मुख्यमंत्री ने पीएम को 300 करोड़ के प्रोजेक्ट शुरू करने की जानकारी दी

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिग में प्रतिभाग किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कोविड-19 एवं अनलॉक-1 के बाद की परिस्थितियों पर विचार विमर्श किया गया। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में उठाए गए कदमों पर भी विचार विमर्श किया गया।
वीडियो कांफ्रेंसिग के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मीडिया से अनौपचारिक बात करते हुए कहा कि इस दिशा में उत्तराखण्ड द्वारा काफी प्रगति की गई है। राज्य सरकार द्वारा लगभग 300 करोड़ के प्रोजेक्टों पर कार्य शुरू किया गया है। कोरोना के बाद लगभग 90 प्रतिशत उद्योगों ने कार्य करना आरम्भ कर दिया है। राज्य में तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आर्थिक गतिविधियों को बढाने के लिए काम किया गया है। राज्य के युवाओं एवं राज्य में लौटे प्रवासियों के लिये रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की गई है। योजना का लाभ आधिक से अधिक युवाओं को उपलब्ध हो इसके लिये जिलाधिकारियों को धनराशि उपलब्ध करायी गई है। कल ही 110 करोड़ रूपये जिलाधिकारियों को स्वीकृत की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मनरेगा में 23 हजार से अधिक नए रजिस्ट्रेशन कराए गए है। इनमें से 17 हजार से अधिक लोगों को काम भी उपलब्ध कराया गया है। मनरेगा में कुल 3 लाख 64 हजार श्रमिक नियोजित हैं। जबकि कृषि एवं इससे सम्बन्धित कार्यों के लिये 5 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। राज्य में पर्यटन को गति देने के लिये भी योजना बनायी जा रही है।

अमेजन प्राइम के माध्यम से बेचेंगे उत्पाद, उत्तराखंड के उद्योगों को मिलेगा फायदा

(एनएन सर्विस)
कोरोना महामारी के कारण उद्योगों के सामने आ रही बाजार की दिक्कत अब जल्द खत्म होगी। उद्योगों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए अमेजन प्राइम सामने आया है। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (आईएयू) के पहल के बाद अमेजन प्राइम प्रबंधन उद्योगों के प्रोडक्ट उसके माध्यम से बेचने पर सहमत हो गया है। इससे उत्तराखंड के उद्योगों को काफी फायदा हो सकता है। इसके साथ ही आईएयू ने बिजनेस प्लेटफार्म तैयार किया है। जिसके माध्यम से राज्य के उद्योग अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग कर सकेंगे।
आईएयू के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने बताया कि कोरोना संकट के चलते उद्योगों के सामने बाजार की चुनौती खड़ी हो गई है। इसके समाधान के लिए सोमवार को आईएयू की ओर से वर्चुअल सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें अमेजन प्राइम के सीनियर अधिकारी भी शामिल हुए। आईएयू की पहल पर अमेजन प्रबंधन उद्योगों के रजिस्ट्रेशन को तैयार हो गया है। जिसके बाद उद्योग अमेजन के माध्यम से और डायरेक्ट भी अपने प्रोडक्ट बेच सकते हैं।
इसके साथ ही इस दौरान एसोसिएशन की ओर से आईएयू बिजनेस प्लेट फार्म की घोषणा की है। इसके माध्यम से राज्य का कोई भी उद्योग अपने माल की मार्केटिंग कर सकता है। इससे उद्योगों को बड़ा फायदा होगा और उनके माल की अधिक बिक्री हो पाएगी। अभी तक यहां के उद्योगों में बनने वाले माल के बारे में लोगों को पता नहीं चल पाता है और जो माल यहां बन रहा है, लोग उसे बाहर से खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। कहा कि यह बिजनेस प्लेटफार्म उद्योगों को एक मार्केटिंग का प्लेटफार्म देगा।
पंकज गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में कई उद्योग ऐसे हैं जिनके प्रोडक्ट की डिमांड खत्म हो चुकी है लेकिन उद्योगों के सामने कोरोना के बाद कई नए अवसर भी उत्पन्न हो रहे हैं। खासकर जो माल चीन से आता था, उसे अपने देश या प्रदेश में भी बना सकते हैं। इसके लिए केंद्र सरकार भी कार्ययोजना तैयार कर रही है। इसलिए आईएयू मेडिकल डिवाइस, डिस्पोजेबल मैन्युफैक्चरिंग पर काम कर रहा है। इसके लिए सौ ऐसे आइटम की लिस्ट तैयार कर ली गई है। जिसकी टेक्नोलॉजी लेकर यहां आसानी से बनाया जा सकता है। इसमें लागत भी कम आएगी।
20 से 25 करोड़ में इस प्रकार के उद्योगों को लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देखा जा रहा है कि केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई तीन लाख करोड़ की आत्मनिर्भर इकोनॉमिक पैकेज का उत्तराखंड के उद्योग फायदा नहीं उठा रहे हैं। अभी तक मात्र दस हजार उद्योग ही इसका फायदा उठा रहे हैं। जबकि 75 हजार उद्योग इसका फायदा उठा सकते हैं। सेमिनार में इस पैकेज के बारे में उद्योगों को बताया गया और उन्हें पैकेज की सीमा खत्म होने से पहले इसका लाभ लेने की अपील की गई। सेमिनार में प्रदेशभर के उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बेटी ने निभाया बेटे का फर्ज, नम हुई आंखें

