों की संस्कृति का संरक्षण और विकास किया जाना चाहिए। पहाडों में रहने वाले निवासी अपनी संस्कृति से वन के फूल जैसे आनंदित करते हैं, उन्हें संरक्षित करना आवश्यक है।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने राष्ट्रपति का देवभूमि उत्तराखण्ड की जनता की ओर से स्वागत और अभिनंदन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के उत्तराखण्ड आगमन से यहां का कण-कण स्वयं को ऊर्जावान और गौरवशाली महसूस कर रहा है। राष्ट्रपति पूरे देश की बेटियों, बहनों और माताओं के लिए प्रेरणा का सर्वाेच्च स्रोत हैं। देवभूमि उत्तराखण्ड की यह भूमि गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियों का उद्गम है। यहाँ श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ के पावन धाम हैं। गुरु गोबिन्द सिंह की तपस्थली हेमकुंड साहिब और जागेश्वर धाम हैं। दो-दो अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं से घिरा यह प्रदेश देवभूमि है, वीरभूमि है, सैन्य भूमि है। यहाँ अधिकांश परिवारों का कोई न कोई सदस्य सेनाओं में या किसी पैरामिलिट्री फोर्स में शामिल हो कर, देश की रक्षा में लगा हुआ है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड के निवासियों का जीवन और संस्कृति यहाँ के वातावरण की तरह पवित्र है। हमारे प्रदेश का 70 प्रतिशत से अधिक भाग वन क्षेत्र है। अपने वनों के माध्यम से यह प्रदेश, देश को प्राण-वायु प्रदान करता है। उत्तराखण्ड के पर्यटक स्थल देश-विदेश में विख्यात हैं। उत्तराखण्ड राज्य विकास के कई पैमानों पर आज तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत यहाँ की महिलाए हैं। वर्षों-वर्षों से उत्तराखण्ड की महिलाओं ने न सिर्फ यहाँ के समाज को रास्ता दिखाया है बल्कि देश के लिए भी उदाहरण प्रस्तुत किया है। चिपको आंदोलन की गौरा देवी ने पूरे विश्व को पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाया है। महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएँ न सिर्फ उत्तराखण्ड के ग्रामीण उत्पादों को आगे ला रही हैं बल्कि अपनी आर्थिक समृद्धि की कहानी भी स्वयं लिख रही हैं। अभी हाल ही में प्रधानमंत्री जी ने अपने बद्रीनाथ भ्रमण के दौरान यहाँ की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रशंसा की थी।
राज्यपाल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखण्ड ने चहुँमुखी विकास की यात्रा तय की है। कभी पहाड़ में रेल का सपना देखा जाता था आज ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर तेजी से काम चल रहा है। चारधाम सड़क योजना ने पहाड़ों में सड़क नेटवर्क को मजबूत किया है। अब उड़ान योजना के अन्तर्गत पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी जैसे सीमांत जनपद हवाई कनेक्टिविटी से जुड़ रहे हैं। अच्छी कनेक्टिविटी उत्तराखण्ड को पर्यटन और बिजनेस इन्वेस्टमेंट के लिए भी अच्छा डेस्टीनेशन बनाती है। यहाँ आर्गेनिक खेती, जड़ी-बूटी, योग-आयुर्वेद को बढ़ावा देकर इन्हें रोजगार के साधनों से जोड़ा जा रहा है। उत्तराखण्ड कई दशकों से अपनी स्कूली शिक्षा के लिए जाना जाता रहा है लेकिन अब हम इसे उच्च शिक्षा के लिए भी एक आदर्श राज्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का देवभूमि आगमन पर स्वागत और अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सैनिक परिवार में जन्मे बेटे के घर तीनों सेनाओं की प्रमुख, देश की राष्ट्रपति महोदया कभी आएंगी, ऐसा मैंने कभी सोचा भी नहीं था भले ही यह मेरा सरकारी आवास हो, परंतु आपका यहां स्वयं आना मेरे और उत्तराखंड के सवा करोड़ नागरिकों के लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में उत्तराखंड आने पर उन्होंने अनुरोध किया था कि राष्ट्रपति बनने के पश्चात आप पुनः देवभूमि अवश्य पधारें। यह अनुरोध स्वीकार करने के लिये उन्होंने राष्ट्रपति का धन्यवाद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति का अत्यंत कठिन जीवन संघर्ष, अदम्य साहस और प्रेरणास्पद राजनीतिक यात्रा प्रत्येक भारतीय को प्रेरित करती है। उनकी जीवन यात्रा हम सबके लिए इसलिए भी प्रेरणादायी है क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में आई समस्त कठिनाइयों को ही अपनी शक्ति बनाकर जीवन सफर में विजय प्राप्त की। वे भारतवर्ष के समस्त नागरिकों विशेष रूप से गरीबों, शोषितों और वंचितों के लिए आशा की किरण हैं। हर संकट का सामना आपने पूरी दृढ़ता से किया। राष्ट्रपति जी सच्चे अर्थों में महिला सशक्तिकरण का जीता जागता प्रतीक हैं। अपने जीवन में सदा ‘कर्म प्रधान विश्व करी राखा‘ के सिद्धांत को सर्वाेपरि माना और विकट परिस्थितियों में भी अपने विनम्रतापूर्ण आचरण को बनाए रखा।
राष्ट्रपति सदैव ’’सादा जीवन-उच्च विचार’’ के मूल मंत्र पर चलती रहीं और यही कारण है कि आज जन-जन के भीतर यही भाव है कि उनके बीच से निकली एक आम महिला देश कि प्रथम नागरिक है। अपने हर दायित्व को आपने पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से निभाया। सदैव समाज कल्याण को वरीयता दी और समाज में पिछड़ों व वंचितों के सशक्तिकरण पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे लिए प्रेरणा का विषय है कि जीवन में इतने महत्वपूर्ण दायित्वों पर रहने के बावजूद, आज भी राष्ट्रपति साधारण जीवन ही व्यतीत करती हैं। आपके मार्गदर्शन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशन में हमारा राष्ट्र पुनः विश्व गुरु बनने की अपनी यात्रा में इसी प्रकार गतिमान रहेगा और अपने गंतव्य तक शीघ्र पहुंच सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज राष्ट्रपति द्वारा जो लगभग 2002 करोड़ रुपयों की योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हो रहा है, वो इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हम राष्ट्रपति के मार्गदर्शन व प्रधानमंत्री के निर्देशन में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं। देश के प्रथम नागरिक के रूप में राष्ट्रपति भारत ही नहीं वरन समस्त विश्व के लिए ’’सशक्त स्त्री-नव दृष्टि’’ विचार का प्रत्यक्ष उदाहरण बनेंगी।

