नेता प्रतिपक्ष का सरकार पर हमला, बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रही है सरकार

कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के बीच उत्तराखंड सरकार ने आज से कक्षा 9 से 12 वीं तक के बच्चों के लिए स्कूल खोल दिए हैं। जबकि संक्रमण से बचाव के लिए अभी बच्चों का कोविड टीकाकरण तक शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में स्कूली बच्चों को बिना सुरक्षा कवच के स्कूल जाना पड़ रहा है। जिससे बच्चों में संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर संक्रमण का असर ज्यादा होने को लेकर विशेषज्ञ पहले ही आगाह कर चुके हैं। सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस सवाल खड़ा कर रही है। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि आधी-अधूरी तैयारियों के साथ स्कूल खोलने का फैसला बच्चों की जान से खिलवाड़ करने वाला है। हम स्कूल खोलने का विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन बच्चों को संक्रमण से बचाव के लिए स्कूलों में किस तरह की इंतजाम किए गए हैं। इसे लेकर पहले पूरी तैयारियां की जानी चाहिए थी। सभी स्कूलों में पूर्ण इंतजाम होने के बाद स्कूल खोले जाने चाहिए थे। प्रीतम सिंह ने कहा कि पहली लहर में कोरोना संक्रमण काबू में आने के बाद सरकार ने स्कूल खोलने का फैसला लिया था। लेकिन स्कूलों में बच्चों और अध्यापकों के संक्रमित होने पर फिर से स्कूल बंद करने पड़े। सरकार अपने पूर्व के फैसलों से सबक नहीं ले रही है। एक तरफ सरकार व स्वास्थ्य विभाग कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बच्चों को संक्रमण से बचाव व उपचार की तैयारियां कर रही है। वहीं, दूसरी तरफ आधी अधूरी तैयारियों के बीच जो स्कूल खोलने का फैसला लिया है हम उसका विरोध कर रहे हैं।

’शिक्षकों और कर्मचारियों का नहीं हुआ पूर्ण वैक्सीनेशन’

नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि सरकार ने आनन-फानन स्कूल खुलवाकर बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने का काम किया है। उनकी जानकारी में आया है कि स्कूलों के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों का अभी तक वैक्सीनेशन नहीं हुआ है। 20 फीसदी से अधिक शिक्षकों एवं कर्मचारियों का अभी वैक्सीनेशन भी नहीं हुआ है। सरकार ने किसी भी जिम्मेदारी से बचने के लिए कह दिया है कि स्कूल में उन छात्रों को ही प्रवेश मिल रहा है, जिनके पास अभिभावकों का सहमतिपत्र है। यानि आप समझ सकते हैं कि सारी जिम्मेदारी अभिभावकों की होगी। लंबे समय से बंद स्कूलों में साफ-सफाई न होने कई स्कूलों में झाड़ियां उग आई हैं। इन स्कूलों में सफाई नहीं की गई है। ऐसे में आप खुद समझ सकते हैं कि सरकार को बच्चों की कितनी चिंता है।

’बिना बजट कहां से होगा सैनिटाइज’

नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि उनकी जानकारी में आया है कि स्कूलों के पास सैनिटाइजेशन करवाने तक के लिए अलग से फंड की व्यवस्था नहीं है। शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को सैनिटाइज करने के आदेश तो जारी किए गए हैं, लेकिन इसके लिए बजट उपलब्ध नहीं कराया गया है। स्कूल खुलने से पहले विभाग को इसके लिए बजट की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

’स्कूलों में नहीं है शौचालय और पानी की सुविधा’

प्रतीम सिंह ने कहा कि राज्य के 1170 स्कूलों में शौचालय की व्यवस्था नहीं है। वहीं 2109 स्कूलों में बच्चों को पीने के पानी की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है और सरकार कह रही है कि उत्तरखंड खुले में शौच मुक्त हो चुका है। यही नहीं एक रूपये में हर घर नल, हर घर जल पहुंचाया जा रहा है। सरकार की पोल खुद सरकारी स्कूल खोल रहे हैं।

नई रोड धंसी, विस अध्यक्ष का चढ़ा पारा, मौके पर बुलाकर लगाई लताड़

एम्स रोड, ऋषिकेश में सामान से भरे ट्रक के रोड में धँस जाने की सूचना मिलते ही स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता विपुल सैनी को दूरभाष पर एम्स रोड में डामरीकरण में हुई अनियमिता के लिए खूब फटकार लगायी और कहा कि विभाग की इस घोर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने विभाग के अधिशासी अभियंता को निर्देशित करते हुए कहा है कि शीघ्र एम्स रोड का निरीक्षण कर खामियों का पता लगाया जाए और जानकारी दी जाए ताकि दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।
निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता उपेंद्र गोयल को मौके पर बुलाया गया और स्पीकर ने ट्रक फंसने की वजह पूछी। उपेंद्र गोयल ने कहा है कि सड़क के नीचे पानी की पाइपलाइन की वजह से यह घटना हुई है जिस पर स्पीकर ने कहा कि मोटर मार्ग निर्माण से पूर्व तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए थी ताकि इस प्रकार की घटना ना होती। इस दौरान स्पीकर ने सड़क मार्ग निरीक्षण करते हुए दोनों तरफ पानी से भरे हुए गड्ढों पर भी नाराजगी व्यक्त की।
ज्ञात हो कि नवंबर माह मे एम्स रोड के डामरीकरण का कार्य पूर्ण हुआ था। उस दौरान निर्माणाधीन कार्य का विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बीच-बीच में निरीक्षण भी किया गया और साथ ही विभाग के अधिकारियों को कार्य में गुणवत्ता के सख्त निर्देश दिए थे। मौके पर लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता उपेंद्र गोयल सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र सिंह नेगी आदि उपस्थित थे।