(एनएन सर्विस)
परिवार में बेटियां बेटों से कम नही है। वे घरेलू कामों से लेकर समाज के रीति रिवाजों में पुरानी परंपराओं को तोड़ रूढ़ीवादी प्रथाओं को नजर अंदाज कर अपने कर्तव्यों को निभाने आगे आने लगी हैं। मंगलवार को चंद्रेश्वर नगर मुक्ति धाम में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां एक बेटी ने अपनी मां के निधन पर अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की।
मंगलवार की सुबह करीब पांच बजे आवास विकास निवासी 80 वर्षीय छाया अरोड़ा लंबी बीमारी से जुझते हुए परलोक सिधार गईं। उनके दोनों पुत्रों का निधन पूर्व में ही हो चुका है। ऐसे में उनकी बेटी दीपा सहगल जो शादी के घ्बाद रूड़की रह रही थी। उन्होंने चंद्रेश्वर नगर मुक्तिधाम में हिंदू रीति रिवाज के साथ मां को मुखाग्नि दी। दिवंगत छाया अरोड़ा की पौत्री काजोल अरोड़ा ने बताया कि उनकी दादी को करीब 20 वर्षों से डायबिटीज की बीमारी थी। वर्तमान में वह हार्ट और किडनी की समस्या से भी जूझ रही थी। उनके एक पुत्र की मौत बीमारी के चलते तो दूसरे की सड़क दुर्घटना में हुई थी।

