बेटी की चींख सुनकर आयें परिजनों के उड़े होश

देशभर से आ रही चोटी कटने की तमाम खबरों के बीच अब बिहार और उत्तराखंड से भी चोटी काटे जाने की खबरें आ रही हैं। बिहार में पिछले 24 घंटे के अंदर चोटी कटने के दो मामले और उत्तराखंड से भी एक मामला सामने आया है। राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, एमपी और यूपी के बाद अब बिहार और उत्तराखंड का नाम भी इन घटनाओं से जुड़े राज्यों की फेहरिस्त में शामिल हो गया है।
पहली घटना बिहार के मोतिहारी जिले की है। जहां राधिका नाम की लड़की बीती रात घर के बाहर सो रही थी। उसी बीच रहस्यमय तरीके से उसकी चोटी कट गई। सुबह राधिका ने अपनी चोटी कटी हुई देखी और शोर मचाना शुरू किया। इस घटना के बाद राधिका का परिवार और पूरा गांव दहशत में है।
उत्तराखंड के सहसपुर में भी फरजाना नाम की एक लड़की की चोटी कटने का मामला सामने आया है। बीती रात लगभग 12 बजे फरजाना की चीख सुनकर घर वालों की आंख खुल गई। परिजन फरजाना के पास पहुंचे तो देखा कि उसकी कटी हुई चोटी बिस्तर पर ही पड़ी थी। इस घटना से फरजाना काफी डरी हुई है।
शनिवार को एक बार फिर दिल्ली से चोटी काटे जाने की दो खबरें आईं हैं। चंदर विहार में बीती रात नीरज नामक महिला तेज सिरदर्द के बाद बेहोश हो गई। सुबह जब उसे होश आया तो उसकी चोटी कटी हुई थी। वहीं जामिया नगर इलाके में एक 13 साल की बच्ची की भी बीती रात चोटी कट गई।

