महिला आरक्षण पर बोले सीएम राज्य की महिलाओं के सर्वागींण विकास के लिए जरुरी है आरक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने महिला क्षैतिज आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट से रोक मिलने का स्वागत किया है। राज्य सरकार ने एक साल के भीतर सरकारी विभागों में 19 हजार भर्तियां करने का लक्ष्य रखा है।
शुक्रवार को महिला क्षैतिज आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सीएम धामी ने त्वरित टिप्पणी की है। सीएम धामी की मंजूरी के बाद ही महिला आरक्षण को यथावत रखने के लिए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। उसी पर सर्वाेच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश पर स्टे दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के प्रदेश की महिलाओं के हित में दिए गए फ़ैसले स्वागत किया। कहा कि हमारी सरकार प्रदेश की महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है। राज्य सरकार ने महिला आरक्षण को यथावत् बनाए रखने के लिए अध्यादेश लाने के लिए भी पूरी तैयारी कर ली थी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में भी समय से अपील करके प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की।
सीएम धामी पहले ही साफ कर चुके हैं कि एक वर्ष के भीतर सरकार ने विभिन्न सरकारी विभागों में 19 हजार नई भर्तियों का फैसला लिया है। ताजा आदेश के बाद अब इन भर्तियों में तेजी आने की उम्मीद है। दरअसल, पहले उत्तराखंड अधीनस्थ चयन आयोग भर्ती घपला और फिर हाईकोर्ट के 30 फीसदी महिला आरक्षण पर रोक के बाद भर्ती प्रक्रिया थम गई। इससे बेरोजगार अभ्यर्थियों में आक्रोश पनप रहा था, लेकिन अब फिर भर्तियों की राह जोर पकड़ सकती हैं।

एक्ट बनाने से नहीं फंसेगा फेंच
उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों में अभी महिलाओं को 30 फीसदी आरक्षण सिर्फ एक जीओ के आधार पर मिल रहा है। 18 जुलाई, 2001 को नित्यानंद स्वामी सरकार ने इसकी शुरूआत की थी। तब 20 फीसदी आरक्षण का प्रावधान था। तब से सरकार ने इसके लिए कोई एक्ट नहीं बनाया है, जिससे भविष्य में भी इस जीओ को चुनौती मिल सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार को यह लाभ यथावत देने के लिए अध्यादेश या फिर विधानसभा के पटल पर विधेयक लाना होगा, ताकि इसे कानूनी तरह से अमली जामा पहनाया जा सके। पिछले माह हुई बैठक में कैबिनेट मुख्यमंत्री को महिला आरक्षण को लेकर अध्यादेश लाने की मंजूरी देने को अधिकृत भी कर चुकी है।

न्याय विभाग से भी इसका परीक्षण कराया जा चुका है। चूंकि, फिलहाल सरकार को राहत मिल चुकी है तो अध्यादेश या फिर विधेयक दोनों में कोई एक विकल्प सरकार चुन सकती है। एक्ट बनने से भविष्य में राज्य में महिला आरक्षण पर पेंच नहीं फंसेगा।

एसएलपी में ये दिए थे तर्क
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एसएलपी में आरक्षण यथावत रखने के लिए विभिन्न तर्क दिए थे। इसमें कहा गया था कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां बिल्कुल भिन्न हैं और पर्वतीय महिलाओं की विकट जीवन शैली है। चूल्हे से लेकर खेत-खलिहान सभी उन्हीं के जिम्मे है। वहीं, सरकारी नौकरियों में महिलाओं का प्रतिनिधत्व काफी कम है। लिहाजा समाज के मुख्य धारा में महिलाओं को शामिल करने के लिए उनके लिए क्षैतिज आरक्षण जरूरी है।

कई राज्यों में है महिला आरक्षण
विभिन्न राज्यों में सभी महिलाओं को सरकारी नौकरियों में क्षैतिज आरक्षण देने का प्रावधान है। इनमें बिहार में सबसे अधिक 35 फीसदी आरक्षण है, जबकि मध्यप्रदेश और राजस्थान में 30-30 फीसदी आरक्षण है। यूपी ने भी 20 फीसदी आरक्षण का लाभ दिया था, लेकिन वर्ष 2019 में इलाहाबादा हाईकोर्ट में चुनौती मिलने के बाद इस पर रोक लगी है।

कब क्या हुआ
18 जुलाई, 2001 में नौकरियों में मिला था स्थानीय महिलाओं को 20 फीसदी आरक्षण
24 जुलाई, 2006 में एनडी सरकार में इसमें बढ़ोत्तरी कर 30 फीसदी किया
10 अक्तूबर,2022 में हाईकोर्ट ने आरक्षण पर रोक लगाई
24 अगस्त, 2022 को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन की दायर

