महापौर की सक्रियता से नगर निगम ऋषिकेश बना सर्वश्रेष्ठ कोरोना वारियर

(एनएन सर्विस)
नगर निगम ऋषिकेश महापौर अनीता ममंगाई के नेतृत्व में लगातार कोरोना संक्रमण के काल में उत्कृष्ट कार्य किया जा रहा है। इसी के मद्देनजर उत्तराखंड शासन ने विभागीय रूप से नगर निगम ऋषिकेश को सर्वश्रेष्ठ कोरोना वारियर के रूप में चयनित किया है। जिलाधिकारी देहरादून की ओर से जानकारी देते हुए बताया गया कि कोरोना संक्रमण के बीच ऋषिकेश महापौर के निर्देशन में ऋषिकेश में सेनेटाइजेशन, साफ-सफाई और भोजन वितरण कार्य बेहतर ढंग से किया गया है। लगातार नगर निगम ऋषिकेश जिस तत्परता के साथ त्वरित कार्यवाही करते हुए व्यवस्थाएं संभाल रहा है वह प्रशंसनीय है।
नगर निगम ऋषिकेश को यह सफलता महापौर ममंगाई के नेतृत्व में मिली है। गौरतलब है कि महापौर लगातार सक्रिय रुप से फील्ड में उतरकर स्वयं मोर्चा संभाले हुए है। शासन ने इस बात का स्वयं संज्ञान भी लिया है। वहीं, महापौर ने यह सफलता नगर निगम के अधिकारियों और समस्त कर्मचारियों को समर्पित की है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी ने इसकी सूचना स्वयं उन्हें देर रात फोन पर दी। उन्होंने उनके नेतृत्व में किये जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए आगे भी इसकी तरह के कार्यों को करते हुए जनसेवक के सच्चे कार्यों को समर्पित रहने के लिए हौसला अफजाई भी की।
इस पर महापौर ने एक वीडियों संदेश जारी करते हुए सभी को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह सफलता आप सभी के सामूहिक प्रयास और कार्यों का नतीजा है। आप सभी हमारे सर्वश्रेष्ठ कोरोना वारियर हैं यह सम्मान में आप सभी को समर्पित करती हूं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी इससे अच्छा और उत्कृष्ट कार्य निरंतर किया जाएगा जिसमें सभी का सहयोग प्राप्त होगा।
इसके अलावा जिलाधिकारी देहरादून ने सिविल सोसायटी से कन्फेड्रशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स, उत्तराखण्ड के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष कोहली को भी कोरोना वॉरियर घोषित किया गया।