एक्जीक्यूटिव इंजीनियर की अनुमति के शटडाउन नही होगा

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को सचिवालय में ऊर्जा एवं वैकल्पिक ऊर्जा विभाग की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग को गत वर्ष के राजस्व में न्यूनतम 200 करोड़ रूपये की वृद्धि करने का लक्ष्य दिया। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग को प्रदेश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिये। उन्होने कहा कि जे0ई0 और ए0ई0 ही नही बल्कि एक्जीक्यूटिव इंजीनियर भी फील्ड में दिखें। विद्युत चोरी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाय और विशेष रूप से बड़े बिजली चोरों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाय। बिजली चोरी रोकने तथा राजस्व वृद्धि के लिये जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी जो वर्षो से एक ही जगह पर जमे हों उनका स्थानांतरण किया जाय। बिना एक्जीक्यूटिव इंजीनियर की अनुमति के शटडाउन न किया जाय। जब भी किसी आवश्यक कार्य के लिए बिजली शटडाउन लेना हो तो उसका जनता में व्यापक प्रचार किया जाए। अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही से बिजली आपूर्ति में बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी। जूनियर इंजीनियर से लेकर वरिष्ठ अधिकारी तक की चरित्र पंजिका में उनकी परफॉर्मेंस बिजली सप्लाई की नियमितता के आधार पर भी देखी जाएगी। मुख्यमंत्री ने राज्य की सौर ऊर्जा नीति में 5 मेगावाट तक के प्रोजेक्ट केवल उत्तराखण्ड के निवासियों के लिए रखने के निर्देश दिये। इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जायेगा। बताया गया कि वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से राज्य में 597 मिलियन यूनिट बिजली की खपत कम हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उपजाऊ भूमि पर सोलर प्लाण्ट परियोजनाए न लगाई जायें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली सप्लाई में ए0टी0 एण्ड टी0 (एग्रीगेट टेक्निीकल एण्ड कमर्शियल लॉसेस) को कम किया जाए। वर्ष 2016-17 के 16.72 प्रतिशत हानियों को इस वर्ष अधिकतम 15 प्रतिशत तक सीमित किया जाय। उल्लेखनीय है कि एक प्रतिशत ए0टी0 एण्ड टी0 हानियां कम होने पर राज्य को लगभग 100 करोड रुपए तक की बचत होगी। जिन क्षेत्रों में बिजली चोरी की घटनाएं अधिक होती है, उन्हें चिन्हित कर वहां ओवरहेड लाइनों को ए0बी0 केबिलों से बदला जाए। इस वर्ष 2000 कि0मी0 ओवरहेड एल0टी0 लाइनों को ए0बी0 केबिलों से बदले जाने का लक्ष्य है। बताया गया कि राज्य के 15745 आबाद ग्रामों में 15681 विद्युतीकृत है। मुख्यमंत्री ने शेष 64 ग्रामों को इस वर्ष के अंत तक विद्युतीकृत करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने दूरस्थ सीमांत इलाकों में लगभग 8000 घरों हेतु सोलर ब्रीफकेस की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्युत उत्पादन की आधुनिक एम0आई0एस0टी0 (मिस्ट) तकनीकि का अध्ययन कर किसी एक स्थान पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के निर्देश भी दिए। उत्तराखंड जल विद्युत निगम को इस वर्ष के लिए निर्धारित 4876 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन लक्ष्य को बढ़ाकर कम से कम 5000 मिलियन यूनिट करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो जल विद्युत परियोजनाएं न्यायालय वाद या किसी अन्य कारण से रुकी हुई हैं, उनके अतिरिक्त बाकी योजनाओं पर निगम पूरा ध्यान केंद्रित करें। बताया गया कि 120 मेगावॉट ब्यासी परियोजना वर्ष 2018 दिसम्बर तक तैयार हो जायेगी। उत्तरकाशी की पिलंगाड-1 (2.25 मेगावॉट) योजना इस वर्ष दिसम्बर तक पूरी हो जायेगी। चमोली में उरगम (3.0 मेगावॉट) तथा पौड़ी में दुनाव (1.5 मेगावॉट) योजना अगस्त के अंतिम सप्ताह से प्रारम्भ हो जायेगी। दुनाव परियोजना टेस्टिंग प्रक्रिया में है। राज्य के दस हजार से कम जनसंख्या वाले 36 शहरों में 192 करोड़ की लागत से बिजली सुधारीकरण किया जाना है। इस वर्ष अप्रैल से जून तक बिजली चोरी के लगभग 486 अभियोग पंजीकृत किये गये हैं। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष अप्रैल-जून अवधि के बिजली आपूर्ति की नियमितता और अवधि में सुधार हुआ है। बैठक में सचिव ऊर्जा राधिका झा, अपर सचिव रणवीर सिंह चौहान सहित ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत मिल रहा युवाओं को रोजगार

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गुरूवार को न्यू कैंट रोड स्थित जनता दर्शन हॉल में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अन्तर्गत राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज युवा पीढ़ी स्वरोजगार की ओर तेजी से अग्रसर हो रही है। युवा पीढ़ी समझ चुकी है कि रोजगार का सबसे अच्छा साधन स्वरोजगार है। उन्होंने कहा कि विभिन्न लघु, मध्यम एवं सूक्ष्म उद्यमों के विकास से जहां अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा साथ ही इससे स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि आधुनिक तकनीकि युग में मशीनीकरण तेजी से हो रहा है, इसके साथ ही घरेलू उत्पादों की ओर लोगों को रूझान भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में घरेलू उत्पादों के विकास हेतु अपार सम्भावनाए हैं। राज्य में घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग के लिए स्किल डेवलपमेंट की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने युवाओं को विभिन्न उद्यमों के माध्यम से स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया, जिससे अन्य लोग भी इन उद्यमों में कार्य कर सके और उन्हें भी रोजगार के अवसर प्रदान हो सके। किसी भी उद्यम, राज्य या देश के विकास के लिए सभी का समन्वय एवं सहयोग जरूरी है। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों द्वारा लगाये गये विभिन्न स्टालों का भी अवलोकन किया। पी.एम.ई.जी.पी कार्यक्रम के तहत सराहनीय कार्य करने पर उद्योग विभाग एवं बैकों के अधिकारियों को पुरस्कृत भी किया।
प्रमुख सचिव मनीषा पंवार ने बताया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य में 9487 इकाईयां स्थापित की गई है तथा 138.41 करोड़ रूपये की मार्जिन मनी वितरित की गई तथा 63,791 लोगों को रोजगार मिला है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने के लिए 1 जुलाई 2016 से ऑनलाइन डीबीटी सिस्टम को अनिवार्य रुप से लागू किया गया, जिसके अंतर्गत जो भी आवेदन पीएमईजीपी योजना के अंतर्गत प्राप्त होंगे, उनका निस्तारण मार्जिन मनी समायोजन तक ऑनलाइन किया जाएगा। कहा कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत पिछले वर्ष उत्तराखण्ड को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।