वहीं, वित्त, संसदीय, शहरी विकास व आवास, पुनर्गठन व जनगणना मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल ने राज्य में 30 प्रतिशत महिला आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का स्वागत किया है। राज्य सरकार ने इस दिशा में सुप्रीम कोर्ट में ठोस पैरवी की थी। उसी के परिणामस्वरूप सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण को यथावत रखने का आदेश सुनाया है। डा. अग्रवाल ने कहा कि जहां उत्तराखंड राज्य यहां की महिलाओं के संघर्ष के बाद प्राप्त हुआ। महिलाओं के लिए यह राज्य सदैव ऋणी रहेगा। उत्तराखंड में महिलाओं को मां, बहन और बेटी के रूप में पूजा जाता है।
डा. अग्रवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश इस वक्त में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जब पूरा उत्तराखंड अपना लोकपर्व इगास मना रहा है। आज ही के दिन ग्राम्य विकास विभाग द्वारा लखपति दीदी योजना परवान चढ़ी है। डा. अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने लखपति दीदी योजना में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से एक वर्ष में एक लाख से अधिक की आय अर्जित करने वाली महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में सम्मानित किया।
डा. अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कार्यरत है, 2025 तक सरकार ने सवा लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निश्चित किया है।

सामूहिक नृत्य में झूमे मंत्री अग्रवाल, इगास की दी बधाई

छिद्दरवाला में युवक मंगल दल और महिला मंगल दल की ओर से इगास महोत्सव धूमधाम से आयोजित किया गया। इस मौके पर क्षेत्रीय विधायक व कैबिनेट मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने पारंपरिक वेशभूषा पहाड़ी टोपी पहनकर शिरकत करते हुए भेलो खेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम में झूमकर सामूहिक नृत्य किया। मंत्री डॉ अग्रवाल ने आयोजक समिति को 11 हज़ार रूपए भी दान स्वरूप भेंट किये।
जोगीवाला माफी में आयोजित इगास महोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ मंत्री डॉ प्रेमचंद अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर मंत्री डॉ अग्रवाल ने पहाड़ी व्यंजन अरसे का स्वाद चखा और ग्रामीणों को इगास पर्व की बधाई दी।
डॉ अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा इगास पर्व पर अवकाश की घोषणा से राज्य की लोक संस्कृति को बल मिलेगा। प्रदेश में यह दूसरा मौक़ा है जब उत्तराखण्ड में लोकपर्व ईगास को लेकर अवकाश घोषित किया गया है। कहा कि इगास पर्व पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित न रहकर मैदानी क्षेत्रों में भी पहुंच गया है।
डॉ अग्रवाल ने कहा कि युवाओं में इसकी लोकप्रियता बढ़ी हैं। इसका लाभ हमारे राज्य की संस्कृति को मिलेगा। कहा कि इस पर्व को देवोत्थान एकादशी के साथ ही गढ़वाल में इगास और कुमायूं में बूढ़ी दीपावली के रूप में मनाया जाता है।
इस मौके पर आंचलिक गीत मेरे बुढ़ा की ब्यो छे, और ऐ गे न बग्वाल के दिन पर मंत्री डॉ अग्रवाल झूमने पर मजबूर हुए। साथ ही पहाड़ी व्यंजन अरसे का आनंद भी लिया। इसके अलावा देवदार, भीमल या हींसर की लकड़ी आदि से बने भैलो को खेला।
इस मौके पर युवक मंगल दल के अध्यक्ष प्रमोद रावत, जगमोहन पंवार, महिला मंगल दल की अध्यक्ष सुशीला नेगी, संगीता असवाल, प्रधान सोबन सिंह कैंतुरा, महिला मोर्चा मण्डल अध्यक्ष समा पंवार, अनिता राणा, विमला नैथानी, रीना नेगी, बैशाख सिंह, क्षेत्र पंचायत सदस्य अमर खत्री, उप प्रधान शैलेन्द्र रांगड़, दीपा सजवाण, राजेंद्र बगियाल, सुरेंद्र रमोला, रोशन कुड़ियाल, अम्बर गुरुंग, धर्म सिंह, रतन नेगी आदि उपस्थित रहे।