पर्यटन उद्योग को राहत देते हुए त्रिवेन्द्र सरकार ने लिए कई अहम फैसले, जानिए

(एनएन सर्विस)
सचिव पर्यटन एवं संस्कृति दिलीप जावलकर ने बताया कि कोविड-19 के दृष्टिगत प्रदेश में पर्यटन उद्योग पर गम्भीर प्रभाव पड़ा है। इसके तहत पर्यटन उद्योग से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े व्यक्तियों/इकाईयों/संस्थानों को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देशों के तहत राहत प्रदान की गई है। इससे लगभग 2.43 लाख लोग लाभान्वित होंगे।
उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग एवं अन्य विभागों में पंजीकृत पर्यटन व अन्य इकाईयों, जो पर्यटन अथवा राज्य सरकार के किसी अन्य विभाग से अपने व्यवसाय के संचालन हेतु सेवायें यथा-विद्युत कनेक्शन, पेयजल कनेक्शन प्राप्त करते हैं, अथवा व्यवसाय के संचालन हेतु राजकीय संस्था यथा थ्ैै।प्ए उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि के अन्तर्गत पंजीकृत कर्मियों एवं पर्यटन उद्योग में पंजीकृत फोटोग्राफरों, जिनकी जिलाधिकारियों के माध्यम से कराये गये त्वरित सर्वेक्षण के आधार पर प्रदेश में कुल संख्या लगभग 2.43 लाख है उन्हें प्रति कार्मिक रू 1,000- की दर से वन टाईम आर्थिक सहायता डीबीटी के माध्यम से वितरित किये जाने का निर्णय लिया गया है। इसका व्यय मुख्यमंत्री राहत कोष से वहन किया जायेगा। इसमें जहां पर्यटन विशेष क्षेत्र/गतिविधि समितियों (टिहरी विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण/गंगा नदी राफ्टिंग प्रंबन्धन समिति) के पास अपने संसाधन है तथा जिन रिवर गाइड व अन्य कार्मिकों को लाभान्वित किया जा चुका है। उन्हें उक्त श्रेणी में धनराशि प्राप्त नही होगी किन्तु विभाग द्वारा दी गयी राशि रूपये 1,000- से अन्यून होगी।
सचिव पर्यटन ने बताया कि वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना व दीन दयाल होम स्टे योजना के अन्तर्गत लाभार्थियों को वित्तीय वर्ष 2020-21 के प्रथम तिमाही (माह अप्रैल से माह जून 2020) के ऋण पर लिये जाने वाले ब्याज की प्रतिपूर्ति भी राज्य सरकार द्वारा सम्बन्धित जिलाधिकारियों के माध्यम से की जायेगी। इसका भी व्यय वहन मुख्यमंत्री राहत कोष से किया जायेगा।
उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग द्वारा के अन्तर्गत लगने वाले पंजीकरण/नवीनीकरण शुल्क को एक वर्ष की अवधि के लिए समाप्त/शून्य किया गया है। इसके साथ ही परिवहन विभाग द्वारा उपलब्ध करायी गयी सूचना के आधार पर पर्यटन से जुड़े बस/टैक्सी/मैक्सी कैब/ऑटो रिक्शा/विक्रम/ई-रिक्शा में योजित लगभग 1,01,185 कार्मिकों की जिलेवार सूची परिवहन विभाग द्वारा जिलाधिकारी को प्रति कार्मिक रूपये 1,000- की दर से वन टाईम आर्थिक सहायता डीबीटी के माध्यम से वितरित किये जाने हेतु उपलब्ध करायी जायेगी।
उन्होंने बताया कि संस्कृति विभाग 6675 सूचीबद्ध कलाकारों की सूची सम्बन्धित जिलाधिकारी को उपलब्ध कराने के साथ ही प्रति कलाकार रूपये 1,000 की दर से वन टाईम आर्थिक सहायता डीबीटी के माध्यम से वितरित किये जाने हेतु उपलब्ध करायी जायेगी। जिसे जिलाधिकारी अपने स्तर से डी.बी.टी के माध्यम से सम्बन्धित कलाकारों को वितरित करेंगे।
उन्होंने यह भी जानकारी दी है कि जहां संभव हो, स्थानीय निकाय पर्यटन सम्बन्धी इकाईयों को अपने स्तर से रजिस्ट्रेशन/नवीनीकरण शुल्क अथवा कर से एक साल तक राहत दिये जाने हेतु स्वतंत्र होंगे, जिस हेतु उनके द्वारा विधिसम्मत प्रक्रिया निर्धारित की जायेगी।