साइबर ठगी के मामले में महिला साथी गिरफ्तार

97 दूनवासियों के बैंक खातों में सेंध लगाकर की गई लाखों रुपये की साइबर ठगी में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने आरोपी साइबर ठगों की महिला साथी को भी गिरफ्तार कर लिया है, जिसकी गैंग में अहम भूमिका थी। गिरोह के लिए रुपयों से लेकर गाड़ी तक का इंतजाम यही महिला करती थी। उसके कब्जे से पुलिस ने 2.32 लाख रुपये, चार एटीएम कार्ड, दो चेक बुक, एक पासबुक और हरियाणा नंबर की स्कॉपियो के कागजात बरामद किए हैं।
इस प्रकरण में यह पहली गिरफ्तारी है। आरोपी महिला की पहचान अनिल कुमारी पुत्री दया सिंह निवासी सोनीपत हरियाणा के रूप में हुई। उसे सेक्टर तीन रोहतक स्थित एक घर से गिरफ्तार किया गया। महिला के साथियों की तलाश में पुलिस की दबिश जारी है। एसएसपी एसटीएफ रिधिम अग्रवाल और एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि आरोपी महिला को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
गौरतलब है कि देहरादून में जुलाई के पहले सप्ताह में साइबर ठगी की घटना सामने आई थी। शातिर ठगों ने एसबीआइ के एटीएम में स्कीमर डिवाइस लगाकर विभिन्न बैंकों के खाताधारकों के एटीएम कार्ड के क्लोन तैयार किए और इसके बाद इन खातों से करीब तीस लाख रुपये निकाल लिए। मोबाइल पर रुपये निकासी का मैसेज आने पर खाताधारकों को इसका पता चला। 14 जुलाई से ये मामले सामने आने लगे। अभी तक 97 लोग इस संबंध में मामला दर्ज करा चुके हैं और करीब 30 लाख रुपये निकाले जाने का पता चला है। ठगों ने एक से आठ जुलाई के बीच एटीएम कार्डों की क्लोनिंग की थी।

काफी पहले हो गई थी आरोपियों की पहचान
राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एसआइटी गठित की थी, जिसके निर्देशन में एसटीएफ और विभिन्न थानों की पुलिस ठगों तक पहुंचने की कड़ियां जोड़ रही थी। दून-दिल्ली से लेकर जयपुर तक के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद पुलिस को महत्वपूर्ण कड़ियां हाथ लगी। इसके बाद दून के होटलों और धर्मशालाओं में इस दौरान रुके लोगों के बारे में जानकारी जुटाकर आरोपी साइबर ठगों की पहचान की गई। 10 दिन की मैराथन कसरत के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों झज्जर (हरियाणा) निवासी रामबीर, सुदेश और जगमोहन की पहचान कर ली थी। हालांकि, इनकी गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है। वहीं सोमवार तक पुलिस ने खातों से उड़ाई रकम का भी पता लगा लिया। शातिरों ने रकम झज्जर में कैलाशो देवी नामक महिला के खाते में जमा कराई थी। इस खाते में 34 लाख रुपये जमा हैं। पुलिस ने इस खाते को 24 जुलाई को फ्रीज करा दिया था।
पुलिस ने बताया कि अनिल कुमारी, रामबीर की बेहद करीबी है। वह दोनों दिल्ली में लिव इन रिलेशनशिप में रहते थे। रामबीर के साथ अनिल कई बार दिल्ली, जयपुर और हिमाचल प्रदेश गई। बाद में रामबीर ने उसे गैंग में शामिल कर लिया और कुछ दिनों में ही वह गैंग की अहम सदस्य बन गई। वह गैंग के सदस्यों के लिए गाड़ी, रहने की व्यवस्था, सिम कार्ड आदि सभी जरूरी चीजें और सामान उपलब्ध कराती थी। ठगी के रुपयों का सेटेलमेंट भी अनिल ही करती थी।