महिला शक्ति के रुप में उत्तराखंड करेगा देश का नेतृत्व-धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सर्वे ऑफ इण्डिया ग्राउण्ड, हाथीबड़कला में आयोजित “लखपति दीदी मेला“ कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में यह कार्यक्रम ग्राम्य विकास विभाग द्वारा आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से एक वर्ष में एक लाख रुपए से अधिक की आय अर्जित करने वाली महिलाओं को “लखपति दीदी“ के रूप में सम्मानित किया। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत लाभार्थियों को चेक भी प्रदान किये गये।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को लोकपर्व इगास और बूढ़ी दिवाली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि वर्ष 2025 में जब हमारा राज्य अपनी स्थापना का रजत जयंती वर्ष माना रहा होगा, तब तक हम अपने प्रदेश की सवा लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का कार्य करेंगे। यह प्रयास निश्चित रूप से महिलाओं के आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि समाज में महिला शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। महिला सशक्तिकरण के बिना एक आदर्श समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए अनेक प्रयास कर रही हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रूपये तक का ऋण बिना ब्याज के दिया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों को जोड़कर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रयास किये जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत गांव माणा में प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए चारधाम यात्रा पर आने वाले सभी देशवासियों एवं श्रद्धालुओं से आह्वाहन किया कि अपने यात्रा खर्चे का 5 प्रतिशत धनराशि उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पादों पर खर्च करें। इससे हमारे स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा और मातृ शक्ति की आजीविका में भी तेजी से वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हमेशा से प्रतिबद्ध रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत में मातृशक्ति का महत्वपूर्ण योगदान होगा। मातृभूमि और मातृशक्ति के सर्वागीण विकास के प्रति सजगता का अनूठा उदाहरण यदि किसी ने दिया है तो वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिया है। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में महिला उत्थान की भावना को सर्वाेपरि रखते हुए उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी विशेष योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। जिसके परिणाम स्वरूप आज महिलाओं के जीवन स्तर में व्यापक सुधार हुआ है। प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में डबल इंजन की सरकार द्वारा राज्य में ऐसी अनेक योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया है, जिससे हर वर्ग के लोगों को आज स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि मातृ शक्ति सशक्त होगी तो पूरा समाज सशक्त होगा। लखपति दीदी योजना के माध्यम से राज्य की मातृ शक्ति को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए हर प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य में अनेक जन कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का आम जन तक अधिक से अधिक लाभ पहुंचे, इसके लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। ग्राम्य विकास विभाग के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए अनेक प्रयास किये जा रहे हैं।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, भाजपा की प्रदेश मंत्री नीरू देवी, रेशम फेडरेशन के अध्यक्ष अजीत चौधरी, पूर्व दर्जा धारी कैलाश पंत, अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, सचिव बी.वी.आर.सी पुरूषोत्तम, मुख्य विकास अधिकारी देहरादून झरना कमठान एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

सीएम ने आवास पर गौ पूजन और तुलसी पूजन किया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी धर्मपत्नी गीता धामी के साथ इगास के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में गौ-पूजन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने देवउठनी एकादशी के इस पावन अवसर पर तुलसी पूजन भी किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि गाय सनातन संस्कृति के साथ ही समस्त मानव जाति के लिए पूजनीय और आदरणीय है। भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। गाय को सुख, सौभाग्य व समृद्धि प्रदान करने वाली तथा समस्त मनोकामनाएं को पूर्ण करने वाली माना गया है
मुख्यमंत्री ने इगास की बधाई देते हुए लोक पर्व इगास को उत्साह के साथ मनाने का आह्वान किया है। उन्होंने विशेषकर प्रदेश की युवा पीढ़ी का आह्वान किया है कि वे अपनी प्रकृति-प्रेमी एवं पर्यावरण हितैषी परंपराओं व संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए आगे आएं ।

पशुलोक विस्थापित की भूमि राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने के निर्देश

विस्थापित क्षेत्र पशुलोक को भूमिधरी अधिकार मिलने की मांग को लेकर आज स्थानीय लोग कैबिनेट मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल से मिले। इस मौके पर मंत्री डा. अग्रवाल ने जिलाधिकारी देहरादून और सचिव राजस्व के साथ बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए।
गुरूवार को ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र से विस्थापित पशुलोक निवासी लोगों का प्रतिनिधिमंडल कैबिनेट मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल से मिला। इस पर मंत्री डा. अग्रवाल ने मौके पर मौजूद जिलाधिकारी देहरादून सोनिका और सचिव राजस्व सचिन कुर्वे के साथ बैठक की। मंत्री डा. अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2000 में जनपद टिहरी के भागीरथी गांव के परिवारों को ऋषिकेश विधानसभा के पशुलोक में विस्थापित किया गया था।
मंत्री डा. अग्रवाल ने कहा कि लंबे समय से इन परिवारों द्वारा पशुलोक विस्थापित को राजस्व ग्राम की मांग उठाई गई। जिसे उनके अथक प्रयासों से वर्ष 2020 में राजस्व ग्राम घोषित किया गया। मंत्री डा. अग्रवाल ने बताया कि भूमिधरी का अधिकार इन्हें न मिलने के चले समस्याएं पैदा हो रही है।
मंत्री डा. अग्रवाल ने सचिव राजस्व सचिन कुर्वें को बैठक के दौरान निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि जल्द ही पशुलोक विस्थापित के लोगों को भूमिधरी का अधिकार दिया जाए। जिससे राजस्व अभिलेखों में सभी की भूमि दर्ज हो सके।
इस मौके पर पशुलोक विस्थापित के लोगों द्वारा मंत्री डा. प्रेमचंद अग्रवाल का आभार व्यक्त किया गया। इस दौरान जगदंबा सेमवाल, प्रताप सिंह राणा, बलवीर रावत, दिनेश बहुगुणा, रघुनाथ चौहान, विजय बिष्ट, मीना सजवाण आदि उपस्थित रहे।