सरकार के साथ मिलकर संगठन ने लिया निर्णय, चार माह के कार्यक्रम तय

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सरकार और संगठन की समन्वय बैठक आयोजित हुई। बैठक में कोविड-19 के दृष्टिगत सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता को सरकार द्वारा जनहित में किए गए निर्णयों की जानकारी होनी आवश्यक है। सरकार के सवा तीन साल के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। उन निर्णयों को जनता तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सरकार और संगठन की संयुक्त रूप से है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता से जुड़े कल्याणकारी कार्यक्रमों को समयबद्ध और प्रभावी रणनीति के साथ जनता तक पहुंचाने की जरूरत है। इसमें सभी लोगों का सहयोग लिया जाना चाहिए। यह भी जरूरी है कि संगठन के निचले स्तर से लेकर ऊपर तक पदाधिकारियों और विधायकों व दायित्वधारियों को सरकार की उपलब्धियों और उनके विधानसभा क्षेत्रों में किए गए विकास कार्यों की जानकारी हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रभावी पहल की है। इसमें स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, प्रवासियों को स्वरोजगार के प्रयास, गरीबों और जरूरतमंदों को मुफ्त राशन, मनरेगा में मजदूरी को बढ़ाने, अटल आयुष्मान का दायरा बढाकर प्रदेश के बाहर के नामी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ दिए जाने, स्वरोजगार के लिए आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराने, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है ऐसे प्रवासियों के लिए भी सस्ते दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने सहित अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
बैठक में राज्य सरकार द्वारा किए गए विकास और जनहित के कार्यों को वर्चुवल कान्फ्रेंस और वर्चुवल मीटिंग के जरिए जनता तक पहुंचाने का भी निर्णय लिया गया, इसके लिए सांसद, मंत्रियों और पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सांपी गई। प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डा. धन सिंह रावत, मेयर सुनील उनियाल गामा, संगठन महामंत्री अजेय कुमार, महामंत्री राजू भंडारी व कुलदीप कुमार भी उपस्थित थे।

त्रिस्तरीय पंचायतों के लिए सरकार ने फिर खोला खजाना

(एनएन सर्विस)
चतुर्थ राज्य वित्त आयोग से भी सभी जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत, नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत को वित्तीय वर्ष 2020-21 की मासिक किस्त की 95 करोड़ से अधिक की धनराशि अवमुक्त की गई है।
15 वें वित्त आयोग की संस्तुतियों के क्रम में प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतों को प्राथमिक अनुदान के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2020-21 की प्रथम किस्त में 143.50 करोड़ रूपए की धनराशि अवमुक्त कर दी गई है। आज सचिव वित्त श्री अमित सिंह नेगी द्वारा इसका शासनादेश जारी किया गया है। इसमें राज्य के समस्त जिला पंचायतों को 21 करोड़ 52 लाख 50 हजार रूपए, क्षेत्र पंचायतों को 14 करोड़ 35 लाख रूपए, समस्त ग्राम पंचायतों को 107 करोड़ 62 लाख 50 हजार रूपए की धनराशि अवमुक्त की गई है।
इससे पूर्व चतुर्थ राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों पर राज्य सरकार द्वारा सभी जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत, नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत को वित्तीय वर्ष 2020-21 की मासिक किस्तों की धनराशि अवमुक्त कर दी गई है। इसके तहत राज्य की समस्त जिला पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2020-21 की तृतीय व चतुर्थ मासिक किस्त (माह-जून व जुलाई) के लिए 28 करोड़ 43 लाख 22 हजार रूपए की धनराशि अवुमक्त की गई है। राज्य की समस्त क्षेत्र पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2020-21 की चतुर्थ मासिक किस्त (माह- जुलाई) के लिए 7 करोड़ 23 लाख 78 हजार रूपए की धनराशि अवुमक्त की गई है। राज्य की समस्त ग्राम पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2020-21 की चतुर्थ मासिक किस्त (माह- जुलाई) के लिए 9 करोड़ 65 लाख 12 हजार रूपए की धनराशि अवुमक्त की गई है।
राज्य की समस्त नगर निगमों को वित्तीय वर्ष 2020-21 की चतुर्थ मासिक किस्त (माह- जुलाई) के लिए 22 करोड़ 10 लाख 97 हजार रूपए की धनराशि अवुमक्त की गई है। राज्य की समस्त नगर पालिकाओं को वित्तीय वर्ष 2020-21 की चतुर्थ मासिक किस्त (माह- जुलाई) के लिए 22 करोड़ 11 लाख 99 हजार रूपए की धनराशि अवुमक्त की गई है। राज्य की समस्त नगर पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2020-21 की चतुर्थ मासिक किस्त (माह- जुलाई) के लिए 5 करोड़ 35 लाख 17 हजार रूपए की धनराशि अवुमक्त की गई है। राज्य के तीन गैर निर्वाचित निकायों को वित्तीय वर्ष 2020-21 की चतुर्थ मासिक किस्त (माह- जुलाई) के लिए 17 लाख 17 हजार रूपए की धनराशि अवुमक्त की गई है।