अन्य राज्यों में भी दे चुके हैं घटना को अंजाम
पुलिस ने बताया कि यह गैंग दून ही नहीं बल्कि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, जयपुर समेत कई स्थानों में भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे चुका है। गैंग के सदस्य ऐसी एटीएम मशीनों को निशाना बनाते हैं, जहां गार्ड न हो। एटीएम में घुसते ही यह कैमरा खराब करते और फिर स्कीमिंग डिवाइस (स्कीमर) लगा देते थे। इससे पहले वह आसपास के एटीएम को ग्लू या अन्य तरीकों से खराब कर देते, जिससे लोग डिवाइस लगे एटीएम से निकासी करें। एटीएम की क्लोनिंग करने के बाद यह गिरोह अन्य राज्यों में जाकर रुपये निकालता था। ठगी के रुपयों से ये लोग या तो जमीन खरीदते या गाड़ियां और फ्लैट।

सीएम के प्रयासों से गढ़वाली व कुमाऊंनी बोली को मिलेगा बढ़ावा

गढ़वाली व कुमाऊंनी बोली के प्रचार-प्रसार के लिए एक अनूठी पहल की गई है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा गढ़वाली व कुमाऊंनी बोली को संविधान की 8 वीं अनुसूची में शामिल किए जाने के प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि गढ़वाली व कुमाऊंनी बोली को दर्जा दिलाने की मांग पहले भी संसद में भी उठाई जा चुकी है और यह प्रयास जारी है।
उत्तराखंड की लोक भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र द्वारा सोशल मीडिया में भी गढ़वाली, कुमाऊंनी व उत्तराखंड की अन्य बोली भाषा में आम-जन से संवाद स्थापित किया जा रहा है। जिसकी शुरूआत आज मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीटर अकाउंट में गढ़वाली व कुमाऊंनी बोली में ट्वीट कर की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें सदैव अपनी संस्कृति, बोली भाषा से जुड़ाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज का युवा सोशल मीडिया में अधिक सक्रिय है। सोशल मीडिया में अपनी लोक भाषा गढ़वाली, कुमाऊंनी व उत्तराखंड की अन्य बोली भाषा में संवाद करने से युवा पीढ़ी के साथ-साथ भावी पीढ़ी को भी अपनी बोली व संस्कृति से जुड़ने का मौका मिलेगा। सीएम ने लोगों से अपेक्षा की है कि वे समय-समय पर सोशल मीडिया पर गढ़वाली, कुमाऊंनी व उत्तराखंड की अन्य बोली भाषा में भी उनसे संवाद स्थापित करेंगे।