अभिनव पहल-आर्थिक रूप से कमजोर 300 छात्र-छात्राओं को निःशुल्क उच्च शिक्षा

उत्तराखंड के देहरादून में स्थित CIMS & UIHMT ग्रुप ऑफ कॉलेज ने बड़ी पहल करते हुए उत्तराखंड के आर्थिक रूप से कमजोर 300 छात्र छात्राओं को निःशुल्क उच्च शिक्षा प्रदान करने का फ़ैसला लिया है। CIMS & UIHMT ग्रुप ऑफ कॉलेज न सिर्फ़ उच्च शिक्षा बल्कि सामाजिक सरोकारों में भी अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। ग्रुप के चेयरमैन एडवोकेट ललित मोहन जोशी सजग इंडिया के माध्यम से बीते 15 सालों से नशे के खिलाफ जन जागरूकता अभियान चला रहे हैं। वर्तमान में भी संस्थान द्वारा कोरोना काल में अनाथ हुए 100 बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। अपनी इस पहल को आगे बढ़ाते हुए अब उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए उत्तराखंड के आर्थिक रूप से कमजोर 300 छात्र-छात्राओं को निःशुल्क उच्च शिक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया है।

आज पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए CIMS & UIHMT ग्रुप ऑफ कॉलेज के चेयरमैन एडवोकेट ललित मोहन जोशी ने कहा कि प्रायः हमारे प्रदेश में यह देखा गया है कि कई छात्र-छात्राओं की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण दसवीं/बारहवीं के बाद वह उच्च शिक्षा से वंचित हो जाते हैं और कई गलत रास्तों में भटक जाते हैं और कई युवा नशे के जंजाल में फंस जाते हैं। उपरोक्त की स्थिति को देखते हुए CIMS & UIHMT Group of Colleges द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि हम अपने निजी शिक्षण संस्थान में 300 छात्र-छात्राओं को प्रतिवर्ष निःशुल्क शिक्षा प्रदान करेंगे, ताकि वह आगे बढ़कर अपने परिवार के भरण-पोषण के साथ-साथ प्रदेश एवं देश के काम आ सकें एवं व्यसनमुक्त समाज के निर्माण में भागीदार बन सकें। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर 300 छात्र-छात्राओं को निःशुल्क उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा प्रदान करके उनको शत-प्रतिशत जॉब में लाने का प्रयास किया जाएगा। प्रवेश लेने की अंतिम तिथि 30 नवम्बर, 2022 तक रखी गई है, जिसमें पहले आओ, पहले पाओ के माध्यम से सीटें आवंटित की जाएगी।

CIMS &UIHMT ग्रुप की इस पहल को राज्य के कई गणमान्य व्यक्तियों का भी सहयोग मिला है। प्रेस वार्ता के दौरान राज्य आंदोलनकारी व जनकवि अतुल शर्मा ने अपना आशीर्वाद देते हुए संस्थान की इस मुहिम को सराहा। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना दिवस से पहले यह राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं के लिए बहुत बड़ा तोहफ़ा है। वहीं प्रेस वार्ता में मौजूद बॉलीवुड कलाकार हेमंत पांडे ने भी संस्थान की इस पहल को सराहा, उन्होंने कहा कि वह संस्थान के इस प्रयास का प्रचार-प्रसार ब्रांड एंबेसेडर के तौर पर निःशुल्क रूप में करेंगे। प्रेस वार्ता को लोकगायिका पद्मश्री डॉ. माधुरी बर्थवाल, सीएमआई अस्पताल के चेयरमैन डॉ. महेश कुड़ियाल ने भी संबोधित किया। उन्होंने CIMS &UIHMT ग्रुप ऑफ कॉलेज के इस प्रयास को सराहते हुए अपना पूर्ण समर्थन देने का ऐलान किया।

कार्यक्रम में कुरमांचल परिषद के अध्यक्ष कमल रजवार, गोरखाली सुधार सभा के अध्यक्ष पदम सिंह थापा, धात संस्था के महामंत्री तन्मय ममगाई, रिटायर्ड कर्नल ठाकुर सिंह, राज्य आंदोलनकारी परिषद के अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती, बलूनी स्कूल के प्रबंध निदेशक विपिन बलूनी, राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान, प्रेस क्लब के अध्यक्ष जितेंद्र अन्थवाल महासचिव ओपी बिंजवाल, शिक्षाविद ड़ा0 शुशील राणा, बबिता शाह लोहनी, गिरीश सनवाल सहित अनेक सामाजिक लोगों उपस्थित थे।

