प्रदेश में सड़कों को पेचलैस मुक्त करे विभाग-मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ.एस.एस.सन्धु ने उनके सचिवालय सभागार में प्रदेश में सड़कों को पेचलैस मुक्त किये जाने के सम्बन्ध में आयोजित बैठक में सम्बन्धित विभागों को उपरोक्त दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने लोक निर्माण विभाग, एनएचआई (डीसीएल), एनएचएआई और बीआरओ के विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदेश में जहा पर यातयात अधिक है और सड़कों की कंडीशन भी खराब हैं उनको उच्च प्राथमिकता में लेते हुए सड़क सुधारीकरण के कार्य पूर्ण करें। उसके पश्चात् सड़क की दशा के अवरोही (घटते) क्रम में सुधारीकरण के कार्य पूर्ण करें। उन्होंने चारों विभागों के अधिकारियों से सड़कों की वस्तुस्थिति की जानकारी लेते हुए प्रमुख अभियन्ता लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (डीसीएल), राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एआई) और सडक सीमा संगठन (बीआरओ) तीनों विभागों की सड़कों की वस्तुस्थिति और सुधारीकरण कार्य की गुणवत्ता का ड्रोन सर्वे कराते हुए शीघ्रता से रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
मुख्य सचिव ने निर्माणदायी विभागों और एजेंसियों को सड़क की वास्तविक दशा और सुधारीकरण की जरूरत के अनुसार पुनर्निर्माण और सुधारीकरण के प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिये। साथ ही निर्माण कार्य के दौरान ये सुनिश्चित करने को कहा कि सडक पर यातायात के आवागमन में और लोगों को मूवमेंट के दौरान अनावश्यक परेशानी ना हो। अव्यवस्थित तरीके की कार्यप्रणाली को स्वीकार नहीं किया जायेगा। उन्होंने विभागों से सड़क को पेचलैस (गड्ढा मुक्त) करने और सुधारीकरण की हेतु टाइमलाइन तय करते हुए निर्धारित अवधि में उस कार्य को पूरा करने के निर्देश दिये। उन्होंने सडकों की रियल टाइम मॉनिटरिंग करने हेतु रोड असेस्मेंट सॉफ्टवेयर को एक्टिव करते हुए सभी स्टेटस को ऑनलाइन मोड पर प्रजेंट करने को कहा। उन्होंने प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु को निर्देशित किया कि पर्वतीय क्षेत्रों में पार्किंग की समस्या के संबंध में टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कारपोरेशन से समन्वय करते हुए समाधान तलाशें।
इस दौरान बैठक में प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, अपर सचिव अतर सिंह, प्रमुख अभियंता लोक निर्माण विभाग हरिओम शर्मा, निदेशक बीआरओ विवेक श्रीवास्तव, परियोजना निदेशक एनएचएआई पी.एस गोसाईं, डीजीएम प्रोजेक्ट एनएच (डीसीएल) प्रेमचन्द सहित सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थे।

ब्लाक प्रमुख संचालक मण्डल के प्रतिनिधियों ने सीएम को ज्ञापन सौंपा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास स्थित कैम्प कार्यालय में उत्तराखण्ड प्रदेश ब्लाक प्रमुख संचालक मण्डल के प्रतिनिधियों ने भेंट की। उन्होंने ब्लाक प्रमुखों की विभिन्न समस्याओं से सम्बन्धित ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपा।
मुख्यमंत्री ने ब्लाक प्रमुख संचालक मण्डल के सदस्यों की समस्यायें सुनी तथा उनके समाधान का आश्वासन दिया। ब्लाक प्रमुख संगठन की प्रमुख मांगों में ब्लाक प्रमुख विकास निधि बढ़ाये जाने, मानदेय की धनराशि में वृद्धि किये जाने, ब्लाक प्रमुखों को कार्य संचालन में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराये जाने आदि की मांग शामिल थी। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक राजेश शुक्ला, ब्लाक प्रमुख संचालक मण्डल के संरक्षक गोविन्द सिंह दानू, डा. हरीश बिष्ट, दर्शन सिंह दानू आदि उपस्थित थे।