गोली लगने से गंभीर घायल महिला को एम्स ऋषिकेश ने दिया नया जीवनदान

(एनएन सर्विस)
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के ट्राॅमा सर्जरी विभाग की टीम ने हाल ही में गोली लगने से गंभीररूप से घायल एक महिला का जटिल ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई है। कूकेहाड़ी, हरिद्वार निवासी इस 45 वर्षीया महिला को बीती 29 मई की सुबह करीब 8 बजे किसी ने गोली मारकर गंभीररूप से घायल कर दिया था। परिजनों द्वारा घायल को एम्स ऋषिकेश के ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी में लाया गया, जहां ट्राॅमा सर्जरी विभाग की टीम ने तत्काल उसका परीक्षण किया व उपचार प्रारंभ किया।
चिकित्सकों के अनुसार घायल महिला के शरीर के बाएं कंधे,छाती, पेट, बाईं जांघ व बाएं हाथ की कलाई पर अनगिनत छर्रे लगे हुए थे, शरीर के तमाम हिस्सों में छर्रे लगे होने की वजह से लगातार खून का रिसाव हो रहा था। जांच के उपरांत पता चला कि पेट में छर्रे लगने की वजह से आंतों में सुराख हो गया है, जिसके चलते महिला का तत्काल जटिल ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। ट्राॅमा सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. कमर आजम की देखरेख में असिस्टेंट प्रोफेसर डा. अजय कुमार, सीनियर रेजिडेंट डा. रूबी कटारिया व डा. विशाल पाटिल इस जटिल सर्जरी को अंजाम दिया गया। उन्होंने बताया कि छर्रे लगे होने के कारण खाने की नली का निचला हिस्सा, पेट, छोटी व बड़ी आंतें व मलाशय में 50 से अधिक छेद पाए गए, जिनका सफलतापूर्वक उपचार किया गया।
चिकित्सकीय टीम द्वारा बताया गया कि इन्फिरियर मीजेंट्रिक आर्टरी नामक खून की धमनी के फटने के कारण शरीर में खून का रिसाव हो रहा था,जिसे उपचार कर बंद कर दिया गया। साथ ही मरीज के शरीर के कुछ अन्य हिस्सों में लगी चोटों का उपचार दवा द्वारा भी किया गया। करीब पांच घंटे में चिकित्सकों की पूरी जिम्मेदारी व कठिन परिश्रम से इस जटिल ऑपरेशन में सफलता हासिल कर ली गई। इसके बाद मरीज को दो दिन वेंटीलेटर पर चिकित्सकों की निगरानी में रखने के बाद एक सप्ताह तक भर्ती रखा गया। पूर्णरूप से स्वस्थ होने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस के मद्देनजर पूरे ऑपरेशन के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती गई, ऐसी स्थिति में चिकित्सकों ने पीपीइ किट, फेशिल्ड लगाकर इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
एम्स की ट्रामा सर्जरी टीम को इस तरह के सराहनीय कार्य के लिए एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी, डीन हॉस्पिटल अफेयर्स प्रो. यूबी मिश्रा ने बधाई दी गई है। एम्स संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रघ्वि कांत जी ने बताया कि इमरजेंसी व ट्राॅमा से संबंधित जटिल मामलों के लिए संस्थान के पास वेंटीलेटर सिस्टम व आईसीयू की मुकम्मल सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि गोली लगने जैसे मामलों में मरीजों में सबसे अधिक ब्लड की जरुरत होती है, लिहाजा हमारे पास संस्थागत ब्लड बैंक के माध्यम से 24 घंटे रक्त की सुविधा उपलब्ध है,जिससे मरीज की जान को बचाया जा सके व उसके इलाज में किसी तरह की दिक्कतें नहीं आएं।