धामी के मुख्यमंत्री बनने से गढ़वाल से संगठन में प्रभावी चेहरा लाने की तैयारी

आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अब भाजपा पर सबकी नजरें टिकी हैं कि क्या सत्तारूढ़ पार्टी भी कांग्रेस की तर्ज पर रणनीति बना रही है। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, इस बात की खासी संभावना है कि भाजपा भी जल्द कार्यकारी अध्यक्ष के फार्मूले पर कदम आगे बढ़ा सकती है।
उत्तराखंड छोटा सा राज्य है मगर राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से यह हमेशा चर्चा में रहा है। यहां राजनीतिक उठापटक कितनी ज्यादा है, यह इस तथ्य से समझा जा सकता है कि राज्य गठन के बाद के 20 वर्षों में यहां 11 मुख्यमंत्री बन चुके हैं। पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में 11वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उत्तराखंड की पहली अंतरिम सरकार में दो, पहली निर्वाचित सरकार में एक, दूसरी में तीन, तीसरी में दो और अब चैथी सरकार में तीन मुख्यमंत्री।
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने करारी शिकस्त का स्वाद चखा और वह 70 सदस्यीय विधानसभा में 11 सीटों तक सिमट गई। लाजिमी तौर पर कांग्रेस फिर सत्ता में वापसी की कोशिशों में जी जान से जुटी हुई है। पार्टी में गुटबाजी और अंतर्कलह भी थमा नहीं है। ऐसे में कांग्रेस ने संगठन में संतुलन साधने के लिए पांच अध्यक्ष बनाने का फैसला किया। गणेश गोदियाल के रूप में ब्राह्मण चेहरे को प्रदेश अध्यक्ष की कमान दी गई। साथ में चार कार्यकारी अध्यक्ष की टीम भी, ताकि हर तबका संतुष्ट रहे।
साफ है कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के साथ चार कार्यकारी अध्यक्ष का फार्मूला सुविचारित रणनीति के तहत अमल में लाई है। इससे राजनीतिक गलियारों में इस बात के कयास लगने शुरू हो गए हैं कि भाजपा भी इसके जवाब में कोई इसी तरह का कदम उठा सकती है। इस बात को इसलिए भी बल मिल रहा है क्योंकि गढ़वाल मंडल के पर्वतीय जिलों और ब्राह्मण वर्ग से किसी नेता को संगठन में अहमियत देने की बात उठ रही है। गत मार्च में भाजपा नेतृत्व ने सरकार और संगठन, दोनों के मुखिया बदल दिए थे। त्रिवेंद्र सिंह रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए कुमाऊं मंडल से बंशीधर भगत प्रदेश अध्यक्ष थे।

गढ़वाल मंडल से कई पार्टी नेताओं के नाम की चर्चा
उस वक्त मुख्यमंत्री गढ़वाल से और राजपूत चेहरा तो प्रदेश अध्यक्ष कुमाऊं से और ब्राह्मण। अब भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मदन कौशिक प्रदेश अध्यक्ष हैं। ब्राह्मण हैं और हरिद्वार से विधायक। वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मूल रूप से पिथौरागढ़ जिले से हैं जबकि तराई में ऊधमसिंह नगर जिले की खटीमा सीट से विधायक हैं। धामी के जरिये भाजपा ने कुमाऊं मंडल के लिहाज से क्षेत्रीय व जातीय संतुलन तो बना लिया, मगर इससे गढ़वाल मंडल से एक कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की चर्चा ने जोर पकड़ लिया। इस कड़ी में भाजपा विधायक महेंद्र भट्ट, विनोद चमोली के साथ ही संगठन के लिहाज से अत्यंत तजुर्बेकार ज्योति गैरोला के नाम इन दिनों इंटरनेट मीडिया में खासी चर्चा में हैं।

सरकार में समान प्रतिनिधित्व हासिल होने का तर्क
हालांकि भाजपा के कई नेता इससे इत्तेफाक नहीं रखते। वैसे उनका तर्क भी वाजिब है कि सरकार में गढ़वाल मंडल को बराबर प्रतिनिधित्व हासिल है। 12 सदस्यीय धामी मंत्रिमंडल में आधे, यानी छह मंत्री गढ़वाल मंडल से हैं। इनमें से तीन अकेले पौड़ी जिले से हैं, हरक सिंह रावत, सतपाल महाराज और धन सिंह रावत। टिहरी से सुबोध उनियाल, देहरादून से गणेश जोशी और हरिद्वार से यतीश्वरानंद। कुमाऊं मंडल में ऊधमसिंह नगर जिले से मुख्यमंत्री के अलावा दो मंत्री यशपाल आर्य और अरविंद पांडेय आते हैं। इनके अलावा पिथौरागढ़ से बिशन सिंह चुफाल, अल्मोड़ा से रेखा आर्य व नैनीताल जिले से बंशीधर भगत।