कोर्ट के आदेश के बाद नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर बोला हमला

नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रदेश के जंगलों में आग लगने के मामलों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को छह माह में वन विभाग में खाली पड़े 65 प्रतिशत पदों को भरने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने निर्देश दिए कि ग्राम पंचायतों को मजबूत करें और वर्षभर जंगलों की निगरानी करवाएं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जवाब दाखिल कर कहा था कि वन विभाग में खाली पड़े फॉरेस्ट गार्ड के पदों पर शैक्षणिक योग्यता घटाकर हाईस्कूल कर दी गई है ताकि पदों को भरा जा सके। दो हजार पदों पर भर्ती प्रकिया जारी है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से चार सितंबर तक विस्तृत जवाब पेश करने के लिए कहा है।

कोर्ट के आदेश के बाद नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि हर बात का सज्ञान कोर्ट ले रहा है। सरकार को निर्देश दे रहा है उसके बाद भी सरकार काम नहीं कर रही है। राज्य में सरकार नाम की चीज नजर नहीं आ रही है। वन विभाग में कई महीने से फाॅरेस्ट गार्ड के पद खाली पड़े हैं, परंतु भाजपा सरकार इस की सुध नहीं ले रही है। राज्य में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, वन विभाग में खाली पड़े पदों को भरने के प्रति राज्य सरकार उदासीन है। नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रदेश के जंगलों में आग लगने के मामलों पर स्वतरू संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए छह माह में वन विभाग में खाली पड़े 65 प्रतिशत पदों को भरने के निर्देश दिए हैं। पहले भी कोर्ट ने गांव स्तर से ही आग बुझाने के लिए कमेटियां गठित करने के लिए कहा था, जिस पर आज तक अमल नहीं किया गया। सत्ता में आते ही कांग्रेस सबसे पहले सभी पदों को भरने का काम करेगी।

दो माह में 30 लाख आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य

प्रदेशवासियों को आयुष्मान कार्ड के माध्यम से बेहत्तर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कार्ड बनाने की प्रक्रिया का सरलीकरण करने के साथ ही दो माह के भीतर राज्य के 70 लाख लोगों को यह सुविधा उपलब्ध करा दी जायेगी। इसके साथ ही 104 हेल्पलाइन नम्बर का विस्तार करते हुए सूबे के वरिष्ठ नागरिकों सहित आम जरूरतमंद को सभी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जायेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को हाईटेक बनाने के उद्देश्य से राज्यभर के 3232 एएनएम तथा कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) को एनएचएम के तहत टैबलेट मुहैया कराये जायेंगे।

यह बात चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने विधानसभा स्थित कार्यालय में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए कही। उन्होंने कहा कि राज्य जनता को आयुष्मान कार्ड का अधिक से अधिक लाभ देने के उद्देश्य से कार्ड के बनाये जाने की प्रक्रिया एवं उपयोग के नियमों का सरलीकरण किया जायेगा। अभी तक राज्यभर के 40 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं। जबकि आगामी दो माह में 30 लाख और लोगों को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराने हेतु ब्लॉक एवं न्यायपंचायत स्तर पर शिविर आयोजित कराने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दे दिये गये हैं। साथ ही वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं एवं असहाय लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभाग के हेल्पलाइन नम्बर 104 के माध्यम से विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जायेंगी। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को हाईटेक बनाने के उद्देश्य से विभिन्न जनपदों में तैनात एएनएम, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) एवं मिड लेवल हेल्थ प्रोवाइडर्स (एमएनएचपी) को एनएचएम के तहत विशेष टैबलेट मुहैया कराया जायेंगे। अभी तक विभाग 2137 सीएचओ एवं एएनएम को टैबलेट मुहैया करा चुका है जबकि शेष 1095 को शीघ्र टैबलेट उलब्ध कराये जायेंगे ताकि विभिन्न जनपदों में तैनात एएनएम तथा सीएचओ सीधे एनएचएम के पोर्टल से जुड कर आवश्यक डाटा एवं सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकेंगे। इसी प्रकार विभाग द्वारा प्रदेशभर की आशा कार्यकत्रियों को स्मार्ट फोन उपलब्ध कराये गये हैं।

