भगत के कोरोना संक्रमित होने से नेता, कार्यकर्ता और पत्रकारों में चिंतित

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत कोरोना संक्रमित हुए हैं। उन्होंने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया पर साझा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। उन्होंने पिछले सप्ताह उनके संपर्क में आए सभी पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं से कोरोना टेस्ट करवाने की अपील भी की है। बता दें कि बंशीधर भगत के बेटे विकास भगत की कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी।
सूत्रों के अनुसार, विकास भगत को तीन दिन से बुखार था। उन्हें सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) में प्राइवेट रूम में भर्ती किया गया। उनका सैंपल जांच को भेजा गया और रिपोर्ट पॉजिटिव आई। विकास भाजयुमो में प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ ही विधायक प्रतिनिधि भी हैं। एसटीएच के एमएस डॉ. जोशी ने बताया कि विकास भगत की हालत ठीक है।
वहीं अब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के बंशीधर भगत व उनके बेटे की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन सभी लोगों में चिंता है जो उनके गृह प्रवेश की पार्टी में शामिल हुए थे। भगत ने 21 अगस्त को यमुना कालोनी स्थित सरकारी आवास में गृह प्रवेश पर सहभोज का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में उनके बेटे भी थे। हालांकि कहा जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया था। सभी अतिथि आयोजन में मास्क लगाकर पहुंचे थे। कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सरकार के कुछ मंत्री और पत्रकार भी मौजूद थे। इतना ही नहीं राष्ट्रीय महामंत्री संगठन शिव प्रकाश और प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार, पार्टी के प्रदेश महामंत्री, प्रदेश मीडिया प्रभारी व कई अन्य नेताओं ने कार्यक्रम में शिरकत की थी।
इसके बाद भगत ने 24 अगस्त को मीडिया कर्मियों को सहभोज के लिए आमंत्रित किया था। इसी आयोजन के दौरान उन्होंने विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन की पार्टी में वापसी कराई थी।

आखिर इंदिरा ने मुख्यमंत्री को कौन सा पद छोड़ने की नसीहत दी

नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृदयेश ने राज्य में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के विरोध में एक दिन का उपवास रखकर धरना दिया। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा और कहा कि मुख्यमंत्री को स्वास्थ्य विभाग छोड़ देना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सीएम के पास विभाग होने के बावजूद पूरे उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। कोरोना संक्रमित अस्पताल जाने तक से डर रहे हैं। उन्हें डर है कि अस्पताल जाने पर उन्हें इलाज तो नहीं मिलेगा मगर लापरवाहियों के कारण उनकी जान जरूर चली जाएगी। पहाड़ों में न संक्रमितों को इलाज मिल रहा है और न बाकी रोगों से जूझ रहे लोगों को। पहाड़ के जिलों में गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड तक नहीं हो पा रहा है। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री राजेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि भाजपा को 56 विधायकों में एक स्वास्थ्य मंत्री नहीं मिल पा रहा है तो ऐसी सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए।
वहीं, उपवास में पहुंचे पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीशचंद्र दुर्गापाल ने कहा, कोरोनाकाल में कोई व्यक्ति बीमार हो जाए तो उसके पास इलाज का कोई विकल्प नहीं है। एआईसीसी सदस्य सुमित हृदयेश ने कहा कि कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाया गया है। पांच माह से अस्पताल में बाकी सुविधाएं बंद है। पहाड़ों में इलाज पहले उपलब्ध नहीं था। अब एकमात्र इलाज का सहारा भी छिन गया है। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव महेश शर्मा ने कहा कि कोरोना के नाम पर सरकारी की सभी योजनाएं जनता के साथ छलावा साबित हो रही हैं। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया।

देहरादून और हल्द्वानी में उपनल बनाने जा रहा मल्टी सर्विस सेंटर

बुजुर्गों की मदद को उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (उपनल) प्रमुख शहरों में मल्टी सर्विस सेंटर बनाने जा रहा है। प्रथम चरण में ये सेंटर देहरादून और हल्द्वानी में स्थापित किए जाएंगे। कॉलसेंटर की तरह काम करने वाले उपनल के इन खास दफ्तरों में स्थानीय स्तर पर डॉक्टर, नर्स, मेडिकल स्टोर, होटल, मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन, सुपर स्टोर, किराना स्टोरों का डाटा होगा।