मंत्री ने किया सैन्य धाम के निर्माण कार्यों को लेकर स्थलीय निरीक्षण

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने सोमवार को देहरादून के गुनियाल गांव पहुंचकर सैन्य धाम के निर्माण कार्यों को लेकर स्थलीय निरीक्षण किया। मौके पर पहुंचे मंत्री गणेश जोशी ने निर्माण कार्यों का मौका मुआयना कर सैन्य धाम के निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सम्बंधित कार्यदायी संस्था को निर्माण कार्य को तय समय सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने के भी निर्देश दिए। सैनिक कल्याण मंत्री जोशी ने कहा निर्माण कार्यों में इस्तामेल हो रही सामग्री में गुणवत्तता का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के स्वरूप उत्तराखण्ड में सैन्य धाम निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा यह मेरा भी ड्रीम प्रोजेक्ट है, प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार सैन्य धाम की मॉनिटरिंग करते रहते है।
मंत्री जोशी ने कहा सैन्य धाम का निर्माण कार्य तेजी के साथ चल रहा है ओर जिस प्रकार निर्माण कार्य की रफ्तार है,निश्चित ही हम तय समय सीमा से पूर्व की सैन्य धाम का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। मंत्री जोशी ने कहा कि उत्तराखण्ड का सैन्य धाम यहां के चार धामों की तरह ही विकसित हो। इसके लिए सैन्य धाम को भव्य रूप दिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प है कि 2023 के अंत से पहले ही हम सैन्य धाम का निर्माण पूर्ण कर लेंगे।