शौर्य का प्रतीक मिग-21 लड़ाकू विमान पहुंचा दून

वायु सेना के शौर्य का प्रतीक मिग-21 लड़ाकू विमान अब गढ़ी कैंट के चीड़बाग में निमार्णाधीन युद्ध स्मारक (शौर्य स्थल) की शान बढ़ाएगा। रविवार को विमान यहां पहुंच गया है। जिसे विधिवत पूजा अर्चना के बाद युद्ध स्मारक पर उतारा गया।

छावनी परिषद देहरादून की मुख्य अधिशासी अधिकारी तनु जैन ने कैंट बोर्ड कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि देश के सैन्य इतिहास में देवभूमि के रणबांकुरों के शौर्य के असंख्य किस्से दर्ज हैं। उनके इस अदम्य साहस और बलिदान के प्रतीक के रूप में पूर्व राज्य सभा सदस्य तरुण विजय की पहल पर युद्ध स्मारक की नींव रखी गई थी। युद्ध स्मारक में मिग-21 रखने का प्रस्ताव करीब दो साल पहले कैंट बोर्ड की बैठक में पास हुआ था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया के विशेष प्रयास से विमान यहां पहुंच गया है।

इधर, पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं युद्ध स्मारक के अध्यक्ष तरुण विजय ने बताया कि देश के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए तैयार हो रहे शौर्य स्थल में नभ, जल और थल तीनों सेनाओं की निशानियां रखी जानी हैं। मिग-21 दून पहुंच गया है। युद्ध स्मारक की शान बढ़ाने के लिए चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) विपिन रावत की ओर से दो राइफल पहले ही दी जा चुकी हैं। इसके अलावा नौ सेना के साहस के प्रतीक के रूप में एक जहाज की सिफारिश भी रक्षा मंत्रालय से की गई है।

भारत में मिग 21 लड़ाकू विमान का इस्तेमाल 1964 से शुरू हुआ है। ये इकलौता ऐसा विमान है जिसका इस्तेमाल दुनियाभर के करीब 60 देशों ने किया है। मिग 21 एविएशन के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक संख्या में बनाया गया सुपरसोनिक फाइटर जेट है। पाकिस्तान के साथ हुए 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध में भी मिग 21 ने मुख्य भूमिका निभाई थी। मिग 21 लड़ाकू विमान की रफ्तार 2229 किमी प्रति घंटा की है। इसमें टर्बोजेट इंजन लगा हुआ है, जो विमान को सुपरसोनिक रफ्तार देता है।

नाबालिग से दुष्कर्म का इनामी आरोपित गिरफ्तार

एसओजी व पटेलनगर कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने मुंबई जाकर नाबालिग से दुष्कर्म के इनामी आरोपित को गिरफ्तार किया है। आरोपित 2017 में जेल से जमानत पर छूटने के बाद फरार हो गया था और पुलिस से बचने के लिए नाम बदलकर पंजाब व महाराष्ट्र में रह रहा था। रविवार को पत्रकारों से वार्ता में एसएसपी डा. योगेंद्र सिंह रावत ने बताया कि पटेलनगर कोतवाली में दर्ज एक दुष्कर्म के मामले में आरोपित मुनाजिर निवासी ग्राम बलवा महलगांव अररिया बिहार 2017 से जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद फरार चल रहा था।

न्यायालय में पेश न होने के कारण अदालत ने इसी वर्ष आरोपित को भगोड़ा घोषित किया था। आइजी गढ़वाल ने 2020 में आरोपित पर पांच हजार रुपये इनाम घोषित किया। आरोपित की तलाश में पुलिस ने उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन वह हर बार पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाता था। पुलिस को सूचना मिली कि मुनाजिर ठाणे (मुंबई) में है। 27 जुलाई को एसओजी की एक टीम को मुंबई भेजा गया तो पता लगा कि आरोपित अंजार नाम से पठानवाड़ी में रहकर मजदूरी कर रहा है। 29 जुलाई को पुलिस ने ठाणे में आरोपित को दहिसर चेक नाका, होटल सागर के सामने से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित को पुलिस दो दिन का ट्रांजिट रिमांड लेकर शनिवार रात को देहरादून पहुंची।

एसएसपी ने बताया कि वर्ष 2015 में मुनाजिर बंजारावाला से 12 साल की बच्ची को बहला-फुसलाकर बिहार ले गया। वहां आरोपित ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। कुछ दिन बाद पुलिस ने बच्ची को पानीपत हरियाणा से बरामद करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।

सीएम के जीरो पेंडेसी और सुशासन पर सख्त ध्यान देने के निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय से लेकर जिलों के नौकरशाहों को जीरो पेंडेसी और सुशासन पर सख्त ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। कहा कि जिलास्तर के कार्यों का हल मौके पर ही निकाला जाए। रविवार को मुख्यमंत्री धामी ने ट्वीट करते हुए अफसरों को जीरो पेंडेसी को गंभीरता से लेने की हिदायत दी। कहा कि अफसर एक कार्य योजना तहत ऐसे कार्यों को लें और नियत समय के भीतर उनका निराकरण करें। उन्होंने साफ हिदायत दी है कि जिलों के कार्य अनावश्यक रूप से शासन को नहीं भेजे जाएं और मौके पर इन्हें हल करें।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जिलास्तर से छोटे-मोटे काम शासन को भेजे जाने से जहां ऐसे कार्यों के निस्तारण में वक्त लग जाता है, वहीं संबंधित लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। उनके सामने भविष्य में यदि ऐसा कोई मामला आता है तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। कहा कि वे प्रदेश के हर क्षेत्र की समस्याओं से वाकिफ हैं उनका इरादा हर उत्तराखंडी के चेहरे पर मुस्कान लाना है। इसके लिए अफसर सुशासन पर जोर दें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड के प्रति भावनात्मक लगाव है। राज्य की समस्याओं से वे भी पूरी तरह से वाकिफ हैं और इनके हल और राज्य के विकास के लिए उनका लगातार मार्गदर्शन भी मिल रहा है। आल वेदर रोड, भारत माला, ऋषिकेश से कर्णप्रयाग से ट्रेन, चारधाम को ट्रेन से जोड़ने आदि महत्वकांक्षी योजनाएं इसके उदाहरण हैं।