पंतजलि के सहयोग से बदलेगी प्रदेश के किसानों की आर्थिकी

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और बाबा रामदेव की मौजूदगी में राज्य सरकार और पतंजलि के बीच सहयोग कार्यक्रम पर विस्तृत विचार विमर्श किया गया। इस दौरान मुख्य रूप से 5 क्षेत्रों में आपसी सहयोग पर सहमति बनी।
मुख्यमंत्री आवास पर हुए इस कार्यक्रम में उत्तराखण्ड को जैविक कृषि और जड़ीबूटी राज्य बनाना, राज्य के मोटे अनाज की व्यवसायिक खपत को बढ़ाना, राज्य में आयुष ग्रामों की स्थापना करना, एक विशाल गोधाम (गाौ शाला) की स्थापना करना और पर्यटन को बढ़ावा देना सम्मिलित है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि यह सारे सेक्टर राज्य की समृद्धि और खुशहाली की दृष्टि से गेम चेंजर साबित होंगे। इन सारे क्षेत्रों में संभावनाओं पर अभी तक काफी विचार-विमर्श हुआ है, लेकिन अब इस क्षेत्र में कुछ कर दिखाने की जरूरत है। उन्होंने ये भी कहा कि सरकार कड़े और साहसिक फैसले लेने से नहीं हिचकेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वो एक महीन के अन्दर सभी क्षेत्रों में ठोस कार्ययोजना तैयार करें, जिसको लेकर ठीक एक महीने बाद समीक्षा बैठक की जाएगी और ठोस कार्ययोजना के आधार पर राज्य सरकार और पतंजलि के बीच आवश्यक समझौते भी किये जायेंगे। मुख्यमंत्री का कहना है कि जड़ीबूटी, औद्यानिकी, योग, आयुर्वेद और पर्यटन से राज्य के लोगों की आमदनी बढ़ाने पर कार्य किया जायेगा। पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना बहुत आवश्यक है।

किसानों की मदद करेगा पतंजलि
इस दौरान स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि संस्थान उत्तराखण्ड के किसानों को उनके उत्पादों के लिए प्रतिवर्ष एक हजार करोड़ रूपये से अधिक का भुगतान करने में सक्षम है। सिक्किम जिसे हाल ही में ऑर्गेनिक स्टेट का दर्जा दिया गया है, उससे कही अधिक भूभाग पर उत्तराखण्ड में ऑर्गेनिक खेती हो रही है।

नए पर्यटक स्थलों पर स्थापित होंगे पतंजलि आयुष ग्राम
कहा कि पतंजलि राज्य के उत्पादों के लिए बाईबैक सिस्टम बना रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के 13 जिले 13 नये पर्यटन स्थल बनाने के लक्ष्य की सराहना करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि सभी नये पर्यटन स्थलों पर पतंजलि आयुष ग्राम की स्थापना में सहयोग देने को तैयार है।

विशाल गौशाला तैयार करने की योजना
यह भी कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से एक विशाल गोशाला की स्थापना करने की योजना है, जिसमें 40 से 60 लीटर दूध देने वाली गायों की नस्ल तैयार की जायेगी। वहीं कार्यक्रम में मौजूद आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि की रिसर्च लैब और अन्य सुविधाओं को आयुर्वेद के शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए खोला जायेगा। पतंजलि के 300 से अधिक वनस्पति विज्ञानी राज्य की एक-एक जड़ीबूटी और पौधे का सर्वेक्षण कर उनका डॉक्यूमेंटेशन कर सकते हैं।

बिहार के विधायक ने भी उत्तराखंड में वोट डाला

देहरादून।
राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सोमवार को देहरादून में विधानसभा भवन में सुबह दस बजे से मतदान का सिलसिला शुरू हो गया था। सतपाल महाराज ने सबसे पहले विधानसभा भवन में मतदान किया। दोपहर करीब 12 बजे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने भी मतदान किया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राष्ट्रपति के चुनाव में रामनाथ कोविंद की जीत तय है। बिहार के आरजेडी विधायक विरेंद्र कुमार सिन्हा ने भी देहरादून स्थित विधानसभा भवन में मतदान किया। सुबोध उनियाल ने सबसे आखिरी में वोट डाला। दोहपर दो बजे तक सभी 70 विधायकों ने मतदान कर दिया था। बिहार के आरडेजी विधायक के मत को मिलाकर कुल 71 मत पड़े। मतदान में कुल 71 विधायक अपना मताधिकार का प्रयोग किया। जो विधायक उत्तराखंड विधानसभा में सोमवार को राष्ट्रपति चुनाव को लेकर अपना वोट डाला, उसमें 70 विधायक तो यहां के हैं। वहीं विहार के एक विधायक विरेंद्र कुमार सिन्हा भी दून में अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। सिन्हा ने इस संबंध में केंद्रीय निर्वाचन आयोग से पटना के बदले देहरादून में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी थी। आयोग ने उनको अनुमति प्रदान कर दी है। उत्तराखंड के सभी 70 निर्वाचित विधायक अपने मताधिकार का इस्तेमाल देहरादून और सांसदों ने दिल्ली में किया। राष्ट्रपति चुनाव को लेकर विधानसभा में तैयारी काफी समय पहले से चल रही थी। विधानसभा सचिव जगदीश चंद्र ने बताया कि मतदान के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा उपलब्ध कराई गयी विशेष प्रकार की पेन का ही इस्तेमाल किया गया। किसी भी मतदाता को कलम या मोबाइल फोन मतदान कक्ष में ले जाने की अनुमति नहीं थी। मतदान को लेकर विधानसभा की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