एक हजार गांवों में सोलर ऊर्जा से होगी विद्युत सप्लाई

उत्तराखंड के एक हजार गांवों को सोलर ऊर्जा से रोशन किए जाने के लक्ष्य पर काम शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बारे में प्रस्ताव कैबिनेट में पास कराने के लिए विभाग को तुरंत ड्राफ्ट बना कर देने को कहा है।
उत्तराखंड में सौर ऊर्जा उत्पादन की असीम संभावनाएं हैं। सरकार ने एक हजार गांवों में बंजर पड़ी पूरब मुखी जमीनों को चिन्हित भी कर लिया है। सरकार चाहती है कि इन गांवों में सौर ऊर्जा से ही विद्युत सप्लाई की जाए। धामी सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय रोजगार के साथ-साथ सस्ती बिजली भी लोगों को मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने ऊर्चा सचिव को ये निर्देशित किया है कि एक हजार गांवों में सोलर ऊर्जा के प्रोजेक्ट को कैबिनेट में लाने के लिए उसका फाइनल ड्रॉफ्ट तैयार करे, ताकि इस पर सरकार इसे पास करके योजना को निर्धारित समय के साथ पूरा कराया जा सके। सौर ऊर्जा पॉलिसी को ड्राफ्ट करने का काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट उन स्थानीय लोगों को निवेश करने का मौका मिलेगा जो गांवों को छोड़कर अन्य स्थानों पर रह रहे हैं उनकी बंजर भूमि से आय भी होगी।

664 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को जल्द मिलेंगे नियुक्ति पत्र

आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के अंतर्गत 664 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सी.एच.ओ.), की नियुक्ति को लेकर रिजल्ट जारी किया जा चुका है व काउंसलिंग प्रक्रिया शीघ्र ही आरंभ होगी, जिसके बाद चयनित सी.एच.ओ. को मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री द्वारा नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे यह बात प्रभारी सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा व एन.एच.एम. मिशन निदेशक डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा बतायी गई।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में सी.एच.ओ. के पदों हेतु एच.एन.बी. मेडिकल यूनिवर्सिटी के माध्यम से रिजल्ट जारी किया जा चुका है व काउंसीलिंग प्रक्रिया भी शीघ्र ही आरंभ होगी। नवनियुक्त सी.एच.ओ. को नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री पुष्कर धामी व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत द्वारा दिए जाएंगे।
डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा बताया गया कि सी.एच.ओ. की नियुक्ति के बाद सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में गैर-संचारी रोग जैसे टी.बी., तंबाकू निषेध, मेंटल हेल्थ, डायबिटीज, कैंसर, बल्ड प्रेशर (हाइपरटेंशन), आंखों की कमजोरी, नाक, गले आदि से जुड़ी बिमारियों की स्क्रीनिंग में तेजी आएगी, जिससे समय पर रोगों का पता लग सकेगा व इलाज संभव होगा। सी.एच.ओ. द्वारा टारगेट पोपुलेशन जो कि मैदानी क्षेत्रों में 5,000 व पहाड़ी क्षेत्रों में 3,000 है में 30 से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग की जाती है।

मुनस्यारी के लिए कई घोषणाएं, सीएम ने कहा-प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है क्षेत्र