प्रत्येक कार्य दिवस पर जनसमस्याएं सुनें
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि जिन योजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा, उनके लोकापर्ण की भी व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने अफसरों को प्रत्येक कार्य दिवस पर सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक जनता की समस्याएं सुनने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखण्ड में 16472 लाभार्थियों को दिये गए आवास स्वीकृति पत्र-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण के अंतर्गत चिन्हित लाभार्थियों को आवास स्वीकृति पत्र सौंपे। सीएम कैम्प कार्यालय परिसर स्थित जनता दर्शन हॉल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के लाभार्थियों को प्रथम किश्त की राशि डीबीटी द्वारा ऑनलाईन जारी की। उन्होंने कार्यक्रम में सौ से अधिक लोगों को आवास स्वीकृति पत्र वितरित किए।

साझेदार के तौर पर काम कर रही है सरकार
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में प्रदेश के लाभार्थियों को आवास बन जाने के बाद सामान आदि के लिए पांच-पांच हजार रूपए दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सबका साथ- सबका विकास- सबका विश्वास के ध्येय वाक्य के साथ सरकार नहीं बल्कि साझेदार के तौर पर काम कर रही है।

प्रधानमंत्री जी ने योजनाओं का लाभ गरीबों तक पहुंचाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की योजनाएं समाज में अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को सीधे लाभ पहुंचा रही है। पहले योजनाएं बनती थीं पर उसका लाभ पात्र लोगों तक नहीं पहुंचता था। परंतु प्रधानमंत्री जी ने दूरदर्शिता के साथ पहले सभी के जनधन योजना में खाते खुलवाए और अब उन खातों में डीबीटी द्वारा योजना की राशि सीधे लाभार्थी को दी जा रही है। स्वच्छ भारत मिशन, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि आदि योजनाओं से करोड़ों भारतीयों को लाभ मिला है।

केंद्र के सहयोग से उत्तराखण्ड में विकास को मिल रही गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का उत्तराखण्ड से विशेष लगाव है। केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य में अनेक महत्वपूर्ण विकासपरक योजनाएं चल रही हैं। सड़कों के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। जल्द ही देहरादून से दिल्ली केवल दो घंटे में जा पाएंगे। चार धाम परियोजना, भारतमाला परियोजना से विकास को नई गति मिल रही है। रेलवे का काफी विस्तार हुआ है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल पर तेजी से काम हो रहा है। टनकपुर-बागेश्वर का सर्वे ब्राडगैज पर करने का केन्द्र से अनुरोध किया है।

जलजीवन मिशन से मिलेगा सभी को स्वच्छ पेयजल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जलजीवन मिशन बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है। इसमें हर घर को नल से जल पहुंचाने पर काम कर रहे हैं। राज्य में केवल एक रूपए में गामीण घरों में पानी का कनेक्शन दे रहे हैं। स्वच्छ जल हर व्यक्ति को मिलना ही चाहिए और सरकार उसी दिशा में काम कर रही है।

अटल आयुष्मान योजना को और अधिक व्यावहारिक बनाया जाएगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रारम्भ की गई आयुष्मान योजना विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है। उत्तराखण्ड में इसमें प्रत्येक व्यक्ति को आच्छादित किया गया है। योजना को अधिक व्यावहारिक तरीके से लागू करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं ताकि हर गरीब इसका लाभ आसानी से उठा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2027 तक उत्तराखण्ड को विश्व प्रसिद्ध पर्यटन प्रदेश बनाने पर काम कर रहे हैं। राज्य सरकार कोविड से प्रभावित लोगों को राहत दे रही है। चारधाम यात्रा और पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए लगभग 200 करोड़ का पैकेज दे रहे हैं। इसी प्रकार हेल्थ सेक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए 205 करोड़ का पैकेज दिया जा रहा है। राज्य में 24 हजार सरकारी रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया आरम्भ की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के दृष्टिगत बेरोजगार युवाओं को भर्ती में एक साल की आयुसीमा में छूट प्रदान की गई है। जबकि एनडीए, सीडीएस, लोकसेवा आयोग की प्रारम्भिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले युवाओं को मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिये 50 हजार की धनराशि दी जायेगी। अगले चार माह में कोविड का पूर्ण वैक्सीनेशन का लक्ष्य लिया गया है।
कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद ने प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण के लाभार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि लाभार्थियों का चयन पूरी पारदर्शिता से किया गया है। सहायता राशि डीबीटी द्वारा लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर की जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को लगातार मॉनिटरिंग करने और योजना का लाभ अन्य पात्र लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं, महिलाओं, गरीबों और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए काम कर रही हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद को मिले।