महामारी के प्रभाव तक ही बढ़ा किराया रहेगा लागू, बस व्यवसायियों को दी राहत

(एनएन सर्विस)
उत्तराखंड सरकार ने बसों के किराये में दोगुने से अधिक वृद्धि कर दी है। किराये में वृद्धि महामारी अधिनियम के प्रभावी रहने तक लागू रहेगी। एक्ट हटते ही बढ़ा किराया कम हो जाएगा। कोविड-19 के चलते बसों में सोशल डिस्टेसिंग के मानकों के अनुसार 50 प्रतिशत यात्रियों को ही बैठाया जाना है। ऐसे में परिवहन व्यवसायी सरकार से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे थे। बसों का संचालन करने में भी दिक्कत आ रही थी। व्यवसायियों का कहना था कि आधी सवारी के किराये से तेल का खर्च भी नही निकल पा रहा है। ऐसे में उनके सामने रोजी रोजी का संकट उत्पन्न हो गया है। सरकार ने यह निर्णय परिवहन व्यवसाय को बचाने के लिए लिया है।
शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि कोविड-19 के कारण प्रदेश में बसों को सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों के अनुरूप 50 प्रतिशत सवारी ले जाने की अनुमति है। लेकिन बस संचालकों ने 50 प्रतिशत सवारी के साथ मौजूदा किराया दर पर वाहन संचालन में असमर्थता जताई। घाटा होने की स्थिति में वे बसें नहीं संचालित कर रहे थे। इससे यात्रियों को टैक्सी के माध्यम से आना जाना पड़ रहा था, जिससे जनता पर बोझ पड़ रहा था। ऐसे में सरकार ने बसों के किराये में वृद्धि का निर्णय लिया है। बसों का किराया दोगुना बढ़ाया जा रहा है, लेकिन यह तभी तक प्रभावी होगा, जबतक महामारी एक्ट राज्य में लागू है।

किराए की लिस्ट-सिटी बस में किराया दर 
पहले दो किमी    – 07 से बढ़ाकर 14 रु
दो से छह किमी   – 10 से बढ़ाकर 20 रु
छह से 10 किमी  – 15 से बढ़ाकर 30 रु
10 से 14 किमी  –  20 से बढ़ाकर 40 रु
14 से 19 किमी  – 25 से बढ़ाकर 50 रु
19 से 24 किमी  – 30 से बढ़ाकर 60 रु
24 से 29 किमी  – 35 से बढ़ाकर 70 रु
29 किमी से अधिक- 40 से बढ़ाकर 80 रु

नॉन-डीलक्स बस किराया
साधारण बसें (मैदानी क्षेत्र) – 1.05 से बढ़ाकर 2.10 रुपये प्रति किमी
साधारण बसें (पर्वतीय क्षेत्र)- 1.50 से बढ़ाकर 3 रुपये प्रति किमी

वातानुकुलीत श्रेणी में
थ्री बाय टू सीटर बसें – 1.25 गुणा वृद्धि
टू बाय टू सीटर बसें  – 1.9 गुणा वृद्धि
सुपर डीलक्स (वॉल्वो) – तीन गुणा वृद्धि

कैबिनेट का फैसला, 80 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए होंगे आरक्षित, जानिए