बैठक में स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी, अपर सचिव एवं महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा सी. रविशंकर, मिशन निदेशक एनएचएम सोनिका, अपर सचिव स्वास्थ्य अरूणेन्द्र सिंह चैहान, स्वास्थ्य महानिदेशक डा. तृप्ति बहुगुणा, अपर सचिव गरिमा रौंकली, अपर मिशन निदेशक एनएचएम अभिषेक त्रिपाठी सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

संभावित तीसरी लहर की तैयारी में जुटी सेवाभाव के लिए तैयार भाजपा

भाजपा के प्रदेश महामन्त्री सुरेश भट्ट ने कहा कि कोरोना की सम्भावित तीसरी लहर को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक अभियान के तहत शुक्रवार 6 अगस्त को देहरादून में प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि आज भारत सहित दुनियां वैश्विक महामारी कोरोना से ग्रस्त है। भारत अपने यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में इस महामारी का मजबूती से मुकाबला कर रहा है। इस कार्य में हमारे कोरोना यो़द्धा पूरी तत्परता से लगे हुए हैं, साथ ही देश की जनता भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवाह्न पर महामारी से लड़नें में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

आज हम कोरोना की दूसरी लहर का सामना कर रहे हैं, जैसा कि विशेषज्ञों का कहना है कि तीसरी लहर भी आ सकती है, इसलिए हमें किसी भी संभावित तीसरी लहर के सफलतापूर्वक मुकाबले के लिए देश और समाज को तैयार करना है।

भट्ट ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा जी के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ता सेवा ही संगठन के मंत्र का अनुपालन करते हुए कोरोना के खिलाफ जंग में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं, लेकिन यह कार्य अभी समाप्त नहीं हुआ है। हमें आगे की तैयारी भी करनी है, जिससे की तीसरी लहर को रोका जा सके। यदि तीसरी लहर आती भी है तो उसका मुकाबला करने और कोरोना को पराजित करने में देश सफल हो इस दृष्टि से भाजपा द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक अभियान प्रारम्भ किया गया है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर से ग्रामध्बूथ स्तर की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। इसके निमित्त राष्ट्रीय, प्रान्तीय, जिला व मण्डल स्तर पर समितियों के गठन के साथ ही प्रत्येक बूथ से दो कार्यकर्ता के नाम वालिंटियर (स्वयंसेवक) के नाते तय किये जा रहे हैं।
अभियान को आगे बढ़ाने के लिए कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण प्रारम्भ किये गये हैं। जिस क्रम में पिछली 28 जून का राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिल्ली में सम्पन्न हो चुका है, अब यह प्रशिक्षण कार्य प्रदेश, जिला व मण्डल स्तर पर किया जाना है। प्रशिक्षण के इसी क्रम में शुक्रवार को देहरादून में प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण होगा जिसमें अपने राष्ट्रीय सह महामंत्री संगठन शिव प्रकाश, प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय, स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत के मार्गदर्शन के साथ ही विशेषज्ञों द्वारा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षिण दिया जायेगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रातः 10 बजे से सायं 5 बजे तक चलेगा। प्रशिक्षण का यह क्रम प्रदेश के सभी जिलों व मण्डलों में अगस्त माह में पूर्ण कर लिया जायेगा।
सुरेश भट्ट ने कहा कि भाजपा देश का एक जिम्मेदार राजनैतिक दल होने के नाते देश व समाज के प्रतिअपनी जिम्मेदारियों को पूर्ण संजीदगी के साथ समझते हुए उसका बखूबी से निर्वहन करता है। देश व समाज के प्रति अपनी इसी जिम्मेदारी को निभाने के लिए हम प्रत्येक बूथ से कम से दो कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करेंगे जो कि अपने गांव व बूथों पर समाज को जागरूक व सजग रखते हुए किसी भी कोरोना की संभावित तीसरी लहर का मुकाबला कर उस पर विजय प्राप्त करेंगे। भाजपा का कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारी निभाएगा, समाज सजग व जागरूक रहेगा, कोरोना पराजित होगा। देश इस कोरोना महामारी पर विजय प्राप्त करके रहेगा।