सत्र 2022-23 के लिए इन पाठ्यक्रमों में दिया जाएगा प्रवेश-

(B.Sc. Medical Microbiology, B.Sc. Optometry, B.Sc.Pathology, Bachelor in Hospital Administration, BBA, BCA, B.Sc.IT, B.A.(Honour), Mass Communication, B.Com (Hons.), BHM, DHM, BA, B.Com, B.Sc.(PCM/ZBC),Master in Public Health, Master in Hospital Administration, Master in Hostel Management, M.Sc. Biochemistry, M.Sc.Microbiology, M.Sc.MLT, P.G. Diploma-Diploma in Yoga Science, Diploma in Yoga, P.G. Diploma in Fitness & Sports Management, P.G. Diploma in Business Accounting & Taxation, P.G. Diploma in Journalism & Mass Communication, P.G. Diploma in Water Sanitization & Hygiene)

उक्त सीटों को भरने हेतु संस्थान द्वारा उन छात्र-छात्राओं को पहले प्राथमिकता दी जाएगी, जो कि निम्नलिखित श्रेणी में आते हैं –

1. कोरोना महामारी में अनाथ हुए बच्चे जो कि दसवीं या बारहवीं के बाद आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं या कारोनाकाल में उनके घर के कमाऊ व्यक्ति माता या पिता की मृत्यु हो चुकी है।

2. देश एवं प्रदेश के किसी भी फोर्स (आर्मी, पुलिस, अर्धसैनिक अथवा अन्य फोर्स) में शहीद हुए उत्तराखण्ड के जवान के बच्चे जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक ना हो।

3. उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारियों के आश्रित बच्चे, जिनकी आर्थिक स्थित ठीक ना हो, जो उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हों।

4. उत्तराखण्ड के लोक-कलाकर एवं लोक संस्कृति एवं साहित्य को जीवित रखने के लिए जो कलाकार निःस्वार्थ भाव से लगे हैं, अगर उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है तो उनके ऐसे बच्चों को संस्थान द्वारा दसवीं/बारहवीं बाद निःशुल्क उच्च शिक्षा प्रदान करके उनको रोजगार मुहैया कराया जाएगा।

5. उत्तराखण्ड के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के ऐसे बच्चे जिनकी आपदाओं के कारण आर्थिक स्थिति खराब हो, को भी उच्च शिक्षा एवं रोजगारपरक शिक्षा निःशुल्क प्रदान की जाएगी।

6. मीडिया देश का चौथा स्तम्भ है, जहाँ पर हमारे मीडियाकर्मी भी एक सैनिक की भांति समाज को एक नई दिशा देने का काम करती है और कोरोना महामारी के बाद हमारे प्रदेश के अनेक मीडिया साथियों (प्रिंट एवं इलैक्ट्रानिक मीडिया, सोशल मीडिया, स्वतंत्र पत्रकार एवं अन्य मीडिया के साथी) जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक ना हो, के परिवार के बच्चों को भी निःशुल्क उच्च शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जाएगी।

बेडू ग्रुप ने सूचना महानिदेशक को भेंट की स्थानीय उत्पादों की ‘समूण‘’