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुनस्यारी स्थित जोहार क्लब मैदान में आयोजित मुनस्यारी महोत्सव 2022 का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मुनस्यारी महोत्सव धीरे-धीरे विश्व प्रसिद्ध महोत्सव के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। मुनस्यारी के प्राकृतिक सौंदर्य की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जोहार की पावन भूमि नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण तो है ही इसका इतिहास भी बहुत गौरवशाली रहा है। उन्होंने कहा कि मुनस्यारी के नैसर्गिक सौंदर्य ने उन्हें बचपन से ही आकर्षित किया है। मुनस्यारी जैसा रमणीक स्थल भारत में ही नहीं विश्व में मिलना मुश्किल है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मुनस्यारी महोत्सव के लिये 8 लाख की धनराशि दिये जाने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर मुनस्यारी में एकलव्य विद्यालय खोले जाने, मुनस्यारी को नगर पंचायत बनाये जाने, मुनस्यारी में गौ रक्षा के लिए सहयोग दिए जाने, बकरियों के चुगान की अनुमति दिये जाने एवं बोना गांव में गार्डर पुल बनाए जाने की घोषणा की। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिये इनके अधिकतम उपयोग किये जाने की बात कही।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुनस्यारी क्षेत्र की महान विभूतियों को याद करते हुए कहा कि जोहार की भूमि महान समाज सेवकों, चिंतकों, भू -सर्वेक्षकों एवं पर्वतारोहियों की भूमि है। उन्होंने क्षेत्र की सभी महान विभूतियों का नाम लेते हुए उनके महान कार्यों को याद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार हर क्षेत्र में विकास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश के सीमान्त क्षेत्रों एवं गांवों के विकास के लिए निरन्तर कार्य कर रहे है। उन्होंने देश के सीमान्त गांवों को देश का अंतिम गांव न मानकर देश का पहला गांव माना है। प्रधानमंत्री ने सभी से अपनी यात्रा व्यय की 05 प्रतिशत धनराशि स्थानीय उत्पादों के क्रय पर व्यय करने की बात कही है, इससे हमारे स्थानीय उत्पादों को देश व दुनिया में पहचान मिलेगी तथा हमारे लोग स्थानीय उत्पादों के उत्पादन के प्रति और अधिक ध्यान देने तथा इससे रोजगार, स्वरोजगार के साधन उपलब्ध होने के साथ ही आर्थिकी को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दे रही है। मुनस्यारी क्षेत्र के विकास को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि मुनस्यारी क्षेत्र पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केन्द्र है। इस क्षेत्र का संपूर्ण विकास सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मुनस्यारी क्षेत्र के विकास के लिये 66 घोषणायें की हैं जिनमें से 32 पूर्ण हो चुकी हैं, शेष घोषणाओं को पूर्ण करने के लिये जनपद एवं शासन स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। राज्य के विकास के लिये चिंतन शिविरों के माध्यम से विकास का रोड मैप तैयार किया जा रहा है। सभी के सहयोग एवं विश्वास के साथ 2025 तक उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिये हमारे प्रयास निरंतर जारी हैं।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष पिथौरागढ़ दीपिका बोहरा, विधायक फकीर राम, हरीश धामी, जिलाधिकारी रीना जोशी, पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह आदि उपस्थित रहे।