मुख्यमंत्री ने ड्रोन के माध्यम से केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों का किया निरीक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ड्रोन के माध्यम से श्री केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट, प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजक्ट है। उन्होंने अधिकारियों को कार्यों में और तेजी लाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाय कि श्री केदारनाथ धाम में पुनर्निमाण कार्यों में और तेजी लाने के लिए मानव संसाधन के साथ पर्याप्त उपकरणों की व्यवस्था भी हो।

प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री केदारनाथ श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केन्द्र है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में मास्टर प्लान के अनुरूप श्री केदारनाथ को भव्य बनाया जा रहा है।

समयबद्ध, गुणवत्तायुक्त और प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप कार्य पूरा करने के लिए निर्देश
प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप भव्य केदारपुरी के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री धामी कृतसंकल्प हैं। वे लगातार प्रोजेक्ट की मानिटरिंग कर रहे हैं। खराब मौसम के कारण केदारनाथ न जाने पर उन्होंने ड्रोन के माध्यम से केदारनाथ पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट का निरीक्षण और समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने प्रथम चरण में अवशेष आदिगुरू शंकराचार्य की समाधि स्थल एवं मंदाकिनी नदी पर बन रहे ब्रिज के निर्माण कार्य को जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि आने वाले दो-तीन माह में श्री केदारनाथ में कार्य करने के लिए अच्छा समय है, इस दौरान तेजी से कार्य किये जायेंगे।

द्वितीय चरण के कामों में तेजी लाने के मुख्यमंत्री ने दिये निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि श्री केदारनाथ में चल रहे द्वितीय चरण के जो कार्य स्वीकृत हो चुके हैं, उनमें भी तेजी लाई जाय। सरस्वती नदी पर घाट एवं आस्था पथ के निर्माण के कार्य जल्द पूर्ण किये जाय।

प्रथम चरण के कार्य लगभग पूर्ण
प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जानकारी दी गई की श्री केदारनाथ के पुनर्निर्माण कार्यों के तहत प्रथम चरण के कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं। शंकराचार्य सामधि एवं ब्रिज का कार्य भी जल्द पूर्ण हो जायेगा। द्वितीय चरण के कार्यों में 116 करोड़ रूपये के कार्यों की स्वीकृत हो चुकी है। 08 कार्यों पर कार्य शुरू हो गया है। द्वितीय चरण में संगम घाट का नव निर्माण, आस्था पथ में रेन शेटलर, वाटर एटीएम, कमांड एण्ड कंट्रोल रूम, हॉस्पिटल बिल्डिंग एवं अन्य कार्य किये जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री स्वयं केदारनाथ यात्रा के अनेक बार साथ-साथ ड्रोन के माध्यम से कर चुके हैं विकास कार्यों की समीक्षा
प्रधानमंत्री केदारनाथ आपदा के समय से केदार पुरी के पुनर्निर्माण के लिए चिंतित हैं। प्रधानमंत्री स्वयं केदारनाथ यात्रा के अनेक बार साथ-साथ ड्रोन के माध्यम से विकास कार्यों की समीक्षा कर चुके हैं। 2013 में केदारनाथ आपदा के समय मुख्यमंत्री गुजरात रहते हुए उत्तराखंड सरकार प्रस्ताव दिया था कि केदारनाथ के पुनर्निर्माण में सहयोग करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री बाबा केदार से आध्यात्मिक रूप से जुड़े हैं। स्वयं ध्यान गुफा में बैठकर प्रधानमंत्री जी ने बाबा केदार के प्रति अपनी आस्था सार्वजनिक रूप से प्रकट की।
इस अवसर पर मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु, अपर सचिव पर्यटन युगल किशोर पंत एवं वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग मनुज गोयल उपस्थित थे।