उत्तराखंड के पौड़ी जिले की यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र के बिजनी छोटी में हर्बल उत्पादों का निर्माण कर रहे बेडू ग्रुप ने इस बार इगास पर स्थानीय उत्पादों की ‘समूण भेंट‘ करने की मुहिम शुरू की हुई है। राज्य सरकार ने जहां इगास पर अवकाश घोषित किया हुआ है वहीं बेडू ग्रुप का प्रयास है लोकपर्व इगास को सभी लोग अपने पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ मनाने के अलावा एक-दूसरे को स्थानीय उत्पादों की समूण भेंट करें। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बेडू ग्रुप की पहल की सराहना करते हुए लोगों से अपील भी कि है कि इगास पर्व की सार्थकता तभी है जब हम इस पर्व को अपनी संस्कृति, प्रकृति और उत्पादकता से जोड़ें।
इसी कड़ी में बेडू ग्रुप के सदस्यों दयाशंकर पांडेय, अमित अमोली और अवधेश नौटियाल ने सूचना महानिदेशक/एमडी जीएमवीएन बंशीधर तिवारी से मुलाकात कर उन्हें बेडू के बने हर्बल उत्पादों के साथ ही स्थानीय उत्पादों की समूण भेंट की। इस समूण में पारंपरिक व्यजन रोट, अरसे, बाल मिठाई, सिंगोरी सहित बेडू ग्रुप के द्वारा तैयार की गई हर्बल उत्पादों की किट है।
बंशीधर तिवारी ने इस पहल की सराहना करते हुए आम जनमानस से इस मुहिम में जुड़ने का आहवान किया ताकि संस्कृति व उत्पादकता के संबर्धन के साथ ही स्थानीय उत्पादों से जुड़े लोगों के चेहरों पर भी इगास में खुशियां देखने को मिले। उन्होंने कहा बेडू ग्रुप के अलावा राज्य की जो सक्षम संस्थाएं अपनी माटी और थाती के लिए समर्पित हैं, उन्हें भी इस तरह का समूण अभियान चलाना चाहिए। इससे स्थानीय लोग अपने घरों में ही अरसा, रोट व अन्य स्थानीय उत्पादों का निर्माण करेंगे तो यह हमारी संस्कृति को बचाने व आर्थिकी को मजबूत करने के लिए सकारात्मक प्रयास होगा।
बेडू द मिशन प्राइवेट लिमिटेड के ट्रेडिंग एंड प्रोडक्शन डायरेक्टर अमित अमोली ने बंशीधर तिवारी जी को अवगत कराया कि हमने लोकपर्व इगास पर समाज के विभिन्न वर्गों के प्रमुख लोगों को बेडू के शुद्ध हर्बल उत्पादों के साथ ही रोट, अरसे और सिंगोरी, बाल मिठाई की कंडी बनाकर समूण के तौर पर देने का अभियान चलाया है। हमारे पास अभी सीमित संसाधन हैं, ऐसे में कम ही लोगों तक पहुंच बन रही है, लेकिन भविष्य में इस अभियान को और विस्तृत किया जायेगा ताकि त्यौहारों पर उत्तराखंडी उत्पादों की भी धूम देखने को मिले।
अमित अमोली ने बेडू ग्रुप द्वारा तैयार किये जा रहे हर्बल प्रोडक्ट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हमने यह सब प्रोडक्ट आमजनमानस के स्वास्थ्य औऱ पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाये है, साथ ही जन सामान्य के लिये किफायती दरों में उपलब्ध कराए है। हमारी हर्बल उत्पादों की टीम में स्थानीय 100 से अधिक लोगों की मेहनत जुड़ी हुई है यह सभी पूंजी लगाने के साथ बेडू को ब्रांड बनाने में योगदान दे रहे हैं। बेडू के जो प्रोडक्ट लांच हुए है उनमें सेनेटाइजर, हैंड वाश, बॉडी लोशन, हेयर ऑयल, हैंड मेड गोट मिल्क कोकोनट एंड वनीला साबुन, हैंड मेड चारकोल एंड वनीला साबुन, कंडेशनिंग हेयर क्लीनर, मॉश्चराइजिंग बॉडी वाश, हैड वाश, मॉश्चराइजिंग एंड बॉडी लोशन, फेस वॉश, सनस्क्रीन लोशन, प्यूरिफाइंग उबटन, हिमालयन पिंक साल्ट स्क्रब एंड बॉडी पॉलिशर, वालनट फेस स्क्रब आदि लॉन्च हो गए हैं जो बाजार में उपलब्ध हैं।
बेडु के उत्पादों की अगर बात की जाय तो इसने शैम्पू, साबुन, तेल इत्यादि के उत्पाद में यहां पर्याप्त मात्रा में होने वाले भेमल के पेड़ के पत्ते, रेशे, बीज इत्यादि का भरपूर मात्रा में इस्तेमाल करते हुए इन उत्पादों को निर्मित किया है जो यकीनन बेहतरीन माने जा रहे हैं। बेडू द मिशन निकट भविष्य में भेमल, षण, भांग इत्यादि के रेशों से वस्त्र उत्पाद भी करेगी जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में खूब डिमांड है। उन्होंने कहा हमारा मकसद सिर्फ पलायन रोकना नहीं बल्कि रिवर्स माइग्रेशन करवाना भी है ताकि हमारे लोग अपनी जड़ों की ओर वापस लौटे।

धामी सरकार परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए बनाने जा रही नियम, मिलेगी इतने साल की सजा