मुख्यमंत्री ने भूमि खाताधारक के साथ पत्नी का नाम भी शामिल करने का दिया सुझाव

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में आज को मुख्यमंत्री आवास में ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग की तीसरी बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग द्वारा प्रस्तुत जनपद टिहरी की रिपोर्ट का विमोचन किया।
मुख्यमत्री ने कहा कि कोविड-19 के दृष्टिगत प्रदेशवासियों को रोजगार के अवसर प्रदान करना हमारी शीर्ष प्राथमिकताओं में हैं। यह भी आकलन किया जाय कि उत्तराखण्ड में जो प्रवासी उत्तराखण्डी आये हैं, उनमें से कितने लोग प्रदेश में रहकर ही रोजगार करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के लिए महिलाओं को बैंक से लोन लेने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए भूमि खाताधारक के साथ उनकी पत्नी का नाम भी शामिल किया जाय।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत प्रदेशवासियों को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराये जायेंगे। इसकी भी पूरी स्टडी की जाय कि किन क्षेत्रों में कार्य करने के लिए लोग अधिक रूचि दिखा रहे हैं। लोगों की आमदनी में कैसे वृद्धि की जा सकती है, किन क्षेत्रों में रोजगार की अधिक सम्भावना है। इसकी पूरी स्टडी की जाय। जो गांव अभी तक सड़क की सुविधाओं से नहीं जुड़ पाये हैं और जिन गांवों में पेयजल की समस्या है, उनको भी चिन्हित किया जाय। हमें स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ ही उसकी, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग की दिशा में भी विशेष प्रयास करने होंगे। ग्रामीण क्षेत्र की योजनाओं एवं जन कल्याणकारी योजनाओं की दिशा में और तेजी से कार्य करने की जरूरत है। चाल-खाल के निर्माण की दिशा में राज्य में तेजी से कार्य हो रहे हैं। जल स्रोतों के पुनर्जीवन की दिशा में हमें प्रयास करने होंगे।
उपाध्यक्ष ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग डॉ. एस.एस.नेगी ने अवगत कराया कि आयोग द्वारा अब तक तीन रिपोर्टें राज्य सरकार को प्रस्तुत की गई हैं, जिसमें पलायन को कम करने हेतु सिफारिशें दी गई हैं। आयोग द्वारा जनपद अल्मोड़ा के ग्राम पंचायतों में पलायन के विभिन्न पहलुओं पर अंतरिम रिपोर्ट जून 2019 प्रस्तुत की गई। सितम्बर 2019 में ग्राम्य विकास के क्षेत्र में योजनाओं एवं कार्यक्रमों का विश्लेषण एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए आयोग द्वारा सिफारिशें राज्य सरकार को प्रस्तुत की गई। जनपद पिथौरागढ़ के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक विकास को सुदृढ़ बनाने एवं पलायन को कम करने से संबंधित रिपोर्ट आयोग द्वारा अक्टूबर 2019 में सरकार के समक्ष प्रस्तुत की गई।
ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग द्वारा आज जनपद टिहरी गढ़वाल के ग्रामीण क्षेत्रों पर आधारित रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। आयोग द्वारा विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर बैठकें आयोजित की गई एवं स्थानीय नागरिकों से संवाद किया गया। जनपद टिहरी की रिपोर्ट में विकास खण्डवार सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण एवं रूझान, पलायन की स्थिति, वर्तमान ग्रामीण सामाजिक-आर्थिक विकास कार्यक्रमों के बारे में विश्लेषण तथा सिफारिशें की गई हैं।
बैठक में जानकारी दी गई कि आगामी वर्ष में जनपद चमोली, रूद्रप्रयाग एवं बागेश्वर के ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन और सबंधित आर्थिक एवं सामाजिक मुद्दों के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण कर सामाजिक-आर्थिक विकास को सुदृढ़ बनाने एवं पलायन को कम करने पर रिपोर्ट तैयार की जायेगी। कोविड-19 के प्रकोप के बाद उत्तराखण्ड राज्य में पर्वतीय जनपदों में घर लौटे प्रवासियों के आर्थिक पुनर्वास हेतु सिफारिशें राज्य सरकार को प्रस्तुत करना आयोग की प्राथमिकता है।

केदारनाथ आपदा में मृतक हुए लोगों के लिए सीएम ने की शांति प्रार्थना

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन (16 जून, 2013) केदारनाथ में भीषण आपदा आई थी जिसमें कई श्रद्धालुओं ने अपने प्राण गँवाए। त्रासदी के उस मंजर को पूरे सात साल बीत गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में श्री केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण किया गया। उनके मार्गदर्शन में दिव्य और भव्य केदारपुरी का नया स्वरूप आज हम सभी के सामने है। प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा आगे भी भगवान श्री केदारनाथ एवं श्री बद्रीनाथ धाम के विकास के लिए केन्द्र द्वारा हर सम्भव सहायता का आश्वासन दिया गया है। आपदा में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए मैं बाबा केदार से प्रार्थना करता हूँं।
वहीं, उत्तराखंड बीस सूत्रीय कार्यक्रम एवं क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष नरेश बंसल ने भी जून 2013 मे आज ही के दिन श्री केदारनाथ धाम में आई भीषण आपदा को याद किया। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन एवं सकारात्मक पहल व राज्य सरकार के संकल्प से श्री केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण किया गया। दिव्य और भव्य केदारपुरी का नया स्वरूप आज हम सभी के सामने है तथा कुछ कार्य प्रगती पर है। नरेश बंसल ने आपदा में दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए मैं बाबा केदार से प्रार्थना की व श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उन्होंने पुनः निर्माण मे लगे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व सभी सरकारी-गैर सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों को साधुवाद दिया जिन्होंने वैश्विक आस्था के धाम का त्रासदी के बाद पुनर्निर्माण किया है।