भूकम्प एलर्ट एप बनाने वाला उत्तराखंड पहला राज्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में मोबाइल एप्लीकेशन ‘‘उत्तराखण्ड भूकंप अलर्ट’’ एप का शुभारम्भ किया। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, आपदा प्रबंधन विभाग एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रूड़की के सौजन्य से बनाये गये इस एप के माध्यम से भूकम्प से पूर्व चेतावनी मिल जायेगी।
उत्तराखण्ड यह एप बनाने वाला पहला राज्य है। इससे जन सुरक्षा में मदद मिलेगी। इस एप के माध्यम से भूकंप के दौरान लोगों की लोकेशन भी प्राप्त की जा सकती है। भूकंप अलर्ट के माध्यम से भूकंप से क्षतिग्रस्त संरचनाओं में फँसे होने पर सूचना दी जा सकती है। उत्तराखण्ड भूकंप अलर्ट एप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। इस एप के माध्यम से लोगों को भूकंप पूर्व चेतावनी मिल सके, इसके लिए इस एप की लोगों को जानकारी दी जाय। विभिन्न माध्यमों से व्यापक स्तर पर इसका प्रचार प्रसार किया जाय। आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा इसकी लघु फिल्म बनाकर जन-जन तक पहुंचाया जाय। स्कूलों में भी बच्चों को लघु फिल्म के माध्यम से इस एप के बारे में जानकारी दी जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों के पास एंड्राइड फोन नहीं है, उनको भी भूकंप से पूर्व चेतावनी मैसेज पहुंच जाय, इस एप के माध्यम से यह सुविधा भी प्रदान की जाय। भूकंप पूर्व चेतावनी में सायरन एवं वायस दोनों माध्यमों से अलर्ट की व्यवस्था की जाय। भूकंप पूर्व चेतावनी के लिए सायरन टोन अलग से हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूकंप पूर्व चेतावनी के लिए यह एक अच्छी पहल है।
इस अवसर पर आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, मुख्य सचिव डॉ. एस.एस.संधु, अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव आपदा प्रबंधन एस.ए. मुरूगेशन, आई.आई.टी. रूड़की के प्रो. कमल एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के दिए निर्देश

‘‘सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इनोवेटिव विकल्पों और हरसंभव प्रयासों को संजीदगी से अमल में लायें‘‘। मुख्य सचिव एस.एस.संधु ने सचिवालय सभागार में राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में संबंधित अधिकारियों को उपरोक्त दिशा-निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि लोगों का जीवन बचाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और इसके लिए विभिन्न विभागों को अपने विभागीय स्तर पर तथा सामूहिक समन्वय से जरूरी कदम उठाये जाने चाहिए। सड़क सुरक्षा से संबंधित कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी न की जाए और सुधारीकरण के कार्यों की तीव्र प्रगति के लिए नियमित मॉनिटरिंग की जाए।