प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण फेज 2
अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का शुभारम्भ वर्ष 2016 में किया गया। जिसका उद्देश्य सभी बेघर, कच्चे तथा जीर्ण-शीर्ण मकानों में रह रहे परिवारों को बुनियादी सुविधायुक्त पक्का आवास उपलब्ध कराया जाना है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के द्वित्तीय फेज में एस.ई.सी.सी- 2011 सर्वे में आवास की पात्रता सूची में सम्मिलित होने से छूटे हुए कुल 94286 परिवारों को आवास प्लस के माध्यम से चिन्हित किया गया है। जिसमें से 29142 अपात्र परिवारों को हटाने के पश्चात् वर्तमान में राज्य में कुल 65144 परिवार पीएमएवाई-जी हेतु पात्र पाए गए है। जिसमे कुल 2865 परिवार भूमिहीन (देहरादून 102, हरिद्वार 42, नैनीताल 68, पिथौरागढ़-3, ऊधमसिंह नगर-2662) है।
भारत सरकार द्वारा द्वितीय फेज में आवास प्लस सूची से वित्तीय वर्ष 2020-2021 हेतु 13399 लक्ष्य तथा वित्तीय वर्ष 2021-2022 हेतु 3073 लक्ष्य सहित कुल 16472 आवास निर्माण का लक्ष्य राज्य को आवंटित किया गया है। जिसमें कुल 2865 परिवार भूमिहीन (देहरादून 102, हरिद्वार 42, नैनीताल 68 पिथौरागढ़ 3, ऊधमसिंह नगर 2662) है।
उपरोक्त प्राप्त 16472 आवास के लक्ष्यों की पूर्ति हेतु राज्य को रूपये 226.99 करोड धनराशि की आवश्यकता होगी। जिसके सापेक्ष भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 के लक्ष्य 13399 के लिए प्रथम किश्त रू0 60,000ध्- की दर से केन्द्राश कुल रू0 35.39 करोड़ तथा राज्यांश कुल रू०. 3.93 करोड़ सहित कुल रू0 39.32 करोड अवमुक्त किए गए है। वर्तमान में राज्य स्तर पर विगत अवशेष रू. 47.74 करोड़ एवं उक्त अवमुक्त रू. 39.32 करोड़ सहित कुल रु. 87.06 करोड़ की धनराशि उपलब्ध है। जिसे लाभार्थियों के खाते में आन-लाईन अवमुक्त किया जा रहा है। द्वित्तीय किश्त की धनराशि लाभार्थियों के खाते में शीघ्र प्रेषित की जायेगी।

प्रति आवास 1 लाख 30 हजार की अनुदान राशि
अपर सचिव एवं आयुक्त ग्राम्य विकास वंदना ने बताया कि पीएमवाई-जी के तहत नये आवासों के निर्माण हेतु प्रति आवास अनुदान राशि 130,000.00 अनुमन्य है। जिसका भुगतान तीन किश्तों में यथा प्रथम किश्त रु 60,000, द्वित्तीय किश्त रु 40,000 एवं तृतीय किश्त रु 30,000 को ऑन-लाईन सीधे पात्र लाभार्थी के बैंक खाते में किया जाता है। इसके अतिरिक्त मनरेगा से लाभार्थी स्वयं के आवास निर्माण में 95 दिवस की मजदूरी प्रति दिवस रू. 204 की दर से कुल रू0 19.380ध्- प्राप्त कर सकता है तथा मनरेगा ध् स्वजल से शौचालय निर्माण हेतु रू. 12,000ध्- प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही लाभार्थी पेयजल सुविधा, उज्जवल गैस कनेक्शन विद्युत कनेक्शन की सुविधा भी प्राप्त कर सकता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना- ग्रामीण प्रथम फेज
प्रथम फेज की जानकारी देते हुए बताया कि एसईसीसी सर्वे 2011 में पात्र पाये गये 12662 परिवारों को आवास आंवटित किया गया है, जिसमें से 12425 आवासों को पूर्ण कराते हुए कुल रु. 169.87 करोड़ की धनराशि का व्यय किया गया है। प्रथम फेज के सभी 539 भूमिहीन परिवारों को भूमि पट्टा एवं आवास आवंटित किया जा चुका है। प्रथम फेज में कन्वर्जेन्स के माध्यम से लाभार्थी परिवार को स्वयं के आवास निर्माण में अकुशल मजदूरी हेतु मनरेगा से 95 मानव दिवस हेतु कुल 865811 मानय दिवस सृजित करते हुए कुल रु. 1510.68 लाख का व्यय किया गया है। इसके साथ ही मनरेगा ध् स्वजल से 12425 शौचालयों का निर्माण हेतु रु. 12,000ध्- की दर से कुल रु. 14.91 करोड़ का व्यय किया गया है। इसके अतिरिक्त कन्वर्जेन्स के तहत कुल 3920 परिवारों को उज्जवला गैस कनेक्शन की सुविधा प्रदान की गयी है। कुल 8113 लाभार्थियों को पेयजल सुविधा उपलब्ध करायी गयी तथा कुल 7733 लाभार्थियों को विद्युत कनेक्शन की सुविधा प्रदान की गयी है।