भर्तियों में नकल रोकने के लिए बनेगा कानून, मसौदा तैयार, विधानसभा में पास कराने की तैयारी सरकार ने किसी एक आयोग के बजाए प्रदेश में सभी भर्ती कराने वाली संस्थाओं के लिए ‘उत्तराखंड सरकारी सेवाओं में नकल निषेध अधिनियम 2022’ तैयार कर लिया है। शासन स्तर पर हुई बैठक में इस अधिनियम के सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
उत्तराखंड में सभी आयोग, बोर्ड, परिषद या विश्वविद्यालय की ओर से होने वाली भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्त कानून का मसौदा तैयार कर लिया गया है। आगामी विधानसभा सत्र के दौरान सरकार इसे पटल पर रखने की तैयारी में है। शासन स्तर पर हुई बैठक में सभी बिंदुओं पर चर्चा के बाद इसे अंतिम रूप दे दिया गया है।
सरकार ने किसी एक आयोग के बजाए प्रदेश में सभी भर्ती कराने वाली संस्थाओं के लिए ‘उत्तराखंड सरकारी सेवाओं में नकल निषेध अधिनियम 2022’ तैयार कर लिया है। शासन स्तर पर हुई बैठक में इस अधिनियम के सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई बैठक में तय किया गया कि कानून में उम्मीदवारों, परीक्षा कराने वाली संस्थाओं और नकल माफियाओं के लिए सजा के अलग-अलग प्रावधान होंगे।
अपर सचिव कार्मिक कर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि प्रदेशभर में होने वाली सरकारी भर्तियों के लिए अधिनियम को लेकर हुई बैठक में न्याय विभाग सहित तमाम संबधित विभागों ने अपने सुझाव दे दिए हैं। दरअसल, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तरीय के साथ ही कई भर्तियों में बड़े पैमाने पर नकल सामने आने के बाद प्रदेश में सख्त नकलरोधी कानून की जरूरत महसूस हुई। आयोग ने बोर्ड बैठक में ऐसे कानून का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था।

प्रदेश में पहली बार ऐसे लागू होगा नकलनिषेध कानून
उत्तराखंड सरकार प्रदेश में पहली बार सख्त नकल निषेध कानून लाने जा रही है। जो मसौदा तैयार हुआ है, उसे कैबिनेट बैठक में लाया जाएगा। यहां से मुहर लगने के बाद विधानसभा सत्र के दौरान पटल पर रखा जाएगा। पास होने के साथ ही यह अधिनियम कानून के रूप में लागू हो जाएगा।

अभी तक यह है प्रावधान
अभी तक पेपर लीक का कोई भी मामला प्रकाश में आने के बाद उत्तराखंड के नकल रोधी कानून के तहत आरोपियों पर आईपीसी की धारा 420, 120 बी या हाईटेक नकल होने पर आईटी एक्ट में ही मुकदमे दर्ज होते हैं। आयोग का मानना है कि इन अपराधियों के लिए कानून के यह प्रावधान कमतर हैं।

अब ये सजा संभव
-उम्मीदवारों पर जुर्माने के साथ ही दो से तीन साल की सजा और परीक्षाओं से दो साल तक डिबार करना।
-संस्था की पेपर लीक में भूमिका होने पर भारी भरकम जुर्माना और पांच से सात साल तक की सजा।
-नकल माफिया या गिरोह की भूमिका पर दस साल तक सजा के अलावा संपत्ति कुर्की व दस लाख तक जुर्माना।
-नकल को संज्ञेय और गैर जमानती अपराध मानकर इसकी जांच एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी ही करेंगे।

कानून न होने पर पेपर लीक के 42 में से 18 आरोपियों की हो चुकी जमानत
प्रदेश में नकल निषेध का कोई सख्त कानून न होने की वजह से अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्तियों में पेपर लीक के 42 आरोपियों में से 18 की जमानत हो चुकी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले से ही भर्तियों का पूर्ण पारदर्शी सिस्टम तैयार करने और नकल-पेपर लीक रोकने के लिए बड़ा फैसला लेने की बात कह चुके हैं।