उत्तराखंड आंदोलन में पत्रकारों की भूमिका और अनुभव को लेकर संगोष्ठी का आयोजन

उत्तराखंड के मीडियाकर्मियों की प्रमुख संस्था नेशनलिस्ट यूनियन आफ जर्नलिस्ट द्वारा यहां आयोजित एक संगोष्ठी में पत्रकारों ने राज्य आंदोलन में मीडिया कवरेज के अनुभव और आंदोलन में उनकी भूमिका पर विचार साझा किये।
’नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट’ (एनयूजे उत्तराखंड) की हरिद्वार जनपद इकाई द्वारा ’राज्य आंदोलन की कहानी, कलमकारों की जुबानी’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अपनी लेखनी से योगदान देने वाले पत्रकार और राज्य आंदोलनकारी एक मंच पर जुटे।
अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवल और उनके पुष्पाभिनन्दन के साथ आरंभ हुए कार्यक्रम में
यूनियन के जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार पाल ने अपनी कार्यकारिणी के साथ अतिथियों का स्वागत करते हुए अतिथियों के सम्मान में स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया।
संगोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए राज्य आंदोलन के दौर में अमर उजाला और हिमालय दर्पण को अपनी सेवाएं दे चुके वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि डोभाल ने नेशनलिस्ट यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स द्वारा मीडिया के माध्यम से आयोजित इस परिचर्चा को एक अच्छी शुरुआत बताते हुए कहा कि उस समय आंदोलन में जो घट रहा था हमने उस सच्चाई को देश दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा हमने कोई अहसान नहीं किया बल्कि जनता तक वास्तविकता पहुंचाने के लिए अपने कर्तव्य का पालन किया। उन्होंने कहा कि आन्दोलन तो उत्तराखंड को विरासत में मिले हैं। इनमें आजादी का आंदोलन हो या राजशाही के विरुद्ध आंदोलन हो या सत्ता के विकेंद्रीकरण के लिए चला राज्य आंदोलन हो। डोभाल ने कहा कि राजधानी के मामले में गैरसैंण हमारे लिए गैर हो गया है क्योंकि छत्तीसगढ़ और झारखंड के मुकाबले 22 साल में सरकार उत्तराखंड को एक स्थाई राजधानी नहीं दे पाई है।
देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी पीटीआई की संवाददाता रही शशि शर्मा ने राज्य आंदोलन के दौर की पत्रकारिता में, समाचार संकलन और प्रेषण में आने वाली कठिनाईयों के साथ मसूरी गोलीकांड और हरिद्वार में चले वृहद आंदोलन का संस्मरण बयां किया। उन्होंने मसूरी में गोली चलने के बाद अपने छायाकार पति बालकृष्ण शर्मा के साथ कर्फ्यू में फंसने और भूखे प्यासे रहकर कवरेज करने का घटनाक्रम सुनाया। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन में मीडिया कवरेज की कठिनाइयां आज भी उनके आंखों के सामने जीवंत होकर तैरती हैं। शर्मा ने कहा कि हरिद्वार जनपद के जिस राज्य आन्दोलन को उन्होंने कवर किया, वह अभूतपूर्व और अविस्मरणीय आंदोलन रहा।
दैनिक जागरण में लंबे समय तक पत्रकारिता करने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण झा ने कहा कि हरिद्वार में मीडिया कवरेज करते हुए एक समय ऐसा भी आया कि उन्हें आंदोलनकारियों के गुस्से और आक्रोश से भी डर लगने लगा था। उन्होंने कहा आंदोलनकारियों का जो जज्बा था उसी जज्बे ने इस राज्य का निर्माण किया है। उन्होंने कहा आंदोलनकारियों ने अपना काम किया और मीडियाकर्मी के रूप में हमने अपना फर्ज निभाया। राज्य बनने के बाद जहां सरकार और शासन तक हमारी पहुंच आसान हुई है वहीं विकास भी हुआ है। उत्तर प्रदेश के समय 3 विधानसभा सीटों वाला हरिद्वार 11 सीटों तक पहुंच गया। उन्होंने कहा जिन लोगों ने राज्य निर्माण के लिए बलिदान दिया उनके सपने जरूर पूरे होने चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन को कवर करने वाले पत्रकारों की भूमिका किसी भी आंदोलनकारी से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि असली क्रांति पैदा करने और उसका विस्तार देने में मीडियाकर्मियों की बहुत बड़ी भूमिका रही है जिसको कभी भुलाया नहीं जा सकता।बताया कि राज्य आंदोलन के दौरान हरिद्वार जनपद में 25 नामजद और 8000 अज्ञात आंदोलनकारियों के खिलाफ 14 मुकदमे दर्ज हुए थे, जिनमें से 9 कोतवाली हरिद्वार, 3 थाना गंगनहर (रूड़की) और एक मंगलौर कोतवाली में दर्ज हुआ था उन्होंने बताया कि जनपद के 11 मुकदमे शासन के आदेश पर वापिस हुए।
इस अवसर नेशनलिस्ट यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स (एनयूजे उत्तराखंड) द्वारा राज्य आंदोलन को कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण झा, रतनमणि डोभाल, शशि शर्मा, विक्रम छाछर, ललितेन्द्र नाथ, श्रीगोपाल नारसन, दीपक नौटियाल, बालकृष्ण शर्मा आदि को राज्य आंदोलन में निष्पक्ष और उत्कृष्ट कवरेज के लिए सम्मानित किया गया। जबकि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष समिति के अध्यक्ष हर्ष प्रकाश काला ने भी राज्य आंदोलनकारियों को उनकी सराहनीय भूमिका के लिए अपने संगठन की ओर से सम्मानित किया।
यूनियन के पूर्व अध्यक्ष विक्रम सिंह सिद्धू ने अगन्तुक अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उनकाआभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन यूनियन के संगठन मंत्री मुकेश कुमार सूर्या ने किया।
इस मौके पर अंतरराष्ट्रीय पक्षी विज्ञानी डा. दिनेश भट्ट, जगत सिंह रावत, जसवंत सिंह बिष्ट एसपी चमोली, ख्यातसिंह रावत, घनश्याम जोशी, विजय जोशी, शांति मनोड़ी, सरिता पुरोहित, डा. शिवा अग्रवाल, सुनील पाल, बालकृष्ण शास्त्री, शैलेन्द्र सिंह, सचिन तिवारी, प्रमोद गिरी, विक्रम सिंह सिद्धू, सुदेश आर्या, नवीन पांडे, विनोद चौहान, सूर्या सिंह राणा, वीरेंद्र चड्ढा, मुकेश कुमार सूर्या, हरिनारायण जोशी, धीरेंद्र सिंह रावत, हिमांशु भट्ट, संजू पुरोहित आदि उपस्थित रहे।