लाइसेंस जारी करते समय पूरी प्रक्रिया का ठीक ने अनुपालन करें
परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि विभिन्न श्रेणी के लाइसेंस बनाते समय ट्रायल-ट्रेस्टिंग की वीडियो रिकॉर्डिंग रखें तथा ट्रायल का डेटा पोर्टल पर अपलोड करें ताकि कोई भी व्यक्ति किसी भी मीडिएटर(मध्यस्थ) के माध्यम से लाइसेंस न बनवा सके। उन्होंने परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को निर्देश दिए कि मुख्य चैराहों और मुख्य सार्वजनिक रूट पर सी.सी.टी.वी कैमरे के साथ ही राडार और स्पीड इन्टरसेप्टर तकनीक का इस्तेमाल करें और इस तकनीक को चैपहिया और दो पहिया वाहनों में भी लगाएं। साथ ही इसका नियमित सुपरविजन करते हुए ओवरस्पीडिंग, रैश डाइविंग और सड़क सुरक्षा के प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों पर सक्रियता से एक्शन लेते हुए सड़क सुरक्षा के जोखिम को न्यूनतम करें।
मुख्य सचिव ने लोक निर्माण विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को ब्लैक स्पॉट और वलनरेबल (दुर्घटना की दृष्टि से जोखिम वाले) क्षेत्रों को ए, बी व सी श्रेणी में वर्गीकृत करते हुए तद्नुसार जोखिम की अधिकता के अनुसार सुधारीकरण से संबंधित सभी कार्य संपन्न करने के निर्देश दिये। निर्देशित किया कि जहां तक संभव हो सके सड़क मार्गों पर साईकिल ट्रैक का भी निर्माण करें, विशेषकर औद्योगिक क्षेत्रों में जहां पर कामगारों (श्रमिकों) का आना-जाना रहता है, वहां पर साईकिल ट्रैक जरूर बनायें। विभिन्न रूट पर स्पीड ब्रेकर व रम्बल स्ट्रीप इस तरह से बनायें ताकि औसतन गति से वाहन चलाने वाले को अनावश्यक परेशानी न हो। साथ ही तीव्र गति से वाहन चलाने वाले का वाहन धीमा हो जाए। उन्होंने सड़क सुरक्षा का अच्छी ऐजेंसी से थर्ड पार्टी ऑडिट करवाने और माननीय न्यायालय तथा सड़क सुरक्षा समिति के समय-समय पर प्राप्त होने वाले सुझावों को अमल में लाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने अवैध मीडियन्स को तत्काल बंद करने, मुख्य मार्ग से 90 डिग्री पर सीधे मिलने वाले संपर्क मार्ग अथवा रास्तों पर जरूरी सुरक्षा उपाय करने और पहाड़ी क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार क्रैश बैरियर लगाने के निर्देश दिए। परिवहन विभाग को निर्देशित किया कि सुरक्षा मानकों का दूसरी बार उल्लंघन करने वाले वाहन चालक के डाइविंग लाईसेंस को छः माह के लिए तथा तीसरी बार उल्लंघन करने पर एक वर्ष के लिए लाईसेंस को निलंबित करें। कहा कि बिना हेलमेट वाहन चलाने वालो से हेलमेट का चार्ज लेते हुए नया हेलमेट दें, साथ ही मानक के अनुरूप जुर्माना की जितनी धनराशि है, उसका 50 प्रतिशत धनराशि भी वसुले।
मुख्य सचिव ने कहा कि दुर्घटना होने के पश्चात् गोल्डन अवर में लोगों का जीवन बचाने में स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और परिवहन विभाग को संयुक्त रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में दुर्घटना में घायल लोगों के त्वरित इलाज हेतु व्यवहारिक समाधान तलाशने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने वीडियो कन्फ्रेसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित पूर्व की जितनी भी मजिस्ट्रेट जांच अभी तक लंबित है, उसका दो माह के भीतर निस्तारण करें, साथ ही आगे से प्रत्येक मजिस्ट्रियल जांच को प्रत्येक हाल में तीन माह के भीतर निस्तारित करें। ऑटोमेटेड टेस्टिंग लेन, डाइविंग स्कूल और फिटनेस टेस्ट लेन बनवाने के लिए भूमि का तत्काल सर्वे किया जाए तथा इस संबंध में यदि निजी संस्थानों का भी सहयोग लिया जा सकता है तो उस पर भी विचार करें। उन्होंने अग्रिम निर्देश देते हुए कहा कि सभी जनपदों में ‘इन्स्टिट्यूट सोशल रेस्पोंसिबिल‘ इनिशिएटिव प्रारंभ करें जिसके अंतर्गत विभिन्न इंजीनियरिंग संस्थानों में अध्यनरत छात्रों, रिटायरमेंट इंजीनियरों अथवा समाज के सक्रिय और रचनात्मक नागरिकों को सड़क सुरक्षा के संबंध में बेहतरीन सुझाव और फीडबैक देने के लिए मंच प्रदान करें। इसके लिए उन्होंने प्रत्येक विकासखण्ड स्तर पर भी उपजिलाधिकारियों की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति गठित करने के निर्देश दिये जिसमें उपरोक्त सभी लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।
इस दौरान बैठक में पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकी, रंजीत सिन्हा, आयुक्त गढ़वाल रविनाथ रमन, प्रभार सचिव विनोद कुमार सुमन, वी. षणमुगम, आयुक्त परिवहन दीपेन्द्र कुमार चैधरी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