बुजुर्गों की मांग के आधार पर उन तक ये सेवाएं पहुंचाई जाएंगी। इस सेवा को लेने के लिए फीस-वस्तु की कीमत के साथ एक न्यूनतम सेवा शुल्क देना होगा जो 100 रुपये तक हो सकता है। उपनल के एमडी ब्रिगेडियर (सेनि) पीपीएस पाहवा ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि प्रदेश के हर बड़े शहर में सेंटर बनाने की योजना है। पर, आबादी को देखते हुए पहले चरण में दून और हल्द्वानी को चुना गया है।

ऐसे काम करेगी योजना

मल्टी सर्विस सेंटर में स्वास्थ्य, बिजली, पानी समेत रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ी सेवाएं देने वाले सभी लोगों का डाटा होगा। यदि किसी बुजुर्ग को डाक्टर की अथवा नर्स की आवश्यकता है। अस्पताल जाना है या फिर दवाएं खरीदनी है तो वह सेंटर में फोन कर सकता है। सेंटर में मौजूद कर्मचारी बुजुर्ग के आवासीय लोकेशन के आधार पर संबंधित व्यक्तियों को इसकी सूचना देगा। एक तय चार्ज लेते हुए घर तक सुविधा पहुंचा दी जाएगी। इसी प्रकार मैकेनिक, इलेक्ट्रियन, बिल जमा कराने वाली एजेसियां आदि भी सेंटर से जुड़ी होंगी। सामान्य सुविधाओं को उपनल अपने कर्मियों के जरिए भी घर तक पहंचा सकता है। सेवाओं की संख्या और उन्हें जरूरतमंद तक पहुंचाने के लिए ठोस ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। जल्द ही इस अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

नैनीताल जिला जेल के तीन बंदियों की अस्पताल से भागने की नाकाम कोशिश

नैनीताल जिला जेल के तीन कैदी सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी से बुधवार की शाम को भाग निकले। मगर, करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत करने के बाद कोतवाली पुलिस ने इन्हें पकड़ लिया। यह तीनों कैदी कोरोना पॉजिटिव है।

तीन कैदी रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप निवासी ध्रुव विश्वास, अल्मोड़ा जिले के कर्बला निवासी राजेंद्र सिंह बोरा, बैलपड़ाव निवासी मनकीत सिंह जांच के दौरान कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। तीनों को इलाज के लिए सुशीला तिवारी अस्पताल के मानसिक वार्ड में भर्ती किया गया। बुधवार की शाम करीब पांच बजे तीनों बाथरूम की खिड़की तोड़कर फरार हो गए। बेड से तीन मरीजों के गायब मिलने पर अस्पाताल प्रशासन सकते में आ गया। एमएस डॉ. अरुण जोशी ने घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को दी। एसएसपी सुनील कुमार मीणा के निर्देश पर पुलिस ने अपने अपने थाना क्षेत्रों की नाकेबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया।

कोतवाल संजय कुमार ने एसटीएच के पीछे सर्च अभियान चलाया गया तो तीनों झाड़ियों में छिपकर बैठे थे। मेडिकल चौकी प्रभारी मनवर सिंह की टीम ने तीनों को घेरकर पकड़ लिया। तीनों ने बताया कि वे अस्पताल में घबरा गए थे। पुलिस ने बताया कि धु्रव को चोरी, राजेंद्र सिंह को एनडीपीएस एक्ट, मनकीत सिंह को 25 आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था।