एम्म ऋषिकेश में कीमियोथेरेपी और डाइलिसिस की सुविधाएं फिर से बहाल, मिली राहत

(एनएन सर्विस)
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में डाइलिसिस और कीमियोथेरेपी के लिए मरीजों को अब इंतजार नहीं करना पड़ेगा। लॉकडाउन के चलते संस्थान में बीते मार्च माह में स्थगित की गई ओपीडी व अन्य कई सेवाएं अब धीरे धीरे सुचारू की जा रही हैं। ऐसे में डाइलिसिस व कीमियोथेरेपी से जुड़े मरीजों को भी जल्द यह सुविधाएं मिल सकेंगी। कोविड-19 के विश्वव्यापी प्रकोप के चलते एम्स संस्थान में बीते मार्च माह में वाह्य रोगी विभाग ओपीडी समेत कई अन्य नियमित स्वास्थ्य सेवाएं स्थगित कर दी गई थी। जिसकी वजह कोरोना वायरस के संक्रमण से एक-दूसरे लोगों का बचाव व सरकार की गाइड लाइन का शब्दशरू पालन सुनिश्चित कराना था। जिसके कारण कैंसर के मरीजों के लिए संस्थान में उपलब्ध कीमियोथेरेपी व किडनी संबंधी रोगों से ग्रसित मरीजों की डाइलिसिस आदि सुविधाओं को भी कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया गया था। इससे संबंधित रोगों से ग्रस्त मरीजों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था और वह इन सुविधाओं को लेकर लगातार संस्थान से संपर्क बनाए हुए थे। लिहाजा ऐसे मरीजों की परेशानी के मद्देनजर एम्स ऋषिकेश ने कीमियोथेरेपी व डाइलिसिस की सुविधाएं फिर से बहाल कर दी हैं।
गौरतलब है कि ऋषिकेश नगर व समीपवर्ती इलाकों में किडनी संबंधी रोगों से ग्रसित काफी संख्या में मरीज हैं, जो एम्स में इसके नियमित उपचार के लिए आते हैं। ऐसे में खासकर उन लोगों को डाइलिसिस की सुविधा फिर से नियमिततौर पर मिल सकेगी जो पहले से ही संस्थान में इस सुविधा का लाभ लेते रहे हैं। जबकि संस्थान में रेडियोथेरेपी की सुविधा लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में कुछ समय स्थगित कर दी गई थी, इसके बाद से इसे सुचारू कर दिया गया था, एम्स संकायाध्यक्ष अस्पताल प्रशासन प्रो. यूबी मिश्रा ने बताया कि इन दिनों एक दिन में डाइलिसिस के अधिकतम 9 और कीमियोथेरेपी के 12 मरीजों का ही उपचार हो पा रहा है। जिसके लिए एम्स परिसर में अलग से वार्ड स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि संस्थान में कीमियोथेरेपी और डाइलिसिस कराने के लिए आने वाले मरीजों को इससे पूर्व कोविड स्क्रीनिंग करानी होगी। जिसके बाद कोविड नेगेटिव रिपोर्ट आने पर ही वह इन स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने बताए कि ऐसे मरीजों को किसी तरह की असुविधा नहीं हो इसके लिए उन्हें एम्स की वेबसाइट पर ऑनलाइन अथवा संस्थान की टेलिमेडिसिन ओपीडी के लिए उपलब्ध कराए गए टेलीफोन नंबरों के माध्यम से पंजीकरण की प्रक्रिया को अपनाना चाहिए।