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक हुई। जिसमें मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में रेहड़ी, ठेली, चलती-फिरती दुकान लगाने वालों के लिए रोजगार से अवसर मुहैया करवाने का निर्णय लिया गया। महत्वपूर्ण निर्णय में केंद्र सरकार की बिना गांरटी के ऋण योजना के तहत अब त्रिवेन्द्र सरकार ऋण पर दो प्रतिशत ब्याज की सब्सिडी देगी।
इसका लाभ शहरी क्षेत्रों में 70 हजार लोगों को रोजगार देने में मिलेगा। शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि योजना के लिए सहकारी बैंक ही ऋण देंगे। वहीं, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत अब मोटर साइकिल टैक्सी भी चलेंगी। प्रथम चरण में 20 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। योजना में 60 हजार रुपये का ऋण मिलेगा।

80 प्रतिशत पद महिलाओं से भरे जाएंगे
प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड अधीनस्थ नर्सिंग (अराजपत्रित) सेवा नियमावली 2020 को मंजूरी दे दी है। अब नर्सों की सीधी भर्ती में पदों पर 80 प्रतिशत महिलाएं और 20 प्रतिशत पुरुषों की नियुक्ति की जाएगी। नियमावली बनने से सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कालेजों में नर्सों की नियमित भर्ती की जा सकेगी। सेवा नियमावली में नर्सों के खाली पदों की सीधी भर्ती में कुल पदों में 70 प्रतिशत पदों में नर्सिंग में डिप्लोमा धारक और 30 प्रतिशत पर डिग्री धारक उम्मीदवारों से भरे जाएंगे। नर्सों की भर्ती के लिए भारतीय नर्सिंग परिषद से मान्यता प्राप्त संस्थान से बीएससी नर्सिंग या मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से जनरल नर्सिंग एवं मिड वाइफरी, मनोरोग विज्ञान का डिप्लोमा होना अनिवार्य होगा। राजकीय चिकित्सालय या मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थान से एक साल का अनुभव होना चाहिए। बता दें कि नियमावली में संशोधन से सरकारी अस्पतालों में नियमित नर्सों की भर्ती की जा सकेगी। स्वास्थ्य विभाग को इस समय लगभग चार हजार से अधिक नर्सों की जरूरत है।

अन्य प्रमुख फैसले
– आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत गाइडलाइन सरल की। अब छोटे पुल, पेयजल लाइन, पैदल मार्ग, सड़क मार्ग, चैक डेम, स्कूल भवन, सिंचाई नहर और सुरक्षात्मक कार्य राज्य आपदा मोचन निधि से किए जा सकेंगे।
– बाजपुर चीनी मिल में एक एथनॉल प्लांट पीपीपी मोड में लगेगा, जिसकी क्षमता 100 केएलपीडी होगी। 
– सहकारिता नियमावली में संशोधन के तहत अब समिति को एक निश्चित धनराशि की जगह शुद्ध लाभ के आधार पर धनराशि देनी होगी।
– भीमताल केंद्रीय विद्यालय के लिए 0.25 हेक्टेयर भूमि आवंटन के लिए दो करोड़ रुपये माफ। 
– अल्मोड़ा कुंम्ट्रान लिमिटेड 1999 बंद हो जाने के बाद पांच कर्मचारियों को वीआरएस आवेदन को मंजूरी। वर्ष 2004 तक अवैतनिक मानते हुए सेवाकाल की गणना शामिल करने का निर्णय। 
– कुंभ 2021 में श्रद्वालुओं एवं संतों की व्यवस्था के लिए शौचालय इत्यादि के लिए धन प्रबंधन का निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री को दिया गया।
– उत्तराखंड मोबाइल टावर नियमावली के तहत नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति पोल (खंभा) 500 रुपये किराये की जगह शहरी क्षेत्रों में 100 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 50 रुपये किराया लिया जाएगा। 
– केंद्र के जीएसटी के संशोधन को राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
– खाद्य विभाग में उपविपणन अधिकारी के लिए सेवा नियमावली बनाई गई।
– राज्य कोषीय उत्तरदायित्व बजट प्रबंधन के लिए जीडीपी का तीन प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत करने की छूट दी गई।
– नर्स भर्ती नियमावली को मंजूरी दी गई।
– उत्तराखंड ऑन डिमांड परिवहन सुविधा के लिए नियमावली बनाई गई। मोबाइल एप से टैक्सी बुक की जा सकती है।