इंतजार खत्म, 29 जुलाई को जारी होगा उत्तराखंड बोर्ड का रिजल्ट

उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं परीक्षा का परिणाम 29 जुलाई को जारी होगा। उत्तराखंड बोर्ड मुख्यालय रामनगर में सुबह 11 बजे परीक्षा परिणाम घोषित किया जाएगा। बोर्ड सचिव नीता तिवारी ने बताया कि बोर्ड सभापति आरके कुंवर और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे की उपस्थिति में परीक्षा परिणाम घोषित किये जायेंगे।
छात्र उत्तराखंड बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट ubse.uk.gov.in पर अपना रिजल्ट देख सकेंगे। कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। बता दें कि इस वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा में 147588 छात्र और इंटरमीडिएट में 119216 छात्र शामिल हुए थे। लॉकडाउन के चलते 22 मार्च से परीक्षाओं को रोक दिया गया था, छूटी हुई परीक्षाओं को 22 जून से 24 जून के बीच कराया गया। इस दौरान कंटेनमेंट जोन के कई छात्र परीक्षा से वंचित हो गए, इनमें हाईस्कूल के 716, इंटरमीडिएट के 337 परीक्षार्थी शामिल हैं।
बोर्ड ने इन छात्रों को तीन विषयों के अंकों के आधार पर औसत अंक देकर पास किया है। यदि फिर भी कोई छात्र औसत अंक से संतुष्ट नहीं होगा तो वह रिजल्ट आने के एक माह तक आवेदन कर सकेगा।
वहीं, बोर्ड सचिव ने बताया कि ढाई सौ से तीन सौ छात्र ऐसे भी हैं, जिन्होंने एकल विषय से आवेदन किया था। ऐसे में छात्रों को औसत अंक नहीं दिए जाएंगे, क्योंकि इन छात्रों ने केवल एक ही विषय में परीक्षा के लिए आवेदन किया था। इन छात्रों की परीक्षा 29 जुलाई के बाद कराई जाएगी।

छात्र ऐसे देखे अपना परिणाम
– रिजल्ट प्राप्त करने के लिए छात्रों को बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट ubse.uk.gov.in पर क्लिक करना होगा।
– उसके बाद छात्र डाउनलोड रिजल्ट के लिंक पर क्लिक करें।
– पंजीकरण संख्या, रोल नंबर और अन्य मांगी गई जानकारी दर्ज करें।
– उसके बाद छात्रों का परिणाम सामने होगा।
– इसके बाद छात्र अपने परिणाम को डाउनलोड कर ले।

भीमताल में बहुद्देशीय पार्किंग निर्माण को लेकर मीडिया सलाहकार ने अधिकारियों संग किया निरीक्षण

(एनएन सर्विस)
मुख्यमंत्री की घोषणा में शामिल बहुद्देशीय पार्किंग के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने जिला विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ भीमताल में जमीन तलाशने के लिए संभावित स्थान का निरीक्षण किया। उनके साथ एमडी कुमाऊं मंडल विकास निगम रोहित मीणा, सचिव जिला विकास प्राधिकरण पंकज उपाध्याय, पर्यटन विकास परिषद सदस्य नितिन राणा ने बुधवार को संयुक्त निरीक्षण कर पार्किंग स्थल की संभावनाएं तलाशीं।
निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्ययोजना पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के लिए त्रिवेन्द्र सरकार का साफ नजरिया है। मुख्यमंत्री घोषणा के बाद यह जरुर देखते है कि धरातल पर उनकी घोषणा के बाद कार्य में क्या प्रगति हुई है। रमेश भटट ने बताया कि भीमताल के विकास को लेकर मुख्यमंत्री से कई बार चर्चाएं हुई है। सरकार भीमताल को पर्यटक हब के रुप में और अधिक विकसित करना चाहती है। जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़े। इस लिए पार्किंग का निर्माण यहां के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
स्थलीय निरीक्षण के बाद सचिव जिला विकास प्राधिकरण पंकज उपाध्याय ने जानकारी दी कि निरीक्षण के दौरान पाया कि मल्लीताल में मत्स्य विभाग कार्यालय के लगभग 1200 वर्ग मीटर भूमि पर पिलर देकर लगभग सौ वाहनों की पार्किंग बनाई जा सकती है। बताया कि वर्ष 2018 में मत्स्य विभाग को हस्तांतरित भूमि जिसका क्षेत्रफल लगभग सवा तीन हजार वर्ग मीटर का है, उसमें नीचे पार्किग और ऊपर भीमताल क्लब की स्थापना की जा सकती है। कहा कि भीमताल क्लब के लिए विभाग लंबे समय से प्रयासरत है।
निरीक्षण के दौरान प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष सौरभ रौतेला, देवभूमि व्यापार मंडल अध्यक्ष संदीप पांडे, भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज भट्ट, पंकज जोशी, प्रदीप पाठक, शरद पांडे आदि मौजूद थे।

भागीरथी फाउंडेशन ने फिर निभाई जिम्मेदारी, सेनिटाइजर, मास्क, साबुन, ग्लब्ज और फेस मास्क बांटे