रेलवे स्टेशन की सुविधाओं को समिति ने निरीक्षण किया


ऋषिकेश।
रेल मंत्रालय भारत सरकार द्वारा गठित यात्रा सेवा समिति के पांच सदस्यीय दल ने ऋषिकेश रेलवे स्टेशन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। दल ने यहां पेयजल, सफाई, शौचालयों की स्थिति, बिजली व अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। कमेटी के सदस्य पंकज कुमार पाठक ने बताया कि रेल मंत्रालय द्वारा कांवड़ यात्रा को देखते हुए स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं में इजाफा किया जा रहा है। इसमें यात्रियों के लिए पेयजल, शौचालय आदि की अतिरिक्त व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि निरीक्षण में जो भी कमियां पाई गई हैं, उन्हें शीघ्र दुरुस्त करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रेल मंत्रालय द्वारा इस कमेटी का गठन इसलिए किया गया है कि वह प्रत्येक रेलवे स्टेशन का जायजा लेकर खामियों व अव्यवस्थाओं की रिपोर्ट रेल मंत्रालय को सौंपे। जिससे रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जा सके। इस मौके पर मंडल रेल प्रबंधक मुरादाबाद एके सिंघल ने बताया कि कांवड़ यात्रा को देखते हुए सात जुलाई से यात्राकाल में ऋषिकेश-हरिद्वार के बीच कांवड़ रेल सेवा शुरू की जाएगी। जिससे यात्रियों को परिवहन की समस्या से न जूझना पड़े। यात्री सेवा समिति की टीम को स्टेशन अधीक्षक आरपी मीणा ने भी स्टेशन की समस्याओं से अवगत करवाया। निरीक्षण टीम में पंकज कुमार पाठक, एमएन ¨सह, राजेश शाह, मंजू मखीजा व जयदीप आर्य शामिल थे।

स्मार्ट सिटी बनेगा देहरादून, केन्द्र ने दी मंजूरी


नई दिल्ली।
स्मार्ट सिटी की सूची में देवभूमि देहरादून का नाम भी शामिल हो गया है। लंबे समय से चल रही कवायद को अंततः मंजिल मिल ही गयी है। दून के स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल होने से प्रदेश की राजधानी को विकास की नई दिशा मिलेगी। जिससे प्रदेश में पर्यटन और रोजगार के अवसर श्रृजित होंगे। बता दें कि दून को स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से चल रही है। स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल होने से प्रदेश को लोगों में खुशी की लहर हैं।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन के तहत विकास के लिए जिन 30 शहरों की नई सूची जारी की गई है उनमें केरल का तिरूवनंपुरम, छत्तीसगढ़ का नया रायपुर और गुजरात का राजकोट शहर शामिल है। इस नई घोषणा के साथ केंद्र की स्मार्ट सिटी योजना के तहत चयनित शहरों की संख्या 90 हो गई है। नई सूची के ऐलान से जुड़े के कार्यक्रम में शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए सूची में 40 शहरों के लिए स्थान खाली थे, लेकिन व्यवहारिकता और कार्य करने योग्य योजना सुनिश्चित करने के लिए 30 शहरों का चयन किया गया। स्मार्ट सिटी योजनाओं के तहत 57,393 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत केंद्र हर शहर को पांच साल की अवधि में 500 करोड़ रुपए प्रदान करता है ताकि विभिन्न विकास परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जा सके।
 