स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल बढ़ाने राज्यपाल पहुंची दून अस्पताल

(एनएन सर्विस)
राज्यपाल बेबी रानी मौर्य गुरुवार को कोविड-19 के उपचार से सम्बंधित व्यवस्थाओं का जायजा लेने दून अस्पताल पहुँची। उन्होंने वहाँ उपस्थित वरिष्ठ चिकित्सकों और स्टाफ से बातचीत की। राज्यपाल ने ऐसे मरीजों की व्यवस्थाओं एवं ओपीडी के बारे में भी पूछा जो कोविड संक्रमण से प्रभावित नहीं हुए हैं। राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान में कोविड मरीजों के लिए सबसे कारगर दवा सोशल वैक्सीन है अर्थात प्रेम और सहानुभूति से उनका इलाज किया जाय। राज्यपाल ने आईसीयू में भर्ती कोविड मरीजों से वीडियो काॅल पर बात की। उन्होंने मरीजों का मनोबल बढ़ाया। राज्यपाल ने अस्पताल की नर्सों का उत्साह बढ़ाते हुए उनसे उनकी समस्याओं के बारे में पूछा। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए कि नर्सों के हितों और उनकी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाय। राज्यपाल ने कोविड वार्ड से निकलने वाले बाॅयो मेडिकल कूड़े के निस्तारण की जानकारी माँगी। अस्पताल प्रबंधन द्वारा बताया गया कि कूड़ा बहुत सावधानी के साथ एकत्र कर रूडकी के कूड़ा दहन संयंत्र में जलाने के लिए भेजा जाता है। राज्यपाल ने कूड़ा निस्तारण की सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश देते हुए कहा कि इसमें कोई भी लापरवाही नहीं होनी चाहिए। राज्यपाल ने दून मेडिकल काॅलेज के प्रधानाचार्य से अस्पताल की मौजूदा सुविधाओं और व्यवस्थाओं पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की। राज्यपाल ने ग्राफिक एरा स्थित क्वारंटीन सेंटर का भी स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने क्वारंटीन केन्द्र में तैनात स्टाॅफ से बात की।

दून मेडिकल काॅलेज के डाॅ आशुतोष सयाना ने बताया कि राजकीय दून मेडिकल काॅलेज में अभी तक कुल 391 कोरोना पाॅजिटिव मरीज भर्ती हुए हैं। कुल 73 मरीज आईसीयू में भर्ती हुए हैं जिनमें 27 कोरोना पाॅजिटिव तथा 46 मरीज संभावित श्रेणी में पाये गये हैं। उन्होंने बताया कि कैन्सर मरीजों की कीमोथैरपी कोरोनेशन अस्पताल में की जा रही है। 6,874 मरीजों की कोविड लैब में कोराना टेस्ट की जांच की गयी। 115 मरीज डायलिसिस के लिए भर्ती हुए हैं जिनमें कोविड संभावित 6 मरीज हैं। उन्होंने जानकारी दी कि आज अस्पताल में कुल 78 मरीज भर्ती हैं जिनमें से 64 मरीज कोरोन पाॅजिटिव हैं तथा 14 मरीज संभावित हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में अस्तपाल में 17,178 फेस मास्क, 6,420 हैण्ड सेनिटाइजर, 5,253 एन95 मास्क, 3,628 पी.पी.ई किट तथा 13,956 हाईड्रोक्सी क्लोरो क्वीन टैबलेट उपलब्ध हैं। वर्तमान में अस्तपाल में मरीजों हेतु 263 बैड उपलब्ध हैं जिनमें कोविड पाॅजिटीव मरीजों हेतु 168 बैड, सस्पेक्टेड केस हेतु 60 बैड एवं 35 आई.सी.यू बैड उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि महिला अस्पताल में कुल 84 डिलिवरी की गई जिनमें से 06 कोरोना पाजिटिव हैं एवं 78 संभावित हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने जानकारी दी कि अस्तपाल में बेसिक लाॅईफ सपोर्ट प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। हेल्पलाइन काॅल के माध्यम से लगभग 15000 लोगों को कोरोना से संबंधित जानकारी दी गई एवं प्रत्येक दिन ई-संजीवनी ओपीडी के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
इस अवसर पर सीएमओ डाॅ0 बी.सी.रमोला, सी.एम.एस डाॅ0 के.के.टम्टा, डाॅ0 एन.एस.खत्री, राजभवन के वरिष्ठ फिजिशियन डाॅ0 महावीर सिंह आदि उपस्थित थे।