भागीरथी फाउंडेशन भीमताल ने आज रामलीला मैदान मल्लीताल में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में फाउंडेशन के सदस्यों ने कोरोना संक्रमण से बचाव हेतु आशा कार्यकत्रियों को आवश्यक वस्तुएं सेनिटाइजर, मास्क, साबुन, ग्लब्ज, फेस मास्क आदि प्रदान किये।
फाउंडेशन के अध्यक्ष मनोज भट्ट ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौर में जहां सोशल डिस्टेंसिंग के चलते लोग घरों से बाहर नही निकल रहे है। वहीं इस परिस्थिति से निपटने के लिए में हमारी बहनें जो आशा कार्यकत्रियां है, दिन-रात सेवा में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में हमारा भी फर्ज है कि कोरोना वारियर के रुप में कार्य कर रही इन बहिनों के स्वास्थ्य की चिंता की जाये। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ने संस्था के सुझाव पर फाउंडेशन को सेनिटाइजर, मास्क, साबुन, ग्लब्ज, फेस मास्क आदि वस्तुएं उपलब्ध कराई गई। जिसे हमारे द्वारा लगातार कई क्षेत्रों में इनका वितरण किया जा रहा है। इसी क्रम में आज आशा कार्यकत्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया गया।
आशा कार्यकत्रियों ने भागीरथी फाउंडेशन के सभी सदस्यों का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसा वर्ग और संस्थाओं की जरुरत है जो जरुरतमंद लोगों की सेवा करने के लिए आगे आये। इस मौके पर भागीरथी फाउंडेशन के उपाध्यक्ष शरद पांडेय, कोषाध्यक्ष सुनीता पांडेय, सचिव भास्कर भगवाल, धन सिह राणा, आशु पाठक, सुरेश सुयाल, अनिल शर्मा, रमेश पलड़िया आदि मौजूद रहे।

त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व में भाजपा ने उत्तराखंड से किया वादा निभायाः बंशीधर भगत

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कांग्रेस पार्टी के नेताओं की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हर समय राजनीति करती है। अच्छे निर्णयों को लेकर जहां कांग्रेस को सरकार की पीठ थपथपानी चाहिए। कांग्रेस वहां भी लोगों को गुमराह करने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि गैरसैंण सवा करोड़ उत्तराखण्डियों की भावनाओं में है। प्रदेश के सभी लोग चाहते हैं कि गैरसैंण को लेकर जो सपना हमारे राज्य आंदोलनकारियों ने देखा था, वो आज पूरा हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी गैरसैंण को लेकर सदैव सकारात्मक रही है, यही वजह है कि हमारे घोषणापत्र में गैरसैंण प्रमुखता से था। मुझे खुशी है कि त्रिवेंद्र रावत के नेतृत्व में भाजपा की सरकार ने उत्तराखण्ड के लोगों से किया वादा निभाया है। मैं प्रदेश सरकार, राज्य के समस्त जनता और आंदोलनकारियों को बहुत बहुत बधाई देता हूँ।
बंशीधर भगत ने कहा कि गैरसैंण को प्रदेश की ग्रीष्म राजधानी ऐसे समय बनाया गया है, जब न तो चुनाव हैं, न किसी तरह की मजबूरी है। हमारी पार्टी के प्रयास होता है कि जनभावनाओं को सर्वोपरि रखा जाय, उसी दिशा में ये कदम बढ़ाया गया है।
उत्तराखण्ड के सृजन से लेकर अब तक भाजपा की सरकारों ने इस पर्वतीय प्रदेश के लिए दिल खोलकर, बिना नफा नुकसान की परवाह किये काम किया है। याद कीजिये उत्तराखण्ड का सृजन स्व. अटल जी ने ही किया था। यही नहीं प्रदेश में आज जो औद्योगिक ढांचा है उसके लिए अटल जी की सरकार ने ही विशेष पैकेज दिया था, हालांकि बदकिस्मती से कांग्रेस की सरकार ने इस विशेष पैकेज को खत्म कर दिया था। आज के दौर में भी मोदी जी का उत्तराखण्ड के प्रति लगाव किसी से छिपा नहीं है। ऑल वेदर रोड, पहाड़ पर रेल लाइन, केदारपुरी का कायाकल्प, ये सारे काम भाजपा की सरकारों द्वारा ही संभव थे। गैरसैंण को ग्रीष्म राजधानी घोषित करना भी इसी विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। 
मगर ये बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि कांग्रेस अब इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। कांग्रेस की सरकारों ने 10 साल राज किया लेकिन गैरसैंण पर कोई ठोस फैसला नहीं ले पाए, और जब भाजपा की सरकार ने ये ऐतिहासिक कदम उठाया तो कांग्रेस जनता को गुमराह करने लगी है। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस नेतृत्व से पूछता हूँ, आखिर जब सरकार में थे तब क्यों सोए रहे? तब आपने जनभावना का अपमान क्यों किया? सच तो ये है कि कांग्रेस चाहती है नहीं है कि गैरसैंण की तरफ कदम आगे बढ़ाए जायँ, हां इनके नेता ढोंग करने, धरना देने जरूर वहां पहुंच जाते हैं। और जब जनभावनाओं के सम्मान की बात आती है तो ये पीछे हट जाते हैं।