स्वतंत्रता दिवस को भव्य रुप से मनाने के निर्देश

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. सन्धु ने विभागीय अधिकारियों को स्वतंत्रता दिवस को भव्य तरीके से मनाने के लिए कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों को जो तैयारियां की जानी हैं उसको समय से संपादित करें। कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले लोग अनिवार्य रूप से मास्क पहनकर प्रतिभाग करेंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करेंगे। आमंत्रित किये गये लोगों को ई-पास जारी करें तथा विगत वर्षों में विभिन्न विभागों के कार्मिकों द्वारा किये गये बेहतर कार्यों तथा कोरोना काल में बेहतरीन कोरोना वारियर्स को सम्मानित करवाने के लिये सभी विभाग ऐसे लोगों की सूची खेल विभाग को सौंप दें।
उन्होंने निर्देश दिये कि सभी जिलाधिकारी सुनिश्चित करें कि स्वतंत्रता सेनानियों को उनके आवास पर जाकर सम्मानित किया जाये तथा मुख्य कार्यक्रम में जिन लोगों को सम्मानित किया जाना है उनका अनिवार्य रूप से आरटीपीसीआर टेस्ट करके ही उन्हें सम्मिलित किया जाये। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को कार्यक्रम से जोड़ने और एक भारत श्रेष्ठ भारत तथा आत्म निर्भर भारत का संदेश प्रसारित करने को कहा।
राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम परेड ग्राउंड में आयोजित होना प्रस्तावित हैं जहां पर मुख्यमंत्री द्वारा प्रातः 10 बजे ध्वजारोहण करके कार्यक्रम की शुरूआत करेंगे। तत्पश्चात परेड की सलामी और सम्मान समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित करेंगे। इस बार भी परेड में पैरामिलिट्री फोर्स, पी.ए.सी, नागरिक पुलिस, होमगार्ड आदि के दस्ते भाग लेंगे।
विभिन्न जनपदों में प्रभारी मंत्री ध्वजारोहण करके कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। सभी सरकारी और गैर सरकारी भवनों पर सम्बन्धित विभागाध्यक्ष, कार्यालयाध्यक्ष द्वारा प्रातः 9 बजे ध्वजारोहण किया जायेगा तथा जनपद देहरादून के कलक्ट्रेट में जिलाध्यक्ष द्वारा प्रातः 9ः30 बजे ध्वजारोहण किया जायेगा।
इस बार के मुख्य कार्यक्रम में कोविड-19 के चलते बच्चों का प्रतिभाग नहीं कराया जायेगा। एन.सी.सी को परेड में सम्मिलित नहीं किया जायेगा, सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किये जायेंगे तथा कवि सम्मेलन भी आयोजित नहीं किया जायेगा। विगत वर्ष की तरह स्वतंत्रता सेनानियों को उनके घर जाकर सम्मानित किया जायेगा। विभिन्न सार्वजनिक भवन में साफ-सफाई और उनको प्रकाशमान किया जायेगा और विभिन्न जनपदों में वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जायेगा।
महत्वपूर्ण स्थलों, चैराहों पर देश भक्ति गीतों का प्रसारण किया जायेगा। एक सप्ताह पूर्व से ही शहीद स्थल, पार्क व स्मरणीय व्यक्तियों के स्टैच्यू इत्यादि की साफ-सफाई की जायेगी तथा टी.वी, रेडियो, सोशल मीडिया के माध्यम से देश भक्ति के गीतों का प्रसारण किया जायेगा।
इस दौरान बैठक में अपर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल.एल. फैनई, पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल, सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, डॉ. रंजीत सिन्हा, एस.ए. मुरूगेशन, एच.सी. सेमवाल, प्रभारी सचिव डॉ. वी. षणमुगम, विनोद कुमार सुमन, महानिदेशक सूचना रणवीर सिंह चैहान सहित सम्बंधित विभागीय अधिकारी बैठक में उपस्थित थे तथा सभी जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े हुए थे।