सीएस के निर्देश धरातल पर प्रभावी योजनाओं का दायरा बढ़े

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु की अध्यक्षता में सोमवार को स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स प्रोजेक्ट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट फॉर 2022-23 विभिन्न विभागों के प्रस्तावों को लेकर व्यय वित्त समिति (ईएफसी) की बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान विभिन्न प्रस्तावों को समिति द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को ईएफसी के लिए पूर्ण योजना के साथ प्रस्ताव भेजे जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकतर विभाग मात्र बिल्डिंग स्ट्रक्चर के प्रस्ताव लेकर ईएफसी में प्रस्ताव भेज रहे हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि बिल्डिंग प्लान, प्रोजेक्ट का उद्देश्य, संरचना एवं पदों के सृजन और ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस प्लान के साथ समग्र दृष्टिकोण के साथ प्रस्ताव भेजे जाएं। व्यय वित्त समिति की बैठक में सिंचाई विभाग की लगभग 3565.28 लाख की लागत के भगवानपुर इन्डस्ट्रीयल एरिया में ड्रेनेज मास्टर प्लान और डीपीआर को स्वीकृति प्रदान की गयी।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ड्रेनेज सिस्टम की गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए। इसके लिए पूर्व से ही प्रत्येक पहलू पर विचार कर लिया जाए। उद्यान विभाग की श्रेणी ‘बी‘ के अंतर्गत लगभग 1824.48 लाख की एकीकृत सिंचाई व्यवस्था, औद्यानिक यंत्रीकरण एवं अवस्थापना सुविधाओं के विकास एवं 1120.00 लाख की रामनगर नैनीताल में फूड प्रोसेसिंग यूनिट और कॉलेज अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट को भी स्वीकृति प्रदान की गयी। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में उद्यान में बहुत ही अधिक सम्भावनाएं हैं। फूड प्रोसेसिंग राज्य की आर्थिकी और रोजगार सृजन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बैठक में शहरी विकास के देहरादून तरला नगल में सिटी पार्क के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गयी। मुख्य सचिव ने सिटी पार्क में हरियाली का विशेष ध्यान रखने की बात कही। कंक्रीट के न्यूनतम प्रयोग की बात कहते हुए उन्होंने पाथ-वे को बुजुर्ग लोगों के अनुरूप तैयार करने के निर्देश दिए ताकि उन्हें इसमें चलने में समस्या न हो।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव आनन्द वर्द्धन, सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, बी.वी.आर.सी पुरुषोत्तम, हरि चंद्र सेमवाल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

राजभवन तक अनशनकारियों के पहुंचने पर एसएसपी सख्त, 3 पर कार्रवाई

अनशनकारियों के राजभवन तक पहुंचने के मामले में ऋषिकेश कोतवाल पर गाज गिर गई। उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया है। देहरादून के एसएसपी ने ऋषिकेश के कोतवाल रवि सैनी समेत तीन पुलिस अधिकारियों को लाइन हाजिर किया है। इसमें कैंट थाने के इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह रावत और इसी थाने के सब इंस्पेक्टर जगत सिंह शामिल हैं। उक्त तीनों पर एक ही मामले को लेकर गाज गिरी है। ऋषिकेश के कोतवाल पर धरना स्थल की निगरानी में लापरवाही बतरने पर सख्त एक्शन लिया गया है। जबकि अन्य दो अधिकारियों पर अनशनकारियों के राजभवन की ओर बढ़ने की सूचना के बावजूद सुरक्षा संबंधित कदम न उठाने पर एक्शन हुआ है।