केन्द्र की योजनाओं के साथ ही राज्य सरकार की नीतियों का भी राजनाथ ने किया समर्थन

(एनएन सर्विस)
वर्चुअल रैली ‘‘उत्तराखण्ड जन संवाद’’ को संबोधित करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तराखण्ड, देवभूमि और वीर भूमि है। परिश्रम और पराक्रम की धरती है। जब उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण हुआ था तो वे संयुक्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उत्तराखण्ड के प्रत्येक क्षेत्र में उन्हें जाने का अवसर मिला है। कोविड-19 के दृष्टिगत उत्तराखण्ड में किए गए काम के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को बधाई देते हुए कहा कि जितनी सराहना की जाए कम है। भराड़ीसैण में जो कोविड केयर सेंटर स्थापित हुआ है, उसकी सराहना केन्द्र से वहां गई टीम ने भी की है। उत्तराखण्ड तेजी से विकास के मार्ग पर बढ़ रहा है। किसानों के कल्याण के लिए कदम उठाए हैं। कान्ट्रेक्ट फार्मिंग के एक्ट को बहुत उम्मीद से देखा जा रहा है। किसानों के लिए बीज पर सब्सिडी को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत किया है। गौरा देवी कन्याधन योजना भी प्रमुख कार्यक्रम है। पलायन को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। स्थानीय युवाओं और घर लौटे प्रवासियों के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू की गई है। प्रवासियों को वापस लाने में सराहनीय काम किया गया है।
उत्तराखण्ड में इन्वेस्टर्स समिट का महत्वपूर्ण आयोजन किया गया। भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस की नीति अपनाई गई। गैरसैण में ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाई गई है। अटल आयुष्मान योजना में 40 लाख गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं। काम बहुत सारे हुए हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में केदारनाथ पुननिर्माण का काम हुआ है। मानसरोवर के लिए अब बीआरओ ने लिपुलेख तक एक लिंक रोड़ का निर्माण कर दिया है। धारचूला-लिपुलेख मार्ग बनने से मानसरोवर के लिए एक अन्य मार्ग हो गया है जिससे इस यात्रा में 6 दिन का समय कम लगेगा।
केंद्रीय मंत्री ने वर्तमान सरकार के पिछले एक वर्ष में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि इन 6 वर्षों में देश ने काफी प्रगति की है। अंतर्राष्ट्रीय साख बढ़ी है। अर्थव्यवस्था को नौवें स्थान से 5 वें स्थान पर लाए हैं। देश में तेजी से प्रगति हो रही थी तब पूरे विश्व में कोविड-19 की चुनौति उत्पन्न हुई है। बहुत से विकसित देश पूरी तरह से प्रभावित हुए है। लेकिन प्रधानमंत्री ने जिस सूझबूझ के साथ कदम उठाए हैं, उसकी प्रशंसा पूरी दुनिया में हो रही है। स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत किया गया है। पीपीई किट बड़ी संख्या में बना रहे हैं।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष में केन्द्र सरकार ने बड़े ऐतिहासिक फैसले लिए। देश के रक्षा क्षेत्र को मजबूत किया। धारा 370 और 35 ए को खत्म कर नया इतिहास लिखा। राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया गया एवं कैबिनेट में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि प्रधानमंत्री द्वारा सही समय पर लिए गए सही निर्णय से भारत में कोरोना वायरस से उतना नुकसान नहीं हुआ जैसी कि सम्भावना जताई जा रही थी। लॉकडाउन से संक्रमण की दर को नियंत्रित किया गया। सम्पूर्ण देश में लॉकडाउन आसान निर्णय नहीं था। आज दुनिया प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लिए गये इस फैसले का अनुसरण कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में राज्य सरकार ने 3 साल से अधिक का कार्यकाल पूर्ण कर लिया है। अपने घोषणा पत्र में हमने जनता से जो वायदे किये थे, उनमें से 85 प्रतिशत वायदे पूर्ण कर लिये हैं। चाहे वह जीरो टॉलरेंस की सरकार चलाने का हो या किसानों को ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने का हो। पलायन को रोकने के लिए प्रदेश में ग्रामीण विकास एवं पलायन आयोग का गठन किया गया है। जिसके तहत प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों से पलायन को रोकने के लिए अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। हमने गैरसैंण को प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के दृष्टिगत लाखों प्रवासी राज्य में वापस लौटे हैं। उन प्रवासियों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए राज्य सरकार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 से निपटने के लिए राज्य में धन का कोई अभाव नहीं है। कोविड से बचाव के लिए राज्य सरकार ने पूरी तैयारी की है। कोविड केयर सेंटरों में 17 हजार बैड उपलब्ध हैं। प्रत्येक जनपदों में आईसीयू की व्यवस्था की गई है। वेंटिलेटर भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। पिछले चार माह में प्रदेश में 400 डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड से बचाव के लिए हमें सामाजिक दूरी, मास्क का उपयोग, एवं स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना होगा। मुख्यमंत्री ने कोरोना संक्रमित व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात अंतिम संस्कार के लिए लोगों से मानवीय दृष्टिकोण रखने का आह्वाहन किया। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सभी मानकों का पालन करते हुए पूरी सावधानी बरती जाती है, लोगों के मन में इसको लेकर कोई भी आशंका नहीं होनी चाहिए। हम मिलजुलकर कोविड से लड़ेंगे और आगे बढ़ेंगे।
इस वर्चुअल रैली में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, सांसद अजय भट्ट, सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, सांसद तीरथ सिंह रावत, सांसद अजय टमटा, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत और भाजपा के नेता जुडे़ थे।