जिलों सहित कई शासन के अधिकारियों में फेरबदल

चुनावी मोड में दिख रही धामी सरकार ने सूबे के आला अफसरों को कसना शुरु कर दिया है। शनिवार की देर रात चार जिलाधिकारियों समेत 34 वरिष्ठ आईएएस अफसरों को इधर से उधर कर दिया गया। बता दें कि कुछ अरसे पहले भी बड़े पैमाने पर सचिवालय के अफसरों के महकमे बदले गए थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद जहां बीते दिन शासन के कार्यभार में बड़ा फेरबदल किया गया था तो वहीं अब जिलों के जिलाधिकारियों समेत अन्य आईएएस अधिकारियों के भी तबादले कर दिए गए हैं।
शनिवार देर रात जारी तबादले की लिस्ट में 34 आईएएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं जिसमें मुख्य रुप से स्मार्ट सिटी के सीईओ आशीष श्रीवास्तव को अपर सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनसे स्मार्ट सिटी के सीईओ की जिम्मेदारी लेकर आर राजेश कुमार को दे दिया गया है। यही नहीं, अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी को उच्च शिक्षा की भी जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
शासन से जारी सूची में राधा रतूड़ी, पंकज पांडेय, आर राजेश कुमार, हरिश्चंद सेमवाल, दीपक रावत, विजय कुमार यादव, विनोद सुमन, सविन बंसल. झरना कमठान, अतर सिंह और संजय टोलिया को अतिरिक्त महकमों का प्रभार देकर उनका कद बढ़ाया गया है।    
दिलीप जावलकर स्थानीय आयुक्त नई दिल्ली बनाया गया है जबकि उनसे सचिव धर्मस्व एवं संस्कृति। एसए मुरुगेशन को सचिव लघु सिंचाई की जिम्मेदारी से अवमुक्त कर दिया गया है। पंकज पांडे को सचिव गन्ना चीनी प्रबंधन निदेशक उत्तराखंड शुगर फेडरेशन की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। हरीश चंद्र सेमवाल को सचिव लघु सिंचाई तथा धर्मस्व एवं संस्कृति बनाया गया है।
चंद्रेश कुमार यादव को सचिव प्रभारी गन्ना चीनी तथा प्रबंध निदेशक उत्तराखंड शुगर फेडरेशन पद से अवमुक्त कर दिया गया है। भूपाल सिंह मनराल से सचिव प्रभारी सचिवालय प्रशासन का भार हटा लिया गया है। दीपक रावत को एक बार फिर कुंभ मेला अधिकारी हरिद्वार की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। विजय कुमार यादव को निदेशक कौशल विकास एवं प्रशिक्षण का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। जबकि आशीष श्रीवास्तव से स्मार्ट सिटी के सीईओ का प्रभार लेकर उसे देहरादून के जिलाधिकारी डॉ आर राजेश कुमार को दे दिया गया है।
विनय शंकर पांडे को जिलाधिकारी हरिद्वार के साथ ही उपाध्यक्ष हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण। विनोद कुमार सुमन को सचिव प्रभारी सचिवालय प्रशासन, सी रविशंकर से जिलाधिकारी हरिद्वार का जिम्मा ले लिया गया है। अपर सचिव वित्त चिकित्सा चिकित्सा शिक्षा तथा महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा की जिम्मेदारी दी। आनंद स्वरूप से जिलाधिकारी पिथौरागढ़ का प्रभार लेकर अपर सचिव ग्राम्य विकास आयुक्त ग्राम विकास तथा निबंधक सहकारिता का जिम्मा सौंपा गया है। आशीष कुमार श्रीवास्तव को अपर सचिव सूचना प्रौद्योगिकी विज्ञान एवं तकनीकी निदेशक बनाया गया है। नितिन सिंह भदोरिया से जिलाधिकारी अल्मोड़ा का प्रभार ले लिया गया है। आशीष चैहान को जिलाधिकारी पिथौरागढ़ की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
स्वाति भदौरिया को चमोली जिलाधिकारी की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। वंदना सिंह को अल्मोड़ा और हिमांशु खुराना चमोली का जिलाधिकारी बनाया गया है। आशीष भटगाई को मुख्य विकास अधिकारी उधमसिंह नगर, सवीन बंसल को परियोजना प्रबंधक, यूपीएपीयूआरपी बनाया गया है। रामविलास यादव से अपर सचिव समाज कल्याण का प्रभार ले लिया गया है। झरना कमठान को अपर सचिव समाज कल्याण तथा प्रबंध निदेशक बहुउद्देशीय वित्त विकास निगम बनाया गया है। प्रताप सिंह शाह को अपर सचिव राज्य संपत्ति राज्य संपत्ति अधिकारी और अरुणेंद्र सिंह चैहान को अपर सचिव वित्त बनाया गया है। अभिषेक रोहिल्ला बने आयुक्त नगर निगम देहरादून तथा परियोजना निदेशक उत्तराखंड शहरी विकास एजेंसी। योगेंद्र यादव को मिली अपर सचिव सैनिक कल्याण तथा सिंचाई की जिम्मेदारी।
देव कृष्ण तिवारी को अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी उत्तराखंड खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड,  प्रदीप सिंह रावत को अपर सचिव समाज कल्याण महिला कल्याण आयुक्त निशक्तजन एवं निदेशक महिला कल्याण बनाया गया है। सुरेश जोशी को सचिव समाज कल्याण निदेशक जनजाति निदेशालय एवं अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी उत्तराखंड खादी ग्राम उद्योग बोर्ड से अवमुक्त कर दिया गया है। अतर सिंह को अपर सचिव लोक निर्माण विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। वेरी राम को अपर सचिव सचिवालय प्रशासन तथा तकनीकी शिक्षा, और संजय सिंह टोलिया को मिली निदेशक जनजाति निदेशालय की जिम्मेदारी दी गई है।