देना होगा बाजार मूल्य पर किराया, राज्य सरकार का अधिनियम अंसवैधानिक

हाईकोर्ट नैनीताल ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में पूर्व मुख्यमंत्रियों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधा देने वाले अधिनियम-2019 को अंसवैधानिक घोषित करते हुए उसे निरस्त कर दिया है। सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को अब बाजार भाव के हिसाब से किराया चुकाना होगा।
अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने बताया कि न्यायालय ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन मानते हुए यह निर्णय दिया। अधिवक्ता कोर्ट ने कहा कि अधिनियम के प्रावधान स्थापित नियमों का उल्लंघन करते हैं। न्यायालय ने अधिनियम को भारत के संविधान के अनुच्छेद 202 से 207 के उल्लंघन में पाया है। अब सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को बाजार मूल्य से किराए का भुगतान करना होगा।
कोर्ट ने कहा कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों के रूप में उन्हें दी गई अन्य सभी सुविधाओं के लिए खर्च किए गए धन की गणना करने और उसकी वसूली के लिए राज्य उत्तरदायी होगा। कोर्ट ने कहा कि अधिनियम के प्रावधान शक्तियों को अलग करने के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने 23 मार्च को मामले में सभी पक्षकारों को सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद मंगलवार को निर्णय सुनाया गया है।
मामले के अनुसार, देहरादून की रुलक संस्था ने राज्य सरकार के उस अध्यादेश को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी थी, जिसके द्वारा राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के किराए को बाजार रेट के आधार पर भुगतान करने से छूट दे दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सभी पूर्व सीएम पर करीब 15 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके अलावा, किराया करीब पौने तीन करोड़ है, जिसकी वसूली के आदेश कोर्ट ने पिछले वर्ष छह माह में करने के आदेश दिए थे।