आखिर जून माह में क्यों जुटते है कामाख्या मंदिर में देश विदेश के साधक!
नए शहरों की सूची

आंध्र प्रदेश का अमरावती
बिहार के पटना और मुजफ्फरपुर
यूपी से इलाहाबाद, अलीगढ़ और झांसी
तेलंगाना का करीमनगर
केरल के त्रिवेंद्रम,
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और नया रायपुर
गुजरात के दाहोद, गांधीनगर और राजकोट
पुडुचेरी का पुडुचेरी
जम्मू कश्मीर के जम्मू और श्रीनगर
मध्य प्रदेश के सतना और सागर
हरियाणा के करनाल
कर्नाटक के बेंगलुरू
हिमाचल प्रदेश के शिमला
उत्तराखंड के देहरादून
तमिलनाडु के तिरुनवेली
तिरुचिरापल्ली, त्रिपुरा और तूतुकुडी
महाराष्ट्र के पिंरी चिंचवड
अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट
मिजोरम के आइजोल
सिक्किम के गंगटोक शहर

जनता मिलन कार्यक्रम में आर्थिक सहायता के लिए पहुंच रहे फरियादी


देहरादून।
मुख्यमंत्री के जनता मिलन कार्यक्रम में भी शराब की दुकानों के विरोध का मुद्दा उठा। रायपुर व जोहड़ीगांव से आए प्रतिनिधिमंडल ने रिहायशी क्षेत्रों में खोली जा रही शराब की दुकानों को बंद करने की मांग रखी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जिलाधिकारी को इस प्रकरण पर रिपोर्ट देने को कहा है। 
इस दौरान मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में फरियादियों की समस्याओं को सुना और समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समस्या निस्तारित होने की सूचना संबंधित व्यक्ति को दी जानी चाहिए।  
न्यू कैंट रोड स्थित सीएम आवास के जनता दर्शन हॉल में जनता मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 40 से अधिक आर्थिक सहायता के प्रकरण रखे गए। मुख्यमंत्री ने इन प्रकरणों को गुणदोष के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता के जो प्रकरण चिकित्सा उपचार से संबंधित हैं, उनके साथ मेडिकल बिल तथा चिकित्सा उपचार संबंधी प्रमाणपत्र अनिवार्य रूप से लगाने होंगे। 
जो चिकित्सा बिल तथा चिकित्सा उपचार के प्रकरण मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत निपटाए जा सकते हैं, उन्हें संबंधित विभागों को भेजा जाए। इससे पूर्व मुख्यमंत्री आवास में सुबह से ही बड़ी संख्या में फरियादी जुटने शुरू हो गए थे। 
सभी की शिकायतों को विभागवार रजिस्टर्ड किया गया और इसके बाद मुख्यमंत्री के सामने संबंधित प्रकरण रखे गए। कार्यक्रम में विशेष यह रहा कि मुख्यमंत्री ने दो बार लोगों की शिकायतों को सुना। पहले मुख्यमंत्री सुबह तकरीबन 11 बजे तक कार्यक्रम में रहे और इसके बाद राजभवन एक अन्य कार्यक्रम में शिरकत करने चले गए। वहां से वापस आकर उन्होंने फिर से समस्याओं को सुना। 
उनकी अनुपस्थिति में प्रमख सचिव मनीषा पंवार, डॉ. उमाकांत पंवार, सचिव अमित नेगी, राधिका झा व आयुक्त गढ़वाल विनोद शर्मा ने जनता की शिकायतों को सुना। 
राजस्व मामलों में अलग अधिकारी होगा नियुक्त
मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि अधिकांश शिकायतें राजस्व संबंधी मामलों की हैं। इन समस्याओं के निस्तारण के लिए एक अलग अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।