नौसेना का इतिहास शौर्य और पराक्रम भरा रहा है-धामी

नौसेना दिवस के अवसर पर राजपुर रोड स्थित राष्ट्रीय जल सर्वेक्षण कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कार्यक्रम में मौजूद थे। इस अवसर पर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने संयुक्त रूप से “इण्डियन वार्निंग इनफार्मेशन एंड नेविगेशन सर्विस” व “मैरीटाइम इनफार्मेशन चार्ट” का लोकार्पण किया, साथ ही नौसेना की प्रदर्शनी का अवलोकन कर देश की सुरक्षा में नौसेना के योगदान की सराहना की।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह ने नौसेना दिवस की शुभकामनाऐं देते हुए कहा कि भारतीय नौसेना पर हम सब को गर्व है। उन्होंने कहा कि आज के दिन 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना के ’ऑपरेशन ट्राइडेंट’ की उपलब्धियों को भी याद करने का दिन है। राज्यपाल ने कहा कि जिस ट्रांसफॉर्मेशन, डिजिटलीकरण के साथ मैप बनाने का कार्य भी भारतीय नौसेना कर रही है, वह हम सब के लिए गर्व की बात है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी नौसेना दिवस के अवसर पर नौसेना के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि नौसेना का इतिहास शौर्य और पराक्रम का रहा है। राष्ट्रीय जल सर्वेक्षण कार्यालय में जिस प्रकार नौसेना द्वारा साइंस एवं टेक्नोलॉजी का उपयोग कर डिजिटल मैप तैयार करना आरम्भ किया गया है वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक भारत श्रेष्ठ भारत तथा आत्मनिर्भर भारत की भावना को साकार कर रहा है।
इस दौरान चीफ हाइड्रोग्राफर, वाइस एडमिरल अधीर अरोड़ा ज्वाइंट चीफ हाइड्रोग्राफर, रियल एडमिरल लोचन सिंह पठानिया समेत नौसेना के अफसर मौजूद रहे।

आईएसबीटी से मालदेवता और आईएसबीटी से सहसपुर रोड में चलेंगी 10 इलैक्ट्रिक बसें

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय से देहरादून स्मार्ट सिटी के अन्तर्गत 10 इलैक्ट्रिक बसों का विस्तारित मार्ग आई०एस०बी०टी० से मालदेवता एवं आई०एस०बी०टी० से सहसपुर रोड के संचालन का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने टिकट लेकर घंटाघर तक बस में यात्रा भी की। स्मार्ट सिटी के अन्तर्गत 20 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन देहरादून में पहले से ही किया जा रहा है। उन्होंने सी.ई.ओ. स्मार्ट सिटी/जिलाधिकारी देहरादून सोनिका को निर्देश दिये कि यह सुनिश्चित किया जाये कि इन बसों के आने-जाने की समयावधि की आम जन को जानकारी हो।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्मार्ट सिटी के अन्तर्गत अब जो 30 इलैक्ट्रिक बसें संचालित की जा रही है। इससे देहरादून के विभिन्न यात्रा मार्गों पर जाने के लिए यात्रियों को काफी सुविधा होगी। यात्रियों को आवागमन के लिए सहज एवं सरल सुविधा मिलेगी। इलैक्ट्रिक बसों के संचालन से पर्यावरण भी प्रदूषित नहीं होगा। ग्रीन एवं क्लीन सिटी के लिए भी इन बसों के संचालन से मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बस के संचालन का मुख्य उद्देश्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है। इन बसों के संचालन से वायु एवं ध्वनि प्रदूषण कम होगा।
देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड की दून कनैक्ट सेवा के अंतर्गत 20 बसों का संचालन देहरादून शहर के 4 मार्गों आई०एस०बी०टी से राजपुर, आई०एस०बी०टी० से रायपुर- सेलाकुई, आई०एस०बी०टी० से सहस्त्रधारा एवं आई०एस०बी०टी० से एयरपोर्ट तक पहले से ही संचालन किया जा रहा है। इनमें अभी तक कुल 12.47 लाख यात्रियों द्वारा सफर किया जा चुका है तथा कुल 2 करोड़ 41 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ है। पहले से चल रही बसों में यात्रियों की अधिक संख्या एवं स्थानीय निवासियों एवं यात्रियों के द्वारा अतिरिक्त बसों की इस रूट पर मांग के दृष्टिगत स्थानीय जनता को अधिकतम लाभ पहुचाने के लिए आई0एस0बी0टी0 से रायपुर रूट को विस्तारित कर मालदेवता तथा आई०एस०बी०टी० से सेलाकुई रूट को विस्तारित कर सहसपुर तक नई बसों को संचालित किया जा रहा है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल, गणेश जोशी, मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक सविता कपूर, सुरेश गड़िया, सीईओ स्मार्ट सिटी सोनिका उपस्थित रहे।