मेहडकल काॅलेजों के सभी निर्माण कार्य 30 अक्टूबर तक पूर्ण करने के निर्देश

चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत राज्य के मेडिकल कॉलेजों में चल रहे निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश देते हुए विभागीय मंत्री डा. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों को सभी निर्माण कार्यों को 30 अक्टूबर तक पूर्ण करने को कहा। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में कार्य कर रही कार्यदायी संस्थाओं को भी चेतावनी देते हुए कहा कि जिन संस्थाओं का कार्य गुणवत्तापूर्वक व अनुबंध के अनुसार समय पर पूरा नहीं होगा उन्हें बदल दिया जायेगा।

विधानसभा स्थिति सभागार में आयोजित स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की बैठक में राज्य के आधा दर्जन मेडिकल कॉलेजों में चल रहे निर्माण कार्यों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई। जिसमें संबंधित मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों एवं कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों द्वारा विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। समीक्षा के उपरांत विभागीय मंत्री डा. धन िंसह रावत ने कहा कि जिन कॉलेजों में निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं कार्यदायी संस्था उन योजनाओं को शीघ्र विभाग को हस्तांतरण करें ताकि माननीय मुख्यमंत्री के द्वारा उन योजनाओं का लोकार्पण करवा कर कार्य शुरू किया जा सके। जो निर्माण कार्य गतिमान है उनको 30 अक्टूबर तक पूर्ण करने की डेडलाइन नियत की गई है।

डा. रावत ने कहा कि 30 अक्टूबर को माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दून मेडिकल कॉलेज के अंतर्गत निर्मित नई बिल्डिंग का लोकार्पण करेंगे। उन्होंने विभागीय अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्था के पदाधिकारियों को कॉलेज में अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिये। सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान शोध संस्थान में चले 331 करोड़ के विभिन्न निर्माण कार्यों को जल्द पूरा कर दो अक्टूबर को इसके लोकार्पण करने के निर्देश विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को दिये। इसके साथ ही उन्होंने राजकीय मेडिकल कॉलेज रूद्रपुर में 5926 लाख धनराशि से पूरी हो चुकी विभिन्न परियोजना के शीघ्र हस्तांतरण के निर्देश भी अधिकारियों को दिये। मेडिकल कॉलेज हरिद्वार के जल्द शिलान्यास के निर्देश देते हुए डा. रावत ने कहा कि कॉलेज के निर्माण कार्यों के लिए शासन ने 75 करोड़ की धनराशि अवमुक्त कर दी है। उन्होंने राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में 2459 करोड़ की धनराशि से बनने वाले 1000 सीट की क्षमता के ऑडिटोरियम का निर्माण 31 दिसम्बर से पहले करने का निर्देश अधिकारियों को दिये साथ ही उन्होंने कॉलेज में 207 लाख से निर्मित बर्न यूनिट को अगस्त माह तक पूरा करने को कहा।

बैठक में अपर सचिव स्वास्थ्य एवं मिशन निदेशक एनएचएम सोनिका, अपर मिशन निदेशक डा. अभिषेक त्रिपाठी, स्वास्थ्य महानिदेशक डा. तृप्ति बहुगुणा, निदेशक स्वास्थ्य डा. विनीता शाह, प्राचार्य दून मेडिकल कॉलेल डा. आशुतोष सयाना, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज श्रीनगर डा. सी.एम.एस. रावत, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा डा. चन्द्र प्रकाश भैसोड़ा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी डा. अरूण जोशी, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज रूद्रपुर प्रो.के.सी. पंत, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज हरिद्वार डा. प्रदीप भारती गुप्ता, डा. बी.एस.नेगी, डा. मयंक बडोला, डा. अमित, सीजीएम पेयजल निगम सुभाष चैहान, जीएम पेयजल निगम सी.एस. रजवार, जीएम ब्रिडकुल आर.पी.उनियाल, ईई आर.के. नेगी, नवनीत, एस.एच. जोशी, नवीन चन्द्रा, वी.वी. रावत, विनोद कुमार, अजय वशिष्ठ, सतीश चन्द्र सक्सेना सहित विभागीय अधिकारी तथा कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

आखिर किसे कहा, स्वास्थ्य मंत्री ने-नही सुधरे तो एक माह में अनुबंध खत्म

राज्यभर में पीपीपी मोड़ में संचालित अस्पतालों की समीक्षा बैठक में विभागीय मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित अस्पतालों ने एक माह के भीतर जन अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया तो सरकार ऐसे अस्पतालों के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए अनुबंध समाप्त करने की कार्यवाही सुनिश्चित करेगी। बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज सहित आधा दर्जन विधायकों ने प्रतिभाग करते हुए अपने विधानसभा क्षेत्रों में संचालित पीपीपी मोड़ अस्पतालों में क्षेत्रीय जनता को आ रही समस्याएं गिनाई। जिस पर विभागीय मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को ऐसे अस्पतालों की लगातार निगरानी करने तथा शासन को मासिक रिपोर्ट भेजने को कहा।