मरीजों में संक्रमण की दर बढ़ी लेकिन ठीक होने की दर में भी बड़ा सुधार

(एनएन सर्विस)
राज्य में बुधवार को कोरोना के 81 नए मरीज मिले। अब कुल मरीजों की संख्या 2023 हो गई है। वहीं 38 मरीजों को अस्पतालों से छुट्टी भी मिल गई है। कोरोना वायरस को हराकर ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 1254 पहुंच गई है। जबकि 717 मरीजों का राज्य के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत ने बताया कि बुधवार को अल्मोड़ा में 14, देहरादून में 35, नैनीताल में आठ, पौड़ी में एक, टिहरी में नौ, रुद्रप्रयाग में दो और उत्तरकाशी, हरिद्वार में 3, बागेश्वर 5, यू एस नगर 3 मरीज में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। बुधवार को कुल 656 सैंपल की रिपोर्ट आई जिसमें से 81 पॉजिटिव जबकि 613 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। अपर सचिव ने बताया कि विभिन्न जिलों के 1254 मरीज ठीक होकर अस्पतालों से घर चले गए हैं। जबकि 717 का इलाज अभी चल रहा है। राज्य में कोरोना मरीजो के दोगुना होने की दर 26 दिन के करीब पहुंच गई है। जबकि रिकवरी रेट भी तकरीबन 62 प्रतिशत हो गया है।
लेकिन देखा जा रहा है कि मरीजों में संक्रमण की दर भी लगातार बढ़ रही है। राज्य में कोरोना के मामले बढ़ने के साथ ही कंटेनमेंट जोन भी बढ़ रहे हैं और अब इनकी संख्या 86 हो गई है। अकेले हरिद्वार जिले में सर्वाधिक 51 कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं। जबकि देहरादून में 21 कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं।

ऋषिकेश मंडी 24 जून तक के लिए सील

(एनएन सर्विस)
ऋषिकेश क्षेत्र में अब कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में कोरोना वायरस ने पैर पसार लिए हैं। यहां मंडी समिति अध्यक्ष विनोद कुकरेती सहित छह अन्य लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। प्रशासन इन सभी के प्रथम और द्वितीय संपर्क में आने वाले लोगों की खोजबीन कर रहा है।
देहरादून निरंजनपुर स्थित कृषि उत्पादन मंडी समिति में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ रहे मामलों को देखते हुए कृषि उत्पादन मंडी समिति ऋषिकेश में रैंडम सैंपलिंग ली गई थी। 13 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ऋषिकेश कृषि मंडी समिति में 97 लोगों के सैंपल लिए थे। जिनमें मंडी समिति अध्यक्ष, कर्मचारी, व्यापारी, ट्रांसपोर्टर और पल्लेदार शामिल थे। इन सभी के सैंपल को जांच के लिए चंडीगढ़ लैब भेजा गया था। वहां से जांच रिपोर्ट बुधवार रात 9 बजे पहंुची है। इस रिपोर्ट में मंडी समिति परिसर में सात लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। यह सभी लोग एसिम्टोमेटिक यानी बिना कोरोना लक्षण वाले पाए गए हैं। इन सात लोगों में मंडी समिति अध्यक्ष विनोद कुकरेती सहित छह अन्य व्यापारी शामिल है। मंडी समिति अध्यक्ष ने फोन पर इस बात की पुष्टि की है।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में ऋण की उपब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश

(एनएन सर्विस)
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति उत्तराखण्ड की विशेष बैठक आयोजित हुई। बैठक में वार्षिक ऋण योजना 2020-21 पर चर्चा करते हुए स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को संचालित किये जाने की पर्याप्त संभावनाओं पर विचार करते हुए वार्षिक ऋण योजना को बढ़ाकर 25 हजार 793 करोड़ की संशोधित वार्षिक ऋण योजना अनुमोदित की गई। ज्ञातव्य है कि पूर्व में यह वार्षिक योजना 23 हजार 980 करोड़ की स्वीकृति थी जिसे राज्य में स्थानीय प्रवासी युवाओं के स्वरोजगार की संभावनाओं के आर्थिक गतिविधियों को संचालित किये जाने की संभावना को देखते हुए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति उत्तराखण्ड द्वारा डी.एल.आर.सी/डी.सी.सी द्वारा अनुमोदित वार्षिक ऋण योजना में विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के लक्ष्यों को बढ़ाकर योजना का आकार बढ़ाया गया, तथा इस योजना में 1 हजार 913 करोड़ रूपये की वृद्धि की गयी।
मुख्य सचिव द्वारा चर्चा के दौरान बैंकर्स एवं अधिकारियों को निर्देश दिये कि उत्तराखण्ड सरकार द्वारा घोषित मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में व्यक्तिगत ध्यान देकर अधिक से अधिक लाभार्थियों को लाभ पहुंचाया जाए। बैठक में बताया गया कि युवा उद्यमियों द्वारा डेरी एवं कुक्कुट पालन के क्षेत्र में अधिक उत्साह दिखाया जा रहा है। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागाध्यक्ष को निर्देश दिये कि युवा उद्यमियों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों को तकनीकी दृष्टि से मदद कराकर बैंकर्स से स्वीकृत कराने में सक्रिय सहयोग दें।
मुख्य सचिव द्वारा जिला स्तरीय पुर्ननिरीक्षण समितिध्जिला परामर्शदात्री समिति की प्रगति की समीक्षा के दौरान एजीएम राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति एसबीआई रमेश कुमार पंत द्वारा बताया गया कि जनपद देहरादून, नैनीताल एवं रुद्रप्रयाग जिलों में मई माह में बैठक नहीं हो पायी है बाकी सभी जिलों में जिला स्तरीय पुर्ननिरीक्षण समितिध्जिला परामर्शदात्री समिति की बैठक की जा चुकी है। इस पर मुख्य सचिव द्वारा अवशेष तीनों जनपदों में शीघ्र बैठक कराये जाने हेतु वित्त सचिव सौजन्या को सम्बन्धित जिलाधिकारियों से समन्वय कर क्रियान्वित करने के निर्देश दिये गये।
बैठक में अपर मुख्य सचिव एम.एस.एम.ई मनीषा पंवार, सचिव कृषि एवं पशुपालन आर. मीनाक्षी सुन्दरम, वित्त सचिव सौजन्या, अपर सचिव सोनिका, इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता, उप महाप्रबंधक एस.बी.आई बी.एल सैनी तथा सहायक महाप्रबंधक एन.एस रावत, सी.जी.एम नाबार्ड सुनील चांवला, डीजीएम आर.बी.आई तारिका सिंह, क्षेत्रीय निदेशक आर.बी.आई राजेश कुमार सहित समस्त विभागों के सचिव एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।