धामी सरकार में छात्र-छात्राओं के रिपोर्ट कार्ड के साथ बनेगा हेल्थ कार्ड

उत्तराखंड के सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित काउंसलिंग व स्क्रीनिंग जल्द ही शुरु होने जा रही है। यह बात प्रदेश के प्रभारी सचिव स्वास्थ्य व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा राज्य स्तरीय पोषण, जीवन शैली व प्रबंधन बैठक में जानकारी देते हुए साझा की गई। देहरादून स्थित स्वास्थ्य महानिदेशालय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सभागार में आयोजित बैठक में विशेषज्ञों द्वारा बदलते जीवनशैली के मद्देनजर स्कूल के छात्र-छात्राओं के रिपोर्ट कार्ड के साथ-साथ हेल्थ कार्ड बनाने पर भी जोर दिया गया।
डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आहूत बैठक में सरकारी-गैर सरकारी संस्थानों में मौजूद विशेषज्ञों द्वारा यह पाया गया कि खानपान के गलत प्रचलन व मानसिक/शारीरिक परामर्श ना होने के कारण ब्रेन स्ट्रोक, हार्ट अटैक, डायबिटीज (गैर संचारी रोगों) जैसी बीमारियों में तेजी आई है। इसीलिए यह आवश्यक है कि रोजमर्रा के जीवन में सही जीवनशैली को अपनाया जाए, ताकि इन गैर संचारी रोगों के प्रभाव को कम किया जा सके।
बैठक में चर्चा की गई कि स्वास्थ्य विभाग, अन्य विभागों के साथ सभी हितधारकों द्वारा ऐसी नीतियों का निर्माण किया जाए जिन नीतियों के अंतर्गत मानसिक रोगों, तनाव, डिप्रेशन, तम्बाकू नियंत्रण, कैंसर, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, आदि (गैर-संचारी रोगों) का आकलन करते हुए, जनजागरुकता को बढ़ावा दिया जाए।
जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत डॉ. वर्तिका सक्सेना द्वारा बताया गया कि पिछले एक दशक में महिलाओं में मोटापे के मामले लगभग दोगुने हो गए हैं। किशोरियों में शारीरिक गतिविधियों, खेल-खूद को बढाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि स्तनपान को बढ़ावा देने की भी जरुरत है जिससे की डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, मोटापे को कम किया जा सके।
बैठक के दौरान प्रदेश में गैर-संचारी रोगों की रोकथाम हेतु स्वस्थ जीवनशैली, ईट राइट, मानसिक स्वास्थ्य, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, तनाव प्रबंधन, आदि विषयों पर विभन्न विभागों के प्रतिनिधियों द्वारा विचार साझा किए गए। इस बैठक के दौरान बिहेवियर चेंज, सामूहिक आई.ई.सी., इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन, आदि को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के काउंसलर के रुप में आशा कार्यकत्रियों को तैयार किए जाने पर चर्चा की गई। स्वास्थ्य संबंधित काउंसलिंग व स्क्रीनिंग को विद्यालय स्तर पर प्रारंभ किए जाने पर भी बल दिया गया।
बैठक में स्वास्थ्य महानिदेशक (प्रभारी) डॉ. विनीता शाह, निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सरोज नैथानी, राज्य नोडल अधिकारी डॉ. फरीदुज़फ़र, डॉ. सुजाता, ड़ॉ. पंकज सिंह, डॉ. कुलदीप मर्ताेलिया, डॉ. अर्चना ओझा, डॉ. अभय कुमार, डॉ. मंयक बड़ोला, डॉ. तुहीन कुमार, डॉ. अमलेश कुमार सिंह, डॉ. अमित शुक्ला, उपायुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन जी.सी. कंडवाल, डॉ. नीतू कोचर, आदि मौजूद रहे।

धामी सरकार का बड़ा फैसला, चीन सीमाओं पर सुरक्षा के लिए तैनात होंगे हिम प्रहरी

भारत और उत्तराखंड से लगे अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर दुश्मन का आंख दिखाना अब संभव नहीं हो पाएगा। उत्तराखंड में चीन सीमाओं पर सुरक्षा के लिए तैनात उत्तराखंड सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के सीमांत जिलों में तैनात होने वाले हिम प्रहरियों को पांच-पांच हजार रुपये महीने का मानदेय देने का प्लान बनाया है।
आपको बता दें कि उत्तराखंड सरकार सीमांत के जिलों में कुल दस हजार हिम प्रहरियों की तैनाती करने जा रही है। केंद्र से वित्तीय सहायता पर सहमति मिलते ही सरकार योजना को लागू कर दी जाएगी। उत्तराखंड सरकार चीन-नेपाल से सटे गांवों पर पलायन रोकथाम के लिए हिम प्रहरी योजना लागू करने की तैयारी कर रही है।
गृह विभाग ने पिथौरागढ़, चम्पावत, उत्तरकाशी, चमोली और यूएसनगर जिले के सीमांत से सटे ब्लॉकों में प्रस्तावित इस योजना का खाका तैयार कर लिया है। अपर सचिव रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि योजना पर प्रति माह पांच करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। केंद्र की अनुमति के बाद योजना लागू हो जाएगी।
देश और उत्तराखंड पर चीन के नापाक इराकों पर नजर रखने को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने फुलप्रूफ बनाया है। किसी भी बाहरी आक्रामण को नाकाम करने को सीएम धामी ने उत्तराखंड के अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने का फैसला लिया है। इसके लिए बॉर्डर एरिया पर निगरानी और त्वरित एक्शन के लिए बॉर्डर पर रह रहे युवाओं को हिम प्रहरी योजना से जोड़ा जाएगा।
यही नहीं, सीमांत इलाकों में अभेद सुरक्षा के लिए रिटायर्ड सैन्य कर्मियों की भी मदद ली जाएगी। हिम प्रहरी योजना के तहत करीब 10 हजार सेवानिवृत जवानों, पैरामिलिट्री से रिटायर्ड सैनिक सहित युवाओं को जोड़ा जाएगा। ‘हिम प्रहरी’ योजना से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
यह सभी हिम प्रहरी जरूरत पड़ने पर बाहरी आक्रमण की स्थिति में दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दे सकेंगे। सरकार का मानना है कि इसके लिए लिए प्रतिमाह 5 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। सीएम धामी ने केंद्र सरकार से मांग भी की है।