क्या है अधिनियम
रूलक सामाजिक संस्था के चेयरपर्सन अवधेश कौशल की ओर से हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस पर कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से बकाया वसूलने के आदेश जारी किए थे। इस आदेश के खिलाफ पूर्व सीएम व महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और विजय बहुगुणा ने हाईकोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल की लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी नहीं सुनी और उन्हें पुराना बकाया चुकाने का आदेश जारी रखा।
इसमें भगत सिंह कोश्यारी ने बकाया चुकाने की हैसियत न होने की बात कही तो फिर कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि क्यों न उनकी संपत्ति की जांच करा ली जाए। हाईकोर्ट में जब सरकार तथ्यों और तर्कों के आधार पर कुछ न कर पाई तो भगत सिंह कोश्यारी के लिए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों का बकाया माफ करने और सुविधाएं जारी रखने के लिए अध्यादेश ले आए। अधिवक्ता की ओर से बताया गया कि कैबिनेट में गुपचुप निर्णय करके अध्यादेश को मंजूरी के लिए राजभवन भेज दिया गया था। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला सहित अन्य सुविधाएं देने के मामले में सरकार ने राज्य का एक्ट नहीं बनाया।
सरकार ने उत्तर प्रदेश का एक्ट लागू करना स्वीकार किया लेकिन उसे संशोधित नहीं किया। पिछले वर्ष कोर्ट में दिए गए हलफनामे में लागू एक्ट में लखनऊ का उल्लेख कर दिया, जबकि उत्तर प्रदेश के अधिनियम में साफ तौर पर अंकित था कि सुविधा सिर्फ लखनऊ में दी जा सकती है। इसलिए राज्य सरकार को यह स्वीकार करना पड़ा कि उत्तराखंड में इस संबंध में कोई अधिनियम प्रभावी नहीं है।
वहीं, अधिवक्ता ने बताया कि 1981 में यूपी में बने अधिनियम में साफ उल्लेख था कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों को पद पर बने रहने तक सरकारी आवास मुफ्त मिलेगा। पद से हटने के 15 दिन में उन्हें आवास खाली करना होगा। 1997 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस नियम में बदलाव कर कहा कि अब पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी आवास आवंटित किया जाएगा।
एक्ट में यह भी उल्लेख था कि आवास सिर्फ लखनऊ में ही दिया जाएगा, बाहर नहीं। 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड बनने के बाद यह नियम यहां निष्प्रभावी हो गया। राज्य सरकार ने यूपी के एक्ट को उत्तराखंड के लिए मोडिफाई नहीं किया लेकिन कोर्ट में बताया कि सरकार ने 2004 में लोकसेवकों को प्रतिमाह एक हजार रुपये किराये पर आवास देने के रूल्स बनाए थे। इसमें कहा गया कि ट्रांसफर होने के बाद अधिकतम तीन माह तक लोकसेवक आवंटित आवास में रह सकते हैं, फिर हर हाल में खाली करना होगा। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने बताया कि रूल्स सरकारी लोक सेवकों के लिए है, यह पूर्व मुख्यमंत्रियों पर लागू नहीं हो सकता।

सरकारी लैब में अभी 6133 सैंपलों की जांच जारी, तेजी से बढ़ रहे संक्रमित मरीज

प्रदेश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। अभी तक सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों को ऑरेंज जोन में शामिल किया था। लेकिन अब लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए सरकार ने नैनीताल को ऑरेंज से हटाकर रेड जोन में शामिल कर दिया है। वहीं, ऊधमसिंह नगर को ग्रीन जोन में शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, नैनीताल में अब तक करीब 260 मामले सामने आ चुके हैं। ऊधमसिंह नगर में संक्रमित मरीजों की संख्या 82 हो गई है। वहीं इसके बाद अब 11 जिले ऑरेंज जोन में शामिल हैं।
प्रदेशभर में रविवार को 158 मरीजों में कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। अपर सचिव स्वास्थ्य युगल किशोर पंत ने इसकी पुष्टि की है। वहीं, दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की एक महिला डॉक्टर भी संक्रमित मिलीं हैं। दून मेडिकल कॉलेज के डिप्टी एमएस और कोरोना के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. एनएस खत्री ने जानकारी दी। इसके साथ ही अब प्रदेश में सक्रमित मरीजों का आंकड़ा 907 पहुंच गया है। 
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, आज देहरादून में 49, हरिद्वार में 17, नैनीताल में 31, टिहरी में तीन, अल्मोड़ा में 18, चंपावत में चार, पौड़ी में छह, ऊधमसिंह नगर में 20, चमोली में दो, उत्तरकाशी में सात और रुद्रप्रयाग में एक संक्रमित केस मिला है। अभी भी प्रदेश में 692 एक्टिव केस हैं। इसके साथ ही अब नैनीताल को रेड जोन में शामिल कर दिया है। जबकि ऊधमसिंह नगर को ग्रीन जोन में शामिल किया गया है। अपर सचिव युगल किशोर पंत ने बताया कि 102 मरीज ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं। चार सरकारी लैब में अभी 6133 सैंपलों की जांच चल रही है। इनकी रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है।
उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण अभी सामुदायिक फैलाव के फेज में नहीं आया है। जितने भी पॉजिटिव केस आए हैं, उनकी ट्रैवल हिस्ट्री और कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग जारी है। ज्यादातर मामले बाहर से लौटे प्रवासियों के संक्रमित होने के आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग संक्रमण से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। मीडिया के माध्यम से उन्होंने जनता से अपील की है कि आने वाले दिनों में और अधिक अनुशासन बनाए रखने की जरूरत है। कहा कि धीरे-धीरे बाजार के खुलने में ढील दे रहे हैं, लेकिन लोगों को दुकानों में भीड़ एकत्रित नहीं होने देनी है।