मनमानी का केन्द्र बना उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में हुईं भर्तियों की शासन ने जांच बैठा दी है। शासन ने कुलसचिव से बिंदुवार सभी भर्तियों पर रिपोर्ट तलब की है। अपर सचिव राजेंद्र सिंह की ओर से कुलसचिव को भेजे गए आदेश में पिछले वर्षों में हुईं भर्तियों में की गई अनियमितता की जांच रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने विवि में पीआरडी के माध्यम से की जा रहीं भर्तियों और पिछले दो माह में पीआरडी से हुईं भर्तियों की रिपोर्ट भी मांगी है।

इसके अलावा नर्सिंग भर्ती, प्रोफेसर पदों पर सीधी भर्ती, विवि द्वारा अपने स्तर से शासन द्वारा नियुक्त कुलसचिव को हटाते हुए नए कुलसचिव की नियुक्ति, लेखा अधिकारी, सहायक लेखा अधिकारी के पद प्रमोशन के पद एवं वित्त विभाग के पद विज्ञापन जारी करने की स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।

शासन ने योग अनुदेशकों के पदों पर जारी रोस्टर को बदलने, माइक्रोबायोलॉजिस्ट के पदों पर भर्ती में नियमों का अनुपालन न करने, बायोमेडिकल संकाय व संस्कृत में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं पंचकर्म सहायक के पदों पर विज्ञप्ति प्रकाशित करने और फिर रद्द करने, विवि में पद न होते हुए भी संस्कृत शिक्षकों को प्रमोशन एवं एसीपी का भुगतान करने, बिना शासन की अनुमति बार-बार विवि द्वारा विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकालने और रोक लगाने, विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विवि द्वारा गठित समितियों के गठन की विस्तृत सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। विवि में पिछले दो माह में 60 से अधिक युवाओं पीआरडी जवानों को भर्ती कर दिया गया है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।

मनमानी का अड्डा बना आयुर्वेद विवि
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय मनमानी का अड्डा बन गया है। शासन से जिस अधिकारी को कुलसचिव बनाकर भेजा जाता है, उसे विवि प्रशासन की ओर से खुद ही हटाकर नए कुलसचिव की नियुक्ति की जाती है। भर्तियों में न रोस्टर का कुछ अता-पता है और न ही शासन का कोई संज्ञान। आखिरकार अब जांच के निशाने पर अब कई अधिकारी आ गए हैं।

आयुर्वेद विवि में वर्ष 2017 से लगातार नियमों की अनदेखी की जा रही है। पूर्व कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों के बाद से भी यहां मनमानी का सिलसिला जारी है। शासन ने 2017 से अब तक की नियुक्तियों को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। फिर चाहे प्रोफेसर की भर्ती हो या नर्सिंग स्टाफ की। हद तो तब है कि जो पद विवि में हैं ही नहीं, उन पदों पर प्रमोशन और एसीपी का भुगतान किया जा रहा है।
नियमानुसार भर्तियों के लिए शासन की अनुमति जरूरी होती है लेकिन विवि के अधिकारी किसी की अनुमति की जरूरत ही महसूस नहीं कर रहे हैं। हालात यह हैं कि खुद ही विज्ञप्ति जारी की जाती है और खुद ही उसे रद्द कर दिया जाता है। युवा भटक रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

पीआरडी से भर्तियों की बरसात
आयुर्वेद विवि में ताजा मामला पीआरडी के माध्यम से होने वाली भर्तियों का है। यहां पिछले दो माह में ही बिना शासन की अनुमति, बिना नियमों का पालन किए 60 से अधिक नौजवानों को पीआरडी के माध्यम से भर्ती कर दिया गया है। सवाल उठ रहे हैं कि विवि के अधिकारी किसी शह पर यह भर्तियां कर रहे हैं।

मनमानी का आलम यह है कि एक अधिकारी को बुलाया, कार्यमुक्त किया फिर रख लिया गया। इसी तरह आयुर्वेद विवि में आयुष विभाग से एक अधिकारी को पहले बुलाया गया, फिर कार्यमुक्त किया गया और फिर वहीं रख लिया गया। इस पूरे प्रकरण में शासन को संज्ञान में ही नहीं लिया गया है। ऐसे तमाम प्रकरण हैं, जिसमें मनमानी खुलकर सामने आ रही है।