वर्चुअल रैली में महापौर के साथ व्यापारिक संगठनों ने बड़ी संख्या में की शिरकत

(एनएन सर्विस)
नगर निगम ऋषिकेश की महापौर अनिता ममगाई ने कहा कि देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उत्तराखंड जन संवाद (वर्चुअल रैली) से भाजपा कार्यकर्ताओं में नए उत्साह का संचारी हुआ है। उन्होंने कहा कि इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और कोरोना काल में कार्यकर्ता संगठन की ओर से चलाये जा रहे जनकल्याणकारी कार्यक्रम का अधिक से अधिक लोगों को लाभ दिलाने का प्रयास करेंगे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उत्तराखंड जनसंवाद (वर्चुअल रैली) को नगर निगम के स्वर्ण जंयती सभागार में व्यापारिक संगठनो से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए निगम की महापौर ने सुना। कार्यक्रम को लेकर बड़ी स्क्रीन की व्यवस्था की गई थी जिसमें सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए सभी ने बेहद गंभीरता पूर्वक देश के रक्षा मंत्री का उदबोधन का सुना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के प्रथम वर्ष पूर्ण होने पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा आज उत्तराखंड के गढ़वाल संभाग को वर्चुअल रैली के माध्यम से संबोधित किया। महापौर ने बताया कि कोरोना संकटकाल में भाजपा की ओर से राष्ट्रीय नेतृत्व लगातार वर्चुअल रैली के माध्यम से कार्यकर्ताओं का उत्साह वर्धन कर रहा है। वर्चुअल रैली को सुनने के बाद महापौर ने कहा देश की सरहदों की सुरक्षा को लेकर रक्षा मंत्री द्वारा की गई बातों ने देशवासियों में भी उत्साह का सृजन किया है। महापौर ने उत्तराखंड के विकास कार्यों पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मुहर के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया।
इस दौरान राज्यमंत्री कृष्ण कुमार सिंघल, व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष नरेश अग्रवाल, अध्यक्ष घाट रोड पवन शर्मा, श्रवण जैन, प्रतीक कालिया, मोतीराम टुटेजा, पंकज गुप्ता, संदीप गुप्ता, अनिल ध्यानी, राजेश भट्ट, दिनेश अरोड़ा, चेतन शर्मा, संदीप शास्त्री, पंकज शर्मा, सुनील उनियाल, मनु कोठारी, कमलेश जैन, कमला गुनसोला, विजय लक्ष्मी भट्ट, राजू शर्मा, अनिकेत गुप्ता, हैप्पी सेमवाल, रूपेश गुप्ता आदि उपस्थित रहे।

अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर के छात्रों की ही परीक्षाएं होंगी आयोजित

(एनएन सर्विस)
राज्य के 11 सरकारी विश्वविद्यालयों में एक ही पैटर्न पर परीक्षाएं आयोजित होंगी। कुलाधिपति और राज्यपाल बेबी रानी मौर्य के निर्देशानुसार सभी विवि इसकी तैयारियों में जुट गये हैं। अभी तय किया जा रहा है कि परीक्षाएं ऑनलाइन होंगी या ऑफलाइन।
लॉकडाउन के बाद से सभी विश्वविद्यालय बंद हैं। वहीं, छात्र अपने घरों में ही ऑनलाइन क्लास के माध्यम से पढ़ रहे है। लॉकडाउन के चलते परीक्षाएं भी समय से शुरू नहीं हो पाईं। अब यह तय किया गया है कि फिलहाल अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर के छात्रों की ही परीक्षाएं कराई जाएंगी। बाकी छात्रों को 50 प्रतिशत पूर्व के अंकों और 50 प्रतिशत एसाइनमेंट के अंकों के आधार पर अगले सेमेस्टर में प्रवेश दिया जाएगा। 
अभी कोरोना संक्रमण का खतरा बना हुआ है। इस पर राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने पिछले दिनों सभी कुलपतियों से वार्ता की। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी 11 राज्य विश्वविद्यालयों में एक समान परीक्षा पैटर्न होना चाहिए। इसकी जिम्मेदारी उन्होंने सभी कुलपतियों को सौंप दी है।
माना जा रहा है कि 20 जून के बाद यह तय हो जाएगा कि परीक्षाएं ऑनलाइन होंगी या ऑफलाइन। अगर ऑनलाइन होंगी तो उसके लिए जरूरी इंतजाम क्या होंगे और अगर ऑफलाइन होंगी तो छात्रों को कैंपस में रोकने के क्या इंतजाम होंगे। कुछ विश्वविद्यालयों ने फिलहाल ऑफलाइन परीक्षाओं की तैयारी भी शुरू कर दी है।
एक समाचार पत्र के अनुसार, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेंद्र एस चैधरी ने कहा कि अगर अंतिम वर्ष के छात्रों की ऑफलाइन परीक्षाएं होती हैं तो वह अपने सभी कॉलेजों के छात्रों को कैंपस में 15 दिन पहले बुला लेंगे। इसके बाद वह अपना क्वारंटीन पीरियड पूरा करेंगे। इस दौरान अगर कोई दिक्कत हुई तो उस छात्र का इलाज कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके बाद जुलाई के आखिर में परीक्षाएं कराने की योजना है।

छात्र भी रख रहे अपनी मांग
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने जुलाई के दूसरे सप्ताह से परीक्षाएं प्रस्तावित की हैं। यहां छात्रों ने मांग उठाई है कि तमाम छात्र ऐसे हैं जो कि दूसरे राज्यों के हैं और इन दिनों अपने घर हैं। उनका अपने कॉलेज कैंपस पहुंचना खतरे से खाली नहीं है। लिहाजा, छात्र मांग कर रहे हैं कि या तो परीक्षाएं ऑनलाइन हों या फिलहाल टाली जाएं। उधर, एनएसयूआई की ओर से भी लगातार परीक्षाओं के बजाय सीधे प्रमोट करने की मांग की जा रही है।