सूबे के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत ने विधानसभा स्थित सभागार में प्रदेश भर में पीपीपी मोड़ में संचालित अस्पतालों के संचालकों एवं विभागीय अधिकारियों की बैठक ली। जिसमें कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज सहित संबंधित क्षेत्रों के आधा दर्जन विधायकों ने प्रतिभाग किया। बैठक में विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्र में संचालित पीपीपी मोड़ अस्पतालों की समस्याएं रखी। विधायकों ने पीपीपी मोड़ में चल रहे अस्पतालों के गैरजिम्मेदाराना रवैये, डाक्टरों की कमी जैसे अन्य कई गंभीर मुद्दे बैठक में रखे। जिस पर विभागीय मंत्री डा. रावत ने पीपीपी मोड़ अस्पताल संचालकों को कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित अस्पतालों ने एक माह के भीतर अपनी कार्यप्रणाली में जन अपेक्षाओं के अनुरूप सुधार नहीं लाया तो सरकार ऐसे अस्पतालों के विरूद्ध अनुबंध समाप्त करने की कार्यवाही से गुरेज नहीं करेगी। डा. रावत ने बताया कि सरकार का मकसद पीपीपी मोड़ के माध्यम से स्थानीय स्तर पर जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। अस्पताल संचालकों की जिम्मेदारी है कि वह अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित कर लोगों की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को दूर करें। विधायकों एवं स्थानीय जनता के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए उन्होंने अस्पताल संचालकों को संपर्क अधिकारी नियुक्ति करने के निर्देश दिये। डा. रावत ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा वह पीपीपी मोड़ में संचालित अस्पतालों की लगातार निगरानी कर प्रत्येक माह रिपोर्ट शासन को भेजें। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि क्षेत्र भ्रमण के दौरान क्षेत्रवासियों ने पीपीपी मोड़ में संचालित अस्पताल बीरोंखाल में अव्यवस्था की शिकायतें की तथा स्वयं उन्होंने पाया कि अस्पताल में विशेषज्ञ डाक्टर व टेक्निशियन गायब मिले। यही नहीं क्षेत्रवासियों ने बताया कि काफी दिनों तक अस्पताल की ओपीडी भी बंद रही जिस कारण क्षेत्रवासियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, विधायक टिहरी धन सिंह नेगी, विधायक सल्ट महेश जीना, विधायक रामनगर दिवान सिंह बिष्ट, घनसाली विधायक शक्ति लाल शाह, पूर्व विधायक एवं नगर पालिका अध्यक्ष पौड़ी यशपाल बेनाम, सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी, अपर सचिव स्वास्थ्य एवं मिशन निदेशक एनएचएम सोनिका, स्वास्थ्य महानिदेशक डा. तृप्ति बहुगुणा, सीएमओ टिहरी संजय जैन, डा. ए.एस. चैहान, डा. रमेश कुमार, डा. शैलेन्द्र सिंह, डा. रमेश सिंह राणा, डा. आशीष गुसांई, डा. एमबी पंत, डा. पीयूष, डा. संतोष कुंवर, डा. गौरव रतूड़ी, डा. प्रतिभा कोहली, दीपक गोयल, अभिषेक दुबे, अम्बेश बाजपेय सहित विभागीय अधिकारी एवं पीपीपी मोड़ अस्पतालों के प्रतिनिधि उपस्थिति रहे।

विभाग की बेहत्तरी के लिए स्वास्थ्य मंत्री ने पूर्व महानिदेशकों से लिये सुझाव

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहत्तर बनाने एवं आम जनमानस तक विभाग की पहुंच बनाने के उद्देश्य से सूबे के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. धन सिंह रावत ने आज विधानसभा में सूबे के पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशकों की बैठक बुलाई। डा. रावत ने कहा कि सूबे की स्वास्थ्य सुविधाओं को और सुदृढ़ बनाने के लिए इस क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञों से सुझाव एवं सलाह ली जायेगी। जिसके लिए उन्होंने 150 दिनों का लक्ष्य विभागीय अधिकारियों को दिया है। इस क्रम आज उत्तराखंड के प्रथम महानिदेशक स्वास्थ्य डा. आई.एस.पाल सहित आधा दर्जन पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशकों ने बैठक में प्रतिभाग कर अपने सुझाव रखे।

बैठक में अपने अनुभवों को साझा करते हुए डा. पाल ने कहा कि राज्य के स्वास्थ्य केन्द्रों के बेहत्तर संचालन के लिए मेडिकल उपकरणों के रख-रखाव के साथ ही पैरामेडिकल स्टॉफ एवं टेक्निशियन्स को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि अस्पताल में आने वाले मरीजों का बेहत्तर उपचार किया जा सकेगा। डा. आर.पी. भट्ट ने कहा कि प्रदेशभर के अस्पतालों में फिजिशियन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों की तैनाती अति आवश्यक है। डा. डी.एस. रावत ने ब्लॉक एवं जिला अस्पतालों में आपसी समन्वय को जरूरी बताया। उन्होंने बच्चों में होने वाले गम्भीर रोगों की पहचान हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों को विशेष प्रशिक्षण दिये जाने पर बल दिया। डा. अमिता उप्रेति ने कहा कि आशा वर्कर्स को विशेष प्रशिक्षण देकर गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता अभियान में लगाया जा सकता है। डा. आशा माथुर ने कहा कि गर्भवती महिलाओं पर विशेष ध्यान देने के साथ ही चिकित्सालयों में प्रसव की सुविधाए बढ़ाई जानी चाहिए। इस मौके पर डा. आर.सी.एस. सयाना एवं डा. आर.सी. आर्य ने भी अपने सुझाव रखे।